Monthly Archives: नवम्बर 2010

SADHNA NEWS CHANNEL कुछ अलग है वाकी चैनलों से…

हमारे देश में डंके की चोट पर सच्चाई वोलने का दाबा करने वाले हिन्दूविरोधी-देशविरोधी चैनलों की कतई कमी नहीं । लेकिन जैसे ही इन चैनलों को धर्मनिरपेक्ष गिरोह से जुड़े किसी गद्दार की चोरी और गद्दारी का पता चलता है बैसे ही इन चैनलों को लकवा मार जाता है।फिर ये चाहे AAJ TAK या फिर IBN7 या NDTV या STAR NEWS या इनके जैसा कोई और चैनल ।ये सब चैनल तब तक भौंकते हैं जब तक इनके निशाने पर कोई देशभक्त भारतीय या फिर देशभक्त संस्था हो लेकिन अपने गद्दार साथियों का नाम आते ही ये चुपी साध लेते हैं।
आपने देखा होगा कि स्वामी सुब्रामणियम स्वामी जी ने जो सच्चाई देश के सामंने रखी वो सच्चाई साधना समाचार चैनल को छोड़ कर किसी बौद्धिक गुलाम चैनल ने नहीं दिखाई। मामला सिर्फ इसी समाचार का नहीं और भी बहुत से समाचार हैं जहां साधना समाचार चैनल इन सब डरपोक चैनलों को धोता हुआ नजर आता है।
अब इस समाचार को आप खुद ही पढ़ लो हम क्या कहें?

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2G spectrum घोटाले में चोरों व गद्दारों के चैनल NDTV का भी हाथ…

हिंसा,अगजनी व धमकियां देकर ये गद्दार किस सच्चाई को छुपाना चाहते है?

10-11-10 को आपने देखा कि किस तरह देशभक्तों की संस्था RSS ने शांति से अपनी बात लोगों तक पहूंचाने का प्रयत्न किया। विना किसी हिंसा,अगजनी या हमले के । फिर आपने देखा कि किस तरह एक फासीवादी हिन्दूविरोधी-देशविरोधी इटालियन अंग्रेज एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी की गुलाम कांग्रेस हिंसा ,अगजनी व धमकियां देकर उस सच्चाई को छुपाना चाहते है जिस सच्चाई का हर देशभक्त भारतीय तक पहुंचना बहुत जरूरी है। ये वो सच्चाई है जो भारत को इस भारतविरोधी से आजादी दिलवाने में सहायक सिद्ध होगी ।
इस सच्चाई के वारे में आज हम खुद लिखने के बजाए आपको मेल से प्राप्त जानकारी दे रहे हैं इसे आप संयम व धैर्य से पढकर खुद सोचें कि क्या आप इस अंग्रेज को जानते भी हैं या नहीं?

