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राजीब गांधी कत्ल वनाम संसद भवन हमला…

बैसे तो अबदुल्ला परिबार की गद्दारी से हर देशभक्त परिचित है। लेकिन आज आतंकवादियों की फांसी को सांप्रदायिक रंग देने की जो घिनौनी हरकत इस गद्दार ने की है उसका उसी की भाषा में उतर देना जरूरी है।
सबसे पहले तो तमिलनाडु की विधान सभा की तुलना जम्मू-कशमीर की विधानसभा से करना ही गलत है क्योंकि एक तो जम्मू-कशमीर विधानसभा भारतविरोधी आतंकवादियों से भरी पड़ी है जबकि तमिलनाडु की विधानसभा में ऐसी कोई स्थिति नहीं है।
दूसरा जम्मू-कशमीर की विधानसभा में आतंकवादियों का बर्चस्व वानए रखने के लिए अबदुल्ला खानदान ने नैहरू खानदान की सहायता से जम्मू संभाग के लोगों को उनके हक से वंचित रखने के लिए जानबूझ कर जम्मू-संभाग में विधानसभा सीटों को कम रखा है । जबकि तमिलनाडु विधान सभा में ऐसी कोई गड़बड़ नहीं है।
जम्मू-कशमीर विधानसभा में बैठे आतंकवादियों ने सरकारी तन्त्र का प्रयोग कर कशमीरघाटी में हिन्दू-मिटाओ हिन्दू भगाओ अभियान चलाकर न केवल 60000 हिन्दूओं का कत्ल किया वल्कि 500000 हिन्दूओं को वेघर भी किया। मां-बहन वेटियों की इज्जत आबरू से खिलबाढ़ किया से अलग। अब आप ही बताओ कि कातिल राक्षसों से भरी पड़ी जम्मू-कशमीर विधानसभा की तुलना तमिलनाडु की विधानसभा से कैसे की जा सकती है?
राजीब गांधी पर हमला करने वालों की तुलना लोकतन्त्र के मन्दिर पर हमला करने वाले भारतविरोधी आतंकवादी से करना किसी भी तरह से जायज नहीं ठहराया जा सकता।
राजीब गांधी का कत्ल किसने किया ये अभी पूरी तरह सपष्ट नहीं है क्योंकि  एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी ने पहले राजीब गांधी के कत्ल का आरोप DMK पर लगाकर सरकार केन्द्र सरकार गिरा दी बाद 2004 में इसी एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी ने इसी DMK के साथ मिलकर सरकार बना ली।
जिस क्वात्रोची पर चर्च के इसारे पर वालासिंघम के माध्यम से LTTE प्रमुख प्रभाकरण को राजीब गांधी के कत्ल की सुपारी देने के आरोप लगे वही क्वात्रोची आज भी एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी का परिबारिक मित्र है जिसके लिए एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो कुछ भी कर गुजरने के लिए तैयार है।
अब जिन लोगों को फांसी की सजा सुनबाई गई उनमें से एक की सजा खुद एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो माफ कर चुकी तो स्वभाविक रूप से वाकी मुरूगन,स्नाथन व पेरारीवालन भी माफी की उमीद तो कर ही सकते हैं।
दूसरी तरफ मोहम्द अफजल खुद चीख-चीख कर कह रहा है कि कशमीरघाटी को काफिरों वोले तो हिन्दूओं से मुक्त करवाने के लिए उसने लोकतन्त्र के मन्दिर पर हमला किया। इतना ही नहीं उसके समर्थक मुसलिम आतंकवादी लगातार भारत को लहूलुहान करने की धमकियां दे रहे हैं जिनमें उमर-अबदुल्ला व गुलामनबी आजाद भी सामिल हैं। अगर इस राक्षस को फांसी नहीं दी जाती है तो इन आतंकवादियों के हौसले और बुलंद होंगे परिमास्वारूप भारत पर इनके हमले बढ जायेंगे।
हां एक बात जरूर है कि ये हमला अकेले मोहम्द अफजल ने नहीं किया था इसके साथ कुछ और लोग भी थे जैसे कि आतंकवादी  प्रोफैसर जिलानी व उसके अन्य भारतविरोधी आतंकवादी साथी। आतंकवादी प्रोफैसर जिलानी जैसे गद्दारों को कुलदीप नैयर जैसे पत्रकारों ने क्यों बचाया(कहीं ISI ऐजेन्ट मुहम्द फाई के आदेश पर तो नहीं) इन प्रश्नों का उतर भी देश की जनता को जानने का पूरा हक है।
मोहम्द अफजल के हमले में सुरक्षावलों के जवान मारे गय जबकि दूसरे हमले में एक नेता व उसके कुछ प्रशंसक मारे गय। दोनों में बहुत फर्क है ये नेता भारत पर भारतविरोधी कांग्रेस वोले तो  नैहरू खानदान का शासन बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रहा था जबकि सुरक्षावलों के जवान देश की अस्मिता की रक्षा के लिए संघर्ष करते हुए मारे गय।
ऐसा नहीं कि उमर अबदुल्ला पहली बार गद्दारी कर रहा है इससे पहले भी ये आतंकवादी सैनिकों पर हमला करने वाले अपने साथी 1200 मुसलिम आतंकवादियों पर से केश वापिस लेकर उन्हें सैनिकों पर हमला करने खुली छूट दे चुका है। हमला करते वक्त सैनिकों के हाथों मारे जाने पर अपने इन आतंकवादी साथियों का हौसला बानाए रखने के लिए पांच-पांच लाख रूपए की आर्थिक सहायता भी दे चुका है।
इतना ही नहीं ये आतंकवादी केन्द्र सरकार में बैठे अपने आतंकवादी मददगारों की सहायता से सैनिकों पर तरह-तरह के प्रतिबन्ध लगवाने में भी समर्थ रहा है।
अब आप खुद फैसला करो कि जिस राज्य का मुख्यमन्त्री गद्दार उमर अबदुल्ला जैसा आतंकवादी हो क्या वहां कभी शांति हो सकती है ?

