हम तो चाहते है कि शांति का अपना मार्ग हम कभी न छोड़ें पर

सच कहें तो आज हमारे मन में ये विचार आ रहा है कि शायद पालतु कुता भी इतना बफादार नहीं होता होगा अपने मालिक के प्रति जितना आईबीएन7 वफादार है अपने खरीददार मुसलिम आतंकवादियों व धर्मांतरण के ठेकेदार ईसाईयों के प्रति।

आज तो वाकई हद ही हो गई ।हमें उमीद तक न थी कि सच्चाई का गला इस तरह से भी घोंटा जा सकता है। आईबीएन7 कहता है कि दंगा फिक्स था मतलब मौलान ने मुसलमानों को हिन्दुओं पर हमला करने के लिए इसलिए उकासाया क्योंकि हिन्दूओं ने उसे पैसे दिए थे ।अपने जान-माल का नुकसान करने के लिए।हिन्दूओं पर हमला करने के लिए बाराबसात का तय रास्ता इसलिए बदला गया क्योंकि हिन्दूओं ने मौलाना व मुसलमानों को कहा था कि तुम लोग अपना रास्ता बदल कर हमारे पर हमला कर दो ।इस जलूस में सामिल महिलाओं की गर्दन पर चाकू रखकर उनके गहने इसलिए छीने गए क्योंकि उन्होंने मुसलमानों से कहा था कि थुम इस तरह हमारे गहने छीनो।हिन्दू महिलाओं से छेड़खानी भी मुसलामनों द्वारा उनके कहने पर ही की गई । अब आप ही बताओ कि इस चैनल के वारे में क्या किया जाना चाहिए?

बरेली में जिस दिन दंगा शुरू हुआ था उस दिन से आज तक सारा मिडीया मुंह पर पटी बांद कर तमासा देखता रहा ।क्योंकि बरेली का बच्चा-बच्चा जानता है कि हमला मुसलामनों ने हिन्दूओं पर किया ।हमला करने के लिए भड़काया मुसलिम गिरोह के नेता मौलाना तौकीर रजा खान ने।इस खान ने जलसा कर मुसलमानों से कहा कि हमें लडना है पुलिस से और दंगाईयों(हिन्दूओं) से।हिन्दूओं को ये नाम सेकुलर गिरोह की देन है। ये खान यहां ही नहीं रूका आगे इसने जो कहा वो लिखने के काविल नहीं है। पर आप समझ सकते हैं क्योंकि ये खान वो ही है जिसने डैनिश कारटूनिसट के हाथ कलम करने वाले को सौ करोड़ देने की घोषणा की थी।

आईबीएन7 ने अपनी इस मनघड़ंत कहानी के दौरान इस दंगाई मुसलिम व इसके सहयोगियों के बयान इस तरह पेश किए मानो किसी दार्सनिक के विचार दिखा रहे हों। इस मुसलिम ने मुसलमानों को हिन्दूओं व पुलिस पर हमला करने के लिए उकसाया पर इस चैनल की ओर से न इसे गंडा कहा गया न आतंकवादी न तालिवान न दंगाई।ये वो शब्द हैं जो इसी चैनल ने एक और खान के पाकिस्तान समर्थक ब्यान का विरोध करने वाले वालासाहब ठाकरे जी के लिए पयोग किए थे।एक ने शरयाम दंगे के लिए उकसाया और दंगा करवाया व दूसरे ने भारत के शत्रु देश के खिलाड़ियों का सिर्फ विरोध भर किया ।एक को गाली और दूसरे से सम्मानपूर्वक बातचीत। अब आप खुद सोच लो इस चैनल की असलियत के वारे में ।

