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यदि कोई हिन्दू मरा तो समझो कि उसने जरूर कोई गलती की होगी

यह लेख( सांप्रदायिक दंगो पर मुंह खोलने से पहले….) पूरी तरह से एक आहत हिंदू मन की व्यथा को प्रतिबिंबित करता है. ये जितनी भी घटनाएं हैं, इसके पीछे शर्मनिरपेक्ष सरकार, मीडिया इत्यादि का तो हाथ हैं ही, इसमें हम हिंदुओं के अंदर व्याप्त हो गई हजारों सालों की कायरता भी है. "वीर भोग्या वसुंधरा" अर्थात्‌ जमीन पर राज वीर ही करते हैं, और हमारे कौम के अधिकांश जनों का खून अब पानी बन गया है. देश-समाज, अपनी कौम के अन्य लोगों, स्थलों के साथ कुछ भी हो, हमें तो बस अपनी चिन्ता है. वहीं ये जिहादी कौम वाले डॆनमार्क, फिलीस्तीन, तुर्की में हुई घटना से भारत को हिला देते हैं. कुछ इसी तरह की बातों/घटनाओं को लेकर, जब गुजरात के अक्षरधाम मंदिर पर हमला हुआ था, और गोधरा में स्वयंसेवकों को जिन्दा जला दिया गया था, मैंने यह कविता लिखी थी-
उन्होनें कहा- लादेन मरे या बुश, हम दोनों में खुश.
फिर जोड़ा- ना लादेन मरे ना बुश, लगे दोनों पर अंकुश.

उनकी बातें सुनकर पूछा मैनें उनसे
लादेन और बुश की हो रही है लड़ाई
उसमें हिन्दूओं की क्यों हो रही है कुटाई ?
आपके पास क्या है इसका जवाब ?

उन्होनें उत्तर दिया-
सरासर गलती तो हिन्दूओं की हीं है.
क्यों वह समर्थन सच्चाई का कर रहे हैं ?

तब मैनें पूछा- हे जनाब !
उन निहथ्थे रामसेवकों का दोष क्या था,
जो जला दिये गये साबरमती की बोगियों में?

मेरी बात सुनकर रहा न गया उनसे
तमतमा गया चेहरा उनका
बोले,
क्या बात करते हो यार !
क्यों गये थे अयोध्या में होकर तैयार ?

वो जले तो ठीक हीं जले,
मरे तो ठीक हीं मरे.
यदि कोई हिन्दू मरा तो समझो कि उसने जरूर कोई गलती की होगी.

आखिर इस धर्मनिरपेक्ष देश में,
क्या उनको यह भी नहीं है अधिकार
कि वो मार सकें काफिरों को बार-बार?

वे तो अपने धर्म पर हैं अडिग.
उनका तो धर्म कहता है-
जो तेरी राह में हो पड़े,
उन्हे मारकर बनो तगड़े (गाज़ी).

उन्होनें तो केवल अपना काम किया
नाहक हीं उनको तुमने बदनाम किया.

जरा-सा रूक कर पूछा उन्होनें मुझसे-
बताओ श्रीमान् !
ये संघी क्यों लगाते हैं साम्प्रदायिक आग,
हिन्दूओं को ये क्यों भड़काते हैं
क्यों उन्हें जागृति का पाठ पढ़ाते हैं ?
ये तो सो रहे थे, नाहक हीं उन्हे जगा दिया.

अरे ! हिन्दूओं का तो काम ही है सहना
और बार-बार मरना.
ये लोग भी कोई लोग हैं,
आज मर-कट रहे हैं तो हो रहा है हल्ला.

इतना सुनकर रहा न गया मुझसे
मैनें कहा-
धन्य हो मेरे भाई
तुम्हारे रहते अन्य कौन बन सकता है कसाई.
हमें मारने के लिये तो आप जैसे धर्मनिरपेक्ष हीं काफी हैं.

अब वह दिन दूर नहीं,
जब आप जैसों के अनथक प्रयास से
ये अपाहिज-कायर हिन्दू मिट जायेंगे जहाँ से
मैं तो बेकार हीं कोस रहा था आपके प्यारों को
अरे ! आपके सामने उनकी क्या औकात है ?
ये सब घटनायें तो आप जैसों की सौगात है

 
 
यह प्रतिक्रिया सच्चाई ब्यान कर गई 
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ॐ श्री हनुमते नमः ॐ श्री हनुमते नमः ॐ श्री हनुमते नमः

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सांप्रदायिक दंगो के वारे में मुंह खोलने से पहले आपको यह जानलेना अति आबस्यक है कि सांप्रदायिक दंगो के लिए जिम्मेबार कौन है फिर आपको खुदवाखुद पता चल जाएगा कि मोदी पर हमला करने बाले कितने सही हैं?

 

सांप्रदायिक दंगो के वारे में मुंह खोलने से पहले आपको यह जानलेना अति आबस्यक है कि सांप्रदायिक दंगो के लिए जिम्मेबार कौन है फिर आपको खुदवाखुद पता चल जाएगा कि मोदी पर हमला करने बाले कितने सही हैं?

 

ये सरकार जिस तरह साँप्रदायिक दंगों को हिन्दुओं के विरूद्ध हथियार के रूप में प्रयोग कर रही है। उसे देखकर तो लगता है कि जिहादी हमलों में इतने हिन्दुओं की जान जाने के बावजूद सरकार को मुस्लिम जिहादी मानसिकता का ऐहसास ही नहीं है ।


इस सरकार की जानकारी के लिए हम बता दें कि आज तक देश में हुए दंगों में से 95% दंगों की शुरूआत अल्पसंख्यकों ने की है। इन में से भी अगर 2-4% दंगों को छोड़ दें तो बाकी सब की शुरूआत मुसलमानों में छुपे जिहादियों ने की है ।


आम-मुसलमान खुद को उतना ही भारतीय मानता है जितना बाकी भारतीय मानते हैं इसलिए उसे हिन्दू जीवन पद्धति बोले तो भारतीय जीवन पद्धति पर कोई तकलीफ नहीं होती ।


तकलीफ होती है तो उन मुस्लिम जिहादियों को जो खुद को औरंगजेब और बाबर के उतराधिकारी मानकर इस भारत को इस्लामी राज्य बनाने के षड़यन्त्र को इस सैकुलर गिरोह के सहयोग से व अल्पसंख्यकों की रक्षा के लिए बने विशेष कानूनों के दुरूपयोग से हिन्दुबहुल क्षेत्रों पर लगातार हमला कर आगे बढ़ा रहे हैं ।


अगर आपको नहीं पता तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इतिहास इन तथ्यों का साक्षी है कि कितने ही बार इन जिहादियों ने अल्लाह हो अकबर के नारे लगाते हुए मन्दिरों शिवाल्यों व अन्य पूजा स्थलों पर हमला कर तबाही मचाई व अनगिनत हिन्दुओं को इस्लाम के नाम पर हलाल किया ।


इस हिन्दुविरोधी देशद्रोही सैकुलर जिहाद व धर्मांतरण समर्थक सरकार व इसके सहयोगी गद्दार मीडिया ने बार-बार साँप्रदायिक दंगों का जिकर कुछ इस अन्दाज में किया कि मानो इन दंगों के लिए हिन्दू जिम्मेवार हों।


हम इतने बड़े पैमाने पर हिन्दुओं के विरूद्ध हुई हिंसा के बारे में लिखना नहीं चाहते थे। परन्तु इस सेकुलर गिरोह द्वारा सामप्रदायिक दंगों के बहाने जिहादियों द्वारा किए जा रहे हिन्दुओं के कत्ल को जायज ठहराने की दुष्टता ने हमें ये सब लिखने पर मजबूर कर दिया। हमें परेशानी में डाल दिया कि कहाँ से शुरू करें इन मुस्लिम जिहादियों द्वारा शुरू किए गए दंगों का लेखा-जोखा। अधिकतर देशद्रोही चैनल तो जिहादियों का समर्थन करने व हिन्दुओं को अपमानित करने में मुस्लिम जिहादियों को भी पीछे छोड़ देते हैं ।


अगर हम 1945 तक हुए हिन्दुओं के नरसहारों को न भी लिखें तो भी इन मुस्लिम जिहादियों ने 1946 के बाद ही हिन्दुओं पर इतने जुल्म ढाये हैं कि इनके बारे में सोचते ही रौंगटे खड़े हो जाते हैं ।


मन ये सोचने पर मजबूर हो जाता है कि हिन्दू ये सब कैसे और क्यों सहन कर गए ?


इतना कुछ हो जाने पर भी ये गिरोह जो खुद को सैकुलर कहता है इन जिहादियों का साथ क्यों दे रहा है ?


क्यों इस गिरोह को हिन्दुओं के कत्ल करवाने में फखर महसूस होता है विजय का एहसास होता है ?


क्यों और कैसे ये गिरोह हिन्दुओं के हुए हर नरसंहार के बाद जिहादियों के पक्ष में महौल बनाने पर उतारू हो जाता है ?


क्यों ये गिरोह हिन्दुओं को धोखा देकर उन्हें ही कत्ल करवाने में कामयाब जो जाता है ?


क्यों ये गिरोह हिन्दुओं के आक्रोश से बच जाता है ?


क्यों हिन्दू एकजुट होकर हिन्दुओं के कातिलों व उनके समर्थकों पर एक साथ हमला नहीं बोलते ?


हम शुरू करते हैं 1946 से जब कलकता में मुसलमानों द्वारा किए गए हमलों में 5000 हिन्दुओं का कत्ल किया गया ।


फिर नवम्बर में पूर्वी बंगाल के नौखली जिला में हिन्दुओं का नरसंहार किया गया सब के सब हिन्दुओं को वहां से भगा दिया गया उनकी सम्पति तबाह कर दी गई ।


विभाजन के दौरान कम से कम 20 लाख हिन्दू-सिखों का कत्ल सिर्फ वर्तमान पाकिस्तान में किया गया ।


सरकारी आंकड़ों के अनुसार 1947-1951 तक जिहादी मुसलमानों द्वारा किए गये अत्याचारों के परिणामस्वरूप एक करोड़ हिन्दू-सिख भारत भागने पर मजबूर किए गए ।


इसमें चौंकाने वाला तथ्य ये है कि वर्तमान भारत में भी इस दौरान हिन्दुओं पर हमले किए गए और तब की सैकुलर सरकार तमाशा देखती रही जिहादियों की रक्षा में लगी रही हिन्दुओं को मरवाती रही ।


फरवरी 1950 में 10,000 हिन्दुओं का ढाका और बंगला देश(तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान) के अन्य भागों में नरसंहार किया गया । उसके बाद के कुछ महीनों में लाखों हिन्दुओं को वहां से भगाया गया ।


1950-60 के बीच में 50 लाख हिन्दुओं को मुस्लिम जिहादियों द्वारा पूर्वी पाकिस्तान से भारत भगाया गया ।


1971 में पाकिस्तानी सेना ने बांगलादेश मुक्ति अंदोलन के दौरान 25 लाख हिन्दुओं का कत्ल किया । जिसके परिणामस्वरूप अधिकतर हिन्दू सुरक्षा की खोज में भारत भाग आये ।


उस वक्त की सरकार ने इन हिन्दुओं की रक्षा के लिए क्या कदम उठाए ? कोई नहीं । आखिरकार बांगलादेश बनवाने का दावा करने वाले इन लोगों ने क्यों हिन्दुओं को लावारिस छोड़कर मरने पर मजबूर किया ?


