आओ हम बताते हैं आपको कि बाबा अमरनाथ यात्रा शरू होने से ठीक पहले घाटी में आग किसने लगाई और किसने हबा दी।


हम अक्कसर बहुत सी बातों को जानते हुए भी उनके प्रति आँखें मूंदकर अपनी बरबादी को अपने पास आने देते हैं। होना तो ये चाहिए था कि जब मुसलमानों ने 1985 में अलकायदा की स्थापना के बाद

1986 में कशमीरघाटी में हिन्दूओं व सुरक्षाबलों पर हमले शुरू किए उसी बक्त या तो सेना को खुला हाथ देकर हमलाबरों की कबर घाटी में ही खोद दी जाती या फिर सरकार द्वारा सैनिकों को खुला हाथ न देने की स्थिति में हिन्दू खुद अपने हिन्दू भाईयों की रक्षा की खातिर देश के अन्य हिस्सों में मुसलिम आतंकवादियों व उनके समर्थकों पर हमले शुरू कर आतंवादियों पर दबाब बनाकर आतंकवादियो को हिन्दूओं पर हमले रोकने पर मजबूर करते।


इससे न केबल कशमीरघाटी में हिन्दूओं की रक्षा होती बल्कि साथ ही आसाम व उतर पूर्ब सहित अन्य राज्यों में भी आतंकवादियों व उनके समर्थकों को सबक मिलता हिन्दूओं पर हमला न करने का।


यहां तो उल्टा हुआ उधर मुसलमानों ने हिन्दूओं पर हमले शुरू किए इधर सेकुलर गद्दारों ने उनके समर्थन में समाचार चैनलों ,पत्र-पत्रिकाओं व अन्य साधनों का उपयोग कर महौल बनाना शुरू कर दिया।


देश में जिस भी संगठन या वयक्ति ने हिन्दूओं पर हो रहे अत्याचारों के विरोध में आबाज उठाई उसे बड़ी वेशर्मी से सांप्रदायिक करार देकर मुसलिम आतंकवादियों को अपने कुकर्मों को जारी रखने के लिए उकसाया गया।


परिणामस्वारूप कशमीर घाटी में 60000 हिन्दूओं का कत्ल कर 500000 हिन्दूओं को वेघर कर दिया गया।

ये काम अन्जाम दिया गया मस्जिदों व मदरसों से दुशप्रचार कर व लोगों को हिन्दूओं पर हमले करने के लिए उकसाकर।


अब जबकि घाटी से हिन्दूओं का लगभग सफाया हो चुका है मुसलिम आतंकवादियों ने पिछले कई बर्षों से सुरक्षाबलों पर हमले तेज किए हुए हैं।

आज शायद ही कोई दिन ऐसा गुजरता है जिस दिन देश की रक्षा की गारंटी हमारे बहादुर सैनिक शहीद नहीं होते।


अब जबकि कशमीरघाटी में सिर्फ मुसलिम आतंकवादी और उनके मददगार ही शेष बचे हैं तो फिर ऐसी कौन सी मजबूरी है जिसके कारण हमारे सैनिक अपनी रक्षा तक नहीं कर पा रहे हैं ।


सैनिकों के इस तरह कत्ल होने का एकमात्र कारण है केन्द्र

व राज्य सरकार का

आतंकवाद समर्थ रबैया। इन सराकारों ने आतंकवादियों के हमलों को सफल बनाने व सुरक्षावलों द्वारा निर्णायक जबाबी कार्यवाही न करने देने के लिए सेना के अधिकारों को इतना कम कर दिया है कि आतंकवादी वेखौफ होकर सैनिकों के बंकरों व टुकड़ियों पर हमला कर रहे हैं।


आज भी सरकार मुसलिम आतंकवादियों की विजय सुनिस्चित करने के लिए सेना पर और प्रतिबन्ध लगाने के चक्कर में है। जिसका सेना के तीनों अंगों के सेना प्रमुख विरोध कर रहे हैं। पर सरकार कहां मानने वाली है उसे तो हर हाल में मुसलिम आतंकवादियों की जीत सुनिस्चित करनी है मानबाधिकों को ढ़ाल बनाकर। पिछले दिनों में शायद ही ऐसी कोई घटना होगी जिसमें सैनिकों द्वारा आतंकवादियों को मुठभेड़ में मार गिराने पर सरकार ने सैनिकों के विरूद्ध मुकद्दमा दर्ज नहीं किया होगा।


मुसलिम आतंकवादियों के इरादों का पता आप इसी बात से लगा सकते हैं कि जैसे ही कसमीरघाटी में बाबा अमरनाथ यात्रा शुरू होती है बैसे ही ये आतंकवादी अपने हमले तेज कर सैनिकों को उलझाकर इस पबित्र यात्रा में बाधा पैदा कर तीर्थ यात्रियों पर हमले शुरू कर देते हैं।


ऐसा नहीं कि सरकार इस यात्रा में कोई ब्याबधान नहीं डालती। हर बर्ष की तरह इस बर्ष भी सराकर ने लंगर लगाने बालों से 25000 रूपए का भारी भरकम जजियाकर बसूल किया । जब इतने से जिहादी मुसलिम उमर अबदुल्ला का मन नहीं भरा तो तीर्थ यात्रियों को ले जाने वाली बसों का एक दिन का टैक्स 2500 रूपए कर दिया गया मतलब टैक्स के साथ जजिया कर भी लगा दिया गया। इसेके अतिरिक्त यात्रीयों से रजिस्ट्रेसन फीस के नाम पर जजिया बसूला गया सो अलग।


हमें तो यह सोचकर ही हैरानी होती है कि जो सरकार मक्का मदीना की यात्रा के लिए प्रति मुसलमान 60000 रूपए की खैरात बांटती है माननीय नयायालय द्वारा रोक लगा देने के बाबजूद वही सरकार किस मुंह से हिन्दूओं की धार्मिक यात्राओं पर जजिया कर लादकर रूकबटें पैदा करती है?


