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आत्मकथन

 

मेरा प्यारा भारत ,लोकतांत्रिक भारत, हिन्दुओं की मातृभूमि भारत, संसार के विभिन्न हिस्सों से बेघर हुए लोगों का सहारा भारत, सुलतानों, मुगलों और अंग्रेजों के आक्रमणों के कोढ़ का मारा भारत, मुस्लिम जेहादी आतंकवादियों द्वारा दिए गए व दिए जा रहे जख्मों से करहाता भारत, अपने जयचन्दों के विश्वासघात का मारा भारत आज फिर एक ऐसे नापाक हिन्दुविरोधी-देशविरोधी गिरोह के देश तोड़क षडयन्त्रों को झेल रहा है जो खुद को सेकुलर कहता है व भारतीय संस्कृति और सभ्यता की हर पहचान को मिटाने पर उतारू है ।

15 अगस्त 1947 में मुस्लिम जेहादी उन्माद के परिणामस्वरूप कांग्रेस द्वारा अखण्ड भारत का विभाजन करवाकर मुसलमानों के लिए अलग देश बनवा देने के बाद सब भारतीयों को एक उम्मीद जगी थी कि कांग्रेस की जिस मुस्लिमप्रस्त हिन्दुविरोधी राजनीति की बजह से अखण्ड भारत के टुकड़े हुए उस राजनीति से कांग्रेस हमेशा के लिए तौवा कर लेगी । मुहम्मदअली जिन्ना जैसे नेता कांग्रेस कभी दोवारा पैदा नहीं करेगी ।कभी दोवारा न कांग्रेस का अध्यक्ष कोई विदेशी अंग्रेज बनेगा न देश फिर किसी अंग्रेज का गुलाम होगा ।

लेकिन उस वक्त सब देशभक्त भारतीयों की उम्मीदों पर पानी फिर गया जब कांग्रेस के कुछ हिन्दुविरोधी नेताओं ने ईसाई देशों में प्राप्त शिक्षा के परिणामस्वरूप बनी गुलाम सोच को आगे बढ़ाते हुए देश को हिन्दुराष्ट्र घोषित करने का विरोध कर दिया, भारतीय संस्कृति और सभ्यता के प्रतीक परमपूजनीय भगवाध्वज को राष्ट्रीय ध्वज बनाने का विरोध कर दिया । मर्यादा पुर्षोतम भगवान श्री राम को भारत का आदर्श घोषित करने की जगह एक ने खुद को बापू तो दूसरे ने खुद को चाचा घोषित करते हुए देश के अन्दर एक ऐसी हिन्दुविरोधी विभाजनकारी राजनीति को जन्म दिया जिसके परिणाम स्वरूप आज सिर्फ 61 वर्ष बाद भारत फिर से उसी जगह पहुंच गया है जहां 1946 में था ।

विभाजन से सबक लेकर देश में कानून भारतीयों के लिए बनाने की जगह अंग्रेजों की “ फूट डालो और राज करो ” की नीति अपनाते हुए धर्म, संप्रदाय, क्षेत्र,भाषा और जाति के आधार पर बनाए गए जिसके परिणामस्वरूप देश में क्षेत्रीय, सांप्रदायिक, जाति आधारित दलों की एक ऐसी देशतोड़क राजनीति को जन्म दिया जो आज नासूर बन चुकी है ।

इन देशविरोधी-हिन्दुविरोधी दलों की हिन्दुविरोधी देशतोड़क नीतियों से प्रेरित होकर संसार के विभिन्न मुस्लिम व ईसाई देशों ने अपने पैसे के बल पर इन दलों में से अधिकतर नेताओं को खरीदकर व उन खरीदे हुए नेताओं के सहयोग से देश के अन्दर देशविरोधी मानवाधिकार संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं ,समाचार चैनलों, समाचार पत्रों , नौकरशाहों व राजनीतिक दलों का एक ऐसा गिरोह बनाने में सफलता हासिल की जो खुद को धर्मनिर्पेक्षता के चोले में छुपाकर हिन्दुविरोधी-देशविरोधी रास्ते पर आगे बढ़ते हुए देश को आर्थिक व सांस्कृतिक तौर तबाह करने पर तुला हुआ है ।

यह सेकुलर गिरोह वन्देमातरम् का विरोध करने वालों का तो साथ देता है पर उसी वन्देमातरम् का समर्थन व गुणगान करने वालों को सांप्रदायिक कहकर उन पर हमला बोलता है।

यह वो गिरोह है जो मुस्लिम जेहादी आतंकवादियों को कानून के शिकंजे से बचाने के लिए पोटा जैसे कानून हटाता है और मुस्लिम जेहादी आतंकवादियों के हमलों से बचने के लिए सचेत करने वाली साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर व सिमी जैसे संगठनों की गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए संघर्षशील सैनिक लैफ्टीनैंट कर्नल श्रीकांत पुरोहित जैसे देशभक्तों को जेल में बन्दकर उन पर मनघड़न्त आरोप लगाता है अत्याचार करता है ।

यह गिरोह आतंकवादियों के लिए मानवाधिकारों की बात करता है और राहुल राज जैसे सिरफरे नौजवान को सरेआम गोली से उड़ाता है ।

यह वो गिरोह है जो देशभक्त हिन्दुसंगठनों को अपना शत्रु मानकर हर वक्त उन पर हमला बोलता है और हजारों हिन्दुओं का खून बहाने वाले मुस्लिम जेहादी आतंकवादियों को अपना भाई बताता है उनको फांसी से बचाने के लिए उनकी फाइल दबाता है ।

यह गिरोह देश में किसी मुस्लिम जेहादी आतंकवादी या ईसाई धर्मांतरण के ठेकेदार के मारे जाने पर तो आसमान सिर पर उठा लेता है पर इन गद्दारों के हाथों कत्ल किय जा रहे हजारों हिन्दुओं के बारे में या तो मौन धारण कर लेता है या फिर तरह-तरह के बहाने बनाकर हिन्दुओं के कत्ल को सही ठहराने की दुष्टता करता है।

यह वही गिरोह है जो मुस्लिम जेहादी द्वारा बनाई गई भारत माता व दुर्गा माता की आपत्तिजनक पेंटिंगस को अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता बताता है पर उसी वक्त मुस्लिम जेहादी आतंकवाद की जड़ को दिखाते हजरत मुहमम्द के कार्टूनों का विरोध करता है।

हद तो तब हो जाती है जब ये गिरोह एक तरफ ईसाई पोप के मरने पर देश में तीन दिन के शोक की घोषणा करता है और दूसरी तरफ भारतीय संस्कृति और सभ्यता के आधार सतम्भ मर्यादा पुर्षोतम भगवान श्री राम के अस्तित्व को ही नकार देता है ।

यह वो गिरोह है जो बात तो धर्मनिर्पेक्षता की करता है पर बच्चों को मिलने वाली छात्रवृतियों व कर्ज से लेकर भारत के बजट तक को सांप्रदायिक आधार पर बांट देता है ।

अन्त में आप खुद सोचो कि जो गिरोह देश की खातिर वटाला हाऊस में शहीद होने वाले शहीद मोहन चन्द शर्मा व मुम्बई में शहीद होने वाले दर्जनों शहीदों का मान-सम्मान करने के बजाए उनका अपमान करने की दुष्टता करता है वो गिरोह देशभक्त लोगों का नेतृत्व करता है या गद्दारों का ?

इस सेकुलर गिरोह के राष्ट्रविरोधी-हिन्दुविरोधी षडयन्त्रों की ओर देश के राष्ट्रभक्त लोगों का ध्यान खींचना व इन षडयन्त्रों का पर्दाफास कर, गद्दार षडयन्त्रकारियों को उनके अंजाम तक पहुंचाकर अपने देश भारत को इन विश्वासघातियों के मकड़जाल से मुक्तकरवाकर फिर से राष्ट्रभक्ति की जवाला को सुलगाना ही अपनी इस पुस्तक धर्मनिर्पेक्षता बोले तो देशद्रोह का मूल उदेश्य है ।

इस पुस्तक की रचना उस वक्त शुरू हुई जब देश में मुस्लिम जेहादियों द्वारा जगह-जगह बम्मविस्फोट कर देशभक्त भारतीयों का लहू पानी की तरह बहाया जा रहा था व ये गठबन्धन मुस्लिम जेहादियों के षडयन्त्रों को छुपाने के लिए हर रोज नये बहाने गढ़ रहा था। सरकार देशवासियों की रक्षा करने के बजाए मुस्लिम जेहादी आतंकवादियों को अपना भाई बताकर इनका बचाव कर रही थी। इस पुस्तक के पहले भाग का कार्य 26 नवम्बर 2008 को बन्द कर दिया गया लेकिन उसी दिन शाम को एक बार फिर मुस्लिम जेहादियों ने मुम्बई पर हमला बोल दिया ।

सरकार के पिछले पांच वर्षों के आतंकवाद समर्थक निर्णयों का भयानक परिणाम देश की सारी जनता ने अपनी आंखों से देख लिया । हमें लगा कि इस घटना के बाद सरकार को अपनी बेबकूफी का एहसास होगा व सरकार अपनी सांप्रदायिक सोच त्याग कर देश के अन्दर छुपे गद्दारों को ढूंढ-ढूंढ कर मिटा देगी।

लेकिन ये जानकर बड़ी हैरानी हुई कि जिस वक्त सारा विपक्ष सरकार के पिछले पांच वर्ष के देशविरोधी निर्णयों को भुलाकर आतंकवादियों से निपटने के विषय पर सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रहा था ठीक उसी बक्त सरकार के ही मन्त्री ने पाकिस्तान की भाषा बोलकर मुम्वई हमले का दोष हिन्दुओं पर डालने का असफल प्रयास किया जिसका कई सांप्रदायिक सोच रखने वाले गद्दारों ने समर्थन किया ।

इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली बात यह थी कि युद्ध की इस घड़ी में भी कांग्रेस ने वर्तमान भारत के मुस्लिम जिहादी अबदुल रहमान अंतुले का साथ देकर सिद्ध कर दिया कि हिन्दुविरोधी कांग्रेस द्वारा मुहम्दअली जिन्ना पैदा करने की प्रक्रिया यथावत जारी है ।

यह पुस्तक किसी लेखक की कोई कृति नहीं वल्कि मीडिया व सेकुलर गिरोह द्वरा किए जा रहे देशविरोधी-हिन्दुविरोधी दुष्प्रचार से तंग आकर एक आम भारतीय द्वारा वयक्त की गई प्रतिक्रिया है । आप सब पाठकों से विनम्र प्रार्थना है कि इसे आराम से पढ़ें, इन देशद्रोहीयों को पहचानें व इनके षडयन्त्रों को समझें, अपनी पसंद के स्वाभिमानी देशभक्त संगठनों से जुड़ें या फिर जिस भी संगठन से जुड़ें उसे देशभक्त और स्वाभिमानी बनायें, अन्त में संगठित होकर इन देशविरोधी-हिन्दुविरोधी गद्दारों से भारत माता को मुक्त करवाकर एक स्वाभिमानी भारत का निर्माण करें।

प्रस्तावना

 

भारत में लगातार हो रहे आतंकवादी हमलों पर अनेकों पुस्तकें लिखी गई हैं ।परन्तु प्रस्तुत पुस्तक धर्मनिर्पेक्षता-वोले तो-देशद्रोह अपने आप में एक विशेष कृति है। भारतवर्ष के लिए आतंकवाद नया नहीं है इस आतंकवाद का सामना भारत 7वीं शताब्दी में भारत में प्रवेश करने वाले पहले मुस्लिम जेहादी आतंकवादी मुहम्दविन कासिम के समय से कर रहा है जिसका राक्षसी चेहरा औरंगजेब और बाबर के रूप में भारत ने देखा और सहा। ये मुस्लिम जेहादी हमला ही भारत में हर तरह के आतंकवाद की जड़ है । आज भारत में छोटी मोटी चोर बजारी व दंगे से लेकर अन्तराष्ट्रीय नसे के कारोबार व भारत में जाली मुद्रा के प्रसार तक के हर भारत विरोधी गैरकानूनी कारोबार के पीछे किसी न किसी मुस्लिम जेहादी का ही हाथ निकलता है । ये मुस्लिम जेहादी आतंकवाद भारत के कई विभाजन करवा चुका है हजारों मन्दिर तोड़ चुका है लाखों हिन्दुओं का खून बहा चुका है और आज भी बहा रहा है ।

किसी भी समाज में राक्षसों का जन्म लेना कोई नई बात नहीं है लेकिन समाज का उन राक्षसों के बचाब व समर्थन में खड़े होना विनाश का कारण बनता है यही सबकुछ आज मुस्लिम समाज के साथ हो रहा है एक तरफ अखण्ड भारत के हिन्दुओं वाले इस हिस्से में ये जेहादी मुस्लिम हिन्दुओं का खून बहा रहे हैं कभी कभार देशभक्त मुसलमानों पर भी हमला बोल रहे हैं तो दूसरी तरफ अखण्ड भारत के ही दूसरे हिस्सों पाकिस्तान व अफगानिस्तान में यही मुस्लिम जेहादी मुसलमानों का ही खून बहा रहे हैं ।

ये तो सनातन शांतिप्रिय संस्कृति के समर्थक हिन्दुओं की सहनशक्ति की इन्तहां है कि इन मुस्लिम ज्हादियों के शिकार हिन्दू अभी तक अपना संयम नहीं खोए हैं और मुस्लिम जेहादियों द्वारा चलाय जा रहे हिन्दू मिटाओ-हिन्दू भगाओ अभियान का जबाब उन्हीं के तरीके से नहीं दे रहे हैं । वरना आज तक न हिन्दुओं के कातिल मुस्लिम जेहादी बचते न उनके ठेकेदार भारत-विरोधी धर्मनिर्पेक्षतावादी ।

मुसलमानों को अगर मानवता के प्रति लेशमात्र भी समर्पण है तो इन्हें मिलजुलकर इस्लाम के नाम पर मार-काट मचा रहे इन मुस्लिम जेहादियों को यथाशीघ्र बिना कोई समय गवाय अपने आप मिटा देना चाहिए वरना इन मुस्लिम जेहादियों के हमलों से त्रस्त भारतीय जनता मुसलमानों में छुपे इन मुस्लिम जेहादियों को ढूंढ-ढूंढ कर मारने पर मजबूर होगी ।

इतिहास इस बात का साक्षी है कि जब-जब भी हिन्दुओं के अन्दर राक्षस पैदा हुए हैं हिन्दुओं ने खुद उन राक्षसों को जड़-मूल से मिटाया है परन्तु मुसलमानों ने इसके विपरीत न केवल मुसलमानों के अन्दर पैदा होने बाले राक्षसों को समर्थन दिया है बल्कि उन्हें जेहादी का दर्जा देकर, मदरसों व मस्जिदों को उनकी शरणगाह बनाकर अपने बच्चों को उन राक्षसों के नक्से कदम पर चलने के लिए बाध्य भी किया है जिसका परिणाम आज समस्त मुस्लिम समाज भारत के सिवा सारे संसार में भुक्त रहा है ।

मुस्लिम जेहादी राक्षसों के समर्थन में मुस्लिम समाज का खड़ा होना कोई नई बात नहीं है लेकिन हिन्दुओं द्वारा धर्मनिर्पेक्षता के नाम पर इन मुस्लिम जेहादी राक्षसों का समर्थन करना व उनको आगे बढ़ाना वाक्य ही चौंकाने वाला है। इससे भी ज्यादा चौंकाने वाला भारत में ऐसे राष्ट्रविरोधी मीडिया, मानवाधिकार संगठनों, लेखकों, समाजिक कार्यकर्ताओं व नौकरसाहों का पनपना है जो हर वक्त इन मुस्लिम जेहादी आंतकवादियों के बचाब में हर दिन नया कारण ढूंढते नजर आते हैं और हर मुस्लिम जेहादी आतंकवादी हमले के लिए हिन्दुओं को दोषी ठहराते हैं । धर्मनिर्पेक्षता की आड़ में चल रहे इस मानवता विरोधी षडयन्त्र को आज बेनकाब कर जड़मूल से समाप्त नहीं किया गया तो आने बाली पीढ़ियां वर्तमान भारतीय समाज को कभी माफ नहीं कर पांयेगी ।

आज राजनितीक दलों का खुद को धर्मनिर्पेक्ष कहलबाने वाला गठबन्धन भारत को अफगानीस्तान बनाने की राह पर अग्रसर है ये गठबन्धन जिस तरह हिन्दूत्वनिष्ठ-राष्ट्रबादी संगठनों को कमजोर करने के लिए, मुस्लिम जेहादियों के लिय किये जाने बाले कार्यों को मुसलमानो के लिए किए जाने वाले कार्य बताता है व मुस्लिम जेहादी आतंकवादियों के विरूद्ध सुरक्षबलों द्वारा की जाने बाली कार्यवाही को मुसलमानों के बिरूध कार्यवाही बताता है वो बिल्कुल वैसे ही कदम हैं जैसे कदम पाकिस्तान में समय-समय पर आने वाली सरकारों ने व अफगानीस्तान में अमेरिका ने क्रमशः मुस्लिम जेहादीयों को हिन्दूस्थान पर हमला करने व रूस को भगाने के लिये उठाय जिसके परिणामस्वरूप आज वही जेहादी पाकिस्तान व संसार के लिए भस्मासुर साबित हो रहे हैं ।

भारत पर वर्तमान में इस आतंकबादी हमले के अतिरिक्त सांस्कृतिक हमला भी बोला जा रहा है जो इस आतंकबादी हमले से कहीं ज्यादा भयानक व खतरनाक है । इस सांस्कृतिक हमले का नेतृत्व ईटालियन ईसाई एंटोनियो माइनो मारियो अपने इस देशविरोधी हिन्दूविरोधी जेहाद व धर्मांतरण समर्थक धर्मनिर्पेक्ष गठवन्धन के सहयोग से कर रही है ।

जो भारतीय संस्कृति और सभ्यता 900 बर्ष के मुस्लिम जेहादी आंतकवादियों के गुलामीकाल व 300 बर्ष के धर्मांतरण के ठेकेदार ईसाई सम्राज्यवादियों के गुलामी काल में अपने आप को अपने राष्ट्रभक्त बलिदानियों के बलिदानों व अपनी आन्तरिक मजबूती के बल पर अपने आप को बचाने में समर्थ रही वो ही भारतीय संस्कृति पिछले 50 वर्षों के हिन्दूबिरोधियों व गद्दारों के सांस्कृतिक हमलों से छिन्न-भिन्न होती नजर आ रही है क्योंकि इस 1200 वर्षों के गुलामीकाल में समस्त भारतीय समाज बोले तो हिन्दू समाज उन अत्याचारियों व विदेशियों के षडयन्त्रों के प्रति जागरूक था उनसे लोहा लेने को तत्पर था।

लेकिन वही हिन्दू समाज धर्मनिर्पेक्षता के चोले में छुपे अपने ही राष्ट्र भारत के हिन्दूविरोधी शत्रुओं को पिछले साठ वर्षों से इन गद्दारों द्वारा योजनाबद्ध भारतीय संस्कृति और सभ्यता पर किए जा रहे हमलों के बाबजूद इन देशद्रोहियों को पहचाने में असमर्थ रहा परिणामस्वरूप हिन्दू समाज ने अपूर्णीय क्षति उठाई ।इस देशविरोधी आतंकवाद समर्थक धर्मनिर्पेक्ष गठबन्धन की असलियत उस वक्त सामने आई जब इसने भारतीय संस्कृति और सभ्यता के अधार सतम्भ मर्यादा पुर्षोत्तम भगवान श्री राम के अस्तित्व को ही नकार दिया । जिसके परिणाम स्वरूप हिन्दुओं को ये सपष्ट हो गया कि क्यों ये गठबन्धन हर वक्त हिन्दू संगठनों पर हमला करता है व मुस्लिम जेहादी आतंकवादियों को अपना भाई बताता है।

इस देशद्रोही गठबन्धन की असलियत को उजागर करना ही इस पुस्तक का मूल उद्देश्य है।

नापाक सेकुलर गिरोह के देशविरोधी षडयन्त्र

 

भारत में आज बहुत ही खतरनाक स्थिति बनती जा रही है अपने हिन्दूराष्ट्र भारत में विदेशी संस्कृति से प्रेरित मीडिया, खुद को सैकुलर कहलवाने वाले राजनीतिक दलों, बिके हुए देशद्रोही मानवाधिकार संगठनों, खुद को सामाजिक कार्यकर्त्ता कहलवाने वाले गद्दारों, आतंकवादियों व परजीवी हिन्दुविरोधी लेखकों का एक ऐसा सेकुलर गिरोह बन चुका है जो भारत को सांस्कृतिक व आर्थिक रूप से तबाह करने पर आमादा है। इस गिरोह को हर उस बात से नफरत है जिसमें भारतीय संस्कृति व राष्ट्रवाद का जरा सा भी अंश शेष है । यह गिरोह हर उस बात का समर्थन करता है जो देशद्रोही कहते या करते हैं । यह गिरोह देश की रक्षा के लिए जान खतरे में डालकर जिहादी आतंकवादियों का सामना करने वाले देशभक्त बहादुरों से अपराधियों जैसा व्यवहार कर रहा है और न जानें उनके लिए क्या-क्या अपशब्द प्रयोग रहा है। देशद्रोही जिहादियों व अन्य आतंकवादियों को बेचारा गरीब अनपढ़ व सत्ताया हुआ बताकर हीरो बनाता जा रहा है । सेवा के नाम पर छल कपट और अवैध धन का उपयोग कर भोले-भाले बनवासी हिन्दुओं को गुमराह कर उनमें असभ्य पशुतुल्य विदेशी सोच का संचार कर हिन्दुविरोधी-राष्ट्रविरोधी मानसिकता का निर्माण करने वाले धर्मान्तरण के ठेकेदारों को हर तरह का सहयोग देकर देश की आत्मा हिन्दू संस्कृति को तार-तार करने में जुटा है। यह गिरोह एक ऐसा तानाबाना बुन चुका है जिसे हर झूठ को सच व हर सच को झूठ प्रचारित करने में महारत हासिल है।

हम दाबे के साथ कह सकते हैं कि इस हिन्दुविरोधी देशद्रोही गिरोह की क्रियाप्रणाली हमेशा जिहाद व धर्मांतरण समर्थक रही है इसमें भी खतरनाक कड़बी सच्चाई यह है कि इस हिन्दुविरोधी देशद्रोही गिरोह ने कभी भारतीय संस्कृति के प्रतीकों का सम्मान करने वाले देशभक्त मुसलमानों व ईसाईयों जो खुद को हिन्दूसमाज का अभिन्न अंग व भारत को अपनी मां मानते हैं को न कभी प्रोत्साहन दिया न ही कभी उनका भला चाहा ।

इस हिन्दुविरोधी देशद्रोही गिरोह को अगर किसी की चिन्ता है तो उन जिहादियों व धर्मांतरण के ठेकेदारों की जो अपनी आवादी बढ़ाकर ,धर्मांतरण करवाकर ,शान्तिप्रिय हिन्दुओं का खून बहाकर इस हिन्दूराष्ट्र भारत के फिर से टुकड़े कर इस्लामिक व ईसाई राज्य वनाने का षड़यन्त्र पूरा करने के लिए इस देशद्रोही सरकार का समर्थन पाकर अति उत्साहित होकर आगे बढ़ रहे हैं ।

देश के हिन्दुबहुल क्षेत्रों में लगातार हो रहे बम्बविस्फोट व धर्मांतरण पर जोर इसी षड़यन्त्र को आगे बढाने का हिस्सा है। सरकार द्वारा मर्यादापुर्षोत्तम भगवान श्री राम के अस्तित्व को नकारना, आतंकवादविरोधी कानून पोटा को हटाना, अफजल का समर्थन करना, धर्मांतरण विरोधी कानून न बनाना और अपनी जान जोखिम में डालकर आतंकवादियों को पकड़ने व मारगिराने वाले सेना पुलिस अर्धसैनिकबलों के जवानों को अपमानित करना व जेल में डालना यही दर्शाता है कि ये सरकार जिहादियों व धर्मान्तरण के ठेकेदारों के देशतोड़क षड्यन्त्रों को आगे बढाने के लिए कितनी आतुर है व किस हद तक गिर सकती है ।

इन सब षड्यन्त्रों का विरोध करने वाले हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों पर सरकार द्वारा बोला जा रहा हमला व इनको बदनाम करने के लिए आए दिन रचे जा रहे षड्यन्त्र सरकार की इसी मानसिकता का परिचायक है वैसे भी आप इतना तो समझ ही सकते हैं कि जो सरकार एक विदेशी इटालिएन अंग्रेज एंटोनिया माइनो मारियो की गुलाम हो वो ये सब नहीं करेगी तो और क्या करेगी ?

जरा सोचो जिन जिहादियों ने भारतीय संस्कृति के प्रतीक दर्जनों मन्दिरों को तोड़ा, हजारों हिन्दुओं को चुन चुन कर या हिन्दुबहुल क्षेत्रों में बम्बविस्फोट करके मौत के घाट उतारा, प्रजातन्त्र के सबसे बडे मन्दिर संसद भवन तक पर हमला किया, तो भला ऐसा क्या है कि इन जिहादियों ने इस गिरोह के एक भी केन्द्र पर आज तक एक भी हमला नहीं किया ?

क्योंकि मुस्लिम जिहादी इस गिरोह के देशविरोधी-हिन्दुविरोधी चरित्र से अच्छी तरह परिचित है और आतंकवादी, देशविरोधी-हिन्दुविरोधी पर हमला करें यह कैसे हो सकता है ?

वैसे तो आप समझ ही गये होंगे कि हम हिन्दूविरोधियों के किस देशद्रोही गिरोह की बात कर रहे हैं और इस में कौन कौन हैं पर फिर भी कल कोई यह न कहे कि हिन्दू कार्यकर्ता देशद्रोहियों का नाम लिखने से डर गया इसलिए हम इनके बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे । यह देशद्रोही हिन्दुविरोधी गिरोह अपने आपको सैकुलर कहलवाना पसन्द करता है जबकि सच्चाई यह है कि यह वर्तमान भारत का सबसे ज्यादा हिंसात्मक व सांप्रदायिक गिरोह है ।

इसका एक सदस्य कांग्रेस, धर्म के नाम पर देश के विभाजन को स्वीकार कर चुकी है बचे हुए हिन्दू भारत में कानून भारतीयों की जगह भाषा, जाति, क्षेत्र, संप्रदाय के आधार पर बनाकर व अल्पसंख्यकवाद के नाम पर जिहादी आतंकवादियों व धर्मांतरण के ठेकेदारों का समर्थन कर अगले विभाजन की नींब रख चुकी है।

जबकि इसका दूसरा घटक मुस्लिमलीग वो है जिसने धर्म के नाम पर अलग देश पाकिस्तान मांगा और अलगाववादी जिहादियों के लिए आज भी प्रेरणा स्रोत है।

जबकि तीसरा घटक लैफ्ट है जिसने 1962 के युद्ध में चीन का साथ दिया तथा जिसके द्वारा चलाई जा रही हिंसा से बेकसूर देशभक्त हिन्दुओं का कत्ल किया जा रहा है जो हर वक्त भारतीय संस्कृति सभ्यता का अपमान करता है। हिन्दुओं का हर स्तर पर विरोध करता है। भारत की अखण्डता का विरोध करता है। माओवादी व नक्सली हिंस्सा का सूत्रधार है। मार्च 2006 में जिहादियों के साथ मिलकर संसार में अमेरिका द्वारा मारे जा रहे मुस्लिम आतंकवादीयों के विरोध में प्रदर्शन करवाता है व मुस्लिम गुंडों से हिन्दुओं पर हमले करवाता है।

इसका चौथा व पाँचवां घटक समाजवादी पार्टी व राष्ट्रीय जनता दल वे हैं जो सिमी उर्फ इंडियन मुझाहिदीन जैसे आतंकवादी गैंग पर प्रतिबन्ध लगाने का विरोध करते हैं मुस्लिम आतंकवादियों को खुश करने के लिए हिन्दुओं का खून बहाने का समर्थन करते हैं तथा राष्ट्रवादी हिन्दूसंगठनों पर प्रतिबंध की मांग कर खुद को बाबर की औलाद सिद्ध करते हैं।

इस देशद्रोही हिन्दुविरोधी गिरोह का सातवां घटक वो है जो इनके जैसा देशद्रोही दिखने के लिए बंगलादेशी घुसपैठियों को भारत की नागरिकता देने की मांग करता है l

जरा सोचो अगर ये घटक देशभक्त होते तो भला ऐसे देशद्रोही काम करते ? कभी नहीं

इसके अतिरिक्त इस सेकुलर गिरोह के कई और सहयोगी हैं जो अभी राष्ट्रवाद और देशद्रोह में से किसी एक सपष्ट दिशा में नहीं हैं उनके द्वारा भविष्य में किए जाने वाले काम ही यह तय करेंगे कि वो हर हाल में इस देशविरोधी-हिन्दुविरोधी सेकुलर गिरोह का साथ देते हैं या इस गिरोह के देशविरोधी-हिन्दुविरोधी कामों से तंग आकर राष्ट्रवाद की ओर मुड़ जाते हैं।

अगर ये गिरोह किसी ईसाई या मुस्लिम बहुल देश में होता और ठीक इसी तरह ईसाईयों या मुसलमानों के विरोध में काम करता जैसे हिन्दुओं के विरोध में कर रहा है तो या तो ऐसे गिरोह के नेताओं को फाँसी पर लटका दिया जाता या लोग पत्थरों से पीट-पीट कर इनकी हत्या कर देते पर ये सब हो रहा है शान्तिप्रिय हिन्दुओं की मातृ भूमि भारत में और वो भी हिन्दुओं को यहां से खदेड़ने के लिए फिर भी देश के गद्दार अभी तक जिन्दा हैं व अपनी मां का सौदा सरे बाज़ार कर रहे हैं !

पिछले दिनों इस देशद्रोही गिरोह ने सोराबुदीन के बहाने यह सिद्ध करने का प्रयत्न किया कि भारत में निर्दोष मुसलमानों पर अत्याचार किए जा रहे हैं पर सच्चाई यह है कि सोराबुदीन एक जिहादी आतंकवादी था न कि कोई सूफी सन्त । इस आतंकवादी के घर से दर्जनों एके-47 व हैंडग्रनेड मिले थे। जरा सोचो इन हथियारों का इस्तेमाल किसके विरूद्ध किया जाना था स्पष्ट है हिन्दुओं के विरूद्ध। जिन जवानों ने इस आतंकवादी को मारा उन्होनें सैंकडों निर्दोष हिन्दुओं के जानमाल की रक्षा की। अगर यह गिरोह ऐसे दुर्दाँत आतंकवादी को बेचारा निर्दोष मुसलमान कहकर प्रचारित करता है तो यह इस देशद्रोही हिन्दुविरोधी गिरोह की तालिबानी मानसिकता नहीं तो और क्या है ?

हमें तो कई बार ऐसा लगता है जैसे मानो इस गिरोह से जुड़े लोग भारत माता को अपनी मातृ भूमि ही नहीं मानते अगर ये भारत माता को अपनी मातृ भूमि मानते होते तो देशद्रोही जिहादियों के समर्थन में यूँ न खड़े होते वेचारा, अनपढ़, सत्ताया हुआ कहकर उनके द्वारा बम्बविस्फोटों में बहाये गए निर्दोषों के लहू को जायज ठहराने का नीच प्रयास न करते, न ही मुठभेड़ों में मारे गये देशद्रोही जिहादियों के मामले उछाल कर सुरक्षाबलों को बदनाम करने का घिनौना अपराध करते !

क्या इस गिरोह ने कभी कश्मीर घाटी में मुस्लिम जिहादियों द्वारा चलाए गए हिन्दू मिटाओ हिन्दू भगाओ अभियान(जिसमें हजारों हिन्दुओं को हलाल कर मारा गया व लाखों हिन्दुओं को अपना घरबार छोड़कर भागने को मजबूर किया गया, जिस जिहाद के दायरे में अब सारे हिन्दुस्थान को लेने का प्रयास हिन्दुओं के धार्मिकस्थलों व हिन्दुबहुल क्षेत्रों में किए जा रहे बम्बविस्फोटों से स्पष्ट दिख रहा है)के विरोध में कभी इतनी प्रखर आवाज उठाई जितनी ये लोग पिछले छः वर्षो से गुजरात के बारे में उठाए हुए हैं वो भी तब जब गुजरात में पहले हमला गोधरा में रेल के डिब्बे में अठाबन हिन्दुओं को जिन्दा जलाकर व 43 को घायल कर जिहादी मानसिकता वाले मुसलमानों ने किया था । बाद में हिन्दुओं द्वारा आत्मरक्षा में प्रतिक्रियास्वरूप हुई हिंसा में उनके समर्थक व दुर्घटनाबस कुछ आम मुसलमान व हिन्दू भी मारे गये थे किसी ने यह कहने की जहमत न उठाई कि अगर मुसलमान हिन्दुओं पर हमला न करते, शान्तिप्रिय हिन्दुओं को जिन्दा न जलाते, तो न दंगे होते न कोई मरता ।

क्या आपने कभी इस गिरोह को हर रोज शहीद हो रहे सुरक्षाबलों के जवानों व आए दिन बहाए जा रहे निर्दोष हिन्दुओं के खून के विरोध में आवाज उठाते हुए देखा ?

क्या शहीद हुए जवानों व हिन्दुओं के परिवारों के सामने आ रही विपत्तियों को इतने जोर-शोर से उठाते हुए देखा ?

जितने जोर-शोर से ये शान्तिप्रिय हिन्दुओं का खून बहाने वाले जिहादियों के लिए उठाते हैं नहीं न, क्यों ?

क्योंकि इस देशद्रोही गिरोह को तो चिन्ता सिर्फ आतंकवादियों व उनके परिवारों की है न कि देश की रक्षा की खातिर बलिदान होने वाले जवानों व हिन्दुओं की ।

कश्मीर में कुछ महीने पहले आपने देखा कि किस तरह जिहादियों के शवों को जमीन से खोद कर निकालते हुए दिखाया गया और कहा गया कि ये जिहादी आतंकवादी निर्दोष हैं घन्टों इसका प्रसारण किया जाता रहा वो भी लाइब । जिहादियों को आम मुसलमान बताकर उनके समर्थन में प्रदर्शन करते हुए दिखाया गया । जिन देशभक्त सुरक्षाबलों के जवानों ने अपने प्राणों की परवाह न करते हुए इन आतंकवादियों को मार गिराया, को वहां की देशद्रोही सरकार के साथ मिलकर जेल में डलबा दिया गया । जिस सरकार का मुखिया माननीय सर्वोच्च न्यायालय से फाँसी की सजा प्राप्त देशद्रोही जिहादी आँतकतवादी को बचाने का प्रयत्न करता है वो सरकार देशद्रोहियों की नहीं तो और किसकी है ?

उन्हीं दिनों रजौरी में जिहादियों ने छः हिन्दुओं को हलाल किया इससे पहले 2 मई 2006 को डोडा व उधमपुर में 36 हिन्दुओं को एक साथ जिहादी आतंकवादियों द्वारा कत्ल किया गया तो भला इस देशद्रोही मीडिया ने कितने घंटे सीधा प्रसारण किया ? कितने अनाथ बच्चों जो जिहादी आतंकवादियों की वजह से लावारिस हो गए के साक्षात्कार दिखाए ? कितनी महिलाओं जिनके सुहाग इन मुस्लिम जिहादी आतंकवादियों ने उजाड़ दिए, जिनके छोटे-छोटे बच्चे हलाल कर दिए गए, का दुख इस हिन्दुविरोधी देशद्रोही मीडिया ने दिखाया ।

गुजरात में कुछ महीने पहले एक मुस्लिम जिहादी लड़की इसरत जहां मारी गई जिसके बारे में इस देशद्रोही मीडिया व जिहाद समर्थकों ने सारी दुनिया में अफवाह फैला दी कि यह लड़की निर्दोष है और गुजरात की सरकार मुस्लिम विरोधी है इसलिए इसे पुलिस ने मार गिराया । इस मुस्लिम जिहादी लड़की के जनाजे में जिहाद समर्थक कांग्रेसियों व समाजवादियों ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया । कुछ चैनलों ने इसका सीधा प्रसारण किया । जैसे अपने देशद्रोही चरित्र को दिखाने के लिए ये काफी न हो महाराष्ट्र की कांग्रेस सरकार ने मुस्लिम जिहादी लड़की की मौत पर मुआब्जा भी दिया । क्योंकि यह लड़की महाराष्ट्र की थी इस लिए जांच का जिम्मा महाराष्ट्र पुलिस के विशेष दल(ए टी एस) को सौंपा गया। गहन छानबीन के बाद यह पाया गया कि यह लड़की आतंकवादी थी । जिहादी संगठनों ने खुद इसे अपना सहयोगी बताकर उसे इस्लाम के लिए शहीद बताया ।

अब जरा आप ही सोचो कि खुद को सैकुलर कहलवाने वाला यह देशद्रोही राजनैतिक दलों व गद्दार मीडिया का गिरोह जिहादी आतंकवादियों का बार-बार उनके मुस्लिम होने के नाम पर समर्थन कर सब के सब मुस्लिमों पर आतंकवादी होने का ठप्पा लगा रहा है कि नहीं ?

पिछले सोलह वर्षों से यह देशद्रोही गिरोह एक झूठ बार-बार बड़ी बेशर्मी से दोहराए जा रहा है कि बाबरी मस्जिद गिरा दी । हम इस देशद्रोही गिरोह की जानकारी के लिए यह वता दें कि 1992 में हिन्दूकार्यकर्त्ताओं ने कारसेवा श्री राम मन्दिर के जीर्णोद्धार के लिए की थी न कि किसी मस्जिद को गिराने के लिए अगर भरोसा न हो तो अपने सहयोगी कांग्रेस से पता कर लें कि 1986 में कांग्रेस सरकार के प्रधानमन्त्री स्वर्गीय राजीव जी ने जिस पूजास्थल पर लगा ताला खुलवाया था व पूजा की थी वो मन्दिर था या मस्जिद ? हमें तो हैरानी होती है कि जिस मन्दिर में पूजा होती थी वो गिरने के बाद इन हिन्दू-विरोधियों के लिए मस्जिद कैसे हो गई ?

