हिन्दूक्रांति की शुरूआत या सरकारी षडयन्त्र

 

अगर इस हिन्दुविरोधी सरकार द्वारा लगाये गये आरोप सही हैं तो अपने इस आन्दोलन की शुरूआत लैफ्टीनैंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित जी के नेतृत्व में साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर जी के मार्गदर्शन में हो चुकी है।

बस जरूरत है तो इस आन्दोलन को 1857 के स्वतन्त्रता संग्रांम की तरह अधूरा न छोड़ कर आगे बढ़ाना और इन जिहादियों व धर्मांतरण के दलालों से मुक्त कराना । क्योंकि जिस तरह उस वक्त भारतीय अंग्रेजों के अत्याचारों से त्रस्त थे ठीक इसी तरह आज समस्त हिन्दूसमाज इन जिहादियों, धर्मांतरण के दलालों व उनके समर्थक इस सैकुलर गिरोह द्वारा किए जा रहे अत्याचारों व हिन्दू-विरोधी षड्यन्त्रों से त्रस्त है।

जरा सोचो जो गिरोह हिन्दुबहुल क्षेत्रों व मन्दिरों पर लगातार हो रहे बम्मविस्फोटों को गुमराह भाईयों का काम बता रहा था बार- बार इस्लामिक आतंकवाद को कभी अयोध्या तो कभी गुजरात का तर्क देकर जायज ठहरा रहा था कभी गरीबी तो कभी अनपढ़ता का बहाना बना रहा था ।

कुछ न दिखे तो पाक आई.एस.आई का काम बताकर बिना मुस्लिम जिहादियों के विरूद्ध कोई कार्यवाही किए पल्ला छुड़ा रहा था । हिन्दुओं के कातिलों को बचाने के लिए कठोर कानून न वनाने की बात कर रहा था । धमाका होते ही सबन्धित क्षेत्र के संभावित हमलावरों को बचाने के लिए कर्फयु लगा रहा था व साँप्रदायिक हिंसा रोकने के बहाने हमलावरों को बचाने के रास्ते तलाश रहा था ।

हमला मुसलमानों ने किया है ऐसा पता हिन्दुओं को न लग जाए इसके लिए जिहादियों द्वारा मारे जाने वालों की पहचान छुपा रहा था व पुलिस पर अपराधी मुसलमानों के नाम न बताने के लिए दबाव बना रहा था । आतंकवादी का कोई धर्म नहीं होता ऐसा जोर-जोर से चिलाकर इस्लाम की असलिएत छुपा रहा था। हिन्दुविरोधी मीडिया इस गिरोह के सारे दुष्प्रचार व षड्यन्त्रों को आगे बढ़ा रहा था ।

कुल मिलाकर जिहादियों को हिन्दुबहुल क्षेत्रों व मन्दिरों में बम्ब विस्फोट करने से रोकने या टोकने के बजाए उन्हें हर तरह की नैतिक व तकनीकी मदद देकर हमले तेज करने के लिए सैकुलर गिरोह व मीडिया द्वारा मिलकर भड़काया जा रहा था ।

वो ही गिरोह मालेगांव में हुए सिर्फ एक बम्ब विस्फोट व पांच मुसलमानों के कत्ल पर इतना बौखला जाता है कि हिन्दूआतंकवादी हैं हिन्दूआतंकवादी है चिल्लाना शुरू कर देता है(वो भी तब जब अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि ये काम जिहादियों का नहीं है) ये मुसलमानों पर हमला है ऐसा शोर मचा देता है।

एक हिन्दू साध्वी को अवैध हिरासत में रखकर अत्याचार कर झूठे आरोप स्वीकार करने का दबाव बनाता है। मीडिया उस साध्वी द्वारा शहीदों की आत्मा की शान्ति के लिए आयोजित पिण्ड दान को आतंकवादी गतिविधी बताता है( ये पिण्डदान श्री अमरनाथयात्रा संघर्ष समिति के नेतृत्व में देशविरोधियों के विरूद्ध चले संघर्ष में हिन्दुविरोधी सरकार द्वारा करवाई गई गोलीबारी में मारे गये हिन्दुओं की आत्मा की शान्ति के लिए करवाया गया था।) तरह- तरह की अफवाहें फैलाता है कहानियां बनाता है ये हिन्दुविरोधी गिरोह की सरकार लगभग सभी हिन्दू संगठनों को आतंकवादी कहकर बदनाम करना शुरू कर देती है ।

साध्वी जी के फोन रिकार्ड के आधार पर गिरफ्तारियाँ शुरू हो जाती है। गिरफ्तारियों का सिलसिला रूकता है सुधाकर जी की गिरफ्तारी के बाद डाक्टर अब्दुल कलाम जी का नाम आने पर । पकड़े गये सब व्यक्तियों का अपराध सिर्फ इतना था कि इनका उस साध्वी के साथ सबन्ध था। जो झूठे आरोप लगाकर सरकार ने गिरफ्तार की थी ।

आगर कहीं डा अब्दुलकलाम जी का नाम न आता तो आज इन्हीं सम्पर्कों के बहाने कई और हिन्दू कार्यकर्त्ता, हिन्दूसंगठनों के पदाधिकारी व साधु-सन्त जेलों में होते जिसका प्रयास आज भी जारी है और डा अब्दुल कलाम जी को भी लैफ्टीनैंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित जी की तरह जेल में डाल दिया जाता अगर वो मुसलमान न होते तो ।

सरकार द्वारा प्रचार शुरू कर दिया गया कि ये मुसलमानों को मारने का बहुत बढ़ा षड्यन्त्र है और सरकार के इस काल्पनिक षडयन्त्र के बहाने हिन्दू तो हिन्दू सेना तक को बदनाम किया गया। कुल मिलाकर जो हिन्दू पकड़े गए वो या तो हिन्दूकार्यकर्ता हैं जो मुस्लिम जिहादी हमलों के विरूद्ध आम जनता को जागरूक कर रहे थे या फिर वो सैनिक अधिकारी जो जिहादियों के विरूद्ध खुफिया जानकारी जुटा रहे थे ।

अब प्रश्न यह पैदा होता है कि आखिर सरकार इस हद तक इन हिन्दू संगठनों को बदनाम करने पर क्यों अमादा है ?

