Monthly Archives: सितम्बर 2010

Talking about YouTube – *FULL SPEECH* 13 yr old Hindu girl speaks out against Anti-India forces

हिन्दूविरोधी-देशविरोधी धर्मनिर्पेक्ष गिरोह की गद्दारी के कुछ और प्रमाण…

हिन्दूविरोधी-देशविरोधी धर्मनिर्पेक्ष गिरोह की गद्दारी के कुछ और प्रमाण…

 

UPA के नेतृत्व में हिन्दूविरोधी-देशविरोधी धर्मनिर्पेक्ष गिरोह लगातार भारतविरोधा आतंकवादियों का साथ दे रहा है । आप सब जानते हैं कि खुद सरकार कह चुकी है कि सैनिकों पर पत्थरों से हमाला करने वाले मुसलमान पाकिसतान समर्थक आतंकवादी हैं जो जिहादी आतंकवादी गिरोह लशकरे तैयवा के इसारे पर सैनिकों पर हमला वोल रहे हैं।

http://samrastamunch.blogspot.com/2010/07/blog-post_09.html


अब इस हिन्दूविरोधी-देशविरोधी धर्मनिर्पेक्ष गिरोह की UPA सरकार ने घोषणा की है कि मसजिदों व मदरसों में योजना बनाकर सैनिकों पर हमला करने वाले प्रत्येक पत्थरवाज के परिवार को 5 लाख रूपए दिए जायेंगे ताकि इन पत्थरबाजों के परिवारों का भारतीय सेना पर हमला करने का हौसला बना रहे ।साथ ही जिन मुसलमानों ने अभी तक भारतीय सैनिकों पर पत्थरवाजी नहीं की थी उन्हें भी प्रेरणा लेकर ये 5 पांच लाख प्राप्त करने के लिए अपने बच्चों को पाठशाला भेजने के बजाए सैनिकों पर हमले करने में लगा देना चाहिए।( ध्यान रहे कि ये वही सरकार है जिने 2004 में सता में आते ही अर्धसैनिक बलों के जवानों के देश की रक्षा की खातिर शहीद हो जाने पर मिलने वाली सहायता यह कहकर कम कर दी कि सरकार के पास पैसा नहीं मतलब देशभक्तों के लिए पैसा कम है पर गद्दारों के लिए कोई कमी नहीं)


इन पत्थरबाज गद्दार मुसलमानों पर मेहरवान होते हुए हिन्दूविरोधी-देशविरोधी धर्मनिर्पेक्ष गिरोह की UPA सरकार ने कहा कि जो पत्थरबाज देशभक्त सैनिकों का कत्ल करने की कोशिश में पकड़कर जेलों में डाले जा चुके हैं उन्हें भी रिहा कर दिया जाएगा ताकि पत्तवारबाजों की संख्या कम न हो सके।


हिन्दूविरोधी-देशविरोधी धर्मनिर्पेक्ष गिरोह की UPA सरकार ने इससे भी आगे जाते हुए मुसलमानों द्वारा सैनिकों पर किए गए हमलों व श्रीनगर में फहराए गए पाकिस्तानी झंडे जैसी हरकतों से खुश होकर इन गद्दारों को 10000000( 100 करोंड़) का इनाम देने की घोषणा की।


ये मुसलिम आतंकवादी कशमीर में अपनी स्थिति मजबूत कर सकें ताकि इन्हें भारत से अलग होकर पाकिस्तान के साथ मिलने में आसानी रहे इसके लिए हिन्दूविरोधी-देशविरोधी धर्मनिर्पेक्ष गिरोह की UPA सरकार ने भारतीय सैनिकों को आतंकवादियों द्वारा बताए गए स्थानों से हटाने की भी घोषणा की।


सरकार ने बायदा किया कि सैनिकों द्वारा आत्मरक्षा व देश की रक्षा के लिए प्रयोग किए ज रहे AFSPA को भी शीघ्र हटा दिया जाएगा।


ध्यान रहे कि 11 जून से शुरू हुए इन गद्दार मुसलमानों के हमलों में सैंकड़ों सैनिक घायल हो चुके हैं व दर्जनों सैनिक शहीद हो चुके हैं।


हमें यह भी ध्यान रकना चाहिए कि 11 जून को मुसलमानों के हमले शुरू होने का कारण यह था कि हिन्दूविरोधी-देशविरोधी धर्मनिर्पेक्ष गिरोह की UPA सरकार ने जिहादी आतंकवाद समर्थक उमर अबदुल्ला के कहने पर कशमीर से हजारों सैनिकों को उन स्थानों से हटा लिया था जहां पर आतंकवादियों को खदेड़कर भारत का नियन्त्रण स्थापित करने के लिए सैंकड़ों सैनिकों ने अपनी कुर्वानी दी थी। पर इस हिन्दूविरोधी-देशविरोधी धर्मनिर्पेक्ष गिरोह की UPA सरकार ने आतंकवादियों को फायदा पहंचाने के लिए शांति स्थापित करने के नाम पर वहां से हजारों सैनिकों को हटाकर उन क्षेत्रों को फिर से आतंकवादी मुसलमानों के हबाले कर दिया।


समझो मेरे प्यारे देशभक्त हिन्दूओं वरना वो दिन दूर नहीं जब इस हिन्दूविरोधी-देशविरोधी धर्मनिर्पेक्ष गिरोह की UPA सरकार की मदद से सारा भारत एकवार फिर इन मुसलिम आतंकवादीयों के कब्जे में चला जाएगा।


हमें आज यह प्रण करना चाहिए कि अगर कसमीर पर भारत का नियन्त्रण कंम करने की कोशिसें इसी तरह आगे बढ़ेंगी तो हर हाल में हम एक-एक मुसलिम आतंकवादी को चुन-चुन कर तब तक मारेंगे जब तक सारा भारत ,भारतविरोधी आतंकवादियों से मुक्त न हीं हो जाता।


http://samrastamunch.blogspot.com/2010/07/blog-post_12.html

क्या UPA के नेतृत्व में धर्मनिर्पेक्ष गिरोह अयोध्या में अनर्थ करवाने की तैयारी में है?

