Monthly Archives: अक्टूबर 2010

विषकन्या के कांग्रेस पर कब्जे के बाद कांग्रेस का गद्दारी के मार्ग से पीछे हटना नामुकिन !

कांग्रेस का हाथ गद्दारों के साथ !
सच कहें तो गद्दारों की इस पार्टी में सुधार की अब कोई उम्मीद नजर नहीं आती। हमारा मानना था कि निचले सतर पर कॉंग्रेस में वेहद देशभक्त कार्यकरता हैं जिसका प्रभाब पहली पंक्ति के हिन्दूविरोधी-देशविरोधी नेताओं पर एक न एक दिन जरूर पढ़ेगा ।
लेकिन लगता है कि विदेशी इसाई मिसनरी विषकन्या के कांग्रेस पर कब्जे के बाद ऐसा होना लगभग नामुकिन सा हो गया है। जिस गद्दारी की शुरूआत इस भारत विरोधी की गुलाम सरकार ने 2004 में अर्धसैनिकबलों के जबानों को शहीद होने पर मिलने वाले पैसे में कटौती के साथ की वो अब गद्दारी का सतर इस हद तक पहुंच गया है कि भारतीय सैनिकों पर हमले करने बाले पत्तथरबाज आतंकवादियों को UPA सरकार ने पांच-पांच लाख देकर अपनी गद्दारी का प्रमाण देश के सामने रखा।
2004 में अर्धसैनिक बलों के शहीद जवानों के परिबार बालों को मिलने वाली राशि में कटौती करते वक्त कुतर्क दिया गया कि सरकार के पास पैसे नहीं हैं लेकिन आतंकवादियों को देने के लिए सरकार के पास पैसों की कोई कमी नहीं ये इस फैसले से सिद्ध होता है।
लोग कह रहे हैं कि इस विदेशी की कुलाद ने भारत समर्थक RSS की तुलना भारतविरोधी आतंकवादी गिरोह SIMI से कर दी हम पूछते हैं कि इस विदेशी की गुलाम जिस सरकार ने आतंकवादियों को मारने वाले सैनिकों पर केश दर्ज किए ,यहां तक कि पूरी की परी बटालियन को कटघरे में खड़ा कर दिया उस बिदेशी की कुलाद देशभक्त संगठन के वारे में और कह भी क्या सकती है?
सच्चाई यह है कि सेना किसी भी सरकार की ताकत होती है और सेना द्वारा देशहित में उठाए गए हर कदम की कोई भी देशभक्त सरकार समर्थन करती ही है लेकिन यहां मामला दूसरा है।
क्योंकि यह विदेशी इटालियन है इसे भारत की सेना परायी लगती है अपनी नहीं क्योंकि इसकी अपनी सेना तो इटालिन व युरोपियन सेना है । शायद इसीलिए ये विदेशी हर वक्त अपनी गुलाम सरकार पर भारतीय सेना को कमजोर करने वाले कदम उठाने का दबाब बनाती है। इसी दबाब की बजह से आज तक गुजरात से लेकर कशमीर घाटी तक सुरक्षाबलों के दर्जनों जवान जेलों में डाले जा चुके हैं व सैंकड़ों पर मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं।
