विषकन्या के कांग्रेस पर कब्जे के बाद कांग्रेस का गद्दारी के मार्ग से पीछे हटना नामुकिन !

कांग्रेस का हाथ गद्दारों के साथ !
सच कहें तो गद्दारों की इस पार्टी में सुधार की अब कोई उम्मीद नजर नहीं आती। हमारा मानना था कि निचले सतर पर कॉंग्रेस में वेहद देशभक्त कार्यकरता हैं जिसका प्रभाब पहली पंक्ति के हिन्दूविरोधी-देशविरोधी नेताओं पर एक न एक दिन जरूर पढ़ेगा ।
लेकिन लगता है कि विदेशी इसाई मिसनरी विषकन्या के कांग्रेस पर कब्जे के बाद ऐसा होना लगभग नामुकिन सा हो गया है। जिस गद्दारी की शुरूआत इस भारत विरोधी की गुलाम सरकार ने 2004 में अर्धसैनिकबलों के जबानों को शहीद होने पर मिलने वाले पैसे में कटौती के साथ की वो अब गद्दारी का सतर इस हद तक पहुंच गया है कि भारतीय सैनिकों पर हमले करने बाले पत्तथरबाज आतंकवादियों को UPA सरकार ने पांच-पांच लाख देकर अपनी गद्दारी का प्रमाण देश के सामने रखा।
2004 में अर्धसैनिक बलों के शहीद जवानों के परिबार बालों को मिलने वाली राशि में कटौती करते वक्त कुतर्क दिया गया कि सरकार के पास पैसे नहीं हैं लेकिन आतंकवादियों को देने के लिए सरकार के पास पैसों की कोई कमी नहीं ये इस फैसले से सिद्ध होता है।
लोग कह रहे हैं कि इस विदेशी की कुलाद ने भारत समर्थक RSS की तुलना भारतविरोधी आतंकवादी गिरोह SIMI से कर दी हम पूछते हैं कि इस विदेशी की गुलाम जिस सरकार ने आतंकवादियों को मारने वाले सैनिकों पर केश दर्ज किए ,यहां तक कि पूरी की परी बटालियन को कटघरे में खड़ा कर दिया उस बिदेशी की कुलाद देशभक्त संगठन के वारे में और कह भी क्या सकती है?
सच्चाई यह है कि सेना किसी भी सरकार की ताकत होती है और सेना द्वारा देशहित में उठाए गए हर कदम की कोई भी देशभक्त सरकार समर्थन करती ही है लेकिन यहां मामला दूसरा है।
क्योंकि यह विदेशी इटालियन है इसे भारत की सेना परायी लगती है अपनी नहीं क्योंकि इसकी अपनी सेना तो इटालिन व युरोपियन सेना है । शायद इसीलिए ये विदेशी हर वक्त अपनी गुलाम सरकार पर भारतीय सेना को कमजोर करने वाले कदम उठाने का दबाब बनाती है। इसी दबाब की बजह से आज तक गुजरात से लेकर कशमीर घाटी तक सुरक्षाबलों के दर्जनों जवान जेलों में डाले जा चुके हैं व सैंकड़ों पर मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं।
अब जिसे, भारतीय सेना जो कि सरकार के इसारे पर ही हर काम करती है सिवाय देश की रक्षा के — से ही डर लगता हो —जिसे ये सेना अपनी दुशमन लगती हो —-भल उसे प्रधानमंत्री बनने से रोकने वाले देसभक्त संगठन क्या कभी अपने लगेंगे— नहीं न ।
ऐसे में सोचने वाला विषय यह है कि जिस विदेशी के निशाने पर भारतीय सेना है उसके निशाने पर भला देशभक्त संगठन क्यों नहीं होंगे ?
क्या आपको याद नहीं कि किस तरह पोटा हटवाकर इस भारत विरोधी इसाई ने भारत विरोधी आतंकवादियों की मदद की।मजेदारबात तो यह है कि इस विदेशी का तो भारतीय सर्वोच न्यायालय तक पर भरोसा नहीं बरना ऐसे कैसे हो सकता था कि देश पर हमला करने का जघन्य अपराध कतरने वाला आतंकवादी अफजल आज तक जिन्दा रहता ? वो भी तब जब माननीय न्यायालय ने इस भारतविरोधी आतंकवादी की फांसी की तारीख 19 नम्मवर 2006 तय की हो और आज 19 नम्मवर 2010 आने वाला हो।
अब आप सोचो कि भारतीय सेना व सर्वोच न्यायलय क्या सिर्फ RSS के हैं या फिर सारे देश के ? क्या ये दोनों संघ के इसारे पर काम करते हैं या फिर भारत सरकार के इसारे पर ?
जब इस विदेशी ने इन दोनों ही समानन्नीय संस्थाओं को बदनाम करने के लिए बार-बार सराकर पर दबाब बनाया हो व सरकार ने वार-बार इस दबाब के आगे झुककर इन दोनों ही संस्थाओं का अपमान किया हो तो फिर आप कैसे उम्मीद कर सकते हैं कि इस विदेशी के दबाब में ये सरकार किसी भी देशभक्त संगठन को बदनाम करने में कोई कसर वाकी छोड़ेगी ?
आज स्वामीराम देब जी हर भारतीय चाहे वो अमीर हो या गरीब को दिन-रात एक कर स्वस्थ जिन्दगी जीने का तरीका बताने के साथ-साथ भारतीयों को भारतीय संस्कृति का हर वो पहलू याद करवा रहे हैं जिसे वो विदेशी आक्रमणकारियों के गुलामीकाल के दौरान ही यातनाओं के परिणामस्वारूप भुला चुके थे।
आज स्वामीराम देब संसार की एक सबसे बड़े भारतीय संगठन के प्रमुख हैं लेकिन क्या इस विदेशी की गुलाम सरकार ने उन्हें Z+ सुरक्षा पलब्ध करवाई नहीं न क्यों ?
सिर्फ इसलिए क्योंकि जिस स्वामीरामदेब जी का नाम सुनने पर हर देसभक्त भारतीय का सिर गर्व से ऊंचा हो जाता है वही रामदेब इस विदेशी को कभी अपना नहीं लगता ?
आज भारत के इसके जैसे कितने ही शत्रु ऐसे हैं जिन्हें इस विदेशी की गुलाम सरकार देशभक्त भारतीयों की खून-पसीने की कमाई से सुरक्षा उपलब्ध करवाकर इनकी हिन्दू क्रांतिकारियों से रक्षा कर रही है ?
लेकिन गद्दारों की सरदार कब तक खैर मनाएगी एक न एक दिन ये सब गद्दार देशभक्त भारतीयों के हाथों अपने कुकर्मों का अन्जाम हर हाल में भुक्तेंगे ही…