वास्तव में इसके कई कारण हैं पर इसका प्रमुख कारण इन संगठनों का सरकार द्वारा किए जा रहे देशविरोधी-हिन्दुविरोधी कामों का डटकर विरोध कर आम जनता को जागरूक करना है । सरकार को पता है कि जब तक देश की हिन्दू जनता का विश्वास इन हिन्दूवादी संगठनों में बना हुआ है तब तक इस देशद्रोह के रास्ते पर आगे बढ़ाना एक सीमा से आगे सम्भव नहीं ।अगर देश को तबाही और बर्बादी के उस रास्ते पर ले जाना है जो जिहादी और धर्मांतरण के ठेकेदार चाहते हैं तो हिन्दू संगठनों को कमजोर करना जरूरी है ।

वैसे भी जिस अंग्रेज एंटोनियो की ये सरकार गुलाम है उस अंग्रेज को हिन्दू संगठनों के डर ने प्रधानमन्त्री के पद से दूर रहने पर मजबूर किया तथा बाद में इन हिन्दूसंगठनों ने सरकार के बल पर चलाए जा रहे धर्मांतरण अभियान को जनसहयोग से रोकने में सफलता हासिल की ।

दूसरा इस हिन्दुविरोधी गुलाम सरकार द्वारा मर्यादापुर्षोत्तम भगवान श्री राम द्वारा निर्मित रामसेतु को तोड़ने की सब योजनाओं पर अगर किसी ने पानी फेरा तो इन हिन्दू-संगठनों द्वारा जनसहयोग से चलाए गये अन्दोलनों ने ।

तीसरा भूमि आबन्टन को रद करने पर जम्मू के वर्तमान इतिहास में पहली बार 70 दिन तक चला राष्ट्रवादी आन्दोलन।

जिस बात ने इस सरकार के होश उड़ा दिए वो था राष्ट्रवादी मुसलमानों का इस आन्दोलन में हिन्दू संगठनों का साथ देना । सरकार ने बार-बार आन्दोलनकारियों को कशमीरी जिहादियों के हमलों से डराने की कोशिश की लेकिन राष्ट्रवादी जब एक बार सर पर कफन बाँध लेते हैं तो रूकते तभी हैं जब मकसद पूरा हो जाता है यही इस मामले में भी हुआ।

अगर आप आज तक इस सेकुलर गिरोह के चुनावी मुद्दे देखें तो वो सिर्फ दो ही पहलु नजर आते हैं ।

एक आम आदमी का जिसकी हवा मंहगाई ने निकाल दी जो पिछली सरकार ने पूरी तरह से नियन्त्रण में रखी थी । अब तो लोग कहने लगे हैं कांग्रेस का हाथ आम आदमी के पेट पर लात।

दूसरा है जिहादियों को खुश करने के लिए हिन्दूविरोध व आम मुसलमान को साथ रखने के लिए हिन्दू संगठनों का डर दिखाना ।

लेकिन जब हिन्दू संगठन और राष्ट्रवादी मुसलमान एक साथ मिलकर आन्दोलन करें वो भी 70 दिन तक।

तो फूट डालो और राज करो की नीति पर चलने वाला ये गिरोह ऐसी एकता कैसे सहन कर सकता है। जब कुछ न दिखा तो मुसलमानों को डराने के लिए व हिन्दू संगठनों को बदनाम करने के लिए इस गिरोह ने काल्पनिक हिन्दूआतंकवाद का सहारा लिया ।

इस गठबंधन को उम्मीद थी कि बात-बात पर भड़कने वाले मुसलमानों में छिपे जिहादी आतंकवादी हिन्दुओं पर हमला करेंगे और दंगे भड़क उठेंगे और ये गिरोह फिर से अल्पसंख्यकों की रक्षा को मुद्दा बनाकर चुनाव जीत लेगा ।

जब ऐसा कुछ न हुआ तो सरकार ने हिन्दू संगठनों में फूट डालने के लिए नया षड्यन्त्र रचा और अफवाह फैला दी कि पकड़े गये हिन्दू क्योंकि घोर राष्ट्रवादी वीरसावरकर द्वारा बनाये गये अभिनव भारत नामक संगठन से हैं इसलिए ये हिन्दू राष्ट्रवादी संगठन के पदाधिकारियों को मारना चाहते हैं ।

जब सब हिन्दूसंगठनों ने सरकार के इस दुष्प्रचार को सरकार की फूट डालो और राज करो की नीति कहकर नकार दिया तो सरकार ने प्रखर हिन्दूराष्ट्रवादी प्रवीणभाई तोगड़िया जी पर अभिनव भारत को पैसे देने का आरोप लगाकर फिर हिन्दू संगठनों के बीच दूरी पैदा करने की कोशिश की ।

एक क्षण के लिए यह मान भी लें कि उन्होंने या किसी और ने अभिनव भारत जैसे प्रखर हिन्दूराष्ट्रवादी संगठन को पैसे दिए थे व उनके या किसी और के इस संगठन के साथ गूढ़ सबन्ध हैं तो भी किसी देशभक्त संगठन को पैसे देना या उसके साथ सबन्ध रखने में बुराई ही क्या है ?

जिस सरकार को मुस्लिम व ईसाई देशों से जिहादियों व धर्मांतरण के ठेकेदारों को मिलने वाले पैसे पर कोई आपति नहीं उसे अभिनव भारत को मिलने वाले पैसे पर आपति क्यों ?

रही बात आरोपों की तो ये तो देखो आरोप कौन लगा रहा है एक अंग्रेज की गुलाम हिन्दुविरोधी देशद्रोही सरकार ?

वैसे भी जब देश पर ऐसे गिरोह का राज हो जो अंग्रेजों का गुलाम हो, जो जिहादियों को अपना भाई बताता हो तथा जो देश के निर्दोष हिन्दुओं की रक्षा करने के बजाए उन्हें मरवाने के इन्तजाम में लगा हो तो भला देशभक्त हिन्दुओं के पास हथियार उठाने के सिवा और चारा भी क्या है ?

हम गद्दारों के इस गिरोह को बता देना चाहते हैं कि जब-जब भी हिन्दुओं पर अत्याचार किए गये हैं राम के अस्तित्व को नकारा गया है तब-तब भगवान ने खुद अवतार लेकर ऐसे पापियों का संहार किया है । पापियों के इस गिरोह का भी वही हश्र होने वाला है अभी तो सिर्फ साध्वी के रूप में गणों का आना शुरू हुआ अभी से घबरा गए! जो बोई है वो फसल तो काटनी ही पड़ेगी।

आपका विनाश आपको लैफ्टीनैंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित जी के रूप में अभी तो दर्शन ही दे रहा है पिछले कई वर्षों से हिन्दुओं पर ढाऐ गये हर जुल्म, निकाली गई हर गाली का हिसाब चुकाना पड़ेगा ।

अपने अन्त समय में अपने द्वारा किए गये दुराचारों ,रचे गये षड्यन्त्रों ,बहाए गये हजारों हिन्दुओं के लहु को अच्छी तरह याद कर लो, ये भी याद कर लो कि हलाल किए हिन्दुओं में अनेक दूध पीते बच्चे भी शामिल थे। जरा सोचो आपने हिन्दूविरोध और जिहाद समर्थन में अन्धे होकर ये क्या करवा दिया तुम्हें तो नरक में भी जगह नहीं मिलेगी अभी तो सिर्फ अपने किए पापों की सजा के बारे में सोचो आपके द्वारा किए गये पाप इतने भयानक हैं तो इनकी सजा कैसी होगी ?