अब जिसे, भारतीय सेना जो कि सरकार के इसारे पर ही हर काम करती है सिवाय देश की रक्षा के — से ही डर लगता हो —जिसे ये सेना अपनी दुशमन लगती हो —-भल उसे प्रधानमंत्री बनने से रोकने वाले देसभक्त संगठन क्या कभी अपने लगेंगे— नहीं न ।
ऐसे में सोचने वाला विषय यह है कि जिस विदेशी के निशाने पर भारतीय सेना है उसके निशाने पर भला देशभक्त संगठन क्यों नहीं होंगे ?
क्या आपको याद नहीं कि किस तरह पोटा हटवाकर इस भारत विरोधी इसाई ने भारत विरोधी आतंकवादियों की मदद की।मजेदारबात तो यह है कि इस विदेशी का तो भारतीय सर्वोच न्यायालय तक पर भरोसा नहीं बरना ऐसे कैसे हो सकता था कि देश पर हमला करने का जघन्य अपराध कतरने वाला आतंकवादी अफजल आज तक जिन्दा रहता ? वो भी तब जब माननीय न्यायालय ने इस भारतविरोधी आतंकवादी की फांसी की तारीख 19 नम्मवर 2006 तय की हो और आज 19 नम्मवर 2010 आने वाला हो।
अब आप सोचो कि भारतीय सेना व सर्वोच न्यायलय क्या सिर्फ RSS के हैं या फिर सारे देश के ? क्या ये दोनों संघ के इसारे पर काम करते हैं या फिर भारत सरकार के इसारे पर ?
जब इस विदेशी ने इन दोनों ही समानन्नीय संस्थाओं को बदनाम करने के लिए बार-बार सराकर पर दबाब बनाया हो व सरकार ने वार-बार इस दबाब के आगे झुककर इन दोनों ही संस्थाओं का अपमान किया हो तो फिर आप कैसे उम्मीद कर सकते हैं कि इस विदेशी के दबाब में ये सरकार किसी भी देशभक्त संगठन को बदनाम करने में कोई कसर वाकी छोड़ेगी ?
आज स्वामीराम देब जी हर भारतीय चाहे वो अमीर हो या गरीब को दिन-रात एक कर स्वस्थ जिन्दगी जीने का तरीका बताने के साथ-साथ भारतीयों को भारतीय संस्कृति का हर वो पहलू याद करवा रहे हैं जिसे वो विदेशी आक्रमणकारियों के गुलामीकाल के दौरान ही यातनाओं के परिणामस्वारूप भुला चुके थे।
आज स्वामीराम देब संसार की एक सबसे बड़े भारतीय संगठन के प्रमुख हैं लेकिन क्या इस विदेशी की गुलाम सरकार ने उन्हें Z+ सुरक्षा पलब्ध करवाई नहीं न क्यों ?
सिर्फ इसलिए क्योंकि जिस स्वामीरामदेब जी का नाम सुनने पर हर देसभक्त भारतीय का सिर गर्व से ऊंचा हो जाता है वही रामदेब इस विदेशी को कभी अपना नहीं लगता ?
आज भारत के इसके जैसे कितने ही शत्रु ऐसे हैं जिन्हें इस विदेशी की गुलाम सरकार देशभक्त भारतीयों की खून-पसीने की कमाई से सुरक्षा उपलब्ध करवाकर इनकी हिन्दू क्रांतिकारियों से रक्षा कर रही है ?
लेकिन गद्दारों की सरदार कब तक खैर मनाएगी एक न एक दिन ये सब गद्दार देशभक्त भारतीयों के हाथों अपने कुकर्मों का अन्जाम हर हाल में भुक्तेंगे ही…