सिर्फ इसलिए कि हिन्दू कभी संगठित होकर गैर हिन्दुओं पर हमला नहीं करता या फिर इसलिए कि कभी एकजुट होकर संगठित वोट बैंक नहीं बनाता ?


1989 में बांगलादेश में सैंकड़ों मन्दिर गिराए गए ।


1947 से 2000 के बीच जिहादी हमलों में 6 लाख चकमा बनवासियों का नामोनिशान मिटा कर मुसलमानों ने उनकी जमीन पर कब्जा कर उनकी औरतों को जबरन मुसलमानों के साथ विवाह करने को बाध्य किया ।


जागो ! हिन्दू जागो !


लड़ाई से भागो मत एकजुट होकर लड़ों वरना मिटा दिए जाओगे इन मुस्लिम जिहादियों व इनके आका धर्मनिर्पेक्षतावादियों द्वारा ।


1947-48 में मुसलमानों ने कश्मीर के जिस हिस्से पर कब्जा किया(पी ओ के) वहां से सब हिन्दुओं का नामोनिशान मिटा दिया गया ।


1985 में अलकायदा की स्थापना के बाद भारत समेत सारे भारत में मुस्लिम जिहाद के एक नये दौर की शुरूआत हुई ।


1986 में कश्मीर में जिहादियों द्वारा हिन्दुओं पर एक तरफा हमले शुरू किए गए । जिहादियों ने एक को मारो एक का बलात्कार करो सैंकड़ों को भगाओ की नीति अपनाई । मुसलमानों ने मस्जिदों से लाउडस्पीकरों द्वारा जिहाद का प्रचार प्रसार किया । उर्दू प्रैस के द्वारा भी जिहाद का प्रचार प्रसार किया गया । जिहाद शुरू होते ही हिन्दुओं के पड़ोसी मुसलमान ही उनके शत्रु बन गए । मुसलमानों ने संगठित होकर हिन्दुओं को निशाना बनाना शुरू किया ।


जिहादियों की भीड़ इक्ट्ठी होकर हिन्दुओं के घर में जाती उन पर हर तरह के जुल्म करने के बाद उनको दूध पीते बच्चों सहित हलाल कर देती । यहाँ समाचार दिया जाता पाकिस्तानी आतंकवादियों ने ये सब कर दिया । लेकिन सच्चाई यही थी कि हिन्दुओं को हलाल करने वाले उनके पड़ोसी मुसलमान ही होते थे। जो हिन्दुओं को कत्ल करने के बाद अपने-अपने घरों में रहते थे ।


कश्मीर के अधिकतर पुलिसकर्मी व महबूबामुक्ती जैसे नेता इस्लाम के नाम पर इन जिहादियों का हर तरह से सहयोग करते थे अभी भी कर रहे हैं । कई बार तो बाप व भाईयों के हाथ पैर बांध कर उनके परिवार की औरतों की इज्जत लूटकर उसके फोटो खींच कर बाप और भाईयों को ये सब देखते हुए दिखाया जाता था । बाद में ये तसवीरें हिन्दुओं के घरों के सामने चिपका दी जाती थी । परिणाम जो भी हिन्दू इन तसवीरों को देखता वही अपने परिवार की औरतों की इज्जत की रक्षा की खातिर भाग खड़ा होता । और उसके पास रास्ता भी क्या था सिवाय हथियार उठाने या भागने के । हिन्दुओं ने हथियार उठाने के बजाए भागना बेहतर समझा । क्योंकि अगर वो हथियार उठाते तो ये सैकुलर नेता उन्हें अल्पसंख्यकों बोले तो मुसलमानों का शत्रु बताकर जेल में डाल देते फांसी पर लटका देते ।


हमें हैरानी होती है इन धर्मनिर्पेक्षता की बात करने वालों पर जो हिन्दुओं पर हुए अत्याचारों के बारे में देश-दुनिया को जागरूक करने वालों को आतंकवादी कहते हैं, साम्प्रदायिक कहते हैं और इन सब जुल्मों-सितम को राजनीति बताते है हिन्दुओं को गुमराह करते है । ये सब दुष्प्रचार सिर्फ जिहादी ही नहीं बल्कि जिहादियों के साथ-साथ इनके ठेकेदार धर्मनिर्पेक्षता के पर्दे में छुपे ये राक्षस भी करते हैं जो अपनों का खून बहता देखकर भी अपनी आत्मा की आवाज नहीं सुनते । न केवल इन जिहादी आतंकवादियों के साथ मिलकर चुनाव लड़ते हैं पर सरकार भी बनाते हैं और सत्ता में आने के बाद जिहादियों के परिवारों का जिम्मा उठाते हैं । उनको हर तरह की मदद की जिम्मेवारी लेते हैं जिहादी आतंकवादियों के परिवारों को आर्थिक सहायता देते हैं । हिन्दुओं को अपने घरों से भागने पर मजबूर करते हैं । जिहादियों के विरूद्ध सेना द्वारा कार्यवाही शुरू होने पर जिहादियों के मानवाधिकारों का रोना रोते हैं मतलब हर हाल में जिहादियों का साथ देते हैं ।


अगर आप सोचते हैं कि हम कोई पुरानी बात कर रहे हैं तो आप गलत हैं। जो कुछ कश्मीर में हिन्दुओं के साथ किया गया वो ही सबकुछ अब जम्मू के मुस्लिमबहुल क्षेत्रों में दोहराय जाने की तैयारी हो चुकी है तैयारी ही क्यों उसकी तो शुरूआत भी हो चुकी है पिछले दिनों जब डोडा उधमपुर में मई 2006 में 36 हिन्दुओं का कत्ल किया गया तो इस नरसंहार में बच निकलने में सफल हुए हिन्दुओं ने बताया कि उन्हें ये देख कर हैरानी हुई कि जो मुस्लिम जिहादी हिन्दुओं को इस तरह कत्ल कर रहे थे वो इन हिन्दुओं के पड़ोसी मुसलमान ही थे । जम्मू के मुस्लिमबहुल क्षेत्रों में इसके अतिरिक्त भी कई नरसंहार हो चुके हैं ।


पिछले दिनों हिमाचल के साथ लगते जम्मू के एक गाँव में गांव वालों ने जब एक मुस्लिम जिहादी को मार गिराया तो वहां के मुस्लिम जिहादी मुख्यमन्त्री के इशारे पर पुलिस इन गांव वालों की जान के पीछे पड़ गई । बेचारे गाँव वालों ने हिमाचल के चम्बा में छुप कर जान बचाई ।


जरा आप सोचो जो गुलामनबी आजाद माननीय न्यायालय से फांसी की सजा प्राप्त अफजल को निर्दोष कहता है क्या वो हिन्दुओं द्वारा मार गिराय गए जिहादी को आतंकवादी मान सकता है ?


क्या आपको याद है कि 20-20 बिश्व कप में भारत द्वारा पाकिस्तान को हरा देने के बाद जम्मू विश्वविद्यालय में देशभक्त हिन्दुओं द्वारा इस जीत की खुशी में भारत माता की जय बुलाय जाने के बाद किस तरह इन हिन्दुओं की पिटाई विशवविद्यालय के जिहादी मुसलमानों ने की और किस तरह सरकार के इशारे पर बाद में पुलिस ने उन दुष्टों के विरूद्ध कार्यवाही करने के बजाए इन देशभक्तों को ही निशाना बनाया ?


1993 तक कश्मीर में अधिकतर मन्दिर तोड़ दिय गए । आज सारे का सारा कश्मीर हिन्दुविहीन कर दिया गया है और ये गिरोह बात करता है हिन्दू आतंकवाद की साँप्रदायिकता की । कोई शर्म इमान नाम की चीज है कि नहीं । तब कहां चला जाता है ये सैकुलर गिरोह जब हिन्दुओं के नरसंहार होते हैं । तब तो ये सारा गिरोह जिहादियों का साथ देता है हिन्दुओं के नरसंहार करने वालों को गुमराह मुसलमान बताकर उनको सजा से बचाने के नय-नय बहाने बनाता है जिहादियों के समर्थन में सड़कों पर उत्तरता है ।


आप जितने मर्जी कानून बना लो अब जिहादियों द्वारा हिन्दुओं को निहत्था मरने पर कोई बाध्य नहीं कर सकता । जो हमला करेगा वो मरेगा । यह हमारी नहीं सब हिन्दुओं के उस मन की आवाज है जो लाखों हलाल हो रहे हिन्दुओं की चीखें सुन कर अब और हिन्दुओं को इस तरह न मरने देने की कसम उठा चुके हैं । जिहादियों को उनके किए की सजा जरूर मिलेगी और ऐसी सजा मिलेगी कि उनका हर हिन्दू के कत्ल में साथ देने वाले धर्मनिर्पेक्षता के चोले में छुपे ये राक्षस भी नहीं बचेंगे ।




1969 में गुजरात,1978 में अलीगढ़ ,1979 में जमशेदपुर, 1980 में मुरादाबाद,1982 और 88 में मेरठ,1989 में भागलपुर । कौन नहीं जानता कि ये सब के सब सांप्रदायिक दंगे मुसलमानों ने शुरू किए थे । बेशक बाद में इन में से कुछ दंगों में मुसलमानों को इसकी कीमत भी चुकानी पड़ी थी ।


जनवरी 1993 में भी मुम्बई में दंगे इन मुस्लिम जिहादियों ने ही शुरू किए थे और उसके बाद 12 मार्च 1993 को मुम्बई में ही बम्ब विस्फोट कर 600 हिन्दुओं का कत्ल किया व हजारों को घायल किया करोड़ों की सम्पति तबाह की सो अलग ।


15 मार्च 1993 में सी पी आई एम के सदस्य रासिद खान ने कलकता में बम्ब विस्फोट कर 100 लोगों का कत्ल किया ।


फरवरी 1998 में कोयम्बटूर में इन जिहादियों ने बम्ब विस्फोट कर अडवाणी जी को कत्ल करने की कोशिश की । इन बम्ब विस्फोटों में सैंकड़ो हिन्दुओं का कत्ल किया गया । इन हमलों के दोषी मदनी को इस सैकुलर सरकार ने न केवल सजा से बचाया बल्कि और हिन्दुओं का खून बहाने के लिए जेल से निकाल कर खुला छोड़ दिया ।


क्या आप भूल गए किस तरह गोधरा में 27 फरवरी 2002 को 2000 मुस्लिम जिहादियों की भीड़ जिसका नेतृत्व कांग्रेसी पार्षद कर रहा था, ने 58 हिन्दुओं को रेल के डिब्बे में जिन्दा जला दिया व इतने ही हिन्दुओं को घायल कर दिया, जो इन जिहादियों के बढ़ते हुए दुस्साहस को दिखाता है । बाद में किस तरह इस सैकुलर बोले तो देशद्रोही सरकार ने इन हिन्दुओं को जलाने वालों को बचाने के लिए माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त जज द्वारा की जा रही जांच को बाधित करने का षड़यन्त्र किया !


अभी 2008 में किस तरह इन जिहादियों ने आतंकवाद के विरोध में रैली करने जा रहे सांसद योगी अदित्यनाथ पर आजमगढ़ में हमला बोल दिया । यह कैसी धर्मनिर्पेक्षता है जिसके राज में एक सांसद तक मुस्लिम जिहादी आतंकवाद के विरूद्ध बोलने की कोशिश करने पर मुसलमानों के हमले का शिकार हो जाता है ? जिस देश में जिहादी आतंकवाद के विरूद्ध बोलने पर एक सांसद तक सुरक्षित नहीं उस देश में आम हिन्दू बिना हथियार उठाये कैसे सुरक्षित रह सकता है ?


