वेनकाब होती धर्मनिरपेक्षता !

वेनकाब होती धर्मनिरपेक्षता !

हम गांव में रहने वाले आम जिन्दगी जीने वाले लोग है राजनिती हमारे लिए एक अनजान पहेली है राजनिती करना हमारे बजट में आने बाला विषय नहीं हैं । यहां तक मिडीया तक अपनी बात पहुंचाना भी हमारे बस में नहीं । अच्छा क्या है बुरा क्या है सायद इसकी भी समझ हमें नहीं लेकिन गणित का विद्यार्थी होने के नाते  एक बात जो हम समझ सकते हैं बो है लाभ-हानि।

आज 62 वर्ष के अनुभव के बाद हम कह सकते हैं कि 1947 में भारत के पहले प्रधानमंत्री नहरू ने जो दिशा विभाजित भारत के इस हिस्से यानि INDIA को दी वो भारत के लिए किसी भी तरह से लाभदायक नहीं है । नहरू जी ने नारा दिया न जात पर न पात पर मोहर लगेगी हाथ पर , परन्तु सारे भारत को एक एसा नासूर दे गए जिसने आज भारत को जाति ,साम्प्रदाय, भाषा ,क्षेत्र के आधार पर तार-तार कर बरबादी के मुहाने पर ला खड़ा किया है आज देश में कानून भारतीय के लिए न होकर जाति ,समप्रदाय,भाषा ,क्षेत्र के आधार पर हैं परिणामस्वरूप लोग इन्हीं अधारों पर संगठित होकर एक दूसरे का गला काटने पर उतारू हैं। नैहरू खानदान के लोग अपने स्वार्थों की पूरती के लिए अपने संरक्षण में कभी भिंडरावाला पैदा करते हैं तो कभी राज ठाकरे ।

जब से हमने जन्म लिया है तब से हम एक ही नारा सुन रहे हैं वो नारा है धर्मनिर्पेक्षता का ।लेकिन जब हम अपने आप को धर्मनिर्पेक्ष कहने बाले दलों की नितियों  पर ध्यान देते हैं तो पता चलता है कि इन सब की नितियों का एक ही आधार है वो है फूट डालो और राज करो । ये खुद को धर्मनिर्पेक्ष कहने वाले लोग एक वात जिस पर पूरी तरह से सहमत दिखते हैं वो है हिन्दुविरोध यानि भारतीय-सभयता और संस्कृति का समूल नाश।

पहले तो हमें ये शक था कि ये धर्मनिर्पेक्षता के ठेकेदार सिर्फ भाजपा का विरोध करने के लिए या उसे सता से बाहर रखने के लिए मुसलिम आतंकवादियों को वेचारा गुमराह नौजवान कहकर व धर्मांतरण के दलालों को सेवा के मसीहे प्रचारित कर अपना उल्लू सीधा करते हैं । लेकिन मुंम्बइ पर हुए हमलों से पहले ये लगभग सपष्ट हो चुका था कि ये धर्मनिरपेक्षतावादी पूरी तरह से जिहादीयों व धर्मांतरण के दलालों के साथ हैं व इन जिहादियों का साथ देने के लिए ये किसी भी हद तक जा सकते हैं।क्योंकि इन धर्मनिरपेक्षतावादियों का एकमात्र सांझा एजंडा है हिन्दुत्व यानि भारतीय सभयता और संस्कृति का नाश ।

देश में जब कभी भी आतंकवादियों को कड़ी से कड़ी सजा देकर भारतीयों के जान माल की रक्षा करने की वात चली तो इन धर्मनिर्पेक्षताबादियों ने समाचार चैनलों पर चिल्ला-चिल्ला कर इन मुसलिम आतंकवादियों नक्सलियों माओवादियों का वचाव किया।

आज अगर हम गहराइ से विशलेषण करें तो पायेंगे कि आज तक देश में हुए हर आतंकवादी हमले के पीछे किसी न किसी धर्मनिर्पेक्षतावादी का हाथ जरूर है।

