इस्लाम में दो तरह के अल्लाह हैं । एक वे जिसको आम देशभक्त मुसलमान अल्लाह कहता है दूसरा आदमखोर जिहादी अल्लाह जिसे जिहादी आतंकवादी अल्लाह या शैतान कहते हैं

 

 इस्लाम में दो तरह के अल्लाह हैं । एक वो जिसको आम देशभक्त मुसलमान अल्लाह कहता है  दूसरा आदमखोर जिहादी अल्लाह जिसे जिहादी आतंकवादी अल्लाह या शैतान कहते हैं    

 

इस देशद्रोही हिन्दुविरोधी गद्दारों के सेकुलर गिरोह द्वारा अल्पसंख्यकवाद व धर्मनिर्पेक्षता जैसे प्रावधानों का उपयोग जिहादियों व धर्मांतरण के ठेकेदारों के षड्यन्त्रों को आगे बढ़ाने व हिन्दूविरोध के लिए इस हद तक किया जा रहा है कि अब देश की आम राष्ट्रभक्त हिन्दू जनता में यह धारणा बन चुकी है कि अल्पसंख्यकवाद व धर्मनिर्पेक्षता जैसे प्रावधान गद्दारी व देशद्रोह के ही पर्यायवाची हैं ।


देश को बचाने के लिए इन दोनों ही प्रावधानों को यथाशीघ्र समाप्त किया जाना परम आवश्यक है नहीं तो ये देशद्रोही हिन्दुविरोधी गद्दारों का सेकुलर गिरोह अल्पसंख्यकवाद व धर्मनिर्पेक्षता की आड़ में भारतीय सभ्यता व संस्कृति को तबाह कर, न जाने देश के कितने टुकड़े और करवा देगा । जिसका परिणाम हिन्दुओं को यहूदीयों की तरह दर-दर की ठोकरें खानें या फिर मरने पर मजबूर कर देगा । क्योंकि 9वीं शत्ताब्दी में अफगानिस्तान व 20वीं शताब्दी में पाकिस्तान बांगलादेश बनने पर जो हिन्दू जिहादियों के हमलों से बच निकले वो भागकर भारत आ गये पर अगर वर्तमान भारत भी न रहा तो कहाँ जाँएगे ?

लोग कहते हैं युनान मिश्र रोमां सब मिट गये।

कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी।।

पर यह भी सत्य है कि

उस कौम का इतिहास नहीं होता।

जिसको मिटने का एहसास नहीं होता।।

संभल कर एकजुट होकर कदम उठाओ ए हिन्दूओ ।।।

बर्ना तुम्महारी दास्तान तक न होगी दास्तानों में।।।।

आओ जरा भारत में अल्पसंख्यक बनाए गए घटकों का वही खाता खंगाले। वास्तव में अल्पसंख्यक आयोग का गठन ही मुसलमानों को विशेषाधिकार देने के उद्देश्य से किया गया था । ये मुसलमान ही इस आयोग के प्रमुख नीति-निर्धारक हैं । ये मुसलमान वही है जिनके भले के लिए 1947 में संप्रदाय के आधार पर अखण्ड भारत का विभाजन करवाकर वर्तमान पाकिस्तान बांगलादेश बनाए गये जो कि मुसलमानों के लिए हैं ।

o पाकिस्तान, बांगलादेश बनाने का कारण भी कोई दबा छुपा नहीं है सबको जानकारी है कि इस्लाम एक तरफ सूफी सन्तों को जन्म देता है जो भाईचारे की बात कर, अब्दुल हमीद को जन्म देते हैं । पर उससे हजारों गुना ज्यादा इस्लाम के नाम पर ऐसी राक्षसी प्रबृतियों का जन्म होता है जो इस्लाम के सिबा और किसी विश्वास के अस्तित्व को स्वीकार नहीं करतीं। यहाँ तक जो मुस्लिम होने के बावजूद कत्लोगारद का विरोध या निन्दा करते हैं उन्हें भी काफिर कहकर मौत के घाट उतारने की पैरवी की जाती है । इसी प्रबृति की वजह से 1947 में जिहादियों ने हिन्दुओं का खून बहाकर इस देश को अपनी मातृभूमि मानने व हिन्दुओं के साथ रहने से मना कर दिया ।

o आज लगभग फिर वही स्थिति देश में बन चुकी है मुसलमानों के जिहादी प्रतिनिधियों ने वन्देमातरम् का विरोध कर भारत को अपनी मातृभूमि मानने से मना कर दिया है। सारे देश में हिन्दुबहुल क्षेत्रों व मन्दिरों में बम्ब विस्फोट कर हिन्दुओं का खून बहाकर अपने जिहादी अल्लाह को पिलाना शुरू कर दिया है ताकि बदले में ये आदमखोर जिहादी अल्लाह इनको जन्नत दे दे ।