“आप सोनिया गाँधी को कितना जानते हैं” की पहली कडी़, अंग्रेजी में इसके
मूल लेखक हैं एस.गुरुमूर्ति और यह लेख दिनांक १७ अप्रैल २००४ को “द न्यू
इंडियन एक्सप्रेस” में – अनमास्किंग सोनिया गाँधी- शीर्षक से प्रकाशित
हुआ था ।
। भारत की खुफ़िया एजेंसी “रॉ”, जिसका गठन सन १९६८ में हुआ, ने विभिन्न
देशों की गुप्तचर एजेंसियों जैसे अमेरिका की सीआईए, रूस की केजीबी,
इसराईल की मोस्साद और फ़्रांस तथा जर्मनी में अपने पेशेगत संपर्क बढाये
और एक नेटवर्क खडा़ किया । इन खुफ़िया एजेंसियों के अपने-अपने सूत्र थे
और वे आतंकवाद, घुसपैठ और चीन के खतरे के बारे में सूचनायें आदान-प्रदान
करने में सक्षम थीं । लेकिन “रॉ” ने इटली की खुफ़िया एजेंसियों से इस
प्रकार का कोई सहयोग या गठजोड़ नहीं किया था, क्योंकि “रॉ” के वरिष्ठ
जासूसों का मानना था कि इटालियन खुफ़िया एजेंसियाँ भरोसे के काबिल नहीं
हैं और उनकी सूचनायें देने की क्षमता पर भी उन्हें संदेह था ।
सक्रिय राजनीति में राजीव गाँधी का प्रवेश हुआ १९८० में संजय की मौत के
बाद । “रॉ” की नियमित “ब्रीफ़िंग” में राजीव गाँधी भी भाग लेने लगे थे
(“ब्रीफ़िंग” कहते हैं उस संक्षिप्त बैठक को जिसमें रॉ या सीबीआई या
पुलिस या कोई और सरकारी संस्था प्रधानमन्त्री या गृहमंत्री को अपनी
रिपोर्ट देती है), जबकि राजीव गाँधी सरकार में किसी पद पर नहीं थे, तब वे
सिर्फ़ काँग्रेस महासचिव थे । राजीव गाँधी चाहते थे कि अरुण नेहरू और
अरुण सिंह भी रॉ की इन बैठकों में शामिल हों । रॉ के कुछ वरिष्ठ
अधिकारियों ने दबी जुबान में इस बात का विरोध किया था चूँकि राजीव गाँधी
किसी अधिकृत पद पर नहीं थे, लेकिन इंदिरा गाँधी ने रॉ से उन्हें इसकी
अनुमति देने को कह दिया था, फ़िर भी रॉ ने इंदिरा जी को स्पष्ट कर दिया
था कि इन लोगों के नाम इस ब्रीफ़िंग के रिकॉर्ड में नहीं आएंगे । उन
बैठकों के दौरान राजीव गाँधी सतत रॉ पर दबाव डालते रहते कि वे इटालियन
खुफ़िया एजेंसियों से भी गठजोड़ करें, राजीव गाँधी ऐसा क्यों चाहते थे ?
या क्या वे इतने अनुभवी थे कि उन्हें इटालियन एजेंसियों के महत्व का पता
भी चल गया था ? ऐसा कुछ नहीं था, इसके पीछे एकमात्र कारण थी सोनिया गाँधी
। राजीव गाँधी ने सोनिया से सन १९६८ में विवाह किया था, और हालांकि रॉ
मानती थी कि इटली की एजेंसी से गठजोड़ सिवाय पैसे और समय की बर्बादी के
अलावा कुछ नहीं है, राजीव लगातार दबाव बनाये रहे । अन्ततः दस वर्षों से
भी अधिक समय के पश्चात रॉ ने इटली की खुफ़िया संस्था से गठजोड़ कर लिया ।
क्या आप जानते हैं कि रॉ और इटली के जासूसों की पहली आधिकारिक मीटिंग की
व्यवस्था किसने की ? जी हाँ, सोनिया गाँधी ने । सीधी सी बात यह है कि वह
इटली के जासूसों के निरन्तर सम्पर्क में थीं । एक मासूम गृहिणी, जो
राजनैतिक और प्रशासनिक मामलों से अलिप्त हो और उसके इटालियन खुफ़िया
एजेन्सियों के गहरे सम्बन्ध हों यह सोचने वाली बात है, वह भी तब जबकि
उन्होंने भारत की नागरिकता नहीं ली थी (वह उन्होंने बहुत बाद में ली) ।
प्रधानमंत्री के घर में रहते हुए, जबकि राजीव खुद सरकार में नहीं थे । हो
सकता है कि रॉ इसी कारण से इटली की खुफ़िया एजेंसी से गठजोड़ करने मे
कतरा रहा हो, क्योंकि ऐसे किसी भी सहयोग के बाद उन जासूसों की पहुँच
सिर्फ़ रॉ तक न रहकर प्रधानमंत्री कार्यालय तक हो सकती थी ।
जब पंजाब में आतंकवाद चरम पर था तब सुरक्षा अधिकारियों ने इंदिरा गाँधी
को बुलेटप्रूफ़ कार में चलने की सलाह दी, इंदिरा गाँधी ने अम्बेसेडर
कारों को बुलेटप्रूफ़ बनवाने के लिये कहा, उस वक्त भारत में बुलेटप्रूफ़
कारें नहीं बनती थीं इसलिये एक जर्मन कम्पनी को कारों को बुलेटप्रूफ़
बनाने का ठेका दिया गया । जानना चाहते हैं उस ठेके का बिचौलिया कौन था,
वाल्टर विंसी, सोनिया गाँधी की बहन अनुष्का का पति ! रॉ को हमेशा यह शक
था कि उसे इसमें कमीशन मिला था, लेकिन कमीशन से भी गंभीर बात यह थी कि
इतना महत्वपूर्ण सुरक्षा सम्बन्धी कार्य उसके मार्फ़त दिया गया । इटली का
प्रभाव सोनिया दिल्ली तक लाने में कामयाब रही थीं, जबकि इंदिरा गाँधी
जीवित थीं । दो साल बाद १९८६ में ये वही वाल्टर विंसी महाशय थे जिन्हें
एसपीजी को इटालियन सुरक्षा एजेंसियों द्वारा प्रशिक्षण दिये जाने का ठेका
मिला, और आश्चर्य की बात यह कि इस सौदे के लिये उन्होंने नगद भुगतान की
मांग की और वह सरकारी तौर पर किया भी गया । यह नगद भुगतान पहले एक रॉ
अधिकारी के हाथों जिनेवा (स्विटजरलैण्ड) पहुँचाया गया लेकिन वाल्टर विंसी
ने जिनेवा में पैसा लेने से मना कर दिया और रॉ के अधिकारी से कहा कि वह
ये पैसा मिलान (इटली) में चाहता है, विंसी ने उस अधिकारी को कहा कि वह
स्विस और इटली के कस्टम से उन्हें आराम से निकलवा देगा और यह “कैश” चेक
नहीं किया जायेगा । रॉ के उस अधिकारी ने उसकी बात नहीं मानी और अंततः वह