भगवान करे कि जो हमें समझ आ रहा है वो पूरी तरह गलत हो। आज देश में जो हालात हैं चारों तरफ प्राकृतिक आपदा और हिंसा एक तरफ वामपंथी आतंकवादियों द्वारा व दूसरी तरफ मुसलिम आतंकवादियों द्वारा। इस दोनों तरह के भारतविरोधी आतंकवाद को UPA के नेतृत्व में धर्मनिर्पेक्ष गिरोह का समर्थन।


जो धर्मनिर्पेक्ष गिरोह गिरोह पिछले 4 वर्ष से मुसलिम आतंकवादी अफजल की फांसी रोके हुए है माननीय सर्वोच न्यायालय द्वारा पैसला करने के बाद भी वार-वार चेताय जाने के बाबजूद।


जो गिरोह मुम्बई पर हुए आतंकवादी हमले के अपराधी मुसलमानों को बचाने का प्रयत्न कर रहा है।


जो गिरोह वामपंथी आतंकवादियों द्वारा सैंकड़ों वेगुनाह सैनिकों व हजारों निहत्थे आम लोगों के कत्ल के बाबजूद इन आतंकवादियों का साथ दे रहा है—-कभी राहुल गांधी तो कभी ममता बनर्जी तो कभी दिगविजय सिह तो कभी चिदमबरम तो कभी एंटोनिया इन आतंकवादियों के साथ खड़ी नजर आ रही है।


सोचने का विषय सिर्फ इतना है कि जो धर्मनिर्पेक्ष गिरोह भारत विरोधी आतंकवादियों का हर तरह से बचाब कर रहा है वही गिरोह देशभक्त हिन्दूओं व भारत की आस्था के केन्द्र भगवा को आतंकवादी कहकर बदनाम करने की पुरजोर कोशिश कर रहा है।


क्या वो गिरोह सब प्रमाण मौजूद होने के बाबजूद माननीय न्यायालय को अपना पैसला मर्यादा पुर्षोत्तम भगवान श्रीराम के समर्थन में सुनाने देगा?


ध्यान रखना होगा कि यह उसी धर्मनिर्पेक्ष गिरोह की सरकार है जिसने मर्यादा पुर्षोत्तम भगवान श्रीराम द्वारा निर्मित राम सेतु को तोड़ने के लिए माननीय न्यायालय में लिखकर दिया कि भगवान राम हुए ही नहीं।ये हिन्दू विरोधी गिरोह यहीं नही रूका इसने आगे बढ़कर इस गिरोह ने कहा कि पबित्र रामायण एक काल्पनिक पुस्तक है।


क्या ऐसा सम्भव है कि जो धर्मनिर्पेक्ष गिरोह भगवान राम के अस्तित्व तक को मानने के लिए तैयार न हो वही गिरोह मर्यादा पुर्षोत्तम भगवान श्रीराम के भव्य मन्दिर निर्माण के पक्ष में दिए जाने वाले किसी भी फैसले की सम्भावना पैदा होने पर खामोस रहे ?


हमें नहीं लगता कि ये गिरोह माननीय न्यायालय के काम में हिन्दूओं की आस्था के विरूद्ध हस्तक्षेप न करे।


हमें यह भी याद रखना होगा कि यह वही गिरोह है जिसने बाबा अमरनाथ यात्रा के लिए आबंटित भूमि को हिन्दूओं को नीचा दिखाने के लिए बापिस ले लिया।


यह वही गिरोह है जो मुसलमानों की एक आह तक नहीं सुन सकता पर हिन्दूओं द्वारा 70 दिन तक अपने बाबा भोले नाथ के समर्थन में चलाय जा रहे अन्दोलन व कई हिन्दूओं की शहीदी के बाबजूद इस गिरोह के कान पर जूं तक न रेंगी।


कुल मिलाकर ये हिन्दूविरोधी धर्मनिर्पेक्ष गिरोह हिन्दूओं की आस्था व पीड़ा के प्रति न केवल संवेदनहीन है पर उससे कहीं आगे जाकर इस गिरोह को हिन्दूओं की आस्था के केन्द्रों पर प्रहार कर हिन्दूओं को पीड़ा पहूंचाने में आनन्द का अनुभव होता है।


अब इस गिरोह की सरकार के सता में रहते कोई फैसला हिन्दूओं को राहत पहूंचाने के पक्ष में आए ऐसा कैसे हो सकता है?


हमें हैरानी तो इस बात की भी हो रही है कि जिन मुसलमानों ने आज तक माननीय न्यायालय के किसी भी आदेश के नहीं माना वही इस मामले में आदेश मानने की कसमें उठा रहे हैं।


जहां हिन्दू पक्ष भविष्य में किसी भी तरह के द्वेष से बचने के लिए समझौते की बात कर रहा है वहीं मुसलिम पक्ष समझौता करने के किसी भी मूढ़ में नजर नहीं आता कारण साफ है।


मुसलिम पक्ष जानता है कि वेशक प्रमाण हिन्दूओं की आस्था के पक्ष में हों लेकिन सता में बैठे लोग तो पूरी तरह से हिन्दू विरोधी है वो हर हाल में फैसला मर्यादा पुर्षोत्तम भगवान श्रीराम के मन्दिर के विरूद्ध करवाकर हिंसा और अत्याचार के प्रायवाची आक्रमणकारी बाबर को एकवार फिर विजयी बनायेंगे आखिर जयचंद के वंशज जो ठहरे ।


अन्त में हम एकवार फिर भगवान से यही प्रार्थना करेंगे कि जो हमें समझ आ रहा है वो पूरी तरह से गलत हो ।


