Monthly Archives: मई 2010

BREAKING NEWS:-दिल्ली के पांच सितारा रैडिसन होटल से इटालियन आतंकवादी हथियारों सहित पकड़े गए!

BREAKING NEWS:-दिल्ली के पांच सितारा रैडिसन होटल से इटालियन आतंकवादी हथियारों सहित पकड़े गए!

 

मरे प्यारे हिन्दूओ ,समझदार हिन्दूओ,मानबता के नाम पर अनजाने में आतंकवादियों के ठेकेदार बन चुके सैकुलर हिन्दूओ हम आपतक लगातार जानकारी पहूंचानी की कोशिस कर रहे हैं ताकि आप सब अपने देश की रक्षा के प्रति जागरूक होकर देश के शत्रुओं से लड़ने के लिए एक जुट हो जायें।आज हम और आप जिस गलत जानकारी का सिकार होकर अपनी जड़ों को खोदने के षडयन्त्रों का जाने अनजाने साथ दे रहे हैं वो कही हमरे हालात उन यहूदियों की सरह न कर दे जो हमारी तरह देश के प्रति लापरवाह रहे लेकिन जब वो वेघर हो गए तब जाके उन्हें एहसास हुआ कि अपना देश होने का मतलब होता है सुरक्षा और समृद्धि। आज हर यहूदी एकजुद होकर अपने चारों तरफ फैले शत्रुओं से लड़ने में इसलिए कामयाब है कि उनमें मानबता के नाम पर आतंकवादियों की मदद करने वाला कोई सेकुलर बौद्धिक गुलाम नहीं जो आतंकवादियों का साथ देकर अपनों लहू बहाने में आन्नद का एहसास करे ।हम समझते हैं कि हमारे बहुत से हिन्दू सेकुलर गिरोह से अनजाने में जुड़े हैं इसीलिए वार-वार उनको इस गिरोह की असलियत बताने का प्रयत्न कर रहे हैं। खैर आज के विषय पर आते हैं

आज भारत देश के शत्रु मुसलिम,ईसाई व माओवादी आतंकवादियों का गढ़ बनता जा रहा है।

 

·       आज ही दिल्ली के पांचसितारा रेडिसन होटल से इटालियन आतंकवादियों को हथियारों सहित पकड़ा गया।

 

·       मुंबई हमले के दौरान हमारे कुछ इमानदार कसटम अधिकारियों ने FBI के एजंटो को जासूसी के उपकरणों सहित पकड़ा था।

 

·       अभी कुछ दिन पहले केन्द्र सरकार ने FBI के इसारे पर अंडेमान में तैनात सैनिक अधिकारी को गद्दार घोषित करने की हिमाकत की।

 

·       तहवुर राणा-हेडली प्रकरण ने सिद्ध कर दिया कि भारत में आतंकवादी घटनाओं को अंजाम देने में मुसलिम व ईसाई अमेरिकी एजेंट सक्रिए हैं।

 

·       मुंबई हमले के दौरान ही आतंकवादी हमलों को अनजाम देने के वाद जानकारी देने के Email करने के लिए एक अमेरिकी को गिरफतार किया गया था।मतलब वो इस बात का प्रमाण था कि ये अमेरिकी किसी और संगठन के नाम से बम्ब हमलों की जिम्मेवारी ले रहा था।

 

·       कुछ महीने पहले ही कुछ अंग्रेजों को इंदरा गांधी हबाई अड़े की रेकी करते हुए पकड़ा गया।   

 

·       इटालियन एजेंट हथियार तस्कर व राजीब गांधी जी की हत्या के संदिग्ध इटालियन क्वात्रोची के पहले तो कानून मन्त्री हंसराज भारद्वाज जी को लंदन भेज कर बोफोर्स दलालीकांड के पैसे छुड़वाए गए व वाद में उसके उपर से ,देश की इज्जत वोले तो इटालियन एंटोनियो माईनो मारियो की इज्जत का हबाला देकर, सारे आरोप हटा लिए गए।

 

·       अभी संसद के पिछले सत्र जहां एक तरफ अमेरिका के इसारे पर भारतीयों की जान-माल को खतरे में डालने वाले भारत विरोधी परमामु सुरक्षा विल को पास करवाने की कोशिस की गई तो दूसरी तरफ हिन्दूओं को आपस में लडवाकर गृहयुद्ध के हालात पैदा करने के लिए जाति अधारित विभाजनकारी जनगणना का जिन वोतल से बाहर निकाल दिया गया।

 

जितनी भी घटायें हमने लिखी हैं ये सब देशद्रोह या यूं कहें देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने की घटनायें हैं लेकिन इन सब पर गद्दारों की सेकुलर सरकार ने कोई न कोई बहाना बनाकर पर्दा डाल दिया।

 

जहां एक तरफ देशभर में  आतंकवाद फैलाकर मारकाट मचाने वाले मुसलिम व ईसाई आतंकवादियों को बचाने का हर प्रयत्न पूरी वेशर्मी से ये सरकार कर रही है वहीं दूसरी तरफ देश की रक्षा की खातिर अपनी जान जोखिम में डालकर

 

आतंकवादियों से लोहा लेने वाले सैनिकों , पुलिस अधिकारियों व अन्य देशभक्तों को झूठे आरोप लगाकर विना किसी प्रमाण के बर्षों तक जेल में रखकर आतंकवादी सिद्ध करने की कोशिश की जा रही है।

 

आप सब बुद्धि के सागर हैं इसलिए ज्यादा न लिखते हुए आपसे हम इतना ही कहेंगे कि उपरलिखित सब घटनाओं से मतलब साफ है कि जो देश की सुरक्षा के लिए अपनी जान तक न्यौछावर करने को त्यार हैं वो देश के सिफाही या यू कहें देश के क्रांतिकारी इस गद्दारों की सरकार के लिए आतंकवादी हैं व जिन्हें माननीय सर्वोच नयायलय भारतीयों के कत्ल के जुल्म में फांसी की सजा सुना चुका है वो गद्दारों की इस सेकुलर सरकार के लिए क्रांतिकारी हैं।

अन्त में इतना ही कहेंगे

 

एकजुट होकर देशहित में बढ़ा कदम उठाओ ऐ हिन्दूओं

वरना तुम्महारी दासतां तक न होगी दास्तानों में

आखिर कब तक मुसलमान इस तरह पुलिस की ज्यादतियों का सिकार होते रहेंगे?

आखिर कब तक मुसलमान इस तरह पुलिस की ज्यादतियों का सिकार होते रहेंगे?