भुगतान इटली में भारतीय दूतावास के जरिये किया गया । इस नगद भुगतान के
बारे में तत्कालीन कैबिनेट सचिव बी.जी.देशमुख ने अपनी हालिया किताब में
उल्लेख किया है, हालांकि वह तथाकथित ट्रेनिंग घोर असफ़ल रही और सारा पैसा
लगभग व्यर्थ चला गया । इटली के जो सुरक्षा अधिकारी भारतीय एसपीजी कमांडो
को प्रशिक्षण देने आये थे उनका रवैया जवानों के प्रति बेहद रूखा था, एक
जवान को तो उस दौरान थप्पड़ भी मारा गया । रॉ अधिकारियों ने यह बात राजीव
गाँधी को बताई और कहा कि इस व्यवहार से सुरक्षा बलों के मनोबल पर विपरीत
प्रभाव पड़ रहा है और उनकी खुद की सुरक्षा व्यवस्था भी ऐसे में खतरे में
पड़ सकती है, घबराये हुए राजीव ने तत्काल वह ट्रेनिंग रुकवा दी,लेकिन वह
ट्रेनिंग का ठेका लेने वाले विंसी को तब तक भुगतान किया जा चुका था ।
राजीव गाँधी की हत्या के बाद तो सोनिया गाँधी पूरी तरह से इटालियन और
पश्चिमी सुरक्षा अधिकारियों पर भरोसा करने लगीं, खासकर उस वक्त जब राहुल
और प्रियंका यूरोप घूमने जाते थे । सन १९८५ में जब राजीव सपरिवार फ़्रांस
गये थे तब रॉ का एक अधिकारी जो फ़्रेंच बोलना जानता था, उनके साथ भेजा
गया था, ताकि फ़्रेंच सुरक्षा अधिकारियों से तालमेल बनाया जा सके । लियोन
(फ़्रांस) में उस वक्त एसपीजी अधिकारियों में हड़कम्प मच गया जब पता चला
कि राहुल और प्रियंका गुम हो गये हैं । भारतीय सुरक्षा अधिकारियों को
विंसी ने बताया कि चिंता की कोई बात नहीं है, दोनों बच्चे जोस वाल्डेमारो
के साथ हैं जो कि सोनिया की एक और बहन नादिया के पति हैं । विंसी ने
उन्हें यह भी कहा कि वे वाल्डेमारो के साथ स्पेन चले जायेंगे जहाँ
स्पेनिश अधिकारी उनकी सुरक्षा संभाल लेंगे । भारतीय सुरक्षा अधिकारी यह
जानकर अचंभित रह गये कि न केवल स्पेनिश बल्कि इटालियन सुरक्षा अधिकारी
उनके स्पेन जाने के कार्यक्रम के बारे में जानते थे । जाहिर है कि एक तो
सोनिया गाँधी तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव के अहसानों के तले दबना
नहीं चाहती थीं, और वे भारतीय सुरक्षा एजेंसियों पर विश्वास नहीं करती
थीं । इसका एक और सबूत इससे भी मिलता है कि एक बार सन १९८६ में जिनेवा
स्थित रॉ के अधिकारी को वहाँ के पुलिस कमिश्नर जैक कुन्जी़ ने बताया कि
जिनेवा से दो वीआईपी बच्चे इटली सुरक्षित पहुँच चुके हैं, खिसियाये हुए
रॉ अधिकारी को तो इस बारे में कुछ मालूम ही नहीं था । जिनेवा का पुलिस
कमिश्नर उस रॉ अधिकारी का मित्र था, लेकिन यह अलग से बताने की जरूरत नहीं
थी कि वे वीआईपी बच्चे कौन थे । वे कार से वाल्टर विंसी के साथ जिनेवा
आये थे और स्विस पुलिस तथा इटालियन अधिकारी निरन्तर सम्पर्क में थे जबकि
रॉ अधिकारी को सिरे से कोई सूचना ही नहीं थी, है ना हास्यास्पद लेकिन
चिंताजनक… उस स्विस पुलिस कमिश्नर ने ताना मारते हुए कहा कि “तुम्हारे
प्रधानमंत्री की पत्नी तुम पर विश्वास नहीं करती और उनके बच्चों की
सुरक्षा के लिये इटालियन एजेंसी से सहयोग करती है” । बुरी तरह से अपमानित
रॉ के अधिकारी ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों से इसकी शिकायत की, लेकिन कुछ
नहीं हुआ । अंतरराष्ट्रीय खुफ़िया एजेंसियों के गुट में तेजी से यह बात
फ़ैल गई थी कि सोनिया गाँधी भारतीय अधिकारियों, भारतीय सुरक्षा और भारतीय
दूतावासों पर बिलकुल भरोसा नहीं करती हैं, और यह निश्चित ही भारत की छवि
खराब करने वाली बात थी । राजीव की हत्या के बाद तो उनके विदेश प्रवास के
बारे में विदेशी सुरक्षा एजेंसियाँ, एसपीजी से अधिक सूचनायें पा जाती थी
और भारतीय पुलिस और रॉ उनका मुँह देखते रहते थे । (ओट्टावियो क्वात्रोची
के बार-बार मक्खन की तरह हाथ से फ़िसल जाने का कारण समझ में आया ?) उनके
निजी सचिव विंसेंट जॉर्ज सीधे पश्चिमी सुरक्षा अधिकारियों के सम्पर्क में
रहते थे, रॉ अधिकारियों ने इसकी शिकायत नरसिम्हा राव से की थी, लेकिन
जैसी की उनकी आदत (?) थी वे मौन साध कर बैठ गये ।
संक्षेप में तात्पर्य यह कि, जब एक गृहिणी होते हुए भी वे गंभीर सुरक्षा
मामलों में अपने परिवार वालों को ठेका दिलवा सकती हैं, राजीव गाँधी और
इंदिरा गाँधी के जीवित रहते रॉ को इटालियन जासूसों से सहयोग करने को कह
सकती हैं, सत्ता में ना रहते हुए भी भारतीय सुरक्षा अधिकारियों पर
अविश्वास दिखा सकती हैं, तो अब जबकि सारी सत्ता और ताकत उनके हाथों मे
है, वे क्या-क्या कर सकती हैं, बल्कि क्या नहीं कर सकती । हालांकि “मैं
भारत की बहू हूँ” और “मेरे खून की अंतिम बूँद भी भारत के काम आयेगी” आदि
वे यदा-कदा बोलती रहती हैं, लेकिन यह असली सोनिया नहीं है । समूचा
पश्चिमी जगत, जो कि जरूरी नहीं कि भारत का मित्र ही हो, उनके बारे में सब
कुछ जानता है, लेकिन हम भारतीय लोग सोनिया के बारे में कितना जानते हैं ?