आओ मिलकर भगवान से प्रार्थना करें कि धर्मनिर्पेक्ष गिरोह किसी तरह से जजों से हिन्दूओं के हित के विरूद्ध काम करवाने के अपने किसी भी षडयन्त्र में सफल न हो।

http://samrastamunch.blogspot.com पर दिनांक 22-09-10 को लिखा गया 


आतंकवादी इसलाम से एक वार निपट लो ताकि दोबारा कोई गांधी मजबूर न हो—संदर्भ ईसाईयों द्वारा कुरान जलाने की घोषणा

आतंकवादी इसलाम से एक वार निपट लो ताकि दोबारा कोई गांधी मजबूर न हो—संदर्भ ईसाईयों द्वारा कुरान जलाने की घोषणा…

 

Islam is of the devil, by the devil for the devil  जी हां यही निश्कर्ष है निकाला मध्यपूर्व के विशेषज्ञ ने इसलाम के वारे में । ये विशेशज्ञ आजकल अमेरिका के खूफिया विभाग में अधिकारी हैं । इन्होंने 18 जुलाई को अमेरिका में Dearborn, Mich की एक मस्जिद में (जैसा कि हम पहले ही लिख चुके हैं कि मदरसे मुसलिम आतंकवादियों के training Centre और मस्जिदें मुसलिम आतंकवादियों के Operating Centre हैं) अलकायदा से जुड़े मुसलिम आतंकवादियों को पकड़ने के लिए रेड डालने के दौरान Islamic prayer calendar पर लिखा। जिसका इशाई सांप्रदाय के प्रमुख ने भी कुरान जलाने की घोषणा कर समरथन किया।


अगर हम से कोई पूछे कि हमारी राय क्या है तो हम कहेंगे कि विशेषज्ञ का निष्कर्ष और ईसाईयों के प्रमुख पादरी की घोषणा दोनों ही सही हैं।


अब आप कहेंगे कि हम किसी सांप्रदाय के वारे ऐसी राय कैसे रख सकते हैं?


तो हम कहेंगे कि 7-8वीं शताब्दी में इसलाम के भारत में प्रवेश के बाद मुसलिम आतंकवादियों ने लाखों हिन्दूओं को जिहाद के नाम पर मौत के घाट उतारा ।


अगर आपको विशवास नहीं तो अफगानीस्तान ,पाकिस्तान, वंगलादेश में मुसलिम आतंकवादियों द्वारा कत्ल किए गय हिन्दूओं की संख्या में कशमीर घाटी में कत्ल किए 60000 हिन्दूओं(http://jagohondujago.blogspot.com/2010/07/blog-post.html ) व देशभर के अधिकतर शहरों में बम्ब हमलों में कत्ल किए गय हिन्दूओं की संख्या भी जोड़ लो ।


फिर भगवान को साक्षी मानकर अमने मन से पूछो क्या कोई भी मुसलमना विना मुसलिम सांप्रदाय के समर्थन से व्यक्तिगत सतर पर लाखों लोगों का खून इस तरह वहा सकता है नहीं न । बचाब का एक ही तरीका है— SHOW ISLAM NO RESPECT: MUSLIMS ARE NOT HUMAN



आतंकवाद की जड़ है इसलाम वरना ऐसे कैसे हो सकता था कि कश्मीर घाटी में मुसलिम आतंकवादियों द्वरा कत्ल कि किए जा रहे हजारों हिन्दू-सिखों पर तो भारत के मुसलिम खामोश रहें या कत्ल को अंजाम देने में सहयोग करें और अफगानीस्तान में मारे जा रहे तालिवानों के विरोध के लिए भारत में वन्द आयोजिक कर हिन्दूओं की दुकानों-मकानों में आग लगा दें।(http://samrasta.blogspot.com/2010/07/blog-post.html )


अभी जरा आगे देखें ISLAM: EVIL IN THE NAME OF GOD ™ नामक पुस्तक (http://godofreason.com/ )के cover page पर लिखा है

WHERE IS THE OUTRAGE?


GOD IS NOT A CRIMINAL


GOD IS NOT A MALE CHAUVINIST PIG




ONLY A


GOD OF MORAL PERFECTION™


IS GOD


इन शब्दों का अर्थ जितना हमें समझ आया उसके अनुशार समस्या कहां है ? इस बात को उपर लिखित चन्द शब्दों में सपष्ट कर दिया गया है।


अब समस्या तो गम्भीर है समाधान क्या है ?


आप देख रहे हैं कि पीछे का इतिहास हम छोड़ भी दें तो महात्मा गांधी जी ने सांम्प्रदाय के आधार पर भारत विभाजन का विरोध किया था यहां तक कहा था —-भारत का विभाजन गांधी जी के जिन्दा रहते नहीं हो सकता —— लेकिन मजबूर होकर भारत का विभाजन स्वार किया क्यों ? —– कभी सोचा आपने नहीं न —– 1946 में जिन्ना द्वारा — Direct action मतलब हिन्दूओं-सिखों के विरूद्ध सीधे युद्ध की घोषणा करते ही ——मुसलिम हिन्दूओं-सिखों पर टूट पड़े—– एक ही दिन में कलकता के आसपास 10000 से अधिक हिन्दूओं का कत्ल कर डाला —–गांवो के गांव हिन्दू विहीन कर डाले — मजबूर होकर गांधी जी को कहना पड़ा—-हिन्दू कायर है(कायर किसने बनाया ? —धर्मननिर्पेक्षताबादियों ने )और मुसलिम राक्षस—-दोनों को इकट्ठा रखा तो ये राक्षस हिन्दूओं का नोनिशान मिटा देंगे—-परिमामस्वारूप गांधी जी को भारत का विभाजन स्वीकार करना पड़ा—डा. अम्वेडकर जी ने पाकिस्तना-पंगलादेश के सब हिन्दूओं को भारत बुलाकर सबके सब मुसलमानों को पाकिस्तान भेजने पर जोर दिया—-लेकिन धर्मनिर्पेक्षतावादियों की जिद व अंग्रेजों की कुटिल चालों ने देशभक्तों की जायज मांग को साकार नहीं होने दिया—परिणामस्वारूप कशमीर में 60000 हिन्दूओं-सिखों का कत्ल—असाम को हिन्दूविहीन करने पर जोर—देशभर में हिन्दूबहुल क्षेत्रों व मन्दिरों में बम्म विस्फोट —चारों तरफ हिंसा और कत्लोगारद—आए दिन सुरक्षाबलों पर हमले—प्रतिदिन एकदर्जन से अधिक सैनिकों का मुसलिम आतंकवादियों द्वारा कत्ल ।