आज शुबह शुबह हम वाराणशी पहुंच गए वो भी नइ सड़क रोड़ पर।हमें लगा कि जो हमने देखा उसे आप तक कोई और पहुंचाये तो क्यों न हम ही पहले वाजी मार लें क्या पता इसी चककर में पोस्ट हिट हो जाये।

हमने सुना था कि वाराणसी गंगा-जमुनी संसकृति का प्रतीक है जिसे मुसलिम भाईयों ने हर कुर्वानी लेकर जिन्दा रखा है अभी हाल ही में इन मुसलिम भाईयों ने हनुमान मन्दिर की कुर्वानी लेकर इसी गंगा-जमुनी तहजीब को आगे बढ़ाने का अपनी तरफ से एक बड़ा प्रयास किया।जो कसर रह गई थी उसे मुसलिम भाईयों ने बंगलादेशीयों के साथ मिलकर हर सड़क किनारे,चौराहे व भीड़भाड़ वाली जगह की कुर्वानी ली उस पर   अपने आसियाने व दुकानें खोलकर वो भी इसी तहजीब की खातिर।ये काम मुसलामन सिर्फ काशी में ही थोड़े कर रहे हैं सारे भारत में पूरी लगन से ये अपने इस काम को जाम दे रहे हैं। लोग इसे नजायज कब्जा बताते हैं,हम कहते हैं कि जब प्रधानमन्त्री मनमोहनखान कह चुके हैं कि देश के संसाधनों पर पहला अधिकार मुसलमानों का है तो फिर नजायज कब्जा कैसा।जो लोग इसे नजायज कब्जा बताते हैं उन्हे सरियत व संविधान की जानकारी नहीं।आखिर संविधानन ने ही तो मुसलमानों को शरीयत व कुरान शरीफ का पालन करते हुए चार-चार शादियां कर 30-40 बच्चे पैदा करने का अधिकार दिया है।अब जब ये संविधान के अनुसार जीबन जी कर देश से इतनी छोटी सी कुर्वानी ले रहे हैं तो फिर इनके बच्चों के पालन पोषण व रोजगार की जिम्मेदारी भी संविधान वोले तो देश वोले तो हिन्दूओं की ही हुई न ।अब जब उन्होंने देश की कुर्वानी की खातिर इन बच्चों को पालने के लिए सड़क पर कब्जा कर अपने आसियाने व दुकानें बना ली तो फिर प्रसासन को तो इन्हें विजली पानी उपलब्ध करवाने की ब्यबस्था करनी चाहिए थी सड़क तो है ही । बैसे भी आप बताओ कि सड़कों पर पूंजीवादियों के बाहन चलाने जरूरी हैं या फिर इन बेचारे गरीबों का भरण-पोषण व आसियाना बनाना। आज शुबह-शुबह जब हमने देखा कि ये वेचारे अपने आसियाने की रक्षा के लिए जब पुलिस पर सिर्फ पत्थर ही बरसा रहे थे तो पुलिस ने इन पर फूल वरसाने के बजाए लाठी चार्ज कर दिया। हमें एकदम एहसास हो गया कि पुलिस सांप्रदायिक ताकतों वोले तो वीएसपी वोले तो हिन्दूओं के इसारे पर काम कर रही हैं ।अगर पुलिस इसी तरह इन्हे सड़कों ,चौराहों व हिन्दूओं की जमीनों पर कब्जा करने से रोकेगी तो भला कौन मुसलमान या सेकुलर हिन्दू ये सब बरदाश कर पाएगा।जिस दिन मनमोहन खान को ये पता चला कि पुलिस ने इन वेचारे मुसलिम भाईयों के साथ ऐसा सलूक किया है उस दिन वो 36 हॉंडग्रनेड व 12 AK47 रखने वाले वेचारे मुसलिम भाई सोराबुद्दीन को मारने वाले गुजरात के पुलिस अधिकारियों की तरह इन्हें भी जेल में डाल देंगे CBI वोले तो कांग्रेस ब्यूरो आफ इनवेसटीगेशन का उपयोग कर।तब होश ठिकाने आयेंगे इस सांप्रदायिक मुख्यामन्त्री के।

अन्त में आखिर कब तक वेचारे मुसलमान इस तरह पुलिस की ज्यादतियों का सिकार होते रहेंगे?

बुझो तो जानो—–कशमीर घाटी व आसाम में भारी सफलता के बाद अब हैदराबाद में।—बताओ हम कौन हैं?

बुझो तो जानो—–कशमीर घाटी व आसाम में भारी सफलता के बाद अब हैदराबाद में।—बताओ हम कौन हैं?

हम बहुत महान हैं इतने महान कि हम हमारा समर्थन करने वालों का बहिस्कार कर उनका खातमा सुनिश्चित कर अपने सत्रुओं को हमारे पर विना किसी रोक-टोक के हमला कर तबाह करने का मौका दे देते हैं ताकि हमारे शत्रुओं को हम पर विजय पाने में किसी असुविधा का सामना न करना पड़े। क्या आपको जानकारी है कि ये हमारा ही सहयोग था जिसके परिमामसवारूप हम पहले अफगानीस्थान से ,फिर पाकिस्तान व बंगलादेश से खदेड़े गय। विभाजनजन के वाद भी हमने अपनी महानता नहीं छोड़ी ।हमने अपने खात्मे के लिए कसमीर घाटी में भी अपनी महानता का परिचय देते हुए मुसलिम आतंकवादियों को हर तरह का सहयोग देकर अपना समूलनाश सुनिश्चित किया।क्योंकि हमारी सेना अब तक बहुत ताकतबर हो चुकी थी इसी ताकत का फयदा उठाकर कहीं वो हमारा विनाश चाहने वाले मुसलिम आतंकवादियों का नाश न कर दे इसीलिए हमने अपनी सेना पर इस तरह के प्रतिबन्द लगाय कि सारी की सारी सेना देखती रह गई और हमने कशमीघाटी को खुद से मुक्त करवा दिया।इसी महानता के चलते हमने आसाम में ऐसे कानून बनाए कि वहां भी हमने मुसलिम आतंकवादियों की विजय सुनिश्चित कर दी है।गुजरात में हमारे कुछ मूर्खों की बजह से मुसलिम आतंकवादियों को विरोध का समाना करना पड़ा इसलिए हमने उन मुर्खों के कहने पर आतंकवादियों के खात्मे के लिए काम करने वाले पुलिस अधिकारियों व जवानों को जेल में डाल दिया ताकि कोई और पुलिस वाला हमारी रक्षा करने का साहस न कर सके।हमने मुंबई में अपने लोगों को मारने वाले अपने मुसलिम आतंकवादियों आतंकवादियों के लिए क्या नहीं किया ।अन्त में हमने हर तरह के प्रयास कर इन्हें बचा ही लिया। सारे देश में हमें जिस तरह की सफलता मिल रही है उसे देखते हुए अब हमने हैदरावाद में पुलिस चौकी पर हमला करने वाले हमारे मुसलिम भाईयों को बचाने की अपनी कोशिस सुरू कर दी है ।भगवान ने चाहा तो यहां भी हम किसी हिन्दू को उठाकर जेल में डालकर अपने इन मुसलिम भाईयों का जुल्म उनके सिर डालकर अपने मुसलिम भाईयों को बचा ही लेंगे।क्या आपको पता नहीं किस तरह हमने झूठे आरोप लगाकर हमारी रक्षा की बातें करने वाली प्रज्ञा सिंह ठाकुर,लैफ्टीनैंट कर्नल पुरोहित को जेल में डालकर मकोका लगाकर  ये सुनिश्चित किया कि वो जेल से न छूट पायें । वेशक मकोका कोर्ट के कुछ मूर्ख जजों ने उन पर से मकोका हटा दिया पर हमने उन्हें जेल से नहीं छोड़ा।देवेन्द सिंह व चन्द्रशेखर के साथ भी हम यही सलूक करने वाले हैं।

देखा न हम कितने महान हैं ।

बस अब जरा ये बता दो कि अपनों का विनाश सुनिश्चिक करने वाले हम कौन हैं?