ठीक इसी तरह महाराष्ट्र धुले में इन जिहादियों ने आतंकवाद के विरोध में होने वाली रैली को दंगा फैला कर वहां की सरकार के सहयोग से रूकवाने में सफलता हासिल की । किस तरह उत्तर प्रदेश में इन जिहादियों ने बी एस पी नेता की हत्या की और किस तरह वहां की तत्कालीन सैकुलर जिहाद समर्थक सरकार ने उन जिहादियों की सहायता की ।


उत्तर प्रदेश में मऊ मे हुए दंगों को कौन भुला सकता है जब एक मुस्लिम जिहादी विधायक अंसारी ने गाड़ी में घूम-घूम कर मुसलमानों को उकसा कर हिन्दुओं के कत्ल करवाये । हिन्दूसंगठनों के कितने ही कार्यकर्ता इन जिहादियों के हमलों में आज तक मारे जा चुके हैं । आये दिन हिन्दुओं पर हमला करना इन मुस्लिम जिहादियों की आदत सी बनती जा रही है ।


हिन्दू तो आत्मरक्षा में मजबूरी में जवाबी कार्यवाही करता है वो भी कभी-कभी पानी सिर के ऊपर से निकल जाने के बाद । हिमाचल के चम्बा में 1998 में इन मुस्लिम जिहादियों ने दर्जनों हिन्दुओं का कत्ल कर दिया । कत्ल होने वाले सभी मजदूर थे । कत्ल करने वाले चम्बा के ही मुस्लिम जिहादी हैं जो आज तक बिना किसी सजा के खुले घूम रहे हैं क्योंकि पुलिस के पास ऐसे जिहादियों से निपटने के लिए कोई कड़ा कानून नहीं है।


सुन्दरनगर मण्डी में मुस्लिम प्रधान चुने जाने के बाद मुसलमानों में छुपे जिहादियों ने पाकिस्तान जिन्दाबाद के नारे लगाये । मण्डी में ही उत्तर प्रदेश के एक मुस्लिम जिहादी जो दर्जी का काम करता था, ने हिन्दू लड़की पर तेजाब फैंक दिया । आपको हैरानी होगी कि उस वक्त मंडी में पुलिस अधीक्षक भी मुस्लिम ही था । बाद में ये जिहादी पुलिस को चकमा देकर भागने में सफल रहा ।


हिमाचल में ही आए दिन जगह-जगह सरकारी जमीन पर कब्र बनाकर कब्जा करने के प्रयत्न किये जा रहे हैं । हिन्दुओं द्वारा विरोध किए जाने पर अल्पसंख्यवाद का सहारा लिया जा रहा है ।


कश्मीर के जिन मुस्लिम जिहादियों ने हिन्दुओं का नामोनिशान मिटा दिया वो भी अपने आप को आम मुसलमान बताकर हिमाचल व देश के अन्य हिन्दुबहुल हिस्सों में खुले घूम रहे हैं कभी मजदूरों के वेश, में तो कभी कपड़ा बेचने वालों के वेश में, तो कभी पल्लेदारों के वेश में प्रशासन उनका सहयोग कर रहा है । आम लोग इनकी बढ़ती संख्या को देखकर कोई अनहोनी न हो जाए ये सोच कर डर रहे हैं। हिन्दू संगठनों से इनके विरूद्ध कार्यवाही करने की गुहार लगा रहे हैं । हिमाचल का आम हिन्दू ये सोचने पर मजबूर हो गया है कि कहीं ये लोग कश्मीर में सेना की कार्यवाही से बचने के लिए तो हिमाचल नहीं आते । क्योंकि ये अक्सर सर्दियों में तब आते हैं जब पहाड़ों पर बर्फ पड़ जाती है जहां ये गर्मियां शुरू होते ही छुप जाते हैं व मौका पाते ही हिन्दुओं पर हमला बोल देते हैं । हिमाचल का चम्बा का डोडा के साथ लगता क्षेत्र तो इन जिहादियों की पक्की शरणगाह बनचुका है । सरकारी जमीन पर लगातार कब्जा किया जा रहा है हिन्दुओं की जमीन खरीद कर क्षेत्र को मुस्लिमबहुल बनाया जा रहा है और प्रशासन सो रहा है ।


कुछ वर्ष पहले बिलासपुर में एक मुस्लिम बस चालक/परिचालक ने हिन्दू लड़की को अगवा करने की कोशिश की । बाहर के अधिकतर जिहादी आम मुसलमानों के यहां शरण ले रहे हैं इन्हें जिहाद की शिक्षा दे रहे हैं हिन्दुओं के विरूद्ध भड़का रहे हैं । ये सब तब हो रहा है जब हिमाचल में हिन्दू 95% से अधिक हैं ।


अगर हिन्दू साम्प्रदायिक होते जैसे सैकुलर गिरोह प्रचारित करता है तो आज तक यहां एक भी मुसलमान जिन्दा न बचता ।पर सच्चाई यह है कि आज तक एक भी मुसलमान को हिन्दुओं ने हाथ नहीं लगाया है फिर भी हिन्दू सांप्रदायिक और जिस गिरोह के सहयोग से मुसलमानों ने कश्मीर से हिन्दुओं का सफाया कर दिया वो गिरोह और मुसलमान –शान्तिप्रय सैकुलर ।


हिमाचल के हिन्दुबहुल होने के बावजूद मुस्लिम जिहादियों द्वारा बार-बार किए जा रहे हमलों व मुसलमानों द्वारा किये जा रहे अतिक्रमण को हिन्दू कब तक सहन करेगा । एक वक्त तो ऐसा आयगा जब ये सब्र का बांध टूटेगा फिर क्या होगा…सब ठीक हो जाएगा !


अब ये सैकुलर जिहाद समर्थक सरकार इन जिहादियों को दंगों में मारे जाने पर लाखों रूपये की सहायता की घोषणा कर इनका हौसला बढ़ा रही है व हिन्दुओं के जान-माल को खतरे में डाल रही है ।


खैर हम भी कैसी बात कर रहे हैं जो सरकार खुद किसी अंग्रेज की गुलाम हो वो हिन्दुओं को तबाह करने के सिवा कर भी क्या सकती है ? क्योंकि जब हिन्दू तबाह और बरबाद हो जांयेंगे तभी तो ये देशद्रोही इस भारत को तबाह करने में कामयाब हो पांयेगे !


अन्त में सिर्फ इतना कहेंगे कि जिहादियों ने मुम्बई की सड़कों पर जिस तरह सरेआम गोलियां बरसाईं व निहत्थे बेकसूर लोगों का कत्लेआम किया वो भी पुलिस की गाड़ी में बैठकर । जिसके परिणाम सवरूप अभिताभ बच्चन जैसे लोगों को अपना हथियार बगल में रखकर सोना पड़ा ।


इस सब से यही सिद्ध होता है कि अगर साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर हिन्दुओं में इन जिहादियों के विरूद्ध जागरूकता अभियान चला रही थी और लैफ्टीनैंट कर्नल श्रीकांत प्रोहित हिन्दुओं को आत्म रक्षा की ट्रेनिंग दे रहे थे तो अच्छा ही कर रहे थे क्योंकि जो सरकार इस समाज के खास लोगों की रक्षा नहीं कर सकती अपने अधिकरियों तक को नहीं बचा सकती वो भला आम लोगों की क्या रक्षा करेगी कैसे करेगी और क्यों करेगी वो तो चन्दा भी नहीं दे सकते !


ऐसे में जब सरकार आम हिन्दुओं को जागरूक करने वालों व आत्मरक्षा का प्रशिक्षण देने वालों को जेल में बन्द करती है तो वो कुल मिलाकर आतंकवादियों के काम को आसान बनाती है क्योंकि आत्मरक्षा की ट्रेनिंग लिए हुए लोगों को आतंकवादी इतनी आसानी से नहीं मार सकते जैसे मुम्बई की सड़कों पर मारा गया ।


जिस वक्त मुम्बई में कमांडो कार्यवाही चल रही थी ठीक उस वक्त मुस्लिम जिहादी इन्टरनैट पर दुआ कर रहे थे हे अल्लाह हिन्दुओं को तबाह और बरबाद कर दे। उन्हें ऐसी भयानक मौत दो ताकि उनकी रूह कांप जाए और हम हिन्दुस्थान को दारूल इस्लाम बनाने में कामयाब हो जांयें ।


अब ऐसे महौल में भारत के मुस्लिम जिहादी इस जिहाद में सहयोग नहीं करेंगे मात्र कल्पना तो हो सकती है यथार्थ नहीं । मामला सिर्फ आम मुसलमान को इस जिहाद में शामिल होने से बचाना है पर इन्हें तभी बचाया जा सकता है जब सरकार कड़े से कड़े कानून बनाकर जिहादियों के साथ-साथ उनके समर्थकों को भी मौत के घाट उतार दे ।


अगर सरकार जिहादियों के विरूद्ध कार्यवाही करने के बजाए उनको बचाने की कोशिश करती है जिहादियों के विरूद्ध कार्यवाही करने वालों को जेल में डालती है तो फिर ये काम तो प्रखर देशभक्त लोगों को ही करना पड़ेगा । क्योंकि अगर इस जिहाद को यथाशीघ्र जड़मूल से समाप्त न किया गया तो ये हर भारतीय का सुख चैन छीन लेगा ।


कुछ लोग अज्ञानवश जिहादी आतंकवाद की तुलना सिखों के आतंकवाद से करने की गलती करते हैं वो ये भूल जाते हैं कि सिखों का इतिहास धर्म की रक्षा की खातिर की गई बेहिसाब कुरबानियों का इतिहास है। सिखों का हिन्दुओं के साथ खून का वो गूढ़ रिश्ता है जिसने मुशकिल की उस घड़ी में भी हिन्दू-सिखों की आत्मा को मरने नहीं दिया । सिखों की धर्मिक पुस्तकें गैर सिखों के कत्लोगारद का समर्थन नहीं करतीं ।


अगर हम मुसलमानों के इतिहास को देखें तो ये हिन्दुओं के कत्लोगारद का इतिहास है इस इतिहास का हर पन्ना हिन्दुओं के ऊपर जिहादियों द्वारा किये हमलों से भरा पड़ा है । ये इतिहास धोखे, गद्दारी, व नमकहरामी का इतिहास है ।


अगर इतने हमलों और बर्बरता के बाद भी ईरान, मिश्र, मैसोपोटामिया, तुर्की, उत्तर अफ्रीका की तरह भारत का इस्लामीकरण न हो पाया तो ये कोई मुस्लिम जिहादियों की उदारता या दया की वजह से नहीं जैसा कि ये गद्दार गिरोह दुष्प्रचार करता है क्योंकि ये गुण तो इन जिहादी राक्षसों में थे ही नहीं, न आज हैं। ये तो हिन्दू क्राँतिकारियों व हिन्दुओं द्वारा लगातार किया गया कड़ा संघर्ष था जिसने भारतीय सभ्यता संस्कृति को बचाय रखा ।


शुरू में जब मुस्लिम जिहादियों ने हिन्दुओं पर हमला किया तो हिन्दू उनको अपने जैसा इन्सान समझने की गलती कर बैठे । जैसे जैसे हिन्दुओं को मुस्लिम जिहादियों के अत्याचारी और बर्बर प्रवृति का पता चलता गया वैसे- वैसे हिन्दू जागरूक और संगठित होता गया ।


वर्तमान में मुस्लिम जिहादियों ने बम्ब विस्फोट कर हिन्दुओं पर हमला करने का अधुनिक मार्ग अपनाया है बम्ब विस्फोट उन क्षेत्रों में किए जाते हैं जहां मुसलमान बहुत कम संख्या में हैं जहां मुसलमानों की बड़ी संख्या है वहां आज भी हिन्दुओं को गला काट कर हलाल करने का मार्ग अपनाया जाता है जैसे कश्मीर में कई बार देखने को मिला ।