गद्दारों की जिस कांग्रेस ने नेताजी सुभाष चन्द्र बोस जी जैसे प्रखर देशभक्त क्रांतिकारी का सौदा अंग्रेजों से कर लिया उससे आप बाकी देशभक्तों के मान सम्मान की उम्मीद भला कैसे कर सकते हैं?

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हम सब जानते हैं कि कांग्रेस की स्थापना एक विदेशी अंग्रेज ने भारतविरोधियों वोले तो हिन्दूविरोधियों के हित साधने के लिए 1885 में की।

अंग्रेज द्वारा कांग्रेस की स्थापना का एकमात्र मकसद था एक ऐसा गिरोह तैयार करना जो भारतीयों को अपना सा लगे लेकिन जिसका मूल मकसद हो भारत को तबाह करना।

कांग्रेस की स्थापना से लेकर आज तक कांग्रेस पर उन्ही लोगों का कब्जा रहा जिनमें भारतविरोध वोले तो हिन्दूविरोध कूट-कूट कर भरा हो। वेशक इसमें कुछ अपबाद भी देखने को मिले ।

खिलाफत अन्दोलन के समर्थन के बहाने मुसलिम अलगावबाद का समर्थन

1923 में जब देश में स्वातन्त्रता संग्राम के दौरान सब हिन्दू-मुसलिम मिलकर अंग्रेजों की दमनकारी नीतियों से तंग आकर एकजुट होकर संघर्ष कर रहे थे तभी कांग्रेस ने अलगाववादी मुसलमानों के दबाब में आकर खिलाफत अन्दोलन का समर्थन कर एक ऐसा षडयन्त्र किया जिसाक परिणाम मुसलिम लीग की स्थापना के रूप में हुआ जो आगे चलकर सांप्रदाय के आधार पर भारत के विभाजन का एककारण वनी। यहां हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि डा वलिराम हेडगेवार जी सहित कांग्रेस के अनेक नेताओं ने गांधी-नैहरू के इस निर्णय का विरोध किया लेकिन गांधी-नैहरू ने किसी की एक न सुनी। बाद में डा हेडगेवार जी ने 1925 में RSS की स्थापना कर देशभक्त नागरिकों के निर्माण का कार्य शुरू किया जो आज तक जारी है। आज देशभक्त नागिरकों की बढ़ती फौज ही कांग्रेस की परेसानी का सबसे बढ़ा कारण बन रहा है।