जरा सोचो जो गिरोह जिहादियों को बचाने के लिए मुम्बई बम्ब धमाकों के आरोपियों पर से पोटा हटाता है। हैदराबाद बम्ब विस्फोटों के दोषियों को छोड़ कर उनका हौसला बढ़ाने के लिए एक-एक आटो भेंट करता है, इन जिहादियों व उनके समर्थकों को आक्रोशित हिन्दुओं के कहर से बचाने के लिए कभी बेचारा कभी अनपढ़ कभी गरीब तो कभी अपना भाई बताता है ।

मतलब हिन्दुओं के कातिल आतंकवादियों को अपना भाई बताकर उन्हें बचाने की हर कोशिश करता नजर आता है । वैसे भी ये गिरोह जिहादियों को बचाने के लिए जो तर्क देता है वो ही तर्क जिहादी हिन्दुओं को मारने के बाद देते हैं मतलब साफ है कि हिन्दुओं को कत्ल करने के लिए दोनों कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं !

वो ही गिरोह निर्दोष हिन्दुओं पर झूठे आरोप लगाकर हर हाल में उन्हें फंसाने के लिए हिन्दुओं पर अमानवीय अत्याचार करता है उनके विरूद्ध जांच पे जांच करवाता है । कभी मुम्बई पुलिस तो कभी हरियाणा पुलिस से ।

उनको कुछ न मिला तो सी बी आई से फिर भी कुछ न मिला तो इन निर्दोष हिन्दुओं को छोड़ने के बजाए इन्हें हिरासत में रखकर और यातनांयें देने के लिए इन पर मकोका लगा देता है।

वो ही मकोका सैंकड़ो बम्बविसफोट कर हजारों हिन्दुओं का कत्ल व मोहन चन्द जी को शहीद करने वाले बटाला हाऊस मुठभेड़ के बाद पकड़े गये जिहादियों पर क्यों नहीं लगाया जाता है ?

हम तो कहते हैं कि इस बात की जाँच होनी चाहिए कि ये गुलाम सरकार ये सब कहीं विदेशी ईसाई खुफिया तन्त्र के बल पर तो नहीं कर रही । अगर ऐसा है तो स्थिति और भी गम्भीर और खतरनाक है ।

शंका तब और भी बढ़ जाती है जब निर्दोष साध्वी जी का तीन-तीन बार नार्को टैस्ट करवाया जाता है सवाल खड़े होने पर तर्क दिया जाता है कि एक ही नार्को तीन बार करवाया । सैंकड़ों बम्बविस्फोट कर हजारों हिन्दुओं का कत्ल करने वाले सैंकड़ों जिहादियों में से कितनों का नार्को तीन-तीन बार करवाया गया ?

हिन्दू विरोधी षडन्यत्र तब और गहरा जाता है जब इतने बार विज्ञानिक टैस्ट करवाऐ जाने व इतनी बर्बर यातनांयें देने के बावजूद कोई प्रमाण न मिला और ये सिद्ध हो गया कि साध्वी निर्दोष है ।उसने जो भी जानकारी पुलिस को दी थी सही है

तो उसे छोड़ने के बजाए कुतर्क दिया गया कि साध्वी योग जानती है इसलिए उसने मशीन को अपने बस में कर लिया जिसको न केवल योग विशेषज्ञ स्वामी रामदेव जी बल्कि इन टैस्टों के विशेषज्ञों ने भी असम्भव करार दिया । इस तरह जो अपमान साध्वी जी का इस सैकुलर गिरोह द्वारा किया गया उसकी भरपायी तो पापी हिन्दुविरोधीयों के विनाश से ही सम्भव है।

जब हिन्दूवादी संगठन सरकार के इस षड्यन्त्र को पहचान कर उसका विरोध करते हैं तो इसे राजनीति का नाम देकर सरकार हिन्दुओं को बदानाम करने के षड्यन्त्र को आगे बढ़ाती है और साध्वी सहित सभी आरोपियों पर मकोका लगा दिया जाता है ।

यह उसी जिहाद व धर्मांतरण समर्थक गिरोह की सरकार है जो मुस्लिम आतंकवादियों को बचाने के लिए इन्हें गुमराह, अनपढ़, गरीब मुस्लिम नौजवान बताती है उन्हें कोई सजा न मिल पाए इसका हर प्रयास करती है क्योंकि वो जिहादी मुसलमान हैं इसलिए ये सरकार उनके प्रति बिल्कुल दयालु नजर आती है।

लेकिन यही हिन्दुविरोधी गिरोह की सरकार सिरफिरे युवक राहुल राज को किस तरह गोली से उड़ाती है । साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को गैर कानूनी ढंग से उठाकर अवैध कब्जे में रख कर यातनांये देती है हिन्दुविरोधी मीडिया के माध्यम से दुष्प्रचार करवाती है यही सब लैफ्टीनैंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित व अन्य आरोपियों के साथ भी दोहराया जाता है । इतना सब करने के बाद भी जब कुछ भी आपत्तिजनक नहीं मिलता है तो इन आरोपियों को जबर्दस्ती जेल में रखने के लिए इन पर छोटे-छोटे झूठे मामले दर्ज कर मकोका लगा दिया जाता है !

लैफ्टीनैंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित जी कोई पहले सैनिक नहीं हैं जिन्हें जिहादियों को बचाने की खातिर इस सरकार ने जेल मे डाला है। इससे पहले कश्मीर सहित देश के कई भागों में ये सब सुरक्षाबलों के उन जवानों के साथ किया जा चुका है जिन्होंने अपनी जान की परवाह न करते हुए जिहादियों को मार गिराया ।

हर जगह सुरक्षाबलों को दंडित करने के लिए हिन्दुविरोधी सरकार, तालिबानी मीडिया व बिके हुए मानवाधिकार संगठनों ने जिहादियों को आम मुसलमान बताकर पेश किया ।

कुछ आरोपियों की सामाजिक छवि को धूमिल करने के लिए उनकी जिन्दगी से सबन्धित काल्पनिक निजी मामलों को हिन्दुविरोधी मीडीया के सहयोग से उछाल कर जनता के मन में उनके द्वारा हिन्दू रक्षा के लिए किए जा रहे त्याग के प्रति शंका पैदा करने का प्रयत्न किया जा रहा है !