·        1947 के वाद के भारत में सबसे बड़ा हमला1993 में बाम्बे(मुम्बइ) स्टाक एकसचेंज पर हुआ। जिसमें तत्कालीन भारत के सबसे बड़े धर्मनिरपेक्षतावादी( इमानदार साफ-सुथरी छवी ) सुनील दत्त के परिबार का हाथ पाया गया। बाद में ये सिद्ध भी हो गया कि इस हमले में जो विस्फोटक प्रयोग किया गया वो सारे का सारा विस्फोटक इसी धर्मनिर्पेक्षतावादी सुनील दत्त के घर में रखा गया था । सिर्फ विस्फोटक ही नहीं रखा गया था बल्कि धर्मनिर्पेक्ष महौल में पला बढ़ा सुनील दत्त का वेटा संजय दत्त इस विस्फोटक के रख रखाव में तन-मन-धन से सहायता कर रहा था ताकि ज्यादा से ज्यादा भारतीयों बोले तो हिन्दुओं का खून बहाया जा सके । वात यहीं तक रहती तो गनीमत थी वाद में धर्मनिर्पेक्ष कांग्रेसियों ने इस जिहादी आतंकवादी संजय दत्त को बचाने के लिए जी भर कर धन-बल का प्रयोग किया आज परिणाम यह है कि ये धर्मनिर्पेक्ष आतंकवादी संजय दत्त राममन्दिर अंदोलन के दौरान हजारों हिन्दूओं का खून बहाने बाले मौलाना मुलायम सिंह यादब के आति धर्मनिर्पेक्ष दल समाजवादी पार्टी का अग्रणी नेता है। हो भी क्यों न दोनों हिन्दूओं के खून के प्यासे जो ठहरे।

·        1947 के वाद के भारत के इतिहास का दूसरा सबसे बड़ा हमला सांसद भवन पर हुआ जिसका नेतृत्व देश की सबसे बड़ी सेकुलर युनिवरसिटी ज्वाहर लाल नहरू युनीवरसीटी के धर्मनिर्पेक्ष प्रोफैसर ने किया । पुलिस द्वारा इस गद्दार को पकड़ लिए जाने के वाद इसके बचाब में आगे आया इससे भी बड़ा धर्मनिरपेक्षता वादी पत्रकार कुलदीप नैयर व अन्य धर्मनिरपेक्ष प्रोफैसर व पत्रकार ।इन सब ने अपने इस धर्मनिर्पेक्ष जिहादी आतंकवादी को बचाने के लिए हस्ताक्षर अभियान चलाया और कामयावी प्राप्त की। ये इन धर्मनिरपेक्षतावादियों की ही ताकत है जिसके सामने माननीय सर्वोच न्यायालय भी लाचार है ।

·        1947 के वाद के भारत के इतिहास का तीसरा सबसे बड़ा हमला हुआ मुम्बइ पर ।इस हमले में मुसलिम आतंकवादियों का वचाव करने के लिए सबसे पहले धर्मनिरपेक्षता की जन्मदाता कांग्रेस का अति धर्मनिर्पेक्ष ब्यक्ति अबदुल रहमान अन्तुले ये कहते हुए आगे आया कि ये हमला मुसलमानों ने नहीं बल्कि हिन्दुओं ने किया था। जो मांगे इन जिहादी आतंकवादियों ने इंडिया टीवी पर रखीं वो सब की सब वही थीं जो ये धर्मनिर्पेक्षतावादी अक्सर उठाते हैं। हमे तो उनकी बातों से ही समझ आ गया था कि ये धर्मनिर्पेक्ष आतंकवादी हैं।अब धीरे-धीरे पता चल रहा है कि फिल्म इंडस्ट्री के सबसे बड़े धर्मनिर्पेक्षतावादी महेश भट का परिवार इस हमले मे सामिल था। धर्मनिर्पेक्ष महौल मैं पला बड़ा महेशभट्ट का वेटा राहुल भट इन आतंकवादियों में से एक था।

अब आप सोचो कि हम क्यों न कहें कि ये सबके सब धर्मनिर्पेक्षताबादी हिन्दुविरोधी हैं आतंकवादी हैं गद्दार हैं । कहो न ये धर्मनिरेपेक्षतावादी नहीं आतंकवादी हैं गद्दार है हिन्दुविरोधी हैं।

अरे हिन्दूओ अब तो जागो और जगाओ— बौद्धिक गुलाम हिन्दुओं को जगाओ मेरे बलाग पर आओ अपने विचार देकर इस गद्दार मिटाओ अभियान को आगे बढ़ाओ …..

 

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