प्रखर देशभक्त नेताजी सुभाष  चन्द्र बोस जी का विरोध

Netaji Subhash chander Bose ji1939 में प्रखर देशभक्त नेताजी सुभाष चन्द्र बोस जी का नेहरू-गांधी के विरोध के बाबजूद कांग्रेस अध्यक्ष चुना जाना। लेकिन ये ऐसी घटना थी जिसने हिन्दूविरोधी देशविरोधी कांग्रेसियों को झकझेर कर रख दिया । बस फिर क्या था ये सब भारतविरोधी-हिन्दूविरोधी नैहरू-गांधी के नेतृत्व ऐसे षडयन्त्र करने में जुट गए जिनके परिणाम प्रखर देशभक्त नेताजी सुभाष चन्द्र बोस जी को कांग्रेस का अध्यक्ष पद छोड़ना पड़ा।

भारत विभाजन के दौरान कांग्रेस के हिन्दूविरोधी-देशविरोधी षडयन्त्र

1947 में कांग्रेस ने अंग्रेजों के साथ मिलकर भारत का सांप्रदाय के आधार पर विभाजन सवीकार किया।ab1 इस विभाजन के अनुसार मुसलमानों के लिए पाकिस्तान (पूर्वी और पश्चिमी )का निर्माण किया गया जबकि हिन्दूओं के लिए भारत का वाकी वचा हिस्सा दिया गया। लेकिन यहां फिर कांग्रेस ने एक षडयन्त्र के तहत मुसलमानों को फिर से हिन्दूओं वाले हिस्से में रखने की जिद की।

RSS ने सांप्रदाय के आधार पर देश के विभाजन का डट कर विरोध किया । जब कांग्रेस ने विभाजन सवीकार कर पाकिस्तान में रहने वाले हिन्दूओं को मुसलिम आतंकवादियों के हाथों मरने के लिए अकेला छोड़ दिया तब RSS ने हिन्दूओं की रक्षा के लिए दिन-रात एक कर प्रयत्न किया।

कांग्रेस ने विभाजन के दौरान RSS द्वारा हिन्दूओं की रक्षा के लिए काम करने से चिढ़ कर RSS पर प्रतिबन्ध लगा दिया 1948 में कांग्रेस नें गांधी की हत्या का झूठा आरोप लगाकर देशभक्त संगठन RSS पर प्रतिबन्ध लगा दिया।

RSS ने संबैधानिक तरीके से इसका विरोध किया । बाद में मजबूर होकर कांग्रेस को मानना पड़ा कि RSS का गांधी की हत्या में कोई हाथ नहीं है। परिमामस्वारूप प्रतिबन्ध हटा लिया गया। बैसे भी कांग्रेस जानती थी कि गांधी की हत्या के लिए नैहरू ही जिम्मेदार है ।

वन्देमातरम् में कांटछांट कांग्रेस की गद्दारी का प्रमाण

15 अगस्त 1947 को सांप्रदाय के आधार पर भारत का विभाजन होने के बाद जब पाकिस्तान और बंगलादेश को हिन्दूविहीन कर दिया गया तो भारत में मुसलमानों को रखने का कोई औचित्या नहीं था ।

उसवक्त कांग्रेस के अनेक देशभक्त लोगों ने बार-बार मुसलमानों को देश में न रहने देने की बकालत की थी फिर भी गद्दार कांग्रेसियों ने मुसलमानों को भारत में रखने का फैसला क्यों किया?
आज देश पर बार-बार हो रहे मुसलिम आतंकवादी हमलों के बाद आप समझ सकते हैं कि कौन सही था कौन गलत ?

अगर मुसलमानों को भारत में इस आधार पर रखा गया कि मुसलमान देशभक्त हैं और सर्वधर्मसम्भाव में विस्वास रखते हैं तो फिर वन्देमातरम् की चार पंक्तियों को छोड़ कर वाकी पंक्तियों को क्यों काट दिया गया?

कांग्रेस द्वारा अलगावबाद को बढ़ाबा देने के लिए अल्पसंख्यकबाद व दंगो का सहारा

जब भारत को हिन्दू राष्ट्र नहीं घोषित किया गया तो फिर देश में अल्पसंख्यकबाद के नाम पर धर्म के आधार पर कानून क्यों बनाए गए?
जब सारा देश एक है तो फिर कश्मीरघाटी के मुसलिमबहुल होने की बजह से जम्मु-कश्मीर में अलग संविधान, अलग कानून, धारा 370 क्यों ?