आज तक मुस्लिम जिहादियों द्वारा सैंकड़ों विस्फोट कर हजारों हिन्दुओं का कत्ल देश के विभिन्न हिस्सों में किया जा चुका है अगर पुणे पुलिस पर भरोसा किया जाए तो उसने 300 जिहादियों की सूची देश में हुए दर्जनों धमाकों से पहले इसी सरकार को दी है। आज तक क्या इस सरकार ने इन जिहादियों को पकड़ने के लिए इतनी तत्परता दिखाई है जितनी हिन्दुओं को झूठे मामलों में फंसाने के लिए दिखा रही है ?

एक बात और भी चौंका देले वाली है कि जब उत्तर प्रदेश में सी आर पी एफ कैंप पर हमला करने वाले जिहादियों ने मुम्बई पर हमले की जानकारी दी तो उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा ये सूचना महाराष्ट्र सरकार को दी गई तो महाराष्ट्र सरकार ने उन जिहादियों से पूछताछ करने या एटीएस द्वारा रिमांड पर लेने से क्यों इन्कार कर दिया गया ?

1993 में मुम्बई को बम्ब विस्फोटों से दहलाकर सैंकड़ों हिन्दुओं को कत्ल व हजारों को घायल करने वाले षड्यन्त्र के सूत्रधार जिहादी आतंकवादी को आज तक पकड़ना तो दूर उसे पकड़ने की कोई गम्भीर कोशिश तक नहीं की गई । और तो और उसकी अवैध सम्पति को आज तक बेचने का साहस तक न दिखा सकी ये सरकार । राम जी के भाई को तो झट से पकड़ कर जेल मे ड़ाल दिया । काश इतनी चुस्ती इस जिहादी दाऊद के परिवार को जेल में डालने के लिए दिखाई होती । तब तो दर्जनों शिकायतें मिलने के बाद भी कार्यवाही करने का साहस ये हिन्दुविरोधी सरकार नहीं जुटा पाती !

साहस जुटाय भी कैसे क्योंकि इस जिहाद समर्थक सरकार को पता है कि दाउद को पालने व बचाने वाले सब लोग इस सरकार के सहयोगी ही तो हैं । वरना क्या बात है कि जिस दाउद की महफिलों में हमारे फिल्मी कलाकार अपना शरीर बेचकर आते हैं , उस दाउद की महफिलों में हमारे खुफिया विभाग के लोग नहीं पहुंच पाते ?

हमें तो शक ही नहीं विसवाश होता जा रहा है कि हिन्दुओं को ऐसे जिहादी आतंकवादियों के कहने पर ही जेलों में डाल कर हिन्दू आतंकवादी हिन्दू-आतंकवादी का शोर मचाया जा रहा है जागो मेरे प्यारे बेसमझ आपस में लड़ने वाले हिन्दूओ बचा सकते हो तो बचा लो अपने देश को इन विके हुए गद्दारों के षड्यन्त्रों से वरना अनर्थ हो जाएगा हिन्दू कहीं के नहीं रहेंगे !

पिछले 20 वर्षों से भारत जिहादी हमलों को झेल रहा है क्या किसी जिहादी मौलवी या आतंकवादी के निजी मामलों को इस तरह उछाला गया है जिस तरह इन हिन्दुओं के निजी मामलों को उछाला जा रहा है या ऐसा वहशीयाना व्यावहार किसी जिहादी के साथ किया गया जैसा इन हिन्दुओं के साथ किया जा रहा है ?

ये सब करते हुए ये हिन्दुविरोधी गिरोह ये क्यों भूल जाता है ये जो हिन्दू जनता है वो सब जानती है कि देशभक्त योद्धा कैसे होते हैं वो देशद्रोहियों से बचने के लिए क्या-क्या करते हैं उन्हें बदनाम करने के लिए गद्दार कैसे-कैसे षड्यन्त्रों का सहारा लेते हैं !

ये हिन्दू अच्छी तरह जानता है कि ये वही मीडीया है जो अबु सलेम व दाउद इब्राहीम जैसे गद्दार जिहादियों को सम्मान सूचक भाषा से सम्बोधित करता है व ऐसे राक्षसों से हिन्दुओं की रक्षा में लगे हिन्दुओं और उनके संगठनों को असंसदीय भाषा से सम्बोधित करता है और करे भी क्यों न क्योंकि देश के गद्दारों व हिन्दूविरोधियों के पैसे और संरक्षण से ही तो ये देशद्रोही चैनल चलते हैं ! और उन्हीं के बारे में कुछ आपत्तिजनक बोलेगा तो मार पड़ेगी ।

आज तक जिहादी आतंकवादियों ने जितने भी हमले बोले उन सब में इस मीडिया ने वही बोला जो जिहादी बोलते हैं और जो जिहादियों को अच्छा लगता । एकमात्र जिहादी हमला जिस में मीडिया निष्पक्ष रहा वो था बटाला हाउस मुठभेड़ और परिणांम सबके सामने है जिहादियों के ठेकेदार अमरसिंह ने मीडिया की वो कुटाई करवाई कि आज तक इस मीडिया ने जिहादी आतंकवाद का परदाफाश करना तो दूर देश में छुपे जिहादियों की ओर उंगली तक उठाने का साहस न किया । करते भी कैसे जान बची और लाखों पाय ।

हिन्दूओ समझो कि अगर इस हिन्दुविरोधी देशद्रोही गिरोह के गाली-गलौच से बचना है तो इनकी जमकर कुटाई करना ही एकमात्र तरीका है ।

मुस्लिम जिहादियों द्वारा कुटाई के बाद इस मीडिया द्वारा फिर से शुरू हो गया हिन्दुओं को गाली-गलौच करने व आतंकवादी कहकर बदनाम करने का सिलसिला ।

मीडिया अच्छी तरह से जानता है कि निर्दोष हिन्दू को जितनी मर्जी गाली निकालो, उसको जितना मर्जी बदनाम करो, जो मन में आए कहते रहो बेचारा क्या करेगा ?

ठहरा जो सनातन में विश्वाश करने वाला हथियार तो उठा नहीं सकता, कत्ल तो दूर पिटाई तक तो कर नहीं सकता ।

परन्तु अगर कहीं कातिल जिहादियों को कातिल कह दिया तो फिर ये जिहादी और इन जिहादियों के सैकुलर दलाल इस मीडिया से जुड़े लोगों का जीना हराम कर देंगे वो भी अगर जिन्दगी बख्श दी जाएगी तो ।

यही वजह है आज तक इस देशद्रोही मीडिया ने जितने भी स्टिंग आपरेशन किए उनमें से अधिकतर (95%) हिन्दुत्व की बात या समर्थन करने वालों के विरूद्ध उनको बदनाम करने के लिए किए ।

एक स्टिंग आपरेशन जिसमें इस हिन्दुविरोधी सरकार को बचाने के लिए जिहादी दलालों द्वारा पैसे देकर सांसदों को खरीदते दिखाया गया उसे समय पर दिखाने के बजाए कई दिन बाद दिखाया गया वो भी पूरा नहीं ताकि इस देशद्रोही सरकार को बचाया जा सके ।

ये सब किया उस देशविरोधी चैनल ने जो चर्च के पैसे से चलता है व दिनरात हिन्दुओं, उनके संगठनों व साधु सन्तों को असंसदीय भाषा में डंके की चोट पर गाली गलौच करता है व अपने आकाओं को अपने हिन्दुविरोधी होने का प्रमाण देता है ।

खैर छोड़ो विदेशी सोच के गुलाम इस बिके हुए मीडिया से और उम्मीद भी क्या कर सकते हैं !

