आओ दिपावली को समरसता दिवस के रूप में मनाकर हिन्दूएकता को आगे बढ़ायें।

आज मर्यादा पुर्षोत्तम भगवान श्रीराम जी के 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटने की खुशी में सारे देश में खुशियां मनाई जाती हैं। इस वनवास के दौरान मर्यादा पुर्षोत्तम भगवान श्रीराम जी ने समाज के सामने जो मुल्य प्रसतुत किए आज जरूरत हैं उन मूल्यों को समझकर कर उनका पालन करने की।
मर्यादा पुर्षोत्तम भगवान श्रीराम जी ने राबण का बध कर हमारे समाज को वुराई का हर सतर पर विरोध करने का पाठ पढ़ाया ।जिस पर अमल करने की आज बहुत जरूरत है। आज भारत विरोधी आतंकवाद इस हद तक आगे बढ़ चुका है कि देश के अधिकतर लोग जाने अनजाने भारतविरोधी आतंकवादियों का ये कहकर बचाब करते हुए नजर आ रहे हैं कि इन आतंकवादियों को भी जीने का अधिकार है।जब मर्यादा पुर्षोत्तम भगवान श्रीराम जी ने पहले ही सपष्ट कर दिया है कि जो भारतविरोधी आतंकवादी देशभक्त निर्दोश लोगों के जानमाल को नुकसान पहुंचाते हैं उन भारतविरोधी आतंकवादियों को जीने का कोई अधिकार नहीं। आओ मिलकर इन भारतविरोधी आतंकवादियों का विनाश सुनिश्चित करने के लिए आगे बढ़ें ।
मर्यादा पुर्षोत्तम भगवान श्रीराम जी ने हिन्दू समाज को जो सबसे बढ़ा सन्देश दिया वो है समाजिक समरसता का। आज बहुत से हिन्दू हीन भावना का सिकार होकर खुद को छोटा समझकर व बहुत से लोग बढ़पन के भ्रम का सिकार होकर खुद को दूसरे हिन्दू से उंचा बताकर छुआ-छूत के कलंक को आगे बढ़ा रहे हैं।दोनों ही भ्रम का सिकार हैं ।
जबकि सच्चाई यह है कि जो भी वयक्ति छुआ-छूत में विशवास करता है या फिर उसे आगे बढ़ाता है वो हिन्दू ही नहीं है। हिन्दू मर्यादा पुर्षोत्तम भगवान श्रीराम जी को भगवान मानकर पूजा करते हैं ये वो भगवान राम हैं जिन्होंने भीलनी के जूठे वेर खाए । मतलब मर्यादा पुर्षोत्तम भगवान श्रीराम जी छुआ-छूत को नहीं मानते थे।
भगवान श्रीराम झी समरस हिन्दू समाज का प्रमाण है । आज हमें जरूरत है भगवान श्री राम का नाम लेने के साथ-साथ उनके बताए सन्देश को समझकर उसका पालन सुनिश्चित करने की । अब जिन भगवान श्री राम जी ने समरसता का सन्देश देकर हिन्दू समाज को एकता के सूत्र में बन्धे रहने का पाठ पढ़ाया तो फिर कोई भी समर्थक या उपासक किसी दूसरे हिन्दू से बेदभाव कैसे कर सकता है?
अगर कोई किसी दूसरे हिन्दू से भदभाव करता है तो फिर वो वयक्ति खुद हिन्दू कैसे कह सकता है? हिन्दू की पहचान है समरसता है और समानता ।
आज जो लोग गुलामी के प्रभाव के कारण वौद्धिक गुलामी का सिकार होकर हिन्दू-हिन्दू के वीच दूरी पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं आओ उनको समझाकर मर्यादा पुर्षोत्तम भगवान श्रीराम जी के बताए मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें।
जो लोग जानबूझ कर बिदेशियों के हाथों विकर हिन्दू समाज को तोड़ने के षडयन्त्र कर रहें आओ मिलकर उनकी हार सुनिश्तित कर हिन्दू समाज की समरसता को आगे बढ़ायें।

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3 Comments

  1. Posted नवम्बर 7, 2010 at 7:13 पूर्वाह्न | Permalink | प्रतिक्रिया

    दैहिक दैविक भौतिक तापा, राम- राज नहि काउह ब्यापा
    सब नर करहि परस्पर प्रीती,चलहि स्वधर्म करहि श्रुति निति.

  2. संगीता पुरी
    Posted नवम्बर 6, 2010 at 12:06 पूर्वाह्न | Permalink | प्रतिक्रिया

    दीपावली का ये पावन त्‍यौहार,
    जीवन में लाए खुशियां अपार।
    लक्ष्‍मी जी विराजें आपके द्वार,
    शुभकामनाएं हमारी करें स्‍वीकार।।

  3. Posted नवम्बर 5, 2010 at 12:04 अपराह्न | Permalink | प्रतिक्रिया

    aapko bhi bahut shubhkaamnaayen…

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