वैसे भी इस देशद्रोही गिरोह व उसके सहयोगियों को छोड़ कर बच्चा- बच्चा जानता है कि अयोध्या भगवान राम जी की जन्मभूमि है। जहां पर आक्रांता बाबर के शासन से पहले भगवान राम जी का भव्य मन्दिर था जिसके ऊपर के हिस्से को, जिहादी बाबर के आदेश से उसके सेनापति मीरबाकी ने, मस्जिदनुमा बनवा दिया था । जिस मस्जिदनुमा ढांचे में कभी नमाज तक अता नहीं की गई भला उस ढांचे को कोई विवेकशील व्यक्ति मस्जिद कैसे कह सकता है ? हम तो चाहेंगे कि यह गिरोह देश को बताए कि मक्का मदीना में कितने मन्दिर या चर्च हैं ?

एन डी ए की सरकार के दौरान भारत यात्रा पर आए ईरान के धार्मिक प्रमुख खातमी जी ने स्पष्ट कहा “ जिस स्थान पर एक बार भी पूजा की गई हो उसे किसी भी स्थिति में मस्जिद नहीं कहा जा सकता । अगर इतना काफी न हो तो यह देशद्रोही हिन्दुविरोधी गिरोह यह बता दे कि अगर पूर्वजों की निशानी पर कोई आक्रमणकारी कब्जा कर ले तो उसे छुड़बाना बच्चों का फर्ज है कि नहीं ?

अन्त में इन जयचन्द की सन्तानों से हम इतना ही कहेंगे कि अगर हो सके तो सच का सामना करना सीखो और सच यही है कि अयोध्या में भगवान राम जी का मन्दिर था, है और रहेगा चाहे ये हिन्दुविरोधी जितना मर्जी जोर से चिल्लाते रहें सच तो सच है इसे दबाया नहीं जा सकता ।

अगर इस गिरोह में जरा सी भी इन्सानियत नाम की चीज या फिर माननीय न्यायालय के प्रति जरा सा भी सम्मान बाकी है तो इसे चाहिए कि माननीय न्यायालय का फैसला आने तक यथास्थिति का पालन करते हुए मन्दिर शब्द का प्रयोग करे या फिर अपना जहरीला प्रचार बन्द रखे अन्यथा माननीय न्यायालय का फैसला सत्य के पक्ष में आने पर होने वाले जान माल के नुकसान की जिम्मेवारी लेने के लिए तैयार रहे !

क्योंकि इस देशद्रोही हिन्दुविरोधी गिरोह का झूठा और जहरीला प्रचार न केवल मुस्लिम जिहादियों को आम मुसलमानों को भड़काने का मसाला देता है पर साथ ही विदेशों में इस झूठ को फैलाकर धन इकट्ठा करने का मौका भी देता है। उसी धन से हथियार खरीद कर हिन्दुओं को शहीद किया जाता है।

हो सकता है उसी धन का कुछ हिस्सा शायद इस देशद्रोही हिन्दुविरोधी गिरोह की जेब में भी जाता हो वरना ऐसा कैसे हो सकता है कि यह गिरोह शान्तिप्रिय को हिंसक, देशभक्त को देशद्रोही, सर्वधर्मसमभाव के जन्मदाता पोषक व समर्थक शान्तिप्रिय हिन्दुओं को सांप्रदायिक व आतंकवादी सिद्ध करने का बार-बार असफल प्रयत्न करता है और बेनकाब होता जाता है। इनका यह जहरीला प्रचार कहीं न कहीं शान्तिप्रिय आस्तिक हिन्दुओं को भी उत्तेजित करता है। माना के हिन्दू शांतिप्रिय है सनातन में विश्वास रखता है पर हर बात की एक हद होती है !

मुस्लिम जाहादियों द्वारा तोड़ा गया शिबलिंग

ये लेख लिखना हमनें तब शुरु किया था जब यह घर्मनिर्पेक्ष गिरोह मुस्लिम जिहादी आतंकवादी संगठन सिमी उर्फ इंडियन मुझाहिदीन का बचाव कर आम मुसलमानों को भड़काकर इस आतंकवादी संगठन के साथ खड़े होने के लिए प्रेरित कर रहा था। जिसका परिणाम बाटाला हाऊस मुठभेड़ के बाद जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के उपकुलपति के नेतृत्व में देशद्रोही मुस्लिम आतंकवादियों के समर्थन में निकाली गई रैली के रूप में देखने को मिला । इस विश्वविद्यालय के जिहादियों के साथ सम्बन्धों की जांच भारतीय सेना से करवाई जानी चाहिए ।

हमें ये भी जानकारी मिली है कि इस विश्वविद्यालय को सब मुस्लिम आतंकवादियों के गढ़ साउदी अरब से भी आर्थिक सहायता मिलती है। अगर ये सत्य है फिर तो यह स्पष्ट है कि ये विश्वविद्यालय मुस्लिम आतंकवादियों को अपने यहां शरण देता है जो एक तरह से भारत के विरूद्ध युद्ध की तैयारी जैसा है । वैसे भी हम इन सैकुलर गद्दारों से जानना चाहेंगे कि क्या एक जिहादी देश के पैसे से चल रहे विश्वविद्यालय द्वारा मुस्लिम आतंकवादियों का समर्थन करना देशद्रोह नहीं तो और क्या है ?

जागो ! हिन्दू जागो !

बाद में ये सैकुलर गिरोह खुद इन देशद्रोही मुस्लिम जिहादी आतंकवादियों के समर्थन में उत्तर आया और शहीद मोहन चन्द शर्मा जी के नेतृत्व में पुलिस जवानों की बहादुरी और बलिदान को गाली-गलौच करते हुए न्यायिक जांच की मांग करने लगा।

यह वही गिरोह है जिसके नेतृत्व में सारे भारत में वन्देमातरम् का गान करने का फैसला किया गया लेकिन मुठीभर देशद्रोही मुस्लिम आतंकवादियों द्वारा वन्देमातरम् का विरोध इस आधार पर किए जाने पर कि वन्देमातरम् का गान उनकी जिहादी मानसिकता के विरूद्ध है। इस गिरोह की सरकार ने वन्देमातरम् गाने का फैसला वापिस लेते हुए यह कह दिया कि जिसको गाना है वो गाए जिसको नहीं गाना है वो न गाए।

· इस फैसले से एक तो राष्ट्रगीत का अपमान किया गया !

· दूसरे देशद्रोही मुस्लिम आतंकवादियों का हौंसला बढ़ाया गया !

· तीसरा आम मुसलमान को वन्देमातरम् का विरोधी घोषित कर दिया !

· जब ये देशविरोधी मानसिकता वाले देशद्रोही परिवार नियोजन जैसे कार्यक्रमों का विरोध करते हैं और अधिक से अधिक बच्चे पैदा कर देश के इस्लामीकरण की बात करते हैं तो ये सैकुलर गिरोह आम देशभक्त मुसलमान को परिवार नियोजन जैसे कार्यक्रमों के लाभ बताकर उसके साथ खड़ा होने के बजाए जिहादी मानसिकता वाले देशद्रोहियों का साथ देता है और परिवार नियोजन जैसे कार्यक्रमों का विरोध करता है।

परिवार नियोजन का समर्थन करने वालों को सांप्रदायिक कहकर आम देशभक्त मुसलमानों को डराकर जिहादी मानसिकता वाले देशद्रोहियों का साथ देने के लिए मजबूर करता है फिर मुसलमानों की गरीबी का ढिंढोरा पीटने के लिए सच्चर कमेटी बनाता है

अब इस देशद्रोही हिन्दुविरोधी सैकुलर गिरोह को कौन समझाये कि बिना परिवार नियोजन के विकास सम्भव नहीं।

· चौथा मुठीभर अलगावबादी मानसिकता वाले सिरफिरों द्वारा वन्देमातरम् व परिवार नियोजन के विरोध को सब मुसलमानों की राय बताकर सब के सब मुसलमानों पर देशद्रोही होने का लैबल चिपका दिया ।

अब आप ही सोचो कि यह गिरोह देशद्रोही मुस्लिम आतंकवादियों का समर्थक है या आम देशभक्त मुसलमान का ?

हमारे विचार में यह गिरोह सिर्फ देशद्रोही मुस्लिम आतंकवादियों का समर्थक है न कि आम देशभक्त मुसलमान का क्योंकि यह गिरोह हर तरह से आम देशभक्त मुसलमान का नुकसान ही कर रहा है।

एक तरफ यह देशद्रोही गिरोह मुहम्मद अफजल, सोराबुदीन व आतिफ जैसे देशद्रोही मुस्लिम आतंकवादियों का समर्थन कर आम देशभक्त मुसलमानों के बच्चों को साफ संदेश दे रहा है कि तुम आतंकवादी बनो सारा सैकुलर बोले तो देशद्रोही गिरोह आपका सुरक्षा कवच बनकर खड़ा है !

दूसरी तरफ बहुत सी मस्जिदों व मदरसों पर इस अलगावबादी मानसिकता वाले आतंकवादियों के कब्जे की वजह से इस्लाम में ब्यापत बुराईयों को समाप्त करने के बजाए उल्टा उनका समर्थन कर इन बुराईयों को बढाबा देकर आम देशभक्त मुसलमानों के बच्चों व देश को एक ऐसे गर्त में धकेलता चला जा रहा है जिसका परिणाम अफगानिस्तान व पाकिस्तान के कबाइली इलाकों जैसी जाहलिएत है न कि जन्नत जो कि ये जिहादी मानसिकता वाले आतंकवादी इस गिरोह की सहायता से प्रचारित कर रहे हैं।

अगर इस सेकुलर गिरोह का ये आतंकवाद प्रेम व हिन्दूविरोध इसी तरह जारी रहा तो वो दिन दूर नहीं जब भारत में भी अफगानीस्तान जैसे हालात वन जायेंगे और हर जगह तालिबान ही नजर आयेंगे।

अगर इन्हें आम मुसलमान की चिन्ता होती तो ये अल्पसंख्यकवाद व धर्मनिर्पेक्षता के बहाने देशद्रोही मुस्लिम जिहादी आतंकवादियों का समर्थन कर व शान्तिप्रिय हिन्दुओं और उनके राष्ट्रवादी संगठनों का खौफ दिखाकर आम मुसलमान को राष्ट्र की मुख्यधारा से काटने का यूँ प्रयत्न न करते बल्कि इस सत्य का एहसास करवाते कि वेशक दोनों की पूजा-पद्धति अलग-अलग है पर दोनों के पूर्वज एक ही हैं ।

क्योंकि आक्रमणकारी जिहादियों के साथ तो कुछ गिनेचुने जिहादी ही आए थे। आम मुसलमान वो परावर्तित हिन्दू हैं जो औरंगजेब और बाबर जैसे राक्षसों के अत्याचारों से तंग आकर इस्लाम अपनाने को मजबूर हुए और इस सैकुलर गिरोह की भारतीय संस्कृति विरोधी फूट डालो और राज करो के देशद्रोही षड्यन्त्रों की वजह से आज तक मजबूर हैं वरना इन मुठीभर देशद्रोही मुस्लिम आतंकवादियों में कहाँ इतना दम था कि इन आम देशभक्त मुसलमानों की आवाज को इस तरह दबाकर रखते और इनके होनहार बच्चों को आतंकवाद की उस अंधेरी गली में धकेलते जिसके रास्ते सीधे जहन्नुम में खुलते हैं ।

आम देशभक्त मुसलमान न तो जिहादी है,न आतंकी है, न ही कट्टर और न ही औरंगजेब और बाबर जैसे राक्षसों की संतान। ये तो भगवान राम की उस संतान की तरह है जो मन्दिर जाती है फर्क सिर्फ इतना है कि इसकी पूजा पद्धति थोड़ी अलग है । सारा मामला जयचंद के वंशज इस देशद्रोही गिरोह व औरंगजेब और बाबर जैसे राक्षसों की संतानों इन मुठ्ठीभर देशद्रोही मुस्लिम जिहादी आतंकवादियों के द्वारा उलझाया हुआ है।

अगर आपको लगता है कि मामला इतना सीधा नहीं है तो जरा इस बात की ओर ध्यान दो ।

Ø हम दावे के साथ कह सकते हैं कि जिन हिन्दुओं व राष्ट्रवादी संगठनों का नाम लेकर आम देशभक्त मुसलमानों को डराया व उकसाया जाता है उनमें से किसी को भी अपने इन मुस्लिम भाईयों के मस्जिद जाने पर कोई आपत्ति नहीं है और न ही इन मुस्लिम भाईयों को हिन्दुओं के मन्दिर जाने या मूर्तिपूजा करने पर कोई आपत्ति हो सकती है।

Ø लेकिन औरंगजेब और बाबर जैसे राक्षसों की संतानों को व इस देशद्रोही सैकुलर गिरोह को, हिन्दुओं के मन्दिर जाने, मूर्तिपूजा करने और यहाँ तक कि हिन्दुओं के आस्तिक होने पर ही घोर आपत्ति है तभी तो यह गिरोह एक तरफ माननीय सर्वोच्चन्यायालय में सपथपत्र देकर घोषणा करता है कि भगवान राम हुए ही नहीं और दूसरी तरफ इनके लाडले देशद्रोही मुस्लिम जिहादी आतंकवादी मन्दिरों में बम्ब विस्फोट करते हैं ।

यह सैकुलर गिरोह यह भूल जाता है कि ये सबकुछ तबतक चल रहा है जब तक हिन्दू इनकी असलिएत से अनभिज्ञ है व अपने शान्तिप्रिय स्वभाव को नहीं छोड़ता लेकिन अब इनकी असलिएत बड़ी तेज गति से बेनकाब हो रही है और हिन्दू समझ रहा है कि जो शहीद मोहनचन्द शर्मा जी के बलिदान का अपमान कर रहे हैं वो भला देशभक्त कैसे हो सकते हैं ? जो देश के लिए प्राण जोखिम में डालकर देशद्रोहियों को पकड़ने व मारगिराने वाले सैनिकों व पुलिस के जवानों को शक की निगाह से देखते हैं उनकी शहीदी का अपमान करते हैं व देशद्रोही मुस्लिम जिहादी आतंकवादियों का समर्थन करते हैं उनके समर्थन में रैलियां धरने प्रदर्शन जुलूस निकालते हैं इनकी खातिर कोर्ट पहुंचते हैं कोर्ट को गुमराह करने का जोर-शोर से प्रयास करते हैं फिर फैसला सत्य और न्याय के पक्ष में आने पर माननीय सर्वोच्चन्यायालय तक का अपमान करते हैं व आदेश नहीं मानते व माननीय सर्वोच्चन्यायालय तक को अपनी सीमा में रहने और इनके देशविरोधी कामों में हस्ताक्षेप न करने की धमकी तक दे डालते हैं । मानो ये सब काफी न हो तो इनके समर्थन से पलने वाले आतंकवादी न्यायालय परिसर,पुलिस व सेना के शिविरों और गाड़ियों में बम्ब विस्फोट कर डालते हैं मानो कि के कह रहे हों जब संइयां भय सरकार तो फिर डर काहे का ।

ü यही वजह है कि जब भी हम हिन्दू बोलते हैं तो उसका अभिप्राय उन सभी भारतीयों से है जो भारत भूमि को सच्चे मन से अपनी मातृभूमि मानते हैं भारतीय संस्कृति को अपनी संस्कृति मानते हैं भारत के शत्रु को अपना शत्रु मानते हैं फिर वो चाहे पूजा के लिए मन्दिर या गुरूद्वारा या मस्जिद या गिरजाघर कहीं भी जाएं या फिर कहीं भी न जाएं या फिर सब जगह जाएं उसके देशभक्त भारतीय अर्थात हिन्दू होने पर कोई फर्क नहीं पड़ता । इस हिन्दू को एक दूसरे की पूजा पद्धति पर कोई आपत्ति नहीं होती ।

ü आप जरा सोचो कंधार काबुल जो कभी भारत था अफगानिस्तान बनकर गृहयुद्ध का शिकार क्यों है ? सिंध , ब्लूचीस्तान, कराची, लाहौर, ढाका जो 60 वर्ष पहले भारत था आज आन्तरिक मारकाट का शिकार क्यों है ? लोग वही हैं, जमीन वही है, सब कुछ वही है बस फर्क पड़ा तो इतना कि वो खुद को हिन्दू नहीं मानते

ü हम बाहर की बात क्यों करें जरा भारत को ही ध्यान से देखें कि कहां-कहां अलगाववाद है, हिंसा है, दंगा है, अशांति है सिर्फ वहां पर जहां-जहां खुद को हिन्दू न मानने वालों की संख्या प्रभावशाली है जैसे कि कश्मीरघाटी,आसाम,गोधरा, कंधमाल,मऊ, उत्तर-पूर्व के कई हिस्से। देश में और भी कई स्थान ऐसे हैं जहां खुद को हिन्दू न मानने वाले अकसर हिन्दुओं पर हमला करते रहते हैं और यह सैकुलर गिरोह हमलावरों के समर्थन में हिन्दुओं व उनके संगठनों को सांप्रदायिक, कातिल,गुंडा प्रचारित कर बदनाम करने के लिए विश्वव्यापी अभियान चलाता रहता है

ü यह मूर्खों का गिरोह इतना भी सोचने का कष्ट नहीं करता कि अगर हिन्दुओं व उनके संगठनों को ही इस्लाम या ईसाईयत मिटाओ अभियान चलाना हो तो वो हिन्दुबहुल क्षेत्रों मे शुरू करें और सारे भारत में एक साथ चलाएं न कि उन क्षेत्रों में जहां इस्लाम या ईसाईयत को मानने वाले या तो बहुसंख्यक बन गय हैं या बहुसंख्यक बनने के कगार पर पहुंच गए हों जबकि सच्चाई यह है कि हिन्दुओं व उनके संगठनों को इस्लाम या ईसाईयत से कोई समस्या नहीं ।

समस्या है तो उन देशद्रोहियों से है जो इस्लाम के बहाने जिहादी मानसिकता का प्रचार-प्रसार व समर्थन करते हैं व खुद को औरंगजेब और बाबर जैसे नरभक्षीयों की संतान कहलवाने में गर्व महसूस करते हैं या सेवा के नाम पर ईसाईयत के प्रचार-प्रसार के बहाने हिन्दूधर्म की निंदा कर हिन्दूधर्म विरोधी महौल बनाकर छल-कपट से जबरन धर्माँतरण को बढ़ावा देते हैं व धर्माँतरण का विरोध करने वाले परम पूजनीय स्वामी लक्ष्मणानन्द सरस्वती जी जैसे देशभक्त समाजसेवकों और सन्तों का कत्ल करते हैं ।

Ø इस देशद्रोही गिरोह को हम यह स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि खुद को औरंगजेब और बाबर जैसे नरभक्षियों की संतान कहलवाने वाले इन मुठ्ठीभर देशद्रोही मुस्लिम आतंकवादियों व धर्माँतरण करवाने वालों के लिए इस देश में न कोई जगह है और न ही कोई जगह हो सकती है फिर भी इस गिरोह को अगर विषय स्पष्ट नहीं तो हम इनके सामने वो सच्चाई रखने का प्रयास करेंगे जिसे आज हर देशभक्त महसूस करता है पर कहने से बचता है शायद इस उम्मीद में कि मानवता के शत्रु अपने आप मानवता को लहूलुहान करना छोड़ देंगे पर वो यह भूल जाता है कि राक्षस के मुँह अगर एक बार खून लग जाए तो वह तब तक नहीं रूकता जब तक सामने वाला खत्म न हो जाए या फिर इस राक्षस को खत्म न कर दिया जाए । हमारे विचार में भारत से अब इस राक्षस को मिटा देने का वक्त आ चुका है !

आप समझ ही गये होंगे कि हम किस राक्षस की बात कर रहे हैं । जी हाँ आप बिल्कुल ठीक समझे हम मुस्लिम आतंकवाद की बात कर रहे हैं ये आतंकवाद भारत के लिए कोई नया नहीं । इसका भारत में प्रवेश सातवीं/आठवीं शताब्दी में मुहम्मदबिन कासिम के रूप में सिंध के रास्ते हुआ जिसका असली राक्षसी चेहरा महमूदगजनबी ,औंरगजेब, बाबर, चंगेजखां ,जहांगीर आदि के रूप में सामने आया। इन राक्षसों ने हिन्दुओं पर कौन से जुल्म नहीं ढाए। अनगिनत हिन्दुओं का कत्ल किया, माताओं, बहनों, बहु, बेटियों, बच्चों तक को नहीं बख्शा माताओं, बहनों, बहु, बेटियों की इज्जत से खिलवाड़ किया सो अलग और ये सब हुआ मुस्लिम जिहाद के नाम पर ईस्लाम के प्रसार के लिए।

आस्था विश्वाश भाईचारे का कौन सा ऐसा चिन्ह है जिसे इन जिहादियों ने बख्शा ?

बेहिसाब मन्दिरों को लूटा और तोड़ा प्रमाण ढूँढने की जरूरत नहीं प्रमाण देश के हर कोने में मौजूद हैं सोमनाथ, अयोध्या,मथुरा और काशी के बारे में कौन नहीं जानता । कोई तो बताए ये सब कैसे भुलाया जा सकता है ? और क्यों भुलाया जाना चाहिए? इस देश की मिट्टी का एक-एक कण इन नरभक्षी मुस्लिम आतंकवादियों द्वारा किए गय कत्लेआम से सना है इस परंपरा का पालन मुस्लिम कम, सैकुलर गिरोह ज्यादा करने पर तुला हुआ है ।

गुरू तेगबहादुर जी की कुर्बानी को कौन भुला सकता है क्या यह झूठ है कि वह जिहाद का शिकार सिर्फ इसलिए हुए क्योंकि उन्होंने धर्मांतरण का विरोध किया ?

श्री गुरूगोविन्द सिह जी बेटों सहित बलिदान हुए किस लिए ? धर्म की रक्षा के लिए। पर किससे ? इन्हीं राक्षसों से, जिन्हें आप चाहे मुस्लिम आतंकवादी कहो चाहे जिहादी या फिर इनका बचाव करने के लिए बेचारा, गुमराह, गरीब, अनपढ़, सत्ताया हुआ मुस्लिम नौजवान ( देशद्रोही-हिन्दुविरोधी इन्हें इसी नाम से पुकारते हैं) पर सच्चाई यही है कि ये राक्षस यह सब कुछ इस्लाम पर हो रही काल्पनिक ज्यादतियों का अपने सैकुलर एजेंटों के माध्यम से झूठ फैलाकर इस्लाम के प्रचार-प्रसार के लिए जिहाद का नाम लेकर करते थे, कर रहें हैं और तब तक करेंगे जब तक इस भारत से हिन्दुओं का नामोनिशान नहीं मिट जाता या फिर इन्हें इनके समर्थकों सहित मिटा नहीं दिया जाता ।

जरा याद करो महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी महाराज का बलिदान । सारी ज़िन्दगी धर्म की रक्षा के लिए लड़े और धर्म की रक्षा के लिए बलिदान हुए। पर रक्षा किससे ? इन्हीं राक्षसों से जिन्हें यह सैकुलर गिरोह बेचारा गरीब सताया हुआ प्रचारित करके यह कुतर्क देता है कि वर्तमान भारत में यह सब हिन्दू संगठनों की वजह से हो रहा है और वो भी राम मन्दिर अंदोलन व गुजरात का बदला लेने को लिए।

लेकिन सच्ची-पक्की बात यह है कि जिस जिहाद से लड़ते हुए वह अनगिनत अमूल्य बलिदानी शहीद हुए थे उसी जिहाद का मुकाबला आज हिन्दू संगठन,सुरक्षावल व समस्त हिन्दूसमाज कर रहा है और जो गद्दारी उस वक्त जयचन्द जैसे देशद्रोहियों ने की थी वो ही गद्दारी आज ये देशद्रोहियों का सैकुलर गिरोह कर रहा है ।

· आओ जरा वर्तमान भारत में धर्म पर हो रहे हमलों का तार्किक विश्लेशण करें। दीवाली पर दिल्ली में धमाके, होली पर वाराणसी में बजरंगबली के मन्दिर में धमाके,राखी पर मुम्बई में धमाके,गणेशोत्सव पर फिर दिल्ली में धमाके ,इसके अतिरिक्त अहमदावाद, सूरत, जयपुर में मन्दिर के पास, कर्नाटक, रघुनाथ मन्दिर, अक्षरधाम मन्दिर । इन सब धमाकों में दो बातें स्पष्ट उभर कर आती हैं एक तो ये सब धमाके हिन्दुबहुल क्षेत्रों व मन्दिरों को निशाना बनाकर किए जाते हैं ताकि अधिक से हिन्दुओं को मौत के घाट उतारा जा सके और दूसरी बात यह कि ये सब धमाके उन्हीं मुस्लिम आतंकवादियों द्वारा किए जा रहे हैं जिन्हें इस गिरोह की सरकार का गृहमन्त्री सरकार में शामिल लोगों का भाई बताता है।

Ø इन सब धमाकों का एक ही उद्देश्य है शान्तिप्रिय हिन्दुओं की बर्बादी और राक्षसों का बर्चस्व स्थापित करना। जिहादियों के समर्थक यह तर्क देते हैं कि ये हमले हिन्दुओं को निशाना बनाकर नहीं किए जा रहे क्योंकि इसमें मुस्लिम भी मारे जाते हैं(इस झूठ का प्रचार करने के लिए इनका सहयोगी मीडिया धमाकों में मारे गये एक मुस्लिम को बार-बार दिखाकर इस झूठ को आगे बढ़ाकर सच को छुपाने की कोशिश करता है ) पर वो यह सच्चाई छुपाने की कुचेष्ठा करते हैं कि ऐसे धमाकों में मारे जाने वाले मुस्लिमों की संख्या न के बराबर होती है।

· जिहादियों के समर्थक यह तर्क भी देते हैं कि ये हमले तो मस्जिदों को निशाना बनकर भी किए जाते पर ये लोग यह बताने से बचते हैं कि जामामस्जिद में हुए बम्बविस्फोट में सिर्फ एक व्यक्ति घायल हुआ मरा कोई भी नहीं । मक्कामस्जिद में बम्बविस्फोट पानी की टांकी के पास हुआ न कि मस्जिद के अन्दर इसी तरह मालेगांव( यहाँ मुसलमान भगदड़ में मरे न कि धमाके से) में भी बम्बविस्फोट मस्जिद के पास हुआ न कि मस्जिद के अन्दर और ये दोनों बम्बविस्फोट दुर्घटनाबश हुए क्योंकि इन जिहादियों के प्रशिक्षण केन्द्र मदरसे हैं और संचालन केन्द्र मस्जिदें । ऐसे स्थानों पर परीक्षण के समय या दुर्घटनाबश बम्बविस्फोट होना सामान्य घटना है न कि कोई साजिश । ऐसी भी चर्चा है कि जिहादी हिन्दुबहुल क्षेत्र में बम्ब रखने जा रहे थे कि रास्ते में पड़ती मस्जिद में अपने सहयोगियों से मिलने के लिए व धमाकों से पहले नमाज पढ़ने के लिए रूके और इस बीच दुर्घटनाबस ये धमाके हो गये । वरना अगर ये बम्ब किसी हिन्दू ने लगाने होते तो मस्जिद में लगाता न कि बाहर ।

· जो लोग बार-बार हिन्दू आतंकवाद की काल्पनिक अवधारणा बना रहे हैं वो ये क्यों कैसे भूल रहे हैं कि पाकिस्तान जैसे मुस्लिम देशों में जो मस्जिदों में तबाही हो रही है वो मुस्लिम जिहादी ही तो कर रहे हैं। फिर भारत में ये सब मुस्लिम जिहादी नहीं कर रहे हैं ऐसा तो जिहादियों का बचाव करने वाले बिके हुए दलालों द्वारा ही कहा जा सकता है या फिर उन कातिलों द्वारा जिन्होंने ये धमाके खुद करवाये हों !

लेकिन जिहादियों को अपना भाई मानने वाला यह गिरोह इन जिहादियों को हीरो बनाने के लिए कुछ भी कह सकता है कुछ भी कर सकता है।

v इस सैकुलर गिरोह ने तो मानो निर्दोष शान्तिप्रिय हिन्दुओं को इन घटनाओं में झूठा फंसाकर आतंकवादी सिद्ध करने की कसम उठा रखी हो और उठांए भी क्यों न एक तरफ शहीद मोहनचन्द शर्मा जी के बलिदान का अपमान करने के मुद्दे पर अभी देशभक्त हिन्दुओं का गुस्सा शान्त भी नहीं हुआ था कि राजठाकरे के माध्यम से हिन्दुओं को क्षेत्रवाद के आधार पर लड़ाकर फूट डालो और राज करो की साजिश का पर्दाफाश हो गया। ऊपर से पिछले कई दशकों से बोले जा रहे इस झूठ का कलंक कि हिन्दू आतंकवादी हैं जब पिछले पाँच सालों के षड्यन्त्रों के बावजूद कोई हिन्दू आतंकवादी न मिला तो मरता क्या न करता इसलिए हताशा में एक निर्दोष राष्ट्रभक्त साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को ए .टी .एस पर दबाव बनाकर डलबा दिया जेल में यह भी न सोचा कि देशद्रोही हिन्दुविरोधी जिहाद समर्थक गिरोह की सरकार द्वारा निर्दोष राष्ट्रभक्त हिन्दुओं को जेल में डालकर ‘हिन्दू आतंकवादी हैं , ‘हिन्दू आतंकवादी हैं , प्रचारित करने से कोई उस पर भरोसा करने वाला नहीं क्योंकि सब जानते हैं कि जिहादी आतंकवादियों को अपना भाई बताने वाली सरकार, उनको सजा से बचाने के लिए पोटा हटाने वाली सरकार, सेना व पुलिस के बहादुर जवानों द्वारा मारे गए जिहादी आतंकवादियों के परिवारों को मुआबजा देने वाली सरकार, माननीय सर्वोच्च न्यायालय से फाँसी की सजा प्राप्त जिहादी आतंकवादी मुहम्मद अफजल को फाँसी न देकर दो वर्ष से उसे बचाकर रखने वाली सरकार ,प्रतिशोध में बेबकूफ बने हिन्दू राहुल राज को एक पल में आनॅ द स्पाट गोली मारकर फाँसी देने वाली सरकार, क्वात्रोची जैसे देशविरोधी लुटेरे एन्टोनियो माइनो मारियो के एजेंट के लंदन बैंक में देशभक्त सरकार द्वरा जब्त करवाए गए वोफोर्स काँड दलाली के पैसे को कानूनमन्त्री भेज कर छुड़वाने वाली सरकार, आसाम में बंगलादेशी घुसपैठियों के साथ मिलकर सरकार बनाकर जिहादी आतंकवादियों द्वारा हिन्दुओं को मरवाने व बेघर करवाने वाली सरकार, इन हत्यारे बंगलादेशी घुसपैठिए जिहादी आतंकवादियों को बांगलादेश वापिस भेजने के लिए माननीय सर्वोच्चन्यायालय के आदेशों को न मानने व ऐसे सभी कानूनों को तोड़ने वाली सरकार, जिहादी आतंकवादियों को कानून बनवाकर जेलों से छुड़वाने वाली सरकार , जिहादी आतंकवादियों को अपने प्राणों की बाजी लगाकर पकड़ने या मारने वाले सेना व पुलिस के बहादुर जवानों को जेलों में डलवाने वाली सरकार,शहीद मोहन चन्द शर्मा जी जैसे देशभक्तों के बलिदान का अपमान करने वाली सरकार देशभक्तों को अपमानित करने के लिए कोई भी षड्यन्त्र रच सकती है, किसी भी हद तक गिर सकती है ।

v निर्दोष राष्ट्रभक्त साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर जी को जेल में डालना इसी षड्यन्त्र का एक हिस्सा है इससे पहले भी यह सरकार राष्ट्रभक्त सन्त परम पूजनीय स्वामी रामदेव जी को अपमानित करने के लिए कई षड्यन्त्र रचकर मुंह की खाकर अपनी फजीहत करवा चुकी है । निर्दोष राष्ट्रभक्त साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर जी के मामले में भी सरकार के षड्यन्त्र का यही हश्र होने वाला है । वैसे भी जरा आप निष्पक्ष होकर सोचो कि जो सरकार हिन्दूविरोधियों को खुश करने के लिए भगवान राम जी के अस्तित्व को ही नकार सकती हो वो भला भारतीय संस्कृति को नष्ट करने के लिए क्या नहीं कर सकती है बोले तो ,कुछ भी कर सकती है ये तो सेना, राष्ट्रभक्त हिन्दुओं व उनके संगठनों का डर है जो इस देशद्रोही हिन्दुविरोधी जिहाद व धर्मांतरण समर्थक गिरोह को अपने नापाक कदम पीछे खींचने पर मजबूर कर देता है वरना आज तक तो यह देशद्रोही हिन्दुविरोधी गिरोह जिहाद व धर्मांतरण समर्थकों के साथ मिलकर सारे भारत से भारतीय संस्कृति बोले तो हिन्दू संस्कृति का नामोनिशान उसी तरह मिटा देता जिस तरह कश्मीरघाटी,उत्तरपूर्व के कई क्षेत्रों से मिटाया व देश के कई अन्य हिस्सों में यह हिन्दू मिटाओ हिन्दू भगाओ अभियान जोर-शोर से चल रहा है पर यह वहीं सम्भव हो पा रहा है जहां हिन्दू संगठन बिल्कुल कमजोर हैं और हिन्दू संगठन वहां पर कमजोर हैं जहां पर राष्ट्रभक्त कम संख्या में हैं अतः सारे भारत में राष्ट्रभक्तों की संख्या बढ़ाकर व देशद्रोही हिन्दुविरोधी जिहाद व धर्मांतरण समर्थकों की संख्या घटाकर भारतीय सेना के हाथ मज़बूत कर भारतीय संस्कृति को बचाकर विश्वगुरू भारत का पुनःनिर्माण करने के लिए हिन्दूक्रांती देश की जरूरत है शौक नहीं ।

हिन्दुओं को आतंकवादी व कातिल बताने बाला यह झूठ इस देशद्रोही हिन्दुविरोधी जिहाद व धर्मांतरण समर्थक गिरोह का कोई पहला झूठ नहीं आप सबको याद होगा कि सन 2000 में जब केन्द्र में एन.डी.ए की सरकार थी और गुजरात में भाजपा की । कुछ समय बाद आंध्रप्रदेश, गोआ, गुजरात और कर्नाटक में चर्चों पर हमले होने लगे तो हिन्दूविरोधियों के इस गिरोह ने देश-विदेश में शोर मचा दिया कि ये हमले योजनाबद्ध तरीके से अल्पसंख्यकों को खत्म करने की साजिश के तहत हिन्दूसंगठन करवा रहे हैं बाद में मीडिया का एक बढ़ा वर्ग भी इस दुष्प्रचार में शामिल हो गया । हिन्दूसंगठनों ने लाख कहा कि कि इन हमलों से उसका कोई वास्ता नहीं पर ये कहाँ सुनने वाले थे इनको तो सिद्ध करना था कि हिन्दुत्व की बात करने वाले सांप्रदायिक हैं कातिल हैं ! आप समझ सकते हैं कि निर्दोष को दोषी साबित करना कितना मुस्किल होता है ? इसलिए इस टीम ने पूरा जोर लगाया सच्चाई को दबाने में, पर सच्चाई तो सच्चाई है कहां दबती है सामने आ ही जाती है इस मामले में भी यही हुआ और सिद्ध हो गया कि ये सैकुलर गिरोह गद्दारों का वो गिरोह है जो हिन्दुओं व उनके संगठनों को बदनाम कर, देश को तवाह करने के लिए किसी भी हद तक गिर सकता है-झूठ बोल सकता है ।

आँध्रप्रदेश में दीनदार अंजुमन नामक मुस्लिम आतंकवादी गैंग के 23 जिहादी पकड़े गए जिन्होंने यह स्वीकार किया कि देश में चर्चों पर हमले इन्होंने किए थे। भगवान की दया से ये गैंग किसी भारतीय जनता पार्टी शासित राज्य में नहीं पकड़ी गई वरना ये देशद्रोही गिरोह आरोप लगा देता कि ये गलत पकड़े गए ।

क्या हिन्दुओं व उनके संगठनों को बेवजह बदनाम करने वाले इन दुष्टों ने हिन्दुओं से माफी मांगी या इस बेवकूफी से कोई सबक लिया कोई नहीं । अगर इस देशद्रोही हिन्दुविरोधी जिहाद व धर्मांतरण समर्थक गिरोह के लोग इतने ही समझदार होते तो भला वो देशद्रोहियों का साथ देते क्या ?

अगर आपको इन जिहादियों के दोषी होने के बारे में कोई सन्देह है तो आपकी जानकारी के लिए बता दूँ कि 22 नवम्बर 2008 को माननीय न्यायालय में इनका अपराध सिद्ध हो चुका है । अगर इस हिन्दुविरोधी तालिबानी मीडिया ब सैकुलर गिरोह में शर्म नाम की कोई चीज बाकी है तो इसे सारे संसार में हिन्दुओं को कातिल कहकर फैलाए गये झूठ के लिए समस्त जिन्दुओं से माफी मांग लेनी चाहिए वरना हमें विश्वास हो जाएगा कि ये असुरों का तालिबानी गिरोह है !

clip_image001 आओ जरा उड़ीसा के कंधमाल की बात करें जो 15 सितम्बर से 15 अक्तूबर 2008 तक पूरे जोर-शोर से न केवल भारत बल्कि पूरे संसार के ईसाई देशों खास कर एन्टोनियो मांइनो मारियो के घर इटली के पोप शासित रोम में पूरी तरह से छाया रहा । कई धर्मांतरण समर्थक हिन्दू विरोधी मंचों पर तो आज भी ये सुर्खियों में है । हो भी क्यों न कंधमाल को पोप शासित रोम बनाने के रास्ते में देशभक्त हिन्दू व उनके संगठन जो दीवार बनकर खड़े हो गए। हम इन धर्मांतरण के ठेकेदारों को यहाँ स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि यह इटली नहीं भारत है और भारत के किसी भी हिस्से को रोम नहीं बनने देंगे और भविष्य में अगर किसी हिस्से को रोम बनाने की कोशिश की तो वहां कंधमाल नजर आएगा ।

clip_image001[1] भगवान की लीला देखो नाइजीरिया में एक दूसरे का कत्ल कर उसे नरक बना देने वाले ये ईसाई व मुसलमान, अफगानिस्तान व ईराक में मुसलमानों की हत्या के लिए ईसाईयों को पानी पी-पी कर कोसने वाले व भारत में चर्चों पर हमला करने वाले मुसलमान भी देशभक्त हिन्दुओं व उनके संगठनों पर हमला करने के मुद्दे पर धर्मांतरण समर्थक ईसाईयों के साथ आ खडे हुए और स्पष्ट कर दिया कि सारी दुनिया में भले ही ईसाई मुसलमान एक दूसरे के खून के प्यासे हों पर हिन्दूराष्ट्र भारत को तबाह करने के मुद्दे पर ये जिहादी व धर्मांतरण समर्थक एक साथ हैं।

धर्मांतरण के ठेकेदार सारे भारत में हिन्दूधर्म के बारे में दुष्प्रचार कर भारतीय संस्कृति पर हमला बोले हुए हैं ये हमला भारत के बनवासी व दूरदराज क्षेत्रों में ज्यादा तीखा स्पष्ट और आक्रामक है ईसाईयों के इस अक्रामक दुष्प्रचार से देशभक्त हिन्दू समाज व उनके संगठन आक्रोश में हैं पर अपनी शांतिप्रिय सनातन संस्कृति के कारण शांतिप्रिय ढंग से इन धर्मांतरण के ठेकेदारों को समझाने व रोकने का असफल प्रयास कर रहे हैं लेकिन ये धर्मांतरण के ठेकेदार व उनके समर्थक अपनी आदत से मजबूर हैं क्योंकि ये सनातन संस्कृति को बदनाम कर समाप्त करने की कसम उठा चुके हैं और यही इनका ब्यापार भी है इन धर्मांतरण के ठेकेदारों द्वारा किए जा रहे दुष्प्रचार को सुन कर( ईसाई संसार में फैल रहे थे, हिन्दू घबरा गये,सनातन धर्म चकनाचूर हो गया सनातन को मानने वाले ईसाई बन गये) व इन इनके द्वारा लिखे जा रहे हिन्दू विरोधी सहित्य को पढ़ कर कोई भी आम समाज उत्तेजित होकर शाम दाम दण्ड भेद का उपयोग कर इनका नामोनिशान मिटाने पर उत्तर आए लेकिन ये देशभक्त हिन्दू समाज अपनी शांतिप्रिय सनातन संस्कृति के कारण सबकुछ सहन कर रहा है पर हर बात की हद होती है इसिलिए श्रीमद् भगवतगीता में साफ कहा गया है कि जब अत्याचार की अति हो जाए तो अत्याचारियों व अत्याचारियों के समर्थकों को समाप्त कर देना चाहिए !