 

 

टिप्पणी मत करना सत्य लगे तो छाप लेना अपने बलाग पर मिलबटखोरी पर लिखी इस कबिता को

टिप्पणी मत करना सत्य लगे तो छाप लेना अपने बलाग पर मिलबटखोरी पर लिखी इस कबिता को

 

हम आज बौद्धिक आतंकवाद के आगे इतने मजबूर हो गए हैं कि सही गलत में अन्तर करना भूलते जा रहे हैं हम इस कबिता पर आपके समर्थन की कतई उम्मीद नहीं करते फिर भी लिख रहे हैं दिल की भड़ास निकालने के लिए ।अब तो ये स्वीकारने में भी डर लगता है कि हमने भी कभी प्यार कर शादी की थी।प्यार को इस कदर बदनाम कर दिया है इन बासना के भेड़ियों ने।हम समझते हैं कि बासना को नियंत्रित करना अगर असंमभब नहीं तो बहुत मुसकिल जरूर है वो भी तब जब इसे कोई भड़काये न लकिन जब हर वक्त ये बौद्दिक आतंकवादी हर वक्त बासना को भड़का रहे हैं परिणामसवारूप कहीं प्रेमी का तो, कहीं प्रेमिका का तो कहीं सारे परिबार का आये दिन खून बहाया जा रहा है बेशक घोर कलयुग है पर पिर भी हम आने वाली पिड़ीयों को बचाने की खातिक इतना तो कर ही सकते हैं

जो Sex को जो प्यार का नाम दे देते हैं वही तो अपनी मासूक को सबकी निगाह में गिराह देते हैं।

मासूक तो आसिक की आन वान शान होती है पर जीवन भर साथ निभाने की बात ही तो Sex को प्यार का नाम देने वालों के जी का जंजाल होती है।।

मासूक तो आसिक की निगाहों में मन तन में सारा जहान होती है पर प्यार को Sex का नाम देने वालों के लिए तो वो सिर्फ शारीरिक शोषण की खान होती है।

 

मासूक पर आसिक तो जान देते हैं पर प्यार को Sex का नाम देने वाले ही तो उसको शादी का लालच देकर शादी से पहले गर्भवती बनाकर जीते जी मार देते हैं।।

Sex को जो प्यार का नाम देते हैं वही तो भीख को दहेज के नाम से मांग लेते है रिश्पत को सिर्फ लेन देन कहकर चोरबजारी को व्यापार कहकर वेशर्मी से अंजाम दे देते हैं।

हम पूछतें हैं इन प्यार के दुशमनों से कि अगर Sex ही प्यार है तो फिर क्यों न ये प्यार की जगह Sex की बात कर खुद को प्रेमी कहने के बजाए ब्याभिचारी या बलात्कारी कहकर सच्चाई को मान लेते हैं।।

ये वही हैं जो आटे में रेत और भूसा मिला देते हैं मिर्चों में लाल रेत और दालों में पत्थर मिलाकर भोली-भाली जनता को वेवकूफ बना देते हैं ये वही हैं जो Sex को जो प्यार का नाम दे देते हैं।

हल्दी में ये पीला रंग मिलाकर पकड़े जाने पर इसे व्यापार कहकर अपनी झूठी शान बचा लेते हैं। ये वही हैं जो Sex को जो प्यार का नाम दे देते हैं।।

ये वही हैं जो पुलिस में भर्ती होकर भी चोर का साथ देते हैं मीडिया में बैठकर ये आतंकवादियों को हीरो बना देते हैं ।

कुलमिलाकर Sex को जो प्यार का नाम देते हैं वही हर तरह के भ्रष्टाचार को अंजाम दे देते हैं।।

ये वही हैं जो PWD में नौकरी लगने पर सीमेंट निर्माण में लगाने के बजाए बाजार में बेचकर लोगों की जान ले लेते हैं। ये वही हैं जो Sex को जो प्यार का नाम दे देते हैं।

डाक्टर बन कर कमीशन के बदले घटिया दवाई खिलाकर खुद को भगवान मानने वालों को मौत की नींद सुला देते हैं ये वही हैं जो Sex को प्यार का नाम दे देते हैं।।

Sex को जो प्यार का नाम देते हैं वही तो अध्यापक बनकर बच्चों को संस्कृति व आत्मउत्थान की जगह ब्याभिचार और आत्मगलानि का पाठ पढ़ा देते हैं।

Sex को जो प्यार का नाम देते हैं वही तो चंद टुकड़ों के बदले देश के दुशमनों के हाथों बिककर अपने हमवतनों को मौत की नींद सुला देते हैं।।

Sex को जो प्यार का नाम देते हैं वही तो जिन्दगीभर मां-बाप की सेवा की जगह मां-बाप को वृद्धा आश्रम में छोड़कर Mother Day और Father Day की नई रीत चलाकर अपनी मक्कारी छुपा लेते हैं।

ये वही हैं Sex को जो प्यार का नाम देकर बिनब्याही को मां बनाकर उसे जीते जी मार देते हैं।।

ये वही हैं जो लूट-खसूट का पाठ लेन-देन के नाम से।

भीख का पाठ दहेज के नाम से।।

देशद्रोह का पाठ मजबूरी व गरीबी के नाम से।।।

शिक्षा के बहाने पढ़ा देते हैं ।।।।

ये वही हैं जो Sex को प्यार का नाम देकर बिनब्याही को मां बनाकर उसे जीते जी मार देते हैं।

ये वही हैं जो देशद्रोह को धर्मनिर्पेक्षता का नाम देकर देश में गद्दारी की एक नई रीत चला देते हैं ये वही हैं जो Sex को जो प्यार का नाम दे देते हैं।।

आओ मिलकर इन इन मिलाबटखोरों का पर्दाफाश कर प्यार को प्यार ही रखकर फिर से प्यार की प्यारी सी रीत को बहाल इन Sex को प्यार का नाम देने वाले मानबता के इन शत्रुओं को नकेल डालें

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

भारत के आंतरिक मामलों में अमेरिका का सीधा हस्तक्षेप हमें बर्दाश नहीं क्या आपको स्वीकार है?