ये सब तब हो रहा है जब मुसलमानों की आबादी 20 प्रतिशत से कम है—-सरकारें हिन्दूओं के अधिकार छीनकर मुसलमानों को दे रहीं हैं चाहे सरकार किसी की भी हो ।


जरा कल्पना करो जब कशमीरघाटी की तरह सारे भारत में मुसलमानों की जनसंख्या 35 प्रतिशत से अधिक हो जाएगी और कोई दूसरा जिन्ना Direct action मतलब हिन्दूओं-सिखों के विरूद्ध सीधे युद्ध की घोषणा करेगा—- जैसे कशमीर में कर रखी है—– तो फिर क्या होगा ? —-सारे भारत में हिन्दूओं-सिखों का नरसंहार —मां-बहन वेटियों की इज्जत से खिलवाड़—छोटे-छोटे बच्चों का जिहाद की खातिर कतलयाम—आज जो, मुसलिम आतंकवादियों के साथ खड़ें हैं, क्या वो बचा पायेंगे हिन्दूओं को—क्या 1946-47 में ये बचा पाए थे हिन्दूओं को मुसलिम राक्षसों से —बचाना तो दूर ये खुद मारे जा रहे थे मुसलमानों के हाथों— छुपते पिर रहे थे ये घर कुदाल इन मुसलिम आतंकवादियों से—भूल गए उस कत्लयाम को —आज फिर ये दुष्ट मुसलिम आतंकवादियों को आगे बढ़ाने के लिए देशभक्तों को गाली निकाल रहे हैं—जागो मेरे प्यारे हिन्दूओ—अपनी सुरक्षा का इन्तजाम करो —समाधान सपष्ट है—


DESTROY THE


ISLAM OR


GET DESTROYED


BY IT




6-6 भारतयीयों की लाशें गिराकर चर्च ने एंटोनिया उर्फ सोनिया गांधी को अध्यक्ष बनाया है?

6-6 भारतयीयों की लाशे गिराकर चर्च ने

एंटोनिया उर्फ सोनिया गांधी को कांग्रेस अध्यक्ष बनाया है?


कुछ बातें ऐसी होती हैं जिन्हें लाख कोशिश पर भी दबाया नहीं जा सकता।इन्हीं बातों में से एक है चर्च द्वारा योजनाबद्ध तरीके से एक फासीवादी इटालियन स्टीफैनो व पाओला माईनों की औलाद एडवीज एंटोनिया अलवीना माईनो उर्फ सोनिया गांधी को कांग्रेस अध्यक्ष बनाकार गांधी परिवार की विरासत पर कब्जे के साथ ही शहीदों द्वारा 1857 से 1947 तक किए गए संघर्ष व बलिदानों के परिमामस्वारूप भारतीयों के हाथों आई सत्ता को भारतीयों वोले तो हिन्दूओं से छीन कर सीधे चर्च के हाथों तक पहुंचाना।


ये कहानी शुरू होती है राजीब गांधी जी के पढ़ाई के लिए विदेश जाने के साथ ही। जैसे ही राजीब गांधी जी पढ़ाई के लिए लन्दन पहुंचे चर्च ने उन्हें अपने जाल में फंसाने के लिए जाल बुनना शुरू कर दिया। अपने इस जाल को अंजाम तक पहुंचाने के लिए चर्च की निगाह पड़ी लुसियाना इटली में कैथोलिक परिवार में जन्मी व कैथोलिक स्कूल में पढ़ाई कर रही फासीवादी स्टीफैनो व पाओला माईनों की औलाद एडवीज एंटोनिया अलवीना माईनो पर । चर्च ने एंटोनिया को 1964 में Cambridge शहर के The bell education Trust में अंग्रेजी सीखने के नाम पर प्रवेश दिलवाया। राजीब गांधी जी को अपने षडयन्त्र में फांसने के उद्देश्य से चर्च नें 1965 में राजीब गांधी जी की मुलाकात एडवीज एंटोनिया अलवीना माईनो से ग्रीक रैस्तरां में करवाई।


1968 में इन्दिरा गांधी जी जो कि पूरी तरह इस विदेशी अंग्रेज से राजीब गांधी जी की शादी के विरूद्ध थीं पर ततकालीन सोवियतसंघ से दबाबा वनवाकर एडवीज एंटोनिया अलवीना माईनो की शादी भोले-भाले राजीब गांधी जी से करवा दी गई। इतिहास गवाह है कि चर्च ने कभी भी विदेशी भूमि पर कब्जा जमाने के लिए संयम का परिचय नहीं दिया ।यहां भी शादी तो हो गई लोकिन चर्च का भारत पर सीधे राज करने का जो षडयन्त्र था उसे अन्जाम तक पहुंचाने के लिए जरूरी था एडवीज एंटोनिया अलवीना माईनो को कांग्रेस अध्यक्ष की कुर्सी तक पहुंचाना।


1965 में एडवीज एंटोनिया अलवीना माईनो व राजीब गांधी को साथ लाने के एकदम बाद ही चर्च ने जनवरी 1966 में सोवियत संघ के तासकंद में एक मुसलिम के माध्यम से लाल बहादुर शास्त्री जी को जहर देकर मरवा दिया। मतलब चर्च ने भारत पर कब्जे की ओर पहला कदम आगे बढ़ाया।


चर्च के दबाब व प्रभाव के परिमामस्वारूप ही लाल बहादुर शास्त्री जी का पोस्टमार्टम तक नहीं कवाया गया जबकि उनकी विधवा पत्नी ललिता शास्त्री जी लगातार पोस्टमार्टम की मांग करती रहीं —- आप तो जानते ही हैं कि आज भी भारत में चर्च के आगे किसी की भी नहीं चलती —- जो भी ,र्चच के मार्ग में आया उसे चर्च ने विना कोई समय गंवाय ठिकाने लगा दिया।