ü ये जम्मू, गुजरात और उड़ीसा जैसी छुटपुट घटनांए इस आक्रोशित देशभक्त हिन्दू समाज की तात्कालिक हमले की प्रतिक्रिया का टरेलर मात्र हैं ये प्रतिक्रिया कितनी व्यापक व भयानक हो सकती है इसका अन्दाजा शायद इन धर्मांतरण के ठेकेदारों, जिहादियों व इस देशद्रोही हिन्दुविरोधी जिहाद व धर्मांतरण समर्थक गिरोह को नहीं है इसीलिए ये सब गद्दार बारी-बारी से लगातार भारतीय संस्कृति पर प्रहार कर देशभक्त हिन्दू समाज की आत्मा को लहूलुहान कर अपनी मौत को बुलाबा दे रहे हैं।

परपूजनीय सन्त श्री लक्ष्मणानन्द जी का कत्ल अगर ये ईसाई मिशनरी न करते तो शायद बनवासी हिन्दू समाज का धैर्य न टूटता । जैसे देश के अन्य हिस्सों में हिन्दू समाज व हिन्दू संगठन ईसाई मिशनरियों के अत्याचार सह रहे हैं अनका गाली गलौच, भारतीय संस्कृति व हिन्दू समाज की घोर निन्दा वो भी असंसदीय भाषा में, सहन कर रहे हैं कंधमाल में भी करते रहते। परन्तु कत्ल सहने का धैर्य अब जबाब दे चुका है वो भी उस निहत्थे परपूजनीय सन्त व उनके सहयोगियों का जो दिन-रात बनवासियों की निस्वार्थ सेवा में लगे हुए थे ।

उन्हें चर्च ने इसलिए कत्ल करवा दिया कि वो धर्मांतरण का विरोध करते थे । कौन सहन करेगा इस साम्राज्यवादी सोच को ? क्यों सहन करेगा ? कब तक सहन करेगा ? हमारा देश हमारे लोग हमारी जमीन और हमारे पर ही आक्रमण और वो भी उन सम्राज्यवादी ईसाई मिशनरियों का जो 1600ई. में व्यापारियों के भेष में आए और हिन्दुओं के बीच फूट डलवाकर 300 वर्ष तक भारतीय अर्थव्यवस्था व संस्कृति को तहस नहस करते रहे और देशभक्त हिन्दुओं को मौत के घाट उतारते रहे और अब ईसाई मिशनरियों के रूप में आकर धर्मांतरण करवाकर हिन्दुओं के बीच फूट डलवाने का असफल प्रयास कर रहे हैं ।

परन्तु इनको यह नहीं भूलना चाहिए कि ये महारानी लक्ष्मीबाई व भगत सिंह का देश जलियांवाला बाग में ईसाई मिशनरी डायर द्वारा मचाई गई मार काट को अभी तक नहीं भूला है और न भूलेगा इसलिए ईसाई मिशनरियों को 16वीं शताब्दी की मानसिकता समय रहते त्याग देनी चाहिए या फिर परिणाम भुगतने के लिए तैयार हो जाना चाहिए हिन्दू समाज धर्मांतरण के ठेकेदारों को बख्शेगा नहीं । परमपूजनीय सन्त लक्ष्मणानन्द जी के ऊपर ईसाई मिशनरियों का ये दसवां हमला था ।

इनकी दुष्टता की पराकाष्ठा देखो हमले के स्थान पर जो चिट्ठी छोड़ी उसमें लिखते हैं कि क्योंकि हम भारत को सैकुलर बोले तो हिन्दुविहीन बनाना चाहते हैं इस लिए हमने स्वामी जी का कत्ल किया । कौन राष्ट्रभक्त हिन्दू इस दुष्टता को सहन कर सकता है जब इनकी दुष्टता का जबाब इन्हीं के तरीके से मिलने लगा तो शोर मचा दिया कि स्वामी जी का कत्ल माओवादियों ने किया है फिर माओवादियों को पैसा देकर उनका ब्यान दिलबा दिया वरना माओवादियों को क्या जरूरत पड़ी थी उस कत्ल की जिम्मेवारी लेने की जो उनकी सोच से मेल नहीं खाता । पता तो उन अपराधीयों का लगाया जाना चाहिए जिन्होंने माओवादियों से यह झूठा ब्यान दिलवाया जांच एजैंसियों व हिन्दुओं को गुमराहकर धर्मांतरण के ठेकेदारों को निर्दोष सिद्ध करने के लिए और उनका भी जो ईसाई देशों में इस झूठ को फैलाकर हिन्दुस्थान को बदनाम कर देशद्रोही कामों को अन्जाम देने के लिए धनसंग्रह कर रहे हैं। मीडिया के उन गद्दारों का भी पता लगाया जाना चाहिए जो बार-बार हिन्दुविरोधी दुष्प्रचार कर हिन्दुओं व हिन्दुस्थान को बदनाम कर अपनी जेबें भर रहे हैं ।

v जिस वक्त ये सबकुछ उड़ीसा में घट रहा था ठीक उसी वक्त बंगलादेशी जिहादी घुसपैठियों द्वारा आसाम में देशभक्त निर्दोष हिन्दुओं को हलाल किया जा रहा था जिन्दा जलाया जा रहा था उनके घरों को जलाकर उन्हें बेघर किया जा रहा था और कर कौन रहा था विदेशी बंगलादेशी जिहादी घुसपैठिये, मुस्लिम आतंकवादी । इसी वक्त महाराष्ट्र के धुले में आतंकवाद के विरोध में हो रही रैली को रोकने के लिए जिहादियों द्वरा हिन्दुओं पर हमला कर कई हिन्दुओं का कत्ल कर दिया व सैंकड़ों हिन्दुओं को घायल कर दिया ये हिंसा लगभग पाँच दिन तक चलती रही।

v उड़ीसा में ईसाईयों द्वारा स्वामी जी की निर्मम हत्या से शुरू हुई हिंसा में कुल 30 लोग मारे गए 500 घर जलाए गए । जबकि आसाम में जिहादियों द्वारा चलाए जा रहे हिन्दू मिटाओ हिन्दू भगाओ अभियान के तहत अब तक सैंकड़ों हिन्दू मारे जा चुके हैं, हजारों घर जलाए जा चुके हैं लाखों हिन्दू बेघर हो चुके हैं अभियान आज 31अक्तूबर 2008 तक जारी है । क्या आपने इस देशद्रोही हिन्दुविरोधी जिहाद व धर्मांतरण समर्थक गिरोह को (जो बटाला हाउस मुठभेड़ व उड़ीसा के बारे में तरह-तरह की बातें बना रहे थे विशेष चर्चा-परिचर्चा ,रैलियां करवा रहे थे ,जोर जोर से चिला रहे थे ,ईसाई मार दिए ईसाई मार दिए, हिन्दुओं व उनके संगठनों पर मन गढ़ंत आरोप लगाकर उन पर प्रतिबन्ध लगाने की मांग कर रहे थे ) आसाम या धुले की बात करते हुए देखा चर्चा-परिचर्चा करवाते हुए देखा या फिर हिन्दू मार दिए हिन्दू मार दिए हिन्दुओं के घर जला दिए चिलाते हुए देखा नहीं न क्यों नहीं क्योंकि ये सैकुलर हैं

v धर्मनिर्पेक्षता इन्हें हिन्दुओं को, हिन्दुओं की सभ्यता संस्कृति को बदनाम करना, हिन्दुओं के देवी देवताओं को गाली-गलौच करना, साधु संतो को अपमानित करना यहां तक कि भारत की आत्मा भगवान राम के अस्तित्व को नकारना तो सिखाती है पर हिन्दुओं पर होने वाले अत्याचार, हिन्दुओं के जानमाल के नुकसान का विरोध करना नहीं सिखाती ।

क्योंकि हिन्दुओं के जानमाल का नुकसान करने वाले ही तो इस देशद्रोही हिन्दुविरोधी जिहाद व धर्मांतरण समर्थक गिरोह का वोटबैंक हैं इनके अर्थतन्त्र की रीढ़ हैं ऊपर से हिन्दुओं का समर्थन करने के बदले कोई पैसे भी तो नहीं देता !

अगर ये गिरोह हिन्दुओं पर जिहादियों व धर्मांतरण के ठेकेदारों द्वारा होने वाले जुलमों-सितम के विरूद्ध आवाज उठाएगा तो इनको मुस्लिम व ईसाई देशों से मिलने वाला धन और समर्थन दोनों बन्द हो जांएगे फिर ये न हिन्दुओं को मरबा पायेंगे न धर्मांतरण करवा पायेंगे इन हालात में इनका वोटबैंक कम होता चला जाएगा। क्योंकि जिस दिन हिन्दू इनकी फूट डालो राज करो के षड्यन्त्र के चंगुल से निकलकर इनकी देशद्रोही हिन्दुविरोधी जिहाद व धर्मांतरण समर्थक मानसिकता को जानलेगा फिर इनको वोट तो क्या इस हिन्दूराष्ट्र भारत में इनका पिंडदान करने वाला भी कोई न मिलेगा ।

एंटोनियो के हिन्दुविरोधी षडयन्त्र

 

क्या आपने कभी फुर्सत के क्षणों में इस सरकार द्वारा भारतीय संस्कृति के आधार स्तम्भ भगवान राम के अस्तित्व पर किए जा रहे हमले के पीछे छुपे संदेश व कारण को समझने का प्रयास किया नहीं न आओ मेरो साथ मिलकर सोचो ।

  • जिस दिन एंटोनियो माइनो मारीयो को भारत में विपक्ष के नेता के रूप में मान्यता दी गई उसी दिन से भारतीय संस्कृति बोले तो हिन्दू संस्कृति को समाप्त करने के प्रयत्नों को नई ताकत मिली असली हमला तो तब शुरू हुआ जब देशद्रोही हिन्दुविरोधी जिहाद व धर्मांतरण समर्थक गिरोह ने एंटोनियो माइनो मारीयो को अपना प्रमुख चुन लिया ।
  • जब देशभक्त भारतीयों ने इस विदेशी ईसाई मिशनरी का प्रधानमन्त्री बनने का विरोध किया तो तर्क दिया गया कि, इसकी शादी एक हिन्दू से हुई है इसलिए एंटोनियो माइनो मारीयो हिन्दू हो गई ,जो कि सरासर झूठ है । लोगों को उसी तरह गुमराह करने का षड्यन्त्र है जिस तरह लोगों को इसका असली नाम एंटोनियो माइनो मारीयो न बताकर एक हिन्दू नाम बताकर व अंग्रेजी परिधान(जो हिलेरी कलिंटन व एंटोनियो की माता जी पहनती हैं) की जगह हिन्दू परिधान बोले तो भारतीय परिधान पहनाकर सच को छुपाकर हिन्दू के रूप में दिखाकर किया गया । आज भी ये प्रयत्न यथावत जारी है ।

अगर ये हिन्दू हो गई होती तो क्या ये अपनी बेटी की शादी एक हिन्दु से नहीं करती (हालांकि शादी/पूजा करनी न करनी किससे/कैसे करनी निजी मामला है पर जोर-शोर से फैलाए जा रहे झूठ को बेनकाब कर देश को इस गुलामीं के दौर से बाहर निकालना जरूरी है) हिन्दू धर्म अपनाने की एक शुद्धी प्रक्रिया है वो भी उन हिन्दुओं की घरवापसी के लिए है जो जिहादियों व धर्मांतरण के दलालों के चंगुल में फंस कर या उनके अत्याचारों से तंग आकर अपनी पूजा-पद्धति बदल लिए ।एंटोनियो इस पद्धति के योग्य है ही नहीं। फिर भी क्या एंटोनियो उस शुद्धी प्रक्रिया से गुजरी ? नहीं न । फिर ये झूठ किस लिए ?

अगर इस झूठ को मान भी लिया जाए तो भी एक विदेशी को देश को गुलाम बनाने का अधिकार नहीं दिया जा सकता चाहे वो परावर्तित हिन्दू ही क्यों न हो । हम देशभक्त ईसाईयों से विनम्र प्रार्थना करते हैं कि वे एंटोनियो और देश में सक्रिय अन्य ईसाई मिशनरियों से अपने आप को अलग कर लें वरना इन विदेशियों द्वारा किए जा रहे हिन्दू विरोधी देश विरोधी कार्यों की कीमत कहीं उनको न चुकानी पड़ जाए ?

§ क्योंकि सच्चाई यह है कि एंटोनियो माइनो मारीयो एक अंग्रेज ईसाई है और हिन्दुओं व हिन्दूसंस्कृति बोले तो भारतीय संस्कृति को तबाह बर्बाद करने के हरेक प्रयत्न का प्रेरणा स्रोत व ताकत है बोलने से क्या फर्क पड़ता है आओ जरा कर्म देखें सबसे पहला कदम कांग्रेस के पहले शूद्र अध्यक्ष सीता राम जी केसरी को अपमानित कर हटाना व खुद को उस कुर्सी पर बिठाना। कांग्रेस के महत्वपूर्ण पदों से चुन चुन कर ताकतवर हिन्दू नेताओं को हटाना व हर जगह ईसाईयों को आगे बढ़ाना ।

§ एंटोनियो माइनो मारियो के इस कुर्सी पर पहुंचने व पकड़ मजबूत करने की प्रक्रिया में देश को स्वर्गीय संजय गाँधी, स्वर्गीय राजीव गाँधी, स्वर्गीय माधव राव सिन्धिया व स्वर्गीय राजेश पायलट जैसे हिन्दुओं को खोना पड़ा और संयोग देखिए इन सब का आकस्मिक स्वर्गबास हुआ । इसे भी संयोग ही कहेंगे कि इन में से अगर एक भी जिन्दा होता तो आज भारत सरकार इस विदेशी अंग्रेज की गुलाम न होती ।

§ क्या यह भी संयोग ही है कि भारतीय जनता को यह तक न बताया गया कि यह अंग्रेज कौन है ? इसके माता-पिता क्या करते थे ,या करते हैं ?

§ क्या ये भी संयोग ही है कि जिस क्वात्रोची का पैसा छुड़वाने के लिए इस अंग्रेज की गुलाम सरकार के कानूनमन्त्री को रातों-रात लंदन जाना पड़ता है ? उसी क्वात्रोची के बारे में यह समाचार आता है कि स्वर्गीय राजीव गाँधी जी के कत्ल से पहले इस क्वात्रोची की मुलाकात एल.टी.टी.ई प्रमुख प्रभाकरण के दूत वालासिंधम से फ्रांस के एक होटल में हुई थी।

क्या यह भी एक संयोग ही है कि जिस बैबसाइट हिन्दूयुनिटी डाट काम पर इस समाचार व ऐसे षडयन्त्रों की सच्चाई को जन जन तक पहुँचाने का प्रयत्न किया जाता है उसे यह गुलाम सरकार बलाकॅ कर देती है !

§ क्या ये भी एक संयोग ही है कि 1997 में जिस डी.एम.के को राजीव जी के कत्ल के लिए जिम्मेवार ठहराकर कांग्रेस ने सरकार गिराई उसी डी.एम.के के साथ मिलकर एंटोनियां ने 2004 में प्रधानमंत्री बनने की कोशिश की।

§ क्या ये भी संयोग ही है कि पिछले लगभग पांच वर्षों से एंटोनिया की गुलाम सरकार सता में होने के बाबजूद राजीव जी के कत्ल की तह तक पहुंचने का कोई गंभीर प्रयास नहीं किया गया उल्टा कातिलों के प्रति सहानुभूति दिखाकर जांच को बाधित करने के प्रयत्न किए गए ।

§ ये कहना भी अतिश्योक्ति नहीं होगी कि जिन लोगों को राजीव जी के कातिलों को बेनकाव करने की जी तोड़ कोशिश करनी चाहिए थी उन लोगों ने ही अपनी राजनीतिक महत्वकांक्षाओं को पूरा करने के लिए षडयन्त्र की तह तक पहुंचने के सारे राश्ते बन्द कर दिए।

क्या इसे भी एक संयोग ही मानें कि जब से यह अंग्रेज नेत्री विपक्ष बनीं फिर नेत्री सरकार तब से कभी हिन्दूराष्ट्र भारत को ईसाई बना देने की पोप द्वारा घोषणा,कभी टेरेसा तो कभी केरला की किसी और महिला को अलंकृत कर चर्च द्वारा ईसाईयत का प्रचार-प्रसार, पोप की मृत्यु पर धर्म निर्पेक्ष सरकार द्वारा तीन दिन का शोक और मानो यह सब ईसाईयत के प्रचार-प्रसार के लिए काफी न हो तो साधु सन्तों का ईसाईयों द्वारा कत्ल और इस से भी काम न चले तो फिर साधु-सन्तों-सैनिकों को झूठे आरोप लगाकर बदनाम करना और फिर हिन्दू आतंकवादी कहकर जेलों मे डालना और अमानवीय यातनांयें देकर प्रताड़ित करना । जले पर नमक छिड़कने के लिए मर्यादापुर्षोत्तम भगवान राम के अस्तित्व को नकारना ।

अब आप इन सब घटनाओं-दुर्घटनाओं को संयोग कहते हो तो कहो पर हिन्दू जनता इसे संयोग नहीं षड्यन्त्र मानती है। भविष्य में बनने वाली किसी भी राष्ट्रवादी सरकार से मांग करती है कि सत्ता में आते ही सबसे पहले इस अंग्रेज एंटोनियो माइनो मारियो को गिरफ्तार कर इसका नार्को टैस्ट करवाकर इस हिन्दुविरोधी-देशविरोधी षड्यन्त्र की तह तक पहुँचा जाए और दोषियों को फांसी पर लटकाया जाए ।

पता लगाया जाए कि हिन्दुओं को बदनाम कर हिन्दुस्थान को तवाह करने के षड्यन्त्रों को आगे बढ़ाने के लिए कहीं ईसाई देशों की खुफिया एजैंसियों की मदद तो नहीं ली जा रही और अगर राष्ट्रवादी सरकार नहीं बन पाती है तो सेना को शासन अपने हाथ में लेकर इस षड्यन्त्र का पर्दाफास कर देश को बर्बादी से बचाना चाहिए।

§ आज अगर आप कांग्रेस के कोर ग्रुप पर या सरकार के मालदार पदों पर नजर दौड़ाएं तो आपको दूर-दूर तक कांग्रेस के कोटे का कोई ताकतवर हिन्दू नेता नजर नहीं आएगा। सब जगह या तो ईसाई नजर आंएगे या फिर वे कमजोर हिन्दू जिनका अपना कोई जनाधार न होने के कारण उनके पास अपना स्वाभिमान व देशहित बेचकर एंटोनिया की गुलामी करने के सिबाय कोई और रास्ता नहीं है ।

· आप सबको याद होगा श्रीमति प्रतिभा पाटिल जी राष्ट्रपति कैसे चुनी गईं लेकिन एंटोनियो को उन पर भी भरोसा नहीं इसलिए उनका निजी सचिव भी ईसाई बनवाया। समझने वालों को संदेश बिल्कुल साफ है कि या तो ईसाई बनो या गुलाम नहीं तो कांग्रेस के कोर ग्रुप या सरकार के मालदार पदों को भूल जाओ ।

· जो ताकतवर हिन्दूनेता हैं उनको कमजोर करने के लिए एंटोनियो माइनो मारीयो किसी भी हद तक जा सकती है इसका प्रमाण देखना हो तो आपको हिमाचल कांग्रेस में ताकतवर हिन्दूनेता राजा वीरभद्र सिंह जी की जगह ईसाई विद्या सटोक्स को विपक्ष का नेता बनाने के घटनाक्रम को ध्यान से समझना होगा ।

ü यह घटनाक्रम सामने आना शुरू होता है अगस्त 2006 में एंटोनियो माइनो मारीयो के हिमाचल दौरे से। यह वह वक्त था जब धर्मांतरण के ठेकेदार ईसाईयों व देशभक्त हिन्दुओं के बीच धर्मांतरण के मुद्दे पर संघर्ष अपने चरम पर था। एक तरफ ईसाई केन्द्र में अंग्रेज एंटोनियो की गुलाम सरकार होने से उत्साहित होकर चलाए जा रहे जबरदस्त धर्मांतरण अभियान को हिन्दुओं व उनके संगठनों के कड़े प्रतिरोध का सामना करना पड़ रहा था। दूसरी तरफ राज्य में कांग्रेस सरकार होने पर धर्मांतरण के लिए जो अनुकूलता, सहयोग व सुविधायें देश के अन्य राज्यों में मिल रही थीं वे हिमाचल में नहीं मिल पा रही थीं क्योंकि राजा वीरभद्र सिंह जी छल कपट व आर्थिक अनियमितता से करवाए जा रहे धर्मांतरण के विरूद्ध थे । ऊपर से हिन्दुओं के वापिस अपने हिन्दू धर्म में लौटने के घर वापसी अभियान की सफलता से धर्मांतरण के दलाल देशी विदेशी ईसाई मिशनरी छटपटाए हुए थे।

दिल्ली में बैठे धर्मांतरण के ठेकेदार ईसाईयों ने जब एंटोनिया को यह सबकुछ बताया तो एंटोनिया के क्रोध का ठिकाना न रहा और एकदम घूमने के बहाने शिमला आई और यहां पर हिमाचल में सक्रिय धर्मांतरण के ठेकेदार ईसाईयों ने धर्मांतरण के काम में हिन्दूसंगठनों द्वारा पैदा की जा रही रूकाबटों व राजा वीरभद्र सिंह द्वारा अपनाए जा रहे न्यायसंगत रूख के बारे में बताया । बस फिर क्या था एंटोनिया ने आव देखा न ताव झट से राजा वीरभद्र सिंह जी को शीघ्रतिशीघ्र कठोर कार्यवाही कर धर्मांतरण के काम में आ रही रुकाबटों को दूर करने का आदेश दिया । राजा वीरभद्र सिंह जी ने भी ब्यान दे दिया कि हिन्दूसंगठनों से जुड़े कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया जाएगा। लेकिन मन से तो राजा वीरभद्र सिंह जी धर्मांतरण के ठेकेदारों द्वारा धर्मांतरण के लिए अपनाए जा रहे असंवैधानिक अमानवीय तरीकों के विरूद्ध थे व हिन्दुओं व उनके संगठनों द्वारा चलाए जा रहे आन्दोलन की भी जानकारी उन्हें जरूर रही होगी जिसका बिराट रूप ठीक दो महीने बाद प्रदेशभर में आयोजित हिन्दूसम्मेलनों के रूप में देखने को मिला ।

ü राजा वीरभद्र सिंह जी के हिन्दुत्वनिष्ठ होने व बिराट हिन्दूसम्मेलनों का असर हिमाचल सरकार द्वारा लाए गए धर्म-स्वतन्त्रता विधेयक(इस कानून का महत्व समझने के लिए आपको ये ध्यान में रखना होगा कि किस तरह उतर पूर्व में इस सैकुलर गिरोह द्वारा प्रयोजित धर्मांतरण से वहां कई राज्यों की हिन्दू आवादी लगभग 100% तक ईसाई बना दी गई) के निर्बिरोध पास होने के रूप में दिखा । जिसकी सब देशभक्त व्यक्तियों ,संगठनों, राजनैतिक दलों, समाचारपत्रों,टी वी चैनलों ने दिलखोलकर प्रशंसा की व इसे देशभक्ति से ओतप्रोत सराहनीय ऐतिहासिक कदम बताया ।

लेकिन देशद्रोही हिन्दुविरोधी जिहाद व धर्मांतरण समर्थक गिरोह को यह बात नागवार गुजरी और इस गिरोह ने धार्मिक स्वतन्त्रता के नाम पर धर्म स्वतन्त्रता विधेयक का विरोध किया व देश विदेश में हिन्दुविरोधी-देशविरोधी अभियान चलाकर ईसाई देशों से दबाव डलवाकर और पत्र लिखबाकर मुख्यमन्त्री वीरभद्र सिंह जी पर धर्म-स्वतन्त्रता विधेयक को वापिस लेने का दबाव बनवाया लेकिन राजा वीरभद्र सिंह जी ने हिन्दूहित-देशहित में लिए गए निर्णय से पीछे हटने से मना कर दिया ।

ü इनका यह निर्णय और भी महत्वपूर्ण इसलिए हो जाता है क्येंकि वह उस राजनीतिक दल से सबन्धित हैं जो देशद्रोही-हिन्दुविरोधी जिहाद व धर्मांतरण समर्थक गिरोह का प्रमुख सदस्य है और जिसकी अध्यक्षा धर्मांतरण समर्थक अंग्रेज एंटोनियो माइनो मारीयो है । राजा वीरभद्र सिंह जी को इस राष्ट्रवादी हिन्दुत्वनिष्ठ काम की कीमत चुकानी पड़ी। एक उनकी इच्छा के विरूद्ध समय से पहले चुनाव करवा दिए जिसका विद्या स्टोक्स ने समर्थन किया, दूसरा उनकी योजना के अनुसार टिकटों का बितरण नहीं किया गया । कुल मिलाकर केन्द्रीय नेतृत्व के गलत निर्णयों की वजह से उन्हें चुनाव में हरबा दिया गया मानों इतने षड्यन्त्र काफी न हों तो एक कदम आगे बढ़कर एंटोनियो माइनो मारीयो ने अपनी योजनानुसार ईसाई विद्यास्टोक्स को नेता विपक्ष बनाकर हिमाचल में ईसाई शासन की नींब रख दी पर हमें पूरा भरोसा है कि हिमाचल की हिन्दुत्वनिष्ठ जनता एंटोनियो के इस षड़यन्त्र को कभी पूरा नहीं होने देगी । हिमाचल का हर प्रबुध नागरिक जानता है कि हिमाचल में वर्तमान में आज कांग्रेस जो भी है राजा वीरभद्र सिंह जी की वजह से है वरना एंटोनिया की हिन्दुविरोधी नीतियों की वजह से आज तक हिमाचल कांग्रेस की स्थिति गुजरात कांग्रेस जैसी हो चुकी होती ।

ü यह सब तब है जब हिमाचल में हिन्दू 98% से अधिक हैं । राजा वीरभद्र सिंह जी एंटोनियो के ईसाई जुनून का अकेले शिकार नहीं हैं । सत्यव्रत चतुर्वेदी(आपको याद होगा किस तरह मुस्लिम जिहादियों के ठेकेदार अमर सिंह द्वारा शहीद मोहन चन्द शर्मा जी का अपमान करने पर कांग्रेस ने खामोशी धारण कर ली लेकिन देशभक्त सत्यब्रत जी ने इस देशद्रोही हरकत पर अमर सिंह को पागल करार दिया) जैसे अनेक राष्ट्रभक्त कांग्रेसी आज वनवास काट रहे हैं । उन्हें सिर्फ एंटोनिया की गुलाम सरकार के हिन्दुविरोधी कुकर्मों पर पर्दा डालने के लिए आगे लाया जाता है । मेरा सभी देशभक्त हिन्दूकांग्रेसियों से अपनी चुप्पी तोड़ कर कांग्रेस को इस हिन्दुविरोधी देशविरोधी सोच से बाहर निकालने के लिए संघर्ष करने की विनम्र प्रार्थना है !

जागो ! हिन्दू जागो !

छतीसगढ और आंध्रप्रदेश में हिन्दुओं की संख्या 90% से अधिक होने के बावजूद एंटोनिया ने ईसाई मुख्यमन्त्री बनवाए ।

आंध्रप्रदेश में यह ईसाई मुख्यमन्त्री मुसलमानों को संविधान के विरूद्ध जाकर आरक्षण देता है । जब माननीय न्यायालय इस ईसाई को देशविरोधी-सांप्रदायिक निर्णय न करने का आदेश देता है तो यह ईसाई अंग्रेजों की फूट डालो और राज करो की नीति को आगे बढ़ाते हुए संविधान के विरूद्ध जाना ही उचित समझता है,फिर ईसाईयों और मुसलमानों के लिए मुफ्त शिक्षा की व्यवस्था करता है मानो 90% हिन्दुओं को हर अधिकार से वंचित करना ही इसकी आका विदेशी अंग्रेज एंटोनिया का एकमात्र लक्ष्य हो । मानो हिन्दुओं के खून पसीने की कमाई को यह ईसाई अपने बाप की कमाई समझता हो इसलिए येरूशलम यात्रा के लिए प्रति व्यक्ति प्रतिवर्ष 80000 रू देने की घोषणा भी करता है । किसी ने क्या खूब कहा है- “ अंधा बांटे रेबड़ियां अपनो को मुड़-मुड़ दे ”। फिर हैदराबाद बम्ब धमाकों के आरोपियों को छोड़ कर आटो देने की घोषणा करता है मानो कह रहा हो- हिन्दुओं को इसी तरह मारते रहो ! देखा न क्या होती है हिन्दुविरोधी-देशविरोधी मानसिकता !

इसी तरह केन्द्रसरकार में अच्छा काम कर रहे हिन्दू श्री प्रणवमुखर्जी को रक्षामन्त्री के पद से हटाबाकर ईसाई एन्टनी को रक्षामन्त्री बनवाया । इस फेरबदल का सबसे बढ़ा कारण एंटोनिया का हिन्दुओं पर अविश्वास व अपने ईसाई संप्रदाय को आगे बढ़ाकर हिन्दुओं को महत्वपूर्ण पदों से दूर करना है । क्योंकि निकट भविष्य में खरबों रूपये के रक्षा सौदे होने वाले थे और उनसे मिलने वाले कमीशन की राशी अरबों रूपये तक जा सकती थी और इतनी बड़ी राशी अगर अकेले श्री प्रणवमुखर्जी जी के पास रह जाती तो वे बहुत ताकतवर हो जाते और अगर आपस में बांट ली जाती तो श्री नटबर सिंह जी की तरह कभी भी पोल खोल देते(आपको याद होगा कि किस तरह तेल के बदले अनाज कार्यक्रम में दलाली का मामला सामने आने पर जब नटवर जी को बलि का बकरा बनाने की कोशिश सरकार द्वारा की गई तो उन्होंने सपष्ट कर दिया था कि ये सब एंटोनियो ने करवाया था । जरा सोचो जो एंटोनियो ईराक में भूखे मर रहे मुसलमानों के लिए जा रहे भोजन में भी दलाली ढूंढती है वो और क्या छोड़ेगी, नार्को करवाकर स्विस बैंक के खातों का पता लगाओ सब पर्दाफाश अपने आप हो जायेगा) । ऊपर से हिन्दू होने के नाते विश्वास भी तो नहीं किया जा सकता अपने संप्रदाय का थोड़े ही है । इसलिए हिन्दू प्रणबमुखर्जी को हटाकर अपने संप्रदाय के एंटनी जी को रक्षामन्त्री बनवाया ताकि सब काम आसानी से अंजाम दिये जा सकें । अगर ऐसा नहीं था तो फिर देश को बताया जाना चाहिए कि और क्या कारण था ?

रक्षा सौदों से क्वात्रोची के बारे में याद आया- कौन क्वात्रोची अरे वही क्वात्रोची जिसके बारे में कुछ समाचारपत्रों व इंटरनैट पर यह छपा था कि स्वर्गीय राजीव गांधी जी की हत्या से पहले फ्रांस के एक होटल में क्वात्रोची की बैठक एल टी टी ई प्रमुख प्रभाकरण के दूत वालासिंघम के साथ हुई थी, वही क्वात्रोची जिसके लंदन बैंक के खाते में पिछली सरकार द्वारा जब्त करवाए गए वोफोर्स दलाली काँड के पैसे को छुड़बाने के लिए वर्तमान सरकार में कानूनमन्त्री श्री हँसराज जी भारद्वाज विशेष रूप से लंदन गये ।

clip_image001 सोचने वाला विषय यह है कि बोफोर्स दलाली काँड के पैसे से न तो श्री मनमोहन जी का सबन्ध है न श्री हँसराज जी भारद्वाज का । फिर उनको ये सब करने की क्या जरूरत थी ? हमारे विचार में ये पैसे छुड़बाना इनकी जरूरत नहीं मजबूरी थी क्योंकि ये लोग जिस सरकार में मन्त्री हैं वह सरकार एंटोनियो माइनो मारीयो की गुलाम है और क्वात्रोची, एंटोनियो के परिबारिक मित्र हैं व उनके ऊपर ही वोफोर्स दलाली काँड में कमीशन खाने का आरोप है । बेचारे राजीव गांधी जी ब्यर्थ में षड्यन्त्र का शिकार हुए । हमारा तो शुरू से ही यह मानना था कि राजीव जी जैसा व्यक्ति यह सब नहीं कर सकता । इस लंदन भागमभाग से बिल्कुल स्पष्ट हो गया कि वोफोर्स दलाली काँड क्वात्रोची और एंटोनियो की साजिश थी क्योंकि अगर ऐसा न होता तो राजीव जी के कत्ल के षडयन्त्रकारी क्वात्रोची द्वारा दलाली में लिए गए पैसे को छुड़वाने की एंटोनियो को क्या जरूरत थी ?

clip_image001[1] जो देशबिरोधी-चापलूस एंटोनियो को त्याग की मूर्ति बताकर भोले-भाले हिन्दुओं को गुमराह करते हैं उन्हें एंटोनियो के इस रूप को भी नहीं भूलना चाहिए । कुछ लोग यह कुतर्क देते हैं कि एंटोनियो ने प्रधानमन्त्री पद को ठोकर मार दी , त्याग कर दिया हमें इनकी बेवकूफी पर गुस्सा नहीं तरस आता है कि जो एंटोनियो प्रधानमन्त्री बनने के लिए तत्कालीन राष्ट्रपति जी से झूठ बोलती हैं कि उसे 273 सांसदो का समर्थन प्राप्त है। वह झूठ सारे देश के सामने पकड़ा जाता है । वही एंटोनियो 2004 में प्रधानमन्त्री बनने के लिए फिर से मारी-मारी फिरती हैं वह भी उस स्थिति में जब कांग्रेस को बहुमत से लगभग आधी सीटें मिलती हैं । एंटोनियो राष्ट्रपति भवन जाती हैं खुद प्रधानमन्त्री बनने के लिए बुलाबा पत्र लेने के लिए लेकिन, देशभर में हो रहे विरोध व भारतीय संविधान की भाबना (एक्ट 1955 के अनुसार किसी देश के नागरिक को भारत में बसने पर उतने ही अधिकार मिलते हैं जितने किसी भारतीय को उस देश में बसने पर मिल सकते हैं) को ध्यान में रखते हुए जब बुलाबा पत्र नहीं मिलता है तो ह्रदय परिबर्तन हो गया, ठोकर मार दी, त्याग कर दिया, मातम मनाया गया, आँसु बहाए गए, पूरा फिल्मी ड्रामा रचा गया । भाबुक हिन्दुओं को मूर्ख बनाने के लिए वो भी लाइब सरकारी चैनल पर । ये भी न सोचा कि ये सरकारी चैनल भारतीयों की खून पसीने की उस कमाई से चलते हैं जो टैक्स के रूप में दी जाती है ,देश के विकास के लिए न कि किसी विदेशी को सत्ता न मिलने पर उसकी नौटंकी देखने के लिए । किसी ने क्या खूब कहा है- हाथ न लागे थू कौड़ी ।

जो लोग इस अंग्रेज एंटोनियो को प्रधानमन्त्री बनाने के लिए इतने कुतर्क दे रहे थे , काश उन्हें याद होता- शहीद भगत सिंह जैसे नौजवानों का इस देश से अंग्रेजों को खदेड़ने के लिए फांसी पर झूलना । काश उनको ज्ञान होता भारत के उस कानून का जिसके अनुसार सेना का कोई अधिकारी किसी विदेशी से शादी नहीं कर सकता । फिर इन अधिकारियों से देश की सुरक्षा से सबन्धित गुप्त जानकारी लेने वाला प्रधानमन्त्री विदेशी कैसे हो सकता है ?

काश उनको ज्ञान होता ईसाई बहुल देश फिजी की घटनाओं का । फिजी एक छोटा सा देश है इस देश में हिन्दुओं की बड़ी संख्या है और इन हिन्दुओं को यहां बसे हुए 20-25 नहीं सैंकड़ों वर्ष हो गए हैं। सोचो जरा वहां पर हिन्दू को अल्पसंख्यक होने के नाते क्या विशेषाधिकार प्राप्त हैं ? अरे ! क्या बात करते हो , विशेषाधिकार तो दूर मूलाधिकार तक प्राप्त नहीं हैं। भारत में इन अल्पसंख्यकों को खुश करने के लिए हिन्दू दोयम दर्जे के नागरिक बना दिये गए !