हिन्दुबहुल क्षेत्रों में जहां कहीं भी मुसलमानों की संख्या बढ़ जाती है वहां पर पहले हिन्दुओं/मन्दिरों/त्योहारों पर हमला कर दंगा फैलाया जाता है इन दंगों में पहले हिन्दुओं को छुरा घोंप कर मारा जाता था अब इन हमलों में भी छोटे-छोटे देशी कट्टों व बमों का इस्तेमाल होने लगा है। हमलों के दौरान दंगा रोकने में लगे पुलिस कर्मियों पर भी अक्सर हमला बोला जाता है । ये हमले अक्सर योजना बनाकर किये जाते हैं जिससे कि हिन्दुओं के जान-माल को अधिक से अधिक नुकसान पहुँचाया जा सके ।


अगर कहीं हिन्दू आत्म रक्षा में तैयार बैठे हों और मुसलमानों को प्रतिक्रिया में नुकसान उठाना पड़ जाए तो फिर ये मुस्लिम जिहादी इसे अल्पसंख्यकों पर हमला बताकर जगह-जगह हिन्दुओं को सांप्रदायिक कहकर दुष्प्रचार शुरू कर देते हैं और ये जिहादसमर्थक गिरोह इनके इस दुष्प्रचार को आगे बढ़ाता है ।


आपको यहां पर इस बात को ध्यान में रखना चाहिये कि दुनिया का हर कानून इन्सान को आत्मरक्षा का अधिकार देता है फिर हिन्दुओं द्वारा इस अधिकार का उपयोग न करने के लिए दबाव बनाना व हिन्दुओं को इस अधिकार का उपयोग करने पर उन्हें बदनाम करना, उनको इन मुस्लिम जिहादियों के हाथों निहत्था मरने पर मजबूर करने के समान है जिससे हर किसी को बचने का प्रयत्न करना चाहिए ।

राजीब गांधी जी के हत्यारों को माफी की बात करने वाले उनके मत्र अभिताभ बच्चन जी को क्यों जलील करने पर तुले हैं ?

राजीब गांधी जी के हत्यारों को माफी की बात करने वाले उनके मित्र अभिताभ बच्चन जी को क्यों जलील करने पर तुले हैं ?

हम भारतीय इतने भोले-भाले हैं (बेबकूफ कह दें तो भी की अतिसयोक्ति नहीं होगी) कि कोई भी बिदेशी हमारे साथ कुछ चिकनी-चुपड़ी बातें कर हमें धोखा देकर सबकुछ लूट कर ले जाता है और फिर वह अपने संसाधनों के माध्यम से हमें ये समझाने में सफल रहता है कि वो हमारा हितैसी है उसने जो कुछ भी किया वो हमारे भले के लिए किया ।हमारे भोलेपन की चर्मसीमा देखो हम सबकछ लुटाने के बाबजूद उसकी बातों में आकर उसे अपना सर्वस्व देने को तैयार हो जाते हैं और उसके विरूद्ध कोई बात बात करने वाले हमारे वास्तविक हितैसी  पर इतना दबाब बना देते हैं कि वो भी उसका समर्थन करने पर बाध्या हो जाता है।आज सेकुलर गिरोह व मिडीया ने हमारी इसी कमजोरी का फायदा उठाते हुए वो सब सिर्फ कुछ बर्षों में कर डाला जो मुसलिम और ईसाई आक्रमणकारी सैंकड़ों बर्षों में न कर सके थे। आज चुन-चुन हर उस सांस्कृतिक मर्यादा पर हमला बोला जा रहा है जिस पर हर देशभक्त भारतीय को गर्व रहा है।

महाराष्ट्र में बांद्रा और बरली को जोड़ने बाले पुल के दूसरे चरण का उदघाटन  मुख्यामन्त्री ने किया जिसमें महारास्ट्र सरकार के बुलाबे पर महानकलाकार अभिताभ बच्चन जी ने भी भाग लिया। इस कार्यक्रम में उनको पूरा मान सम्मान दिया गया जिसके वो हकदार हैं।उन्हें मुख्यामन्त्री के साथ विठाया गया ।दोनों कार्यक्रम के दौरान आत्मीयता से बातचीत करते हुए देखे गए।मिडीया ने इस समाचार को प्रमुखता से दिखाया। सामाचार दिल्ली मतलब एंटोनियो माईनो मारियो उर्फ सोनिया नेहरू के पास पहुंचा उसने महाराष्ट्र की सरकार व मुख्यामन्त्री को अपने विरोधी का इस तरह मान सम्मान करने पर धमकाया। गुलाम कांग्रेस अध्यक्ष ने कह दिया कि पार्टी को इस बात की जानकारी नहीं थी कि उसमें अभिताभ जी को बुलाया जा रहा है। हद तो तब हो गई जब कार्याक्रम के दौरान अभिताभ जी के साथ अत्मीयता से बातचीत करने वाले गुलाम मुख्यामन्त्री अशोक चौहान जी ने यहां तक कह दिया कि अगर उन्हें पता होता कि इस कार्याक्रम में अभिताभ जी ने आना है तो वो इस कार्यक्रम में सामिल ही नहीं होते। साफ दिख रहा है कि सब के सामने मुख्यमन्त्री जी अपने पद व अपना जलूस निकाल रहे हैं। प्रश्न सिर्फ इतना पैदा होता है कि मुख्यामन्त्री इतना बड़ा झूठ किसके दबाब में वोले रहे हैं और क्यों ?

हम सब जानते हैं कि अशोक जी को मुख्यामन्त्री पद एंटोनियो की चापलुसी करने के बदले प्राप्त हुआ और एंटोनिया के इसारे पर वे कभी भी जा सकता है क्योंकि अधिकतर कांग्रेसी आज भी 1947 से पहले की मानसिकता में ही जी रहे है जब अंग्रेजों का आदेश मानना मजबूरी थी । इसीलिए इस एंटोनिया को खुश करने के लिए अशोक जी इस हद तक गिर गए कि उन्होंने अपना पद बचाने के लिए अपनी सरकार द्वार बुलाए गए अभिताभ जी के मान सम्मान का भी ख्याल तक नहीं रखा । एक गुलाम और कर भी क्या सकता है ?

हम सब जानते हैं कि अभिताभ जी के एंटोनियो से पहले के नहरू परिबार के साथ अच्छे रिस्ते थे। लेकिन एंटोनियो के साथ अभिताभ जी की नहीं बनती।अब असल बात क्या है ये अरूण नहैरू जी व अभिताभ जी ही बता सकते हैं पर फिर भी यह सत्या है कि अभिताभ जी का अपराध उस नलिनी से ज्यादा नहीं हो सकता जिसने राजीब गांधी जी की हत्या की थी। इस बात से भी आप परिचित हैं कि एंटोनिया परिबार ने नलिनी को माफी देने  की सक्रियता से बकालत की थी। मिडीया ने इनकी इस करतूत को मानबता की मिसाल बताकर एंटोनिया परिबार को हीरो बनाने की कोशिस की थी। हमारा प्रश्न विलकुल साधारण है कि जो परिबार इतना महान है कि अपने मुखिया का कत्ल करने वाले तक को माप कर सकता है वो भला अभिताभ जैसे ब्यक्ति को जलील करने के लिए इस हद तक कैसे जा सकता है ? हमारे विचार में नफरत और लोभ ही इस एंटोनिया का ट्रेड मार्क है जिसे ईसाईयों के हाथों बिका मिडीया तरह-तरह के कुतर्क देकर त्याग का रूप देकर प्रस्तुत करने का लगातार असफल प्रयास कर रहा है। अब आप सोचेंगे कि जब इनकी सोच इतनी छोटी है तो फिर इस परिबार ने नलिनी को माफी की बात क्यों की इसका उतर जानने के लिए हमारी पुस्तक नकली धर्मनिर्पेक्षता का हिस्सा एंटोनियो के हिन्दुविरोधी षडयन्त्र जरूर पढ़ें। ये बहुत बड़ी भारत विरोधी साजिस है जिसका राजीब जी सिकार हुए।

मिडीया खुद तो गुलामी की मानसिता से ग्रस्त हैं और इस मानसिकता को किस तरह भारतीयों के दिमाग में उतार रहा है उसका एक उधाहरण आपके सामने रख रहा हूं। जब चुनाब प्रचार चल रहा था तो समाचार चैनल आज तक पर आधी सक्रीन पर एंटोनिया को पर्चा भरते हुए दिखाया जा रहा था और आधी पर इंदिरा  जी को।साथ में इनके बीच कपड़ों,चलने ,वोलने व सोचने के वीच समानता दिखाने का प्रयत्न किया जा रहा था ।आप और हम जनते हैं कि जींस का असर उन्हीं लोगों पर होता है जो एक दूसरे का साथ खून का रिस्ता रखते हैं पर एंटोनियो व इन्दिरा जी के वीच कोई खून का रिस्ता नहीं था ये उतना ही बड़ा सत्या है जितना ये कि एंटोनियो एक इटालियन विदेशी है जिसे सम्राज्यावादी ताकतों द्वारा यहां योजनबद्ध तरीके से पलांट किया गया है। अधिक जानकारी के लिए राष्ट्रपति जी को सुब्रामनयम स्वामी जी द्वारा सौंपा गया पत्र जरूर पढ़ें।

आपको ये भी जानकारी होगी कि 2004 में चुनाबों के वाद एंटोनियो खुद प्रधानमन्त्री बनना चाहची थी लेकिन राष्ट्रपति जी द्वारा उनको संविधान (सुब्रामनयम स्वामी जी द्वारा राष्ट्रपति जी को सौंपा गया पत्र पढ़ें ) के प्रवधानों व संघ परिवार द्वारा किए जा रहे विरोध को देखते हुए ऐसा सम्भव न होने की सूचना दी और एंटोनियो इस पद से दूर रहने पर मजबूर हो गई लेकिन विदेशी ताकतों के हाथों विके इस मिडीया ने अपने आकाओं के इसारे पर उसे त्याग की देवी के रूप में प्रचारित करना शुरू कर दिया ।प्रधानमन्त्री पद को ठोकर मार दी ऐसा मुख्या समाचार बनाया गया। यह झूठ ये गुलाम मिडीया आज तक दोहराह रहा है। अगर ये एंटोनिया इतनी ही त्याग की देवी थी तो 1998 में खुद प्रधानमंत्री बनने के लिए अपने पास 272 सांसदों का समर्थन होने का झूठा दावा करके क्यों आई थी जिसका पर्दाफास तब हो गया था जब राष्ट्रपति जी ने सूची मांगी और ये  सिर्फ 237 सांसदों की सूची दे पायी ।

आगे चलकर इस विदेशी एंटोनिया की असलियत तब भी सामने आई जब दो लाभ के पदों पर होने की बजह से इसे एक पद छोड़ना पड़ा। असलियत तब भी उजागर हुई जब नटबर सिंह जी ने इस बात का पर्दाफास किया कि अनाज के बदले तेल कार्यक्रम में पैसा एंटोनिया ने खाया था जिसके लिए एंटोनिया ने सदाम हुसैन को वाकायदा एक पत्र लिखा था। ध्यान रहे ये कार्यक्रम इराक में मर रहे मुलमानों के बच्चों को बचाने के लिए चलाया जा रहा था। अरे जो एंटोनिया वहां से पैसा लूट सकती है तो वो और क्या छोड़ेगी। इस विदेशी के लूटेरे होने का प्रमाण तब भी मिला जब उसने कानूनमंत्री हंसराज भारद्वाज जी को अपने इटालियन हमबतन व बोफोर्श कांड के मुख्या अभियुकत के पैसे जो भारत सरकार द्वारा जब्त करवाय गए थे को छुड़वाने लिए विशेष रूप से लंदन भेजा । बाद में इस अभियुक्त जो भारतीयों की निगाह में राजीब जी का कत्ल करने का संदिगध भी है ,पर चल रहे सारे केस समाप्त करवा दिए।