आपको ये वताते चलें कि ये चैनल कशमीर घाटी में हुए 60000 हिन्दूओं के कत्ल के वारे में तो कुछ वोलता नहीं पर गुजरात में मारे गए मुठीभर मुसलमानों को लेकर आये दिन जहर उगलता है पर गुजरात में ही जिन्दा जलाए गय 59 हिन्दूओं के वारे में इसका मंह कभी नहीं खुलता । ये वही चैनल है जो तसलीमा नसरीन पर हो रहे हमलों पर तो खामोश हो जाता है पर भारत के गद्दार हुसैन द्वारा बनाई गई भारत माता व हिन्दूदेवीदेवताओं की नंगी तसवीरों का समर्थन करता है।

यह वही चैनल है जो वाटला हुस उनकाउंटर पर बार-बार सवाल उठाता है । पिछले एक महीने से ये चैनल संविधान की अबमानान कर मुसलिम आरक्षण का अभियान चलाए हुए है।इस चैनल द्वारा किए जा रहे भारतविरोधी-हिन्दूविरोधी गुनाहों की सूची बहुत लम्बी है। आपको ये बताते चलें कि ये चैनल चर्च के पैसे से चलता है व समय-यमय पर अपना समय भारत विरोधियों को वेचता है ।अभी इस चैनल ने सिमोगा ओर धूले में मुसलिमों द्वारा मचाई गई मारकाट पर मुंह नहीं खोला है देखते हैं वहां पर मुसलिमों द्वारा हिन्दूओं पर की गई हिंसा को ये चैनल किस तरह सही ठहराता है।

जागो हिन्दूओ वरना तुम्हारे जख्मों पर इस तरह नमक छिड़कने वालों की कमी नहीं। जागो संगठित होकर इन हमलों का मुकावला करो क्योंकि ये हमले अब भारत में हर जगह बार-बार होने हैं ।समाधान एक ही है संगठित होकर इन हमलों का जबाब उसी तरह दो जिस तरह गुजरात में हुए हमले का दियो गया था हमालाबर कायर है डरपोक है पर हमला इसलिए करता है क्योंकि हमला करने पर आईबीएन7 जैसे चैनल इन गद्दारों का साथ देते हैं व हिन्दू ये सब चुप होकर सहते हैं। जिस दिन इन हमलाबरों को इन्हीं की भाषा में हर जगह जबाब मिलना शुरू हो जायगा ये अपने आप हमला करना छोड़ देंगे। ऐसे चैनलों का क्या करना है इस पर भी सोचना होगा।

ध्यान रखो ये आपको शांति और भाईचारे की बात करके उलझाने का प्यत्न करेंगे पर हमला होने पर इन बातों का कोई अर्थ नहीं हमले का जबाब आत्मरक्षा ही हो तकता है आत्मरक्षा का अधिकार संविधान में भी दिया गया है।कहा भी गया है कि अगर आप शांति चाहते हो तो युद्ध के लिए हमेशा त्यार रहो।आओ मिलकर आत्मरक्षा की त्यारी करें।

हम तो चाहते है कि शांति का अपना मार्ग हम कभी न छोड़ें।


पर क्या करें कमबख्त शत्रु मानता ही नहीं,शांति की भाषा जानता ही नहीं।।


हमने तो पांडवो की तरह अफगानीस्थान,पाकिस्तान, बंगलादेश,कशमीरघाटी सब छोड़ दिए थे।


पर शत्रु है कि रूकने का नाम लेता ही नहीं हमले पर हमला किए जाता है।


कभी दंगा भड़काता है तो कभी आरडीएकस व बम्ब चलाता है।


हिन्दू को हर जगह से मार भगाता है।।


आओ अपने बचे पांच गांवों(भारत) के लिए शांति छोड़ कर शस्त्र उठायें,


इस कमबख्त कमीने शत्रु को मार भगायें।


हम भी इस पर कभी घर वापसी का दबाब वनायें,


न माने तो इस पर बम्ब चलायें ।


हम शांति तो तब करेंगे जब हम रहेंगे जब हम ही न रहेंगे ,


तो शमशानघाट की शांति का भला हम क्या करेंगे।।



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