विश्वास नहीं होता तो ये जानो

कुछ वर्ष पहले यहां हुए चुनावों में फिजी की जनता ने एक हिन्दू श्री महेन्द्र चौधरी जी को प्रधानमन्त्री चुना। क्या वहां के ईसाईसों ने उन्हें प्रधानमन्त्री स्वीकार किया ? नहीं न , क्यों नहीं, जरा सोचो, हिन्दू जनसंख्या की कमी नहीं ,हिन्दू सैंकड़ों वर्षों से वहां बसे हुए हैं फिर भी विदेशी । यहां भारत में अभी कुछ वर्ष पहले आई एक विदेशी अंग्रेज (जो भारत-पाक युद्ध के दौरान भागकर अपने मूलदेश के इटालिएन दूताबास में छिप गई । यह सोच कर कि कहीं अगर भारत की हार हो गई तो सुरक्षित इटली पहुँच जांऊ )को- हर तरह के झूठ बोलकर,नाम बदलकर,वेश बदलकर -भोले भाले शांतिप्रिय हिन्दुओं को फुसालाकर उसे भारतीय बताकर, उसके गुलाम बनने की होड़ ।

एक ईसाई जार्ज स्पीट उठा दर्जन भर स्टेनगनधारी युवक साथ लिए । चुने हुए प्रधानमन्त्री महेन्द्र चौधरी को बंधक बनाया जान से मारने की धमकी देकर त्यागपत्र लिखवाकर जान बख्सी । क्या वहां पुलिस नहीं थी ? सेना नहीं थी ?(भारतीय सेना को सोचना चाहिए) क्या वहां यू .एन. ओ. नहीं था ? सब कुछ था पर वहां क्योंकि ईसाई हिन्दुओं से ज्यादा हैं इसलिए ईसाई हित में सबकुछ जायज । हमारे भारत में कुछ वर्ष पहले आई एक अंग्रेज एंटोनियो, नाम बदल कर, वेश बदल कर ,सारी की सारी सरकार को गुलाम बनाकर बैठ गई । इसलिए यहां हिन्दूविरोध में सबकुछ जायज ।

जागो ! हिन्दू जागो !

हमें इस बात में कोई संदेह नहीं कि कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व इस इटालिएन अंग्रेज के प्रभाव में आकर देशद्रोह-हिन्दूविरोध के रास्ते पर चल निकला है । परन्तु कांग्रेस में लम्बे समय से सक्रिय देशभक्त कार्य कर्ताओं की कमी नहीं, जो आज इन देशद्रोहियों की जुंडली की वजह से, योजनाबद्ध उपेक्षित किए जा रहे हैं व बड़ी जिम्मेबारियों से दूर रखे जा रहे हैं ।

हिन्दुविरोध– कांग्रेस की पुरानी आदत

 

लेकिन कांग्रेस में ऐसे देशभक्त हिन्दू कार्यकर्ताओं की बहुत बढ़ी संख्या है, जो असंगठित हैं व एक दूसरे में विश्वाश की कमी की वजह से, इन देशद्रोहियों की जुंडली के देशविरोधी-हिन्दुविरोधी षड़यन्त्रों का मुंहतोड़ जबाब देने में अपने आप को असहाय महसूस कर रहे हैं इसलिए खामोश हैं।

उन्हें अपनी चुपी तोड़ते हुए एक दूसरे पर विश्वास करते हुए संगठित होकर इस देशद्रोहियों की जुंडली को बेनकाब कर अपदस्थ करना होगा और देशभक्त लोगों को कांग्रेस के शीर्ष पदों पर बिठाकर कांग्रेस के देशविरोधी-हिन्दुविरोधी जिहादी आतंकवाद व धर्मांतरण समर्थक कदमों को रोककर देशभक्ति की राह पर चलाना होगा ।

नहीं तो हिन्दुस्थान की जनता ये मानने पर मजबूर हो जाएगी कि हरेक कांग्रेसी देशविरोधी-हिन्दुविरोधी जिहादी आतंकवाद व धर्मांतरण समर्थक है और देश मे आए दिन बम्ब विस्फोटों में मारे जाने वाले निर्दोष हिन्दुओं, सैनिकों, अर्धसैनिक बलों व पुलिस के जवानों के कत्ल के लिए जिम्मेवार है।

परिणाम स्वरूप ये सब मिलकर कांग्रेसियों के खून के प्यासे हो सकते हैं क्योंकि अब कांग्रेस के पाप का घड़ा भर चुका है । भगवान राम-जो करोड़ों हिन्दूस्थानियों के आस्था विश्वाश और श्रद्धा के केन्द्र हैं-के अस्तित्व को नकारना व सनातन में विश्वाश करने वाले शांतिप्रिय हिन्दुओं व सैनिकों को आतंकवादी कहकर जेलों में डालकर बदनाम करना-इस पाप के घड़े में समाने वाले अपराध नहीं हैं।

· वैसे भी कांग्रेस की स्थापना एक विदेशी अंग्रेज ए ओ हयूम(जो ब्यापार के बहाने भारत आकर धोखा देकर देश को गुलाम बनाने बाली ईस्ट इंडिया कंपनी का अधिकारी था) ने 1885 में विदेशियों के राज को भारत में लम्बे समय तक बनाए रखने के लिए अंग्रेजी शासकों के सहयोग से की थी । तब इसका मूल उदेश्य था क्रांतिकारियों की आवाज को जनसाधारण तक पहुंचने से रोकना और ये भ्रम फैलाना कि जनता का प्रतिनिधत्व कांग्रेस करती है न कि क्रांतिकारी।

· इसकी स्थापना का कारण बना 1857 का स्वतन्त्रता संग्राम जिससे अंग्रेजों के अन्दर दहशत फैल गई ।

· आओ ! जरा नमन करें, शहीद मंगलपांडे, झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई ,शहीद तांत्य टोपे, शहीद नाना साहिब जैसे अनगिनत शहीदों को जो राष्ट्र की खातिर बलिदान हुए।

· कांग्रेस की स्थापना के बाद कुछ समय तक अंग्रेजी शासकों को किसी अंदोलन का सामना नहीं करना पड़ा लेकिन धीरे- धीरे क्रांतिकारियों ने कांग्रेस को अपना मंच बना लिया । शहीद भगत सिंह , शहीद राजगुरू, शहीद सुखदेव, शहीद चन्दरशेखर आजाद, शहीद बाल गंगाधर तिलक , शहीद लाला लाजपतराय, शहीद विपन चन्द्र पाल जैसे असंख्य क्रांतिकारी कांग्रेस से जुड़े और देश के लिए बलिदान हुए ।

पर मोहन दास जी व नेहरू जी के नेतृत्व में कांग्रेस का एक ग्रुप क्रांतिकारियों को कभी गले न लगा पाया । वरना क्या वजह थी कि नेताजी सुभाषचन्द्र वोस (जिन्होने 1939 में कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव में पट्टाभीसीतारमैइया जी को हराया जिनका समर्थन मोहन दास जी कर रहे थे) को कांग्रेस छोड कर आजाद हिन्द सेना बनानी पड़ी ।

· शहीद भक्तसिंह जैसे प्रखर राष्ट्रवादी देशभक्त के बचाव में यह ग्रुप खुलकर सामने नहीं आया उल्टा उनको गुमराह क्राँतिकारी कहकर उनके देश की खातिर किए गए बलिदान को अपमानित करने का दुःसाहस किया । यह ग्रुप या तो अपने आप को बचाने में लगा रहा या फिर मुस्लिमों के तुष्टीकरण में लगा रहा ।

मोहन दास जी व नेहरू जी ने मुस्लिमों को प्रसन्न करने के लिए उनकी हर उचित-अनुचित, छोटी-बड़ी मांग को यह सोच कर माना, कि इनके लिए त्याग करने पर इनके अन्दर भी राष्ट्र के लिए प्यार जागेगा और ये भी हिन्दुओं की तरह शान्ति से जीना सीख जायेंगे ।

परन्तु हुआ उल्टा मोहन दास जी व नेहरू जी ने मुस्लिमों को प्रसन्न करने का जितना ज्यादा प्रयत्न किया वे उतने ज्यादा अशान्त होते चले गये ।

परिणाम हुआ धर्म के नाम पर देश का विभाजन । मुसलमानों के लिए पाकिस्तान व हिन्दुओं के लिए वर्तमान भारत । सरदार बल्लभभाई पटेल व वीर साबरकर जी ने कई बार इनके गलत निर्णयों का विरोध किया लेकिन इन पर तो धर्मनिर्पेक्षता-बोले तो-मुस्लिम तुष्टिकरण का ऐसा भूत सबार था जिसने देश को तबाह कर दिया।

उधर देश का धर्म के आधार पर विभाजन स्वीकार कर लिया । अंग्रेजों को लिख कर दे दिया कि नेताजी सुभाष चन्द्रवोस जैसा घोर राष्ट्रवादी क्राँतिकारी जब भी हिन्दुस्थान आएगा तो उसे उन दुष्ट- डकैत साम्राज्यबादियों के हवाले कर दिया जाएगा, जिन्होंने 300 वर्ष तक इस देश का लहू पानी की तरह बहाया व देशछोड़ते वक्त अपने लिए काम करने वाले को कुर्सी पर बिठाया । इधर लोगों को यह कहकर बरगलाना शुरू कर दिया कि देश आजाद करवा दिया । आज तक लोगों को यह नहीं बताया कि अगर पाकिस्तान की ओर से हस्ताक्षर सैकुलर पुराने काँग्रेसी मुहम्मदअली जिन्ना ने किए थे तो भारत की ओर से सैकुलर काँग्रेसी ज्वाहरलाल नेहरू ने किए थे या किसी और ने ?

clip_image001 उधर मुसलमानों ने हिन्दुओं का कत्लेआम शुरू कर रखा था इधर मोहन दास जी व नेहरू जी हिन्दुओं को यह कहकर बरगलाने में लगे हुए थे कि वो हमारे भाई हैं जो हिन्दुओं का कत्लेआम कर रहे हैं , हिन्दुओं की माँ बहनों की इज्जत पर हमला कर रहे हैं इसलिए आप कायर और नपुंसक बनकर हमारी तरह तमाशा देखो, जिस तरह क्रांतिकारी देश के लिए शहीद होते रहे देश छोड़ते रहे और हम अपने अंग्रेज भाईयों से सबन्ध अच्छे बनाए रखने के लिए तमाशबीन बने रहे ब क्रांतिकारियों को भला बुरा कहते रहे।

clip_image001[1] 1947 में धर्म के आधार पर विभाजन स्वीकार कर मुसलमानों के लिए अलग पाकिस्तान बनवा देने के बाद भी इन दोनों ने हिन्दुओं के हितों की रक्षा करने के बजाए हिन्दुओं के नाक में दम करने के लिए उन अलगावबादियों के वंशजों को देश में रख लिया जो देश विभाजन की असली जड़ थे व अपने हिन्दुविरोधी-देशविरोधी होने का परिचय दिया।

clip_image001[2] आज हिन्दू जानना चाहता है कि अगर हिन्दू-मुस्लिम एक साथ रह सकते थे तो देश का विभाजन क्यों करबाया गया ? और नहीं रह सकते थे तो उन्हें देश में क्यों रखा गया ?

वे कितने दूरदर्शी थे इसका पता आज आए दिन देश के विभिन्न हिन्दुबहुल क्षेत्रों में होने वाले बम्बविस्फोटों व मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में होने वाले दंगों से पता चलता है। काश ! उन्होंने बकिंम चन्द्र चटर्जी जी द्वारा लिखित उपन्यास आनंदमठ पढ़ा होता(सैकुलर गिरोह में सामिल हिन्दुओं को ये उपन्यास जरूर पढ़ना चाहिए) तो शायद वो ये गलती न करते और भारत के सर्बमान्य नेता होते और आज हिन्दू इस तरह न मारे जाते।

हम इस बात को यहां स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि हम निजी तौर पर मोहन दास जी की आर्थिक सोच व उनकी सादगी के कट्टर समर्थक हैं जिसमें उन्होंने स्वदेशी की खुलकर बकालत की । पर क्या नेहरू जी को यह सोच पसन्द थी ? नहीं न । कुर्सी की दौड़ में ईसाईयत की शिक्षा प्राप्त नेहरू जी मांउटबैटन की यारी व कुर्सी की दौड़ में इनसानित और देशभक्ति छोड़कर वो सब कर बैठे जो देशद्रोही गद्दार मुस्लिम जिहादियों और सम्राज्यबादी ईसाईयों के हित में व हिन्दुस्थान और हिन्दुओं के विरोध में था ।

कई बार मन यह सोचने पर मजबूर होता है कि मोहन दास जी के नाम जितनी भी बदनामियां हैं उन सबके सूत्रधार नेहरू जी थे । जिन हालात में मोहन दास जी के शरीर को खत्म किया गया उसके सूत्रधार भी कहीं न कहीं नेहरू जी ही थे क्योंकि नेहरू जी प्रधानमन्त्री थे, गांधी जी सुरक्षा की जिम्मेदारी उनकी थी और उनके खत्म होने का सबसे ज्यादा फायदा नेहरू परिवार ने ही उठाया। जिसके मोहन दास जी कटर विरोधी थे क्योंकि उन्होंने तो देश विभाजन के बाद ही कांग्रेस को समाप्त करने का आग्रह किया था जिसके नेहरू जी विरूद्ध थे अब जरा सोचो मोहन दास जी को किसने खत्म करवाया ?

क्या आपको याद है कि जब 1948 में पाकिस्तानी सेना ने कबाइली जिहादियों के वेश में भारत पर हमला किया तब भी नेहरू जी की भूमिका भारत विरोधी ही रही। यह वही नेहरू जी हैं जो पटेल जी के लाख समझाने के बावजूद, इस हमले का मुकाबला कर मुस्लिम जिहादी आक्रांताओं को मार भगाने के बजाए संयुक्तराष्ट्र में ले गए ।

यह वही नेहरू जी हैं जिन्होंने संयुक्तराष्ट्र की बैठक में पटेल जी के रोकने के बाबजूद, पाकिस्तान द्वारा कब्जे में लिए गए जम्मू-कश्मीर के हिस्से को बार-बार आजाद कश्मीर कहा जिसका खामियाजा भारत आज तक भुक्त रहा है। अब आप ही बताइए कि आज जम्मू-कश्मीर में मुसलमानों द्वारा मारे गये या मारे जा रहे निर्दोष हिन्दुओं व शहीद हो रहे सैनिकों के कत्ल के लिए कांग्रेस व नेहरू जी को जिम्मेवार क्यों न ठहराया जाए ?

यह वही नेहरू जी हैं जिन्होंने हिन्दुविरोधीयों को खुश करने के लिए कहा था ‘ मैं दुर्घटनावश हिन्दू हूँ ’।

आपको यह जान कर हैरानी होगी कि पचास के दशक में आयुद्ध कारखानों में नेहरू जी का जोर हथियारों की जगह सौंदर्य-प्रसाधन बनवाने पर ज्यादा था । जिसके विरूद्ध तत्कालीन राष्ट्रपति डाक्टर राजेन्द्र प्रसाद जी ने नेहरू जी को पत्र लिखकर चेताया भी था । पर नेहरू जी तो कबूतर की तरह आँखें बन्द किए हुए कहते फिर रहे थे, हमारे ऊपर कोई हमला नहीं कर सकता । वे कितने दूरदर्शी थे इसका पता 1962 में ही लग गया,जब हथियारों की कमी के कारण हमारे बहादुर सैनिकों को शहीद होना पड़ा और भारत युद्ध हार गया। हमारी मातृभूमि के एक बड़े हिस्से पर चीन ने कब्जा कर लिया।आओ उन शहीदों को हर पल प्रणाम करने का प्रण करें । काश नेहरू जी को पता होता कि शान्ति बनाए रखने का एकमात्र उपाय है युद्ध के लिए तैयार रहना।

Ø कांग्रेस का इस्लांम में व्याप्त बुराई यों का समर्थन करना व उन्हें बढ़ाबा देने का इतिहास कोई नया नहीं है यह मामला शुरू होता है तुर्की में चलाए जा रहे खिलाफत आन्दोलन के समर्थन से । बाद में ये कांग्रेस जन्म देती है जिन्ना जैसे नेताओं को, जो आगे चलकर पाकिस्तान की माँग उठाते हैं, कांग्रेस मुसलमानों के लिए पाकिस्तान बनवाती है, इस दौरान जिहादी मुसलमान हिन्दुओं पर जगह-जगह हमला करते हैं, हिन्दू मारे जाते हैं परन्तु कांग्रेस यह सुनिश्चित करने का भरसक प्रयास करती है कि कोई मुस्लिम जिहादी आतंकी न मारा जाए ।

Ø मानो इतने हिन्दुओं का खून पी लेने के बाद भी इस कांग्रेस नामक डायन की प्यास न बुझी हो इसलिए इस डायन ने यह सुनिश्चित किया कि भारत के हिन्दुओं वाले हिस्से को हिन्दूराष्ट्र न बनने दिया जाए । इस कांग्रेस नामक डायन द्वरा यह भी सुनिश्चित किया गया कि भविष्य में हिन्दू सुखचैन से न जी सकें और कांग्रेस का वोट बैंक भी चलता रहे । अपने इस मकसद को पूरा करने के लिए कांग्रेस ने भारत का विभाजन करवाने वाली, देशद्रोही जिहादी औंरगजेब और बाबर की संतानों को, यहां रख लिया ताकि हिन्दूराष्ट्र भारत में हिन्दुओं का खून पानी की तरह बहाया जाता रहे ।

Ø अब आप ही फैसला करें कि भारत में मुस्लिम जिहादी आतंकवादियों द्वारा भारतीय संस्कृति के प्रतीक दर्जनों मन्दिरों पर किए जा रहे हमलों, मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में हिन्दुओं को चुन चुन कर मार कर या हिन्दुबहुल क्षेत्रों में बम्बविस्फोट करके चलाए जा रहे हिन्दू मिटाओ अभियान के लिए कांग्रेस को जिम्मेवार क्यों न माना जाए ?

Ø अगर जिम्मेवार ठहराया जाए जो कि है तो क्यों न उसके विरूद्ध देशब्यापी गद्दार मिटाओ अभियान चलाकर उसी के बापू द्वारा 1947 में लिए गए कांग्रेस मिटाओ के निर्णय को आज 2009 से शुरू कर 2020 से पहले-पहले पूरा किया जाए ।

जिन दो नेताओं की क्राँतिविरोधी हिन्दुविरोधी मुस्लिमपरस्त षड्यन्त्रकारी सोच के चलते कई क्रांतिकारी शहीद होकर भी हिन्दूस्थानी जनता के अखण्ड भारत के स्वप्न को पूरा न कर सके । उन्हीं दो नेताओं में से कांग्रेसियों ने एक को अपना बापू व दूसरे को अपना चाचा बना लिया( उन दोनों की आत्मा से हम क्षमा मांगते हैं अगर उनकी कोई ऐसी मजबूरियां रहीं हों जो हम नहीं समझ पा रहे हैं । ये सबकुछ हम हरगिज न लिखते अगर मोहन दास जी की बात मान कर कांग्रेस को बिसर्जित कर दिया गया होता । तो न यह कांग्रेस इस तरह भगवान राम के अस्तित्व को नकारती, न देशद्रोह के मार्ग पर आगे बढ़ती। बेशक उनकी मजबूरियां रही हों पर आज की कांग्रेस की कोई मजबूरी नहीं है इसके काम स्पष्ट देशद्रोही और हिन्दुविरोधी हैं ये हम सब हिन्दू देख सकते हैं ) ।

फिर प्रचार के हर साधन व सरकारी तन्त्र का दुरूपयोग कर इन्हें सारे देश का बापू व चाचा प्रचारित करने का असफल प्रयत्न किया गया । यह देश को कांग्रेस की हिन्दुविरोधी-देशविरोधी जिहाद व धर्मांतरण समर्थक सोच का गुलाम बनाने जैसा था ।

प्रश्न ये भी उठता है कि जिस देश की सभ्यता संस्कृति इस दुनिया की सबसे प्राचीनतम हो व जिस देश के साधारण राजा अशोक महान जी व विक्रमादित्य जी को हुए 2000 वर्ष से अधिक हो चुके हों क्या ऐसे देश का बापू या चाचा 79 वर्ष का हो सकता है ?

नहीं ,न । वैसे भी जिस देश के आदर्श मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्री राम हों, उस देश को किसी छदम राजनीतिज्ञ या मझे हुए विस्वासघाती राजनीतिज्ञ को- वो भी उसे जो कभी खुलकर भारतीय संस्कृति का सम्मान न कर पाया हो- ऐसा स्थान देने की आवश्यकता ही क्या है ?

अगर आपको ये बात समझ नहीं आ रही है तो आप जरा ईराक के बारे में सोचिए । सद्दाम हुसैन बेशक मुसलमान था पर जिहादी नहीं था। वेशक तानाशाह था पर हमारे नेताओं की तरह देशद्रोही नहीं था । उसने अपने देश के साथ कभी गद्दारी नहीं की । उसने जो भी किया देशहित में किया । मतलब वो पक्का देशभक्त मुसलमान था । उसने कभी विदेशी अंग्रेज ईसाईयों की गुलामी स्वीकार नहीं की । दूसरी तरफ ईराक के कुछ सद्दाम विरोधी गद्दारों ने अंग्रेज ईसाईयों के साथ मिलकर उसके विरूद्ध देश हित के विपरीत काम किया । परिणाम ईराक में देशभक्त सद्दाम को फाँसी चढ़ाकर अंग्रेजों ने सत्ता इन गद्दारों को सौंप दी । यही सब कुछ अफगानिस्तान में किया गया वहां के देशभक्त शासक को हटाने के लिए तालिबान को पाला गया फिर तालिबान को हटाकर वहां पर अंग्रेज ईसाईयों ने ईसाईयों के बफादार व्यक्ति को शासक बना दिया ।

यही सबकुछ भारत में घटा था यहां भी सत्ता नेताजी सुभाषचन्द्र वोस, पटेल जी या वीर साबरकर जैसे किसी देशभक्त को न सौंपकर अंग्रेज ईसाईयों के प्रति बफादार हिन्दुविरोधी को सौंपी गई। जिसका परिणाम यह हुआ कि मैकाले द्वारा बनाई गई हिन्दुविरोधी ईसाई समर्थक शिक्षा नीति व कानून आज भी चालू है । आज भी भारत का नाम भारतीयों द्वारा दिया गया भारत नहीं, बल्कि अंग्रेज ईसाईयों द्वरा दिया गया गुलामी का प्रतीक इंडिया प्रचलित है ।

आज भी भारत में किसी ईसाई या मुस्लिम के मरने पर तो जिहाद व धर्मांतरण समर्थक गिरोह मातम मनाता है पर हिन्दू के शहीद होने पर इस गिरोह द्वारा खुशियां मनाइ जाती हैं । ईसाई पोप के मरने पर राष्ट्रीय शोक घोषित किया जाता है। साधु सन्तों को यातनांयें दी जाती हैं, अपमानित किया जाता है। देश में हजारों हिन्दुओं का खून बहाने वाले जिहादियों को बचाने के लिए कठोर कानून का विरोध किया जाता है और जिहादियों के हमलों से बचाने के लिए हिन्दुओं को जागरूक कर संगठित करने वाली देशभक्त बीरांगना साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, उसके देशभक्त सहयोगियों व सेना के अधिकारीयों को जेल में डाला जाता है । आतंकवादी कहकर अपमानित करने का प्रयास किया जाता है । जबकि आँध्रप्रदेश में हिन्दुबहुल क्षेत्रों में बम्बविस्फोट के आरोपियों को जेल से छोड़कर ईसाई कांग्रेसी मुख्यमन्त्री द्वारा तोहफे में आटोरिक्सा दिए जाते हैं !

§ हमें बड़ी हैरानी होती है जब हम किसी को 15 अगस्त 1947 को भारत का स्वतन्त्रता दिवस कहते हुए सुनते हैं । क्योंकि सच्चाई यह है कि इस दिन भारत को तीन टुकड़ों मे बांटा गया था, दो मुसलमानों को लिए (वर्तमान पाकिस्तान व बांगलादेश), एक हिन्दुओं के लिए (वर्तमान भारत) । पाकिस्तान व बांगलादेश में जो हिन्दू रह गए थे वो आज गिने-चुने रह गए हैं बाकी या तो इस्लाम अपनाने पर बाध्य कर दिय गए,भगा दिए गये या जिहादियों द्वारा जन्नत पाने के लिए हलाल कर दिए गये व किए जा रहे हैं लेकिन भारत में जो मुसलमान रह गए थे वो आज 300% से भी अधिक हो गए हैं और मुस्लिम जिहादी आतंकवादियों को शरण, सहायता व सहयोग देकर हिन्दुओं का कत्ल करवा रहे हैं।

§ क्योंकि पाकिस्तान व बांगलादेश की तरह भारत में भी शासन हिन्दुविरोधी जिहाद समर्थकों ने किया और हिन्दुविरोधी कानून बनाकर हिन्दुओं को अपूर्णीय क्षति पहुँचाई ।आज भारत में ही जिहादी आतंकवाद जारी है देश के विभिन्न हिस्सों में जिहादियों द्वारा हिन्दुबहुल क्षेत्रों,मन्दिरों ,सेना ब पुलिस की गाड़ियों व कैंपों में बम्बविस्फोट कर हजारों हिन्दू मारे जा चुके हैं। इन मुस्लिम जिहादियों द्वारा इतने निर्दोश हिन्दुओं का कत्ल कर देने के बावजूद जिहाद समर्थक सैकुलर हिन्दुविरोधी देशद्रोही गिरोह का जिहादियों को समर्थन आज भी जारी है ।

अल्पसंख्यकवाद के बहाने देशद्रोह

 

इस देशद्रोही हिन्दुविरोधी गद्दारों के सेकुलर गिरोह द्वारा अल्पसंख्यकवाद व धर्मनिर्पेक्षता जैसे प्रावधानों का उपयोग जिहादियों व धर्मांतरण के ठेकेदारों के षड्यन्त्रों को आगे बढ़ाने व हिन्दूविरोध के लिए इस हद तक किया जा रहा है कि अब देश की आम राष्ट्रभक्त हिन्दू जनता में यह धारणा बन चुकी है कि अल्पसंख्यकवाद व धर्मनिर्पेक्षता जैसे प्रावधान गद्दारी व देशद्रोह के ही पर्यायवाची हैं ।

देश को बचाने के लिए इन दोनों ही प्रावधानों को यथाशीघ्र समाप्त किया जाना परम आवश्यक है नहीं तो ये देशद्रोही हिन्दुविरोधी गद्दारों का सेकुलर गिरोह अल्पसंख्यकवाद व धर्मनिर्पेक्षता की आड़ में भारतीय सभ्यता व संस्कृति को तबाह कर, न जाने देश के कितने टुकड़े और करवा देगा । जिसका परिणाम हिन्दुओं को यहूदीयों की तरह दर-दर की ठोकरें खानें या फिर मरने पर मजबूर कर देगा । क्योंकि 9वीं शत्ताब्दी में अफगानिस्तान व 20वीं शताब्दी में पाकिस्तान बांगलादेश बनने पर जो हिन्दू जिहादियों के हमलों से बच निकले वो भागकर भारत आ गये पर अगर वर्तमान भारत भी न रहा तो कहाँ जाँएगे ?

लोग कहते हैं युनान मिश्र रोमां सब मिट गये।

कुछ बात है के हस्ती मिटती नहीं हमारी।।

पर यह भी सत्य है कि

उस कौम का इतिहास नहीं होता।

जिसको मिटने का एहसास नहीं होता।।

संभल कर एकजुट होकर कदम उठाओ ए हिन्दूओ ।।।

बर्ना तुम्महारी दास्तान तक न होगी दास्तानों में।।।।

आओ जरा भारत में अल्पसंख्यक बनाए गए घटकों का वही खाता खंगाले। वास्तव में अल्पसंख्यक आयोग का गठन ही मुसलमानों को विशेषाधिकार देने के उद्देश्य से किया गया था । ये मुसलमान ही इस आयोग के प्रमुख नीति-निर्धारक हैं । ये मुसलमान वही है जिनके भले के लिए 1947 में संप्रदाय के आधार पर अखण्ड भारत का विभाजन करवाकर वर्तमान पाकिस्तान बांगलादेश बनाए गये जो कि मुसलमानों के लिए हैं ।

o पाकिस्तान, बांगलादेश बनाने का कारण भी कोई दबा छुपा नहीं है सबको जानकारी है कि इस्लाम एक तरफ सूफी सन्तों को जन्म देता है जो भाईचारे की बात कर, अब्दुल हमीद को जन्म देते हैं । पर उससे हजारों गुना ज्यादा इस्लाम के नाम पर ऐसी राक्षसी प्रबृतियों का जन्म होता है जो इस्लाम के सिबा और किसी विश्वास के अस्तित्व को स्वीकार नहीं करतीं। यहाँ तक जो मुस्लिम होने के बावजूद कत्लोगारद का विरोध या निन्दा करते हैं उन्हें भी काफिर कहकर मौत के घाट उतारने की पैरवी की जाती है । इसी प्रबृति की वजह से 1947 में जिहादियों ने हिन्दुओं का खून बहाकर इस देश को अपनी मातृभूमि मानने व हिन्दुओं के साथ रहने से मना कर दिया ।

o आज लगभग फिर वही स्थिति देश में बन चुकी है मुसलमानों के जिहादी प्रतिनिधियों ने वन्देमातरम् का विरोध कर भारत को अपनी मातृभूमि मानने से मना कर दिया है। सारे देश में हिन्दुबहुल क्षेत्रों व मन्दिरों में बम्ब विस्फोट कर हिन्दुओं का खून बहाकर अपने जिहादी अल्लाह को पिलाना शुरू कर दिया है ताकि बदले में ये आदमखोर जिहादी अल्लाह इनको जन्नत दे दे ।

हमें तो समझ ये नहीं आता कि जिस आदमखोर अल्लाह का पेट पूरे अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बांगलादेश, कश्मीरघाटी , गोधरा में रेल के डिब्बे व आसाम के इतने सारे हिन्दुओं का खून पीकर नहीं भरा क्या उसका पेट अब मुठी भर बचे हिन्दुओं के खून से भर पाएगा। नहीं ,ऐसा सम्भव नहीं, इसी लिए दुनियाभर के विभिन्न गैर मुस्लिमों व जहां गैर मुस्लिम न मिलें वहां पर उदार मुस्लिमों के खून से भी काम चलाना पड़ रहा है।

o इस जिहादी अल्लाह को तो मानो शांतिप्रिय हिन्दुओं के शिकार का चस्का ही लग गया है क्योंकि इस जिहादी अल्लाह ने मुहम्मदबिन कासिम के रूप में भारत में प्रवेश किया और हिन्दुओं का खून पीने लगा । उसके बाद मुहम्मदगौरी, औरंगजेब व बाबर के वक्त तो ये जिहादी अल्लाह मानो पानी की जगह भी हिन्दुओं का खून ही पीने लगा।

फिर महाराणा प्रताप,छत्रपति शिवाजी,महारानी लक्ष्मीबाई, वीर तांत्यटोपे, गुरू तेगबहादुर जी, उनके बेटे श्री गुरूगोविन्द सिंह जी व उनके चार बहादुर बेटों ने इस आदमखोर जिहादी अल्लाह के दान्त तोड़कर भारत से हिन्दुओं के खून के प्यासे आदमखोर जिहादी अल्लाह को मार भगाने की बहुत कोशिश की पर अफसोस हिन्दुओं के सैकुलर गिरोह की कबूतर की तरह बन्द आँख आज तक न खुली। कभी जयचन्द पैदा हो गये तो कभी जयचन्द के बंशज सैकुलर नेता । जो हमेशा इस आदमखोर जिहादी अल्लाह व उसके द्वारा प्रेरित जिहादियों के समर्थन में खड़े नजर आए । बाकी रणबांकुरों व वीरांगनाओं की बात तो छोड़ो इन बेशर्म धर्मनिर्पेक्षतावादियों को श्री गुरूगोविन्द सिंह जी के चार-चार बेटों के बहे लहु की भी लाज न आई ।

अब सोचने की बात ये है कि जो हिन्दुओं के खून का प्यासा है वो इनसान है या शैतानी राक्षस ? स्पष्ट रूप से शैतानी राक्षस है। उसका बंशज कहलवाने में फक्र महसूस करने वाले मुस्लिम जिहादी, सैकुलर नेता व मीडिया जो हर हाल में उसका गुणगान व समर्थन करके हिन्दुओं को मरवाने के लिए अनुकूल महौल बनाकर व अफवाहें फैलाकर हिन्दुओं को आपस में लड़बाकर, मर्यादा पुरूषोतम भगवान श्री राम के अस्तित्व को नकारकर व साध्वी प्रज्ञा सिंह जैसी बीरांगनाओं व उसके नेतृत्व में इस जिहादी अल्लाह को मिटाने के लिए संघर्षरत जवानों को जेलों में डलवाकर बदनाम करने के लिए अफवाहें फैलाकर इस आदमखोर जिहादी अल्लाह को खुश रखने का लगातार प्रयास कर रहे हैं। क्या वे हिन्दुओं के खून के प्यासे आदमखोर अल्लाह से कम हैं ?

clip_image001 यहाँ पर यह बात गौर करने वाली है कि इस्लाम में दो तरह के अल्लाह हैं । एक वे जिसको आम देशभक्त मुसलमान अल्लाह कहता है जो शान्ति और भाईचारे की बात करता है, सूफी सन्तों को जन्म देता है, देशभक्तों ,नमक हलालों को जन्म देता है ।

clip_image001[1] दूसरा आदमखोर जिहादी अल्लाह जिसे जिहादी अल्लाह या शैतान कहते हैं जो जिहादियों को जन्म देता है जिसकी शैतानी पुस्तक में लिखा है कि गैर जिहादियों को हलाल करने से जन्नत नसीब होती है । देशद्रोह, नमक हरामी व गद्दारी जिहादियों का पहला कर्तव्य है।

clip_image001[2] यही पुस्तक 7 वीं शत्ताब्दी से आज 21 वीं शताब्दी तक भारत को लहूलुहान करती आ रही है। सुलतानों, मुगलों, औरंगजेब , बाबर, अफजल, आतिफ, अबुबशर जैसे सैतानों को जन्म देती आ रही है और हिन्दुओं का खून बहाती आ रही है भारत के टुकड़े करवाती आ रही है।

अगर मानवता भाईचारे और शांति के प्रतीक, अंतिम सांसे ले रहे, मेरे प्यारे भारत को बचाना है तो मेरे प्यारे देशभक्त नमकहलाल भारतीयों को जात-पात, ऊंचनीच, छुआछूत ,संप्रदायवाद, क्षेत्रवाद ,पार्टीवाद सब भूलाकर एकजुट होकर गुरू गुरूगोविन्द सिंह जी के मार्ग पर चलकर नमक का कर्ज चुकाकर इस आदमखोर जिहादी अल्लाह, जिहादियों व उसके कट्टर समर्थक सैकुलर गद्दारों का नामोनिशान मिटाना है ।

आज सुबह (07नवम्बर2008) हमने ये पिछला पेज लिखा और आज ही जिहादी अल्लाह के वंशज मुस्लिम जिहादियों और शांतिप्रिय मुसलमानों के बीच संघर्ष शुरु हो गया। ओसामाबिन लादेन के समर्थक मुस्लिम जिहादियों के विरूद्ध अल्लाह के वंशजों ने फतबा जारी कर दिया कि ओसामा की सोच का प्रचार प्रसार इस्लाम के विरूद्ध है ।

अल्लाह के बन्दों ने दो कदम आगे बढकर इस आदमखोर जिहादी अल्लाह के बंशज जाकिर हुसैन को व इस जिहादी द्वारा चलाए जा रहे टी वी चैनल(पीस) को मिल रहे बेशुमार पैसे की जांच करवाने की भी मांग की । भारतीयों को अमन चैन के प्रतीक अल्लाह व खूनखराबे की जड़ इस आदमखोर जिहादी अल्लाह के अन्तर को यथाशीध्र समझना होगा व अल्लाह के बन्दों का साथ देकर इस आदमखोर जिहादी अल्लाह को मिटाना होगा। नहीं तो ये सब भारतीयों को हिंसा की आग में जलाकर राख कर देगा।

आपको यह जान कर हैरत होगी कि जिस देशबिरोधी चैनल(एन डी टी वी) पर ये सब दिखाया जा रहा था उस चैनल ने अल्लाह के बन्दों का पक्ष लेने के बजाए आदमखोर जिहादी अल्लाह के जिहादी जाकिर हुसैन का पक्ष लिया ।

सोचने वाला विषय यह भी है कि जिस हिन्दुविरोधी-देशविरोधी जिहाद व धर्मांतरण समर्थक सरकार ने साध्वी व उसके देश भक्त सैनिक सहयोगियों को बिना सबूत जेल में डालने में इतनी जल्दबाजी दिखाई क्या वो सरकार इस जिहादी नासिर हुसैन के कुकर्मों को रोकने के लिए कोई कदम उठा पायेगी ?

हम वर्तमान भारत में अल्पसंख्यक आयोग की प्रासंगिकता पर बात कर रहे थे ये भारत अखण्ड भारत का वो हिस्सा है जो 1947 में अखण्ड भारत को विभाजित कर मुसलमानों के लिए दिए गये दो हिस्सों के बाद बचा है। स्वाभाविक व न्यायिक रूप से यह हिस्सा इस देश के मूल निबासियों हिन्दुओं का है जिसका सही नाम हिन्दूराष्ट्र भारत ही है । जिस किसी को भी इस नाम व हिन्दुओं के अधिकार पर आपत्ति है उसे प्राकृतिक न्याय के हिसाब से इस देवभूमि भारत में रहने का कोई अधिकार नहीं है । जो भी इस देश में रह रहा है उसे इस बात को अच्छी तरह से समझ लेना होगा कि हिन्दू संस्कृति और सभ्यता ही भारतीय संस्कृति और सभ्यता है जो खुद को हिन्दू नहीं मानता वो भारतीय कैसे हो सकता है और जो भारतीय नहीं वो यहां का नागरिक नहीं आगंतुक है उसे आज नहीं तो कल हमारी मातृभूमि को छोड़ना होगा ।

अब विचार करने वाली बात यह है कि जिन मुसलमानों को हिन्दू होने पर आपत्ति थी उनके लिए अखण्ड भारत को तोड़कर पाकिस्तान ,वंगलादेश बनवा दिए गए। जो भारत में रह गए वो सभी हिन्दू हैं फिर अल्पसंख्यक आयोग की क्या जरूरत ? अगर वो खुद को हिन्दू नहीं मानते फिर यहां रहे किस लिए और अभी भी क्या बिगड़ा है सारी सीमांयें खुली हैं, बसें जा रही हैं, जब वहां से इतने सारे घुसपैठिए-जिहादी आ रहे हैं तो इनको जाने से कौन रोकेगा ?

clip_image001[3] वैसे आज जागरूक हिन्दू एक साधारण सा प्रश्न पूछता है कि क और ख दो सगे भाई हैं क और ख के माता पिता के सिर्फ दो ही बच्चे हैं क लड़-झगड़ कर माता पिता के रहते ही अपना हिस्सा अलग करवा लेता है अब माता पिता की मृत्यु होने पर बाकी का हिस्सा किस्का है ? सीधा सा उत्तर है ख का ।

वैसे हिन्दू द्वारा ये प्रश्न पूछना भी उसकी उदारता का ही प्रतीक है क्योंकि जिन जिहादीयों से ये प्रश्न पूछा जा रहा है वो तो आक्राँता है भारत उसका मूल निबास नहीं बल्कि उपनिबेस था जिसका विभाजन करवाकर उसने तीन(अफगानिस्तान,पाकिस्तान,वंगलादेश) हिस्सों को हमेसा के लिए अपना उपनिवेश बना लिया ।अब इन जिहादीयों को चाहिए कि अपने उपनिवेश में रहकर जो मरजी करें और वर्तमान भारत को न छेड़ें क्योंकि अगर जागरूक हिन्दुओं व उनके संगठनों की तरह कहीं गलती से भी इस हिन्दुविरोधी देश विरोधी जिहाद व धर्मांतरण समर्थक सैकुलर गिरोह में शामिल हिन्दुओं को भी अगर भारतीय संस्कृति और सभ्यता के विरोधी आदमखोर जिहादी अल्लाह व जिहादियों की असलिएत समझ में आ गई तो भारत तो भारत बाकी के तीन हिस्से भी इन जिहादियों को खाली करने पड़ सकते हैं ।

अब आप ही फैसला करो कि जिस इस्लाम ने अखण्ड भारत पर हमला कर कब्जा कर लिया, हिन्दुओं पर बेपनाह जुलम ढाये, संस्कृति और सभ्यता को नष्ट करने का हर सम्भव प्रयास किया, शांति और भाईचारे के प्रतीक हजारों मन्दिर तोड़े, अन्त में देश का विभाजन करवाकर उसके बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया । क्या वह इस्लाम उस अखण्ड भारत के बचे हुए छोटे से हिस्से वर्तमान भारत में अल्पसंख्यक का दर्जा पाने का हकदार है ?

o अब रही बात उन मुसलमानों की जो अल्लाह को तो मानते हैं पर आदमखोर जिहादी अल्लाह को नहीं मानते । ऐसे शांतिप्रिय देशभक्त नमकहलाल मुसलमान जो इस देश को अपनी मातृभूमि मानते हैं को अल्पसंख्यक कहना उनका अपमान है क्योंकि अपनी मातृभूमि में कोई अल्पसंख्यक कैसे हो सकता है। अब आप ही बताओ अल्पसंख्यक आयोग की क्या जरूरत है ?

आओ अब अल्पसंख्यक आयोग के दूसरे घटक ईसाईयों की बात करें । यह वही संप्रदाय है जो 16 वीं सदी में ब्यापार के बहाने भारत पर कब्जा जमाकर बैठ गया और 300 वर्ष तक इन ईसाईयों ने इस देश को जमकर लूटा । यहां के मूल निबासी हिन्दुओं व कई वर्षों से कब्जा जमाकर बैठे मुसलमानों पर इन ईसाईयों ने जी भरकर जुल्म ढाए । ये तो भला हो शहीद भगत सिंह, शहीद राजगुरू, शहीद सुखदेव, शहीद चन्दरशेखर आजाद, शहीद बाल गंगाधर तिलक , शहीद लाला लाजपतराय, शहीद विपन चन्द्र पाल जैसे अनगिनत ज्ञात और अज्ञात क्रांतिकारियों का जिनके बलिदानों ने भारतीयों के अन्दर इन अंग्रेजों को भगाने की ज्वाला को हमेसा जगाए रखा और अन्त में नेताजी सुभाष चन्द्रवोस की आजाद हिन्द सेना के डर से इन अंग्रेज ईसाईयों को भारत छोड़ कर भागना पड़ा।

क्या कहें उस नेहरू जी को जिसने दुष्ट ईसाई अफसरों व उनकी घरबालियों की दोस्ती में फंस कर उनकी नजायज बातों को मान कर देश को एक ऐसी हिन्दुविरोधी दिशा देने का अपराध किया जो आज देशद्रोहियों व गद्दारों को भारतीय संस्कृति व सभ्यता के रक्षक देशभक्त हिन्दुओं और उनके संगठनों पर हर तरह से हमला करने में सहयोग दे रही है । अब आप खुद फैसला करो कि ये ईसाई समुदाय जो भारत की बरबादी के लिए हर तरह से जिम्मेवार है क्या अल्पसंख्यक का दर्जा पाने के काबिल है ? नहीं न ।

वैसे भी जिस ईसाई संप्रदाय से सबन्धित अंग्रेज इटालिएन एंटोनियो माइनो मारियो सारी की सारी भारत सरकार को गुलाम बनाकर बैठी हो व जिसके निर्देश पर गुलाम सरकार देशद्रोह के रास्ते पर चलते हुए देशभक्त साधुसंतो व सैनिकों को जेल में डाल रही हो, भारतीय संस्कृति व सभ्यता के आधार स्तम्भ मर्यादा पुर्षोतम भगवान श्री राम के अस्तित्व को नकार रही हो उस संप्रदाय को अल्पसंख्यक का दर्जा देना कैसे उपयुक्त हो सकता है ?

मेरे प्यारे नासमझ हिन्दूओ क्या आपने कभी सोचा कि जिनके आप गुलाम रहे, जिन्होंने असहनीय यातनांयें देकर हिन्दुओं को सताया, हिन्दुओं को हर अधिकार से वंचित किया, आज वो ही इन गद्दार हिन्दुविरोधी नेताओं द्वारा अल्पसंख्यक का दर्जा देकर विशेषाधिकार के अधिकारी कैसे वना दिए गए।

जिस मजहब का संचालन आज भी भारत के बजाए इटली के रोम से होता हो ,जिस संप्रदाय के अनुयायी हिन्दुओं के धार्मिक गुरू व समाज सेवक स्वामी लक्ष्मणानन्द जी का कत्ल करने का दुस्साहस कर सकते हों । इसके परिणामस्वरूप पड़ी मार पर संसार के अधिकतर ईसाई देशों में हिन्दुओं के विरूद्ध महौल बनाने व भारत विरोधी प्रदर्शन करवाने में समर्थ हों उन्हें अल्पसंख्यक दर्जे की क्या जरूरत ?

सेकुलर गिरोह का हिन्दु-सिखों पर हमला

 

ü आज अगर अपने देश भारत में भारतीय जीवन पद्धति की रक्षा व उसमें व्याप्त बुराईयों को दूर करने के लिए हिन्दू समाज की प्रेरणा के स्रोत परम पूजनीय गुरूओं द्वरा स्थापित संप्रदाय से सबन्धित सिख भी अपनी अलग पहचान पर जोर दे रहे हैं तो यह बहुत ही चिन्ता का विषय है क्योंकि यह इस हिन्दुविरोधी जिहाद व धर्मांतरण समर्थक देशद्रोही गिरोह द्वारा भारत को सदियों तक गुलामी की जंजीरों में जकड़ कर हिन्दुओं सिखों का खून बहाने वाले ईसाईयों व मुसलमानों को खुश करने के लिए बहुसंख्यक हिन्दुओं पर ढाये गये असहनीय अत्याचारों का ही असर है ।

अपने देश भारत में आज अल्पसंख्यकवाद व धर्मनिर्पेक्षता के नाम पर हिन्दुओं को मानसिक, सारीरिक व आर्थिक रूप से जिस तरह वंचित व प्रताड़ित किया जा रहा है ऐसे हालात में कौन जागरुक हिन्दू चैन से बैठ सकता है ?

· आज अगर आप सरकारी कर्मचारी हैं और हिन्दू हैं तो एक पत्नी के रहते दूसरी शादी करने पर आपकी नौकरी जा सकती है पर अगर आप मुसलमान हैं तो चाहे चार-चार शादियां करो !

इस नियम की वजह से आज तक कई हिन्दू सरकारी कर्मचारी इस्लाम अपना चुके हैं जिसका सबसे बढ़ा प्रमाण तब मिलता है जब कांग्रेस का एक उपमुख्यमन्त्री व एक सेवादल प्रमुख हिन्दुओं पर लागु प्रतिबंध से बचने के लिए इस्लाम अपनाकर दूसरी शादी करते हैं ।

जो लोग खुद को सैकुलर बोलते हैं वो वास्तव में सैकुलर नहीं हिन्दुविरोधी हैं और इसी हिन्दूविरोध के चलते ये गद्दार ऐसे नियम बना चुके हैं व बना रहे हैं जिससे देश में हिन्दू विरोधी हालात की वजह से हिन्दू हर तरह से प्रताड़ित हो रहे हैं ।

· अगर आप हिन्दू हैं तो आपके द्वारा हिन्दू धर्म का प्रचार प्रसार व जिहादी आतंकवाद का विरोध सांप्रदायिकता है पर मुस्लिम होने पर चाहे आप इस्लाम के बहाने जिहादी आतंकवाद का प्रचार प्रसार करो या शहीदों का अपमान करो या फिर देशभक्तों का खून बहाओ सब आपका अधिकार है !

· अगर आप हिन्दू हैं तो दो से ज्यादा बच्चे करने पर आप कई जगह चुनाव के अयोग्य ठहराये जा सकते हैं पर मुस्लिम होने पर चाहे आप जितने चाहो उतने बच्चे करो मतलब चाहे आप 50 बच्चे पैदा करो आपको खुली छूट है आपका हौसला बना रहे इसके लिए गुलाम प्रधानमन्त्री मनमोहन सिंह ने घोषणा कर रखी है कि उनकी सरकार मुस्लिमबहुल जिलों का विकास करेगी क्योंकि हिन्दुबहुल जिलों से इस हिन्दुविरोधी सरकार को हिन्दूक्रांति का डर सताता है !

· अगर आप हिन्दू हैं और आप पर अल्पसंख्यक बोले तो ईसाईयों व मुसलमानों द्वारा हमला बोल दिया जाए और आप मार खाने या मरने के बजाए विरोध करें तो अल्पसंख्यक व मानवाधिकार आयोग अल्पसंख्यक की रक्षा का प्रश्न उठाकर सरकार पर दबाव बनाकर आपको आजादी से जीने के अधिकार से वंचित कर सकते हैं।

अगर इतने से काम न चले तो तालिबानी मीडिया का उपयोग कर देश विदेश में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार हो रहे हैं ऐसा चिला- चिलाकर दुष्प्रचार कर हिन्दुविरोधी माहौल बनाकर माननीय न्यायालय में झूठे साक्ष्य देकर आपकी जिन्दगी को खत्म भी करवाया जा सकता है।

पर मुस्लिम होने पर चाहे आप हिन्दुओं को हलाल कर हिन्दुओं का नामोनिशान मिटा दो (जैसे कश्मीर में मिटाया व बाकी जगह हिन्दुबहुल क्षेत्रों में बम्ब विस्फोट कर कोशिश चल रही है),हिन्दुओं को जिन्दा जला दो, ये हिन्दुविरोधी जिहाद व धर्मांतरण समर्थक देशद्रोही गिरोह आपका पूरा सहयोग करेगा सैकुलर सरकार आपको बिशेष आर्थिक पैकेज देगी और जरूरत पड़ने पर आपको माननीय न्यायालय द्वारा सुनबाइ गई सजा को रोककर आम मुसलमानों को भी आपका सहयोग करने को प्रेरित करेगी ।

· अगर आप हिन्दू हैं और मन्दिर निर्माण की बात करते हैं तो ये हिन्दुविरोधी जिहाद व धर्मांतरण समर्थक देशद्रोही गिरोह सबाल उठाएगा कि इतने लोग भूख से मर रहे हैं और आप मन्दिर की बात कर रहे हैं ।आप गरीब विरोधी हैं । अपने देश के अन्दर ही धार्मिक यात्रा के लिए तरह तरह के नाम देकर पैसे बसूले जांएगे ।

लेकिन अगर आप मुसलमान हैं तो यही गिरोह आपको हज यात्रा के लिए 50000 रूपये प्रति मुसलमान प्रतिवर्ष देगा और यहां तक कि माननीय न्यायालय द्वारा लगाई गई रोक को भी नहीं मानेगा । जेरूसलम की यात्रा के लिए भी 80000 रूपये प्रति ईसाई देगा।

पता है क्यों ? क्योंकि ऐसा करने से शेखों व धर्मांतरण के ठेकेदारों द्वारा डाले गये टुकडों से इस गिरोह की अपनी गरीबी दूर होती है ।

· अगर आप हिन्दू हैं और संगठित होने के लिए कोई संगठन बनाते हैं तो ये हिन्दुविरोधी जिहाद व धर्मांतरण समर्थक देशद्रोही गिरोह आपके संगठनों के विरूद्ध तरह-तरह के षडयन्त्र रच कर उन्हें बदनाम करने का हर सम्भव प्रयत्न करेगा उन पर प्रतिबन्ध लगाने की कोशिश करेगा। पर अगर आप ईसाई या मुसलमान हैं तो फिर आपके संगठनों को हर तरह का सहयोग देना इस गिरोह का पहला कर्तव्य है। चाहे आप ईसाई या मुसलमान आतंकवादी संगठन ही क्यों न बनायें।

· अगर एम एफ हुसैन जैसे मुसलमान हिन्दू देवी देवताओं को अपमानित करने के लिए उनकी नंगी तसबीरें बनाते हैं, हिन्दुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाते हैं देशभक्तों को चिड़ाने के लिए भारत माता की नंगी तसबीरें बनाते हैं तो ये सैकुलर हिन्दुविरोधी जिहाद व धर्मांतरण समर्थक देशद्रोही गिरोह इसे अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता बताकर व ऐसे गद्दारों को इनाम देकर जले पर नमक छिड़कने का काम करता है और ठीक उसी वक्त डेनमार्क में जब एक ईसाई द्वरा हजरत मुहम्मद को हाथों में बम्ब उठाकर गैर मुस्लिमों का खून बहाते हुए एक आतंकवादी के रूप में दिखाया जाता है तो यही गिरोह इसे मुसलमानों की भावनाओं से खिलबाड़ बताकर कार्टून बनाने वाले के विरूद्ध कड़ी कार्यवाही की मांग उठाता है। मतलब मुसलमानों की भाबनाये भावनायें और हिन्दुओं की भावनायें अपराध !

· जब हिन्दूसंगठन देश में हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचारों के विरूद्ध आवाज उठाते हैं तो उन्हें सांप्रदायिक कहकर अपमानित कर उनकी आवाज को दबाने का प्रयत्न किया जाता है प्रतिबन्ध की धमकी देकर उन्हें इस हिन्दुविरोधी जिहाद व धर्मांतरण समर्थक देशद्रोही गिरोह की असलिएत जनता के सामने उजागर करने से रोकने का प्रयत्न किया जाता है पर इस गिरोह को हरबार मुँह की खानी पड़ती है क्योंकि देशभक्तों के ऊपर देशद्रोहियों को बचाने के लिए दबाव बनाना सूर्य को दीपक दिखाने के समान है।

अगर आप सन्त हैं और हिन्दुत्व की बात करते हैं हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचारों के विरूद्ध हिन्दुओं को संगठित करते हैं तो आपकी हत्या करवाई जाती है आपको सांप्रदायिक माना जाता है आपको जेल में डाला जाता है आपको आतंकवादी कहा जाता है पर आप ईसाई पोप हैं तो आपके मरने पर राष्ट्रीय शोक घोषित किया जाता है !

· आज देशभक्त हिन्दुओं के पैसे का दुरूपयोग कर ईसाई शिक्षा संस्थानों को इतनी अधिक ब्याबसायिक सीटें दी जा चुकी हैं कि वो जाली ईसाई होने का प्रमाण पत्र बनाकर ये सीटें लाखों रूपय में इन वयावसायिक कोर्सों से वंचित हिन्दुओं को बेच रहे हैं ! सरकारी नौकरियों में कार्यरत हिन्दू अध्यापकों को ईसाई संस्थानों में बच्चों को भेजने पर 50000 रूपये देने का प्रलोभन दिया जाता है ।

· भारत में हिन्दू धर्म की शिक्षा को सांप्रदायिकता का नाम देकर विरोध किया जाता है जबकि मदरसों में कुरान व हदीस की हिंसक आयतों को पढ़ाकर हिन्दुविरोधी-देशविरोधी सोच का निर्माण ठीक ढंग से चला रहे इसके लिए सरकार बढ़चढ़कर आर्थिक सहायता देती है ईसाईयों द्वारा ईसाई स्कूलों में बाइबल पढ़ाने के बहाने हिन्दू धर्म की निंदा करने का भी न केवल समर्थन किया जाता है बल्कि आर्थिक सहायता भी दी जाती है वह भी हिन्दुओं से लिए टैक्स से।

· अगर आप हिन्दु विद्यार्थी हैं तो आपको कर्ज लेने के लिए 13% ब्याज के साथ-साथ 15% मार्जिन मनी भी देना पड़ेगा पर आप मुस्लिम विद्यार्थी हैं तो आपको सिर्फ 3% ब्याज देना पड़ेगा और मार्जिन मनी का तो सवाल ही पैदा नहीं होता सरकार आप पर 100% मेहरवान है।

· कुल मिलाकर हिन्दू संस्कृति को बदनाम कर भारतीय सभ्यता और संस्कृति को बर्बाद करने के लिए वो सब किया जाता है जो औरंगजेब जैसे मुसलमानों और डायर जैसे ईसाईयों के गुलामीकाल में किया गया । कैसे कहें कि देश आजाद है ?

पहले हिन्दू मुस्लिम जेहादीयों व धर्मांतरण के ठेकेदार ईसाई सम्राज्यवादियों का गुलाम था अब हिन्दुविरोधी सैकुलर गद्दारों का ।

· देश में हर बड़े पद पर मुसलमान या ईसाई को पहुँचाने का जरूरत से ज्यादा प्रयत्न कर हिन्दुओं को इन पदों से वंचित करने का लगातार षड़यन्त्र रचा जाता है इसी का परिणाम है कि देश में 80% हिन्दू जनसंखया होने के बावजूद देश हिन्दुओं को जिहादियों व धर्मांतरण के ठेकेदारों के हमलों से बचाने में सफल नहीं हो पा रहा है। क्योंकि ऊंचे पदों पर उनके समर्थकों के बैठे होने की वजह से इन आतंकवादियों के विरूद्ध कोई भी कार्यवाही नहीं की जा सकती है ।

इन्हीं के प्रभाव के चलते सरकार जिहादियों व धर्मांतरण के ठेकेदारों की रक्षा के लिए ज्यादा आतुर नजर आती है । मुस्लिम जेहादियों के हिन्दूमिटाओ-हिन्दूभगाओ अभियान में कोई रूकाबट न आ जाये इसलिए सुरक्षाबलों में हिन्दुओं को हटाकर मुस्लिमों की संख्या बढ़ाने की बकालत की जाती है।

clip_image001 हम सिखों की बात करने लगे थे पर देश में हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचारों व उनसे किए जा रहे भेदभाव से पैदा हो रहे दुःख व क्रोध ने आ घेरा और सहज ही ये घटना दिलोदिमाग पर छा गई । ये घटना उस वक्त की है जब जिहादी राक्षस औरंगजेब हिन्दुओं पर कहर बरपा रहा था, मन्दिर तोड़े जा रहे थे, मां बहन बेटियों की इज्जत से खिलबाड़ किया जा रहा था।

तभी हिन्दुओं का एक समूह कृपा राम जी की आगुबाइ में पटना में गुरू तेगबहादुर जी के पास पहुँचा व उनसे जिहादी राक्षस औरंगजेब के अत्याचारों से बचाने की गुहार लगाई और गुरू जी को बताया कि इस राक्षस ने हिन्दुओं को इस्लाम या मौत में से किसी एक को चुनने की धमकी दी है। इस राक्षस के समर्थकों का समूह जहां भी पहुँच रहा है वहां पर हिन्दुओं पर हर तरह के अत्याचार ढाने के बाद उनको हलाल किया जा रहा है जब ये सब कुछ हिन्दू गुरू तेगबहादुर जी को बता रहे थे उस वक्त उनका बेटा जो कि अभी बहुत छोटा था ये सब सुन रहा था तभी गुरूजी ने उन हिन्दुओं को उत्तर दिया कि हमारे पास कोई सेना तो है नहीं जो हम उस दुष्ट राक्षस से युद्ध कर सकेँ फिर भी आप मेरे पास आए हैं तो हम आपकी सहायता तो जरूर करेंगे । आप उस जिहादी राक्षस औरंगजेब से जाकर कह दो कि हमारा एक गुरू है गुरू तेग बहादुर जी अगर वो अपना धर्मबदल कर इस्लाम अपना ले तो हम सभी एक साथ इस्लाम अपना लेंगे ।

जब हिन्दुओं ने यही सबकुछ जाकर उस जिहादी राक्षस औरंगजेब को बताया तो उसे ये जानकर आश्चर्य हुआ कि कोई धर्मजागरण का काम करने वाला व्यक्ति उस जैसे राक्षस को इस तरह ललकार सकता है ।क्योंकि वो एक कठमुल्ला था ।गुरू जी के अलौकिक ताकत व धैर्य को समझना उसके बस से बाहर था।

इस बीच गुरू जी ने अपने योग्य पुत्र गोविन्द राय जी को गुरूपद देकर स्थापित कर दिया और स्वंयम धर्मजागरण का काम करते हुए दिल्ली की ओर निकल पड़े। कुछ ही दिनों बाद उस राक्षस के जिहादी सैनिक गुरू तेगबहादुर जी को आगरा से गिरफ्तार कर दिल्ली ले गए । दिल्ली में गुरूजी को हर तरह से सत्ताया गया। असहनीय कष्ट दिए गये ।

इन जिहादी राक्षसों द्वारा गुरू जी पर ढाए गए जुल्मों को ब्यान करना हमारे जैसे आम हिन्दू के बस की बात नहीं क्योंकि उन जुल्मों के बारे में सुनते ही किसी भी आम व्यक्ति के या तो प्राण निकल जांयें या वो सब कुछ भूल कर इन जिहादी राक्षसों के वंशजों ब उनके समर्थकों का नामोनिशान मिटाने निकल पड़े । आप जरा गुरू तेगबहादुर जी के बारे में सोचें जिन्होंने ये सबकुछ सहा और अपने धर्म पर टिके रहे अन्त में गुरू जी हिन्दू धर्म की रक्षा की खातिर इन जिहादी राक्षसों के जुल्मों को सहते सहते अमर हो गए । अपने अंतिम सांस तक धर्म और राष्ट्र का काम करने वाले नवम गुरू तेगबहादुर जी ने सदियों से गुलामी की मार से अचेत हो चुके हिन्दूसमाज के अन्दर नई उर्जा का संचार किया ।

बलिदान की परम्परा की तो ये शुरूआत थी आगे चल कर गुरू तेगबहादुर जी के बेटे गुरु गुरूगोबिन्द सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना की। अपने परिवार सहित धर्म की रक्षा की खातिर जिहादी राक्षसों से लोहा लेते रहे । गुरूगोबिन्द सिंह जी के दोनों छोटे बेटों शहीद जोरावर सिंह जी व शहीद फतेह सिंह जी को इन जिहादी राक्षसों नें सरहिन्द की दीवारों में चुनवा दिया । इन जिहादी राक्षसों ने गुरू गोबिन्द सिंह जी की माता जी को भी शहीद कर दिया । गुरू गोबिन्द सिंह जी भी अपने दोनों बड़े बेटों शहीद अजीत सिंह जी व शहीद जुझार सिंह जी सहित इन जिहादी राक्षसों के साथ धर्म की रक्षा की खातिर लड़ते-लड़ते शहीद हुए ।

अब सोचने वाला विषय ये है कि जो लोग इन गुरू साहिबान को सिर्फ सिखों के गुरू बताते हैं क्या वो सही हैं नहीं बिल्कुल नहीं ये गुरू साहिबान न केवल सिखों के बल्कि पूरे हिन्दू समाज के गुरू हैं, सब भारतीयों के गुरू हैं और जो भी इन्हें गुरू मानने से इन्कार करता है उसे इस देश में रहने का कोई अधिकार नहीं ।

clip_image001[1] सोचने वाला विषय यह भी है कि इतने बलिदानों के बावजूद ये हिन्दू समाज इन आदमखोर अल्लाह के राक्षसों का नामोनिशान मिटाने में क्यों असफल रहा । वजह बहुत साफ है जिस तरह आज 20वीं और 21वीं शताब्दी में भारतीय सभ्यता और संस्कृति का प्रचार प्रसार कर हिन्दूराष्ट्र भारत में धर्म की रक्षा के लिए संघर्षरत हिन्दुओं व उनके संगठनों पर मुस्लिम जिहादियों व धर्मांतरण के ठेकेदारों द्वारा किए जा रहे हमलों का खुल्लम-खुल्ला समर्थन व सहयोग कर ये हिन्दुविरोधी जिहाद व धर्मांतरण समर्थक सैकुलर गिरोह हिन्दूसमाज को दगा दे रहा है ठीक इसी तरह हर शताब्दी में कोई न कोई सैकुलर गद्दार जयचन्द के रूप में जन्म लेकर हिन्दूसमाज को दगा देता रहा ।

प्रश्न यह भी पैदा होता है कि जिन सिखों ने धर्म की रक्षा के लिए पानी की तरह अपना खून बहाया,जिन सिखों के साथ हिन्दुओं का रोटी-बेटी का रिश्ता है,जिन हिन्दुओं-सिखों का खून एक है जिनके गुरू एक हैं जिनके पूर्वज एक हैं उनके बीच के खून के रिश्तों को आग किसने लगाई ?

कौन लगा सकता है इस हिन्दुविरोधी जिहाद व धर्मांतरण समर्थक सैकुलर गिरोह के सिवा । जी हां इसी गिरोह के एक ऐसे सहयोगी जिसकी स्थापना एक विदेशी अंग्रेज द्वारा हिन्दुओं को आपस में लड़वाकर विदेशियों का हित साधने के लिए की । जो आज भी भारत को एक विदेशी का गुलाम बनवाकर हिन्दुओं को आपस में लड़वाने के लिए हर तरह के षड्यन्त्र रच रहा है। जिस तरह आज महाराष्ट्र में शिवसेना को कमजोर करने के लिए कांग्रेस ने राज ठाकरे को आगे बढ़ाकर मराठी गैर मराठी के नाम पर हिन्दुओं को आपस में लड़वा दिया ठीक इसी तरह 80 के दशक में पंजाब में अकालियों को कमजोर करने के लिए कांग्रेस ने भिंडरावाले को आगे बढ़ाकर हिन्दू-सिखों को आपस में लड़वा दिया था।

जो कसर रह गई थी वो इंदिरा गांधी की हत्या के बाद कांग्रेसियों व उनके सहयोगी मुस्लिम गुंडो द्वारा सिखों के कत्ल कर पूरी कर दी गई । सिखों में अलगाववादी तत्वों द्वारा कांग्रेसियों द्वारा किए गये कत्लेआम के लिए हिन्दुओं को जिम्मेवार ठहराकर हिन्दुओं व उनके संगठनों के कार्यकर्ताओं को मौत के घाट उतार कर कोंग्रेसियों के षड़यन्त्र को काफी हद तक सफल होने का मौका दिया ।

ये तो भला हो गुरू साहिबान के उन सच्चे सिखों का जिन्होंने मुसीबत की इस धड़ी में गुरूओं की शिक्षाओं को न भुलाकर और उन हिन्दुओं व उनके संगठनों का जिन्होंने गुरू साहिबान के द्वारा हिन्दूधर्म की खातिर किए गये बलिदान का कर्ज चुकाकर हिन्दुओं व हिन्दू कार्यकर्ताओं का कत्ल होने के बावजूद न खुद सिखों पर हमला किया न हमलों का समर्थन किया और जहां तक सम्भव हो सका अपने खून के रिश्ते की लाज रख सिखों को बचाया।

यदि कांग्रेस सिखों को कमजोर करने के लिए भिंडरावाला पैदा न करती तो न आपरेशन बल्यूस्टार होता न इन्दिरा जी का कत्ल होता न दंगे होते न हिन्दू-सिखों में अविश्वाश बढ़ता । पर इस कांग्रेस को कौन समझाय कि जो दूसरों के लिए गड्डा खोदता है उसके लिए कूँआ पहले ही तैयार होता है ।

सिखों को भी समझना चाहिए कि जैसे इंदिरा का कत्ल होने के बाद सिखों का खून बहाया गया घर जलाए गये ठीक इसी तरह मोहन दास जी की हिन्दुविरोधी नीतियों के परिणामस्वरूप उनका कत्ल होने के बाद इसी कांग्रेस ने हिन्दुओं के ऊपर हमले किए थे, उनके घर जलाए थे । इस लिए कांग्रेस न केवल सिखों की बरबादी का कारण है बल्कि हिन्दुओं की बरबादी के लिए भी जिम्मेवार है । सिखों पर तो इन कांग्रेसियों ने सिर्फ एक बार हमला बोला था हिन्दुओं पर तो ये हमला आज तक जारी है ।

छतीसिंहपुरा में मुस्लिम जिहादयों द्वारा सिखों का कत्ल

अब हिन्दूसिखों को यह समझना चाहिए कि सिख हिन्दुओं की जरूरत हैं और हिन्दू सिखों की जरूरत हैं जिस तरह महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी महाराज, महारानी लक्ष्मीबाई जैसे क्राँतिकारी धर्म की रक्षा के लिए लड़ते लड़ते शहीद हुए ठीक उसी तरह गुरू अर्जुन देव जी, गुरू तेगबहादुर जी, गुरू गोबिन्द सिंह जी व उनके बेटे भी धर्म की रक्षा की खातिर लड़ते लड़ते शहीद हुए । शत्रु भी सबका एक ही था आज भी है वो है मुस्लिम जिहादी आदमखोर अल्लाह का विचार और इस विचार के समर्थक व उसके सहयोगी ये सैकुलर गद्दार।

हम सबने देखा कि किस तरह कश्मीर घाटी में भी हिन्दू सिख इस जिहादी मानसिकता का एक साथ शिकार हुए। इस देशद्रोही गिरोह के षड्यन्त्रों में फंसकर सारे भारत के हिन्दू-सिख एक साथ संगठित होकर युद्ध करने के बजाए आपस में छोटी-छोटी बातों पर बंटकर इस मुस्लिम जिहादी आदमखोर मानसिकता का काम आसान बनाते रहे । कामोबेश यही स्थिति सारे भारत में दिख रही है ।

हम तो कहते हैं अभी भी देर नहीं हुई है हम सब हिन्दूसिखों को एक साथ मिलकर इन मुस्लिम जिहादियों व उनके समर्थक इन धर्मनिर्पेक्षतावादियों का नामोनिशान इस गुरूओं की भूमि भारत से मिटाने के लिए अखिलभारतीय स्तर पर क्राँति का सूत्रपात कर खालसा पंथ के मूल उदेशय को पूरा करने की राह पर निकलना चाहिए। अन्यथा हम सब के साथ सारे भारत में वही होगा जो कश्मीर घाटी में हुआ ।

आज कश्मीर घाटी के वो जिहादी जो कश्मीर घाटी में हिन्दुओं व सिखों पर हुए अत्याचारों के गुनाहगार हैं। सारे भारत में किसी न किसी काम का बहाना लेकर बेखौफ घूम रहे हैं। मुस्लिम जिहादी आदमखोर मानसिकता व गोला बारूद का बिस्तार सारे भारत में कर रहे हैं। बेसमझ हिन्दू-सिख उनको उनके किए की सजा देने के बजाए हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं और हिन्दुओं-सिखों व सैनिकों के खून से लथपथ समान खरीदकर इन जिहादियों को और ताकतवर बना रहे हैं । इससे बड़ी बेवकूफी और क्या हो सकती है ?

जागो ! हिन्दू जागो !

अफगानिस्तान पाकिस्तान बांगलादेश सब हिन्दुविहीन हो गए।

अब कश्मीर आसाम को हिन्दुविहीन घोषित करने की तैयारी है।।

आज जिहादी हमलों में वो घरबार परिवार सहित मारे गए।।।

कल हमारी फिर हमारे बच्चों को मारने की तैयारी है।।।।

जिस तरह सिखों का इतिहास धर्म की रक्षा के लिए किए गए बलिदानों से भरा पड़ा है ठीक इसके विपरीत जिहादी मुसलमानों का इतिहास हिन्दुओं-सिखों पर किए गये अत्याचारों व इस देव भूमि भारत से धर्म का नामोनिशान मिटाकर मुस्लिम जिहादी आदमखोर अल्लाह का राक्षसी राज्य स्थापित करने के दुस्साहसों से भरा पड़ा है !

फिर क्या वजह है कि जो कांग्रेसी उन सिखों का खून बहाने व उन क्राँतिकारियों का अपमान करने का पाप करतें हैं जिनकी कुरबानियों की वजह से हिन्दू आज तक इन जिहादी राक्षसों का शिकार होने से बचे हैं व अपनी सभ्यता संस्कृति को बचाने में कुछ हद तक सफल हुए हैं।

पर वही काँग्रेसी उन जिहादी राक्षसों के लिए हिन्दुओं का खून बहाने के लिए तैयार हो जाते है जो अगर बाकी हिन्दुओं को मारने में सफल हो जाते हैं तो अंत में इन कांग्रेसियों को भी नही छोड़ेंगे ।

क्या इन जिहादी राक्षसों ने कश्मीर में हिन्दुओं को हलाल करते वक्त उन सैकुलर हिन्दुओं को छोड़ दिया जो हर वक्त हर हाल में इन जिहादियों को आगे बढ़ाने के लिए आतुर नजर आते हैं ? नहीं न ।

आज भारत में जम्मू-कश्मीर ही एकमात्र राज्य है जिसमें मुसलमान निर्णायक स्थिति के करीब हैं ये धर्मनिर्पेक्षता का ड्रामा करने वाले जोकर जरा देश को बताएँ कि आज तक हिन्दुओं का कत्लेआम करने वाले कितने जिहादियों को प्रशासन द्वारा फाँसी पर लटकाया गया व कितने सैनिकों व हिन्दुओं को इन जिहादियों ने शहीद किया और 60 वर्षों में जम्मू-कश्मीर में आज तक कोई हिन्दू क्यों मुख्यामन्त्री न बन पाया या फिर इनकी भाषा में हिन्दुओं को अल्पसंख्यक होने के नाते क्या विशेषाधिकार प्राप्त हैं ।

ये नहीं बता सकते, हम बताते हैं उनको सिर्फ एक विशेषाधिकार प्राप्त है और वह है जिहादियों की इच्छा अनुसार हलाल होने का वो भी इन सैकुलर गद्दारों द्वारा भारतीय सेना की कार्यवाही के ऊपर तरह-तरह के अंकुश लगा देने की वजह से । यही अंकुश सैनिकों के शहीद होने की बढ़ रही संख्या का भी प्रमुख कारण वन रहे हैं ।

एक तरफ ये गिरोह सेना के ऊपर अंकुश लगाकर देशद्रोहियों का हौसला बढा रहा है दूसरी तरफ मीडिया के माध्यम से अफवाहें फैलाकर सेना को बदनाम करने के षड्यन्त्र रच रहा है।तीसरी तरफ देशविरोधी मानवाधिकार संगठनों द्वारा आतंकवादियों के मानवाधिकारों का प्रश्न उठाकर सैनिकों पर आतंकवादियों को न मारने के लिए दबाव वनाया जा रहा है। हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि सेना ने देश की रक्षा करने की कसम उठाई है न कि गद्दारों द्वारा सेना पर लगाय जाने वाले अंकुशों की वजह से बिना लड़े इन जेहादायों के हाथों मरने की !