सुदर्शन जी को याद रखना चाहिए कि जिसने भी इस CIA ऐजेंट के मार्ग में रूकावट पैदा की उसे इस ऐजेंट ने हमेशा के लिए अपने रास्ते से हटा दिया।

आज जो सच्चाई सुदर्शन जी की जुवां पर आई उसका हम कब से इन्तजार कर रहे थे। इसमें कोई सन्देह नहीं कि भारत में CIA ने एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी को plant किया है। ये भी सत्य है कि एंटोनिया को कांग्रेस का सर्वेसर्वा बनाने के लिए एक नहीं ,दो नहीं वल्कि 6-6 लोगों का कत्ल किया गया। इस तरह 6-6 लोगों का कत्ल संयोग नहीं हो सकता ।ये सब एक सोची समझी रणनिती के तहत किया गया है।
ये 6 नेता कौन-कौन हैं इसकी जानकारी यहां प्राप्त करें।
अगर आपको फिर भी सन्देह रह जाए तो सुवरामणियम स्वामी (अध्यक्ष जनता पार्टी) द्वारा एंटोनिया के वारे में ततकालीन राष्ट्रपति डा. अबदुल कलाम जी को दिए गय पत्र को अबस्य पढ़ें। अगर आपके पास ये पत्र उपलब्ध नहीं है तो sdsbtf@gmail.com पर mail कर प्राप्त करें।
आप खुद समझ जायेंगे कि सच्चाई क्या है।