पर इस एटीएस को क्या कहें जो अपनी बात को अपने आप ही काट कर स्पष्ट संकेत दे रही है कि ये कोई जांच नहीं ये तो हिन्दुओं व उनके संगठनों को बदनाम करने का षड्यन्त्र है जो इस हिन्दुविरोधी-देशविरोधी जिहाद व धर्मांतरण समर्थक गठबंधन के भारी दबाव में एटीएस को मजबूरी में करना पड़ रहा है आप सोचेंगें हमें कैसे पता चला तो देखो जरा ।

सबसे पहले कहा गया हिन्दू आतंकवादी पकड़ा गया। नाम सामने लाया गया एक महिला का वो भी घरबार छोड़कर भगवान के काम में लगी एक साध्वी का ।

पकड़ने के बाद कहा गया ये साध्वी एबीवीपी से सबन्ध रखती है पता चला साधवी जी ने 1997 में ये संगठन छोड़ दिया । फिर कहा ये हिन्दू जागरण मंच से है पता चला इस संगठन में महिलाएं होती ही नहीं । फिर नाम आया राष्ट्रीय जागरण मंच का फिर बजरंग दल का फिर देश के सबसे शांतिप्रय देशभक्त संगठन आर एस एस का और अब अभिनव भारत जैसे घोर राष्ट्रवादी संगठन का… मतलब आरोपी एक— संगठन आधा दर्जन ।

इस देशद्रोही गिरोह व हिन्दुविरोधी मीडिया ने मिलकर शोर मचा दिया सारे हिन्दूसंगठनों व साधु-सन्तों में आतंकवादी हैं और जोर-शोर से ऐसा महौल बनाया मानो प्रतिबन्ध अब लगा कि अब लगा लेकिन जागरूक हिन्दुओं के हाव भाव को देखते हुए इस हिन्दुविरोधी सरकार का हौसला न पड़ा ।

बात यहीं रूक जाती तो शायद सरकार की पोल यूँ न खुलती । अब कहा गया सेना के बड़े-बड़े अधिकारी इस जिहादियों को मारने के बहुत बड़े षड्यन्त्र में शामिल हैं ।

बम्ब विस्फोट एक मारे गये जिहादी पांच हिन्दू आतंकवादियों का षड्यन्त्र बहुत बडा ?

बम्ब विस्फोट सैंकड़ों मारे गये हिन्दू हजारों गुमराह मुस्लिम भाईयों का काम कोई मुस्लिम आतंकवादी नहीं कोई षड्यन्त्र नहीं !

पता लगा ऐसी होती है सैकुलर सरकार अल्पसंख्यकों की सरकार विदेशियों की गुलाम- कातिलों की सरकार !

अब पकड़े गये लैफ्टीनैंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित जो जिहादियों व सेकुलरों के नैटवर्क का पर्दाफाश करने वाले थे । तर्क दिया गया कि ये साध्वी जी सहित कई उग्र हिन्दुओं के समपर्क में थे ।

अरे भई कुछ तो होश करो जो जिहादियों के विरूद्ध खुफिया जानकारी जुटा रहा हो उसको जिहादियों के विरूद्ध जनता को जागरूक कर रहे हिन्दूसंगठनों से उनके पास उपलब्ध जानकारी लेने के लिए देशहित में सम्पर्क करना ही पड़ेगा ऐसा तो नेहरू जी को भी चीन द्वारा किए गये आक्रमण के दौरान करना पड़ा था और इसी के परिणामस्वरूप संघ की एक बटालिएन को गणतन्त्र दिवस परेड में हिस्सा लेने के लिए बुलाया गया ।

कहा गया प्रसाद ही मास्टरमांइड है प्रसाद ने ही आर डी एक्स दिया । समझौता एक्सप्रैस में भी विस्फोट इसी आर डी एक्स से किया गया । पता चला समझौता एक्सप्रैस विस्फोट में आर डी एक्स का प्रयोग ही नहीं हुआ ! लैफ्टीनैंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित की पहुँच आर डी एक्स तक थी ही नहीं क्योंकि वो खुफिया विभाग में थे न कि एक्शन विभाग में ! फिर इस प्रखर राष्ट्रभक्त के ऊपर छोटे-छोटे काल्पनिक मामले दर्ज करने का सिलसिला शुरू हुआ ।

फिर नाम उछाला गया भाजपा का कहा गया एक विधायक की गिरफ्तारी होने वाली है । जब अदित्यनाथ जी योगी ने ललकारा हिन्दुओं के कातिल जिहादियों को अपना भाई बताने वाले गृहमन्त्री को – तो पकड़ा गया सुधाकर चतुर्वेदी जी को ।

कहा गया अब हिन्दू क्रांतिकारियों के सहयोगी बड़े –बड़े नामों का भांडाफोड़ होने वाला है नाम व फोटो सामने लाए गये डा. अब्दुल कलाम जी, डा. प्रवीण भाई तोगड़िया जी, श्री श्री रविशंकर जी, माननीय संघचालक सुदर्शन जी जैसे निष्ठावान देशभक्तों के ।

बढ़ते जनआक्रोश को देखकर इस हिन्दुविरोधी सरकार ने फूट डालो और राज करो के अपने एजंडे को आगेबढ़ाते हुए अफवाह फैला दी कि ये हिन्दूक्राँतिकारी संघ के अधिकारियों को मरवाना चाहते हैं ! वाह क्या बात है झूठ बोलो तो ऐसा कि सुनने वाले के होश उड़ जांए !

सच में थोड़ी देर तो हम भी सन रह गये फटाक से मन में सरकार के हिन्दुविरोधी रूख को देखते हुए विचार आया कि कहीं सरकार शहीद श्यामा प्रसाद मुखरजी जी की तरह कहीं जिहादियों के साथ मिलकर इन संघ के अधिकारियों को मरवाकर दोष हिन्दू क्राँतिकारियों पर डालने की योजना तो नहीं बना रही ?

काश इनको पता होता संघ की कार्य पद्धति का जहां राष्ट्र से ऊपर कोई नहीं बड़े से बढ़ा पदाधिकारी भी नहीं।

अब आप खुद ही फैसला कर लो कि क्या सच है क्या झूठ पहले कहा गया ये क्रांतिकारी संघ के हैं अब कह रहे हैं संघ इनके निशाने पर है!

अच्छा मान लेते हैं कि जो सरकार कह रही है वो सब सत्य है मतलब जिहादियों के हमलों से तंग आकर इन सब क्राँतिकारियों ने मिलकर सिमी के अड्डों को ध्वस्त करने की योजना बनाई । और उसे अंजाम तक पहुँचाने के लिए कुछ बम्ब विस्फोट भी किए । ये भी मान लेते हैं कि इन बम्ब विस्फोटों में जिहादियों के साथ-साथ कुछ आम मुसलमान भी मारे गये । तो भी इन क्राँतिकारियों ने क्या गलत किया जो हिन्दुओं को मार रहे थे उन्हें मारकर इन्होंने एक तरह से कानून की मदद ही तो की है रही बात निर्दोषों के मारे जाने की तो किसी भी युद्ध में थोड़े बहुत तो निर्दोष मारे ही जाते हैं।

अगर देश में कोई देशभक्त सरकार होती तो इन क्राँतिकारियों को हिन्दुओं की जान माल की रक्षा के लिए संघर्ष करने के लिए ईनाम देती । पर इसे देश का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि देश में एक ऐसी हिन्दुविरोधी जिहाद समर्थक सरकार है जो जिहादी आतंकवादियों को न खुद मारती है न किसी को मारने देती है उल्टा देशभक्त साधु सैनिकों हिन्दुओं को फाँसी पर चढ़ाने के लिए षड्यन्त्र रचती है ।

जागो ! हिन्दू जागो !

बैसी भी आज तक जो हजारों हिन्दू इन मुस्लिम जिहादियों द्वारा मारे गए वो सब भी तो निर्दोष ही थे । दोष था तो सिर्फ इतना कि वो देशविरोधी नहीं थे, मुस्लिम जिहादी नहीं थे, गद्दार नहीं थे !

जिस गिरोह ने इन हिन्दुओं के मारे जाने को सही ठहराने के लिए ये तर्क दिया कि मस्जिद(राम मन्दिर) को गिराया गया इसलिए जिहादियों ने ये सब किया और जिस मीडिया ने उनके इस तर्क का समर्थन और प्रचार प्रसार किया यहां तक कहा कि ये जिहादी सरकार के भाई हैं वो किस मुँह से इन हिन्दू क्राँतिकारियों को हिन्दू आतंकवादी कह रहे हैं ?

इस देशद्रोही जिहाद समर्थक गिरोह का इन हिन्दुओं को अपशब्द कहना बिल्कुल वैसा ही अपराध है जैसा अपराध इन गद्दारों ने शहीद मोहन चन्द शर्मा जी की शहीदी पर सवाल उठाकर किया था !

इसलिए इन गद्दारों से हम बात नहीं कर रहे। हम बात कर रहे हैं उन हिन्दुओं से जो धर्म-अधर्म की इस जंग में कोने पर खड़े होकर इतने जुल्म हो जाने के बाद भी अनिर्णय की स्थिति में हैं।

हम कह रहे थे कि युद्ध में कुछ निर्दोषों का मारा जाना स्वाभाविक ही है। अगर आपको लगता है कि ये युद्ध नहीं है तो जाओ उन हिन्दुओं के पास जो अपने ही देश में अपने ही घर से उजड़ गये ।

या फिर उन हिन्दुओं के पास जिनमें से किसी ने अपने माँ-बाप, किसी ने भाई-बहन,किसी ने अपने बच्चों को, तो किसी ने अपने सुहाग को इन जिहादियों के हाथों खोया है कईयों ने तो अपने सामने इन जिहादियों के हाथों अपने 0 से 18 साल के बच्चों को हलाल होते देखा है। कहीं-कहीं तो इन जिहादियों ने दूध पीते बच्चों को भी हलाल कर दिया। जो माँ ,बहन-बेटियों की आबरू से खिलवाड़ किया गया सो अलग और ऐसे प्रताड़ित हिन्दुओं की संख्या लाखों में है ।अब ये युद्ध नहीं तो और क्या है ?

ये युद्ध किसी दूसरे देश के साथ नहीं ये बाहरी सहायता से चल रहा आंतरिक युद्ध है। जिसे जिहादियों और धर्मान्तरण के ठेकेदारों ने हिन्दुओं के विरूद्ध छेड़ रखा है अब ये हिन्दुओं के ऊपर है कि इन आसुरों के हाथों कायरों की तरह मरना है या फिर जंगे मैदान में उतर कर जीत हासिल करनी है या वीरगति को प्राप्त होना है।

हमें तो कायरों की तरह मरना स्वीकार नहीं इसलिए हम जंगे मैदान में उतर रहे हैं। आपको किनारे खड़े होकर तमाशा देखना है या फिर भगवान के इस काम में आहुति देनी है ये खुद फैसला करो !

 

आतंकवाद भी बाहरी देशों के बजाए अपने नेताओं की आतंकवाद समर्थक नीतियों की बजह से कहीं ज्यादा फला फूला है ? क्यों ये सेकुलर गिरोह सख्त कानून का विरोध कर भारत को एक ऐसा देश बनाने पर तुला है कि दुनिया के सब अपराधी भारत को अपना गढ़ बनाकर भारतीयों पर हमला कर उनको मिटाने के बाद दुनियाभर में अपराध फैलाकर भारत को बदनाम करें ।

अगर इस सेकुलर गिरोह ने ये हिन्दुविरोधी आतंकवाद समर्थक नीतियां यथाशीघ्र नहीं छोड़ीं तो वो दिन दूर नहीं जब भारत को भी पाकिस्तान व अफगानीस्तान जैसे हालात का सामना करना पड़ेगा और इस सब के लिए जेहादियों को शरण देने वाले मुसलमानों से कहीं ज्यादा यह सेकुलर गिरोह जिम्मेवार होगा । आज जो हालात देश में बनते जा रहे हैं उस सब के लिए भी मुसलमानों से ज्यादा मुस्लिम जेहादियों को उकसाने वाले व उनके अनुकूल वातावरण बनाने वाले ये सेकुलर नेता ही जिम्मेवार हैं।

बेशक पाकिस्तान आतंकियों का कारखाना बन चुका है पर जिहादियों को स्थानीय सहायता तो पाकिस्तान नहीं दे रहा । आतंकवादियों को फाँसी देने से तो पाक नहीं रोक रहा पकिस्तान का नाम लेकर ये धोखेबाज नेता हमें इस युद्ध में उत्तरने से रोक रहे है।

जब ये सत्य है कि ये युद्ध पाक लड़ रहा है तो फिर वहां के लिए बसें और ट्रेनें क्यों चलाई जा रही हैं ? क्यों बंद नहीं कर दिया जाता इन सब को ? क्यों रद्द नहीं कर दिया जाता उन सब समझौतों को जो भारत के बजाय पाकिस्तान को लाभ पहुंचाते हैं ? क्या जिहादियों को बचाने के लिए पोटा पाकिस्तान ने हटाया ? वो तो अपने यहां आतंकवादियों को गोली मार रहा है और ये सैकुलर गिरोह माननीय सर्वोच्चन्यायालय के आदेश के बावजूद जिहादियों को पाल रहा है उनको बचाने के उपाय ढूंढ रहा है व उनके विरूद्ध लड़ रहे देशभक्तों को प्रताड़ित कर रहा है !