हमें तो समझ ये नहीं आता कि जिस आदमखोर अल्लाह का पेट पूरे अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बांगलादेश, कश्मीरघाटी , गोधरा में रेल के डिब्बे व आसाम के इतने सारे हिन्दुओं का खून पीकर नहीं भरा क्या उसका पेट अब मुठी भर बचे हिन्दुओं के खून से भर पाएगा। नहीं ,ऐसा सम्भव नहीं, इसी लिए दुनियाभर के विभिन्न गैर मुस्लिमों व जहां गैर मुस्लिम न मिलें वहां पर उदार मुस्लिमों के खून से भी काम चलाना पड़ रहा है।

o इस जिहादी अल्लाह को तो मानो शांतिप्रिय हिन्दुओं के शिकार का चस्का ही लग गया है क्योंकि इस जिहादी अल्लाह ने मुहम्मदबिन कासिम के रूप में भारत में प्रवेश किया और हिन्दुओं का खून पीने लगा । उसके बाद मुहम्मदगौरी, औरंगजेब व बाबर के वक्त तो ये जिहादी अल्लाह मानो पानी की जगह भी हिन्दुओं का खून ही पीने लगा।

फिर महाराणा प्रताप,छत्रपति शिवाजी,महारानी लक्ष्मीबाई, वीर तांत्यटोपे, गुरू तेगबहादुर जी, उनके बेटे श्री गुरूगोविन्द सिंह जी व उनके चार बहादुर बेटों ने इस आदमखोर जिहादी अल्लाह के दान्त तोड़कर भारत से हिन्दुओं के खून के प्यासे आदमखोर जिहादी अल्लाह को मार भगाने की बहुत कोशिश की पर अफसोस हिन्दुओं के सैकुलर गिरोह की कबूतर की तरह बन्द आँख आज तक न खुली। कभी जयचन्द पैदा हो गये तो कभी जयचन्द के बंशज सैकुलर नेता । जो हमेशा इस आदमखोर जिहादी अल्लाह व उसके द्वारा प्रेरित जिहादियों के समर्थन में खड़े नजर आए । बाकी रणबांकुरों व वीरांगनाओं की बात तो छोड़ो इन बेशर्म धर्मनिर्पेक्षतावादियों को श्री गुरूगोविन्द सिंह जी के चार-चार बेटों के बहे लहु की भी लाज न आई ।

अब सोचने की बात ये है कि जो हिन्दुओं के खून का प्यासा है वो इनसान है या शैतानी राक्षस ? स्पष्ट रूप से शैतानी राक्षस है। उसका बंशज कहलवाने में फक्र महसूस करने वाले मुस्लिम जिहादी, सैकुलर नेता व मीडिया जो हर हाल में उसका गुणगान व समर्थन करके हिन्दुओं को मरवाने के लिए अनुकूल महौल बनाकर व अफवाहें फैलाकर हिन्दुओं को आपस में लड़बाकर, मर्यादा पुरूषोतम भगवान श्री राम के अस्तित्व को नकारकर व साध्वी प्रज्ञा सिंह जैसी बीरांगनाओं व उसके नेतृत्व में इस जिहादी अल्लाह को मिटाने के लिए संघर्षरत जवानों को जेलों में डलवाकर बदनाम करने के लिए अफवाहें फैलाकर इस आदमखोर जिहादी अल्लाह को खुश रखने का लगातार प्रयास कर रहे हैं। क्या वे हिन्दुओं के खून के प्यासे आदमखोर अल्लाह से कम हैं ?

यहाँ पर यह बात गौर करने वाली है कि इस्लाम में दो तरह के अल्लाह हैं । एक वे जिसको आम देशभक्त मुसलमान अल्लाह कहता है जो शान्ति और भाईचारे की बात करता है, सूफी सन्तों को जन्म देता है, देशभक्तों ,नमक हलालों को जन्म देता है ।


दूसरा आदमखोर जिहादी अल्लाह जिसे जिहादी आतंकवादी अल्लाह या शैतान कहते हैं जो जिहादियों को जन्म देता है जिसकी शैतानी पुस्तक में लिखा है कि गैर जिहादियों को हलाल करने से जन्नत नसीब होती है । देशद्रोह, नमक हरामी व गद्दारी जिहादियों का पहला कर्तव्य है।

यही पुस्तक 7 वीं शत्ताब्दी से आज 21 वीं शताब्दी तक भारत को लहूलुहान करती आ रही है। सुलतानों, मुगलों, औरंगजेब , बाबर, अफजल, आतिफ, अबुबशर जैसे सैतानों को जन्म देती आ रही है और हिन्दुओं का खून बहाती आ रही है भारत के टुकड़े करवाती आ रही है।

अगर मानवता भाईचारे और शांति के प्रतीक, अंतिम सांसे ले रहे, मेरे प्यारे भारत को बचाना है तो मेरे प्यारे देशभक्त नमकहलाल भारतीयों को जात-पात, ऊंचनीच, छुआछूत ,संप्रदायवाद, क्षेत्रवाद ,पार्टीवाद सब भूलाकर एकजुट होकर गुरू गुरूगोविन्द सिंह जी के मार्ग पर चलकर नमक का कर्ज चुकाकर इस आदमखोर जिहादी अल्लाह, जिहादियों व उसके कट्टर समर्थक सैकुलर गद्दारों का नामोनिशान मिटाना है ।

आज सुबह (07नवम्बर2008) हमने ये पिछला पेज लिखा और आज ही जिहादी अल्लाह के वंशज मुस्लिम जिहादियों और शांतिप्रिय मुसलमानों के बीच संघर्ष शुरु हो गया। ओसामाबिन लादेन के समर्थक मुस्लिम जिहादियों के विरूद्ध अल्लाह के वंशजों ने फतबा जारी कर दिया कि ओसामा की सोच का प्रचार प्रसार इस्लाम के विरूद्ध है ।

अल्लाह के बन्दों ने दो कदम आगे बढकर इस आदमखोर जिहादी अल्लाह के बंशज जाकिर हुसैन को व इस जिहादी द्वारा चलाए जा रहे टी वी चैनल(पीस) को मिल रहे बेशुमार पैसे की जांच करवाने की भी मांग की । भारतीयों को अमन चैन के प्रतीक अल्लाह व खूनखराबे की जड़ इस आदमखोर जिहादी अल्लाह के अन्तर को यथाशीध्र समझना होगा व अल्लाह के बन्दों का साथ देकर इस आदमखोर जिहादी अल्लाह को मिटाना होगा। नहीं तो ये सब भारतीयों को हिंसा की आग में जलाकर राख कर देगा।

आपको यह जान कर हैरत होगी कि जिस देशबिरोधी चैनल(एन डी टी वी) पर ये सब दिखाया जा रहा था उस चैनल ने अल्लाह के बन्दों का पक्ष लेने के बजाए आदमखोर जिहादी अल्लाह के जिहादी जाकिर हुसैन का पक्ष लिया ।

सोचने वाला विषय यह भी है कि जिस हिन्दुविरोधी-देशविरोधी जिहाद व धर्मांतरण समर्थक सरकार ने साध्वी व उसके देश भक्त सैनिक सहयोगियों को बिना सबूत जेल में डालने में इतनी जल्दबाजी दिखाई क्या वो सरकार इस जिहादी नासिर हुसैन के कुकर्मों को रोकने के लिए कोई कदम उठा पायेगी ?

हम वर्तमान भारत में अल्पसंख्यक आयोग की प्रासंगिकता पर बात कर रहे थे ये भारत अखण्ड भारत का वो हिस्सा है जो 1947 में अखण्ड भारत को विभाजित कर मुसलमानों के लिए दिए गये दो हिस्सों के बाद बचा है। स्वाभाविक व न्यायिक रूप से यह हिस्सा इस देश के मूल निबासियों हिन्दुओं का है जिसका सही नाम हिन्दूराष्ट्र भारत ही है । जिस किसी को भी इस नाम व हिन्दुओं के अधिकार पर आपत्ति है उसे प्राकृतिक न्याय के हिसाब से इस देवभूमि भारत में रहने का कोई अधिकार नहीं है । जो भी इस देश में रह रहा है उसे इस बात को अच्छी तरह से समझ लेना होगा कि हिन्दू संस्कृति और सभ्यता ही भारतीय संस्कृति और सभ्यता है जो खुद को हिन्दू नहीं मानता वो भारतीय कैसे हो सकता है और जो भारतीय नहीं वो यहां का नागरिक नहीं आगंतुक है उसे आज नहीं तो कल हमारी मातृभूमि को छोड़ना होगा ।