शास्त्री जी के कत्ल के बाद चर्च ने एडवीज एंटोनिया अलवीना माईनो के भारत में 15 वर्ष पूरे होने का इन्तजार शुरू किया क्योंकि 15 वर्ष भारत में नागरिकता के लिए एक आवस्यक शर्त है। साथ ही इस समय में शास्त्री जी की मौत पर उठा बबाल भी ठंडा हो गया। इसके साथ ही चर्च ने अपने अगले सिकार की खोज जारी रखी।


भारत पर कब्जे की चर्च की राह में सबसे बड़ी रूकाबट बनकर उभरे प्रखर देशभक्त संजय गांधी जी।

23 जून 1980 को सफदरगंज हबाई अड्डे के पास संजय गांधी जी को चर्च ने एक विमान दुर्घटना में कत्ल करवा दिया। सारे देश में शोर मचा दिया कि इन्दिरा गांधी ने अपने बेटे को मरवा दिया । हर जगह गली मुहल्ले चौराहे पर एक ही चर्चा कि इन्दिरा गांधी जी ने कुर्सी के लिए अपने ही बेटे को मरवा दिया। इस देश में चर्च की अपवाह फैलाओ मशीनरी जो कि 1947 से पहले से ही काम कर रही है उसकी देश के हर कोने तक पकड़ है। इसी अपवाह फैलाओ मशीनरी के षडयन्त्र का सिकार होकर भारतीयों ने चर्च के इसारे पर किए जा रहे कत्लों को दुर्धटनायें मानने की बेबकूफी की ।


बैसे भी भारतीय विशेषकर हिन्दु राजनितीक रूप से बेबकूफ हैं ये किसी को भी बताने जताने की अबस्यकता नहीं। जो हिन्दू मुसलमानों व ईसाईयों द्वारा देश के कई हिस्सों से बेदखल कर दिए जाने के बाबजूद आज भी अपने ही हिन्दू भाईयों के हक छीन कर अल्पसंख्यबाद के नाम पर उन्हीं कातिल मुसलमानों व इसाई को देकर इन कातिलों को ताकतबर बनाने पर तुले हों वो मूर्ख नहीं तो और क्या हैं ?


1980 संजय गांधी जी के कत्ल के बाद चर्च ने रूख किया इन्दिरा गांधी जी की ओर

जिन्हें 1984 में कत्ल करवा दिया गया।

फिर 21 मई 1991 को राजीब गांधी जी का भी कत्ल करवाकर एडवीज एंटोनिया अलवीना माईनो को कांग्रेस के अध्यक्ष के पद पर पहूंचने का मार्ग साफ होग गया।


लोगों को असलियत पता न चल जाए इसके लिए कुछ दिन नौटंकी करने के बाद एडवीज एंटोनिया अलवीना माईनो उर्फ सोनिया गांधी को 1998 में कांग्रेस के पहले दलित कांग्रेस अध्यक्ष सीता राम केसरी जी को अनमानजनक रूप से हटाकर अध्यक्ष बना दिया गया।


1999 में कांग्रेस के तीन ताकतवर नेताओं सरद पवार, पूर्ण ए संगमा व तारिक अनवर ने कांग्रेस पर चर्च द्वारा विदेशी नेतृत्व थोपने के विरोध में एडवीज एंटोनिया अलवीना माईनो के विरूद्ध क्रांति का विगुल बजा दिया। लेकिन गुलाम मानसिकता से ग्रस्त कांग्रेसियों के सहयोग व भाजपा की मूर्खता के फलस्वारूप चर्च ने इन नेताओं को ठिकाने लगाकर इस क्रांति को दबाने में असफलता हासिल की । इसके वाद चर्च को डर सताने लगा । चर्च को लगा कि माधवराव सिंधिया

 व राजेश पायलट जैसे जनता से जुड़ें नेता कभी भी कांग्रेस के अध्यक्षपद के लिए दावेदारी पेसकर चर्च के सारे किए कराय पर पानी फेर सकते हैं। इसी समस्या का समाधान करने किए चर्च ने

11 जून 2000 को राजेश पायलट जी को कार दुर्घटना में मरवा दिया व बाद में एक जहाज दुर्घटना का सहारा लेकर माध्वराव सिंधिया जी को भी कत्ल करवा दिया गया।


इस तरह अब कांग्रेस में कोई भी ऐसा नेता न बचा जो चर्च की एजेंट एडवीज एंटोनिया अलवीना माईनो उर्फ सोनिया गांधी के लिए खतरा उत्पन्न कर सके। अब आप सोचो जरा कि क्या ये संयोग हो सकता है कि एक विदेशी एजेंट के रास्ते में रूकावट पैदा करने में सक्षम आधा दर्ज लोग अपने आप दुर्घटनाओं का सिकार हो जायें।


हमारे विचार में तो ये चर्च द्वारा किए गए कत्ल हैं, अपनी एंजेंट इटालियन ईसाई एडवीज एंटोनिया अलवीना माईनो को ,भारत में स्थापित करने के लिए…….अगर आप अलग राय रखते हैं तो हमें अपनी राय से अबगत जरूर करवाना।




पकड़े जाने के डर से अग्निवेश ने बन्धक पुलिस वालों को अपने साथी बामपंथी आतंकवादियों से छुड़वाया।

 पकड़े जाने के डर से अग्निवेश ने बन्धक पुलिस वालों को अपने साथी बामपंथी आतंकवादियों से छुड़वाया।