पाक तो बीजा छूटों, बसों व ट्रेनों का भी विरोध करता है फिर इन नेताओं को क्या खाज होती है ये सब करने की ?

क्योंकि या तो ये जानते हैं सब कतलो-गारद पाक की मदद से भारत के मुसलमानों में छिपे जिहादी ही कर रहे हैं या फिर मुस्लिम देश इन नेताओं को खरीद कर मुस्लिम जेहादियों के अनुकूल वातावरण बनाने के लिए देशविरोधी मानवाधिकार संगठनों,गद्दार लेखकों, देशविरोधी समाचार पत्रों व हिन्दुविरोधी मीडिया के माध्यम से दवाव वनाकर बाध्य कर देते हैं।

हम तो कहते हैं कि भारतीय सेना को सिमी जैसे मुस्लिम आतंकवादी संगठनों, मुसलिम घुसपैठियों का समर्थन करने बाले नेताओं का नार्को करवाकर पता लगाना चाहिए कि इस साजिस में कौन-कौन दल व नेता सामिल हैं व ऐसे गद्दारों को फांसी पर चढ़ाना चाहिए।

बेशक देश में बम्मविस्फोट करने वाले अधिकतर मुस्लिम जिहादी हैं पर उनकी पैरवी करने वाला, उनके अनुकूल वातावरण बनाने वाला उन्हें उकसाने वाला, तो यही सेकुलर गिरोह है ।

अगर आप सोच रहे हैं कि इन जिहादियों, नक्सलियों, माओवादियों, चर्च प्रेरित आतंकवादियों को बारूद कहाँ से मिलता है बेशक पाकिस्तान से भी मिलता है पर उसे रोकने की जिम्मेवारी भी तो सरकार की है। जरा जी न्यूज की इस रिपोर्ट को देखो ।

इस रिपोर्ट(23-11-08) के अनुसार पिछले कुछ समय में 20,000 किलो बारूद,1,00,000 डेटोनेटर,1500 जिलेटिन छड़ें, 5200 मी से अधिक डेटोनेटिंग फ्यूज, सेफ्टीफ्यूज इसके अतिरिक्त टनों के हिसाब से अन्य विस्फोटक देश की विभिन्न विस्फोटक बनाने वाली फैक्टरीयों से चोरी के बहाने गायब करवाया जा चुका है जब इस बारे में महाराष्ट्र के विस्फोटक नियंत्रक जोआब अली से बात की गई तो उसने इसे आम घटना बताया।

रही बात जिहादियों की ट्रेनिंग की तो कुछ दिन पहले ही राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने देश में चल रहे आतंकवादी ट्रेनिंग कैम्पों की संख्या 800 बताई थी। ये संख्या तो तब है जब मस्जिदों में चल रहे अधिकतर जिहादी ट्रेनिंग कैंम्पों तक न सरकार की पहुँच है न पहुँच बनाने की कोशिश है।

अब आप ही फैसला करो कि ये आन्तरिक युद्ध है कि नहीं । अब आप कहेंगे कि बेशक ये युद्ध है पर इसके लिए हमारे पास सुरक्षा बल हैं । आपको यह ध्यान रखना चाहिए कि पुलिस- बोले तो-एटीएस वो ही करती है जो सरकार चाहती है जो सरकार सत्ता में आते ही जिहादियों के लिए खौफ बन चुके पोटा को हटाती है क्या पुलिस और जिहादियों के लिए ये संकेत काफी नहीं ?

अब रही बात सेना की तो भारतीय सेना बिना सरकारी आदेश के कोई एक्शन नहीं करती । भारतीय सेना पर सरकार द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में एक्शन के दौरान क्या-क्या प्रतिबन्ध लगाये जाते हैं ये तो सेना ही जानती है। वैसे आपकी जानकारी के लिए बता दूँ कि भारत में प्रतिदिन औसत 11 जवान शहीद होते हैं । इस युद्ध को निर्णायक रूप से सेना तभी लड़ सकती है जब देश की बागडोर सेना खुद अपने हाथों मे ले ले ।

काश ! ऐसा हो पाता तो कम से कम पाँच साल देश इस विदेशी अंग्रेज का गुलाम तो न रहता । एक विदेशी अंग्रेज इतनी बड़ी भारतीय सेना के होते हुए देश को गुलाम बनाकर बैठ जाए और देश को बर्बाद करने का हर प्रयत्न करने में कामयाब रहे । जरा सोचो सैनिक भाईयो सोचो कि शहीद भक्त सिंह जी के अंग्रेजों को निकालने के लिए किए गये बलिदान का ये अपमान नहीं तो और क्या है ?

अब आप ही बताओ जब देश में एक विदेशी अंग्रेज की गुलाम जिहाद व धर्मांतरण समर्थक सरकार सत्ता में हो तो इस जिहादियों द्वारा थोपे गये युद्ध को कौन लड़े ? क्योंकि ऐसी हिन्दुविरोधी सरकार आतंकवादियों पर हमला बोलने की इजाजत तो सुरक्षाबलों को दे नहीं सकती । ऐसे हालात में अगर हिन्दू हथियार न उठाये तो क्या निहत्था मरे?