यह वही गिरोह है जो सत्ता में आते ही सेना को भी अपनी हिन्दुविरोधी मुहिम में शामिल करने के लिए सेना में मुसलमानों की गिनती करने का आदेश देता है जिसे देशभक्त सेना विनम्रतापूर्वक अस्वीकार कर इस हिन्दुविरोधी जिहाद व धर्मांतरण समर्थक गिरोह के देशविरोधी षड्यन्त्र को असफल कर देती है ।

यही दुस्साहस यदि किसी मुस्लिम या ईसाईबहुल देश में किया जाता तो बहाँ की सेना तख्तापलट कर ऐसे देशद्रोहियों को फांसी पर लटकाकर प्रशासन अपने हाथ में ले लेती । ये तो भारतीय सेना के संयम की इंतहा है कि सेना ने ऐसा दुस्साहस करने वाले इस देशद्रोही गिरोह को बख्श दिया । वरना आज तक देश के बिभिन्न हिस्सों में सिर उठा रहे गद्दारों व देश की रग-रग को खोखला करने में लगे भ्रष्टाचारियों के होश ठिकाने आ गए होते।

भारत विरोधी UPA सरकार

भारत विरोधी भारत सरकार

जब से इस हिन्दुविरोधी मुस्लिम जिहाद व धर्मांतरण समर्थक गिरोह की सरकार सत्ता में आई है तब से इसका एक ही चेहरा उभर कर सामने आता है पहले दिन से लेकर आज तक इस सरकार का एक-एक काम चीख-चीख कर कह रहा है कि इस सरकार का एक मात्र मकसद येनकेन प्रकारेण भारतीय संस्कृति और सभ्यता को तबाहकर हिन्दुओं को मरवाकर मुस्लिम जिहादियों और धर्मांतरण के ठेकेदारों का सहयोग लेकर देश को एक ऐसी दिशा देना है। जिसका एकमात्र परिणाम गृहयुद्ध है।

गृहयुद्ध में विदेशी सहायता लेकर हिन्दुओं का नामोनिशान मिटाकर इस एंटोनिया माइनो मारियो को देशभक्त हिन्दुओं द्वारा प्रधानमन्त्री न बनने देने का बदला लेकर व भारत विरोधी ताकतों के षड्यन्त्र को पूरा कर देश में मुस्लिम जिहादियों व धर्मांतरण के ठेकेदारों का आदमखोर राक्षसी राज्य स्थापित करना है अगर आपको इस बारे में कोई शंका है तो अगले कुछ पन्नें जिन पर हम इस सरकार के सिर्फ पिछले 4⅔ वर्ष के सांप्रदायिक निर्णय लिखेँगे जो न केवल आपका भ्रम दूर कर देंगे बल्कि आपको यह भी स्पष्ट कर देंगे कि ये हिन्दूविरोधियों का गिरोह जो सैकुलर होने का दावा करता है वो इस देश का अति सांप्रदायिक गिरोह है।

ये देश की पहली सरकार है जिसके सभी बड़े पदों पर खुद को भारतीय के बजाए अल्पसंख्यक कहने में गर्व महसूस करने वाले बैठे हैं इस गिरोह की प्रमुख एंटोनियो माइनोमारियो विदेशी अंग्रेज ईसाई जिसके पी ए के रूप में प्रधानमंत्री नियुक्त हुआ है और गुलामी में देशविरोधी काम करने को मजबूर है एंटोनियो के कोर ग्रुप में या तो ईसाई हैं या मुसलमान । सरकार का एक महत्वपूर्ण पद रक्षा मंत्रालय हिन्दू प्रणव मुखर्जी जी के पास था जिसे छीन कर ईसाई ए के एंटनी के पास दे दिया। रही गृह मंत्रालय की बात तो उसके बारे में सारे देश को विश्वास हो चुका है कि उसे स्वांय एंटोनिया चला रही हैं ।

कुल मिलाकर इस सरकार को हम देश की पहली अल्पसंख्यक सरकार कह सकते हैं जिसके द्वारा बहुसंख्यक देश के असली मालिक हिन्दुओं पर किए जा रहे हमलों को देख कर कलेजा मुँह को आता है इस देशद्रोही अल्पसंख्यक सरकार ने हिन्दुओं व हिन्दू संगठनों को आतंकवादी सिद्ध करने के जो प्रयत्न किए सो किए इसने तो भारतीय सेना तक को न बख्शा ।

आज तक किसी देशभक्त सरकार ने सेना में मुसलमानों या ईसाईयों की संख्या धटाने की कोशिश तो दूर बात तक नहीं की जो कि जिहादियों द्वारा सेना व हिन्दुओं पर किए जा रहे हमलों की एक स्वाभाविक प्रतिक्रिया हो सकती थी । लेकिन इस सरकार ने सेना में हिन्दुओं की संख्या घटाने का दुस्साहस किया जो कि सेना ने ठुकराकर देश को इस हिन्दुविरोधी देशविरोधी जिहाद व धर्मांतरण समर्थक गिरोह के विनाशकारी षड्यन्त्र से बचा लिया। जिसकी वजह से आज लैफ्टीनैंट कर्नल श्रीकाँत पुरोहित जी को काल्पनिक घटनाओं में फंसाकर सेना को कटघरे में खड़ा करने का दुस्साहस किया जा रहा है।

ये बात यहीं पर खत्म नहीं हो जाती सोचने वाला विषय यह है कि सरकार को देशभक्त हिन्दुओं से डर क्यों लगा ? क्यों सरकार को ऐसा लगा कि देश की रक्षा करने वाली सेना उसके लिए खतरा है ।क्योंकि किसी भी देश की सेना तो उस देश की देशभक्त सरकार की रीढ़ की हड्डी होती है लेकिन किसी भी देशद्रोही सरकार के लिए खतरा !

· सरकार ने सत्ता मे आते ही देशभक्त हिन्दुओं व सुरक्षाबलों के खून के प्यासे जिहादी आतंकवादियों को कानून के शिकंजे से बचाने के लिए आतंकवाद विरोधी कठोर कानून हटा दिया।आज इस सरकार के पांच साल पूरे होने वाले हैं देश में आतंकवाद अपने चरम पर है पर सुरक्षाबलों के पास आज भी कोई कारगर कानून नहीं है। जिसकी वजह से एक तो आतंकवादी अपनी इच्छा अनुसार हमला कर रहे हैं और उनके सहयोगी व ये सेकुलर गिरोह आतंकवादियों द्वारा मारे गये हिन्दुओं को जायज ठहराने के लिए कभी कह रहे हैं ये मुसलमान गरीब हैं कभी कह रहे हैं ये अनपढ हैं कभी कह रहे हैं ये हिन्दुओं द्वारा सताए हुए हैं।

पोटा हटाने के लिए भी यही तर्क दिया गया कि ये हम मुसलमानों को बचाने के लिए कर रहे हैं। ये सब तर्क ये धारणा बनाते हैं कि सब के सब मुसलमान जिहादी आतंकवादी हैं बेशक सरकार मानती हो कि सच्चाई यही है फिर भी हमें समझना चाहिए कि बेशक सारे के सारे जिहादी आतंकवादी मुसलमान हैं पर सारे मुसलमान जिहादी आतंकवादी नहीं हैं। क्योंकि मुसलमान अल्लाह को मानते हैं भारत को अपनी मातृभूमि मानते हैं नमकहलाल होते हैं जबकि जिहादी आतंकवादी आदमखोर जिहादी अल्लाह को मानते हैं औरंगजेब बाबर के समर्थक गद्दार और नमकहराम हैं । जो कि न अनपढ हैं न गरीब हैं क्योंकि ये जिहादी कोई डाक्टर है तो कोई इंजिनियर ।

अब रही बात मुसलमानों को हिन्दुओं द्वारा सताए जाने की तो एक तो जिहादी आतंकवादियों द्वारा किए गये हमलों में मारे जाने वाले 95% हिन्दू हैं क्योंकि योजनाबद्ध ये सारे हमले हिन्दुबहुल क्षेत्रों व मन्दिरों में किए जाते हैं दूसरा ये जिहादी इस्लाम के नाम पर देश के तीन-तीन टुकड़े करवा कर उन पर कब्जा कर चुके हैं अब अखण्ड भारत का छोटा सा हिस्सा सिर्फ भारत ही हिन्दुओं के लिए है अब इसमें भी इस्लामी राज्य बनाने के लिए ये जिहादी कत्लोगारद मचा रहे हैं ऐसे में आप खुद फैसला करें कि कौन किसका सत्ताया हुआ है ।

ये तो बिल्कुल वैसा ही है कि किसी के घर में घुसकर उस पर हमला करना मारकाट मचाना उसके द्वारा प्रतिरोध करने पर शोर मचा देना कि घर का मालिक हमें सत्ता रहा है इसे घर से बाहर निकालकर सजा दो।

जब हिन्दू राष्ट्र भारत में ये स्थिति है तो जरा चिंतन करें कि हिन्दू दुनिया में कहां सुरक्षित है ?

· इस सरकार ने सत्ता में आते ही आतंकवादियों से संघर्ष में शहीद होने वाले अर्धसैनिक बलों के परिवारों को मिलने वाली विशेष आर्थिक सहायता ये कहकर बंद कर दी कि सरकार के पास पैसे की कमी है और सुरक्षाबलों द्वारा मारे गये जिहादी आतंकवादियों के परिवारों को आर्थिक सहायता देना शुरू कर दी तब पैसा कहां से आया । वास्तव में कमी पैसे की नहीं, नीयत में खोट है सरकार की नीयत जिहादी आतंकवाद को बढ़ावादेने की है। न तो नीयत साफ है न नीति ।

· सरकार ने मुसलमानों और ईसाईयों द्वारा चलाए जाने वाले शिक्षा संस्थानों को कानून के नियन्त्रण से बाहर कर उन्हें देशविरोधी हिन्दुविरोधी एजंडे को लागू करने की खुली छूट दे दी।

· सरकार ने सांप्रदायिक आधार पर मुसलमानों और ईसाईयों के बच्चों के लिए छात्रवृतियां देने की शुरूआत की जो कि हिन्दुओं के बच्चों के साथ अन्याय है क्या इन बच्चों का कसूर ये है कि ये हिन्दू हैं ? जरा सोचो सांप्रदायिक आधार छात्रवृतियों से वंचित ये बच्चे जब बड़े हो जांयेगे तो इनकी मानसिकता क्या होगी ?

· सरकार द्वरा घोषणा की गई कि देश के संसाधनों पर पहला अधिकार मुसलमानों का है। भारत के बाकी तीन हिस्सों अफगानिस्तान,पाकिस्तान,बांगलादेश में भी पहला अधिकार मुसलमानों का ही है तो फिर हिन्दुओं का पहला अधिकार कहां है ? हिन्द महांसागर में डूब मरने का या जिहादी राक्षसों के हाथों हलाल होने का कश्मीरघाटी की तरह!

· सरकार द्वारा ये भी कार्यक्रम बनाया गया कि मुस्लिम बहुल जिलों का प्राथमिकता के आधार पर विकास किया जाएगा तो क्या ये माना जाये कि हिन्दुबहुल जिलों का पूरी तरह विकास हो चुका है और इतने अधिक विकास की वजह से हिन्दू किसान आत्महत्या करने पर मजबूर हैं या फिर यह माना जाए कि हिन्दुओं ने परिवारनियोजन को राष्ट्रहित में अपनाकर अपराध किया है ?

· माननीय उच्च न्यायालय द्वरा हजयात्रा के लिए सरकार द्वारा दिए जाने वाले अनुदान को गैर कानूनी घोषित किए जाने पर सरकार का तिलमिलाना व माननीय सर्वोच्च न्यायलय में अपील कर इस सांप्रदायिक अनुदान को जारी रखने की अपील को क्यों भेदभाव करने वाला कदम न माना जाए ।

क्या सरकार हिन्दुओं को चारधाम की यात्रा के लिये 50000रूपये प्रतिव्यक्ति अनुदान देती है ? क्या सिखों को स्वरणमन्दिर की यात्रा के लिए अनुदान देती है ? वैसे भी हिन्दुओं द्वरा टैक्स के रूप में दिए गये अपनी खूनपसीने की कमाई को इस तरह बरबाद करना वो भी जिहादी मानसिकता के विकासके लिए और आमरनाथ यात्रा पर जाने वाले यात्रियों से पंजीकरण शुल्क व जम्मूकश्मीर सीमा पर टैक्स वसूलना हिन्दुविरोधी मानसिकता नहीं तो और क्या है ? अगर आपको भरोसा नहीं तो सी.ए.जी. की रिपोर्ट पढ़ो।

New Delhi: The Comptroller and Auditor General of India has come down heavily on the Ministry of External Affairs for sending extravagant, cumbersome goodwill delegation to Saudi Arabia every year . The CAG says this spending is in "disregard for economy in public expenditure."

· The Centre sends a Haj goodwill delegation of more than 30 people for 18-20 days to Saudi Arabia every year to promote goodwill between the two countries.

इन्हीं प्रयासों का परिणाम है कि साउदीअरब आज भारत विरोधी सब जिहादी आतंकवादियों की शरणस्थली बना हुआ है और भारत में हिन्दुओं व सुरक्षाबलों का खून बहाने वाले जिहादी आतंकवादियों व उनके समर्थकों को अधिक से अधिक धन उपलब्ध करवाकर भारत में आदमखोर जिहादी अल्लाह का सम्राज्य बनाने के लिए प्रयासरत है।जिस सांप्रदायिक देश में चर्च या मन्दिर बनाने तक की इजाजत नहीं क्या उस देश में हिन्दूराष्ट्र भारत जैसे देश, जहाँ किसी पूजा के स्थान को बनाने पर कोई प्रतिबन्ध नहीं, के नागरिकों को वो भी हिन्दुओं के पैसे से भेजकर जिहादी कट्टरता आयात करना व भारतीयों के जानमाल को खतरे में डालना उचित है ?

· "The Ministry has not established the goodwill functions to be performed by the members of the delegation through which the fulfilment of the intended objectives is ensured," the CAG said in his report.

महानिदेशक जी ये क्या कह रहे हैं, क्या आपको नहीं पता इस देश से हिन्दुओं का नामोनिशान मिटाना ही एकमात्र गुडविल फंक्शन है अगर आपको बता दिया और हिन्दुओं को पता लग गया तो भेद खुल जाएगा और अगर भेद खुल गया तो इन मुस्लिमप्रस्तों की खैर नहीं !

· It also said the component-wise analysis of the total expenditure of Rs 2.39 crore incurred on one of the goodwill delegations (Haj-2006 II) disclosed that while the airfare accounted for Rs 12.85 lakh and the daily subsistence allowance to the members was Rs 12.12 lakh , other local expenditure aggregated Rs 2.14 crore.

· The CAG report also said examination of the documents in the MEA and in the Mission at Jeddah disclosed that the leader of the delegation holds a few meetings with the local dignitaries and officials.

· "Only two-three other members of the goodwill delegation are associated with these meetings and the dinner. Other members have no role in promotion of goodwill," it said.

· The total expenditure on Haj delegation 2006-II was Rs 2.39 crore and at this rate, the expenditure on each member of the delegation works out to a massive Rs 8.85 lakh for Haj 2006-II.

ये 9,00,000 रूपये प्रति व्यक्ति तो सिर्फ यात्रा का प्रबन्ध करने के लिए जाने वाले सरकारी अमले का खर्चा है असली खर्चा लगभग 50000रू प्रति व्यक्ति यात्रा के दौरान किया जाना है ।

जागो ! हिन्दू जागो !

हिन्दू जानना चाहता है कि कितने ईसाई या मुस्लिम देशों में हिन्दुओं को वहां पर अल्पसंख्यक होने के नाते वो सब सुविधायें मिलती हैं जो भारत में हिन्दुओं को उनके मूल अधिकारों से वंचित कर इन ईसाईयों और मुसलमानों को दी जाती हैं?

सरकार क्या बताएगी संसार के अधिकतर देशों में हिन्दुओं को दोयम दर्जे के नागरिक की तरह रखा जाता है उन्हें मन्दिर तक नहीं बनाने दिये जाते, कई देशों में उन्हें मृत्यु के बाद अपने परिजनों तक को जलाने तक की इजाजत नहीं।

अब आप ही बताओ कि सब जगह हिन्दू ही क्यों भेदभाव सहे कम से कम हिन्दुस्थान में तो ये भेदभाव नहीं होना चाहिए । हम भारत के हिन्दू सिर्फ इतनी मांग कर रहे हैं कि हमें बेशक विशेषाधिकार न दिये जाँए पर कम से कम हमें हमारे बच्चों को इस आधार पर अपने अधिकारों से तो न वंचित किया जाए कि हम हिन्दू हैं भारत में तो कम से कम ये सब नहीं होना चाहिए ।

हमारी ये बात मानना तो दूर हमारे अधिकारों के लिए माँग उठाने वाले देशभक्त हिन्दूसंगठनों को ये गिरोह साँप्रदायिक, आतंकवादी, फासिस्ट कहकर सारी दुनिया में बदनाम कर रहा है और कातिल जिहादियों को अपना भाई । हमारी मौत तक को ये गठबन्दन जायज ठहरा रहा है । अब आप ही बताओ इन सब हालात मे हमें अपना हक दिलवाने के लिए व इन जिहादियों व धर्मांतरण के ठेकेदारों से रक्षा करने के लिए कोई हिन्दू हथियार उठा ले तो फिर हम सब हिन्दू उसका साथ क्यों न दें ?

· आज स्वामी रामदेव जी ने योग व आयुर्वेद को हर देशभक्त भारतीय के जीवन का अभिन्न अंग बनाकर उनके जीवन स्तर में वो सुधार ला दिया है जिसकी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था । स्वामी रामदेव जी का यह अभियान अमीर-गरीब सबके लिए आशा की नई किरण बनकर उभरा है और हर देशभक्त भारतीय के अन्दर राष्ट्रभक्ति की वो ज्वाला पैदा कर रहा है जो गद्दारी व भ्रष्टाचार को जलाकर राख कर देने की ताकत रखती है ।आगे चलकर स्वामी रामदेव जी सब देशभक्त संगठनों के प्ररणा स्रोत वनने वाले हैं ।

स्वामी रामदेव जी द्वारा भारतीय सभ्यता और संस्कृति के प्रचार-प्रसार से तंग आकर इस देशविरोधी हिन्दुविरोधी जिहादी आतंकवाद व धर्मांतरण समर्थक सरकार ने स्वामी रामदेव जी के देशहित में किए जा रहे कार्यों को रोकने के लिए उनके ऊपर वृंदा करात के नेतृत्व में हमला बोल दिया ।

ये वृंदा करात वहीं हैं जो उस वांमपंथी विचारधारा से सबन्ध रखती हैं जो अफगानिस्तान व अन्य देशों मे ईसाई अमेरिका द्वारा मुस्लिम जिहादियों को कतलोगारद से रोकने के लिए किए जा रहे प्रयत्नों का विरोध करती है। वाममार्गी विचारधारा सारे भारत में राष्ट्रबाद व भारतीय-संस्कृति और सभ्यता का हर स्तर पर विरोध करती है, हर बक्त अपने भारत के विरूद्ध लड़ती रहती है। हमें हैरानी होती होती कि जो विचारघारा चीन में हर तरह से अपने राष्ट्र को सर्वोपरि मानती है वही विचारधारा भारत में देशद्रोह का मार्ग कैसे अपना लेती है ?

हम तो कहते हैं इन भारतीय वामपंथियों को वाममार्गी विचारधारा का सही ज्ञान ही नहीं । भारत में ये बात तो वामपंथ की करते हैं इनका असली काम भारतीयों को भाषा,क्षेत्र, जाति और हिन्दू-मुस्लिम के नाम पर लड़वाने का है जिसका जवलंत उदाहरण सिंगूर में इनके द्वारा गरीब किसानों की भूमि पर गोली के बल पर गुंडागरदी द्वारा किया गया कब्जा है। उन किसानों पर मार्कशवादी गुण्डों ने क्या-क्या अत्याचार नहीं किए । तभी तो आज भारत में नक्सलवादी व माओवादी हिंसा का केंन्द्र इनके द्वारा शासित प्रदेशों के आस-पास ही नजर आता है।

इसी हिंसा के समर्थक होने की वजह से नेपाल में कातिल माओवादियों को सत्ता में बिठाने के लिए ये मध्यस्ता करते हुए पकड़े जाते हैं हमें हैरानी होती है उन माता-पिता जी की प्रतिक्रिया के बारे में सोचकर जिन्होंने अपने पुत्र का नाम सीता-राम रखा होगा कितने आस्तिक होंगे वो माता-पिता । क्या-क्या उमीदें लगाई होंगी उन्होंने अपने इस हिन्दूपुत्र से जो आगे चलकर उसी मर्यादापुर्षोत्तम भगवान श्रीराम के अस्तित्व को नकारने वालों के साथ खड़ा नजर आया और मानवता के शत्रु जिहादियों का पक्ष लेने वाले देशद्रोही गिरोह का हिस्सा बना । पिछले दिनों इसी विचारधारा के अनजान ने हिन्दू साधु-सन्तों के बारे में ऐसी टिप्पणी की कि अगर वहां पर कोई अपने जैसा हिन्दू बैठा होता तो वहीं पर खत्म कर देता ऐसे दुष्ट हिन्दुविरोधी गद्दार को ।

खैर स्वामी रामदेव जी ठहरे घोर राष्ट्रवादी व कौमनष्ट ठहरे पक्के राष्ट्रविरोधी दोनों का मेल कैसे हो सकता है ? शायद अपने इसी राष्ट्रविरोधी वोटबैंक को पक्का करने के लिए स्वामी जी पर हमला बोला गया । हर तरह के मनघड़ंत आरोप लगाने शुरू कर दिए गये । उनको बदनाम करने के लिए सरकारी तन्त्र का दुरूपयोग कर कई षड्यन्त्र रचे गये। ये स्वामी रामदेव जी के प्रति देशभक्त जनता का अटूट विश्वास व भगवान की अपार कृपा थी जिसके कारण इन राक्षसों का कोई षड्यन्त्र सफल न हो पाया । धर्मप्रचार के काम में लगे स्वामी जी पर इस देशद्रोही गिरोह का ये हमला हमें जिहादियों द्वारा हिन्दुओं पर किए जा रहे बम्ब हमलों का बौधिक स्वरूप दिखाई देता है।

· बापू आशा राम के विरूद्ध रचे गए षड्यन्त्र की भी निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए क्योंकि बापू आशा राम जी का काम भी धर्मांतरण के दलालों को अपने रास्ते में रूकावट की तरह खटता है हो न हो उनको बदनाम करने में इस हिन्दुविरोधी धर्मांतरण समर्थक गिरोह का हाथ जरूर निकलेगा।

· समय-समय पर सांई राम के बारे में भी इसी हिन्दुविरोधी गिरोह का एक वर्ग अफवाहें फैलाता रहता है ।

· हाल ही में श्री-श्री रविशंकर जी को भी विवादों में घसीटने की कोशिश की गई ।

· इस सरकार द्वारा हिन्दू साधु सन्तों पर हमला करना व उनको बदनाम करना कोई नयी बात नहीं है आपको याद होगा कि कुछ वर्ष पहले हिन्दुओं को चिड़ाने के लिए दीवाली के शुभ अवसर पर इस सरकार ने स्वामी जयेन्दर सरस्वती जी को गिरफ्तार किया जिन्हें बाद में माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर छोड़ना पड़ा।

ये वो सरकार है जो मर्यादापुर्षोत्तम भगवान श्री राम के अस्तित्व को तो नकारती है पर पोप के मरने पर राष्ट्रीय शोक घोषित करती है।

· भारत तो भारत इस भारत विरोधी सरकार ने विदेशों में भी हिन्दुविरोधी षड्यन्त्र रचे। जिसका ताजा और स्पष्ट उदाहरण नेपाल है । इस सरकार के सत्ता में आते ही नेपाल में धर्मपरायण हिन्दुओं पर चीन समर्थित माओवादियों के हमले तेज हो गये । हिन्दूराष्ट्र नेपाल ने इस हिन्दुविरोधी हिंसा से निपटने के लिए हथियारों की मांग की जो इससे पहले की सरकारें देती रहीं थीं ।

लेकिन इस सरकार ने देशहित को दरकिनार कर हिन्दूविरोध को सर्वोपरि मानकर हिन्दूराष्ट्र नेपाल को हथियार देने से मना कर दिया। परिणामस्वरूप संसार के मानचित्र से दुनिया का एकमात्र हिन्दूराष्ट्र गायब हो गया और इसकी जगह हजारों हिन्दुओं के खून के दोषी माओवादियों के नेतृत्व में माओवादी नेपाल ने ले ली । जिसे इस हिन्दुविरोधी देशविरोधी जिहाद व धर्मांतरण समर्थक गिरोह ने अपनी विजय के रूप में प्रचारित किया।

· ये वही सरकार है जो अपने हिन्दुविरोधी ऐजंडे को धर्मनिर्पेक्षता की आड़ में आगे बढ़ाने में विश्वास रखती है जिसकी पोल तब खुल जाती है जब हिन्दुविरोधी हर लेखक को अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता के बहाने समर्थन देने वाली व पुरस्कृत करने वाली यह सरकार इस्लाम की सच्चाई को उजागर करने वाली लेखिका तसलीमा नसरीन को पहले तो भारत में ही बंदी बना लेती है, जिहादियों के हमलों से नहीं बचाती है और अंत में उसे भारत से बाहर निकाल देती है !

· ये देश के विभाजन के बाद पहली सरकार है जिसने बजट को भी संप्रदाय के आधार पर बनाया मतलब मुसलमानों के लिए अलग बजट और हिन्दुओं के लिए अलग बजट । ऐसा सांप्रदायिक बजट 1947 में बनाया गया था जिसके बाद देश का सांप्रदायिक आधार पर विभाजन हो गया था।

जागो ! हिन्दू जागो !

· भारत के संविधान में सांप्रदायिक आधार पर आरक्षण वर्जित है। क्योंकि सांप्रदायिक आधार पर आरक्षण भी सांप्रदायिक आधार पर देश के विभाजन का प्रमुख कारण था। लेकिन इस देशद्रोही सरकार ने संविधान का उल्लंघन कर मुसलमानों के लिए सांप्रदायिक आधार पर आरक्षण दिया। जिसे माननीय न्यायालय ने रोकने का हर संभव प्रयास किया पर सब बेकार क्योंकि ये सरकार हिन्दूराष्ट्र भारत की हर चीज को सांप्रदायिक आधार पर बांटकर देश को तबाह करने की कसम जो उठा चुकी है ।

ये सरकार सच्चर कमेटी के आधार पर कुतर्क देती है कि मुसलमानों को नौकरियां कम हैं हिन्दू जानना चाहते हैं कि भारत पाक बांगलादेश सब अखण्ड भारत के हिस्से हैं जिस पर सबका अधिकार था जब पाक व बांगलादेश में हिन्दुओं का अधिकार नहीं फिर भारत में मुसलमानों को विशेषाधिकार देने का तर्क क्यों ?

वैसे भी इस वक्त इन सब देशों में कुल नौकरियों का जो हिस्सा मुसलमानों के पास है वो कम नहीं बहुत ज्यादा है बाकी गिनती तो आप करो जो आँकड़े हमारे पास उपलब्ध हैं वो हिन्दुओं के लिए खतरे की घंटी है इस वक्त अखण्ड भारत की तीन क्रिकेट टीमें हैं जिनमें 33 खिलाड़ी खेलते हैं उनमें से 22- 25 मुसलमान हैं यानिके 75% से ज्यादा जबकि 8-11 हिन्दू सिख ईसाई जैन बौध पारसी यानिके 27% से कम। और मुसलमानों की कुल आबादी हिन्दुओं की आबादी से आधी ।

ये भी मुसलमानों को आरक्षण देकर छीनने पर तुले हो बेशर्मों ,कुछ तो शर्म करो ,अगर तुम्हें मुसलमानों की इतनी ही चिन्ता सत्ता रही है तो इन सब को साथ लेकर पाकिस्तान या बांगलादेश क्यों नहीं चले जाते फिर देखो तुम्हें ये कितना सम्मान देते हैं।

क्यों तुम हिन्दुओं के बच्चों को बेरोजगार कर भूखा मारने पर तुले हो ? क्यों तुम हिन्दुओं की जान लेने पर तुले हो एक तरफ जिहादियों से मरबा रहे हो दुसरी तरफ खुद हिन्दुओं के मुंह का निवाला छीन रहे हो ? एक साथ जहर क्यों नहीं दे देते ?

कभी कहते हो भगवान राम हुए ही नहीं फिर कहते हो राम सेतु भगवान राम ने ही तोड़ दिया इतनी गद्दारी से मन नहीं भरता तो एक तरफ हिन्दुओं को हलाल करने वालों को बचाने के लिए पोटा हटाते हो और माननीय सर्वोच्चन्यायलय से सजा प्राप्त जिहादी को फाँसी देने के बजाए पालते हो लोकतन्त्र के मन्दिर पर हमला करवाने वाले जिहादी प्रोफैसर को बचाने के लिए गद्दार परजीवी लेखकों व देशद्रोही मानवाधिकार संगठनों के द्वारा मोमबती जलाओ अभियान चलाते हो ।

दूसरी तरफ हिन्दुओं के जानमाल की रक्षा के लिए संघर्षरत हिन्दू संगठनों, भारतीय सभ्यता संस्कृति की रक्षा में लगे साधु-सन्तो को आतंकवादी सिद्ध करने के लिए षड्यन्त्र रचाते हो और इस गद्दारी की दौड़ में तुम देश की सुरक्षा की गारंटी सेना पर भी कीचड़ उछालते हो इस सब में तुम देशभक्तों के हाथों लिखी अपनी मौत को क्यों भूल जाते हो ?

हिन्दूओ तुम कब तक मार खाओगे ? कब तक पिटते रहोगे ? कब तक धोखा खाते रहोगे इन हिन्दूविरोधियों से ? कब तक गिड़गड़ाओगे इन जिहादियों व धर्मांतरण के ठेकेदारों के आगे ? कब तक देश के टुकड़े होने दोगे ? कब तक इन गद्दारों के झूठ पर भरोसा कर अपने लिए शहीद होने वाले बलिदानियों के साथ खड़े न होकर चुपचाप उनके बलिदान होने का तमाशा देखोगे ?

कब तक अपने क्राँतिकारियों के शहीद होने पर सिर्फ नारे लगाकर किनारे पर खड़े रहोगे, कब तक अपनी मां को अपमानित करने वालों का साथ देते रहोगे ? कब तक भागते रहोगे ? कहां तक भागोगे ?

इन गद्दारों ने जिहादियों के साथ मिलकर अफगानिस्तान बनवा दिया आप भागकर भारत आ गये । इन सेकुलर गद्दारों ने आदमखोर अल्लाह के सैतानों के साथ मिलकर पाकिस्तान बांगलादेश बनवा दिए, आप भागकर भारत आ गये ,अब जब भारत ही नहीं बचेगा तो कहां जाओगे ?

अभी तो गैर हिन्दुओं की अवादी 25% से कम है। तब इस गद्दारों के गिरोह का हिन्दुओं पर इतना जोरदार हमला है। जब ज्यादा हो जाएगी तो ये गिरोह मुस्लिम जिहादियों व धर्मांतरण के ठेकेदारों के साथ मिलकर हिन्दुओं व उनकी संस्कृति का ठीक उसी तरह सफाया कर देंगे जिस तरह इन्होंने कश्मीर घाटी व उतर-पूर्व के कई राज्यों में किया और आसाम व देश के कई अन्य हिस्सों में कर रहे हैं !

कायरों की तरह तिल-तिल कर मरने से एक बार बहादुरों की तरह लड़कर मरना आत्मा को शांति देता है । मेरे प्यारे शांतिप्रिय हिन्दूओ अभी वक्त है कूद पड़ो जंगे मैदान में मिटा डालो इन मानवता के शत्रुओं को वरना हाथ मलते रह जाओगे ।

अगर हालात और बिगड़ते हैं तो वो गलती न करना जो आपने 9वीं व 20वीं शताब्दी में की थी । इस बार जो युद्ध हम भारतीयों पर इन गद्दारों के गिरोह द्वारा थोपा गया है, अगर आगे बढ़ता है ,जिसकी पूरी सम्भावना है तो ये युद्ध निर्णायक व अन्तिम होना चाहिए एक भी गद्दार देशद्रोही आतंकवादी या उसका समर्थक जिन्दा नहीं बचना चाहिए। ताकि भविष्य में कोई आदमखोर जिहादी अल्लाह या उसका वंशज हिन्दुओं की ओर आँख न उठा सके व न ही कोई जयचन्द उसका साथ देने का दुस्साहस कर सके।

· इस सरकार ने माननीय सर्वोच्चन्यायालय में लिख कर दिया कि भगवान राम हुए ही नहीं हैं वो काल्पनिक हैं क्योंकि इस सरकार ने उन्हें नहीं देखा है।

हम इस सरकार व सरकार के इस विचार का समर्थन करने वालों से पूछना चाहते हैं कि क्या उन्होंने दादा के दादा को देखा है अगर नहीं देखा है तो इसका अर्थ ये हुआ कि इनके दादा के दादा हुए ही नहीं मतलब इनके दादा के पिता का कोई बाप ही नहीं …आगे ये खुद सोचें ये क्या कह रहे हैं अपने बाप के बारे में ? हम नहीं लिख सकते !

जब हिन्दुओं व उनके संगठनों ने भगवान राम के अस्तित्व को नकारने का कड़ा विरोध किया तो इस सरकार ने माननीय सर्वोच्चन्यायालय में लिख कर दिया कि भगवान राम ने रामसेतु को खुद ही तोड़ दिया था अब कोई इस सरकार से पूछे कि इन दोनों हल्फनामों को मिलाकर देखो सत्य अपने आप सामने आ जाएगा। किसी ने क्या खूब कहा है कि एक झूठ को छुपाने के लिए कई झूठ बोलने पड़ते हैं !

जो सरकार हिन्दुओं की भावनाओं की परवाह न करते हुए ऐसे हल्फनामे माननीय सर्वोच्चन्यायालय में दे सकती है उसे तो खुल कर डैनिस पत्रकार के उस कार्टून का समर्थन करना चाहिए था जिसमें हजरत मुहम्मद को जिहादी आतंकवाद का प्रेरणा सत्रोत बताते हुए बम्ब फोड़ते हुए दिखाया था पर उसका तो इस जिहाद समर्थक सरकार ने विरोध किया वो भी जिहादियों के साथ मिलकर ! वाह क्या धर्मनिर्पेक्षता है ?

· श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड को आवंटित 800 कनाल भूमि का कश्मीर घाटी में जिहादियों द्वारा यह कह कर विरोध किया कि ये जमीन आवंटित होने से घाटी में फिर से हिन्दू वापिस आ जांयेगे जिन्हे 15 वर्ष जिहाद चलाकर मारा व निकाला गया । विरोध प्रदशर्नों के दौरान तीर्थ यात्रियों पर हमले किए गये, तिरंगा जलाया गया,पाकिस्तानी झंडा फैराया गया। सरकार ने जिहादी आतंकवादियों की इस देशद्रोही जंग को सफल बनाते हुए सिर्फ तीन दिन में ये भूमि आवंटन रद्द कर दिया।

सरकार के इस हिन्दुविरोधी-देशविरोधी निर्णय के विरूद्ध भूमि आवंटन को रद्द न करने के लिए देशभक्त संगठनों, सारे देश के हिन्दुओं द्वारा जम्मू के देशभक्त भारतीयों के नेतृत्व में अंदोलन चलाया गया । जिसमें देशभक्त मुसलमान भी शामिल हुए । इस अंदोलन में भारत माता की जय, वंदेमातरम् के नारे लगाये गये, सारे अंदोलन को तिरंगे के सम्मान में चलाया गया । सरकार ने हर तरह का बल प्रयोग कर व षड्यन्त्र रच कर इस अंदोलन को कुचलने का प्रयत्न किया । शहीद कुलदीप जी जैसे अनेकों लोगों ने बलिदान दिया ।लेकिन सरकार के कानों तक देशभक्ति से ओतप्रोत अंदोलन की आवाज नहीं पहुंची। कुल मिलाकर इस अंदोलन के थमने के बजाए और ताकतवर होता देख सरकार ने 70 दिनों को बाद घुटने टेके।

ये होता है मानसिकता का असर। क्योंकि ये सरकार हिन्दुविरोधी देशद्रोहियों की है इस लिए गद्दारों की हिन्दुविरोधी-देशविरोधी बात मानने में 3 दिन लगे और राष्ट्रवादियों की बात 70 दिन तक सुनाई ही नहीं दी !

· यह वही सरकार है जिसने भारत माता व हिन्दूदेवी देवताओं का अपमान करने वाले एम एफ हुसैन को सजा देने के बजाए उसे पुरस्कृत किया।

· यह वही सरकार है जिसने सारे भारत में एक साथ एक ही दिन वन्देमातरम् गाये जाने का आदेश दिया । लेकिन अलगाववादी आतंकवादियों द्वारा वन्देमातरम् का विरोध करने पर उन गद्दारों को फाँसी पर लटकाने की बजाए अपना आदेश ही वापिस ले लिया और गद्दारों के विरोध को जायज ठहराने का अपराध किया ।

· आज वही सरकार वन्देमातरम् का समर्थन व देशद्रोहियों का विरोध करने वाले सैनिकों, तपस्वियों, हिन्दुओं व हिन्दुओं के संगठनों के कार्यकर्ताओं को देशभक्ति के जुर्म में जेलों में बन्द कर उनके ऊपर अत्याचार कर रही है। ईसाई व मुस्लिम देशों से मिलने वाले पैसों के बदले हिन्दुओं व उनके संगठनों पर डंके की चोट पर कुत्तों की तरह भौंकने वाले टी वी चैनल इन क्राँतिकारियों के बारे में अपशब्दों का प्रयोग किसी भी कीमत पर चाँद की ओर मुँह कर थूकने जैसा प्रयास कर रहें हैं । इस बात से बेखबर कि थूक खुद इनके अपने मुँह पर गिर रहा है सब देशभक्त जनता समझती है कि ये गद्दार टी.वी चैनल किसके टुकड़ों पर पलते हैं ।

· यह वही सरकार है जिसने आंध्रप्रदेश में हिन्दुबहुल क्षेत्रों में बम्बविस्फोट करने के आरोप मे पकड़े गये मुसलमानों को छोड़ते वक्त एक-एक आटो भेंट किया।

· यब वही सरकार है जिसने मध्यप्रदेश व अन्य प्रदेशों की सरकारों द्वारा सिमी उर्फ इंडियन मुज्जाहीदीन के आतंकवादियों को पकड़ने के लिए चलाए गये अभियान को रूकवाने के लिए ये कहकर दबाव डाला कि ये निर्दोष मुसलमान हैं। बाद में उसी सिमी ने बंगलौर से लेकर हैदराबाद तक सैंकड़ो विस्फोट कर हजारों हिन्दुओं के घर उजाड़ कर अपने निर्दोष होने का प्रमाण केन्द्र सरकार को दे दिया !

· यह उसी गिरोह की सरकार है जिसने 15 फरवरी 2008 को कोयम्बटूर बम्ब हमले में मारे गये 58 लोगों के कत्ल के दोषी अब्दुल मदनी को पहले जेल में हर तरह की सुविधायें दी और बाद में उसे छुड़वा दिया।

आज उसी गिरोह की केन्द्र सरकार बिना किसी प्रमाण के निर्दोष हिन्दुओं को जेल में डाल कर टैस्ट पर टैस्ट करवाये जा रही है और हर तरह से फंसाने का प्रयत्न कर रही है।

हिन्दुओं को सरकार के षड्यन्त्र का पता न लग जाए इसके लिए सूचनांयें लीक करवाकर हिन्दुविरोधी मीडिया का दुरूपयोग कर हिन्दुओं व साधु- सन्तो को बदनाम कर रही है ।

· ये वही सरकार है जिसने माननीय सर्वोच्चन्यायालय द्वारा नियुक्त किए गए सेवानिवृत न्यायाधीश नानावती जी के द्वारा जारी जांच प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए एक दागी सेवानिवृत न्यायाधीश यु सी बैनर्जी को जांच पर लगाया सिर्फ यह सिद्ध करने के लिए कि 2000 जिहादी मुसलमानों की जिस भीड़ ने ट्रेन में सफर कर रहे हिन्दुओं को जलाने के लिए गोधरा में ट्रेन रोककर आग लगाई वो भीड़ निर्दोष है और जो हिन्दू ट्रेन में सफर कर रहे थे और इस आग में जलकर राख हो गये वो दोषी। क्या आपने कभी ऐसी कमीनी नीच हिन्दुविरोधी किसी और सरकार के बारे में सुना है ?

· यह वही सरकार है जो आरक्षण के बहाने हिन्दुओं को लड़वाने का प्रयत्न करती है। जिसे माननीय सर्वोच्चन्यायालय रोकने का प्रयत्न करता है। लेकिन ये सरकार अपनी फूट डालो और राज करो की नीति को वोटों में बदलने के लिए कानून बनाती है कि प्रतिवर्ष 4,50,000 रूपये यानि कि हर महीने 37000 रू कमाने वाला व्यक्ति पिछड़ा हुआ है ।

अब आप सोचो जिसकी एक वर्ष की पूरी कमाई ही 37000 रूपये या इससे कम हो उसे क्या कहेंगे ?