भारत के आंतरिक मामलों में अमेरिका का सीधा हस्तक्षेप हमें बर्दाश नहीं क्या आपको स्वीकार है?

 

हम एक लम्बे समय से कह रहे हैं कि सेकुलर गिरोह की सरकार भारत के सुरक्षा हितों के साथ विदेशी ताकतों के इसारे पर नुकसान पहंचा रही है जिसके प्रमाण हम आपको दे रहे हैं । इसी कड़ी में एक और प्रमाण सामने आया है कि अमेरिका ने भारत को बताया अंडेमान में तैनात भरत का एक सैनिक अधिकारी गद्दार है अब प्रश्न ये उठता है कि कहीं ऐसा तो नहीं कि ये अधिकारी अमेरिकी खुखिया ऐजेंसीयों को वो सूचनायें देने से मना तो नहीं कर रहा था जो अमेरिका चाहता है।हम अच्छी तरह जानते हैं कि अमेरिका एक ऐसा ईसाई देश है जो अपने राष्ट्र के हित व ईसाईत के प्रचार-प्रसार  के लिए कुछ भी कर सकता है ऐसे में कैसे विस्वास किया जा सकता है कि जो अमेरिका कह रहा है वो भारत के हित में है। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि ये अमेरिका ही है जिसने पाकिस्तान को धन व हथियार देकर भारत से लड़ने के काविल बनाया है ये वो अमेरिका है जिसने जिहादी आतंकवादियों की फौज खड़ी की अपने देश के हित साधने के लिए अब न्हे मार रहा है। ऐसे में अमेरिका के इसारों पर भारत सरकार के चलने का मतलब है देशहित के साथ खिलवाड़।आपको याद होगा कि अमेरिका के इसारे पर ही लैफ्टीनैंट कर्नल पुरोहित जी को जेल में डाल कर हिन्दू क्रांतिकारियों की झूठी परिकलपना खड़ी करने का षडयन्त्र किया है जिसके लिए सरकार पिछले दो वर्ष से एक ऐसे भंवर में फंसी हुई नजर आ रही है जो उसके गले की फांस बन गया है क्योंकि सेकुलर गिरोह की सरकार ने विना सबूत के अमेरिकी इसारे पर हिन्दूओं को जेल में डाल कर अपने लिए एक ऐसी समस्या खड़ी कर ली है जो भविष्य में कभी भी एक बड़े गृह युद्ध का रूप ले सकती है क्योंकि सरकार के पास इन हिन्दूओं के विरूद्द एक भी प्रमाण नहीं है इसकी पुष्टी मकोका कोर्ट कर चुका है जिस दिन हिन्दूओं के सबर का बांध टूट गया उस दिन क्या होगा ये तो भविष्य ही तय करेगा।भारत में अमेरिका के हस्तक्षेप के प्रमाण तब भी मिले थे जब भारतीय कसटम अधिकारियों ने मुंबई हबाई अड्डे पर FBI के अधिकारियों को अबैध रूप से भारत में लाये जा रहे जासूसी उपकरणों के साथ पकड़ा था।अमोरिका की असलियत तब भी सामने आई जब ये पाया गया कि अमेरिकी जासूस ने मुंबई पर हमला करवाने में भूमिका निभई थी अमेरिका की बदनियती का तब पर्दाफास तब भी हुआ था जब उसने भारत के सुरक्षा अधिकारियों को हेडली से बातचीत करने से रोक दिया था। अभी हाल ही में अमेरिका ने भारत की सरकार पर दबाब बनाकर एक ऐसा परमाणु जिम्मेवारी सबन्धित बिल पास करवाने की कोशिस की (अभी भी जारी है) जो भारतीयों की सुरक्षा को खतरे में डालने की खुली छूट अमेरिकी कंमपनीयों को देता है वो भी विना कीसी भरपाई के जोखिम से मुक्त। कुल मिलाकर हम अमेरिका से सहयोग के विरोधी नहीं लेकिन सुरक्षा अधिकारियों की देशभक्ति का सर्टीफिकेट अमेरिका जारी करे ये देश की सुरक्षा के साथ गद्दारी के समान होगा।

अब प्रश्न ये पैदा होता है कि देश के साथ ये गद्दारी कर कौन रहा है।हमारे विचार में इसकी मूल जड़ है इटालियन एंटोनियो माइनो मारियो व उसके देशविरोधी कामों को अन्जाम दे रहा है उसका गुलाम मनमोहन सिंह ।

समाधान सिर्फ सेना कर सकती है दोनों को उठाकर जेल में चालकर देश की बागडोर  अपने हाथों में लेकर देश से गद्दारों का सफाया कर।

 

आधुनिक नहीं जानबर हैं ये

 आधुनिक नहीं जानबर हैं ये 

कल बलागवाणी पर अपना ध्यान अचानक एक नाम पर गया जो की जगह-जगह लिखा पाया गया। फिर अचानक अपनी निगाह एक ऐसे लेख पर पड़ी जो एक नेक महिला द्वारा लिखा प्रतीत हुआ। फिर हमने जानने की कोशिश की कि आखिर मामला क्या है।


सब जगह जाकर पता चला कि एक पत्रकार ने एक लड़की के साथ बलातकार कर उसे गर्भबती बनाकर अपने माता पिता को अपने गर्भ का बास्ता देकर उनकी छाती पर मूंग दलने भेज दिया।


क्योंकि बालातकारी एक पत्रकार था इसलिय मिडीया से जुड़े लोगों ने इस बालातकार को प्यार का चोला पहनाने की भरपूर कोशिश करते हुए लड़की की मौत के लिए इस बालातकारी को जिम्मेबार ठहराने के बजाय लड़की के माता पिता को कटघरे में खड़ा करने का भरपूर प्रयास किया जो अभी जी जारी है। इन में से कुछ चैनलों ने तो एक खुशहाल परिबार की बरबादी पर को अपनी आय वोले को TRP बढ़ाने का जरिया ही बना लिया ।इनकी वेशर्मी देखो कि जिस बलातकारी के विरूद्द FIR दर्ज करवाकर जेल में डलवाने की कोशिश होनी चाहिए थी उसी कातिल को ये चैनल प्रेमी बताकर पेश कर रहे थे ।


अब मानबता के सत्रु इन दुष्टों को कौन समझाए कि प्यार वो एहसास है जिसमें शारीरिक शोषण की कतई जरूरत महसूस नहीं होती ।प्यार देने का नाम है लेने का नहीं । जो ब्यक्ति अपने मां-बाद से प्यार नहीं कर सकता वो भला दूसरे से क्या प्यार करेगा ।आप बताओ जिस मां ने इन बच्चों को अपनी कोख में रखकर अपने खून से जिन्दा रखकर इनकी हर शुख-सुविधा का ख्याल रखकर इन्हें पाल पोस कर बढ़ा किया।अपने से ज्यादा आगे बढ़ाने के लिए अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा इनकी शिक्षा पर खर्च किया ।उन मां-बाप की सारी जिंदगी की कमाई गई मान-मर्यादा को जिस तरह से इस दुष्ट ने मिडीया में बैठकर उछाला क्या कोई प्यार करने वाला इस तरह से उछाल सकता है ?