अलगावबाद से ग्रसित कांग्रेस द्वारा समस्या की जड़ मुसलिम पर्सनललॉ का बचाब
1955 में जब हिन्दू पर्सनल ला समाप्त कर हिन्दूओं को देश के संविधान के अनुसार जीवन यापन करने के लिए कहा गया तो फिर मुसलिम पर्नसनल ला को समाप्त कर क्यों मुसलमानों को संविधान के दायरे में नहीं लाया गया?
समाजिक बुराईयों के नाम पर हिन्दूओं की अनेक मान्याताओं पर सरकार ने प्रतिबंध लगाया तो मुसलमानों में अलगाववाद को बढ़ावा देने वाली बुराईयों पर प्रतिबंध क्यों नहीं?

कांग्रेस द्वारा धर्मनिर्पेक्षता की आड़ में हिन्दूमिटाओ-हिन्दूभगाओ अभियान को बढ़ाबा

जब संविधान में धर्मनिर्पेक्ष शब्द नहीं था तो 1977 में इसे संविधान में क्यों जोड़ा गया?

मार्च 1998 वनधामा नरसंहार.5भारत में आज बहुत ही खतरनाक स्थिति बनती जा रही है अपने हिन्दूराष्ट्र भारत में विदेशी संस्कृति से प्रेरित मीडिया, खुद को सैकुलर कहलवाने वाले राजनीतिक दलों, बिके हुए देशद्रोही मानवाधिकार संगठनों, खुद को सामाजिक कार्यकर्त्ता कहलवाने वाले गद्दारों, भारत विरोधी आतंकवादियों व परजीवी हिन्दुविरोधी लेखकों का एक ऐसा सेकुलर गिरोह बन चुका है जो भारत को सांस्कृतिक व आर्थिक रूप से तबाह करने पर आमादा है। इस गिरोह को हर उस बात से नफरत है जिसमें भारतीय संस्कृति व राष्ट्रवाद का जरा सा भी अंश शेष है । यह गिरोह हर उस बात का समर्थन करता है जो देशद्रोही कहते या करते हैं । देशद्रोही मुसलिम आतंकवादियों व वामपंथी आतंकवादियों को बेचारा गरीब अनपढ़ व सत्ताया हुआ बताकर हीरो बनाता जा रहा है । सेवा के नाम पर छल कपट और अवैध धन का उपयोग कर भोले-भाले बनवासी हिन्दुओं को गुमराह कर उनमें असभ्य पशुतुल्य विदेशी सोच का संचार कर हिन्दुविरोधी-राष्ट्रविरोधी मानसिकता का निर्माण करने वाले धर्मान्तरण के ठेकेदारों को हर तरह का सहयोग देकर देश की आत्मा हिन्दू संस्कृति को तार-तार करने में जुटा है। यह गिरोह एक ऐसा तानाबाना बुन चुका है जिसे हर झूठ को सच व हर सच को झूठ प्रचारित करने में महारत हासिल है।

हम दाबे के साथ कह सकते हैं कि इस हिन्दुविरोधी देशद्रोहीगिरोह की क्रियाप्रणाली हमेशा मुसलिम आतंकवाद व धर्मांतरण समर्थक रही है इसमें भी खतरनाक कड़बी सच्चाई यह है कि इस हिन्दुविरोधी देशद्रोहीगिरोह ने कभी भारतीय संस्कृति के प्रतीकों का सम्मान करने वाले देशभक्त मुसलमानों व ईसाईयों जो खुद को हिन्दूसमाज का अभिन्न अंग व भारत को अपनी मां मानते हैं को न कभी प्रोत्साहन दिया न ही कभी उनका भला चाहा ।