हमने 04-09-10 को लिखा था कि किस तरह अग्निवेश ने IBN7 के कार्यक्रम में सवीकार किया कि क्योंकि विहार के मुख्यमन्त्री नितीश कुमार ने माओवादी आतंकवादी आजाद के मारे जाने के विरोध में ब्यान देने व जांच की मांग करने से मना कर दिया इसलिए वामपंथी आतंकवादियों ने नितीश जी को सबक सिखाने व चुनाबों में नुकसान पहुंचाने के लिए पुलिस वालों का अपरहण किया। कार्यक्रम के दौरान अग्निवेश द्वारा इस तरह खुद ही सच्चाई जनता के सामने रखने के कारण एक बात सपष्ट हो गई कि वाकी बचे तीन पुलिस वालों को कोई नुकसान नहीं होने वाला।क्योंकि अब अगर बन्धक पुलिस वालों को छोड़ा न जाता या कोई नुकसान पहुंचाया जाता तो इसकी जांच के दायरे अग्निवेश जरूर फंस जाते। खुद को गिफ्तारी से बचाने के लिए अग्निवेश ने बन्धक पुलिस वालों को छोड़ के निर्देश जारी किए।

हमारा 04-09-2010 को लिखा गया लेख

 


हम अग्निवेश जी को एक लम्बे समय से समझने की कोशिश कर रहे हैं। जितना अभी तक हम समझ पाए हैं अग्निवेश की जिन्दगी का एक अटूट हिस्सा है भारत विरोध व आतंकवादी प्रेम। आतंकवादी चाहे पाक समर्थक हों या फिर चीन समर्थक या फिर रोम समर्थक अग्निवेश को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता उनके पास आतंकवादियों द्वारा किए हर नरसंहार का आसान सपष्टीकरण उपलब्ध रहता है ।


लेकिन इसवार मामला ज्यादा गम्भीर है क्योंकि जो कुछ अग्निवेश ने 03-09-2010 शाम को IBN7 पर आशुतोष के साथ कहा वो सपष्ट संकेत देता है कि इसवार पुलिसवालों का अपरहण सीधे तौर पर अग्निवेश के इसारे पर नितीश कुमार को सबक सिखाने के इरादे से हुआ है।


कार्यक्रम के दौरान जब आशुतोष ने नितीश जी के माओवादियों के प्रति सहानुभूति रखने की बात उठाकर यह कहने की कोशिश की कि क्योंकि नितीश जी के मन में बामपंथी आतंकवादियों के प्रति विशेष सहानुभूति है इसलिए नितीस जी के राज्य में इस तरह का अपहरण जो कि नितीश जी को राजनितीक हानि पहुंचाने के इरादे से किया गया प्रतीत होता है विलकुल गलत है तो अग्निवेश जी ने एकदम भाव में आकर कहा कि अपहरण से पहले उन्होंने (अग्निवेश) ने खुद नितीश जी से वामपंथी आतंकवादी आजाद के मारे जाने की जांच सबन्धी बयान देने की मांग की थी जिसे नितीश जी ने नहीं माना —परिणाम स्वारूप ये अपहरण हुआ।


इसके साथ ही अग्निवेश जी ने बामपंथी आतंकवादियों द्वारा पुलिसवाले के कतल को भी सही ठहराने की कोशिश की


साथ हगी ये भी कहा कि अगर नितीश जी दो लाइन की सटेटमैंट लिखकर मिडीया के सामने दे दें तो बन्धक पुलिस वाले छोड़े जा सकते हैं।


स्टेंटमैंट में नितीश जी को आतंकवादियों से उनकी बात नहीं माने जाने पर माफी मांगनी होगी व आतंकवादियों की बात मानने का बायदा करना होगा मतलब पूरी कानून बयवस्था का आतंकवादियों के सामने पूर्ण समर्पण। इतना ही नहीं अग्निवेश ने तो यहां तक कहा कि कानून ब्याबस्था संविधान की बात कर सरासर गलत है फैसला आतंकवादियों के जंगलराज के अनुशार होना चाहिए।आप ये कार्यक्रम IBN7 पर देख सकते हैं।


इस सारे कार्यक्रम का सार ये है कि क्योंकि नितीश जी ने अग्निवेश जी की बात(आतंकवादी आजाद की मौत की जांच करने की मांग) नहीं मानी इसलिए उनको सबक सिखाने के लिए पुलिस वालों का अपहरण कर इनमें से एक की हत्या कर दी गई वाकियों की हत्या करने की त्यारी है।


हमारे विचार में अग्निवेश को तुरन्त पुलिस के जवानों का अपहरण करवाने के बाद कतल करने के अपराध में गिरफ्तार कर जांच को आगे बढ़ाना चाहिए। हम दावे के साथ कह सकते हैं कि


1. एक तो इन तीन पुलिस वालों की जान बच जाएगी


2. दूसरा अपहरण का सच सबके सामने कुछ दिनों मे आ जायगा


3. तीसरा अग्निवेश ,गौतम नबलखा ,अरूंधती राय जैसे मानबाधिकारवाद के चोले में छुपे देश के गद्दारों की असलियत कानून से सबके सामने आ जाएगी।


 

4. कांग्रेस के नेतृत्व में देशविरोधी धर्मनिर्पेक्ष गिरोह द्वारा आतंकवाद(मुसलिम,वामपंथी 

वामपंथी आतंकवाद से साबधान

 इसाई) का उपयोग किस तरह राजनितीक हथियार के रूप में किया जा रहा है इसकी सच्चाई देश की भोली-भाली गरीब जनता के सामने उजागर हो जायगी।


5. अन्त में न जाने और कितने पुलिस व आम नागरिकों के जान-माल की रक्षा इन गद्दारों से हो सकेगी।


नितीश जी जल्दी से अग्निवेश को गिफ्तार कर सच्चाई को जनता के सामने लाकर देश को बचाने में अपनी भूमिका का निर्वाहन करें ।


अगर नितीश जी ये नहीं करते हैं तो छतीशगढ़ के मुख्यमन्त्री जी को अग्निवेश को उसके गिरोह सहित गिफ्तार कर ये सच्चाई सबके सामने लानी चाहिए।


अगर वो भी इन गद्दारों को हाथ नहीं डालते हैं तो फिर भगवा क्रांतिकारियों के साकार रूप के सामने आने का इन्तजार करना चाहिए ताकि वो हिन्दू क्रांतिकारी ऐसे गद्दारों व गद्दारों के मददगारों को चौराहे पर गोली से उड़ाकर देश की रक्षा कर सकें।


क्या आप डा. भीमराव अम्बेडकर जी को जानते हैं?

 

 

19वीं शताब्दी में अनेक अवतारी महापुरूषों ने भारत की धरती पर जन्म लिया। 14 अप्रैल 1881 का दिन ऐतिहासिक दिन

था। इस दिन डा. भीमराव अम्बेडकर जी का जन्म हुआ। वर्षप्रतिपदा 1889 को डा. हैडगेवार जी का जन्म हुआ । 1983 में

डा. हेडगेवार जी के जन्मदिन वर्षप्रतिपदा पर समरसता शब्द डा. अम्बेडकर जी की ही देन है। परमपूजनीय गुरूगोविन्द सिंह

ने क्रांति का सूत्रपात किया। सिंहशब्द नाम ने न्यूनता ग्रंथि से ग्रसित करोंड़ों के समाज को आन्दोलित , प्रेरित करने का

यशस्वी प्रयत्न किया।

अवतारीमहापुरूषों का जीवन वाल्यकाल से ही संकटों में गुजरता है जिस प्रकार भगवान राम ,भगवान कृष्ण , स्वामी

 

विवेकानन्द व गुरूगोविन्द सिंह जी का बाल्यकाल संकटों व संघर्षों में गुजरा—डा हेडगेवार जी का वाल्यकाल भी संकटों के

 

दौर से ही गुजरा—-डा. हेडगवार जी ने 13 वर्ष की आयु में ही अपने माता-पिता को एक ही चिता में मुखाग्नि देने के बाद

 

सारा जीवन कष्टों व संघर्षों में बिताया।घर में चाय तक पीने के लिए पैसे उपलब्ध नहीं रहते थे।

          उसी प्रकार डा. भीमराव अम्बेडकर जी का जीवन भी कष्टों व संघर्षों  के लिए ही जाना जाता है। डा भीमराव

 

अम्बेडकर जी ने भी न्यूनता ग्रंथि से ग्रसित करोंड़ों हिन्दूओं को एक नई राह दिखाई वो राह जो उनके अन्दर आत्मविश्वास

 

व आशा का संचार करती थी।

 

डा. भीम राव जी के एक प्रिय गुरू जी का अन्तिम नाम अम्बेडकर था उन्हीं के नाम पर डा. भीमराव जी का नाम भीम

 

राव अम्बेडकर हुआ। डा. भीमराव अम्बेडकर जी की माता जी का देहांत तो 5वर्ष की आयु में ही हो गया । फिर भी उन्हें

 

अपने पिता जी से घर में ही अच्छे संस्कार मिले। मुम्बई में एक ही कमरे में दोनों रहते थे ।एक सोता था तो एक पढ़ता

 

था इतना छोटा कमरा था वो। आगे चलकर इन्हें केअसकर नाम के व्यक्ति( सज्जन) मिले जिन्होंने इनका परिचय बड़ौदा के

 

महाराजा सहजराव गायकवाड़ जी से करवाया ।गायकवाड़ जी ने इन्हें छात्रवृति लगा दी । गायकवाड़ जी ने अम्बेडकर जी को

 

विदेश भेजा बाद में लन्दन गए। लन्दन में खरीदी पुस्तकें मालबाहक जहाज में भेजने के कारण डूब गईं जिनका मुआवजा

 

2000 रूपए मिला फिर बड़ौदा गए। Ph. D करने पर बड़ौदा आने के बाद अम्बेडकर जी को तरह तरह की समस्याओं का

 

सामना करना पड़ा। जिससे उनके मन में पीड़ा तो हुई पर कभी उनके मन में कटुता पैदा नहीं हुई।

 

 

फिर उनके मन में LAW की पढ़ाई करने का विचार आया। कोहलापुर के महाराजा ने उन्हें लंदन भेजा। डा. अम्बेडकर जी ने

 

संस्कृत सीखी ।स्पृश्य-अस्पृश्य क्या है जानने का प्रयत्न किया।वेद,  उपनिषद् , भगवद गीता सबका डटकर अध्ययन किया –

 

-साहित्य लिखा। डा.अम्बेडकर जी अन्त में इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि छुआ-छूत मुगलकाल की देन है । हिन्दू धर्म में इसका

 

कोई स्थान नहीं। आर्य-द्रविड़ भेद पैदा करना अंग्रेजों की हिन्दूओं को आपस में लड़वाने की चाल है ऐसा उन्होंने खुद महसूस

 

किया व ये सब उन्होंने लोगों को समझाने का भी प्रयत्न किया। आर्य बाहर से नहीं आए ये डा. अम्बेडकर जी ने कहा।

 

 

 WHO ARE SHUDRAS में अम्बेडकर जी ने कहा जिस हिन्दू धर्म का ज्ञान इतना श्रेष्ठ है कि उस ज्ञान के प्रभाव से चींटी,

 

सांप, तुलसी मतलब छोटे से चोटे जीव से लेकर पेड़-पौधों तक की पूजा करने वाला हिन्दू,  हिन्दू को न छुए ऐसा कैसे हो

 

सकता है ?