इसे भी जयादा हैरानी हमें उन बैद्धिक गुलाम हिन्दूओं पर होती है जो सरकार के इन भेदभावपूर्ण अमानबीय सरोकारों का विरोध करने की जगह विरोध कर रहे जागरूक हिन्दूओं पर धावा वोल देते हैं।


अपने इन बौद्धिक गुलाम हिन्दूओं के सहयोग की बजह से भारतविरोधी देशविरोधी ताकतें (चाहे वो पाक समर्थक मुसलिम आतंकवादी हों या फिर चीन समर्थक माओवादी आतंकवादी या फिर धर्मातरण समर्थक इसाई आतंकवादी ) आगे बढ़ती जा रही हैं जिसके परिमामस्वारू हर भारतीय के जानमाल पर खतरा बढ़ता जा रहा है।


आओ पूर्वाग्रहों व दुशप्रचार से आगे निकलकर भारतविरोधियों का विनाश सुनिश्चित करेन के लिए एकजुट होकर काम करें।




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2 Comments

  1. अनाम
    Posted मई 22, 2012 at 6:08 अपराह्न | Permalink | प्रतिक्रिया

    bilkul theek kaha hai dusre kranti aur hinduo ko jagane ki jarurat hai

  2. mukeshjain
    Posted जून 26, 2011 at 1:19 पूर्वाह्न | Permalink | प्रतिक्रिया

    मेघालय में ईसाईयों द्वारा मारे व उजाड़े हिन्दुओं को सरकार राहत दें
    नई दिल्ली, 08 फरवरी 2011.
    धर्मरक्षक श्री दारा सेना और हिन्दू महासभा की संयुक्त प्रेस कांफ्रेस आज बंसत पंचमी को हिन्दू महासभा भवन में आयोजित की गयी।
    पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री चन्द्र प्रकाश कौशिक और धर्मरक्षक श्री दारा सेना के अध्यक्ष श्री मुकेश जैन ने कहा कि हमारे लिये यह खुशी की बात है कि बसंत पंचमी के दिन जहाॅ वीर हकीकत राय ने हिन्दू धर्म की रक्षार्थ अपना बलिदान दिया था,वहीं बसन्त पंचमी के ही दिन उड़ीसा कि हिन्दू वीरों ने धर्म रक्षक श्री दारा सिंह के नेतृत्व में ग्राहम स्टेंस जैसे खूॅखार इसाई आतंकवादी का वध किया था।जिसके कारण पूरा देश चर्च के इसाई आतंकवाद के विरूद्ध खड़ा हुआ।
    पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए दारा सेना के अध्यक्ष श्री मुकेश जैन ने चिन्ता जतायी है कि मेघालय से 30 हजार हिन्दुओं को वहां के इसाईयों ने मार भगाया, हजारों हिन्दुओं के घरों में आग लगायी गयी। महिलाओं के साथ बलात्कार किया गया। 30 हिन्दुओं का कत्ल चर्च के आतंकियों द्वारा किया गया। इस घटना का शर्मनाक पहलु यह है कि दिल्ली में इसाई लड़की के साथ बलात्कार मामले में प्रतिपक्ष की नेता सुषमा स्वराज दो दो धरने देती है। गृहमंत्री का भी बयान आता है किन्तु मेघालय में इसाईयों द्वारा हिन्दुओं के घर उजाडने पर उन्हें कत्ल करने पर सरकार प्रतिपक्ष, मीडिया, मानवाधिकार संगठन यहां तक की सुप्रिम कोर्ट भी खामोश है।
    पत्रकारों के समक्ष हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री चन्द्र प्रकाश कौशिक ने मांग की कि मेघालय में तोड़े गये हिन्दू मन्दिरों का पुनः निर्माण कराया जाये। मारे गये राभा जनजाति के हिन्दुओं को दस-दस लाख रूपये दिये जाये। हिन्दुओं के जलाये गये घरों का पुनः निर्माण कराया जाये।
    इस अवसर पर हिन्दू महासभा के राष्टीय प्रवक्ता श्री प्रवीण शर्मा ने बापटिस्ट चर्च को आतंकवादी गिरोह घोषित करने की माॅग की।श्री शर्मा ने वेटिकन सरकार से अनुरोध कि वो वेटिकन में भव्य मन्दिर बनाने की दारा सेना की 5 वर्ष से की जा रही माॅग को स्वीकार करें। हिन्दू महासभा व दारा सेना ने विदेश मंत्री जी से भी इस मामले में हस्तक्षेप करने को कहा।
    हिन्दू महासभा व दारा सेना शीघ्र ही एक रथ यात्रा निकालेगी इसमें चर्च के इसाई आतंकवाद का खुलासा किया जायेगा। जन-जन तक चर्च के ईसाई आतंकवाद पर सरकार की चुप्पी को बताया जायेगा।

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