अब विचार करने वाली बात यह है कि जिन मुसलमानों को हिन्दू होने पर आपत्ति थी उनके लिए अखण्ड भारत को तोड़कर पाकिस्तान ,वंगलादेश बनवा दिए गए। जो भारत में रह गए वो सभी हिन्दू हैं फिर अल्पसंख्यक आयोग की क्या जरूरत ? अगर वो खुद को हिन्दू नहीं मानते फिर यहां रहे किस लिए और अभी भी क्या बिगड़ा है सारी सीमांयें खुली हैं, बसें जा रही हैं, जब वहां से इतने सारे घुसपैठिए-जिहादी आ रहे हैं तो इनको जाने से कौन रोकेगा ?

वैसे आज जागरूक हिन्दू एक साधारण सा प्रश्न पूछता है कि क और ख दो सगे भाई हैं क और ख के माता पिता के सिर्फ दो ही बच्चे हैं क लड़-झगड़ कर माता पिता के रहते ही अपना हिस्सा अलग करवा लेता है अब माता पिता की मृत्यु होने पर बाकी का हिस्सा किस्का है ? सीधा सा उत्तर है ख का ।

वैसे हिन्दू द्वारा ये प्रश्न पूछना भी उसकी उदारता का ही प्रतीक है क्योंकि जिन जिहादीयों से ये प्रश्न पूछा जा रहा है वो तो आक्राँता है भारत उसका मूल निबास नहीं बल्कि उपनिबेस था जिसका विभाजन करवाकर उसने तीन(अफगानिस्तान,पाकिस्तान,वंगलादेश) हिस्सों को हमेसा के लिए अपना उपनिवेश बना लिया ।अब इन जिहादीयों को चाहिए कि अपने उपनिवेश में रहकर जो मरजी करें और वर्तमान भारत को न छेड़ें क्योंकि अगर जागरूक हिन्दुओं व उनके संगठनों की तरह कहीं गलती से भी इस हिन्दुविरोधी देश विरोधी जिहाद व धर्मांतरण समर्थक सैकुलर गिरोह में शामिल हिन्दुओं को भी अगर भारतीय संस्कृति और सभ्यता के विरोधी आदमखोर जिहादी अल्लाह व जिहादियों की असलिएत समझ में आ गई तो भारत तो भारत बाकी के तीन हिस्से भी इन जिहादियों को खाली करने पड़ सकते हैं ।

अब आप ही फैसला करो कि जिस इस्लाम ने अखण्ड भारत पर हमला कर कब्जा कर लिया, हिन्दुओं पर बेपनाह जुलम ढाये, संस्कृति और सभ्यता को नष्ट करने का हर सम्भव प्रयास किया, शांति और भाईचारे के प्रतीक हजारों मन्दिर तोड़े, अन्त में देश का विभाजन करवाकर उसके बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया । क्या वह इस्लाम उस अखण्ड भारत के बचे हुए छोटे से हिस्से वर्तमान भारत में अल्पसंख्यक का दर्जा पाने का हकदार है ?

o अब रही बात उन मुसलमानों की जो अल्लाह को तो मानते हैं पर आदमखोर जिहादी अल्लाह को नहीं मानते । ऐसे शांतिप्रिय देशभक्त नमकहलाल मुसलमान जो इस देश को अपनी मातृभूमि मानते हैं को अल्पसंख्यक कहना उनका अपमान है क्योंकि अपनी मातृभूमि में कोई अल्पसंख्यक कैसे हो सकता है। अब आप ही बताओ अल्पसंख्यक आयोग की क्या जरूरत है ?