इस हिन्दुविरोधी देशद्रोही गिरोह को अगर किसी की चिन्ता है तो उन मुसलिम आतंकवादियों व धर्मांतरण के ठेकेदारों की जो अपनी आवादी बढ़ाकर ,धर्मांतरण करवाकर , शान्तिप्रिय हिन्दुओं का खून बहाकर इस हिन्दूराष्ट्र भारत के फिर से टुकड़े कर इस्लामिक व ईसाई राज्य वनाने का षड़यन्त्र पूरा करने के लिए इस देशद्रोही सरकार का समर्थन पाकर अति उत्साहित होकर आगे बढ़ रहे हैं ।मार्च 1998 वनधामा नरसंहार.4

यह गिरोह देश की रक्षा के लिए जान खतरे में डालकर जिहादी आतंकवादियों का सामना करने वाले देशभक्त सैनिकों,साधु-सन्तो व संगठनों से अपराधियों जैसा व्यवहार कर रहा है और न जानें उनके लिए क्या-क्या अपशब्द प्रयोग रहा है।

RSS पर वार-वार हमला कांग्रेस सरकार की इसी देशविरोधी सोच का ही परिणाम है।

अलगाववादी मानसिकता से ग्रसित कांग्रेस ने सामाजिक एकता को तार-तार कर दियाreligions in india

अगर आप ध्यान दें तो आज तक कांग्रेस सरकारों ने जितने भी नियम बनाए हैं उनका आधार कहीं न कहीं जाति-क्षेत्र-सांप्रदाय-भाषा-प्रांत हैं।नियम अलगाववादी अधार पर होने के कारण ही आज लोग जाति-क्षेत्र-सांप्रदाय-भाषा,-प्रांत के आधार पर संगठित होने को मजबूर हैं इसी बजह से आज सब के सब राजनीतिक दलों का आधार भी कहीं न कहीं जाति-क्षेत्र-सांप्रदाय-भाषा-प्रांत ही है परिणामस्वारूप भारत लगातार अन्दर से कमजोर होता जा रहा है।

जरा सोचो जब संविधान में समानता का अधिकार है तो फिर नियम जाति, क्षेत्र, सांप्रदाय, भाषा के आधार पर क्यों?
अलगावावदी मुसलिम लीग व धर्मांतरण के ठेकेदार आज भी हिन्दूविरोधी-देशविरोधी कांग्रेस के सांझीदार

आज भी कांग्रेस केरल में अलगाववादी मुसलिम लीग व उतर-पूर्व में अलगाववादी इसाई गिरोहों के साथ मिलकर सरकार बनाकर अलगावबाद को बढ़ाबा देती है।

केरल सरकार की इसी अलगाववादी मानसिकता से तंग आकर लबजिहाद से जुड़े मामलों में सरकार द्वारा मुसलिम आतंकवादियों का पक्ष लिए जाने के कारण माननीय उच्च न्यायालय के न्यायधीशों को कहना पड़ा कि लगता है कि सरकार नहीं चाहती कि लबजिहाद जैसे षडयन्त्रों से पिड़ीत लड़कियों को कभी न्याय मिल सके।

कांग्रेस की अलगावबादी मानसिकता का सबसे बड़ा प्रमाण शाहवानो केश

1984 में जब साहवानो केश में माननीय सर्वोच न्यायलया ने मुसलिम महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए कानून पारित किया तो उसे ततकालीन कांग्रेस सरकार ने शरीयत का हबाला देकर रद्द कर दिया?

जिसके परिणामस्वारूप इसलाम के नाम पर प्रताड़ित की जा रही मां-बहनों को न्याय मिलने की उम्मीदों पर पानी फिर गया व मुसलिम अलगाववाद को नई ताकत मिली।

प्रखर देशभक्त सरदार बलभभाई पटेल जी का विरोध

sardar balabh Bhai patel ji1947 में भारत विभाजन के बाद भी जब कांग्रेस की सब इकाईयों ने प्रखर देशभक्त सरदार बलभभाई पटेल जी को प्रधानमन्त्री बनाने का एकजुट फैसला किया तब भी सब हिन्दूविरोधी-देशविरोधी कांग्रेसियों ने अंग्रेजों के इसारे पर एक कट्टर देशविरोधी-हिन्दूविरोधी नेहरू को विभाजित भारत का प्रधानमन्त्री बनाने में सफलता हासिल की जिसके परिणामस्वारूप देश के विभाजन की जड़ इसलाम को विभाजित भारत में न केवल रखा गया वल्कि विशेषाधिकार देकर भारत को फिर से लहुलुहान करने का वीज वो दिया गया ।

