भारत के आंतरिक मामलों में अमेरिका का सीधा हस्तक्षेप हमें बर्दाश नहीं क्या आपको स्वीकार है?

भारत के आंतरिक मामलों में अमेरिका का सीधा हस्तक्षेप हमें बर्दाश नहीं क्या आपको स्वीकार है?

 

हम एक लम्बे समय से कह रहे हैं कि सेकुलर गिरोह की सरकार भारत के सुरक्षा हितों के साथ विदेशी ताकतों के इसारे पर नुकसान पहंचा रही है जिसके प्रमाण हम आपको दे रहे हैं । इसी कड़ी में एक और प्रमाण सामने आया है कि अमेरिका ने भारत को बताया अंडेमान में तैनात भरत का एक सैनिक अधिकारी गद्दार है अब प्रश्न ये उठता है कि कहीं ऐसा तो नहीं कि ये अधिकारी अमेरिकी खुखिया ऐजेंसीयों को वो सूचनायें देने से मना तो नहीं कर रहा था जो अमेरिका चाहता है।हम अच्छी तरह जानते हैं कि अमेरिका एक ऐसा ईसाई देश है जो अपने राष्ट्र के हित व ईसाईत के प्रचार-प्रसार  के लिए कुछ भी कर सकता है ऐसे में कैसे विस्वास किया जा सकता है कि जो अमेरिका कह रहा है वो भारत के हित में है। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि ये अमेरिका ही है जिसने पाकिस्तान को धन व हथियार देकर भारत से लड़ने के काविल बनाया है ये वो अमेरिका है जिसने जिहादी आतंकवादियों की फौज खड़ी की अपने देश के हित साधने के लिए अब न्हे मार रहा है। ऐसे में अमेरिका के इसारों पर भारत सरकार के चलने का मतलब है देशहित के साथ खिलवाड़।आपको याद होगा कि अमेरिका के इसारे पर ही लैफ्टीनैंट कर्नल पुरोहित जी को जेल में डाल कर हिन्दू क्रांतिकारियों की झूठी परिकलपना खड़ी करने का षडयन्त्र किया है जिसके लिए सरकार पिछले दो वर्ष से एक ऐसे भंवर में फंसी हुई नजर आ रही है जो उसके गले की फांस बन गया है क्योंकि सेकुलर गिरोह की सरकार ने विना सबूत के अमेरिकी इसारे पर हिन्दूओं को जेल में डाल कर अपने लिए एक ऐसी समस्या खड़ी कर ली है जो भविष्य में कभी भी एक बड़े गृह युद्ध का रूप ले सकती है क्योंकि सरकार के पास इन हिन्दूओं के विरूद्द एक भी प्रमाण नहीं है इसकी पुष्टी मकोका कोर्ट कर चुका है जिस दिन हिन्दूओं के सबर का बांध टूट गया उस दिन क्या होगा ये तो भविष्य ही तय करेगा।भारत में अमेरिका के हस्तक्षेप के प्रमाण तब भी मिले थे जब भारतीय कसटम अधिकारियों ने मुंबई हबाई अड्डे पर FBI के अधिकारियों को अबैध रूप से भारत में लाये जा रहे जासूसी उपकरणों के साथ पकड़ा था।अमोरिका की असलियत तब भी सामने आई जब ये पाया गया कि अमेरिकी जासूस ने मुंबई पर हमला करवाने में भूमिका निभई थी अमेरिका की बदनियती का तब पर्दाफास तब भी हुआ था जब उसने भारत के सुरक्षा अधिकारियों को हेडली से बातचीत करने से रोक दिया था। अभी हाल ही में अमेरिका ने भारत की सरकार पर दबाब बनाकर एक ऐसा परमाणु जिम्मेवारी सबन्धित बिल पास करवाने की कोशिस की (अभी भी जारी है) जो भारतीयों की सुरक्षा को खतरे में डालने की खुली छूट अमेरिकी कंमपनीयों को देता है वो भी विना कीसी भरपाई के जोखिम से मुक्त। कुल मिलाकर हम अमेरिका से सहयोग के विरोधी नहीं लेकिन सुरक्षा अधिकारियों की देशभक्ति का सर्टीफिकेट अमेरिका जारी करे ये देश की सुरक्षा के साथ गद्दारी के समान होगा।

अब प्रश्न ये पैदा होता है कि देश के साथ ये गद्दारी कर कौन रहा है।हमारे विचार में इसकी मूल जड़ है इटालियन एंटोनियो माइनो मारियो व उसके देशविरोधी कामों को अन्जाम दे रहा है उसका गुलाम मनमोहन सिंह ।

समाधान सिर्फ सेना कर सकती है दोनों को उठाकर जेल में चालकर देश की बागडोर  अपने हाथों में लेकर देश से गद्दारों का सफाया कर।

 

Advertisements

आपके कुछ न कहने का मतलब है आप हमसे सहमत हैं

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: