क्यों नहीं देते आप राय इस तरह के लेखों पर ?

क्यों नहीं देते आप राय इस तरह के लेखों पर ?

आप सब देख रहे हैं कि भारत में एक गिरोह ऐसा पैदा हो गया है जिसका एकमात्र उदेशय शांतिप्रिय-देशभक्त भारतीयों को लहूलुहान करने वाले आतंकवादियो को सही ठहराना है। ये आतंकवादी चाहे चीन समर्थक वामपंथी आतंकवादी हों या फिर पाक समर्थक मुसलिम आतंकवादी या फिर रोम समर्थक ईसाई आतंकवादी। इन आतंकवादियों द्वारा जब भी भारत की असमिता पर प्रहार किया जाता है तो ये गिरोह सक्रियता से ये सुनिश्चित करने में लग जाता है कि न तो भारतीयों को इन आतंकवादियों की गद्दारी का पता चले न सरकार इनके विरूद्ध कोई निर्णायक कार्यवादी कर पाये। परिणामस्वारूप भारत में देश के दुश्मन इन आतंकवादियों द्वरा की जा रही हिंसा लगातार बढ़ती जा रही है। इन आतंकवादियों के विरूद्ध कार्यावाही तो दूर की बात कोई देशभक्त संगठन इनकी गद्दारी को उजागर करने वाला ब्यान तक नहीं दे सकता क्योंकि जैसे ही कोई देशभक्त संगठन या सरकारी अधिकारी इन आतंकवादियों के विरूद्ध कोई जनता को जागरूक करने वाला ब्यान देता है तभी इन आतंकवादियों के समर्थकों का यह गिरोह सक्रिय होकर उस ब्यान देने वाले देशभक्त को घेरना शुरू कर देते हैं।

इस गिरोह के इसारे पर समाचार चैनल चर्चा-परिचर्चा आयोजित करते हैं ।जिसमें एक देशभक्त को घेरने के लिए तीन-चार लोग इस गिरोह से सबन्ध रखने वाले बुलाए जाते हैं। इस गिरोह के लोग वारी-वारी से भारतीय संस्कृति, देशभक्त संगठनों व सुरक्षावलों पर आरोप लगाते हैं फिर वारी आती है उस एक देशभक्त द्वरा आरोपों का जबाब देने की तो ये सब इस गिरोह से जुड़े लोग एंकर सहित उस पर टूट पड़ते हैं उस देशभक्त( वेचारे जी पार्थसार्थी जी) को अपना पक्ष तक ठीक से रखने का मौका नहीं दिया जाता ।अन्त में एंकर द्वरा निष्कर्ष निकाल दिया जाता है कि आतंकवादी जो भी कर रहे हैं ठीक कर रहे हैं सरकार को उनके विरूद्ध कार्यवाही करने के बजाए उनका विरोध करने वाल संगठनों पर कार्यावाही करनी चाहिए व ये सुनिश्चित करना चाहिए कि सुरक्षावलों पर इतने प्रतिबन्ध लगा दिए जायें कि चाहे जितने मर्जी जवान शहीद हो जायें पर आतंकवादियों पर आंच न आने पाये।

दुख के साथ कहना पड़ता है कि हर वार सरकार इनके दबाब में आकर कुछ न कुछ कदम ऐसे उठा देती है जो इन आतंकवादियों का हौसला बढ़ाने वाले सिद्ध होते हैं। सरकार ने आज की तारीक में सुरक्षवलों पर इतने प्रतिबन्ध लाद दिए हैं कि जब कभी भी जहां कहीं भी आतंकवादियों का सुरक्षाबलों से सामना होता है तो इसमें आतंकवादियों से कहीं अधिक सुरक्षबल मार दिए जाते हैं। अगर सुरक्षाबल आतंकवादियों को विना नुकसान उठाये मारने में सफल हो जाते हैं तो उस मुठभेड़ को फर्जी करार दे दिया जाता है अगर शहीद होने वाले  सैनिकों की संख्या मरने वाले आतंकवादियों से कम हो तो भी लड़ाई को फर्जी करार दे दिया जाता है। मतलब ये गिरोह तभी खुश होता है जब भारतीय सुरक्षावलों को ज्यादा से ज्यादा नुकशान हो। मतलब इस गिरोह की बफादरी भारत के प्रति न होकर भारत के शत्रुओं के प्रति ही रहती है फिर ये शत्रु चाहे चीन समर्थक वांमपंथी आतंकवादी हों या फिर पाक समर्थक मुंसलिम आतंकवादी या फिर रोम समर्थक ईसाई आतंकवादी ।