जिन लोगों की वार्षिक आय 4,50,000 रूपये से कम है उनसे सरकार टैक्स क्यों लेती है ?

जिन लोगों को ये भ्रम है कि आरक्षण गरीबों की सहायता करने की व्यवस्था है उनकी आंखें अब खुल जानी चाहिए। हम तो सब हिन्दुओं से यही कहेंगे कि इन विषयों पर आपस में न लड़ें क्योंकि इस देशद्रोही गिरोह की यही मनसा है कि हिन्दुओं को किसी भी तरह आपस मे लड़वाया जाए ।

गरीब कोई भी है उसकी आपस में मिलकर सहायता करें ताकि हम सब हिन्दू इस देशद्रोही गिरोह के विघटनकारी षड्यन्त्रों को असफल कर सकें।

· यह वही सरकार है जो झूठे आरोपों में फंसाये गये हिन्दुओं के विरूद्ध कोई प्रमाण न मिलने पर उनके विरूद्ध मकोका लगाती है अन्य प्रदेश सरकारों द्वारा बनाए गये ऐसे ही कानूनों से जिहादियों को बचाने के लिए उन कानूनों को मंजूरी नहीं देती है ।

गुजकोका को तो ये जिहाद समर्थक सेकुलर सरकार गुजरात सरकार द्वारा बार-बार आग्रह करने पर भी रोके रखती है । अब आप ही सोचो कि क्यों न कहें कि इस हिन्दुविरोधी सरकार का मकसद जिहादियों की रक्षा कर देश को बार-बार लहूलुहान करवाना है।

इस चार वर्ष के कार्यकाल में इस देशद्रोही सरकार ने वो कर दिखाया है जिसका सार ही इस सरकार व इसका समर्थन करने वाले गिरोह को माननीय सर्वोच्चन्यायालय में देशद्रोही, सांप्रदायिक, हिन्दुविरोधी व गद्दार साबित करने के लिए काफी है इसके सारे कुकर्म देखने पर तो इस गिरोह को संबोधित करने के लिए मानवता का शत्रु दानव या शैतान जैसे शब्द भी छोटे पड़ते हैं।

आप ही बताओः-

· जो सरकार हर चीज को सांप्रदायिक आधार पर बांटे जैसे कि संसाधनों पर पहला अधिकार मुसलमानों का,छात्रवृतियां मुसलमानों के लिए, विकास मुस्लिमबहुल जिलों का,यहां तक कि बजट को भीउसे सांप्रदायिक नहीं तो क्या कहेंगे ?

· जो सरकार संविधान व माननीय सर्वोच्चन्यायालय के आदेशों का पालन न करे जैसे कि अफजल को फाँसी व धर्म आधारित आरक्षणवो देशद्रोही नहीं तो और क्या है?

जो सरकार मर्यादा पुर्षोत्तम भगवान राम के अस्तित्व को नकारे उनकी निशानियों को मिटाने का प्रयत्न करे साधु सन्तों का अपमान करे हिन्दुओं को बदनाम करे… वो हिन्दुविरोधी नहीं तो और क्या है ?

अन्त में जो सरकार एक विदेशी एंटोनियो माइनो मारियो की गुलाम होकर भारतीय सेना में धर्म के आधार पर फूट डालने का प्रयास करे, देशभक्त सैनिकों को गिरफ्तार करे,शहीदों का अपमान करे,जिहादियों के विरूद्ध काम करने वाले साधु-सन्तों सैनिकों साध्वियों व हिन्दुओं को आतंकवादी कहे व जिहादी आतंकवादियों को अपना भाई वो सरकार गद्दारों की नहीं तो किसकी है ?

आशा है आपको ये बात स्पष्ट हो गई होगी कि इस गिरोह को समस्त देशभक्त व धर्मपरायण लोग हिन्दुविरोधी देशद्रोही जिहाद व धर्मांतरण समर्थक गिरोह क्यों कह रहे हैं व इस सरकार को सेना से डर क्यों लगा ?

हमने इस सैकुलर बोले तो शैतानी गिरोह को आज से 20 वर्ष पहले(18 वर्ष की आयु में) जब भारतीय राजनीति में देखा तो हमने भी बाकी लोगों की तरह यही माना कि ये लोग राजनीति कर रहे हैं सत्ता में आने पर कोई देशद्रोही या हिन्दुविरोधी काम नहीं करेंगे ।

फिर कुछ वर्ष बाद युनाइटेड फ्रंट सरकार के कामों को देखकर ये भ्रम टूटा और लगा कि ये गिरोह तो अल्पसंख्यकवाद व धर्मनिर्पेक्षता की आड़ में देशद्रोह के मार्ग पर अग्रसर है पर हमनें सोचा कि हो सकता है हम तत्कालिक कारणों व जवानी के जोश से प्रभावित होकर ऐसा महसूस कर रहे हैं।

लेकिन आज नवम्बर 2008 में इनके विपक्ष में रहते किए गये मिथ्या प्रचार को छोड़ भी दें तो भी सिर्फ पिछले 4⅔ वर्ष के षड्यन्त्रों व कुकर्मों को देखकर कोई भी जागरूक व्यक्ति इसी निष्कर्ष पर पहुँचेगा कि यह राजनीति नहीं -गद्दारी है, धर्मनिर्पेक्षता नहीं- देशद्रोह है।, अल्पसंख्यकवाद नहीं हिन्दूविरोध- बोले तो- मानवता का विरोध है।।

ये गिरोह हिन्दुविरोधी देशद्रोही जिहाद व धर्मांतरण समर्थक गद्दारों का गिरोह है ।

हिन्दू एकता सिद्धांत

 

यहाँ पर यह स्पष्ट करना भी जरूरी है कि संसार में हिन्दू धर्म ही एकमात्र ऐसी जीवन पद्धति है जिसे किसी संप्रदाय विशेष के साथ नहीं जोड़ा जा सकता,जिसमें कभी किसी संप्रदाय विशेष को अपना शत्रु घोषित नहीं किया गया,इन्सान तो इन्सान पेड़ पौधों जीव-जन्तुओं, पशु-पक्षियों सब में भगवान के रूप को देखा गया, उनकी पूजा की गई । आज तक एक भी लड़ाई किसी पूजा पद्धति के विरोध या समर्थन में नहीं लड़ी गई । हिन्दू धर्म में किसी क्षेत्र विशेष या संप्रदाय विशेष की बात न कर सारे संसार को परिवार मानकर उसकी भलाई की बात की गई । हिन्दूधर्म के प्रचार प्रसार के लिए आज तक किसी देश या संप्रदाय विशेष पर हमला नहीं किया गया। हिन्दू जीवन पद्धति ही दुनिया में सर्वश्रेष्ठ जीवन पद्धति है।

लेकिन जिसने भी मानवता के प्रतीक इस हिन्दू संस्कृति व उसे मानने वाले हिन्दुओं पर हमला किया है । इतिहास इस बात का गवाह है कि ऐसे राक्षस को पाप का घड़ा भर जाने पर अपने किए की सजा भुगतनी पड़ी है।

हमारे विचार में राक्षसों के इस सैकुलर गिरोह के पापों का घड़ा भी लगभग भर चुका है। साधु-सन्तों का अपमान व भगवान राम के अस्तित्व को नकारना इस बात के पक्के प्रमाण हैं।

हमने सुना था कि जब किसी राक्षस का अन्त नजदीक होता है तो उसके द्वारा किए जाने वाले पाप व अत्याचार बढ़ जाते हैं जो हमने पिछले कुछ वर्षों में देख भी लिया ।

अब सिर्फ इस धर्मनिर्पेक्षता रूपी राक्षस का अन्त देखना बाकी है इस राक्षस के खात्में के लिए कर्नल श्रीकांत पुरोहित, साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर,सुधाकर चतुर्वेदी जी, राम जी जैसे करोड़ों प्रशिक्षित गण हमले का जबाब देकर इन मुस्लिम आतंकवादियों व इनके समर्थक सैकुलरिस्टों का संहार करने के लिए तैयार बैठे हैं बस इंतजार है तो सेनापति के इशारे का जिस दिन ये इशारा मिल गया उसी दिन ये सब राक्षस अपनी सही जगह पर पहुँच जाँयेगे !

हम यहां पर यह सपष्ट कर देना चाहते हैं कि धर्म विहीन प्राणी मानव नहीं दानव होता है। अतः धरमनिर्पेक्षता मानव के लिए अभिशाप है क्योंकि यह मानव को दानव वना देती है। जिसका सीधा सा उधाहरण इस सेकुलर गिरोह द्वारा किए गए क्रियाकलाप हैं। इसी धर्मनिर्पेक्षता की वजह से सेकुलर गिरोह मानव जीवन के शत्रु आतंकवादियों का तो समर्थन करता है पर मर्यादापुर्षोत्तम भगवान श्री राम का विरोध ।

हम बात कर रहे थे हिन्दू धर्म की, बीच में धर्म और अधर्म के बीच होने वाले निर्णायक युद्ध के लिए बन रही भूमिका का स्वतः ही स्मरण हो आया ।

जो लोग हिन्दुओं को लड़वाने के लिए यह मिथ्या प्रचार करते हैं कि हिन्दू धर्म में प्राचीन समय से छुआछूत है । उनकी जानकारी के लिए हम ये प्रमाण सहित स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि बेशक हिन्दू धर्म में वर्ण व्यवस्था शुरू से रही है जो कि किसी भी समाज को व्यवस्थित ढ़ंग से चलाने के लिए जरूरी होती है पर छुआछूत 1000 वर्ष के गुलामी के काल की देन है। खासकर मुसलिम जिहादियों के गुलामी काल की।

वर्णव्यवस्था की उत्पति के लिए दो विचार स्पष्ट रूप से उभर कर सामने आते हैं

एक विचार यह है कि सभी वर्ण शूद्र, वैश्य, क्षत्रिय और ब्राह्मण भगवान के अंगो से बने । पैर से शूद्र, जंघा से वैश्य, भुजाओं से क्षत्रिय व सिर से ब्राह्मण। अब आप सोचो कि भगवान का कौन सा अंग अछूत हो सकता है सिर ,पैर, जंघा या भुजांयें । कोई नहीं क्योंकि जिसे हम भगवान मानते हैं उसका हर अंग हमारे लिए भगवान ही है । वैसे भी हम बड़ों व साधु संतों के पैर ही पूजते हैं। अतः किसी भी हिन्दू, वर्ण, जाति को अछूत कहना भगवान को अछूत कहने के समान है और जो यह सब जानते हुए भगवान का अपमान करता है वह नरक का भागीदार बनता है। अतः यह हम सब हिन्दुओं का कर्तव्य बनता है कि हम सब हिन्दुओं तक ये सन्देश पहुँचांए और उसे नरक का भागीदार बनने से रोकें।

दूसरा विचार यह है कि मनु जी के चार सन्तानें हुईं । जब बच्चे बड़े होने लगे तो मनु जी के मन में यह विचार आया कि सब कामों पर एक ही ताकतवर बच्चा कब्जा न कर ले इसलिए उन्होंने अपने चारों बच्चों को काम बांट दिए ।सबसे बड़े को सबको शिक्षा का जिसे ब्राह्मण कहा गया। उससे छोटे को सबकी रक्षा का जिसे क्षत्रिय कहा गया। तीसरे को खेतीबाड़ी कर सबके लिए भोजन पैदा करने का जिसे वैश्य कहा गया। चौथे को सबकी सेवा करने का जिसे शूद्र कहा गया ।

अब आप ही फैसला करो कि जब चारों भाईयों का पिता एक, चारों का खून एक, फिर कौन शुद्ध और कौन अशुद्ध ,कौन छूत कौन अछूत ?

यह एक परम सत्य है कि संसार में कोई भी काम छोटा या बडा , शुद्ध या अशुद्ध नहीं होता । फिर भी हम सेवा के काम पर चर्चा करते हैं और सेवा में भी उस काम की जिसे साफ-सफाई कहा जाता है जिसमें शौच उठाना भी जोड़ा जा सकता है ।(हालांकि भारत मे शौच घर से दूर खुली जगह पर किया जाता था इसलिए उठाने की प्रथा नहीं थी ये भी गुलामी काल की देन है ) आगे जो बात हम लिखने जा रहे हैं हो सकता है माडर्न लोगों को यह समझ न आए(माडर्न कौन हैं इसके बारे में हम अगली पुस्तक में लिखेंगे) ।

अब जरा एक हिन्दू घर की ओर ध्यान दो और सोचो कि घर में सेवा का काम कौन करता है आपको ध्यान आया की नहीं ? हाँ बिल्कुल ठीक समझे आप हर घर में साफ-सफाई का काम माँ ही करती है और बच्चे का मल कौन उठाता है ? हाँ बिल्कुल ठीक समझे आप हर घर में माँ ही मल उठाती है । मल ही क्यों गोबर भी उठाती है और रोटी कौन बनाता है वो भी माँ ही बनाती है । उस मल उठाने वाली माँ के हाथों बनाई रोटी को खाता कौन है। हम सभी खाते हैं क्यों खाते हैं वो तो गंदी है-अछूत है ?

क्या हुआ बुरा लगा न कि जो हमें जन्म देती है पाल पोस कर बढ़ा करती है भला वो शौच उठाने से गन्दी कैसे हो सकती है ? जिस तरह माँ साफ-सफाई करने से या शौच उठाने से गंदी या अछूत नहीं हो जाती पवित्र ही रहती है।

ठीक इसी तरह मैला ढोने से या साफ-सफाई करने से कोई हिन्दू अपवित्र नहीं हो जाता । अगर ये सब कर मां अछूत हो जाती है तो उसके बच्चे भी अछूत ही पैदा होंगे फिर तो ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य व शूद्र सभी अछूत हैं और जब सभी अछूत हैं तो भी तो सभी भाई हैं भाईयों के बीच छुआछूत कैसी ?

कुल मिलाकर हम कह सकते हैं कि कोई हिन्दू न छोटा है न बढ़ा सब हिन्दू एक समान हैं कोई अछूत नहीं इसीलिए कहा गया है कि-

न हिन्दू पतितो भवेत

कोई हिन्दू पतित नहीं होता और जो हिन्दू दूसरे हिन्दू को पतित प्रचारित करता है वो हिन्दुओं का हितैषी नहीं विरोधी है और जो हिन्दुओं का विरोधी है वो हिन्दू कैसा ?

हमें उन बेसमझों पर बढ़ा तरस आता है जो गाय हत्या व हिन्दुओं के कत्ल के दोषियों मुसलमानों व ईसाईयों (जो न हमारे देश के न खून के न हमारी सभ्यता और संस्कृति के) को अपना भाई बताते हैं और उन को जिनका देश अपना, संस्कृति अपनी और तो और जिनका खून भी अपना, को अछूत मानकर पाप के भागीदार बनते हैं ।

उनकी जानकारी के लिए हम बता दें कि हिन्दुओं के कातिलों आक्रमणकारी मुसलमानों व ईसाईयों को भाई कहना व अपने खून के भाईयों को अछूत अपने आप में ही इस बात का सबसे बढ़ा प्रमाण है कि ये छुआछूत इन मुसलमानों व ईसाईयों की गुलामी का ही परिणाम है क्योंकि अगर हिन्दूसमाज इस तरह के भेदभाव का समर्थक होता तो सबसे ज्यादा छुआछूत इन कातिलों से होती न कि अपने ही खून के भाईयों से ।

इस गुलामी के काल में जिस तरह हर वर्ण के कुछ जयचन्द, जैसे सैकुलर स्वार्थी हिन्दुओं ने इन साम्राज्यवादी मुसलमानों व ईसाईयों के सामने घुटने टेक कर मजबूरी या लालच में अपनी मातृभूमि व खून के भाईयों के विरूद्ध कार्य किया ठीक उसी तरह अग्निबेश जैसे हिन्दुओं ने मातृभूमि व हिन्दुओं के विरूद्ध काम करते हुए समाज के अन्दर इन दुष्टों के दबाव या लालच में आकर अनेक भ्राँतियां फैलाई छुआछूत भी उन्हीं में से एक है।

पर इस हिन्दुविरोधी देशद्रोही जिहाद व धर्मांतरण समर्थक गिरोह ने हिन्दुओं को आपस में लड़वाने के लिए इतना जहर फैलाया है कि एक पोस्टर पर बाबा भीमराव अम्बेदकर जी का नाम न छापने पर आज एक हिन्दू दूसरे हिन्दू पर इतना तगड़ा प्रहार करता है कि एक दूसरे के खून के प्यासे सगे भाईयों को देखकर रूह काँप उठती है । ये लोग यह भूल जाते हैं कि बाबा जी सब हिन्दुओं के हैं किसी एक वर्ग के नहीं ।

ये वही बाबा भीमराव अम्बेदकर जी हैं जिन्होंने अंग्रेज ईसाईयों के हिन्दुओं को दोफाड़ करने के सब षड्यन्त्रों को असफल कर दिया था। हम जानते हैं कि धर्मांतरण के दलालों द्वारा लगाई गई आग को सिर्फ एक दो प्रमाणों से नहीं बुझाया जा सकता क्योंकि इस हिन्दुविरोधी गिरोह का मकसद सारे हिन्दू समाज को इस आग में झुलसाकर राख कर देना है ।

यही तो इस देशद्रोही गिरोह की योजना है कि हिन्दुओं के मतभेदों को इतना उछालो कि उनमें एक दूसरे के प्रति वैमनस्य का भाव इतना तीव्र हो कि वो राष्ट्रहित हिन्दूहित में भी एक साथ न आ सकें ।

यह हम सब हिन्दुओं शूद्र, क्षत्रिय, ब्राह्मण, वैश्य का आज पहला कर्तव्य होना चाहिए कि गुलामी काल से पहले के हिन्दू एकता के प्रमाणों को संजोकर व वर्तमान में हिन्दूएकता के प्रमाणों को उजागर कर इस हिन्दुविरोधी षड़यन्त्र को असफल करें।

जिहादियों व धर्मांतरण के दलालों द्वारा हिन्दुओं पर थोपे गये

इस युद्ध को निर्णायक युद्ध की तरह लड़कर अपनी ऋषियों-मुनियों मानव सभ्यता की भूमि भारत को इन पापियों से मुक्त करवाकर राम राज्य की स्थापना करें ।

अपने हिन्दूराष्ट्र भारत को विकास के पथ पर आगे बढ़ाकर गरीब से गरीब हिन्दू तक विकास का लाभ पहुँचायें व उसे शांति व निर्भीकता से जीने का अवसर प्रदान करें जो इन असुरों के रहते सम्भव नहीं। वैसे भी किसी ने क्या खूब कहा है-

मरना भला है उनका जो अपने लिए जिए।

जीते हैं मर कर भी वो जो शहीद हो गए कौंम के लिए।।

जिस छुआछूत की बात आज कुछ बेसमझ करते हैं उसके अनुसार ब्राह्मण सबसे शुद्ध , क्षत्रिय थोड़ा कम, वैश्य उससे कम, शूद्र सबसे कम।

चलो थोड़ी देर के लिए यह मान लेते हैं कि यह व्यवस्था आदि काल से प्रचलित है। तो क्योंकि क्षत्रिय ब्राह्मण से अशुद्ध है तो फिर ब्राह्मण क्षत्रिय की पूजा नहीं कर सकते हैं पर सच्चाई इसके विपरीत है मर्यादा पुर्षोतम भगवान श्री राम क्षत्रिय हैं पर सारे ब्राह्मण अन्य वर्णों की तरह ही उन्हें भगवान मानते हैं उनकी पूजा करते हैं।

भगवान श्री कृष्ण ब्राह्मण थे क्या ? जो सारे हिन्दू उनकी पूजा करते हैं। सब हिन्दू उनको भगवान मानते हैं उनकी पूजा करते हैं। ये सत्य है पर वो ब्राह्मण नहीं वैश्य वर्ण से सबन्ध रखते हैं फिर तो ब्राह्मण और क्षत्रिय उनसे शुद्ध हैं उनकी पूजा कैसे कर करते हैं ? ब्राह्मण और क्षत्रिय उनकी पूजा करते हैं ये सत्य है इसे देखा जा सकता है।

अतः इस सारी चर्चा से हम इस निष्कर्ष पर पहुंचते हैं कि वर्ण व्यवस्था एक सच्चाई है पर ये शुद्ध अशुद्ध वाली अवधारणा गलत है और आदिकाल से प्रचलित नहीं है ये गुलामी काल की देन है।

अगर ये आदिकाल से प्रचलित होती तो मर्यादा पुर्षोतम भगवान श्री राम भीलनी को माँ कहकर न पुकारते न ही उनके जूठे बेर खाते । अतः जो भी हिन्दू इस शुद्ध-अशुद्ध की अवधारणा में विश्वास करता है वो अज्ञानी है बेसमझ है उसे सही ज्ञान देकर हिन्दू-एकता के इस सिद्धान्त को मानने के लिए प्रेरित करना हम सब जागरूक हिन्दुओं का ध्येय होना चाहिए और जो इस ध्येय से सहमत नहीं उसे राष्ट्रवादी होने का दावा नहीं करना चाहिए।

अब जरा वर्तमान में अपने समाज में प्रचलित कार्यक्रमों पर ध्यान केन्द्रित करते हैं । इस हिन्दुविरोधी देशद्रोही जिहाद व धर्मांतरण समर्थक गिरोह के इतने तीव्र दुष्प्रचार व विभाजनकारी षड्यन्त्रों के बावजूद आज भी जब किसी हिन्दू के धर में शादी होती है तो सब वर्ण उसे मिलजुलकर पूरा करते हैं।

आज भी ब्राह्मण,क्षत्रिय,वैश्य, शूद्र में से किसी के भी घर में शादी यज्ञ या अन्य कार्यक्रमों के दौरान भोजन जिस बर्तन में रखा जाता है या जिस बर्तन में भोजन किया जाता है उसे उस हिन्दू भाई द्वारा बनाया जाता है जिसे इस शुद्ध-अशुद्ध की अवधारणा के अनुसार कुछ शूद्र भी अशुद्ध मानते हैं।

यहां तक कि अधिकतर घरों में आज भी रोटियां उसी के बनाए बर्तन में रखी जाती हैं दूल्हे की सबसे बड़ी पहचान मुकुट(सेहरा) तक शूद्र हिन्दू भाई द्वारा ही बान्धा जाता है और तो और बारात में सबसे आगे भी शूद्र ही चलते हैं यहां तक कि किसी बच्चे के दांत उल्टे आने पर शूद्र को ही विधिवत भाई बनाया जाता है ।

अगर शूद्र को आदिकाल से ही अछूत माना जाता होता वो भी इतना अछूत कि उसकी परछांयी तक पड़ना अशुभ माना जाता होता तो ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, सब शूद्र के बनाए बर्तन में न खाना खाते ,न शूद्र द्वारा मुकुट बांधा जाता,न बारात में शूद्र को सबसे आगे चलाया जाता और न ही शादियों में हिन्दू समाज का ये मिलाजुला स्बरूप दिखता जो इस शुद्ध-अशुद्ध की अवधारणा को पूरी तरह गलत सिद्ध करता है

हां वर्तमान में जो हिन्दूएकता के सिद्धांत के विपरीत एक ही वर्ण में या विभिन्न वर्णों के बीच कुछ कुरीतियां दिखती हैं । उन्हें हिन्दूसमाज को यथाशीघ्र बिना कोई वक्त गवाए दूर करना है और हिन्दूएकता के इस सिद्धांत को हर घर हर जन तक पहुँचाना है। दिखाबे के लिए नहीं दिल से- मन से क्योंकि किसी भी हिन्दू को अशुद्ध कहना न केवल हिन्दुत्व की आत्मा के विरूद्ध है बल्कि भगवान का भी अपमान है ।

काम बहुत आसान है अगर दिल से समझा जाए तो ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य को सुपिरियोरिटी कम्पलैक्स(बड़प्पन) व शूद्र को इनफिरियोरिटी कम्पलैक्स(हीन भावना) का भाव दूर कर अपनी उत्पति को ध्यान में रख कर अपनी असलिएत को पहचाहना होगा याद रखना होगा कि हमारा खून एक है ।

जिस तरह हमारी मां सेवा का काम कर अछूत नहीं हो सकती ठीक इसी तरह कोई शूद्र भाई भी अछूत नहीं हो सकता।

हम सब हिन्दू एक हैं भाई-भाई हैं। एक-दूसरे का अपमान भगवान का अपमान है।

अब वक्त आ गया है कि सब हिन्दू इस हिन्दुविरोधी-देशद्रोही जिहाद व धर्मांतरण समर्थक सैकुलर गिरोह के भ्रामक दुष्प्रचार का शिकार होकर इन हिन्दूविरोधियों के हाथों तिल-तिल कर मरने के बजाए एकजुट होकर जंगे मैदान में कूदकर अपने आपको हिन्दूराष्ट्र भारत की रक्षा के लिए समर्पित कर दें ।

वरना वो दिन दूर नहीं जब हिन्दू अफगानिस्तान, बांगलादेश, पाकिस्तान की तरह वर्तमान हिन्दूराष्ट्र भारत से भी बेदखल कर दिए जांए जैसे कश्मीर घाटी से कर दिए गये और मरने व दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर होंगे।

हिन्दूक्रांति की शुरूआत या सरकारी षडयन्त्र

 

अगर इस हिन्दुविरोधी सरकार द्वारा लगाये गये आरोप सही हैं तो अपने इस आन्दोलन की शुरूआत लैफ्टीनैंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित जी के नेतृत्व में साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर जी के मार्गदर्शन में हो चुकी है।

बस जरूरत है तो इस आन्दोलन को 1857 के स्वतन्त्रता संग्रांम की तरह अधूरा न छोड़ कर आगे बढ़ाना और इन जिहादियों व धर्मांतरण के दलालों से मुक्त कराना । क्योंकि जिस तरह उस वक्त भारतीय अंग्रेजों के अत्याचारों से त्रस्त थे ठीक इसी तरह आज समस्त हिन्दूसमाज इन जिहादियों, धर्मांतरण के दलालों व उनके समर्थक इस सैकुलर गिरोह द्वारा किए जा रहे अत्याचारों व हिन्दू-विरोधी षड्यन्त्रों से त्रस्त है।

जरा सोचो जो गिरोह हिन्दुबहुल क्षेत्रों व मन्दिरों पर लगातार हो रहे बम्मविस्फोटों को गुमराह भाईयों का काम बता रहा था बार- बार इस्लामिक आतंकवाद को कभी अयोध्या तो कभी गुजरात का तर्क देकर जायज ठहरा रहा था कभी गरीबी तो कभी अनपढ़ता का बहाना बना रहा था ।

कुछ न दिखे तो पाक आई.एस.आई का काम बताकर बिना मुस्लिम जिहादियों के विरूद्ध कोई कार्यवाही किए पल्ला छुड़ा रहा था । हिन्दुओं के कातिलों को बचाने के लिए कठोर कानून न वनाने की बात कर रहा था । धमाका होते ही सबन्धित क्षेत्र के संभावित हमलावरों को बचाने के लिए कर्फयु लगा रहा था व साँप्रदायिक हिंसा रोकने के बहाने हमलावरों को बचाने के रास्ते तलाश रहा था ।

हमला मुसलमानों ने किया है ऐसा पता हिन्दुओं को न लग जाए इसके लिए जिहादियों द्वारा मारे जाने वालों की पहचान छुपा रहा था व पुलिस पर अपराधी मुसलमानों के नाम न बताने के लिए दबाव बना रहा था । आतंकवादी का कोई धर्म नहीं होता ऐसा जोर-जोर से चिलाकर इस्लाम की असलिएत छुपा रहा था। हिन्दुविरोधी मीडिया इस गिरोह के सारे दुष्प्रचार व षड्यन्त्रों को आगे बढ़ा रहा था ।

कुल मिलाकर जिहादियों को हिन्दुबहुल क्षेत्रों व मन्दिरों में बम्ब विस्फोट करने से रोकने या टोकने के बजाए उन्हें हर तरह की नैतिक व तकनीकी मदद देकर हमले तेज करने के लिए सैकुलर गिरोह व मीडिया द्वारा मिलकर भड़काया जा रहा था ।

वो ही गिरोह मालेगांव में हुए सिर्फ एक बम्ब विस्फोट व पांच मुसलमानों के कत्ल पर इतना बौखला जाता है कि हिन्दूआतंकवादी हैं हिन्दूआतंकवादी है चिल्लाना शुरू कर देता है(वो भी तब जब अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि ये काम जिहादियों का नहीं है) ये मुसलमानों पर हमला है ऐसा शोर मचा देता है।

एक हिन्दू साध्वी को अवैध हिरासत में रखकर अत्याचार कर झूठे आरोप स्वीकार करने का दबाव बनाता है। मीडिया उस साध्वी द्वारा शहीदों की आत्मा की शान्ति के लिए आयोजित पिण्ड दान को आतंकवादी गतिविधी बताता है( ये पिण्डदान श्री अमरनाथयात्रा संघर्ष समिति के नेतृत्व में देशविरोधियों के विरूद्ध चले संघर्ष में हिन्दुविरोधी सरकार द्वारा करवाई गई गोलीबारी में मारे गये हिन्दुओं की आत्मा की शान्ति के लिए करवाया गया था।) तरह- तरह की अफवाहें फैलाता है कहानियां बनाता है ये हिन्दुविरोधी गिरोह की सरकार लगभग सभी हिन्दू संगठनों को आतंकवादी कहकर बदनाम करना शुरू कर देती है ।

साध्वी जी के फोन रिकार्ड के आधार पर गिरफ्तारियाँ शुरू हो जाती है। गिरफ्तारियों का सिलसिला रूकता है सुधाकर जी की गिरफ्तारी के बाद डाक्टर अब्दुल कलाम जी का नाम आने पर । पकड़े गये सब व्यक्तियों का अपराध सिर्फ इतना था कि इनका उस साध्वी के साथ सबन्ध था। जो झूठे आरोप लगाकर सरकार ने गिरफ्तार की थी ।

आगर कहीं डा अब्दुलकलाम जी का नाम न आता तो आज इन्हीं सम्पर्कों के बहाने कई और हिन्दू कार्यकर्त्ता, हिन्दूसंगठनों के पदाधिकारी व साधु-सन्त जेलों में होते जिसका प्रयास आज भी जारी है और डा अब्दुल कलाम जी को भी लैफ्टीनैंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित जी की तरह जेल में डाल दिया जाता अगर वो मुसलमान न होते तो ।

सरकार द्वारा प्रचार शुरू कर दिया गया कि ये मुसलमानों को मारने का बहुत बढ़ा षड्यन्त्र है और सरकार के इस काल्पनिक षडयन्त्र के बहाने हिन्दू तो हिन्दू सेना तक को बदनाम किया गया। कुल मिलाकर जो हिन्दू पकड़े गए वो या तो हिन्दूकार्यकर्ता हैं जो मुस्लिम जिहादी हमलों के विरूद्ध आम जनता को जागरूक कर रहे थे या फिर वो सैनिक अधिकारी जो जिहादियों के विरूद्ध खुफिया जानकारी जुटा रहे थे ।

अब प्रश्न यह पैदा होता है कि आखिर सरकार इस हद तक इन हिन्दू संगठनों को बदनाम करने पर क्यों अमादा है ?

वास्तव में इसके कई कारण हैं पर इसका प्रमुख कारण इन संगठनों का सरकार द्वारा किए जा रहे देशविरोधी-हिन्दुविरोधी कामों का डटकर विरोध कर आम जनता को जागरूक करना है । सरकार को पता है कि जब तक देश की हिन्दू जनता का विश्वास इन हिन्दूवादी संगठनों में बना हुआ है तब तक इस देशद्रोह के रास्ते पर आगे बढ़ाना एक सीमा से आगे सम्भव नहीं ।अगर देश को तबाही और बर्बादी के उस रास्ते पर ले जाना है जो जिहादी और धर्मांतरण के ठेकेदार चाहते हैं तो हिन्दू संगठनों को कमजोर करना जरूरी है ।

वैसे भी जिस अंग्रेज एंटोनियो की ये सरकार गुलाम है उस अंग्रेज को हिन्दू संगठनों के डर ने प्रधानमन्त्री के पद से दूर रहने पर मजबूर किया तथा बाद में इन हिन्दूसंगठनों ने सरकार के बल पर चलाए जा रहे धर्मांतरण अभियान को जनसहयोग से रोकने में सफलता हासिल की ।

दूसरा इस हिन्दुविरोधी गुलाम सरकार द्वारा मर्यादापुर्षोत्तम भगवान श्री राम द्वारा निर्मित रामसेतु को तोड़ने की सब योजनाओं पर अगर किसी ने पानी फेरा तो इन हिन्दू-संगठनों द्वारा जनसहयोग से चलाए गये अन्दोलनों ने ।

तीसरा भूमि आबन्टन को रद करने पर जम्मू के वर्तमान इतिहास में पहली बार 70 दिन तक चला राष्ट्रवादी आन्दोलन।

जिस बात ने इस सरकार के होश उड़ा दिए वो था राष्ट्रवादी मुसलमानों का इस आन्दोलन में हिन्दू संगठनों का साथ देना । सरकार ने बार-बार आन्दोलनकारियों को कशमीरी जिहादियों के हमलों से डराने की कोशिश की लेकिन राष्ट्रवादी जब एक बार सर पर कफन बाँध लेते हैं तो रूकते तभी हैं जब मकसद पूरा हो जाता है यही इस मामले में भी हुआ।

अगर आप आज तक इस सेकुलर गिरोह के चुनावी मुद्दे देखें तो वो सिर्फ दो ही पहलु नजर आते हैं ।

एक आम आदमी का जिसकी हवा मंहगाई ने निकाल दी जो पिछली सरकार ने पूरी तरह से नियन्त्रण में रखी थी । अब तो लोग कहने लगे हैं कांग्रेस का हाथ आम आदमी के पेट पर लात।

दूसरा है जिहादियों को खुश करने के लिए हिन्दूविरोध व आम मुसलमान को साथ रखने के लिए हिन्दू संगठनों का डर दिखाना ।

लेकिन जब हिन्दू संगठन और राष्ट्रवादी मुसलमान एक साथ मिलकर आन्दोलन करें वो भी 70 दिन तक।

तो फूट डालो और राज करो की नीति पर चलने वाला ये गिरोह ऐसी एकता कैसे सहन कर सकता है। जब कुछ न दिखा तो मुसलमानों को डराने के लिए व हिन्दू संगठनों को बदनाम करने के लिए इस गिरोह ने काल्पनिक हिन्दूआतंकवाद का सहारा लिया ।

इस गठबंधन को उम्मीद थी कि बात-बात पर भड़कने वाले मुसलमानों में छिपे जिहादी आतंकवादी हिन्दुओं पर हमला करेंगे और दंगे भड़क उठेंगे और ये गिरोह फिर से अल्पसंख्यकों की रक्षा को मुद्दा बनाकर चुनाव जीत लेगा ।

जब ऐसा कुछ न हुआ तो सरकार ने हिन्दू संगठनों में फूट डालने के लिए नया षड्यन्त्र रचा और अफवाह फैला दी कि पकड़े गये हिन्दू क्योंकि घोर राष्ट्रवादी वीरसावरकर द्वारा बनाये गये अभिनव भारत नामक संगठन से हैं इसलिए ये हिन्दू राष्ट्रवादी संगठन के पदाधिकारियों को मारना चाहते हैं ।

जब सब हिन्दूसंगठनों ने सरकार के इस दुष्प्रचार को सरकार की फूट डालो और राज करो की नीति कहकर नकार दिया तो सरकार ने प्रखर हिन्दूराष्ट्रवादी प्रवीणभाई तोगड़िया जी पर अभिनव भारत को पैसे देने का आरोप लगाकर फिर हिन्दू संगठनों के बीच दूरी पैदा करने की कोशिश की ।

एक क्षण के लिए यह मान भी लें कि उन्होंने या किसी और ने अभिनव भारत जैसे प्रखर हिन्दूराष्ट्रवादी संगठन को पैसे दिए थे व उनके या किसी और के इस संगठन के साथ गूढ़ सबन्ध हैं तो भी किसी देशभक्त संगठन को पैसे देना या उसके साथ सबन्ध रखने में बुराई ही क्या है ?

जिस सरकार को मुस्लिम व ईसाई देशों से जिहादियों व धर्मांतरण के ठेकेदारों को मिलने वाले पैसे पर कोई आपति नहीं उसे अभिनव भारत को मिलने वाले पैसे पर आपति क्यों ?

रही बात आरोपों की तो ये तो देखो आरोप कौन लगा रहा है एक अंग्रेज की गुलाम हिन्दुविरोधी देशद्रोही सरकार ?

वैसे भी जब देश पर ऐसे गिरोह का राज हो जो अंग्रेजों का गुलाम हो, जो जिहादियों को अपना भाई बताता हो तथा जो देश के निर्दोष हिन्दुओं की रक्षा करने के बजाए उन्हें मरवाने के इन्तजाम में लगा हो तो भला देशभक्त हिन्दुओं के पास हथियार उठाने के सिवा और चारा भी क्या है ?

हम गद्दारों के इस गिरोह को बता देना चाहते हैं कि जब-जब भी हिन्दुओं पर अत्याचार किए गये हैं राम के अस्तित्व को नकारा गया है तब-तब भगवान ने खुद अवतार लेकर ऐसे पापियों का संहार किया है । पापियों के इस गिरोह का भी वही हश्र होने वाला है अभी तो सिर्फ साध्वी के रूप में गणों का आना शुरू हुआ अभी से घबरा गए! जो बोई है वो फसल तो काटनी ही पड़ेगी।

आपका विनाश आपको लैफ्टीनैंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित जी के रूप में अभी तो दर्शन ही दे रहा है पिछले कई वर्षों से हिन्दुओं पर ढाऐ गये हर जुल्म, निकाली गई हर गाली का हिसाब चुकाना पड़ेगा ।

अपने अन्त समय में अपने द्वारा किए गये दुराचारों ,रचे गये षड्यन्त्रों ,बहाए गये हजारों हिन्दुओं के लहु को अच्छी तरह याद कर लो, ये भी याद कर लो कि हलाल किए हिन्दुओं में अनेक दूध पीते बच्चे भी शामिल थे। जरा सोचो आपने हिन्दूविरोध और जिहाद समर्थन में अन्धे होकर ये क्या करवा दिया तुम्हें तो नरक में भी जगह नहीं मिलेगी अभी तो सिर्फ अपने किए पापों की सजा के बारे में सोचो आपके द्वारा किए गये पाप इतने भयानक हैं तो इनकी सजा कैसी होगी ?