जरा सोचो जिस डकैत का पर्दाफास कई-कई बार हो चुका हो वो बचा कैसे ठीक बैसे ही जैसे भारत पर हमला करवाने वाले संजय दत्त, अबु हाजमी, अफजल जैसे लोग बचाए जा रहे हैं ।इसीलिए तो कहा गया है कि चोर-चोर मौसेरे भाई । जब सता ही  देशविरोधियों के हाथों में हो तो फिर गद्दारों का कोई क्या विगाड़ सकता है। कहते हैं कि जब सईयां भए कोतवाल तो फिर डर काहे का।

आप कह सकते हैं कि फिर जनता क्यों ऐसे गद्दारों को चुनती है वजह साफ है आज का ये गुलाम मिडीया भारतीयों के हित की बात भारतीयों तक पहुंचने ही नहीं देता ।इन सब मुद्दों को भारत-विरोधियों के हाथों विक चुके इस मिडीया ने दबा दिया । जरा सोचो कि जिस तरह बार-बार गुजरात में हुई हिंसा की बात की जाती है वो भी सिर्फ एक सांप्रदाए के पक्ष को रखने के लिए ठीक उसी तरह कशमीर में हुई बर्बर हिंसा की बात क्यों नहीं की जाती। जिस तरह बार-बार कंधार मामले को ठाकर अडवानी जी को निशाना बनाया जाता है ठीक उसी तरह बार-बार क्वात्रोची, अनाज के बदले तेल घूसकांड, विदेशी मूल,दो लाभ के पद,राष्ट्रपति के सामने प्रधन्मन्त्री बनने के लिए झूठे आंकड़े देने , को उठाकर एंटोनिया की असलियत जनता के सामने क्यों नहीं रखी जाती ? सिर्फ इसलिए कि भारतीय संस्कृति को बदनाम कर समाप्त करने के जिस षडयन्त्र के लिए इस विदेशी को भारतविरोदियों द्वारा यहां पलांट किया गया है उस षडयन्त्र में खुद मिडीया के मालिक सामिल हैं।

 जिस समाज में अपनों का मान सम्मान करने के स्थान पर उनके हर कार्या पर अंगुली उठाने की आदत होती है वो समाज अक्सर इस भ्रम का सिकार हो जाता है कि अपने अच्छे नहीं विदेशी अच्छे हैं,अपने उतत्पादन अच्छे नहीं विदेशीयों के अच्छे हैं,अपना देश अच्छा नही विदेश अच्छा है अपना धर्म और संस्कृति अच्ची नहीं विदेशीयों की अच्छी है । जो समाज इस भ्रम का सिकार होता है वो अक्सर गुलाम रहता है। यही वजह है कि भारतीयों को जो आंसिक आजादी 1947 में मिली उसे 2004 में बौद्धिक गुलाम भारतीयों ने अपने हाथों एक विदेशी एंटोनियो माइनो मारियो के हवाले कर दिया। गुलमों के साथ कैसा सलूक होता है आप खुद महसूस कर सकते हैं…..

 

    

 

            

    

     

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आओ शहीद भगत सिंह जी के शहीदी दिवस पर उनके बताए मार्ग पर चलने का प्रण करें।

आओ शहीद भगत सिंह जी के शहीदी दिवस पर उनके बताए मार्ग पर चलने का प्रण करें।

आज भारत को काले अंग्रेजों ने जिस गर्त में धकेल दिया है उसकी शायद किसी भी शहीद ने कल्पना तक नहीं की होगी । शहीद भगत सिंह ,शहीद शुखदेव जी व शहीद राजगुरू जी ने भारत माता को अंग्रेजों से आजाद करवाने के लिए वन्देमातरम् का गान करते हुए जिस तरह मौत को गले लगाया शायद ही किसी ने उस वक्त कल्पना की होगी कि जिस वन्देमातरम् का गान करते हुए इन शहीदों ने अपनी कुर्वानी दी उसी वन्देमातरम् का विरोध करने वाले गद्दारों को भारत सरकार व मिडीया का संरक्षण प्राप्त होगा और वो बेसर्मी व नमकहरामी की सारी हदें पार करते हुए सीना चौड़ा कर शहीदों की आत्मा को अपने जैसे गद्दारों का कत्ल करने के लिए ललकारेंगे । आओ परमात्मा से प्रार्थना करें कि इन सब शहीदों की आत्मा हमारे अन्दर प्रवेश कर हमारे हाथों इन गद्दारों का भार इस पवित्र भारत माता पर से खत्म करवायें।शायद इन्हीं शहीदों की आत्मा का प्रभाव होगा जो हुसैन जैसे गद्दार का बोझ भारत माता पर से कम हो गया वेशक उसके जैसे अनेकों गद्दारों का बोझ आज भी हमारी कायरता और नलायकी की बजह से भारत माता को आज भी झेलना पड़ रहा है।आओ अपनी भारत माता को इस बोझ से मुक्त करने की कशम उठायें। ये इन शहीदों की पवित्र आत्मा की ही ताकत है कि आज हर भारतीय को यह जानकारी मिल रही है कि कौन गद्दार और कौन देशभक्त । इन्ही शहीदों की कुर्वानी की ताकत की बदौलत आज भी देशभक्त ताकतें गद्दारों के विरूद्ध संघर्षशील हैं।आज देश का लगभग हर जागरूक नागरिक ये जान चुका है कि सेकुलर गिरोह से जुड़े लोग ही भारत पर आतंकवादी हमले करवा रहे हैं व आतंकवादियों को हर तरह का तकनीकी सहयोग दे रहे हैं। जरा सोचो आज देश में कौन नहीं जानता कि 1993 में मुम्बई पर हमले के लिए उपयोग हुआ गोला बारूद सेकुलर कांग्रेस के नेता सुनील दत्त के बेटे संजय दत्त के माध्यम से उनके घारमें छुपाया गया व हमले के लिए सारी योजना का संचालन किया सेकुलर समाजवादी पार्टी के नेता अबु हाजमी ने। आज कौन नहीं जानता कि पार्लियामैंट पर हमला करवाया सेकुलर प्रोफैसर जिलानी ने जिसे छुड़वाया सेकुलर पत्रकार कुलदीप नौयर ने। कांग्रेस इस हमले में किस हद तक सामिल थी वो इस बात से विलकुल सपष्ट हो जाता है कि माननीय सर्वोचनयायालया द्वारा फांसी की सजा प्राप्त मुहम्द अफजल को पिछले तीन बर्षों से कांग्रेस बचा रही है वो भी तब जब आधा दर्जन से अधिक सैनिकों ने इन गद्दार नेताओं की रक्षा के लिए अपने प्रांणों की वाजी लगा दी थी ।कांग्रेस किस हद तक इन आतंकवादियों से मिली हुई है इस का पता तो इस बात से ही चल जाता है कि शहीदों के परिवारों द्वारा अपने मैडल वापिस कर दिए जाने के वावजूद ये सेकुलर कांग्रेस उन देश के गद्दारों के साथ खड़ी रही।हमें य़ह नहीं भूलना चाहिए कि ये वही कांग्रेस है जिसने 1857 -1947 के दौरान, पहले व बाद में शहीद हुए सब शहीदों का न केबल अपमान किया बल्कि उनके परिवारों तक को 1947 के बाद भी दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर किया। शहीद चन्दरसेखर आजाद जी की माता जी के साथ क्या-क्या हुआ वो देश के शासकों की गद्दारी को बताने के लिए काफी है। इस कांग्रेस ने बोट की खातिर मरने वालों को तो शहीद का दर्जा दे दिया लेकिन निस्वार्थ भाव से देश के लिए कुर्वानी देने वाले शहीदों के लिए अपशब्दों का उपयोग कर उनका अपमान किया । जिन अग्रेजों से देश को मुक्त करवाने के लिए शहीदों ने अपनी जिन्दगी दांव पर लगा दी उन्हीं अंग्रेजों की अगली पीढ़ी की एंटोनियो माईनो मारियो को इन गद्दारों ने फिर से सता पर बिठा दिया ।मतलब उन्हीं अंग्रेजों का गुलाम इन गद्दारों ने देश को फिर बना दिया।अं ग्रेजों की इसी गुलामी का प्रभाव है कि कांग्रेस सरकार एक ऐसा विधेयक पारित करवा रही थी जिससे अंग्रेजों की कंपनियों को भारतीयों को मारने में सुविधा रहती ।ये तो भला हो 35 देशभक्त कांग्रेसियों का जिन्होंने एंटोनियों की गुलामी से बगाबत करते हुए देशहित में संसद से अनुपस्थित रहकर भारतीयों के लिए एक बड़ी कुर्वानी दी। आज कौन नहीं जानता कि बटला हाउस इवकांटर के शहीद का अपमान किया सेकुलर समाजबादी पार्टी के अमर सिंह ने व इस शहीद व अन्य जबानों पर हमला करने वाले आतंकवादियों को भागने में मदद की सेकुलर कांग्रेस के विधायक अबदुल सतार व सेकलर समाजवादी पार्टी के विधायक अबु हाजमी ने। आज हर कोई जानता है कि 2008 के मुम्बई पर हुए हमले में सेकुलर महेसभट्ट का वेटा राहुल भट्ट सामिल था व सेकुलर कांग्रेस के नेता अबदुल रहमान अंतुले के घर को इन आतंकवादियों ने सुरक्षित हैवन के रूप में उपयोग किया इसीलिए तो इस गद्दार ने कहा था कि ये हमला हिन्दूओं ने किया पर जब भेद खुल गया तो इसने कहा आतंकवादी शहीद करकरे को मारने नहीं आये थे मतलब ये गद्दार सब जानता था ।अन्त में ये भी देश का बच्चा-बच्चा जानता है कि भारत पर हमला करने या करवाने वाले जितने भी गद्दारों की हमने चर्चा की उन सब को बचाया व बचाने की कोशिश मे लगा हुआ है सेकुलर गिरोह।


आओ एकवार फिर शहीदों द्वारा दी गई कुर्वानी की कशम उठाकर हम प्रण करें कि देश को गद्दारों से मुक्त करवाने के लिए हमें जो भी रास्ता अपनान पड़े अपनायेंगे और अगर हम ये रास्ता न अपनायें तो हम ये रास्ता अपनाने वालों का तन-मन-धन से सहयोग करेंगे उनका मानसम्मान करेंगे उनके परिवारों का हम अपना परिवार मानकर उनका ख्याल रखेंगे ।उन क्रांतिकारियों के विरूद्ध उठने वाली हर आबाज को हम कुचल देंगे।