अब आप सोचेगें कि जब ये गिरोह इतना सबकुछ सरेआम कर रहा है तो फिर देशभक्त लोग इस गिरोह से जुड़े लोगों को खत्म क्यों नहीं कर देते। बस समस्या यहं पर है कि ये गिरोह कभी खुद को धर्मनिर्रपेक्षता के चोले में लपेट लेता है तो कभी मानवाधिकार के चोले में तो कभी पत्रकार के चोले में तो कभी एनजीओ के चोले में । ये गिरोह अपनी असली पहचान जनता के सामने उजागर ही नहीं होने देता ।क्योंकि इस गिरोह के मालिक सीमा पार हैं और वो सब भारत को नुकसान पहुंचाने के मुद्दे पर एकमत हैं इसलिए इस गिरोह की पहुंच संसार की बहुत सी ऐसी संस्थाओं तक है जो अपने आप को उसी तरह के चोलों में लपेट कर भारत को नुकशान पहूचाने के लिए भारत सरकार पर अपने-अपने देशों की सरकारों के माध्यम से दबाब बनाती हैं। ऐसा देखा गया है कि अक्सर भारत सरकार इन विदेशीयों के दबाब में आ जाती है फिर वो चाहे किसी भी दल की हो। परिणाम स्वारूप जिस गिरोह पर प्रतिबन्ध लगाकर सरकार को उससे जुढ़े लोगों को फांसी पर लटकाना चाहिए सरकार उसको बढ़ावा देने पर मजबूर होती है और कई वार तो उन्हीं संस्थाओं के साथ खड़ी नजर आती है।

अब प्रश्न यह पैदा होता है कि समाधान क्या है ।समाधान मुस्किल ही नहीं असम्भव भी दिखता है यदि हम जागरूक नहों तो । इस गिरोह से सक्रियता से जुड़े गद्दारों की संख्या बहुत कम है मतलब बड़ी मुस्किल से 1-3 हजार पर इस गिरोह की पकड़ क्योंकि सरकार व संचार साधनों पर अधिक है इस बजह से एक बड़ा बर्ग जो संचार साधनों का उपयोग करता है वो इस गिरोह के प्रति न केवल सहानुभूति रखता है पर उसे ऐसा भी लगता है कि ये गिरोह ठीक कर रहा है । क्योंकि अगर एक झूठ को सौ वार दोहराया जाए तो वो फिर झूठ  झूठ नहीं लगता । ये गिरोह तो एक झूठ को हजार वार दोहराता है कभी सराकर के माध्यम से कभी समाचार चैनलों के माध्यम से तो कभी समाचार पत्र पत्रिकाओं के माध्यम से । परिणामस्वारूप झूठ का एक ऐसा तानावाना वन जाता है जिसमें एक जागरूक बुद्धिजीवी भी उल्झ कर रह जाता है आम जनता द्वरा इस षडयन्त्र को विना किसी प्रयत्न से समझना लगभग नामुमकिन  है।

इस गिरोह को निपटाने के लिए तीन स्तर पर काम करना पढ़ेगा ।पहला ऐसा जनमत त्यार करना जो इस गिरोह के प्रभाव में रहने वाली सरकार न चुने । दूसरा अपने लेखों व भाषणों के माध्यम से जनता के सामने इसके एक-एक षडयन्त्र को उजागर करना। तीसरा जगह-जगह BTF के विचारों से सहमति ऱखने वाले लोगों से सम्पर्क कर इस गिरोह से सबन्धित गद्दारों को चुन-चुन कर निशाना वनाना। BTF से सबन्धित कार्यकर्ताओं को ऐसे गद्दारों की सूचना स्थनीय पुलिस को देने व उनके विरूद्ध कड़ी कार्यावाही सुनिश्चित करने के निर्देश जारी हो चुके हैं। हम सबको सिर्फ इतना करना है कि अपने जिले में इस दिशा में काम कर रहे देशभक्त संगठनों के कार्यकर्ताओं को संगठित कर इन गद्दारों को ठिकाने लगाने की योजना स्थानीय स्तर पर वनाकर अन्जाम देनी है संचार साधनों से दूर रहकर । संचार साधनों को उपयोग हम सिर्फ बैचारि विजय के लिए करेंगें । आप सब देशभक्तों से आशा है कि आप अपने –अपने स्तर पर अपनी-अपनी समर्थय के अनुशार इस गिरोह का पर्दाफास कर अपने देश को इस गिरोह के चुंगल से मुक्तकर आये दिन होने वाली हिंसा से मुक्त करेंगे।

अन्त में हम आपसे सिर्फ इतना कहेंगे कि हत्यारों का समर्थन करने वाल यह गिरोह विदेशीयों व देशद्रोहियों के टुकड़ों पर पलने वाला वो आसतीन का सांप है जिसका फन अगर आज न कुचला गया तो ये गिरोह हर देशभक्त शांतिप्रिय भारतीय का जीना हराम कर देगा। इस गिरोह का हर कदम देश में हिंसा-प्रतिहिंसा को बढ़ावा दे रहा है। आओ मिलकर इस गिरोह का पर्दाफास कर इसके खातमे का प्रण करें।

या फिर आप ही बताओ कि न आसतीन के सांपों का क्या करें ?        

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