माननीय न्यायालय का धर्मनिर्पेक्ष गिरोह के मुंह पर जोरदार तमाचा!

पिछले 20 वर्षों से जिस मन्दिर को हिन्दूविरोधी-देशविरोधी धर्मनिरपेक्ष गिरोह मसजिद बताकर देश की जनता को गुमराह कर हिन्दूओं को बदनाम कर रहा था ।माननीय न्यायालय ने यह कहते हुए इस गिरोह के झूठ का परदाफास कर दिया कि यह मर्यादापुरूसोत्तम भगवान श्रीराम जी की जन्म भूमि है। हम पहले भी लिख चुके हैं कि जब 1986 में माननीय न्यायालय के आदेश पर मन्दिर में पूजा अर्चना की शुरूआत कांग्रेस के नेताओं ने की तो फिर ऐसा कैसे सम्भव है कि देशभर के क्रांतिकतारियों द्वारा मन्दिर के जीर्णोद्धार के लिए की गई कार सेवा के बाद ये मन्दिर मसजिद में बदल जाए।
इस गिरोह की वेशर्मी देखो कि जिस दिन कारसेबकों ने विदेशी आक्रमणकारी मुसलिम आतंकवादी बाबर द्वारा मन्दिर से की गई छेड़छाड़ को कारसेवा कर ठीक किया उसी दिन इस गद्दारों के हिन्दूविरोधी-देशविरोधी धर्मनिरपेक्ष गिरोह ने मर्यादापुरूसोत्तम भगवान श्रीराम जी के भव्य मन्दिर के निर्माण को रोकने के लिए इस तपोभीमि को आतंकवादी के नाम कर देने का बीड़ उठा लिया।
ये भगवान का लाख शुक्र है कि माननीय न्यायधीश इस हिन्दूविरोधी-देशविरोधी धर्मनिरपेक्ष गिरोह के दुषप्रचार व विदेशी इसाई मिसनरी विषकन्या की गुलाम UPA सरकार के दबाब में नहीं आए वरना आज गद्दारों का ये गिरोह देश को एक ऐसी आग में धकेल देता जिमें न जाने कितने निर्दोशों की जान चली जाती।
मजे की बात तो यह है कि मुसलिम जज ने भी माना कि यह मर्यादापुरूसोत्तम भगवान श्रीराम जी की जन्मस्थली है। आपको ये जानकर और भी हैरानी होगी कि यह भगवान राम की जन्मभूमि है ऐसा निर्णय सर्वसमति से दिया गया न कि बहुमत से।
इसमें कोई शक नहीं कि कांग्रेस के नेतृत्व वाला यह हिन्दूविरोधी-देशविरोधी धर्मनिरपेक्ष गिरोह माननीय सर्वोचन्यायलय पर भी दबाब बनाकर इस सच्चाई को झूठलाने का पूरण प्रयत्न करेगा लेकिन हमें पूरा भरोसा है कि वहां भी न्यायधीश गद्दारों के इस गिरोह के दबाब में न आकर सच्चाई को यथाबत सवीकार करेंगे ।
आप अगर हमारी शंका कारण जानना चाहें तो हम बता रहे हैं। आप सब जानते हैं कि फैसला आने से पहले ये गिरोह मिडीया के माध्यम से सब हिन्दू संगठनों से यह बायदा लेने की हर सम्भव कोशिस कर रहा था कि हिन्दू संगठन माननीय न्यायलय के फैसले को सवीकार करेंगे क्योंकि इस गिरोह को पूरा भरोसा था कि इनके दुशप्रचार व कांग्रेस के दबाब के परिणामस्वारूप फैसला इनके पूरवाग्राह के आनुसार ही आएगा लेकिन हुआ उल्टा फैसला इनके दुशप्रचार के विलकुल विपरीत सच्चाई के पक्ष में आया और सच्चाई यही है कि अयोध्या में इस जगह पर मर्यादापुरूसोत्तम भगवान श्रीराम जी का जन्म हुआ।
बस फिर क्या था इस गिरोह के इसारे व टुकड़ों पर हिन्दूओं को बदनाम करने वाला मिडीया इस फैसले का विरोध करने में जुट गया । बार-बार कुतर्क दिया गया कि फैसला सही नहीं है ।
मतलब बच्चा पैदा होने के बाद क्या करे व क्या न करे ये फैसला बच्चे के मातापिता नहीं ये गद्दारों का गिरोह करेगा, अदालत ने क्या फैसला करना है ये निर्णय मिडीया ही करेगा ,सरकार किसकी बने ये फैसला भी मिडीया को ही करना है फिर तो मिडीया को खुद चुनाब लड़कर अपनी औकात चैक कर लेनी चाहिए ताकि इसका कुतों की तरह हिन्दूओं पर भौंकना बन्द हो सके।
खैर जिस गिरोह के मार्गदर्शक गिलानी,अरूंधती राय, एंटोनिया ,अफजल जैसे देश के गद्दार हों उस गिरोह से ये उमीद करना कि वो देशभक्तों का साथ देगा कोयले से कालिख खत्म करने के समान है।

इन्द्रेश ही क्यों हिन्दू क्रांतिकारियों के सबन्ध तो डा. अबदुल कलाम से भी थे?

डा. अबदुल कलाम भारत के राष्ट्रभक्त क्रांतिकारियों के कितने नजदीक थे इसका प्रमाण तो ये फोटो है।

फोटो में डा. अबदुल कलाम हिन्दू क्रांतिकारी दयानन्द पांडे जी के साथ देश के दुशमनों को समाप्त करने पर गहन विचार विमर्श कर रहे हैं। इन देश के दुशमनों में वांमपंथी आतंकवादियों, मुसलिम आतंकवादियों व धर्मांतरण के ठेकेदारों के साथ-साथ सेकुलर गद्दार भी सामिल हैं ।
रही बात इन्द्रेश जी के हिन्दू क्रांतिकारियों के साथ सबन्धों की तो आज देश का हर वो नागरिक जो भारत माता को अपनी मां मानता है इन क्रांतिकतारियों के साथ है क्योंकि अब वक्त आ गया है कि हिन्दूविरोधी-देशविरोधी धर्मनिर्पेक्ष गिरोह को उसी की भाषा में जबाब दिया जाए।