हम तो चाहते है कि, शांति का अपना मार्ग हम कभी न छोड़ें।


हम तो चाहते है कि, शांति का अपना मार्ग हम कभी न छोड़ें।


पर क्या करें, कमबख्त शत्रु मानता ही नहीं,


पर क्या करें, कमबख्त शत्रु मानता ही नहीं


शांति की भाषा जानता ही नहीं।।


हमने तो पांडवो की तरह, अफगानीस्थान,पाकिस्तान, बंगलादेश,कशमीरघाटी सब छोड़ दिए थे।


पर शत्रु है, कि रूकने का नाम लेता ही नहीं; हमले पर हमला किए जाता है।


कभी दंगा भड़काता है तो, कभी आरडीएकस व बम्ब चलाता है।


भारतीयों को हर जगह से मार भगाता है।।


इस शत्रु ने के, न जाने कितने भारतीयों घर तोड़े


हम तो चाहते है कि, शांति का अपना मार्ग हम कभी न छोड़ें।


आओ; अपने बचे पांच गांवों(भारत) के लिए, शांति छोड़ कर शस्त्र उठायें,


इस कमबख्त, कमीने शातिर शत्रु को मार भगायें।


हम भी इस पर घर वापसी का, दबाब वनायें,


न माने तो इस पर बम्ब चलायें ।


हम शांति तो तब करेंगें, जब हम रहेंगे जब हम ही न रहेंगे ,


तो शमशानघाट की शांति का, भला हम क्या करेंगे।।


आओ बढ़े चलें शहीदों के मार्ग पर, जिन्होंने ऐसे अनेकों शत्रुओं के सिर फोड़े


हम तो चाहते है कि, शांति का अपना मार्ग हम कभी न छोड़ें।


हम तो चाहते है कि, शांति का अपना मार्ग हम कभी न छोड़ें।






हम तो चाहते है कि शांति का अपना मार्ग हम कभी न छोड़ें पर

सच कहें तो आज हमारे मन में ये विचार आ रहा है कि शायद पालतु कुता भी इतना बफादार नहीं होता होगा अपने मालिक के प्रति जितना आईबीएन7 वफादार है अपने खरीददार मुसलिम आतंकवादियों व धर्मांतरण के ठेकेदार ईसाईयों के प्रति।

आज तो वाकई हद ही हो गई ।हमें उमीद तक न थी कि सच्चाई का गला इस तरह से भी घोंटा जा सकता है। आईबीएन7 कहता है कि दंगा फिक्स था मतलब मौलान ने मुसलमानों को हिन्दुओं पर हमला करने के लिए इसलिए उकासाया क्योंकि हिन्दूओं ने उसे पैसे दिए थे ।अपने जान-माल का नुकसान करने के लिए।हिन्दूओं पर हमला करने के लिए बाराबसात का तय रास्ता इसलिए बदला गया क्योंकि हिन्दूओं ने मौलाना व मुसलमानों को कहा था कि तुम लोग अपना रास्ता बदल कर हमारे पर हमला कर दो ।इस जलूस में सामिल महिलाओं की गर्दन पर चाकू रखकर उनके गहने इसलिए छीने गए क्योंकि उन्होंने मुसलमानों से कहा था कि थुम इस तरह हमारे गहने छीनो।हिन्दू महिलाओं से छेड़खानी भी मुसलामनों द्वारा उनके कहने पर ही की गई । अब आप ही बताओ कि इस चैनल के वारे में क्या किया जाना चाहिए?

बरेली में जिस दिन दंगा शुरू हुआ था उस दिन से आज तक सारा मिडीया मुंह पर पटी बांद कर तमासा देखता रहा ।क्योंकि बरेली का बच्चा-बच्चा जानता है कि हमला मुसलामनों ने हिन्दूओं पर किया ।हमला करने के लिए भड़काया मुसलिम गिरोह के नेता मौलाना तौकीर रजा खान ने।इस खान ने जलसा कर मुसलमानों से कहा कि हमें लडना है पुलिस से और दंगाईयों(हिन्दूओं) से।हिन्दूओं को ये नाम सेकुलर गिरोह की देन है। ये खान यहां ही नहीं रूका आगे इसने जो कहा वो लिखने के काविल नहीं है। पर आप समझ सकते हैं क्योंकि ये खान वो ही है जिसने डैनिश कारटूनिसट के हाथ कलम करने वाले को सौ करोड़ देने की घोषणा की थी।

आईबीएन7 ने अपनी इस मनघड़ंत कहानी के दौरान इस दंगाई मुसलिम व इसके सहयोगियों के बयान इस तरह पेश किए मानो किसी दार्सनिक के विचार दिखा रहे हों। इस मुसलिम ने मुसलमानों को हिन्दूओं व पुलिस पर हमला करने के लिए उकसाया पर इस चैनल की ओर से न इसे गंडा कहा गया न आतंकवादी न तालिवान न दंगाई।ये वो शब्द हैं जो इसी चैनल ने एक और खान के पाकिस्तान समर्थक ब्यान का विरोध करने वाले वालासाहब ठाकरे जी के लिए पयोग किए थे।एक ने शरयाम दंगे के लिए उकसाया और दंगा करवाया व दूसरे ने भारत के शत्रु देश के खिलाड़ियों का सिर्फ विरोध भर किया ।एक को गाली और दूसरे से सम्मानपूर्वक बातचीत। अब आप खुद सोच लो इस चैनल की असलियत के वारे में ।

आपको ये वताते चलें कि ये चैनल कशमीर घाटी में हुए 60000 हिन्दूओं के कत्ल के वारे में तो कुछ वोलता नहीं पर गुजरात में मारे गए मुठीभर मुसलमानों को लेकर आये दिन जहर उगलता है पर गुजरात में ही जिन्दा जलाए गय 59 हिन्दूओं के वारे में इसका मंह कभी नहीं खुलता । ये वही चैनल है जो तसलीमा नसरीन पर हो रहे हमलों पर तो खामोश हो जाता है पर भारत के गद्दार हुसैन द्वारा बनाई गई भारत माता व हिन्दूदेवीदेवताओं की नंगी तसवीरों का समर्थन करता है।

यह वही चैनल है जो वाटला हुस उनकाउंटर पर बार-बार सवाल उठाता है । पिछले एक महीने से ये चैनल संविधान की अबमानान कर मुसलिम आरक्षण का अभियान चलाए हुए है।इस चैनल द्वारा किए जा रहे भारतविरोधी-हिन्दूविरोधी गुनाहों की सूची बहुत लम्बी है। आपको ये बताते चलें कि ये चैनल चर्च के पैसे से चलता है व समय-यमय पर अपना समय भारत विरोधियों को वेचता है ।अभी इस चैनल ने सिमोगा ओर धूले में मुसलिमों द्वारा मचाई गई मारकाट पर मुंह नहीं खोला है देखते हैं वहां पर मुसलिमों द्वारा हिन्दूओं पर की गई हिंसा को ये चैनल किस तरह सही ठहराता है।

जागो हिन्दूओ वरना तुम्हारे जख्मों पर इस तरह नमक छिड़कने वालों की कमी नहीं। जागो संगठित होकर इन हमलों का मुकावला करो क्योंकि ये हमले अब भारत में हर जगह बार-बार होने हैं ।समाधान एक ही है संगठित होकर इन हमलों का जबाब उसी तरह दो जिस तरह गुजरात में हुए हमले का दियो गया था हमालाबर कायर है डरपोक है पर हमला इसलिए करता है क्योंकि हमला करने पर आईबीएन7 जैसे चैनल इन गद्दारों का साथ देते हैं व हिन्दू ये सब चुप होकर सहते हैं। जिस दिन इन हमलाबरों को इन्हीं की भाषा में हर जगह जबाब मिलना शुरू हो जायगा ये अपने आप हमला करना छोड़ देंगे। ऐसे चैनलों का क्या करना है इस पर भी सोचना होगा।

ध्यान रखो ये आपको शांति और भाईचारे की बात करके उलझाने का प्यत्न करेंगे पर हमला होने पर इन बातों का कोई अर्थ नहीं हमले का जबाब आत्मरक्षा ही हो तकता है आत्मरक्षा का अधिकार संविधान में भी दिया गया है।कहा भी गया है कि अगर आप शांति चाहते हो तो युद्ध के लिए हमेशा त्यार रहो।आओ मिलकर आत्मरक्षा की त्यारी करें।

हम तो चाहते है कि शांति का अपना मार्ग हम कभी न छोड़ें।


पर क्या करें कमबख्त शत्रु मानता ही नहीं,शांति की भाषा जानता ही नहीं।।


हमने तो पांडवो की तरह अफगानीस्थान,पाकिस्तान, बंगलादेश,कशमीरघाटी सब छोड़ दिए थे।


पर शत्रु है कि रूकने का नाम लेता ही नहीं हमले पर हमला किए जाता है।


कभी दंगा भड़काता है तो कभी आरडीएकस व बम्ब चलाता है।


हिन्दू को हर जगह से मार भगाता है।।


आओ अपने बचे पांच गांवों(भारत) के लिए शांति छोड़ कर शस्त्र उठायें,


इस कमबख्त कमीने शत्रु को मार भगायें।


हम भी इस पर कभी घर वापसी का दबाब वनायें,


न माने तो इस पर बम्ब चलायें ।


हम शांति तो तब करेंगे जब हम रहेंगे जब हम ही न रहेंगे ,


तो शमशानघाट की शांति का भला हम क्या करेंगे।।



अब न जागे तो मिट जाओगे ऐ वौद्धिक गुलाम हिन्दूओ

हेडली प्रकरण ने हिन्दू राष्ट्र भारत पर मुसलमानों, ईसाईयों व सेकुलर गिरोह के सामूहिक हमलों की असलियत उजागर कर दी ।

हम लगातार हिन्दूओं के विरूद्ध किए जा रहे आतंकवादी व बौद्धिक हमलों की सच्चाई बौद्विक गुलाम हिन्दूओं के सामने रखने का प्रयास कर रहे हैं। भगवान वार-वार बौद्विक गुलाम हिन्दूओं के सामने इन हमलों के प्रयोजकों, समर्थकों व हमले करने वालों के हर षडयन्त्र को उजागर करने के लिए प्रमाण दे रहा है पर न जाने क्यों बौद्विक गुलाम हिन्दू इन प्रमाणों को नजरअंदाज कर अपने पैर पर खुद कुलहाड़ी मारते जा रहे हैं।                                               

 बौद्विक गुलाम हिन्दूओं की जिद है कि वो जागेगें नहीं और हमारी जिद है कि हम बौद्विक गुलाम हिन्दूओं को जगाकर रहेंगे ।हिन्दूविरोधियों का षडयन्त्र है कि वो हिन्दूहित की वात हिन्दूओं तक पहूंचने नहीं देंगे और हमारी जिद है कि हम हिन्दूओं तक हिन्दूहित की बात पहूंचाकर रहेंगे। भगवान हमारे साथ है इसका लगभग हर रोज कोई न कोई प्रमाण जरूर मिल रहा है।आओ जरा इन्हीं प्रमाणों पर एक निगाह डालें और सोचें कि क्या सत्य है और क्या असत्य क्या सही है क्या गलत है कौन हमारे विरूद्ध किए जा रहे आतंकवादी हमलों के लिए जिम्मेवार है।                                      