सेना का भ्रष्टाचार के मामलों से कुछ लेना-देना नहीं ये सब कुकर्म तो रक्षामन्त्री के नेतृत्व में गैर सैनिकों द्वारा अन्जाम दिए जाते हैं।

आप जानते हैं कि हम देश के सैनिकों को अपना आदर्श मानते हैं । उनके वारे में कुछ भी लिखने से पहले हम ये नहीं भूलते कि ये वही सैनिक हैं जिनकी कुर्वानियों के परिणामस्वारूप आज हम अपने घरों में आजादी से जी रहे हैं। हिन्दूविरोधी-देशविरोधी धर्मनिप्रेक्ष गिरोह जिस तरह भारतीय सेना को बदनाम करने के लिए दिन-रात एक किए हुए है उससे हम कतई सहमत नहीं।
हम सब जानते हैं कि सेना के साजो-समान की खरीद-फरोक्त से लेकर सेना की संम्पतियों तक की देखभाल का अधिकार सेना के अधिकारियों के बजाए गैर सैनिकों के पास है।इसलिए जब भी सैनिक साजो समान या फिर जमीन घोटाला सामने आता है तो किसी भी तरह से सैनिकों पर अंगुली उठाना जायज नहीं है। आप जानते हैं कि भारत के इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला बोपोर्स घोटाला था । जिसे एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी ने अपने इटालियन मित्र क्वात्रोची की सहायता से अन्जाम दिया जिसके प्रमाण तब मिले जब इस अंग्रेज की गुलाम UPA सरकार ने क्वात्रोची के जब्त पैसे को छुडवाकर उसके उपर भारत में चल रहे सबके सब केश समाप्त कर दिए।आप सब जानते हैं कि एंटोनिया की पहुंच सैनिकों तक नहीं थी उसने इस सारे घोटाले को सेना पर कब्जा जमाकर बैठे गैर सैनिकों का दुरूपयोग कर अंजाम दिया।
इसी तरह आदर्श सोसाईटी घोटाले में भी गैर सैनिकों ने जो कुकर्म किए उसका आरोप सैनिकों के सिर मढ़ने की कोशिस की जा रही है। बैसे भी जिस सरकार में हर तरफ हर सतर पर भ्रष्टाचारियों व देशद्रेहियों की पकड़ हो उसके दबाब में कोई भी भोला-भाला सैनिक अधिकारी फंस सकता है वो भी तब जब लैफटिमनैंट कर्नल पुरोहित जी की तरह झूठे आरोपों में फंसाने की तलबार हर वक्त सिर पर लटका दी जाए।
जनरल दीपक कपूर जी पर आज आरोप लग रहे हैं कि उन्हें हरियाणा की कांग्रेस सरकार ने विशेष नियम बनाकर जमीन दी। आदर्श सोसायिटी घोटाले में भी उनका नाम आ रहा है। सच बतायें तो देश के 99% सैनिकों को राजितिज्ञों द्वारा अपनाए जाने वाले भ्रष्ट तरीकों की जानकारी तक नहीं होती।अब हरियाणा में ऐसा कोई विशेष कानून बन सकता है ऐसा जनरल साहब ने कहा हो हम सोच भी नहीं सकते । UPA सरकार का कोई न कोई नेता ऐसा रहा होगा जिसने ऐसे प्रलोभन देकर जनरल दीप कपूर जी से वो कहलबाया जो आज तक भारतीय सेना ने कभी नहीं कहा था।
1947 से आज तक कांग्रेस जिस फूट डालो और राज करो की जिस निती का सहारा लेकर लोगों को आपस में जाति, क्षेत्र, सांप्रदाय, भाषा के आधार पर लडवाकर राज करती रही उस निती का जनरल दीपक कपूर से पहले किसी सैनिक अधिकारी ने खुलकर समर्थन नहीं किया।
ये बात और है कि कई मुख्य चुनाबयुक्त व नयायाधीश कांग्रेस के भ्रष्ट जाल में फंसकर नौकरी में रहते हुए कांग्रेस की इस फूट डालो और राज करो की निती का अनुमोदन करते नजर आए जिन्हें कांग्रेस ने आगे चलकर कभी मन्त्री तो कभी और कोई बढ़ी जिम्मेदारी देकर कांग्रेसभक्ति का इनाम दिया।
हमें उस वक्त बहुत हैरानी हुई जब जनरल दीपक कपूर जी ने सांप्रदिक ताकतों की बात कर कांग्रेस की फूट डालो और राज करो की देशविरोधी निती का अनुमोदन कर सेनाअध्यक्ष के पद का अपमान किया।
फिर भी हम मानते हैं कि वेशक कुछ समय के लिए जनरल दीपक कपूर जी कांग्रेश के भ्रष्ट तन्त्र का सिकार होकर भटक गए हों फिर भी इन घोटालों के लिए उनको जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

घोटालों व देश से गद्दारी का जिम्मेदार कौन?