हम बात कर रहे हैं इसी दुष्ट के मां-बाप की ।जाओ जाकर उन्हें पूछो कि उनके बेटे के इस कुकर्म से उनका सिर गर्व से उंचा हुआ है या फिर शर्म से झुक गया है। प्रश्न साधारण सा है कि अगर इस दुष्ट को उस लड़की से प्यार था तो फिर गर्भ कैसे ठहर गया। अगर गर्भ ठहर गया तो इस ब्यक्ति ने कोर्ट में जाकर शादी क्यों नहीं कर ली।क्योंकि जब मां-बाप की इजाजत के विना ये समाजिक मर्यादाओं को पार करने का मादा रखता है तो फिर शादी करने का मादा क्यों नहीं। आज हम कह रहे हैं कि अगर इस दुष्ट को सजा नहीं हुइ तो घात लगाय बैठे इस जैसे लाखों बयाभिचारी लड़कियों को अपनी काम वासना की पूर्ति का खेल बनाकर उन्हें आतमहत्या करने पर मजबूर करेंगे।


जिस तरह ये पशु SEX को ही अलौकिक प्यार का प्रायवाची बनाने पर तुले हैं उसे देखकर तो हीर-रांजा,लैला-मजनू व सोनी-महिवाल की रूह भी कांप जाती होगी ।हमारे विचार में अगर ये दुष्ट उस लड़की से सच में प्यार करता होता तो न ये सारीरिक सबन्ध बनाकर उसे गर्भवती करता क्योंकि प्यार में तो प्रेमी प्रेमिका की सुरक्षा के लिए अपने प्राण तक देने से नहीं चूकता तो शारीरिक सबन्धों से खुद को रोकना कौन सी बढ़ी बात है।अगर ये वेसमझी में हुआ था तो भी ये इसके पास कोर्ट में जाकर शादी करने का रास्ता था। हम जानते हैं कि कोई लड़की कितनी भी बहादुर क्यों नहो इस तरह की स्थिति पैदा होने पर उसे एक पक्के साथी की जरूरत होती है लेकिन परीक्षा की इस घड़ी में जिस तरह इस दुष्ट ने उसे अकेला छोड़ा उसेस तो यही साबित होता है कि इसका एकमात्र मकसगद वासना की पूर्ति है न कि कोई प्यार की भावना।


अगर विना किसी समाजिक व परिबारिक जिम्मेवारी के SEX करने को प्यार कहते हैं तब तो ये कहना पड़ेगा कि सबके सब जानबर एक दूसरे से प्यार ही तो करते हैं क्योंकि उन्हे SEX करने के लिए किसी शादी या समाजिक मर्यादा की दरकार नहीं होती न हीं बच्चे पैदा करने पर कोई परिबारिक जिम्मेवारी भी बहन नहीं करनी पड़ती है। कितनी अजीब बात है कि सभ्य समाज की सब मर्यादाओं को तार-तार कर पशुप्रबृति के अनुशरण को आधुनिकता का नाम देकर जायज ठहराने की कोशिस की जाती है। लगातार बदन पर कम होते कपड़ों पर आपति उठने पर कम कपड़े महनने को भी आधुनिकता कहा जाता है अगर कम कपड़े पहनना या कपड़े न पहनना आधुनिकता है तब तो हमारे पशु सबसे ज्यादा आधुनिक हैं क्योंकि वो तो कभी भी कहीं भी किसी भी मौसम में कपड़े नीं पहनते हैं वाह क्या आधुनिकता है अरे सीधे क्यों नहीं कहते कि तुम्हें पशु बनना है सीधे कहो पशुओं को कौन रोक सकता है न कोई समाज न कोई धर्म न कोई मर्यादा।


हमारी निगाह में यही बजह है कि ये आधुनिक लोग गर्भ धारण करने के वाद ये निश्चत करवा लेते हैं कि पैदा होने वाला बच्चा लड़का है या लड़की और लड़की होने पर उसका कत्ल करवा देते हैं क्योंकि इन्हे दूसरों की इज्जत से जो खेलना होता है।


इन पशुओं को हर समाजिक मर्यादा अपनी बासना की पूर्ति का रोड़ा दिखने लगती है। तभी तो ये लोग गांव के जीबन के आधर सतम्भ गोत्र पर भी हाय तौवा मचाते हैं क्योंकि इन पशुओं को अपनी काम-वासना की पूर्ति के रास्ते में कोई रूकाबट सहन नहीं इन्हे पशुओं की तरह विना किसी मर्यादा या जिम्मेवारी के अपना सिकार चाहिए। लोगों से सुना था पढ़े-लिखे लोग बेबकूफ होते हैं आज सरयाम देख रहे हैं कि पढ़े लिखे सिर्फ वेवकूफ नहीं पर निरे पशु होते हैं। अब इन पशुओं को कौन समझाये कि समाज में जिस तरह से आर्थिक विषमता बढ़ रही है उसमें गरीब ब्यक्ति की मां-बहन-बेटी-पत्नी की सुरक्षा की गारंटी ये मान मर्यादायें ही हैं बरना गांव के ही सो कालड पढ़े लिखे पशु गांव की हर मां-बहन-वेटी-पत्नी को अपनी बासनाओं का सिकार बना दें । वेचारे गरीब प्रशासन से किसी न्याय की तो कोई उम्मीद कर नहीं सकते। क्योंकि प्राशासन पर भी ऐसे ही पशुओं की पकड़ है ये पशु कुछ की इज्जत से खुद खिलवाड़ करेंगे तो कुछ को प्रसासनिक व राजनैतिक आकाओं को सौंप देंगे। हाल ही में हिमाचल में एक प्रसासनिक अधिकारी कुछ इसी तरह की अबस्था में पकड़ा गया है।


आप बताओ कि इन जानवरों को कौन समझाये कि समाजिक मर्यादाओं के टूटने पर सबसे ज्यादा शोषण महिलाओं का ही होता है। हम कितने ही ऐसे पढेलिखे लोगों को जानकते हैं जिन्होंने अनकों महिलाओं(उनकी पत्नी को मिलाकर) को गर्भबती बनाकर उनका गर्भपात करवाकर उन्हें अपंग बना दिया।


अरे भाई मानबता की खातिर रोक सकते हो तो रोक लो इन आधुनिक पशुओं को बरना ये लोग मानब को दानब बनाकर ही दम लेंगे।