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10 Comments

  1. Posted नवम्बर 1, 2010 at 1:24 अपराह्न | Permalink | प्रतिक्रिया

    बहुत अच्छा लेख लिखा है अपने सोनिया विषकन्या ही नहीं चर्च द्वारा संचालित है कांग्रेस में जब भी कोई मुख्यमंत्री क़ा मौका आता है तो ईशाई ही नज़र आता है जैसे अजित जोगी,गिरधर गोमंगो,आंध्र के रेड्डी उन्ही क़ा कब्ज़ा कोई आस्कर फर्नांडीज ,रोमेश शर्मा ,ऐ.के. एंथोनी, आनंद शर्मा इत्यादि नाम है जो ईशाई है यही सोनिया के विस्वसनीय है जो चर्च की योजना को लागू करते है.—-समझ में नहीं आता की यह देश क्यों आजाद कराया गया लाखो लोगो ने बलिदान क्यों दिया फासी के फंदे को क्यों चूमा ? जब ईशयियो को ही शासन करना था मुसलमानों क़ा ही राज्य रहना था तो हमने आज़ादी की लडाई ही क्यों लड़ी .

  2. aajsamaj
    Posted अक्टूबर 31, 2010 at 4:47 अपराह्न | Permalink | प्रतिक्रिया

    इंडिया को ‘भारत’ बनना देगे, जग में ‘भगवा’ फहरा देगें, हिन्दुओं में एकता तो आये आयोध्या में ’राम मंदिर‘ तो क्या कुतुमीनर को ‘हनुमान मंदिर’ बना देगें। बोले जय श्रीराम……

