पकड़े जाने के डर से अग्निवेश ने बन्धक पुलिस वालों को अपने साथी बामपंथी आतंकवादियों से छुड़वाया।

 पकड़े जाने के डर से अग्निवेश ने बन्धक पुलिस वालों को अपने साथी बामपंथी आतंकवादियों से छुड़वाया।

हमने 04-09-10 को लिखा था कि किस तरह अग्निवेश ने IBN7 के कार्यक्रम में सवीकार किया कि क्योंकि विहार के मुख्यमन्त्री नितीश कुमार ने माओवादी आतंकवादी आजाद के मारे जाने के विरोध में ब्यान देने व जांच की मांग करने से मना कर दिया इसलिए वामपंथी आतंकवादियों ने नितीश जी को सबक सिखाने व चुनाबों में नुकसान पहुंचाने के लिए पुलिस वालों का अपरहण किया। कार्यक्रम के दौरान अग्निवेश द्वारा इस तरह खुद ही सच्चाई जनता के सामने रखने के कारण एक बात सपष्ट हो गई कि वाकी बचे तीन पुलिस वालों को कोई नुकसान नहीं होने वाला।क्योंकि अब अगर बन्धक पुलिस वालों को छोड़ा न जाता या कोई नुकसान पहुंचाया जाता तो इसकी जांच के दायरे अग्निवेश जरूर फंस जाते। खुद को गिफ्तारी से बचाने के लिए अग्निवेश ने बन्धक पुलिस वालों को छोड़ के निर्देश जारी किए।

हमारा 04-09-2010 को लिखा गया लेख

 


हम अग्निवेश जी को एक लम्बे समय से समझने की कोशिश कर रहे हैं। जितना अभी तक हम समझ पाए हैं अग्निवेश की जिन्दगी का एक अटूट हिस्सा है भारत विरोध व आतंकवादी प्रेम। आतंकवादी चाहे पाक समर्थक हों या फिर चीन समर्थक या फिर रोम समर्थक अग्निवेश को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता उनके पास आतंकवादियों द्वारा किए हर नरसंहार का आसान सपष्टीकरण उपलब्ध रहता है ।


लेकिन इसवार मामला ज्यादा गम्भीर है क्योंकि जो कुछ अग्निवेश ने 03-09-2010 शाम को IBN7 पर आशुतोष के साथ कहा वो सपष्ट संकेत देता है कि इसवार पुलिसवालों का अपरहण सीधे तौर पर अग्निवेश के इसारे पर नितीश कुमार को सबक सिखाने के इरादे से हुआ है।


कार्यक्रम के दौरान जब आशुतोष ने नितीश जी के माओवादियों के प्रति सहानुभूति रखने की बात उठाकर यह कहने की कोशिश की कि क्योंकि नितीश जी के मन में बामपंथी आतंकवादियों के प्रति विशेष सहानुभूति है इसलिए नितीस जी के राज्य में इस तरह का अपहरण जो कि नितीश जी को राजनितीक हानि पहुंचाने के इरादे से किया गया प्रतीत होता है विलकुल गलत है तो अग्निवेश जी ने एकदम भाव में आकर कहा कि अपहरण से पहले उन्होंने (अग्निवेश) ने खुद नितीश जी से वामपंथी आतंकवादी आजाद के मारे जाने की जांच सबन्धी बयान देने की मांग की थी जिसे नितीश जी ने नहीं माना —परिणाम स्वारूप ये अपहरण हुआ।


इसके साथ ही अग्निवेश जी ने बामपंथी आतंकवादियों द्वारा पुलिसवाले के कतल को भी सही ठहराने की कोशिश की


साथ हगी ये भी कहा कि अगर नितीश जी दो लाइन की सटेटमैंट लिखकर मिडीया के सामने दे दें तो बन्धक पुलिस वाले छोड़े जा सकते हैं।


स्टेंटमैंट में नितीश जी को आतंकवादियों से उनकी बात नहीं माने जाने पर माफी मांगनी होगी व आतंकवादियों की बात मानने का बायदा करना होगा मतलब पूरी कानून बयवस्था का आतंकवादियों के सामने पूर्ण समर्पण। इतना ही नहीं अग्निवेश ने तो यहां तक कहा कि कानून ब्याबस्था संविधान की बात कर सरासर गलत है फैसला आतंकवादियों के जंगलराज के अनुशार होना चाहिए।आप ये कार्यक्रम IBN7 पर देख सकते हैं।


इस सारे कार्यक्रम का सार ये है कि क्योंकि नितीश जी ने अग्निवेश जी की बात(आतंकवादी आजाद की मौत की जांच करने की मांग) नहीं मानी इसलिए उनको सबक सिखाने के लिए पुलिस वालों का अपहरण कर इनमें से एक की हत्या कर दी गई वाकियों की हत्या करने की त्यारी है।


हमारे विचार में अग्निवेश को तुरन्त पुलिस के जवानों का अपहरण करवाने के बाद कतल करने के अपराध में गिरफ्तार कर जांच को आगे बढ़ाना चाहिए। हम दावे के साथ कह सकते हैं कि


1. एक तो इन तीन पुलिस वालों की जान बच जाएगी


2. दूसरा अपहरण का सच सबके सामने कुछ दिनों मे आ जायगा


3. तीसरा अग्निवेश ,गौतम नबलखा ,अरूंधती राय जैसे मानबाधिकारवाद के चोले में छुपे देश के गद्दारों की असलियत कानून से सबके सामने आ जाएगी।


 

4. कांग्रेस के नेतृत्व में देशविरोधी धर्मनिर्पेक्ष गिरोह द्वारा आतंकवाद(मुसलिम,वामपंथी 

वामपंथी आतंकवाद से साबधान

 इसाई) का उपयोग किस तरह राजनितीक हथियार के रूप में किया जा रहा है इसकी सच्चाई देश की भोली-भाली गरीब जनता के सामने उजागर हो जायगी।


5. अन्त में न जाने और कितने पुलिस व आम नागरिकों के जान-माल की रक्षा इन गद्दारों से हो सकेगी।


नितीश जी जल्दी से अग्निवेश को गिफ्तार कर सच्चाई को जनता के सामने लाकर देश को बचाने में अपनी भूमिका का निर्वाहन करें ।


अगर नितीश जी ये नहीं करते हैं तो छतीशगढ़ के मुख्यमन्त्री जी को अग्निवेश को उसके गिरोह सहित गिफ्तार कर ये सच्चाई सबके सामने लानी चाहिए।


अगर वो भी इन गद्दारों को हाथ नहीं डालते हैं तो फिर भगवा क्रांतिकारियों के साकार रूप के सामने आने का इन्तजार करना चाहिए ताकि वो हिन्दू क्रांतिकारी ऐसे गद्दारों व गद्दारों के मददगारों को चौराहे पर गोली से उड़ाकर देश की रक्षा कर सकें।


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One Comment

  1. yashvant
    Posted मार्च 28, 2011 at 4:17 अपराह्न | Permalink | प्रतिक्रिया

    ये हरामखोर बाबा रामदेव के साथ जबरदस्ती घुस गया है कुत्ता साला इसका मकसद कुछ और है ! शायद विनायक सेन को छुडवा देगा ….

आपके कुछ न कहने का मतलब है आप हमसे सहमत हैं

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