प्रखर देशभक्त क्रांतिकारियों का विरोध

आप सब जानते हैं कि जब-जब भी

शहीद भक्त सिंहshaeed ji,

राजगुरू जी,Rajguru jiसुखदेव जीRajguru ji 1,

चन्द्रशेखर आजाद जी Chander Shekhar Azad jiजैसे प्रखर देशभक्त क्रांतिकारियों का अत्याचारी आक्रमणकारी ईसायों(अंग्रेजों) से सामना हुआ तब-तब भारतविरोधी-हिन्दूविरोधी कांग्रेसियों ने देशभक्त क्रांतिकारियों का साथ देने के बजाय देश के दुशमन सम्राज्यावादी ईसाईयों का साथ दिया।

कितने ही ऐसे देशभक्त क्रांतिकारी हैं जो तन-मन-धन से देश की खातिर लड़ते हुए अपनी लड़ाई को अंजाम तक इसलिए नहीं पहुंचा सके क्योंकि लड़ाई के अंजाम तक पहुंचाने से पहले ही वो गद्दार कांग्रेसियों की मुखवरी के परिणामस्वारूप सम्राज्यावादी ईसाई आतंकवादियों के हमलों के सिकार हो गय।

कौन नहीं जानत कि इन भारतविरोधी-हिन्दूविरोधी कांग्रेसियों ने इन देशभक्त क्रांतिकारियों को देश के दुशमन ईसाईयों के इसारे पर आतंकवादी तक करार दे दिया।

अपनी हिन्दूविरोधी-देशविरोध की गद्दारी की परम्परा पर आगे बढ़ते हुए ही आज इटालियन अंग्रेज एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी की गुलाम कांग्रेस Petro dollar + Us Dollar मतलब कातिल मुसलिम आतंकवादियों के नेता साऊदी अरब व धर्मांतरण के ठेकेदार ईसाई आतंकवादियों के नेता अमेरिका के ईसारे पर ही आज कांग्रेस भारत के हित में उठनेवाली हर आबाज को कुचल देने पर आमादा है।

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ऐसा नहीं कि कांग्रेस ने 2004 से पहले कोई देशविरोधी-हिन्दूविरोधी कार्य नहीं किया लेकिन कांग्रसे पर इटालियन अंग्रेज एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी के कब्जे के बाद कांग्रेस लगातार हिन्दूविरोधी-देशविरोधी कार्यों को अन्जाम दे रही है।क्योंकि आज कांग्रेस सरकार पूरी तरह से एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी की गुलाम है इसलिए सरकार के हर देशविरोधी-हिन्दूविरोधी कार्य के लिए यही अंग्रेज जिम्मेदार है।

कांग्रेस का हाथ सुरक्षाबलों के बजाए गद्दारों के साथ

2004 में सता में आते ही कांग्रेस की  सरकार ने अर्धसैनिक वलों के जवानों के देश की रक्षा की खातिर शहीद हो जाने पर उनके परिवारों को मिलने वाली आर्थिक सहायता को यह कहकर कम कर दिया कि सरकार के पास पैसे की कमी है लेकिन इसी सरकार ने कशमीरघाटी में भारतीय सेना पर हमला कर सैनिकों को घायल करने व मारने stone pelters in kashmir beating armyवाले भारतविरोधी आतंकवादयों को 5-5 लाख रूपए दकेर सिद्ध कर दिया कि सरकार की नियत देशभक्त सैनिकों का हौसला तोड़कर गद्दारों का हौसला बढ़ाने की है।

कांग्रेस का हाथ बाबर व औरंगजेब जैसे राक्षसों के साथ

मर्यदापुर्षोत्तम भगवान श्रीराम जी द्वारा बनाय गए श्रीलंका और भारत को जोड़ने वाले रामसेतु को ram setuन तोड़ने से जुड़े एक मामले में कांग्रेस की हिन्दूविरोधी-देशविरोधी सरकार ने हल्फनामा देकर मर्यादा पुरषोत्तम भगवान श्री राम जी के अस्तित्व पर प्रश्न खड़े कर एकवार फिर सिद्ध कर दिया कि कांग्रेस के अन्दर हिन्दू-संस्कृति वोले तो भारतीय संस्कृति के प्रति जहर किस हद तक भर चुका है।

