आतंकवादी का तो कोई मजहब ही नहीं होता –


(अभागे भारतीय की फरियाद पर सिक-यू-लायर(Sick you Liar, बीमार मानसिकता वाले झुट्ठे) नेता द्वारा सांत्वना भरे कुटिल उपदेश की तरह पढ़ें)


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अच्छा!!! वो दुश्मन है? बम फोड़ता है? गोली मारता है?


मगर सुन – दोस्ती में – इतना तो सहना ही पड़ता है


तय है – जरुर खोलेंगे एक और खिड़की – उसकी ख़ातिर


मगर – हम नाराज़ हैं – तेरे लिए इतना तो कहना ही पड़ता है




तुम भी तो बड़े जिद्दी हो – दुश्मन भी बेचारा क्या करे


इतने बम फोड़े – शर्म करो – तुम लोग सिर्फ दो सौ ही मरे ? (कितने बेशर्म हो तुम लोग)


चलो ठीक है – इतने कम से भी – उसका हौंसला तो बढ़ता है


और फिर – तुम भी तो आखिर १०० करोड़ हो(*) – क्या फर्क पड़ता है?


[(*) ११५ करोड़ में १५ करोड़ तो विदेशी घुसपैठिये हमने ही तो अन्दर घुसाएँ हैं वोटों के लिए]




अच्छा! समझौते की गाड़ियों में दुश्मन भी आ जाते हैं???


क्या हुआ जो दिल लग गया यहाँ – और यहीं बस जाते हैं


बेचारे – ये तो वहां का गुस्सा है – जो यहाँ पर उतारते हैं


वहां पैदा होने के पश्चाताप में – यहाँ पर तुम्हें मारते हैं (क्यों न मारें?)




क्या सोचता है तू ? मरना था जिनको – वो तो गए मर


तू तो जिन्दा है ना – तो चल – अब मरने तक हमारे लिए काम कर


और क्या औकात थी उन मरने वालों की ? सिर्फ २०० रुपये मासिक कर (*१)


हम क्या शोक करें – क्यों शोक करें अब – ऐसे वैसों की मौत पर ?




अच्छा! आतंकवादी तुम्हें लूटता है? मारता है? मजहब के नाम पर ?


पर आतंकवादी का तो कोई मजहब ही नहीं होता – कुछ तो समझा कर (बेवकूफ कहीं के)


तू सहिष्णु है – भारत सहिष्णु है – यह भूल मत – निरंतर याद कर


क्या कहा? आत्मरक्षार्थ प्रतिरोध का अधिकार? – बंद यह बकवास कर (अबे,वोट बैंक लुटवायेगा क्या)




इन बेकार की बातों में – न अपना कीमती वक्त बरबाद कर


भूल जा – कुछ नहीं हुआ – जा काम पर जा – काम कर




तेरे गुस्से की तलवार को – हमारी शांति की म्यान में रख


हमने दे दिया है ना कड़ा बयान – ध्यान में रख


जानते हैं हम – इस बयान पर – वो ना देगा कान


चिंता ना कर – तैयार है – एक इस से भी कड़ा बयान




दे रक्खा है उसे – सबसे प्यारे देश का दरजा (*२)


चुकाना तो पड़ेगा ना – इस प्यार का करजा


दुनिया भर से – कर दी है शिकायत – कि वो मारता है


दुनिया को फुरसत मिले – तब तक तू यूँ ही मर जा




किस को पड़ी है कि – कौन मरा – और मार गया कौन


आराम से मर – तेरे लिए भी रख लेंगे – २ मिनट का मौन




रचयिता : धर्मेश शर्मा


संशोधन, संपादन : आनंद जी. शर्मा

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