ताजा हेडली उर्फ दाउद गिलानी , तहव्वुर राणा व राहुल भट्ट का मामला एक ऐसी सच्चाई हमारे सामने रख रहा है जिसको हर कोई देशभक्त भारतीय महसूस तो कर सकता है पर सबूत नहीं जुटा सकता। यह मामला हमें यह वताने के लिए काफी है कि अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा सभ्यताओं की लड़ाई की बात करना एक कड़वी सच्चाई है न कि कोई गलती से की गई टिपणी। बौद्विक गुलाम हिन्दूओं को अपने दिमाग से अमेरिका की मिडीया द्वारा बनाई गई सेकुलर राष्ट्र की छवी से खुद को बाहर निकालना होगा। वास्तव में अमेरिका एक नसलवावादी ईसाई राष्ट्र है वहां का राष्ट्रपति अपने पद की शपथ वाईवल उठाकर लेता है । ईसाईयत का प्रचार प्रसार व चर्च की रक्षा अमेरिकी राष्ट्रपति का पहला कर्तवय है। इस वक्त अमेरिका का एकमात्र लक्ष्य सारे संसार में अमेरिकी सम्राज्यावादी राज्या वोले तो गोरे ईसाईयों का राज्या सथापित करना है न कि कोई मानवीय राज्या जैसा कि प्रचारित किया जाता है।अपने इस उदेशय की पूर्ति के लिए अमेरिका आज सारे गैर-ईसाई देशों पर हमला वोले हुए है ।अपने इस मकसद को पूरा करने के लिए अमेरिका एक तरफ जहां  UNO, IMF, WHO, WORLD bank ,HUMANRIGHTS COMMISSION जैसी अधिकतर संस्थाओं का दुरूपयोग कर रहा है वहीं दूसरी तरफ सेना व आतंकवादियों की मदद से अपने इस मकसद को पूरा कर रहा है । कहने को तो ये सब संस्थायें अन्तराष्ट्रीय सहयोग के लिए हैं पर वास्तव में ये संस्थायें अमेरिकी सम्राज्यावाद को आगे बढ़ा रही हैं। भारत जैसे गैर ईसाई देश जो अमेरिकी दबाब में आकर अपने यहां ईसाईयत के सरंक्षण व प्रचार-प्रसार के लिए तैयार हो जाते हैं उनसे अमेरिका मित्रता का ढोंग करता है यह ढोंग तब तक जारी रहता है जब तक अमेरिकी हित प्रभावित नहीं होते हैं जैसे ही अमेरिकीहित प्रभावित होते हैं बैसे ही अमेरिका आंख दिखाना शुरू कर देता है।

उपयोग कर खत्म कर दो अमेरिकी विदेश निती का मूल आधार है। इराक जैसे देश जो अमेरिका की नजायज मांगो के आगे नहीं झुकते अक्सर खत्म कर दिए जाते हैं। वांमपंथियों का विरोध अमेरिका क्यों करता है इसका मूल आधार पूंजीवाद ही ईसाईयत की पहली शिक्षा है। दूसरी तरफ अल्लहा ने मुसलमानों को भी यही शिक्षा दी है कि वो सारे संसार पर इस्लामी राज्या स्थापित करें । इसलिए अधिकतर मुसलमान भी अपने अल्लहा के इस मकसद को पूरा करने के लिए सारे संसार में कत्लोगारद मचा रहे हैं।

अल्लहा की शिक्षा और अमेरिका की विदेशनिती ही आज सारे संसार में आतंकवाद और युद्ध की जड़ बने हुए हैं दुनिया के अधिकतर हिस्सों में मुसलमान और ईसाई एक दूसरे के खून के प्यासे बने हुए हैं इन दोनों की विस्तारवादी लड़ाई ने लोगों का जीना हराम कर रखा है। ईसाईयत और ईस्लाम तब एत हो जाते हैं जब ईनका सामना मानबता और भाईचारे की आधार भारतीय संस्कृति से होता है।य़हां पर आकर ये दोनों खुद को अहसाय पाते हैं और अपनी इस कायरता को छुपाने के लिए दोनों मिलकर भारतीयों पर हमला वोल देते हैं ।

भारत पर इनके हमले को आगे बढ़ाने में इनकी हर तरह की मदद करता है सेकुर गिरोह । सेकुलर गिरोह भारत को समाप्त करने पर किस तरह उतारू है इसका पूरा विवरण हमारी पुस्तक नकली धर्मनिर्पेता में उपलब्ध है। हम पहले भी बता चुके हैं कि 1993 में मुमबई पर हमला सेकुलर नेता सुनील दत्त के बेटे संजय दत्त व सेकुलर पार्टी के नेता अबु हाजमी, 2001 पार्लियामैंट पर हमला सेकुलर प्रोफैसर गिलानी(जिसको छुड़ाया सेकुलर पत्रकार कुलदीप नैयर ने) दोषी सिद्ध को चुके अफजल की फांसी रूकवाई सेकुलर कांग्रेस ने, बटला हाउस इनकांटर के आतंकवादियों की सहायता की कांग्रेस के नेता अबदुल सतार व दिगविजय सिंह ने और सेकुलर पार्टी समाजवी पार्टी के नेता अबु हाजमी ने ,2008 का मुम्बई हमला करवाया सेकुलर पार्टी कांग्रेस के नेता अबदुल रहमान अंतुले ने जिसमें सहयोग किया अमेरिकी ऐजेंट दाऊद गिलानी ने इस सब में मुख्य मध्यस्थ का काम निभाया सेकुलर कलाकार महेश के वेटे राहुल भट्ट ने। अंत का एक पहराग्राफ समझदार लोगों को ये समझाने के लिए काफी है कि ईसाई  + मुसलमान + बौद्धिक गुलाम हिन्दू + मिडीया = सेकलर गिरोह

किस तरह भारत को तवाह और बरबाद करने पर तुले हुए हैं।

इस पहराग्राफ को पढ़कर आपको यह भी समझ आ जाना चाहिए कि क्यों शहरूखखान कहता है कि खान वेशक हिन्दूओं का खून बहाता है पर फिर भी भी खान आतंकवादी नहीं हैं अगर नहीं समझ आये तो हमें बताना हम जरूर यह सब आपके सामने रखेंगे अगर आये तो हमारे साथ जरूर सांझा करना कि खून बहाने के बाबजूद अगर खान शाहरूख सहित सेकुलर गिरोह की निगाहों में आतंकवादी नहीं है तो फिर क्या है?

अब न जागे तो मिट जाओगे ऐ  वौद्धिक गुलाम हिन्दूओ

तुम्हारी दास्तां तक न होगी दास्तानों में

 

 

  

 

 

 

मायावती पर नोटों की माला के बहाने हमला मिडीया की भेदभावपूर्ण मानसिकता का एक और प्रमाण

मायावती पर नोटों की माला के बहाने हमला मिडीया की भेदभावपूर्ण मानसिकता का एक और प्रमाण

 

हाली ही में मायावती जी ने उतर प्रदेश में अपने दल की विसाल सभा का आयोजन किया। इस सभा के माध्यम से उन विकाऊ बिद्धिजिवीयों के मुंह पर एक जोरदार तमाचा जड़ा गया जो लगातार दलितों की आर्थिक खुशहाली को नजर अंदाज कर हिन्दूओं को स्वर्ण और दलित के नाम पर विभाजित कर हिन्दू एकता को तोड़ना चाहते हैं। वेशक ऐसे खुशहाल लोगों की संख्या दलितों और स्वर्णों(हमारे हिसाब से सब हिन्दू हैं न कोई स्वर्ण न कोई दलित)में मुठी भर है। यह वात किसी से छुपी  नहीं है कि मुलिम और ईसाई अक्रांताओं के सासनकाल में हिन्दूओं पर वेहिसाव जुल्म ढाय गए ।प्रताड़ित होने वाले हिन्दूओं में दलित और स्वर्ण समानरूप से सामिल थे।इसीलिए आज भी दोनों का एक बड़ा बर्ग सिर्फ एक सादी व 1-2 बच्चे करने के बाबजूद वंचितो का जीवन जीने को मजबूर है और मुसलिम चार-चार सादियां व10-40 बच्चे करने के बाबजूद खुशहाली का जीवन जी रहे हैं ईसाई भी आज इसीलिए खुशहाल हैं क्योंकि अपने सासनकाल में इन ईसाईयों ने हिन्दूओं के हिस्से का पैसा व जमीन अपने कब्जे में कर लिया अब उसका उपयोग कर हिन्दूओं को धर्मांतरण के लिए बाध्या कर रहे हैं। आप देखेंगे कि जब भी किसी क्षेत्र में मुसलमानों या ईसाईयों ने हिन्दूमिटाओ अभियान चलाया तो उस क्षेत्र में न स्वर्ण वचे न दलित वहां 100% मुसलिम(कशमीर घाटी) या 100% ईसाई(उतर-पूर्व के कई राज्य) । मतलब सबकेसब हिन्दू मुसलिम आतंकवादियों के हाथों मारे गए या मतांतरित किए गय। जब हमला स्वर्ण और दलित पर ईकठा है तो मुकावला भी दोनों को इकठे ही करना पड़ेगा।बस यहीं पर समस्या आ खड़ी होती है हिन्दूविरोदी नहीं चाहते कि हिन्दूएकजुट होकर इस हमले का जबाब दें । इसीलिए उनका हर वक्त प्रयास होता है कि हिन्दू को स्वर्ण और दलित के आधार पर विभाजित कर इस में से एक वर्ग को आतताई मुसलिमों व ईसाईयों के साथ खड़ा कर दूसरे को हानि पहुंचाई जाए। इसी रणनिती के तहत देशभर में ये दोनों आक्रमणकारी विचारधायें सक्रिए हैं।

विषयान्तर से वचने के लिए हम सीधे मूल विषय पर आते हैं।उतर प्रदेश में BSP की विशाल रैली की भब्यता को देख कर हमारे जैसे हिन्दू एकता के समर्थकों का सीना चौड़ा हो गया। क्योंकि ये रैली उस हिन्दू नेत्री की थी जो सेकुलर गिरोह के षडयन्त्रों से अपना वचाब करते हुए सर्वजन की बात कर हिन्दू एकता के मार्ग पर आगे बढ़ रही है। हिन्दू एकता के मार्ग को अपनाना व मुसलिम व ईसाई तुष्टीकरण से बचकर आगे बढ़ना ही इस नेत्री की सफलता का मूल कारण प्रतीत होता है(बरेली के अपवाद के वावजूद)। हर कोई जानता है कि मौलाना मुसलायम सिंह यादव के मुसलिम आतंकवाद समर्थक सासन से उतर प्रदेश की जनता को अगर किसी ने मुक्ति दिलवाई तो वो है मायावती जी का सासन ।हमें याद हैं वो दिन जब मऊ में मुसलायम के विधायक अंसारी ने गाड़ी में घूम-घूम कर मुसलिमों को उकसार हिन्दूओं पर हमले करवाकर हिन्दूओं के जानमाल को नुकसान पहुंचाया और मुलायम के कान पर जूं तक न रेंगी।

इस रैली के दौरान मायवती जी को जो हार पहनाया गया उसे किसी ने 5 लाख का तो किसी ने 50 करोड़ का बताया।चलो मान लेते हैं कि ये हार 50 करोड़ का ही था तो इससे किसको क्या समस्या हुई । जो आज की राजनिती को समझते हैं वो अच्छी तरह जानते हैं कि 50 करोड़ आज की राजनिती मे ज्यादा माईने नहीं रखता। BSP समर्थक हिन्दूओं ने ये पैसा इकट्ठा कर मायावती जी को दिया मतलब देश के लोगों का पैसा देश के लोगों के पास ।लोग जब चाहें वापस ले लें पर इटली गया पैसा तो वापस नहीं आ सकता न। मिडीया ये कहने का प्रयास कर रहा है कि ये जनता के पैसे का दुरूपयोग है।विलकुल है कौन नहीं कर रहा है।