यह वही कांग्रेस है जिसके नेता स्वर्गीय राजीब गांधी जी ने 1986 में खुद राममन्दिर में पूजा अर्चना कर अयोध्या में भव्य मन्दिर बनाने के कार्य को आगे बढ़ाया था लेकि आज यही कांग्रेस औरगंजेब व बाबर जैसे राक्षसों को अपना आदर्श मानकर अयोध्या में मर्यादा पुरषोत्तम भगवान श्री राम जी के मन्दिर को मसजिद करार दे रही है।

इसरतजहां मुठभेड़ में कांग्रेस का हाथ एकवार फिर भारतविरोधी आतंकवादियों के साथ

गुजरात में सुरक्षावलों ने लसकरे तैयवा की आतंकवादी इसरत जहां ishrat jahanको मुठभेड़ में मार गिराया। जिसके जनाजे में महाराष्ट्र के हजारों कांग्रेसियों के साथ समाजवादी पार्टी के गद्दार भी सामिल हुए।महाराष्ट्र की कांग्रेस सरकार ने इसरत जहां के परिवार को लाखों रूपए देने के साथ-साथ उसको निर्दोस भी बताया। हद तो तब हो गई जब महारष्ट्र एटीएस की जांच में व केन्द्री खुफिया ऐजैसियों की जांच में ये तथ्य सिद्ध हो गया कि इसरतजहां एक खूंखार आतंकवादी थी फिर भी कांग्रेस ने सुरक्षावलों का साथ देने के बजाए इस आतंकवादी का ही साथ दिया । अंत में एफबीआई(FBI) ने भी बताया कि हैडली जानता है कि इसरतजहां लसकरे तैयवा की आतंकवादी थी।

मतलब यहां भी कांग्रेस का हाथ गद्दार भारतविरोधी आतंकवादियों के साथ।

सोरावुद्दीन मुठभेड़ में कांग्रेस का हाथ एकवार फिर भारतविरोधी  आतंकवादियों के साथ

गुजरात में भारतविरोधी आतंकवादी सोराबुद्दीन shorabudeenसुरक्षावलों के साथ मुठभेड़ में मारा गया।इस आतंकवादी के घर से एक दर्जन एक47 व दर्जनों हथगोले प्राप्त हुए। इस आतंकवादी को मारने के विरोध में कांग्रेस ने सीबीआई का दूरूपयोग करते हुए दर्जनों पुलिस अधिकारियों व जवानों को जेल में डाल दिया जो आज तक जेल में हैं। हद तो तब हो गई जब राज्य के गृहमन्त्री को भी जेल में डाल दिया गया।

मतलब यहां भी कांग्रेस का हाथ गद्दार भारतविरोधी आतंकवादियों के साथ।

कशमीरघाटी में कांग्रेस का हाथ एकवार फिर भारतविरोधी  आतंकवादियों के साथ

कुपवाड़ा में आतंकवादियों से मुठभेड़ के बाद सैनिकों ने भारतविरोधी आतंकवादियों को मार गिराया। कांग्रेस ने आतंकवादियों की मौत से बौखलाकर मेजर को बर्खसात कर पूरी की पूरी बटालियन पर ही केस दर्ज कर आतंकवादियों को कांग्रेस का हाथ गद्दारों के साथ होने का सपष्ट प्रमाण दिया। एसा एकवार नहीं की वार हुआ जब कांगेस  सरकार भारतीय सेना के बजाए आतंकवादियों के साथ कड़ी नजर आई।

मतलब यहां भी कांग्रेस का हाथ गद्दार भारतविरोधी आतंकवादियों के साथ।

कांग्रेस का हाथ भारतविरोधी  आतंकवादी अफजल के साथ

जब माननीय न्यायलय ने लोकतन्त्र के मन्दिर संसद भवन पर हमला करने वाले आतंकवादी मुहम्मद अफजल afzal guruको फांसी की सजा सुनाकर 19 नम्मवर 2006 फांसी की तारीख तय(वेशक हमले का mastermind प्रोफैसर गिलानी कुलदीप नैयर जैसे नकबापोसों की सहायता से बच निकला)  की तो लोकतन्त्र के इस इस मंदिर की रक्षा की खातिर शहीद हुए सैनिकों के परिवारजनों व आहत हुए देशभक्तों के मन में न्याय की उमीद पैदा कर दी तो फिर से भारतविरोधी आतंकवादियों की मददगार सरकार ने इस आतंकवादी की फांसी आज तक मतलब अगस्त 2011 तक रोककर कर एकवार फिर कांग्रेस के भारतविरोधी चरित्र का प्रमाण दे दिया ।