ये विलकुल सत्य है कि इन्द्रेश जी RSS के पदा अधिकारी हैं ठीक उसी तरह जिस तरह डा. अबदुल कलाम जी इन क्रांतिकारियों से मुलाकात के वक्त देश के राष्टपति थे ।जब देश का प्रथम नागरिक ही इन क्रांतिकतारियों का समर्थक था तो फिर वाकी जनता भला क्यों इन हिन्दू क्रांतिकारियों का समर्थन नहीं करेगी?
रही कार्यवाही की बात तो सच्चाई यह है कि 7-8वीं सताब्दी में मुसलिम आतंकवादियों के भारत पर आक्रमण से लेकर अंग्रजों के आक्रमण के दौरान व बाद में काले अंग्रेजों के सासनकाल में भी देशभक्त हिन्दूओं को सताया जाता रहा।
धर्मनिर्पेक्ष गिरोह के सहयोग से हिन्दूबहुल क्षेत्रों व मन्दिरों पर लगातार हमले होते रहे। लेकिन आज तक इन धर्मनिर्पेक्ष गद्दारों व इनके पाले हुए भारतविरोधी आतंकवादियों के विरूद्ध आज तक कोई सीधी कार्यवाही नहीं की गई उल्टा इनको पांच-पांच लाख रूपए इनाम देकर सैनिकों व देशभक्तों पर हमलों के लिए उकसाया जाता रहा।
अब वक्त आ गया है कि इन भारतविरोधी आतंकवादियों के विरूद्ध सीधी कार्यवाही कर भारत को इन भारत विरोधी धर्मनिर्पेक्ष आतंकवादियों से मुक्त करवाया जाए।आओ मिलकर आगे बढ़ें।
ओउम

विदेश से में आयी हूं, साथ मौत को लायी हूँ।।

लहर नहीं जहर हूँ मैं…

पैप्सी बोली कोका कोला, भारत का इनसान है भोला।
विदेश से में आयी हूं, साथ मौत को लायी हूँ।।

लहर नहीं जहर हूँ मैं ,गुर्दों पर बढ़ता कहर हूँ मैं।
मेरी पी एच दो पवांट सात,मुझ में पड़कर गल जायें दांत।।

जिंक आर्सेनिक लेड हूँ मैं, साड़े आंतों को वो जहर हूँ मैं।
मुझसे बढ़ती एसिडिटी, फिर क्यों पीते भैया-दीदी ?

ऐसी मेरी कहानी है, मुझ से अच्छा तो सादा पानी है।
दूध दवा है, दूध दुआ है, मैं जहरीला पानी हूं।।

जब दूध मुझ से अच्छा है तो फिर पीकर मुझको क्यों मरता है?
हजारों करोड़ कमाती हूं, सबका सब भारत से बाहर ले जाती हूं।।

शिव ने भी कभी जहर-उतारा ,अपने कण्ठ से नीचे।
तुम बौद्धिक गुलाम नादान हो बहरो! पड़े हुए हो जो मेरे पीछे।

देखो इंडियन लालच में अन्धा, बना लिया है मुझको धन्धा।
मैं नहीं पहूँची हूँ आज वहां पर ,पीने का नहीं पानी जहां पर।।

छोड़ो नकल अब अकल से जीयो,जो कुछ पीना सँभल के पीयो!
सेहत का रखना अब तुम ध्यान , धर में आयें जब मेहमान।।

इतनी तो तुम रसम निभाना, उनको भी कुछ कसम दिलाना ।
दूध जूस गाजर रस पीना-पिलाना,डालकर छाछ में जीरा पुदीना।।

अनन्नास आम का अमृत, बेदाना बेलफल का शरबत्।
स्वासथ्यवर्धक नींबू का पानी, जिसका नहीं है कोई सानी।।

सेहतमंद पेय अब तुम पीना और पिलाना, पैप्सी-कोक अब नहीं घर में लाना।
अब तो समझो बौद्दिक गुलामो, इस जहर के सटाक से करो टायलेट साफ।।
नहीं तो होगा वो अन्जाम कर देगा मेरा जहर तुम सबका काम तमाम।।।

%d bloggers like this: