6-6 भारतयीयों की लाशें गिराकर चर्च ने एंटोनिया उर्फ सोनिया गांधी को अध्यक्ष बनाया है?

6-6 भारतयीयों की लाशे गिराकर चर्च ने

एंटोनिया उर्फ सोनिया गांधी को कांग्रेस अध्यक्ष बनाया है?


कुछ बातें ऐसी होती हैं जिन्हें लाख कोशिश पर भी दबाया नहीं जा सकता।इन्हीं बातों में से एक है चर्च द्वारा योजनाबद्ध तरीके से एक फासीवादी इटालियन स्टीफैनो व पाओला माईनों की औलाद एडवीज एंटोनिया अलवीना माईनो उर्फ सोनिया गांधी को कांग्रेस अध्यक्ष बनाकार गांधी परिवार की विरासत पर कब्जे के साथ ही शहीदों द्वारा 1857 से 1947 तक किए गए संघर्ष व बलिदानों के परिमामस्वारूप भारतीयों के हाथों आई सत्ता को भारतीयों वोले तो हिन्दूओं से छीन कर सीधे चर्च के हाथों तक पहुंचाना।


ये कहानी शुरू होती है राजीब गांधी जी के पढ़ाई के लिए विदेश जाने के साथ ही। जैसे ही राजीब गांधी जी पढ़ाई के लिए लन्दन पहुंचे चर्च ने उन्हें अपने जाल में फंसाने के लिए जाल बुनना शुरू कर दिया। अपने इस जाल को अंजाम तक पहुंचाने के लिए चर्च की निगाह पड़ी लुसियाना इटली में कैथोलिक परिवार में जन्मी व कैथोलिक स्कूल में पढ़ाई कर रही फासीवादी स्टीफैनो व पाओला माईनों की औलाद एडवीज एंटोनिया अलवीना माईनो पर । चर्च ने एंटोनिया को 1964 में Cambridge शहर के The bell education Trust में अंग्रेजी सीखने के नाम पर प्रवेश दिलवाया। राजीब गांधी जी को अपने षडयन्त्र में फांसने के उद्देश्य से चर्च नें 1965 में राजीब गांधी जी की मुलाकात एडवीज एंटोनिया अलवीना माईनो से ग्रीक रैस्तरां में करवाई।


1968 में इन्दिरा गांधी जी जो कि पूरी तरह इस विदेशी अंग्रेज से राजीब गांधी जी की शादी के विरूद्ध थीं पर ततकालीन सोवियतसंघ से दबाबा वनवाकर एडवीज एंटोनिया अलवीना माईनो की शादी भोले-भाले राजीब गांधी जी से करवा दी गई। इतिहास गवाह है कि चर्च ने कभी भी विदेशी भूमि पर कब्जा जमाने के लिए संयम का परिचय नहीं दिया ।यहां भी शादी तो हो गई लोकिन चर्च का भारत पर सीधे राज करने का जो षडयन्त्र था उसे अन्जाम तक पहुंचाने के लिए जरूरी था एडवीज एंटोनिया अलवीना माईनो को कांग्रेस अध्यक्ष की कुर्सी तक पहुंचाना।


1965 में एडवीज एंटोनिया अलवीना माईनो व राजीब गांधी को साथ लाने के एकदम बाद ही चर्च ने जनवरी 1966 में सोवियत संघ के तासकंद में एक मुसलिम के माध्यम से लाल बहादुर शास्त्री जी को जहर देकर मरवा दिया। मतलब चर्च ने भारत पर कब्जे की ओर पहला कदम आगे बढ़ाया।


चर्च के दबाब व प्रभाव के परिमामस्वारूप ही लाल बहादुर शास्त्री जी का पोस्टमार्टम तक नहीं कवाया गया जबकि उनकी विधवा पत्नी ललिता शास्त्री जी लगातार पोस्टमार्टम की मांग करती रहीं —- आप तो जानते ही हैं कि आज भी भारत में चर्च के आगे किसी की भी नहीं चलती —- जो भी ,र्चच के मार्ग में आया उसे चर्च ने विना कोई समय गंवाय ठिकाने लगा दिया।


शास्त्री जी के कत्ल के बाद चर्च ने एडवीज एंटोनिया अलवीना माईनो के भारत में 15 वर्ष पूरे होने का इन्तजार शुरू किया क्योंकि 15 वर्ष भारत में नागरिकता के लिए एक आवस्यक शर्त है। साथ ही इस समय में शास्त्री जी की मौत पर उठा बबाल भी ठंडा हो गया। इसके साथ ही चर्च ने अपने अगले सिकार की खोज जारी रखी।


भारत पर कब्जे की चर्च की राह में सबसे बड़ी रूकाबट बनकर उभरे प्रखर देशभक्त संजय गांधी जी।