आप सबने खुद अपने कानों से सुना व आंखों से देखा कि किस तरह महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष अपनी ही पार्टी के नेता को बता रहे थे कि मुख्यमन्त्री पहले तो 200 करोड़ देने के लिए तैयार नहीं हुए लेकिन मैडम एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी का फोन आते ही उन्होंने 200 करोड़ देने की सहमती दे दी। आगे आपने ये भी सुना होगा कि वाकी मन्त्रियों से 10-10 लाख लिए गए। अब आप बताओ जो मन्त्री इस विषकन्या की एक यात्रा के दौरान अपनी कुर्सी बचाने के लिए 200 करोड़ देने के लिए मजबूर हो वो इतनी बड़ी रकम पूरी करने के लिए क्या नहीं करेगा ?
उसके पास दो ही रास्ते हैं या तो वो भ्रष्ट तरीकों से इस रकम की भरपाई करे या फिर भारतविरोधी आतंकवादियों से पैसा लेकर प्रदेश की सुरक्षा उनके हाथों में गिरवी रख दे। महाराष्ट्र सरकार ने दोनों ही हथकंडे आपना लिए इस रकम की भरपाई कर अपनी जेब भी भरने के लिए।
आपने वो स्टिंग आपरेसन जरूर देख होगा जिसमें राज्य के गृहमन्त्री व इस विषकन्या के खासमखास एहमद पटेल और आतंकवादियों के सरगना मिलकर ये तय कर रहे थे कि राज्य का पुलिस प्रमुख किसे बनाया जाए।
आपने वो समाचार भी देखा होगा जिसमें मुख्यमन्त्री दो-दो आतंकवादियों के साथ इफतार पार्टी कर रहा था। मतलब साफ है कि विषकन्या एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी के इसारे पर पूरी की पूरी महारष्ट्र सरकार देशद्रोह व भ्रष्टाचार के चर्म पर पहूंच चुकी है।
भर्ष्टाचारियों व भारतविरोधी आतंकवादियों के इसी गठजोड़ की बजह से लैप्टीनैंट कर्नल पुरोहित व साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर जैसे देशभक्तों को जेल में डालकर उन पर दो-दो वार मकोका लगाकर हिन्दू आतंकवाद की झूठी अबधारणा तैयार करने के षडयन्त्र रचे जा रहे हैं।
आप खुद सोच सकते हैं कि जो सरकार आतंकवादियों के साथ मिलकर पुलिस प्रमुख तैय कर रही हो वो देशभक्त सैनिकों व नागरिकों या फिर संगठनों के साथ क्या सलूक करेगी? वही सलूक आज देशभक्त संगठनों भारतीय सेना व साधु-सन्तों के साथ किया जा रहा है।
अब आप खुद तय करो कि आदर्श सोसायिटि घोटाले व आतंकवादियें के साथ गठजोड़ के लिए अशोक चहान से जयादा जिम्मेदार विषकन्या एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी है कि नहीं।