 

 

उन्होंने सपष्ट कहा कि समस्या धर्म की नहीं समस्या मानसिकता की है खासकर स्वर्ण मानसिकता जो गुलामी के प्रभाव के

 

कारण विकृत हो चुकी है जिसे बदलने की जरूरत है । यदि स्वर्ण मानसिकता बदलेगी तो हिन्दू समाज बदलेगा ।

 

 

उन्होंने सत्याग्रह का शस्त्र उठाया। भगवद गीता को हथियार बनाया।तालाब के पानी हेतु—महाड़ सत्यग्रह ।नासिक के

 

कालराम मन्दिर में प्रवेश हेतु सत्याग्रह किया लाठियां खाईं।

 

 

1935 में रूढ़ीबादिता व भ्रम के शिकार लोगों को Shock TREATMENT देते हुए कहा सुधरना है तो सुधर जाओ वरना मैं

 

धर्मांतरण कर लूंगा। जबकि वासत्विकता यह है कि उन्होंने कभी धर्मांतरण किया ही नहीं। उनके सारे सहित्य में हिन्दू राष्ट्र

 

शब्द का प्रयोग बार-बार हुआ है उन्होंने जातिविहीन समाज रचना, राष्ट्र संगठन सब पर लिखा है।

 

 

1947 में मुसलिम अलगावबाद के परिणास्वारूप देश का विभाजन हो गया । जिस पर अम्बेडकर जी ने सपष्ट कहा कि अब

 

जबकि मुसलमानों को अलग देश दे दिया गया है तो हमें पाकिस्तान से सब हिन्दूओं को भारत ले आना चाहिए व भारत से

 

सब मुसलमानों को पाकिस्तान भेज देना चाहिए ताकि मुसलमान अपने घर पाकिस्तान में सुख से रहें और हिन्दू अपने घर

 

भारत में सुख से रहें। आज चारों ओर फैले मुसलिम आतंकवाद को देखकर आप खुद समझ सकते हैं कि डा. अम्मवेडकर

 

जी कितने दूरदर्शी थे।

 

विभाजन के बाद Hindu Code Bill अम्बेडकर जी की हिन्दू समाज को सबसे बढ़ी देन है । इसी में अम्बेडकर जी ने हिन्दू

 

किसे कहते हैं, इसकी व्याख्या की जिसमें सपष्ट कहा गया कि विदेशी धारणाओं इस्लाम और इसाईयत को छोड़कर भारत में

 

रहने वाले (हिन्दू-सिख-बौद्ध-जैन—-इत्यादि)  सब लोग हिन्दू हैं।

 

 

ये उन्हीं की दूरदर्शिता थी कि उन्होंने  SC/St के नाम से वंचित हिन्दूओं के लिए अलग से आरक्षण की व्यवस्था बनाकर

 

अंग्रेजों के बड़े पैमाने पर धर्मांतरण करने के षडयन्त्र को असफल किया।

 

 

अम्बेडकर जी ने सबको राजकीय समानता दिलवाते हुए सबके लिए एक ही वोट का प्रावधान किया। डा. भीमराव अम्बेडकर

 

जी ने 1965 में कहा कि वेशक मेरा जन्म हिन्दू धर्म में हुआ है पर हिन्दू के रूप में मैं मरूंगा नहीं ।

 

 

अपनी जिन्दगी में जाति के कारण भी कई तरह के असहनीय कष्ट सहने के बाद भी उन्होंने हिन्दू हित के लिए काम करते

 

हुए अन्त में बौद्ध मत अपनाया जो कि हिन्दू समाज का अपना ही मत है इसलिए उसे धर्मांतरण नहीं कहा जा सकता।

 

उन्होंने किसी विदेशी अबधारणा को नहीं अपनाया। ये भी उनके मन में अपने देश-संस्कृति के प्रति अटूट प्रेम को दर्शाता है।

 

 

 

 

हैदराबाद के निजाम द्वारा 40 करोड़ ( आज आप अनुमान लगा सकते हैं कि कितना अधिक धन बनता है ये) व औरंगावाद

 

में बंगला,जमीन का प्रलोभन देने के बाबजूद डा. भीम राव अम्बेडकर जी ने अत्याचारी इस्लाम स्वीकार नहीं किया ।

 

 

इसी तरह उन्हें ईसाईयों द्वारा ईसाईयत अपनाने के लिए भी कई तरह के प्रलोभन दिए गए लेकिन उन्होंने ईसाई बनना भी

 

सवीकार नहीं किया।

 

 

 वो अच्छी तरह जानते थे कि ये दोनों विदेशी अवधारणायें देशहित-हिन्दू हित में नहीं हैं ।

 

 

उन्होंने अपने वंचित हिन्दू भाईयों  को सपष्ट आदेश दिया कि बेशक अपने हिन्दू भाईयों में कमियां हैं वो गुलामी के प्रभाव

 

के कारण स्वर्ण मानसिकता के शिकार हैं पर अत्याचारी मुसलमान व लुटेरे ईसाई किसी भी हालात में हमारे हित में नही हो

 

सकते ।

आज जिस तरह धरमांतरित हिन्दूओं को दलित व काले ईसाई कहकर पुकारा जा रहा है व धर्मांतरित हिन्दूओं को जिस

 

तरह पाकिस्तान व बंगलादेश में मस्जिदों में बमविस्फोट कर मारा जा रहा है ,मुहाजिर कहा जा रहा है भारत में भी

 

मुसलिम बहुल क्षेत्रों में निशाना बनाया जा रहा है उसे देख कर आप समझ सकते हैं कि डा. भीमराव अम्वेडकर जी कितने

 

दूरदर्शी व देशहित-हिन्दूहित में कितने विस्तार से सोचने व निर्णय लेने में समर्थ थे।

 

 

दुनिया को धर्म सिखाना ही भारत की विभूतियों का काम है Deep Cultural Unity in our Society(India) में लिखते हैं कि आपस

 

में झगड़ों के बाबजूद हिन्दू समाज एक है और एक रहेगा । मानसिकता में परिवर्तन के साथ ही ये झगड़े भी समाप्त हो

 

जायेंगे।

1916 में लखनऊ पैक्ट में 13% मुसलमानों को 30% सीटें देने का उन्होंने कांग्रेस के हिन्दूविरोधी रूख के बाबजूद डटकर विरोध

 

किया। उन्होंने कहा कि जो बात हिन्दू हित की नहीं वो देशहित की कैसे हो सकती है।आज हर देशभक्त को अपने घर में डा.

 

भीमराव अम्बेडकर जी का चित्र लगाना चाहिए व उनके बताए मार्ग पर चलने का प्रयत्न करना चाहिए।

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