अन्त में हमारे विचार में प्यार करना कोई अपराधत नहीं लेकिन जिसके मन में प्यार नाम का अंश भी मौजूद है वो सबसे पहले खुद को जन्म देने वाली मां से प्यार करेगा और जो अपनी मां से प्यार करेगा वो ऐसा कुछ नहीं करेगा जो उसकी मां या दूसरे की मां को शर्मशार करे । जो अपनी मां से प्यार नहीं करता वो भला किसी दूसरे से क्या प्यार करेगा। हम तो उस मां को जानते हैं जिनका सारा संसार उनके बच्चे होते हैं जिनकी जिन्दगी का सबसे बढ़ी जिम्मेवारी व खुशी अपने बच्चे की शादी होती है ।अन्त में इतना ही कहेंगे कि जो मां से प्यार नहीं करता वो भला किसी और से क्या प्यार करेगा

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गद्दार को उसके कर्म से पहचानो सांप्रदाय से नहीं।

गद्दार को उसके कर्म से पहचानो सांप्रदाय से नहीं।

 

जबसे फोन टैपिंग का समाचार आया है तब से बहुत से लोग हाय-तौवा मचा रहे हैं ।हमारी राय में सुरक्षा बलों को भारत में रहने वाले हर ब्यक्ति का फोन टैप करने का अधिकार होना चाहिए।क्योंकि देश में सेकुलर गिरोह ने गद्दारों की एक ऐसी भीड़ खड़ी कर दी है जिसके रहते देश को सुरक्षित रखना एक बड़ी चुनौती बन गई है। बेशक आज देश में सेकुलर गिरोह की सरकार है लेकिन फोन टैपिंग देशभक्त सरकार के आने पर गद्दारों के लाईब फर्दाफास का एक बढ़ा हथियार बन सकता है। वेशक फोन टैपिंग निजी जिंदगी को खतरे में डालती है पर निजी जिन्दगी तभी है जब तक देश है अगर देश नहीं तो क्या निजी जिन्दगी ।विस्वास नहीं होता तो देख लो अफगानीस्तान-बंगलादेश के हालात।

अगर हम उन नेताओं की बात करें जिनके फोन नियन्त्रित किए गय तो आप देखेंगे कि इनमें से अधिकतर संदिगध है।सीता राम यचुरी माओवादी आतंकवादियों का ठेकेदार।मुलायम सिंह यादब पाक समर्थक आतंकवादियों का ठेकेदार।दिगविजय सिंह माओवादी व पाक समर्थक दोनों तरह के आतंकवादियों का ठेकेदार। सतीस कुमार की पार्टी का रूख भी माओवादी आतंकवादियों के मामले मे संदेह के घेरे में है।शिवानन्द तिवारी ने तो खुलकर माओवादी आतंकवादियों का समर्थन तक कर दिया था।

हमारे विचार में किसी भी देसभक्त को दूरभाष नियन्त्र से परेसानी नहीं हो सकती है।हां इस बात पर जरूर मतभेद जरूर हो सकते हैं कि फोन नियन्त्रण का अधिकार किसके पास रहना चाहिए । हमारी पक्की राय है कि फोन नियन्त्रण का अधिरकार हर हालात में भारतीय सेना के पास ही रहना चाहिए। सेना के पास यह अधिकार होने से किसी को की परेसानी क्यों हो सकती है क्योंकि देश के किसी भी हिस्से में अशांति का सामना करने के लिए सैनिक ही तो निकलते हैं इसलिए वो कभी नहीं चाहेंगे कि देश की सीमा के भीतर कोई गद्दार जिंदा रहे।नेताओं का क्या भरोसा कब कीसी और एंटोनिया को देश में लाकर उस विषकन्या के सामने सारे राज उगल दें। फोन टैपिंग का समाचार आते ही कुछ लोगों ने शोर मचाना शुरू कर दिया है कि मुसलमानों के फोन नियन्त्रित हो रहे हैं ।क्यों भाई क्या मुसलमानों को गद्दारी की खूली छूट मिलनी चाहिए।आतंकवाद के विरूद्ध जैसे ही किसी कानून की बात आती है तो शोर मचा दिया जाता है कि ये कानून मुसलमानों के विरूद्ध है अरे भई आप ये क्यों मानते हो कि सबके सब गद्दार मुसलमान ही हैं क्या राहुल भट,दिगविजय सिंह ,अमर सिंह,संजय दत्त मुसलमान हैं ?अपनी सोच को दुरूस्त करो ।गद्दार को उसके कर्म से पहचानो सांप्रदाय से नहीं।

मुंबई हमला हिन्दूओं ने किया था ऐसा कहने वाले सेकुलर गद्दार अब कह रहे हैं अजमेर,हैदराबाद ,मालेगांव व समझौता एकसप्रैस हमला भी हिन्दूओं ने किया है।

मुंबई हमला हिन्दूओं ने किया था ऐसा कहने वाले सेकुलर गद्दार अब कह रहे हैं अजमेर,हैदराबाद ,मालेगांव व समझौता एकसप्रैस हमला भी हिन्दूओं ने किया है।

हम ये मानते हैं कि किसी भी वेगुनाह की जान हमारी बजह से नहीं जानी चाहिए लेकिन उतनी ही प्रमाणिकता से हम ये भी मानते हैं कि मानब सभयता के लिए खतरा बनने वाले हैवानों व उनकी आने वाली पिढ़ीयों का नमो निशान बीज सहित हर हाल में मिटा देना चाहिए। इसलिए नहीं कि उनका मरना जरूरी है पर इसलिए कि जो लोग-समाज-मानवता उनके निशाने पर है उस समाज व मानवता की रक्षा जरूरी है।

सच कहें तो जिस दिन हिन्दू अनयाय अत्याचार से मुक्ति पाने के लिए संगठित होकर हथियार उठा लेगा उस दिन सबसे आगे व पहले गोला-बारूद हथियार उठाये सबसे आगे हम चलेंगे वो भी तब तक जब तक आतंक-गद्दारी-नमकहरामी का आधार बन चुके इस सेकुलर गिरोह का नमोनिशान नहीं मिटा दिया जाता लेकिन अफसोस अभी तक ऐसा हो न सका। फिर भी हर आतचंकवादी हमले के बाद कांग्रेस के नेतृत्व वाले सेकुलर गिरोह की हर चाल हिन्दूओं को फांसने की क्यों ?