  3. Posted अक्टूबर 31, 2010 at 4:35 अपराह्न | Permalink | प्रतिक्रिया

    सुनील भाइया प्रणाम
    आप का ये लेख दिल को छु गया पर क्या करें हिन्दु आज देश में कोई भी हिन्दुवादी राजनैतिक संगठन का ना होना सबसे बड़ी समस्या हैं। आज हिन्दुओं हर दिन देश कम से कम लोगों को निशाना बनाया जा रहा हैं पता नही कब किस की बारी आ जाये कुछ कहाॅ नही जा सकता। सानिया माईनो (सोनिया गांधी) ने तो जैसे कसम खाई हो की हर हिन्दुवादी लोगो को चुनचुन कर का तमतम करना है। आज कल तो रॉल (राहुल गांधी) जिसको ना इतिहास पता का भविष्य का ज्ञान बस मुंह उटे चल पडें प्रधानमंत्री बननें हम पूछतें की क्या योग्यता हैं राहुल या सोनिया की बस यही की नाम की पीछे गंाधी है। इस का हल सिर्फ एक है सरकार को अपने हाथ में लेे ले ये तभी सम्भव होगा जब हर हिन्दु की सोच हिन्दुवादी होगी।

    जय श्रीराम
    आपका अपनाः-रवि शंकर यादव

  4. gulgul
    Posted अक्टूबर 31, 2010 at 2:18 पूर्वाह्न | Permalink | प्रतिक्रिया

    thanks apnay hamaray marm ko samjha.jitna aahat aap hai utna hi mai bhi hoo.kaun si party desh kay baaray may sochti hai.kya mayavati,kya mulayam.kya nitin sab apna ullu sidha karnay may lagay hai. ham koi cong ka pachdhar nahi hai.jarurat hai aap hum sabhi ko ek sahi awaj uthanay ki.desh ki raajneeti ka apradhikaran ko mitanay ki.gram panchayat ka chunav may kitni hansa hui yah to aap jantay hi hogay.yah matra hinduo ki hi ladai nahi hai yah puray desh ki samasya hai.

  5. Posted अक्टूबर 30, 2010 at 4:50 अपराह्न | Permalink | प्रतिक्रिया

    गुलगुल जी आपका AIM हिन्दी का प्रचारप्रसार करना है करना है बहुत अच्छा लगा । लेकिन जो प्रतिक्रिया आपने लिखी है ये बौद्धिक गुलामी का प्रतीक है । जरा सोचो देश में आज क्या हालात हैं एक के बाद एक फैसले के माध्यम से माननीय न्ययायलय क्रांग्रेस की गद्दारी का परदाफास करता जा रहा है और आप उस ग्दारी के वारे में सुनने पड़ने को भी तैयार नहीं

  6. gulgul
    Posted अक्टूबर 30, 2010 at 2:01 पूर्वाह्न | Permalink | प्रतिक्रिया

    wah kya vichar hai apkay.aap deshbhagati nahi desh ka sath gaddari kar rahay hay.aap kaval apnay svarth ka liya jago hindu jago ka nara dey rahay hay.pl Ram ka naam par ya gandi rajneeti na kariay.na main ek politician hoo aur na hi dharam ka naam par andhvishvas rakhti hoo.aap kisi party ko prarit karnay ka liya ya vichar likh rahay hay.

    • gulgul
      Posted अक्टूबर 30, 2010 at 2:14 पूर्वाह्न | Permalink | प्रतिक्रिया

      its not awaiting moderations its a voice of a common people.log nahi chahtay ladai .log nahi chatay gandi rajneeti.

  7. Posted अक्टूबर 29, 2010 at 9:59 अपराह्न | Permalink | प्रतिक्रिया

    बहुत अच्छा लिखा है आपने…
    ऐसे ही तेवर बनाये रखें…

    इसे भी देखियेगा…

  8. Posted अक्टूबर 29, 2010 at 8:31 अपराह्न | Permalink | प्रतिक्रिया

    शहीदों के परिजनों को पूरी सहायता देना चाहिये..

  9. Posted अक्टूबर 29, 2010 at 7:45 अपराह्न | Permalink | प्रतिक्रिया

    दुर्भाग्य से देश में जागरूक लोग इतनी शक्ति अर्जित नहीं कर पाए कि इस देश के दुश्मन और गद्दार व्यक्ति से पीछा छुड़ा सकें. इससे बड़े गद्दार वे हैं जो उसे सर आँखों पर इसलिए बिठाये हुए हैं के उनकी मलाई सुरक्षित रहे –

आपके कुछ न कहने का मतलब है आप हमसे सहमत हैं

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