Monthly Archives: दिसम्बर 2010

देशभक्त और गद्दार का अन्तर आप खुद महसूस कर लो।

कौन कहता है कि भारत में देशभक्त सिर्फ संघ या हिन्दू संगठनों में ही मलते हैं। इसमें कोई शक नहीं कि आज अधिकतर देशभक्त हिन्दूसंगठनों के साथ संगठित होते जा रहे हैं इसी बजह से इन संगठनों में देशभक्तों की अधिकता देखी जा रही है।लेकिन ये भी उतना ही सही है कि हिन्दू संगठनों के अथक प्रयत्नों के बाबजूद देशभक्त पूरे देश में हर संगठन में अभी भी मौजूद हैं वेशक कीं इनकी शंख्या कहीं कम है तो कहीं ज्यादा है।
इन्ही विखरे पड़े देशभक्तों ने गद्दारों के नाक में संगठित देशभक्तों से ज्यादा दम किया हुआ है। आप कहेंगे कि कैसे पता लगायेंगो कौन देशभक्त है और कौन गद्दार । आप अखवार कि ये दो कटिंग पढ़ लो ।आप अपने आप कहने को मजबूर होंगे कि इस गद्दार ने तो हद ही कर दी।
ये रही पहली कटिंग इसमें एक देशभक्त अमेरिका के अधिकारी को भारत पर पाकिस्तानी हमले के वारे में बताकर आतंकवादी पाकिस्तान की पोल खोलने की कोशिश कर रहा है।

ये रही दूसरी कटिंग इसमें एक गद्दार अमेरिकी अधिकारी को समझा रहा है कि भारत को खतरा पाकिस्तानी जिहादी आतंकवादियों से नहीं वल्कि हिन्दूओं से है।मतलब विदेशी अंग्रेज एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी की कुलाद राहुल गंदगी जिस पत्र में खा रहा है उसी में छेद कर रहा है।

इसीलिए तो मोदी जी तो अब जाकर ये समझ में आया कि अमेरिका को भारत के खिलाफ व पाकिस्ताने के समर्थन भड़ाकने वाला जयचन्द कौन है।

wiki Leaks ने कांग्रेस के हिन्दूविरोधी-देशविरोधी षडयन्त्र का परदाफाश किया…

हम सब जानते हैं कि 26/11 मुम्बई हमला अब तक भारत पर हुए आतंकवादी हमलों में से सबसे बड़ा हमला था। लेकिन हम में से बहुत कम लोग जानते होंगे कि इस हमले को कांग्रेस ने हिन्दूओं के विरूद्ध हथियार के रूप में प्रयोग करने की साजिस रची।
हमले के कुछ ही क्षण बाद कांग्रेस ने अपने धर्मनिर्पेक्ष गिरोह से जुड़े मिडीया के माध्यम से ये खबर फैलाना शुरू कर दी कि आतंकवादियों ने हाथों में कंगन पहने हुए हैं मतलब मुम्बई पर हमला करने वाले आतंकवादी मुसलमान नहीं हिन्दू हैं।
फिर कांग्रेस के सांप्रदायिक विभाग के मन्त्री अबदुल रहमान अंतुले ने ये कहकर सबको चौंका दिया कि मुसलिम आतंकवादी हेमंत करकरे को मारने नहीं आए थे मतलब अंतुले जानता था कि मुसलिम आतंकवादी किसको मारने आए थे?
गद्दारों की सरदार एंटोनिया का खसमखास गद्दार दिगविजय सिंह आज भी दाबा कर रहा है कि हेमंत करकरे को हिन्दूओं से खतरा था।मतलब जो हिन्दूविरोधी षडयन्त्र तब रचा गया था उसे सिरे चढ़ाने का अब तक प्रयत्न जारी है।
सोचने वला विषय यह है कि जब हर कोई ये जनता है कि हमला मुसलिम आतंकवादियों ने किया था तो फिर कांग्रेस क्यों हिन्दूओं का नाम इसमें घसीट कर पाकिस्तान व आतंकवादियों को फायदा पहूंचाने की कोशिस कर रही है।
कांग्रेस का मानना है कि भारत में पाकिस्तान व आतंकवाद समर्थक मुसलमानों की बहुत बड़ी संख्या है । कांग्रेस को लगता है कि वो हिन्दूओं पर हमला कर इन सब आतंकवादी मुसलमानों का बोट प्राप्त कर सकती है। रही बात हिन्दूओं की तो हिन्दू तो राजनितिक रूप से मूर्ख है ही उसकी चिन्ता करने की क्या जरूरत । ऐसा कांग्रेस का मानना है।
अगर आप सोच रहे हैं कि हम कोई आरोप लगा रहे हैं तो आप गलत हैं क्योंकि इस सच्चाई का परदाफास जुलियन असांजे की कढ़ी मेहनत के परिणामस्वारूप Wiki Leaks में हुआ है।
भारत में अमेरिका के राजदूत डेविड मलफोर्ड ने अपनी सराकर को बताया कि वो कांग्रेस द्वारा खेले गए इस हिन्दूविरोधी कार्ड को देखकर भौचंके रह गए। मलफोर्ड ने आगे लिखा है कि कांग्रेस बोट के लिए देश के लोगों को जाति-भाषा-क्षेत्र-सांप्रदाय के अधार पर लड़वाने के लिए किसी भी हद तक गिर सकती है।
हमने तो कांग्रेस सहित धर्मनिर्पेक्ष गिरोह की इन हरकतों को पहचानकर उसी वक्त आबाज उठानी शुरू कर दी थी।

जूलियन अंसाजे की गिरफ्तारी सच्चाई का गला घोंटने की कोशिश…

Wiki leaks के संस्थापक व आस्ट्रेलिया के खोजी पत्रकार जूलियन असांजे ने सच्चाई सामने लाने के लिए जो दमखम दिखाया उसकी जितनी तारीफ की जाए उतनी कम है।
आज की दुनिया personality living मतलब नकाब ओड़कर जीने में विस्वास रखती है। मतलब यहां हर कोई अपनी असलियत छुपाता फिरता है जिसको जो चेहरा दिखाना होता है उसके लिए वही चेहरा ओड़कर वयक्ति/देश उसके सामने जाता है।
जूलियन असांजे ने अमेरिका जैसे फरौड देशों की असलियत खोलकर सारी दुनिया को आईना दिखा दिया।दुनिया का कोई भी देश या वयक्ति सच्चाई को जीने या सामने आने में विस्वास नहीं रखता। सब जगह झूठ और फरेब का वोलवाला ।
यह झूठ ही है जिसने भ्रष्टाचार को जन्म देकर आज मानबता के अस्तित्व को ही खतरे में डाल दिया है। वाकी वस्तुओं को तो छोड़ो आज खाने-पीने की भी कोई बस्तु मिलाबट से अछूती नहीं रही है।
इन हालात में अगर जूलियन असांजे जैसा दमदार व्यक्ति सच्चाई की अलख जगाने के लिए विकीलीकस जैसी बैबसाईट की स्थपना कर दुनिया को सच्चाई के मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है तो उसका हर तरफ से सवागत ही होना चाहिए था ।
लेकिन वो देश जिस देश का पहला कर्तब्य चर्च मतलब ईसाईयत की रक्षा करना है इस सच्चाई के दूत की बहादुरी को बरदाश न कर सका।इस देश ने वाकी देशों पर दबाब बनाकर जूलियन असांजे को गिरफ्तार करवा दिया ।
हमारे विचार में ये सच्चाई का गला घोटने की कोशिश है। जिसका सही सोच रखने वाले हर व्यक्ति के द्वारा विरोध होना चाहिए। हम समझते हैं कि जूलियन असांजे को यथाशीघ्र आजाद कर सच्चाई को आगे बढ़ने का मौका जरूर दिया जाना चाहिए।
आओ सच्चाई के समर्थन में मिलकर आबाज उठायें।

आओ शहीद राजीव दीक्षित जी को श्रद्धांजली दें।


राजीब दीक्षित जी बर्तमान भारत के सच्चे–पक्के क्रांतिकारी थे।राजीब जी को जब हमने पहलीवार सुना तो उनकी बातों ने मन को झकझोर दिया। हमें एहसास हुआ कि हम गुलामी की जंजीरों व बौद्धिक गुलामी के किस कदर आदी हो गए हैं। उनकी बातों ने मन में आजदी की एक नई रोशनी जगाकर हमें नया मार्ग दिखाया। हमने इससे पहले भी स्वादेशी की बहुत बातें सुनी थी लेकिन वो बातें कुछ उपभोग की बस्तुओं से आगे नहीं बढ़ पाती थीं। ऐसा नहीं कि उन बातों के कोई उपयोग नहीं लेकिन राजीव दीक्षित जी ने हमें स्वादेशी का विराट स्वारूप दिखाकर सच्ची आजादी का अर्थ समझा दिया।
हम अक्सर ये सोच-सोच कर दुखी रहते थे कि आज भारत के कानून क्यों भारत के आम आदमी के विरूद्ध अत्याचार को बढ़ाबा देकर अत्याचारियों ,आतंकवादिय़ों, व्याभिचारिचों व भ्रष्टाचारियों की रक्षा करते हुए प्रतीत होते हैं? जब राजीव दीक्षित जी ने हमें बताया कि बर्तमान भारत में लागू अधिकतर कानून विदेशी आक्रमणकारियों द्वारा बनाए हुए हैं तो हमें ये बात समझ में आयी कि जब ये कानून ही भारत के नहीं तो फिर भारतीयों की रक्षा भला ये क्यों करेंगे?
हमने महसूस किया कि भारत का संविधान भी भारतीयों के बजाए विदेशियों के हित साधता हुआ प्रतीत होता है जब राजीव दीक्षित जी ने बताया कि भारत का संविधान युरोपियन देशों के संविधानों की पंक्तियां उठाकर लिखा गया मतलब विना किसी मौलिक चिन्तन-मन्थन के विभिन्न ईसाई देशों की नकल कर ये अपंग संविधान तैयार किया गया जो आज अपने भारत के क्रांतिकारियों की तो दूर आम आदमी तक के अधिकारों की रक्षा करने के बजाए विदेशियों के हित साधने का हथियार बना हुआ है।
राजीव दीक्षित जी ने बताया कि स्वादेशी का अपने जीबन में उपयोग ही एकमात्र ऐसा रास्ता है जो भारत को विश्वगुरू बनाने के साथ-साथ भारत के नौजवानों में वेरोजगारी की समस्या का पूर्ण समाधान कर उनमें आशा की किरण जलाने में सक्ष्म है।
कुल मिलाकर राजीव दीक्षित जी ने भारतीयों को बौद्धिक गुलामी से आजाद होकर पूर्ण स्वतन्त्रता से आत्मस्वाभिमान व आत्मनिर्भरता का जीवन जीने का मार्ग दिखाया।
राजीव दीक्षित जी ने अपनी जिन्दगी का हर क्षण देश के लिए जीकर हम सब भारतीयों को वलिदान का सबसे बढ़ा मार्ग दिखाया।
आओ वर्तमान भारत के इस महान क्रांतिकारी को श्रद्धांजली देने के लिए अपने जीवन को पूर्ण रूप से भारतीयता के रंग में रखने का संकल्प करें।