      हमें हैरानी होती है ये देखकर कि जो दिगविजय सिंह शहीद मोहन शर्मा के कातिल के घर जाकर उस कातिल को  कलीनचिट देकर सुरक्षाबलों व दिल्ली सरकार को कटघरे में खड़ा कर रहा था वो गद्दार आज कह रहा है कि अजमेर,हैदराबाद ,मालेगांव व समझौता एकसप्रैस हमले हिन्दूओं ने किए थे। यह वही गद्दार है जिसने हाल ही में माओवादी आतंकवादीयों द्वारा मारे गय शहीदों की चिता की आग ठण्डी होने से पहले ही माओवादी आतंकवादियों का बचाब करने के लिए गृहमन्त्री पर हमला बोल दिया। खैर अगर हम इन गद्दारों की हर गद्दारी पर पर लिखने लगे तो समय व उर्जा दोनों की बर्वादी होगी इसलिए हम आज बात करेंगे उन झूठों की जो ये सेकुलर गिरोह लगतार पैलाय चला जा रहा है।

आप सबको याद होगा कि जब मुंबई पर हमला हो रहा था तब किस तरह इस सेकुलर गिरोह ने ये कहना शुरू कर दिय़ा था कि ये हमला हिन्दूओं ने किया है साथ ही भारतीय संसकृति व हिन्दूओं के दुसमन मिडीया चैनलों ने सेकुलर गिरोह की बात को सिद्ध करने के लिए आतंकवादियों के हाथों में बन्धे कंगन भी दिखाना शुरू कर दिए थे।मतलब अगर कसाब जिन्दा न पकड़ा जाता तो ये पक्का था कि आज तक RSS जैसे शांतिप्रिय संगठनों के हजारों कार्यकरता जेलों मे भरे जा चुके होते मुंबई पर हमला करने के जुल्म में ।

हमले के दौरान हेमंत करकरे के शहीद हो जाने पर सेकुलर गिरोह की सरकार के मन्त्री अबदुल रहमान अंतुले ने सबके सामने ये कहकर कि ये आतंकवादी हेमंत करकरे को मारने नहीं आये थे एक तरह से ये सवीकार कर लिया था कि भारत पर आतंकवादी हमले सेकुलर गिरोह अपने हिसाब से करवाता है जिसमें ये पहले ही फिक्स कर दिया जाता है कि किसे मारना है और किसे नहीं।

मतलब हिन्दूबहुल क्षेत्रों में हमले सेकुलर गिरोह के नेताओं के आदेशानुशार किए जाते हैं यहां यह दोहराने की आबसयकता है कि 1993 में BSE पर हमला सेकुलर नेता सुनील दत्त के घर को केन्द्र बनाकर किया गया।2001 का सांसदभबन हमला सेकुलर JNU को आधार बनाकर किया गया। 2008 का मुंबई हमला अबदुल रहमान अंतुले के घर को केन्द्र बनाकर किया गया।जिसमें सेकुलर महेशभट के बेटे ने सक्रिय भूमिका निभाई। समाजबादी पार्टी के विधायक आतंकवादी अबु हाजमी व कांग्रेस के पूर्व विधायक आतंकवादी नेता अबदुल सतार ने अपने सहयोगी आतंकवादी को छुपाने व बचाने में सक्रिय भूमिका निभाई।

जरा सोचो कि जब साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर जेल में है तो फिर राहुलभट्ट, अबुहाजमी, अबदुल रहमान अंतुले, अबदुलसत्तार,यासीन मलिक,गिलानी ,दिगविजय सिंह जैसे भारत के सत्रु क्यों जेल में नहीं ? सिर्फ इसलिय कि इनके प्रयासों से मारे जाने वाले अधिकतर हिन्दू थे और साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के प्रयासों से मारे जाने वाले सिमी के आतंकवादी।

अगर आपको याद नहीं तो हम आपको याद करवा देते हैं कि जब देसभर में पाकसमर्थक आतंकवादी हिन्दूबहुल क्षेत्रों में लगातार बम्मविस्फोट कर हिन्दूओं का खून बहा रहे थे तथा देश के अधिकतर लोग ये प्रश्न कर रहे थे कि ये हमले सिर्फ मन्दिरों व हिन्दूओं को निशाना बनाकर क्यों किए जा रहे हैं तभी अचानक हिन्दूओं की एकता को तार-तार करने के लिए मस्जिदों में हमले शुरू हो गय कभी दिल्ली की जामा मस्जिद में तो कभी मालेगगांव में तो कभी हैदराबाद व अजमेर में।इन हमलों का फायदा उठाकर सेकुलर गिरोह ने बौद्धिक गुलाम हिन्दूओं को बहलाना शुरू कर दिया कि देखो हमले सिर्फ हिन्दूओं पर नहीं हो रहे मुसलमानों पर भी हो रहे हैं ।कुछ ही दिनों में आतंकवाद के विरूद्ध संगठित हो रहे हिन्दूओं की एकता एकवार फिर तार-तार हो गई और फिर देश के गद्दार आतंकवादी जनता के आक्रोश का सामना करने से बच गय।

जब हिन्दूओं को फंसाने का सिलसिला शुरू हुआ तो पहले कहा गया कि साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर जी मास्टर मांइड है फिर कहा गया कर्नल पुरोहित जी मास्टर मांइड हैं फिर दयानन्द पांडे जी ,फिर राम जी…(अधिक प्रमाणिक जानकारी के लिए हिन्दू क्रांति की शुरूआत या फिर सरकारी षडयन्त्र जरूर पढ़ें)और अब मास्टर मांइड आसीमानन्द जी।

एक सांस में कहते हैं कि बम्म विस्फोट करने वाले हिन्दू RSS प्रमुख को मारना चाहते हैं फिर कहते हैं नहीं-नहीं ये क्रांतिकारी RSS के ही हैं तभी आबाज निकलती है कि ये अभिनव भारत के हैं शुरूआत राष्ट्रचेतनामंच से की जाती है ।ऐसा नहीं कि सेकुलर गिरोह झूठ बोलना नहीं जानता पर इस मामले का परिणाम इस सेकुलर गिरोह से जुड़े गद्दारों को अपनी मौत के रूप में दिखता है इसलिए हर वार जवान बदलती है इसीलिए तो कहा गया है कि झूठ के पांव नहीं होते ।

कुल मिलाकर एक काल्पनिक कहानी खड़ी करने का एक गंभीर षडयन्त्र। वेचारे देवेन्द्र जी व चन्द्रशेखर जी समाजिक संवेदना के कारण  वाकी क्रंतिकारियों के साथ सेकुलर गिरोह के षडयन्त्रों का सिकार हो रहे हैं। आगे-आगे देखो कि और कितने लोग इस भारत के दुसमन सेकुलर गिरोह के सिकार होते हैं।

हम तो सिर्फ इतना जानते हैं कि जब विदेशी मुगल राक्षसों का शासन था तब और जब विदेशी अत्याचारी अंग्रेजों का सासन था तब भी और आज जब विदेशी एंटोनिया की गुलाम सरकार का सासन है तब भी निसाने पर देशभक्त हिन्दू ही हैं।

जरा सोचो जो सरकार आतंकवादी सोराबुद्दीन को खत्म करने वाले IPS अधिकारियों को प्रताड़ित करने के लिए जेल में डाल सकती है जो सरकार कशमीरघाटी में अपनी जान पर खेल कर देश की रक्षा के प्रति समर्पित सैनिकों को आतंकवादियों को मारने के बदले में बहां की उस पुलिस के हवाले कर सकती है जो आतंकवादियों से भरी पड़ी है वो सरकार देशभक्त हिन्दू संगठनों से जुड़े लोगों को क्यों जेल में नहीं डालेगी । यही तो वो षडयन्त्र हैं जो इस गद्दारों की सरकार को जनता के सामने वेनकाब करेंगे।

अन्त में हमें तो बस इतना ही कहना है कि देखना है कि जोर कितना बाजुए कातिल में है देवेन्द्र एक नहीं करोड़ों में हैं देखते हैं कितने देवेन्द्रों का सामना ये सेकुलर गिरोह कर पाता है…

सेकुलर गिरोह ने कहा था मुंमबई हमला हिन्दूओं ने किया है सजा कसाब को सुनाई जा रही है कितनी विचित्र घटना है ये पर जरा सोचो कि अगर कसाब जिन्दा हाथ न आया होता तो?