जरा सोचो जो गिरोह जिहादियों को बचाने के लिए मुम्बई बम्ब धमाकों के आरोपियों पर से पोटा हटाता है। हैदराबाद बम्ब विस्फोटों के दोषियों को छोड़ कर उनका हौसला बढ़ाने के लिए एक-एक आटो भेंट करता है, इन जिहादियों व उनके समर्थकों को आक्रोशित हिन्दुओं के कहर से बचाने के लिए कभी बेचारा कभी अनपढ़ कभी गरीब तो कभी अपना भाई बताता है ।

मतलब हिन्दुओं के कातिल आतंकवादियों को अपना भाई बताकर उन्हें बचाने की हर कोशिश करता नजर आता है । वैसे भी ये गिरोह जिहादियों को बचाने के लिए जो तर्क देता है वो ही तर्क जिहादी हिन्दुओं को मारने के बाद देते हैं मतलब साफ है कि हिन्दुओं को कत्ल करने के लिए दोनों कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं !

वो ही गिरोह निर्दोष हिन्दुओं पर झूठे आरोप लगाकर हर हाल में उन्हें फंसाने के लिए हिन्दुओं पर अमानवीय अत्याचार करता है उनके विरूद्ध जांच पे जांच करवाता है । कभी मुम्बई पुलिस तो कभी हरियाणा पुलिस से ।

उनको कुछ न मिला तो सी बी आई से फिर भी कुछ न मिला तो इन निर्दोष हिन्दुओं को छोड़ने के बजाए इन्हें हिरासत में रखकर और यातनांयें देने के लिए इन पर मकोका लगा देता है।

वो ही मकोका सैंकड़ो बम्बविसफोट कर हजारों हिन्दुओं का कत्ल व मोहन चन्द जी को शहीद करने वाले बटाला हाऊस मुठभेड़ के बाद पकड़े गये जिहादियों पर क्यों नहीं लगाया जाता है ?

हम तो कहते हैं कि इस बात की जाँच होनी चाहिए कि ये गुलाम सरकार ये सब कहीं विदेशी ईसाई खुफिया तन्त्र के बल पर तो नहीं कर रही । अगर ऐसा है तो स्थिति और भी गम्भीर और खतरनाक है ।

शंका तब और भी बढ़ जाती है जब निर्दोष साध्वी जी का तीन-तीन बार नार्को टैस्ट करवाया जाता है सवाल खड़े होने पर तर्क दिया जाता है कि एक ही नार्को तीन बार करवाया । सैंकड़ों बम्बविस्फोट कर हजारों हिन्दुओं का कत्ल करने वाले सैंकड़ों जिहादियों में से कितनों का नार्को तीन-तीन बार करवाया गया ?

हिन्दू विरोधी षडन्यत्र तब और गहरा जाता है जब इतने बार विज्ञानिक टैस्ट करवाऐ जाने व इतनी बर्बर यातनांयें देने के बावजूद कोई प्रमाण न मिला और ये सिद्ध हो गया कि साध्वी निर्दोष है ।उसने जो भी जानकारी पुलिस को दी थी सही है

तो उसे छोड़ने के बजाए कुतर्क दिया गया कि साध्वी योग जानती है इसलिए उसने मशीन को अपने बस में कर लिया जिसको न केवल योग विशेषज्ञ स्वामी रामदेव जी बल्कि इन टैस्टों के विशेषज्ञों ने भी असम्भव करार दिया । इस तरह जो अपमान साध्वी जी का इस सैकुलर गिरोह द्वारा किया गया उसकी भरपायी तो पापी हिन्दुविरोधीयों के विनाश से ही सम्भव है।

जब हिन्दूवादी संगठन सरकार के इस षड्यन्त्र को पहचान कर उसका विरोध करते हैं तो इसे राजनीति का नाम देकर सरकार हिन्दुओं को बदानाम करने के षड्यन्त्र को आगे बढ़ाती है और साध्वी सहित सभी आरोपियों पर मकोका लगा दिया जाता है ।

यह उसी जिहाद व धर्मांतरण समर्थक गिरोह की सरकार है जो मुस्लिम आतंकवादियों को बचाने के लिए इन्हें गुमराह, अनपढ़, गरीब मुस्लिम नौजवान बताती है उन्हें कोई सजा न मिल पाए इसका हर प्रयास करती है क्योंकि वो जिहादी मुसलमान हैं इसलिए ये सरकार उनके प्रति बिल्कुल दयालु नजर आती है।

लेकिन यही हिन्दुविरोधी गिरोह की सरकार सिरफिरे युवक राहुल राज को किस तरह गोली से उड़ाती है । साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को गैर कानूनी ढंग से उठाकर अवैध कब्जे में रख कर यातनांये देती है हिन्दुविरोधी मीडिया के माध्यम से दुष्प्रचार करवाती है यही सब लैफ्टीनैंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित व अन्य आरोपियों के साथ भी दोहराया जाता है । इतना सब करने के बाद भी जब कुछ भी आपत्तिजनक नहीं मिलता है तो इन आरोपियों को जबर्दस्ती जेल में रखने के लिए इन पर छोटे-छोटे झूठे मामले दर्ज कर मकोका लगा दिया जाता है !

लैफ्टीनैंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित जी कोई पहले सैनिक नहीं हैं जिन्हें जिहादियों को बचाने की खातिर इस सरकार ने जेल मे डाला है। इससे पहले कश्मीर सहित देश के कई भागों में ये सब सुरक्षाबलों के उन जवानों के साथ किया जा चुका है जिन्होंने अपनी जान की परवाह न करते हुए जिहादियों को मार गिराया ।

हर जगह सुरक्षाबलों को दंडित करने के लिए हिन्दुविरोधी सरकार, तालिबानी मीडिया व बिके हुए मानवाधिकार संगठनों ने जिहादियों को आम मुसलमान बताकर पेश किया ।

कुछ आरोपियों की सामाजिक छवि को धूमिल करने के लिए उनकी जिन्दगी से सबन्धित काल्पनिक निजी मामलों को हिन्दुविरोधी मीडीया के सहयोग से उछाल कर जनता के मन में उनके द्वारा हिन्दू रक्षा के लिए किए जा रहे त्याग के प्रति शंका पैदा करने का प्रयत्न किया जा रहा है !

आज तक मुस्लिम जिहादियों द्वारा सैंकड़ों विस्फोट कर हजारों हिन्दुओं का कत्ल देश के विभिन्न हिस्सों में किया जा चुका है अगर पुणे पुलिस पर भरोसा किया जाए तो उसने 300 जिहादियों की सूची देश में हुए दर्जनों धमाकों से पहले इसी सरकार को दी है। आज तक क्या इस सरकार ने इन जिहादियों को पकड़ने के लिए इतनी तत्परता दिखाई है जितनी हिन्दुओं को झूठे मामलों में फंसाने के लिए दिखा रही है ?

एक बात और भी चौंका देले वाली है कि जब उत्तर प्रदेश में सी आर पी एफ कैंप पर हमला करने वाले जिहादियों ने मुम्बई पर हमले की जानकारी दी तो उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा ये सूचना महाराष्ट्र सरकार को दी गई तो महाराष्ट्र सरकार ने उन जिहादियों से पूछताछ करने या एटीएस द्वारा रिमांड पर लेने से क्यों इन्कार कर दिया गया ?

1993 में मुम्बई को बम्ब विस्फोटों से दहलाकर सैंकड़ों हिन्दुओं को कत्ल व हजारों को घायल करने वाले षड्यन्त्र के सूत्रधार जिहादी आतंकवादी को आज तक पकड़ना तो दूर उसे पकड़ने की कोई गम्भीर कोशिश तक नहीं की गई । और तो और उसकी अवैध सम्पति को आज तक बेचने का साहस तक न दिखा सकी ये सरकार । राम जी के भाई को तो झट से पकड़ कर जेल मे ड़ाल दिया । काश इतनी चुस्ती इस जिहादी दाऊद के परिवार को जेल में डालने के लिए दिखाई होती । तब तो दर्जनों शिकायतें मिलने के बाद भी कार्यवाही करने का साहस ये हिन्दुविरोधी सरकार नहीं जुटा पाती !

साहस जुटाय भी कैसे क्योंकि इस जिहाद समर्थक सरकार को पता है कि दाउद को पालने व बचाने वाले सब लोग इस सरकार के सहयोगी ही तो हैं । वरना क्या बात है कि जिस दाउद की महफिलों में हमारे फिल्मी कलाकार अपना शरीर बेचकर आते हैं , उस दाउद की महफिलों में हमारे खुफिया विभाग के लोग नहीं पहुंच पाते ?

हमें तो शक ही नहीं विसवाश होता जा रहा है कि हिन्दुओं को ऐसे जिहादी आतंकवादियों के कहने पर ही जेलों में डाल कर हिन्दू आतंकवादी हिन्दू-आतंकवादी का शोर मचाया जा रहा है जागो मेरे प्यारे बेसमझ आपस में लड़ने वाले हिन्दूओ बचा सकते हो तो बचा लो अपने देश को इन विके हुए गद्दारों के षड्यन्त्रों से वरना अनर्थ हो जाएगा हिन्दू कहीं के नहीं रहेंगे !

पिछले 20 वर्षों से भारत जिहादी हमलों को झेल रहा है क्या किसी जिहादी मौलवी या आतंकवादी के निजी मामलों को इस तरह उछाला गया है जिस तरह इन हिन्दुओं के निजी मामलों को उछाला जा रहा है या ऐसा वहशीयाना व्यावहार किसी जिहादी के साथ किया गया जैसा इन हिन्दुओं के साथ किया जा रहा है ?

ये सब करते हुए ये हिन्दुविरोधी गिरोह ये क्यों भूल जाता है ये जो हिन्दू जनता है वो सब जानती है कि देशभक्त योद्धा कैसे होते हैं वो देशद्रोहियों से बचने के लिए क्या-क्या करते हैं उन्हें बदनाम करने के लिए गद्दार कैसे-कैसे षड्यन्त्रों का सहारा लेते हैं !

ये हिन्दू अच्छी तरह जानता है कि ये वही मीडीया है जो अबु सलेम व दाउद इब्राहीम जैसे गद्दार जिहादियों को सम्मान सूचक भाषा से सम्बोधित करता है व ऐसे राक्षसों से हिन्दुओं की रक्षा में लगे हिन्दुओं और उनके संगठनों को असंसदीय भाषा से सम्बोधित करता है और करे भी क्यों न क्योंकि देश के गद्दारों व हिन्दूविरोधियों के पैसे और संरक्षण से ही तो ये देशद्रोही चैनल चलते हैं ! और उन्हीं के बारे में कुछ आपत्तिजनक बोलेगा तो मार पड़ेगी ।

आज तक जिहादी आतंकवादियों ने जितने भी हमले बोले उन सब में इस मीडिया ने वही बोला जो जिहादी बोलते हैं और जो जिहादियों को अच्छा लगता । एकमात्र जिहादी हमला जिस में मीडिया निष्पक्ष रहा वो था बटाला हाउस मुठभेड़ और परिणांम सबके सामने है जिहादियों के ठेकेदार अमरसिंह ने मीडिया की वो कुटाई करवाई कि आज तक इस मीडिया ने जिहादी आतंकवाद का परदाफाश करना तो दूर देश में छुपे जिहादियों की ओर उंगली तक उठाने का साहस न किया । करते भी कैसे जान बची और लाखों पाय ।

हिन्दूओ समझो कि अगर इस हिन्दुविरोधी देशद्रोही गिरोह के गाली-गलौच से बचना है तो इनकी जमकर कुटाई करना ही एकमात्र तरीका है ।

मुस्लिम जिहादियों द्वारा कुटाई के बाद इस मीडिया द्वारा फिर से शुरू हो गया हिन्दुओं को गाली-गलौच करने व आतंकवादी कहकर बदनाम करने का सिलसिला ।

मीडिया अच्छी तरह से जानता है कि निर्दोष हिन्दू को जितनी मर्जी गाली निकालो, उसको जितना मर्जी बदनाम करो, जो मन में आए कहते रहो बेचारा क्या करेगा ?

ठहरा जो सनातन में विश्वाश करने वाला हथियार तो उठा नहीं सकता, कत्ल तो दूर पिटाई तक तो कर नहीं सकता ।

परन्तु अगर कहीं कातिल जिहादियों को कातिल कह दिया तो फिर ये जिहादी और इन जिहादियों के सैकुलर दलाल इस मीडिया से जुड़े लोगों का जीना हराम कर देंगे वो भी अगर जिन्दगी बख्श दी जाएगी तो ।

यही वजह है आज तक इस देशद्रोही मीडिया ने जितने भी स्टिंग आपरेशन किए उनमें से अधिकतर (95%) हिन्दुत्व की बात या समर्थन करने वालों के विरूद्ध उनको बदनाम करने के लिए किए ।

एक स्टिंग आपरेशन जिसमें इस हिन्दुविरोधी सरकार को बचाने के लिए जिहादी दलालों द्वारा पैसे देकर सांसदों को खरीदते दिखाया गया उसे समय पर दिखाने के बजाए कई दिन बाद दिखाया गया वो भी पूरा नहीं ताकि इस देशद्रोही सरकार को बचाया जा सके ।

ये सब किया उस देशविरोधी चैनल ने जो चर्च के पैसे से चलता है व दिनरात हिन्दुओं, उनके संगठनों व साधु सन्तों को असंसदीय भाषा में डंके की चोट पर गाली गलौच करता है व अपने आकाओं को अपने हिन्दुविरोधी होने का प्रमाण देता है ।

खैर छोड़ो विदेशी सोच के गुलाम इस बिके हुए मीडिया से और उम्मीद भी क्या कर सकते हैं !

पर इस एटीएस को क्या कहें जो अपनी बात को अपने आप ही काट कर स्पष्ट संकेत दे रही है कि ये कोई जांच नहीं ये तो हिन्दुओं व उनके संगठनों को बदनाम करने का षड्यन्त्र है जो इस हिन्दुविरोधी-देशविरोधी जिहाद व धर्मांतरण समर्थक गठबंधन के भारी दबाव में एटीएस को मजबूरी में करना पड़ रहा है आप सोचेंगें हमें कैसे पता चला तो देखो जरा ।

सबसे पहले कहा गया हिन्दू आतंकवादी पकड़ा गया। नाम सामने लाया गया एक महिला का वो भी घरबार छोड़कर भगवान के काम में लगी एक साध्वी का ।

पकड़ने के बाद कहा गया ये साध्वी एबीवीपी से सबन्ध रखती है पता चला साधवी जी ने 1997 में ये संगठन छोड़ दिया । फिर कहा ये हिन्दू जागरण मंच से है पता चला इस संगठन में महिलाएं होती ही नहीं । फिर नाम आया राष्ट्रीय जागरण मंच का फिर बजरंग दल का फिर देश के सबसे शांतिप्रय देशभक्त संगठन आर एस एस का और अब अभिनव भारत जैसे घोर राष्ट्रवादी संगठन का… मतलब आरोपी एक— संगठन आधा दर्जन ।

इस देशद्रोही गिरोह व हिन्दुविरोधी मीडिया ने मिलकर शोर मचा दिया सारे हिन्दूसंगठनों व साधु-सन्तों में आतंकवादी हैं और जोर-शोर से ऐसा महौल बनाया मानो प्रतिबन्ध अब लगा कि अब लगा लेकिन जागरूक हिन्दुओं के हाव भाव को देखते हुए इस हिन्दुविरोधी सरकार का हौसला न पड़ा ।

बात यहीं रूक जाती तो शायद सरकार की पोल यूँ न खुलती । अब कहा गया सेना के बड़े-बड़े अधिकारी इस जिहादियों को मारने के बहुत बड़े षड्यन्त्र में शामिल हैं ।

बम्ब विस्फोट एक मारे गये जिहादी पांच हिन्दू आतंकवादियों का षड्यन्त्र बहुत बडा ?

बम्ब विस्फोट सैंकड़ों मारे गये हिन्दू हजारों गुमराह मुस्लिम भाईयों का काम कोई मुस्लिम आतंकवादी नहीं कोई षड्यन्त्र नहीं !

पता लगा ऐसी होती है सैकुलर सरकार अल्पसंख्यकों की सरकार विदेशियों की गुलाम- कातिलों की सरकार !

अब पकड़े गये लैफ्टीनैंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित जो जिहादियों व सेकुलरों के नैटवर्क का पर्दाफाश करने वाले थे । तर्क दिया गया कि ये साध्वी जी सहित कई उग्र हिन्दुओं के समपर्क में थे ।

अरे भई कुछ तो होश करो जो जिहादियों के विरूद्ध खुफिया जानकारी जुटा रहा हो उसको जिहादियों के विरूद्ध जनता को जागरूक कर रहे हिन्दूसंगठनों से उनके पास उपलब्ध जानकारी लेने के लिए देशहित में सम्पर्क करना ही पड़ेगा ऐसा तो नेहरू जी को भी चीन द्वारा किए गये आक्रमण के दौरान करना पड़ा था और इसी के परिणामस्वरूप संघ की एक बटालिएन को गणतन्त्र दिवस परेड में हिस्सा लेने के लिए बुलाया गया ।

कहा गया प्रसाद ही मास्टरमांइड है प्रसाद ने ही आर डी एक्स दिया । समझौता एक्सप्रैस में भी विस्फोट इसी आर डी एक्स से किया गया । पता चला समझौता एक्सप्रैस विस्फोट में आर डी एक्स का प्रयोग ही नहीं हुआ ! लैफ्टीनैंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित की पहुँच आर डी एक्स तक थी ही नहीं क्योंकि वो खुफिया विभाग में थे न कि एक्शन विभाग में ! फिर इस प्रखर राष्ट्रभक्त के ऊपर छोटे-छोटे काल्पनिक मामले दर्ज करने का सिलसिला शुरू हुआ ।

फिर नाम उछाला गया भाजपा का कहा गया एक विधायक की गिरफ्तारी होने वाली है । जब अदित्यनाथ जी योगी ने ललकारा हिन्दुओं के कातिल जिहादियों को अपना भाई बताने वाले गृहमन्त्री को – तो पकड़ा गया सुधाकर चतुर्वेदी जी को ।

कहा गया अब हिन्दू क्रांतिकारियों के सहयोगी बड़े –बड़े नामों का भांडाफोड़ होने वाला है नाम व फोटो सामने लाए गये डा. अब्दुल कलाम जी, डा. प्रवीण भाई तोगड़िया जी, श्री श्री रविशंकर जी, माननीय संघचालक सुदर्शन जी जैसे निष्ठावान देशभक्तों के ।

बढ़ते जनआक्रोश को देखकर इस हिन्दुविरोधी सरकार ने फूट डालो और राज करो के अपने एजंडे को आगेबढ़ाते हुए अफवाह फैला दी कि ये हिन्दूक्राँतिकारी संघ के अधिकारियों को मरवाना चाहते हैं ! वाह क्या बात है झूठ बोलो तो ऐसा कि सुनने वाले के होश उड़ जांए !

सच में थोड़ी देर तो हम भी सन रह गये फटाक से मन में सरकार के हिन्दुविरोधी रूख को देखते हुए विचार आया कि कहीं सरकार शहीद श्यामा प्रसाद मुखरजी जी की तरह कहीं जिहादियों के साथ मिलकर इन संघ के अधिकारियों को मरवाकर दोष हिन्दू क्राँतिकारियों पर डालने की योजना तो नहीं बना रही ?

काश इनको पता होता संघ की कार्य पद्धति का जहां राष्ट्र से ऊपर कोई नहीं बड़े से बढ़ा पदाधिकारी भी नहीं।

अब आप खुद ही फैसला कर लो कि क्या सच है क्या झूठ पहले कहा गया ये क्रांतिकारी संघ के हैं अब कह रहे हैं संघ इनके निशाने पर है!

अच्छा मान लेते हैं कि जो सरकार कह रही है वो सब सत्य है मतलब जिहादियों के हमलों से तंग आकर इन सब क्राँतिकारियों ने मिलकर सिमी के अड्डों को ध्वस्त करने की योजना बनाई । और उसे अंजाम तक पहुँचाने के लिए कुछ बम्ब विस्फोट भी किए । ये भी मान लेते हैं कि इन बम्ब विस्फोटों में जिहादियों के साथ-साथ कुछ आम मुसलमान भी मारे गये । तो भी इन क्राँतिकारियों ने क्या गलत किया जो हिन्दुओं को मार रहे थे उन्हें मारकर इन्होंने एक तरह से कानून की मदद ही तो की है रही बात निर्दोषों के मारे जाने की तो किसी भी युद्ध में थोड़े बहुत तो निर्दोष मारे ही जाते हैं।

अगर देश में कोई देशभक्त सरकार होती तो इन क्राँतिकारियों को हिन्दुओं की जान माल की रक्षा के लिए संघर्ष करने के लिए ईनाम देती । पर इसे देश का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि देश में एक ऐसी हिन्दुविरोधी जिहाद समर्थक सरकार है जो जिहादी आतंकवादियों को न खुद मारती है न किसी को मारने देती है उल्टा देशभक्त साधु सैनिकों हिन्दुओं को फाँसी पर चढ़ाने के लिए षड्यन्त्र रचती है ।

जागो ! हिन्दू जागो !

बैसी भी आज तक जो हजारों हिन्दू इन मुस्लिम जिहादियों द्वारा मारे गए वो सब भी तो निर्दोष ही थे । दोष था तो सिर्फ इतना कि वो देशविरोधी नहीं थे, मुस्लिम जिहादी नहीं थे, गद्दार नहीं थे !

जिस गिरोह ने इन हिन्दुओं के मारे जाने को सही ठहराने के लिए ये तर्क दिया कि मस्जिद(राम मन्दिर) को गिराया गया इसलिए जिहादियों ने ये सब किया और जिस मीडिया ने उनके इस तर्क का समर्थन और प्रचार प्रसार किया यहां तक कहा कि ये जिहादी सरकार के भाई हैं वो किस मुँह से इन हिन्दू क्राँतिकारियों को हिन्दू आतंकवादी कह रहे हैं ?

इस देशद्रोही जिहाद समर्थक गिरोह का इन हिन्दुओं को अपशब्द कहना बिल्कुल वैसा ही अपराध है जैसा अपराध इन गद्दारों ने शहीद मोहन चन्द शर्मा जी की शहीदी पर सवाल उठाकर किया था !

इसलिए इन गद्दारों से हम बात नहीं कर रहे। हम बात कर रहे हैं उन हिन्दुओं से जो धर्म-अधर्म की इस जंग में कोने पर खड़े होकर इतने जुल्म हो जाने के बाद भी अनिर्णय की स्थिति में हैं।

हम कह रहे थे कि युद्ध में कुछ निर्दोषों का मारा जाना स्वाभाविक ही है। अगर आपको लगता है कि ये युद्ध नहीं है तो जाओ उन हिन्दुओं के पास जो अपने ही देश में अपने ही घर से उजड़ गये ।

या फिर उन हिन्दुओं के पास जिनमें से किसी ने अपने माँ-बाप, किसी ने भाई-बहन,किसी ने अपने बच्चों को, तो किसी ने अपने सुहाग को इन जिहादियों के हाथों खोया है कईयों ने तो अपने सामने इन जिहादियों के हाथों अपने 0 से 18 साल के बच्चों को हलाल होते देखा है। कहीं-कहीं तो इन जिहादियों ने दूध पीते बच्चों को भी हलाल कर दिया। जो माँ ,बहन-बेटियों की आबरू से खिलवाड़ किया गया सो अलग और ऐसे प्रताड़ित हिन्दुओं की संख्या लाखों में है ।अब ये युद्ध नहीं तो और क्या है ?

ये युद्ध किसी दूसरे देश के साथ नहीं ये बाहरी सहायता से चल रहा आंतरिक युद्ध है। जिसे जिहादियों और धर्मान्तरण के ठेकेदारों ने हिन्दुओं के विरूद्ध छेड़ रखा है अब ये हिन्दुओं के ऊपर है कि इन आसुरों के हाथों कायरों की तरह मरना है या फिर जंगे मैदान में उतर कर जीत हासिल करनी है या वीरगति को प्राप्त होना है।

हमें तो कायरों की तरह मरना स्वीकार नहीं इसलिए हम जंगे मैदान में उतर रहे हैं। आपको किनारे खड़े होकर तमाशा देखना है या फिर भगवान के इस काम में आहुति देनी है ये खुद फैसला करो !

 

आतंकवाद भी बाहरी देशों के बजाए अपने नेताओं की आतंकवाद समर्थक नीतियों की बजह से कहीं ज्यादा फला फूला है ? क्यों ये सेकुलर गिरोह सख्त कानून का विरोध कर भारत को एक ऐसा देश बनाने पर तुला है कि दुनिया के सब अपराधी भारत को अपना गढ़ बनाकर भारतीयों पर हमला कर उनको मिटाने के बाद दुनियाभर में अपराध फैलाकर भारत को बदनाम करें ।

अगर इस सेकुलर गिरोह ने ये हिन्दुविरोधी आतंकवाद समर्थक नीतियां यथाशीघ्र नहीं छोड़ीं तो वो दिन दूर नहीं जब भारत को भी पाकिस्तान व अफगानीस्तान जैसे हालात का सामना करना पड़ेगा और इस सब के लिए जेहादियों को शरण देने वाले मुसलमानों से कहीं ज्यादा यह सेकुलर गिरोह जिम्मेवार होगा । आज जो हालात देश में बनते जा रहे हैं उस सब के लिए भी मुसलमानों से ज्यादा मुस्लिम जेहादियों को उकसाने वाले व उनके अनुकूल वातावरण बनाने वाले ये सेकुलर नेता ही जिम्मेवार हैं।

बेशक पाकिस्तान आतंकियों का कारखाना बन चुका है पर जिहादियों को स्थानीय सहायता तो पाकिस्तान नहीं दे रहा । आतंकवादियों को फाँसी देने से तो पाक नहीं रोक रहा पकिस्तान का नाम लेकर ये धोखेबाज नेता हमें इस युद्ध में उत्तरने से रोक रहे है।

जब ये सत्य है कि ये युद्ध पाक लड़ रहा है तो फिर वहां के लिए बसें और ट्रेनें क्यों चलाई जा रही हैं ? क्यों बंद नहीं कर दिया जाता इन सब को ? क्यों रद्द नहीं कर दिया जाता उन सब समझौतों को जो भारत के बजाय पाकिस्तान को लाभ पहुंचाते हैं ? क्या जिहादियों को बचाने के लिए पोटा पाकिस्तान ने हटाया ? वो तो अपने यहां आतंकवादियों को गोली मार रहा है और ये सैकुलर गिरोह माननीय सर्वोच्चन्यायालय के आदेश के बावजूद जिहादियों को पाल रहा है उनको बचाने के उपाय ढूंढ रहा है व उनके विरूद्ध लड़ रहे देशभक्तों को प्रताड़ित कर रहा है !

पाक तो बीजा छूटों, बसों व ट्रेनों का भी विरोध करता है फिर इन नेताओं को क्या खाज होती है ये सब करने की ?

क्योंकि या तो ये जानते हैं सब कतलो-गारद पाक की मदद से भारत के मुसलमानों में छिपे जिहादी ही कर रहे हैं या फिर मुस्लिम देश इन नेताओं को खरीद कर मुस्लिम जेहादियों के अनुकूल वातावरण बनाने के लिए देशविरोधी मानवाधिकार संगठनों,गद्दार लेखकों, देशविरोधी समाचार पत्रों व हिन्दुविरोधी मीडिया के माध्यम से दवाव वनाकर बाध्य कर देते हैं।

हम तो कहते हैं कि भारतीय सेना को सिमी जैसे मुस्लिम आतंकवादी संगठनों, मुसलिम घुसपैठियों का समर्थन करने बाले नेताओं का नार्को करवाकर पता लगाना चाहिए कि इस साजिस में कौन-कौन दल व नेता सामिल हैं व ऐसे गद्दारों को फांसी पर चढ़ाना चाहिए।

बेशक देश में बम्मविस्फोट करने वाले अधिकतर मुस्लिम जिहादी हैं पर उनकी पैरवी करने वाला, उनके अनुकूल वातावरण बनाने वाला उन्हें उकसाने वाला, तो यही सेकुलर गिरोह है ।

अगर आप सोच रहे हैं कि इन जिहादियों, नक्सलियों, माओवादियों, चर्च प्रेरित आतंकवादियों को बारूद कहाँ से मिलता है बेशक पाकिस्तान से भी मिलता है पर उसे रोकने की जिम्मेवारी भी तो सरकार की है। जरा जी न्यूज की इस रिपोर्ट को देखो ।

इस रिपोर्ट(23-11-08) के अनुसार पिछले कुछ समय में 20,000 किलो बारूद,1,00,000 डेटोनेटर,1500 जिलेटिन छड़ें, 5200 मी से अधिक डेटोनेटिंग फ्यूज, सेफ्टीफ्यूज इसके अतिरिक्त टनों के हिसाब से अन्य विस्फोटक देश की विभिन्न विस्फोटक बनाने वाली फैक्टरीयों से चोरी के बहाने गायब करवाया जा चुका है जब इस बारे में महाराष्ट्र के विस्फोटक नियंत्रक जोआब अली से बात की गई तो उसने इसे आम घटना बताया।

रही बात जिहादियों की ट्रेनिंग की तो कुछ दिन पहले ही राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने देश में चल रहे आतंकवादी ट्रेनिंग कैम्पों की संख्या 800 बताई थी। ये संख्या तो तब है जब मस्जिदों में चल रहे अधिकतर जिहादी ट्रेनिंग कैंम्पों तक न सरकार की पहुँच है न पहुँच बनाने की कोशिश है।

अब आप ही फैसला करो कि ये आन्तरिक युद्ध है कि नहीं । अब आप कहेंगे कि बेशक ये युद्ध है पर इसके लिए हमारे पास सुरक्षा बल हैं । आपको यह ध्यान रखना चाहिए कि पुलिस- बोले तो-एटीएस वो ही करती है जो सरकार चाहती है जो सरकार सत्ता में आते ही जिहादियों के लिए खौफ बन चुके पोटा को हटाती है क्या पुलिस और जिहादियों के लिए ये संकेत काफी नहीं ?

अब रही बात सेना की तो भारतीय सेना बिना सरकारी आदेश के कोई एक्शन नहीं करती । भारतीय सेना पर सरकार द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में एक्शन के दौरान क्या-क्या प्रतिबन्ध लगाये जाते हैं ये तो सेना ही जानती है। वैसे आपकी जानकारी के लिए बता दूँ कि भारत में प्रतिदिन औसत 11 जवान शहीद होते हैं । इस युद्ध को निर्णायक रूप से सेना तभी लड़ सकती है जब देश की बागडोर सेना खुद अपने हाथों मे ले ले ।

काश ! ऐसा हो पाता तो कम से कम पाँच साल देश इस विदेशी अंग्रेज का गुलाम तो न रहता । एक विदेशी अंग्रेज इतनी बड़ी भारतीय सेना के होते हुए देश को गुलाम बनाकर बैठ जाए और देश को बर्बाद करने का हर प्रयत्न करने में कामयाब रहे । जरा सोचो सैनिक भाईयो सोचो कि शहीद भक्त सिंह जी के अंग्रेजों को निकालने के लिए किए गये बलिदान का ये अपमान नहीं तो और क्या है ?

अब आप ही बताओ जब देश में एक विदेशी अंग्रेज की गुलाम जिहाद व धर्मांतरण समर्थक सरकार सत्ता में हो तो इस जिहादियों द्वारा थोपे गये युद्ध को कौन लड़े ? क्योंकि ऐसी हिन्दुविरोधी सरकार आतंकवादियों पर हमला बोलने की इजाजत तो सुरक्षाबलों को दे नहीं सकती । ऐसे हालात में अगर हिन्दू हथियार न उठाये तो क्या निहत्था मरे?

आशा है कि आप समझ गये होंगे कि ये बाहरी व आन्तरिक सहयोग से हिन्दुओं पर थोपा गया आन्तरिक युद्ध है जिसे हिन्दुओं को ही लड़ना पड़ेगा क्योंकि इसे न लड़ने या हारने की स्थिति में हिन्दुओं को ही मरना या बेघर होना पड़ेगा ।

अतः आशा है कि आप भगवान का नाम लेकर इस युद्ध में तन-मन-धन सहित कूद पड़ेंगे व इन असुरों से देश को आजाद करवाने के इस यज्ञ में भाग लेकर इस मानव सभ्यता को बचाने में सफल होंगे ।

अगर आपको ये लग रहा है कि हम हिन्दू क्राँतिकारियों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं तो आप गलत सोच रहे हैं आपको इस पुस्तक को फिर से पढ़ने की जरूरत है क्योंकि यह परम सत्य है कि एक क्राँतिकारी का बलिदान अनेकों क्राँतिकारियों को जन्म देता है इन क्राँतिकारीयों के जेल में जाने के साथ ही हिन्दुओं में हिन्दूक्राँति की ज्वाला तीव्र हो रही है…

अपना तो पहले से ही स्पष्ट मानना है कि लातों के भूत बातों से नहीं मानते मतलब साफ है अगर दुनियां में कहीं भी किसी भी हिन्दू को ईसाईयत( नक्सलवाद), इस्लाम, धर्मनिर्पेक्षता, वामपंथ(माओवाद) के नाम पर मारा जाता है तो उससे दोगुनी संख्या में कातिलों व उनके समर्थकों को मारकर ही समस्या का समाधान किया जा सकता है ।

अन्यथा मरते रहो ये राक्षस आपको तब तक मारते रहेंगे जब तक आप खत्म नहीं हो जाते और मानवता का शत्रु ये सैकुलर गिरोह आपके कत्ल को सही ठहराने के लिए इन कातिलों की अनपढ़ता ,गरीबी से लेकर राममन्दिर आन्दोलन तक की सहायता लेता रहेगा और अगर आप विरोध करेंगे तो आपको सांप्रदायिक कहकर गाली निकालेगा अगर इतने से काम चल गया तो ठीक नहीं तो आपको जिहादियों के इशारे पर हिन्दू आतंकवादी कहकर सारी दुनिया में बदनाम कर आपके साधुसन्तों-सैनिकों को अपमानित कर इन जिहादियों व धर्मांतरण के ठेकेदारों के हिन्दू-मिटाओ हिन्दू-भगाओ अभियान को सफल बनाने में हर संभव सहयोग देगा !

जागो ! हिन्दू जागो !

हम तो साधु-सन्तों व शान्ति की बात करने वाले देशभक्त हिन्दूसंगठनों से भी ये विनम्र प्रार्थना करेंगे कि देश के बिगड़ते हालात को देखते हुए अहिंसा के मार्ग पर बढ़ने के अपने संकल्प पर पुनर्विचार करें व परिवेश को ध्यान में रखते हुए अपनी योजनांयें बनायें कहीं ऐसा न हो आप अहिंसा का पालन करते रह जांयें और 1947 की तरह ये देशद्रोही सैकुलर गिरोह करोंड़ों हिन्दुओं का कत्ल करवाकर देश को जिहादियों के रहमोकरम पर छोड़ दे ।

कब तक आप ये सब देखते रहेंगे कबतक हमारे जैसे हिन्दू कार्यकर्ताओं को मर्यादा व अहिंसा का तरक देकर दरकिनार करते रहेंगे ।

जब मर्यादा पुर्षोतम भगवान राम के ही अस्तित्व को ही नकार दिया गया हो तो काहे की मर्यादा। वैसे भी गीता में कहा गया है

धर्मों रक्षति रक्षितः

अर्थात धर्म उसकी रक्षा के लिए है जो धर्म का पालन करता है। धर्म के अस्तित्व को ही नकारने वाले इन आतंकवादियों व सैकुलर असुरों के लिए काहे की अहिंसा।

अगर मानवता को बचाना है तो इन असुरों पर निर्णायक विजय जरूरी है और निर्णायक विजय के लिए इन असुरों का मुकाबला इन्हीं के तरीके से करना जरूरी है वरना कहीं ऐसा न हो इतिहास आपको भी भीष्म-पितामह की तरह कभी माफ न करे।

अहिंसा की बात करने वाले हिन्दू ही बताएं कि जब हर तरफ से हथियारबंद जिहादी ,धर्मांतरण के ठेकेदार ईसाई, नक्सलवादी, माओवादी (सीपीआई,सीपीएम) , चर्च प्रेरित आतंकवादी हिन्दुओं पर हमला कर रहें हैं और धर्मनिर्पेक्षता की आड़ में ये देशद्रोही गिरोह निर्दोष हिन्दुओं की रक्षा करने के बजाए इन कातिलों का हर तरह का सहयोग दे रहा हो तो फिर हिन्दू हथियार क्यों न उठायें ?

जब हिन्दू हथियार उठायें तो फिर सारा हिन्दूसमाज उनके साथ खड़ा क्यों न हो । और जब सारा हिन्दूसमाज उनके साथ खड़ा हो तो फिर दुशमन की क्या मजाल के बच के निकल जाए और दोबारा अपने हिन्दुओं की तरफ आँख उठाए।

हम इन हिन्दुओं को विनम्रतापूर्वक ये बताना चाहते हैं कि हिन्दुओं ने इस लड़ाई से बचने के लिए अफगानिस्तान से लेकर कश्मीर घाटी तक सबकुछ छोड़ दिया बदले में क्या मिला गाली, सांप्रदायिक आतंकवादी होने का लांछन, हमले पर हमला ?

हिन्दुओं ने सबके अस्तित्व को स्वीकार किया बदले मे क्या मिला हमारे आस्था के आधार स्तम्भ भगवान राम के अस्तित्व पर प्रश्न चिन्ह ?

हिन्दुओं ने बेघरों से लेकर आक्राँताओं तक को अपनी मातृभूमि भारतवर्ष में बसने दिया बदले में क्या मिला देश का विभाजन बचे हुए अखण्ड भारत के छोटे से टुकड़े से हिन्दुओं को ही उजाड़ने का षड्यन्त्र ।

नहीं चाहिए हमें ये शमशानघाट वाली शांति गोली मार दो ऐसी शांति की बात करनें वालों को जो हिन्दुओं के कत्ल व बेघर होने की वजह बने । स्पष्ट कर दो इन विधर्मियों को कातिल धर्मनिर्पोक्षतावादियों को–ये राष्ट्र हिन्दूराष्ट्र है सिर्फ हिन्दुओं का है- जिनको इसके हिन्दूराष्ट्र होने पर आपत्ति है छोड़ कर चले जांयें अपने-अपने देशों को वापिस जहां से आए थे वरना मिटा दिए जाओगे !

यहां औरंगजेब, बाबर ,गजनबी , डायर की जिहादी व धर्मांतरण की दलाल सन्तानों के लिए कोई जगह नहीं ये ऋषियों-मुनियों योगियों की भूमि है हिन्दुओं की भूमि है यहां अहिन्दुओं का क्या काम ?

भारत के इतिहास की ये निर्णायक लड़ाई हमारी मजबूरी है शौक नहीं ।

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