आओ अब अल्पसंख्यक आयोग के दूसरे घटक ईसाईयों की बात करें । यह वही संप्रदाय है जो 16 वीं सदी में ब्यापार के बहाने भारत पर कब्जा जमाकर बैठ गया और 300 वर्ष तक इन ईसाईयों ने इस देश को जमकर लूटा । यहां के मूल निबासी हिन्दुओं व कई वर्षों से कब्जा जमाकर बैठे मुसलमानों पर इन ईसाईयों ने जी भरकर जुल्म ढाए । ये तो भला हो शहीद भगत सिंह, शहीद राजगुरू, शहीद सुखदेव, शहीद चन्दरशेखर आजाद, शहीद बाल गंगाधर तिलक , शहीद लाला लाजपतराय, शहीद विपन चन्द्र पाल जैसे अनगिनत ज्ञात और अज्ञात क्रांतिकारियों का जिनके बलिदानों ने भारतीयों के अन्दर इन अंग्रेजों को भगाने की ज्वाला को हमेसा जगाए रखा और अन्त में नेताजी सुभाष चन्द्रवोस की आजाद हिन्द सेना के डर से इन अंग्रेज ईसाईयों को भारत छोड़ कर भागना पड़ा।

क्या कहें उस नेहरू जी को जिसने दुष्ट ईसाई अफसरों व उनकी घरबालियों की दोस्ती में फंस कर उनकी नजायज बातों को मान कर देश को एक ऐसी हिन्दुविरोधी दिशा देने का अपराध किया जो आज देशद्रोहियों व गद्दारों को भारतीय संस्कृति व सभ्यता के रक्षक देशभक्त हिन्दुओं और उनके संगठनों पर हर तरह से हमला करने में सहयोग दे रही है । अब आप खुद फैसला करो कि ये ईसाई समुदाय जो भारत की बरबादी के लिए हर तरह से जिम्मेवार है क्या अल्पसंख्यक का दर्जा पाने के काबिल है ? नहीं न ।वैसे भी जिस ईसाई संप्रदाय से सबन्धित अंग्रेज इटालिएन एंटोनियो माइनो मारियो सारी की सारी भारत सरकार को गुलाम बनाकर बैठी हो व जिसके निर्देश पर गुलाम सरकार देशद्रोह के रास्ते पर चलते हुए देशभक्त साधुसंतो व सैनिकों को जेल में डाल रही हो, भारतीय संस्कृति व सभ्यता के आधार स्तम्भ मर्यादा पुर्षोतम भगवान श्री राम के अस्तित्व को नकार रही हो उस संप्रदाय को अल्पसंख्यक का दर्जा देना कैसे उपयुक्त हो सकता है ?

मेरे प्यारे नासमझ हिन्दूओ क्या आपने कभी सोचा कि जिनके आप गुलाम रहे, जिन्होंने असहनीय यातनांयें देकर हिन्दुओं को सताया, हिन्दुओं को हर अधिकार से वंचित किया, आज वो ही इन गद्दार हिन्दुविरोधी नेताओं द्वारा अल्पसंख्यक का दर्जा देकर विशेषाधिकार के अधिकारी कैसे वना दिए गए।

जिस मजहब का संचालन आज भी भारत के बजाए इटली के रोम से होता हो ,जिस संप्रदाय के अनुयायी हिन्दुओं के धार्मिक गुरू व समाज सेवक स्वामी लक्ष्मणानन्द जी का कत्ल करने का दुस्साहस कर सकते हों । इसके परिणामस्वरूप पड़ी मार पर संसार के अधिकतर ईसाई देशों में हिन्दुओं के विरूद्ध महौल बनाने व भारत विरोधी प्रदर्शन करवाने में समर्थ हों उन्हें अल्पसंख्यक दर्जे की क्या जरूरत ?

ये लेख हमने मंबई हमले से पहले भारतभर में मुसलिम आतंकवादियों द्वरा किए जा रहे हमलों के दौरान लिखा था। विना किसी पूर्वागरह से ।एक तरफ हमारी नजर में  मुसलिम आतंकवादीयों और उनके समर्थकों का बहुमत था  तो दूसरी तरफ  वो मुसलिम जो कभी अलगाववाद की न वात करते हैं न समर्थन।

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One Comment

  1. Diwakar
    Posted अप्रैल 8, 2010 at 4:32 अपराह्न | Permalink | प्रतिक्रिया

    आपके आलेख के कथ्य से पूरी तरह सहमत.

आपके कुछ न कहने का मतलब है आप हमसे सहमत हैं

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