  

हमारी  प्रेरणा के प्राण समसामयिक भारत के महान क्रांतिकारी लैफ्टीनैंट कर्नल पुरोहित जी ।

  

 

जब देश का प्रधानमन्त्री ही एक विदेशी विश कन्या का गुलाम हो तो फिर इन छोटे-मोटे गद्दारों के वारे में हाय-तौवा मचाने का क्या फायदा ?

जब देश का प्रधानमन्त्री ही एक विदेशी विश कन्या का गुलाम हो तो फिर इन छोटे-मोटे गद्दारों के वारे में हाय-तौवा मचाने का क्या फायदा ?

 भारत के कोमोडोर सुखविन्द्र सिंह के रूसी विषकन्या के जाल में फंसने की घटना ने भारतीयों को ट्रैप करने के लिए भारतविरोधियों द्वारा महिलाओं का उपयोग करने की पुरानी परम्परा को एकबार फिर लाईम-लाईट में ला खड़ा किया ।

कौन नहीं जानता कि वर्तमान भारत वोले तो इंडिया के प्रथम प्रधानमन्त्री नैहरू एक अंग्रेज अधिकारी की पत्नी लेडी मांऊटवेटन के जाल

 में इस हद तक फंसे थे कि उन्होंने भारत का प्रधानमन्त्री रहते हुए वो सब किया जो अंग्रेजों ने चाहा ।चाहे वो धर्म के आधार पर भारत के विभाजन को स्वीकार करने के लिए गांधी जी को मजबूर करने का मामला हो या फिर विभाजन के बाद लौहपुरूष सरदार बलभ भाई पटेल जी के हर देशहित में दिए गय सुझाब को नजरअंदाज कर कशमीर के मामले को UNO में लो जाकर भारत को नुकसान पहंचाने की घटना हो। कौन भूल सकता है कि माननीय पटेल जी के वार-वार रोकने के बाबजूद नैहरू ने अंग्रेजों के इसारे पर पाकिस्तान के कब्जे वाले कशमीर को आजाद कशमीर कहकर सारी दुनिया के सामने भारत को जलील करने का दुससाहस किया था। नैहरू जी की रूस यात्रा के दौरान उनके एक अधिकारी के रूसी महिला के चुंगल में फंसे होने की बात को हंसकर नजरअंदाज कर दिया था क्योंकि वो जानते थे कि उस अधिकारी की गद्दारी की ओर देश का ध्यान जाने पर उनके अपने भारतविरोधी कुकर्म भी चर्चा का केन्द्रविन्दु बन सकते हैं।

(एंटोनिया रूस में)

रूस द्वारा भारतीयों को महिलाओं के चक्कर में फंसाकर उनका दुरूपयोग करने का सबसे बढ़ा भारतविरोधी कदम उस वक्त सामने आया जब इंगलैंड में पढ़ रहे भोले-भाले राजीब गांधी जी को एंटोनियो माईनो मारियो के माध्यम से ट्रैप किया गया। अधिक जानकारी के लिए श्री सुबरामणियम स्वामी जी द्वारा 2004 में राष्ट्रपति जी को सौंपी गई चिठी को पढ़ें ।अगर आपके पास उपलब्ध न हो तो अपना Email पता हमें दें हम आपको भेज देंगे।आपको खुदवाखुद पता चल जायेगा कि किस तरह राजीब जी एंमटोनियो माईनो मारियो के चुंगल में फंसाये गय व किस तरह एंटोनियो ने एक ऐसे Honey Trap को सफलतापूर्वक अन्जाम दिया जिसे भारत के विरूद्ध सबसे बढ़ा षडयन्त्र कहा जा सकता है।

आप जरा सोचो कि अगर बासतब में एंटोनिया राजीब जी के प्रेम में दीवानी थी तो फिर कवात्रोची कौन है? उसका राजीब जी के घर में क्या काम ? अगर एंटोनिया का क्वात्रोची से की सबन्ध नहीं तो फिर वोफोर्स दलालीकांड में इंगलैंड में जब्त क्वात्रोची के पैसे को निकलवाने में इतनी छटमटाहट क्यों ? क्यों टिठी लिखने या फैक्स भेजने के बजाय ततकालीन कानूनमन्त्री हंसराजभारद्वाज को लन्दन भेजा गया? वोफोर्स दलालीकांड में क्वात्रोची के विरूद्ध चल रहे मामलों को चुनाब से ठीक पहले खत्म करने की हड़बड़ाहट क्यों ? राजीब जी से प्यार था तो फिर राजीब जी की कातिल नलिनी की तरफ दोस्ती का हाथ क्यों ? हमेशा राजीब जी के साथ रहने वाली उनके कत्ल के दिन उनके साथ क्यों नहीं? अधिक जानकारी के लिए एंटोनियो के हिन्दूविरोधी षडयन्त्र पढ़ें जो इसी बलाग पर उपलब्ध हैं। कुल मिलाकर हमारे परिस्थितिजनक प्रमाणों के आधार राजीब जी विषकन्या के सबसे बढ़े सिकार थे जिसकी कीमत उन्हें अपने प्राण देकर चुकानी पड़ी तथा भारत को अपनी सम्प्रभुता खोकर ।हमारे विचार मे इसी Honey Trap के परिणामस्वारूप ये 1947 के वाद पहलीवार है कि देश का प्रधानमन्त्री और राष्ट्रपति एक विदेशी के गुलाम हैं…

अब आप ही बताओ कि जब देश का प्रधानमन्त्री ही एक विदेशी विश कन्या का गुलाम हो तो फिर इन छोटे-मोटे गद्दारों के वारे में हाय-तौवा मचाने का क्या फायदा .अगर मिडीया में दम है तो इन बड़े देशविरोधियों पर समाचार चलाकर दिखाय तो जानें …

आओ मिलकर भारत की सम्प्रभुता को बचाने के लिए संघर्ष करें।

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