आओ दिपावली को समरसता दिवस के रूप में मनाकर हिन्दूएकता को आगे बढ़ायें।

आज मर्यादा पुर्षोत्तम भगवान श्रीराम जी के 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटने की खुशी में सारे देश में खुशियां मनाई जाती हैं। इस वनवास के दौरान मर्यादा पुर्षोत्तम भगवान श्रीराम जी ने समाज के सामने जो मुल्य प्रसतुत किए आज जरूरत हैं उन मूल्यों को समझकर कर उनका पालन करने की।
मर्यादा पुर्षोत्तम भगवान श्रीराम जी ने राबण का बध कर हमारे समाज को वुराई का हर सतर पर विरोध करने का पाठ पढ़ाया ।जिस पर अमल करने की आज बहुत जरूरत है। आज भारत विरोधी आतंकवाद इस हद तक आगे बढ़ चुका है कि देश के अधिकतर लोग जाने अनजाने भारतविरोधी आतंकवादियों का ये कहकर बचाब करते हुए नजर आ रहे हैं कि इन आतंकवादियों को भी जीने का अधिकार है।जब मर्यादा पुर्षोत्तम भगवान श्रीराम जी ने पहले ही सपष्ट कर दिया है कि जो भारतविरोधी आतंकवादी देशभक्त निर्दोश लोगों के जानमाल को नुकसान पहुंचाते हैं उन भारतविरोधी आतंकवादियों को जीने का कोई अधिकार नहीं। आओ मिलकर इन भारतविरोधी आतंकवादियों का विनाश सुनिश्चित करने के लिए आगे बढ़ें ।
मर्यादा पुर्षोत्तम भगवान श्रीराम जी ने हिन्दू समाज को जो सबसे बढ़ा सन्देश दिया वो है समाजिक समरसता का। आज बहुत से हिन्दू हीन भावना का सिकार होकर खुद को छोटा समझकर व बहुत से लोग बढ़पन के भ्रम का सिकार होकर खुद को दूसरे हिन्दू से उंचा बताकर छुआ-छूत के कलंक को आगे बढ़ा रहे हैं।दोनों ही भ्रम का सिकार हैं ।
जबकि सच्चाई यह है कि जो भी वयक्ति छुआ-छूत में विशवास करता है या फिर उसे आगे बढ़ाता है वो हिन्दू ही नहीं है। हिन्दू मर्यादा पुर्षोत्तम भगवान श्रीराम जी को भगवान मानकर पूजा करते हैं ये वो भगवान राम हैं जिन्होंने भीलनी के जूठे वेर खाए । मतलब मर्यादा पुर्षोत्तम भगवान श्रीराम जी छुआ-छूत को नहीं मानते थे।
भगवान श्रीराम झी समरस हिन्दू समाज का प्रमाण है । आज हमें जरूरत है भगवान श्री राम का नाम लेने के साथ-साथ उनके बताए सन्देश को समझकर उसका पालन सुनिश्चित करने की । अब जिन भगवान श्री राम जी ने समरसता का सन्देश देकर हिन्दू समाज को एकता के सूत्र में बन्धे रहने का पाठ पढ़ाया तो फिर कोई भी समर्थक या उपासक किसी दूसरे हिन्दू से बेदभाव कैसे कर सकता है?
अगर कोई किसी दूसरे हिन्दू से भदभाव करता है तो फिर वो वयक्ति खुद हिन्दू कैसे कह सकता है? हिन्दू की पहचान है समरसता है और समानता ।
आज जो लोग गुलामी के प्रभाव के कारण वौद्धिक गुलामी का सिकार होकर हिन्दू-हिन्दू के वीच दूरी पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं आओ उनको समझाकर मर्यादा पुर्षोत्तम भगवान श्रीराम जी के बताए मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें।
जो लोग जानबूझ कर बिदेशियों के हाथों विकर हिन्दू समाज को तोड़ने के षडयन्त्र कर रहें आओ मिलकर उनकी हार सुनिश्तित कर हिन्दू समाज की समरसता को आगे बढ़ायें।

क्या आप जानते हैं कि किस अधिकारी की मौत से हिन्दू क्रांतिकारियों की वोलती क्यों बन्द हो गई ?