23 जून 1980 को सफदरगंज हबाई अड्डे के पास संजय गांधी जी को चर्च ने एक विमान दुर्घटना में कत्ल करवा दिया। सारे देश में शोर मचा दिया कि इन्दिरा गांधी ने अपने बेटे को मरवा दिया । हर जगह गली मुहल्ले चौराहे पर एक ही चर्चा कि इन्दिरा गांधी जी ने कुर्सी के लिए अपने ही बेटे को मरवा दिया। इस देश में चर्च की अपवाह फैलाओ मशीनरी जो कि 1947 से पहले से ही काम कर रही है उसकी देश के हर कोने तक पकड़ है। इसी अपवाह फैलाओ मशीनरी के षडयन्त्र का सिकार होकर भारतीयों ने चर्च के इसारे पर किए जा रहे कत्लों को दुर्धटनायें मानने की बेबकूफी की ।


बैसे भी भारतीय विशेषकर हिन्दु राजनितीक रूप से बेबकूफ हैं ये किसी को भी बताने जताने की अबस्यकता नहीं। जो हिन्दू मुसलमानों व ईसाईयों द्वारा देश के कई हिस्सों से बेदखल कर दिए जाने के बाबजूद आज भी अपने ही हिन्दू भाईयों के हक छीन कर अल्पसंख्यबाद के नाम पर उन्हीं कातिल मुसलमानों व इसाई को देकर इन कातिलों को ताकतबर बनाने पर तुले हों वो मूर्ख नहीं तो और क्या हैं ?


1980 संजय गांधी जी के कत्ल के बाद चर्च ने रूख किया इन्दिरा गांधी जी की ओर

जिन्हें 1984 में कत्ल करवा दिया गया।

फिर 21 मई 1991 को राजीब गांधी जी का भी कत्ल करवाकर एडवीज एंटोनिया अलवीना माईनो को कांग्रेस के अध्यक्ष के पद पर पहूंचने का मार्ग साफ होग गया।


लोगों को असलियत पता न चल जाए इसके लिए कुछ दिन नौटंकी करने के बाद एडवीज एंटोनिया अलवीना माईनो उर्फ सोनिया गांधी को 1998 में कांग्रेस के पहले दलित कांग्रेस अध्यक्ष सीता राम केसरी जी को अनमानजनक रूप से हटाकर अध्यक्ष बना दिया गया।


1999 में कांग्रेस के तीन ताकतवर नेताओं सरद पवार, पूर्ण ए संगमा व तारिक अनवर ने कांग्रेस पर चर्च द्वारा विदेशी नेतृत्व थोपने के विरोध में एडवीज एंटोनिया अलवीना माईनो के विरूद्ध क्रांति का विगुल बजा दिया। लेकिन गुलाम मानसिकता से ग्रस्त कांग्रेसियों के सहयोग व भाजपा की मूर्खता के फलस्वारूप चर्च ने इन नेताओं को ठिकाने लगाकर इस क्रांति को दबाने में असफलता हासिल की । इसके वाद चर्च को डर सताने लगा । चर्च को लगा कि माधवराव सिंधिया

 व राजेश पायलट जैसे जनता से जुड़ें नेता कभी भी कांग्रेस के अध्यक्षपद के लिए दावेदारी पेसकर चर्च के सारे किए कराय पर पानी फेर सकते हैं। इसी समस्या का समाधान करने किए चर्च ने

11 जून 2000 को राजेश पायलट जी को कार दुर्घटना में मरवा दिया व बाद में एक जहाज दुर्घटना का सहारा लेकर माध्वराव सिंधिया जी को भी कत्ल करवा दिया गया।


इस तरह अब कांग्रेस में कोई भी ऐसा नेता न बचा जो चर्च की एजेंट एडवीज एंटोनिया अलवीना माईनो उर्फ सोनिया गांधी के लिए खतरा उत्पन्न कर सके। अब आप सोचो जरा कि क्या ये संयोग हो सकता है कि एक विदेशी एजेंट के रास्ते में रूकावट पैदा करने में सक्षम आधा दर्ज लोग अपने आप दुर्घटनाओं का सिकार हो जायें।


हमारे विचार में तो ये चर्च द्वारा किए गए कत्ल हैं, अपनी एंजेंट इटालियन ईसाई एडवीज एंटोनिया अलवीना माईनो को ,भारत में स्थापित करने के लिए…….अगर आप अलग राय रखते हैं तो हमें अपनी राय से अबगत जरूर करवाना।




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2 Comments

  1. अनाम
    Posted मार्च 10, 2012 at 7:23 पूर्वाह्न | Permalink | प्रतिक्रिया

    सोनीया गाधी को भी नही छोरना छोरना चाहिए

  2. Pratik A Patel
    Posted नवम्बर 12, 2010 at 5:14 अपराह्न | Permalink | प्रतिक्रिया

    Very Interesting and Knowledgeble Information

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