हम जानान चाहते हैं कि जब एंटोनियों उर्फ सोनिया गांधी ने इंगलैंड में जब्त वोफोर्श दलाली कांड के पैसे को मुक्त करवाने के लिए ततकालीन कानूनमंत्री हंसराज भारद्वाज जी को निजी तौर पर लंदन भेजा और भारतीयों के उस पैसे को अपने हमवतन इटालियन क्वात्रोची को दिलवाया तो मिडीया कहां था। क्यों नहीं विरोध किया भारतीयों का पैसा इटालियन के हवाले करने का। ये पैसा तो 50 करोड़ से कहीं ज्यादा था। क्या मिडीया ने इस लिए विरोध नहीं किया क्योंकि भारत का पैसा चोरी कर वाहर ले जाने वाले इसाई थे और मिडीया को चलाने वाले भी ईसाई हैं या फिर इसलिए कि दनों(मिडीया और एंटोनिया उर्फ सोनिया गांधी) देशविरोधी कामों के मुद्दे पर एक जुट हैं। पैसा गया सो गया क्वात्रोची पर चल रहे चोर-बजारी के केस भी खत्म करवा दिए और मिडीया ने उफ तक न  की । जब नटबर सिंह ने सदाम हुसैन से पैसा लेने के लिए सोनिया गांधी द्वारा दी गई चिट्ठी का हबाला दिया तो मिडीया खामोश क्यों हो गया। मतलब साफ है कि मिडीया का देशहित-गरीब हित-दलित हित व स्वर्ण हित से कुछ लेना देना नहीं है इन सब मुद्दों को मिडीया अपनी सुविधा अनुसार हिन्दूओं मतलब देशभक्तों को लड़वाने के लिए उपयोग करता है। अगर मिडीया का देशहित से दूर का भी वास्ता होता तो ये मिडीया क्वात्रोची द्वारा भारतीयों के पैसे की चोरी(सोनिया गांधी की सहायता से) को पूरे जोर सोर से उठाता और सरकार को वाध्या करता देश का पैसा वापिस देश में लाने को।

मिडीया ने मायावती द्वारा वनवाई जा रही मूर्तियों पर भी बखेड़ा खड़ा करने की कोशिस की । हम जानना चाहते हैं कि अगर जनता के पैसे का मूर्तियां वनवाने के लिए उपयोग करना गलत है तो ये पैमाना सिर्फ मायावती पर क्यों लागू होता है। देशभर में नैहरू जैसे कांग्रेसी नेताओं की मूर्तियों को बनवाने व उनका रखरखाव करने के लिए आज तक अरवों-खरवों रूपये वहाए जा चुके हैं भारतीयों की मूर्तियों पर जो खर्चा हुआ सो हुआ।भारत में तो मुसलिमअक्रांताओं व ईसाई अक्रांताओं की मूरतियों,मकवरों व पहचान चिन्हों को वनाए रखने के लिए पैसा पानी की तरह वहाया जा रहा है तब तो मिडीया विरोध करने के वजाए उल्टा समर्थन करता है। बाबर की एक करतूत को हिन्दू कार्याकर्ताओं ने क्या ठीक किया आज तक ये मिडीया गाली गलौच किए जा रहा है।क्योंकि इस मिडीया के खरीददारों के एक आका की निसानी भारत से मिटा दी गई।

जब बाला साहव ठाकरे पाकिस्तानी खिलाडीयों को भारत में खिलाने का विरोध करते हैं तो यह भारत-विरोधी मिडीया पागल कुतों की तरह उन पर टूट पड़ता है पर जब होली पर धूले(महाराष्ट्र),शिमोगा(करनाटक) व वरेली(उतर प्रदेश) में मुसलिम गुंडे कतलो-गारद मचाते हैं आगजनी करते हैं तब इस मिडीया की वोलती बंद हो जाती है।फिर ये हमला चाहे मिडीया पर ही क्यों न हो क्योंकि मिडीया के लोग जानते हैं कि हिन्दूओं व उनके नेताओं को गाली-गलौच करने पर कोई हानि नहीं उठानी पड़ेगी पर अगर मुसलिम गुंडो के विरूद्ध मुंह खोला तो डंके की चोट पर मार पड़ेगी –गोली भी चल सकती है-बम्ब भी फट सकते हैं इसीलिए ये मिडीया मुसलिमों व उनके समर्थक नेताओं के विरूद्ध गाली गलौच करने से बचता है। बैसे भी गुंडे को गुंडा कहेंगे तो मार तो पड़ेगी ही शांतिप्रय हिन्दूओं व उनके संगठनों को जो मर्जी गाली निकाल लो क्या फर्क पड़ता है? हिन्दूओं को भी सीखना होगा कि अगर मिडीया के गाली-गलौच से बचना है तो हथियार उठाना जरूरी है।

कौन नहीं जानता है कि जब भी पाकिस्तानी खिलाड़ी भारत में खेलने आते हैं तो उन्हें देखने के लिए हजारों पाकिस्तान आतंकवादी दर्शकों के वेश में भारत में घुस आते हैं और वीजा समाप्त होने पर वापस जाने के बजाए यहीं रहकर आतंकवादी गतिविधियों को अनजाम देते हैं। अभी इसी सप्ताह समाचार आया कि 50 मुसलिम हिमाचल जैसे शांतिप्रिय राज्य में आकर भूमिगत हो गय।इससे कुछ दिन पहले इन्हीं मुसलिम आतंकवादियों ने बबरखालसा के नाम से हिमाचल में नबरात्रों के दौरान हमले करने की धमकी दी थी। दिल्ली में जेल से पाकिस्तानी आतंकवादी भाग गय। सरकारी आंकड़ों के अनुसार इससे पहले भारत-पाक सीरीज के दौरान भारत आए पाकिस्तानियों में से 5000 से अधिक भारत में ही छुप गए क्योंकि देश में भारत के शत्रुओं को छुपाने वाले गद्दारों की कमी नहीं।

जब शहरूखखान पाकिस्तानी खिलाड़ियों की बात करते हैं तो वो वास्तव में इन्हीं आतंकवादियों की ढाल के रूप में काम कर रहे होते हैं। अपनी भारत विरोधी सोच से मजबूर मिडीया विना-सोचे समझे देशविरोधी ब्यानों का समर्थन कर मामले को उलझा देता है। अंत में हम इतना ही कहेंगे कि मिडीया को अपनी विश्वनीयता बनाने के लिए सबके लिए एक जैसा मानक अपनाते हुए अपने आपको देशहित में समर्पित करना चाहिए न कि किसी पार्टी विशेष की विचारधारा के प्रति। जरा सोचो कांग्रेस व समाजवादी पार्टी के मुसलिम विधयकों व दिविजय सिंह द्वारा आतंकवादियों की सहायता करना जयादा खतरनीक है या फिर माला पैहनना।अब आप खुद फैसला कर लो कि इन दलों की गद्दारी को उजागर करने वाला ये समाचार क्यों नहीं चलाया गया? क्यों इस गद्दारी पर कोई प्रोग्राम आयोजित नहीं किया गया? क्यों कशमीर में  60000 हिन्दूओं को  कत्ल करने वाले मुसलिम आतंकवादियों,आतंकवादियों से मिले नेताओं को सजा दिलवाने की बात मिडीया नहीं करता?क्यों मिडीया सिर्फ गुजरात दंगो की चर्चा करता है? वो भी सिर्फ मारे गए मुसलमानों की ? क्यों जिंदा जलाए गए हिन्दूओं की चर्चा नहीं करता? जो दंगों का कारण बना। क्यों मिडीया देशबर में मुसलिमानों द्वारा हिन्दुओं पर किए गय हमलों को तो नजरअंदाज करता है पर प्रतिक्रिया में हुए इक्का-दुका हमलों को बढ़ाचड़ाकर पेश करता है ?

आप सोचेंगे कि मिडीया के साथ-साथ राजितीक दलों ने भी इसका विरोध किया तो हम यही कहेंगे कि हर पार्टी अपनी विचारधारा या फायदे को ध्यान में रखकर  विरोध करेगी ।उनके द्वारा ऐसा किया जाना ही लोकतन्त्र है। (हमारे विचार में मायाबती जी को परमपूजनीय स्वामीरामदेव जी पर हमला नहीं वोलना चाहिए था क्योंकि आज अमीर-गरीब का कोई सांझा तारणहार है तो वो स्वामीरामदेव जी हैं उनका विरोध भारत का विरोध है) मामला तब खराब हो जाता है जब मिडीया सब लोगों का विचार सामने रखने के बजाए खुद एक पार्टी बनकर लोगों को गुमराह करने लगता है।अगर मिडीया देशहित में पार्टी बने तो किसको समस्या हो सकती है पर ऐसा देखा गया है कि मिडीया सिर्फ देशविरोधी विचारों को आगे बढ़ाता है। इससे एक तो लोगों को सही सूचना के साधन कम हो जाते हैं और दूसरा लोगों के भ्रमित होने की सम्भावना बढ़ जाती है।हमारा मायावती जी से कुछ लेनादेना नहीं बस तकलीफ है तो सिर्फ इतनी कि एंटोनिया उर्फ सोनिया गांधी जैसे जिन लोगों ने अपना पैसा स्विस बैंकों में व इटली में जमा करवाया वो तो सरकारी समर्थन सहयोग से साफ बच निकलते हैं पर मायाबती जैसे लोग आय से जुड़े मामलों के चक्कर में बलैकमेल होते रहते हैं।हमें तकलीफ यह भी है कि मुसलिम आतंकवादियों व धर्मांतरण के ठेकेदारों से पैसा लेकर  देश के विरूद्ध राजनिती करने वाला सेकुलर गिरोह तो अपना पैसा विदेशों में रखकर हवाला के जरिए उपयोग कर सरकारी कानूनों से बच निकलता है पर देश के पैसे से देश के लोगों के लिए देश में राजनिती करने वाले मायवती व वंगारू लक्षमण जैसे लोग बदनामी की गलियों में खोकर राजनितीक परिदृष्य से ओझल हो जाते हैं।जबकि कड़वी सच्चाई यह है कि पैसे के लेन-देन के मामले में सब राजनितीक दलों की स्थिती लगभग एक जैसी है।कोई भी राजनतीक दल आर्थिक अनियमतता से मुक्त होने का दावा तक नहीं कर सकता।

 

 

 

 

 

 

 

 

हिन्दू नव वर्ष मंगलमय हो

हिन्दू नव वर्ष मंगलमय हो




नव वर्ष का प्रारम्भ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से है क्योंकि ?


• इस तिथि से ब्रह्मा जी ने सृष्टि निर्माण प्रारम्भ किया था।


• प्रभु रामचन्द्र जी का राज्याभिषेक दिवस।


• इस दिन नवरात्रों का महान पर्व आरम्भ होता है।


• देव भगवान झूले लाल जी का जन्म दिवस ।


• महाराजा विक्रमादित्य द्वारा विक्रमी संवत का शुभारम्भ ।


• राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के संस्थापक डा. केशव बलिराम हेडगेवार जी का जन्म दिवस।


• महर्षि दयानन्द जी द्वारा आर्य समाज की स्थापना दिवस।


• संसार के अधिकतर देशों के बजट की इन्हीं दिनों(पखवाड़े में) शुरूआत होती

 

आप अपनी आने वाली पिढ़ीयों को कैसा बनाना चाहते हैं

ऐसा

(अंग्रेजी नव वर्ष पहली जनवरी मनाने वाला)


या फिर ऐसा


(भारतीय नव वर्ष वर्षप्रतिपदा मनाने वाला)

ऐ वतन तेरी कसम ,कुर्बान हो जांएगे हम ।

तेरी खातिर मौत से भी , जा टकरांएगे हम ।


संसकार एक दिन में न बनता है न बिगड़ता है यह एक सतत प्रक्रिया है आप कौन सी प्रक्रिया अपनाकर अपने बच्चों के हवाले करते हैं वही उनका संसकार निर्माण करेगा।

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