दुनिया में कुछ लोग ऐसा षडयन्त्र कर बैठते हैं जिसका अन्जाम शायद उन्हें भी ज्ञात नहीं होता। कुछ ऐसा ही हाल है विदेशी अंग्रेज एंटोनिया की गुलाम UPA सरकार का।
मुंमबई पर मुसलिम आतंकवादी हमले से पहले UPA सरकार ने पुलिस के कर्मचारियों पर दबाब बनाकर हिन्दू क्रांति की झूठी अबधारणा पैदा करने का षडयन्त्र किया।
जब इस षडयन्त्र की प्रतिक्रियस्वारूप हिन्दू उग्र होकर इसे वास्तविक स्वारूप देने लगे तो इस सरकार के अल्पसंख्यक विभाग के मन्त्री अबदुल रहमान अंतुले( ध्यान रहे स्वर्गीय हेमंत करकरे जी इसी मंत्री के घर के पास घात लगाकर किए गय हमले में मारे गए) ने अपने पाकिस्तानी मित्रों के सहयोग से मुसलिम आतंकवादी हमला करवाकर मामले की कार्यवाही में सामिल पुलिस अधिकारी को मरवा दिया।
हमले को हिन्दू क्रांतिकारियों का हमला बताने के लिए धर्मनिरपेक्ष गिरोह के इशारे पर मिडीया ने आतंकवादियों के हाथों में कंगन(डोरी) पहने होने की बात का जबरदस्त प्रचार किया।
ये तो शुक्र है महाराष्ट्र पुलिस के उन जवानों का जिन्होंने अपनी जान की परवाह न करते हुए एक मुसलिम आतंकवादी कसाब को जिन्दा पकड़ लिया वरना इस हमले का दोश भी हिन्दूओं के सिर मढ़ने की पूरी तैयारी थी। कारण भी सपष्ट था कि इस हमले में एक वो अधिकारी मारा गया था जिस पर हिन्दूओं का UPA सरकार के दबाब में काम करने का आरोप था।
जैसे इस अधिकारी की मौत हुई हिन्दू क्रांतिकारियों की वोलती बन्द हो गई क्योंकि शहीद जवान की शहीदी पर प्रश्न खड़े करना हिन्दूओं के सवभाव के विरूद्ध है। ये काम तो दिगविजय सिंह जैसे जयचन्दों का है। इस जवान की शहीदी के बाद हिन्दूओं ने मन बना लिया कि बेशक निर्दोश हिन्दू फांसी पर लटक जांयें पर जवान की शहीदी के बाद उनके बारे में कोई प्रश्न खड़े नहीं किए जायेंगे। अपने इस प्रण पर हिन्दू आज तक अढिग हैं।
जब UPA ने महारष्ट्र सरकार के माध्यम से हिन्दू क्रांति की झूठी अबधारणा पैदा करना शुरू की तो उसका एकमात्र निसाना था RSS। मिडीया के माध्यम से पकड़े गय हिन्दूओं के सम्बन्ध RSS से बताने के हर सम्भव प्रयास किए जाने लगे । तभी हिन्दू क्रांतिकारियों में से एक दयानन्द पांडे के साथ डा. अबदुल कलाम के रिस्ते जगजाहिर हुए और UPA सरकार की RSS को फंसाने की मुहिम पर ताला लग गया ।
क्योंकि जिन मुसलमानों को खुश करने के लिए कांग्रेस ये सब कर रही थी उन्हीं के सांप्रदाय से सम्बन्धित पर अगर कार्यवाही की जाती तब तो सारा खेल बिगड़ जाता। अगर UPA को मुसलमानों के विरूद्ध ही कार्यवाही करनी होती तो अफजल आज तक जिन्दा न होता।
हम दावे से कह सकते हैं कि अगर कसाब जिन्दा न पकड़ा गया होता तो मुंबई पर हमले के आरोप में आज सैंकड़ों हिन्दू नौजवान जेलों में वाकी 30 हन्दू नौजवानों की तरह बन्द होते।
फिर महाराष्ट्र सरकार के साथ केन्द्र सरकार का बयान आया कि हिन्दू क्रांतिकारियों के निशाने पर RSS के नेता भी हैं खासकर इन्द्रेश जी । ध्यान रहे कि इस ब्यान को अभी तक बदला नहीं गया है । अब कांग्रेस की राजस्थान सरकार कह रही है कि इन्दरेश जी इन हिन्दू क्रांतिकारियों के साथ हैं मतलब शिकारी हैं।
असलियत यह है कि इन्द्रेश जी एक देशभक्त है जो मुसलिम राष्ट्रीय मंच के माध्यम से देशभक्त मुसलमानों को धर्मनिर्पेक्ष गिरोह के विरूद्ध खड़ा कर रहे हैं । यही वो दहशत है जो कांग्रेस के नेतृत्व वाले हिन्दूविरोधी देशविरोधी गिरोह को बेचैन किए हुए है।क्योंकि इस गिरोह की सारी राजनिती ही फूट डालो और राज करो पर अधारित है अगर इन्द्रेश जी लोगों को खासकर मुसलमानों को इस गिरोह की असलियत समझाने में समर्थ हो गए तो इस गिरोह का इस देश से नामोनिशान मिट जाएगा ।
बस इसी परेसानी में UPA लगातार वेबकूफी पर वेबकूफी किए जा रहा है। ये बिलकुल बैसी ही वेबकूफी है जैसी इस गिरोह ने भगवान श्रीराम जी की जन्मभूमि को मसजिद बताकर की।
परिणाम सबके सामने है आज माननीय न्यायालय के सर्वसमत निर्णय के बाद ये गिरोह बगलें झांकता फिर रहा है और अनापसनाप ब्यानबाजी कर देसभक्त संगठनों व हिन्दूओं को बदनाम करने की साजिसों को आगे बढ़ाकर अपनी गद्दारी के कुछ और प्रमाण देश के सामने रख रहा है।
अन्त में हम इतना ही कहेंगे के कि इन्द्रेश जी शिकारी नहीं वल्कि विदेशी अंग्रेज एंटोनिया की गुलाम UPA सरकार के हिन्दूविरोधी-देशविरोधी षडयन्त्रों के शिकार हैं।

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