आशा है कि आप समझ गये होंगे कि ये बाहरी व आन्तरिक सहयोग से हिन्दुओं पर थोपा गया आन्तरिक युद्ध है जिसे हिन्दुओं को ही लड़ना पड़ेगा क्योंकि इसे न लड़ने या हारने की स्थिति में हिन्दुओं को ही मरना या बेघर होना पड़ेगा ।

अतः आशा है कि आप भगवान का नाम लेकर इस युद्ध में तन-मन-धन सहित कूद पड़ेंगे व इन असुरों से देश को आजाद करवाने के इस यज्ञ में भाग लेकर इस मानव सभ्यता को बचाने में सफल होंगे ।

अगर आपको ये लग रहा है कि हम हिन्दू क्राँतिकारियों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं तो आप गलत सोच रहे हैं आपको इस पुस्तक को फिर से पढ़ने की जरूरत है क्योंकि यह परम सत्य है कि एक क्राँतिकारी का बलिदान अनेकों क्राँतिकारियों को जन्म देता है इन क्राँतिकारीयों के जेल में जाने के साथ ही हिन्दुओं में हिन्दूक्राँति की ज्वाला तीव्र हो रही है…

अपना तो पहले से ही स्पष्ट मानना है कि लातों के भूत बातों से नहीं मानते मतलब साफ है अगर दुनियां में कहीं भी किसी भी हिन्दू को ईसाईयत( नक्सलवाद), इस्लाम, धर्मनिर्पेक्षता, वामपंथ(माओवाद) के नाम पर मारा जाता है तो उससे दोगुनी संख्या में कातिलों व उनके समर्थकों को मारकर ही समस्या का समाधान किया जा सकता है ।

अन्यथा मरते रहो ये राक्षस आपको तब तक मारते रहेंगे जब तक आप खत्म नहीं हो जाते और मानवता का शत्रु ये सैकुलर गिरोह आपके कत्ल को सही ठहराने के लिए इन कातिलों की अनपढ़ता ,गरीबी से लेकर राममन्दिर आन्दोलन तक की सहायता लेता रहेगा और अगर आप विरोध करेंगे तो आपको सांप्रदायिक कहकर गाली निकालेगा अगर इतने से काम चल गया तो ठीक नहीं तो आपको जिहादियों के इशारे पर हिन्दू आतंकवादी कहकर सारी दुनिया में बदनाम कर आपके साधुसन्तों-सैनिकों को अपमानित कर इन जिहादियों व धर्मांतरण के ठेकेदारों के हिन्दू-मिटाओ हिन्दू-भगाओ अभियान को सफल बनाने में हर संभव सहयोग देगा !

जागो ! हिन्दू जागो !

हम तो साधु-सन्तों व शान्ति की बात करने वाले देशभक्त हिन्दूसंगठनों से भी ये विनम्र प्रार्थना करेंगे कि देश के बिगड़ते हालात को देखते हुए अहिंसा के मार्ग पर बढ़ने के अपने संकल्प पर पुनर्विचार करें व परिवेश को ध्यान में रखते हुए अपनी योजनांयें बनायें कहीं ऐसा न हो आप अहिंसा का पालन करते रह जांयें और 1947 की तरह ये देशद्रोही सैकुलर गिरोह करोंड़ों हिन्दुओं का कत्ल करवाकर देश को जिहादियों के रहमोकरम पर छोड़ दे ।

कब तक आप ये सब देखते रहेंगे कबतक हमारे जैसे हिन्दू कार्यकर्ताओं को मर्यादा व अहिंसा का तरक देकर दरकिनार करते रहेंगे ।

जब मर्यादा पुर्षोतम भगवान राम के ही अस्तित्व को ही नकार दिया गया हो तो काहे की मर्यादा। वैसे भी गीता में कहा गया है

धर्मों रक्षति रक्षितः

अर्थात धर्म उसकी रक्षा के लिए है जो धर्म का पालन करता है। धर्म के अस्तित्व को ही नकारने वाले इन आतंकवादियों व सैकुलर असुरों के लिए काहे की अहिंसा।

अगर मानवता को बचाना है तो इन असुरों पर निर्णायक विजय जरूरी है और निर्णायक विजय के लिए इन असुरों का मुकाबला इन्हीं के तरीके से करना जरूरी है वरना कहीं ऐसा न हो इतिहास आपको भी भीष्म-पितामह की तरह कभी माफ न करे।

अहिंसा की बात करने वाले हिन्दू ही बताएं कि जब हर तरफ से हथियारबंद जिहादी ,धर्मांतरण के ठेकेदार ईसाई, नक्सलवादी, माओवादी (सीपीआई,सीपीएम) , चर्च प्रेरित आतंकवादी हिन्दुओं पर हमला कर रहें हैं और धर्मनिर्पेक्षता की आड़ में ये देशद्रोही गिरोह निर्दोष हिन्दुओं की रक्षा करने के बजाए इन कातिलों का हर तरह का सहयोग दे रहा हो तो फिर हिन्दू हथियार क्यों न उठायें ?

जब हिन्दू हथियार उठायें तो फिर सारा हिन्दूसमाज उनके साथ खड़ा क्यों न हो । और जब सारा हिन्दूसमाज उनके साथ खड़ा हो तो फिर दुशमन की क्या मजाल के बच के निकल जाए और दोबारा अपने हिन्दुओं की तरफ आँख उठाए।

हम इन हिन्दुओं को विनम्रतापूर्वक ये बताना चाहते हैं कि हिन्दुओं ने इस लड़ाई से बचने के लिए अफगानिस्तान से लेकर कश्मीर घाटी तक सबकुछ छोड़ दिया बदले में क्या मिला गाली, सांप्रदायिक आतंकवादी होने का लांछन, हमले पर हमला ?

हिन्दुओं ने सबके अस्तित्व को स्वीकार किया बदले मे क्या मिला हमारे आस्था के आधार स्तम्भ भगवान राम के अस्तित्व पर प्रश्न चिन्ह ?

हिन्दुओं ने बेघरों से लेकर आक्राँताओं तक को अपनी मातृभूमि भारतवर्ष में बसने दिया बदले में क्या मिला देश का विभाजन बचे हुए अखण्ड भारत के छोटे से टुकड़े से हिन्दुओं को ही उजाड़ने का षड्यन्त्र ।

नहीं चाहिए हमें ये शमशानघाट वाली शांति गोली मार दो ऐसी शांति की बात करनें वालों को जो हिन्दुओं के कत्ल व बेघर होने की वजह बने । स्पष्ट कर दो इन विधर्मियों को कातिल धर्मनिर्पोक्षतावादियों को–ये राष्ट्र हिन्दूराष्ट्र है सिर्फ हिन्दुओं का है- जिनको इसके हिन्दूराष्ट्र होने पर आपत्ति है छोड़ कर चले जांयें अपने-अपने देशों को वापिस जहां से आए थे वरना मिटा दिए जाओगे !

यहां औरंगजेब, बाबर ,गजनबी , डायर की जिहादी व धर्मांतरण की दलाल सन्तानों के लिए कोई जगह नहीं ये ऋषियों-मुनियों योगियों की भूमि है हिन्दुओं की भूमि है यहां अहिन्दुओं का क्या काम ?

भारत के इतिहास की ये निर्णायक लड़ाई हमारी मजबूरी है शौक नहीं ।

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