कांग्रेस का प्रखर देशभक्त RSS पर हमला

RSS पर वार-वार हमला कांग्रेस सरकार की इसी देशविरोधी सोच का ही परिणाम है। RSS ने कांग्रेस के हर उस कदम को विरोध किया है जो कांग्रेस ने देशहित के विरूद्ध उठाया। चाहे 1947 में सांप्रदाय के आधार पर भारत के विभाजन की षडयन्त्र हो या फिर 1977 में तानाशाही की बात हो या फिर 1992 में राम मन्दिर को मजजिद बताने की बात हो या पिर 2004 में विदेसी एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी के प्रधानमन्त्री बनने की बात हो या पिर आज कशमीरघाटी को पाकिसतान के हवाले करने का षडयन्त्र हो।

सबसे पहले RSS ने कांग्रेस की देश से गद्दारी के विरोध में आबाज उठाई तो बदले में कांग्रेस ने भारतविरोधी मुसलिम आतंकवादियों द्वारा किए गय हमलों का दोश RSS के सिर मढ़कर RSS को आतंकवादी-सांप्रदायिक करार दे दिया।

कांग्रेस का प्रखर देशभक्त स्वामी रामदेव जी पर हमला

Ram Dev jiजब स्वादेशी और देशभक्ति के प्रेरणास्त्रोत स्वामी रामदेब जी ने सारे संसार में भारतीय संसकृति और आयुर्वैदिक चिकित्सा प्रणाली का झंडा पहराते हुए कांग्रेस की आका एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी व अन्य भ्रष्ट लोगों द्वारा विदेशों में जमा करवाय गए कालेधन व नेताओं द्वारा फैलाए गए भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया तो चोरों और गद्दारों की हमसफर व मददगार कांग्रेस सरकार ने स्वामी रामदेव जी को ही भ्रष्टाचारी , आतंकवादी व RSS का मुखौटा करार देकर उन्हें व उनके बालकृष्ण जी जैसे सहयोगियों को बदनाम करने के लिए सब सरकारी ऐजेंसियों को देशभक्त स्वामी राम देव जी व उनके सहयोगियों के पीछे लगा दिया।

कांग्रेस का प्रखर भ्रष्टाचार विरोधी अन्ना हजारे जी पर हमला

anna hajare jiजब अन्ना हजारे जी ने हजारे जी के साथ चल रहे अग्निवेश जैसे कांग्रेस के पुराने मित्रों के ईसारे पर स्वामी राम देव जी से नाता तोड़कर भ्रष्टाचार के विरूद्ध आबाज उठानी शुरू की तो पहले तो कांग्रेस ने हजारे जी के साथ बातचीत करने की कोशिश की । लेकिन जब कांग्रेस को ऐहसास हो गया कि कांग्रेस का समर्पण कांग्रेस के प्रति न होकर देश के प्रति है तो फिर भारतविरोधी कांग्रेस सरकार ने अन्ना हजारे जी पर भी हमला वोल कर उन्हें भी बलैकमेलर,भर्ष्टाचारी व RSS का मुखौटा करार देकर उनके पीछे भी सब सराकरी ऐजेंसियों को लगा दिया।

कांग्रेस का हाथ मानवताविरोधी  आतंकवादी ओसामा-विन लादेन के साथ

कांग्रेस की असलियत को समझने के लिए इतना ही काफी है कि जो कांग्रेस स्वामी रामदेव जी व अन्ना हजारे जी जैसे प्रखर देशभक्त नागरिकों व RSS जैसे देशभक्त संगठनों को आतंकवादी,सांप्रदायिक,ठग,बलैकमेलर और न जाने क्या-क्या शब्द प्रयोग कर अपमानित करने व सरकारी ऐजेंसियों का प्रयोग कर समाप्त करने की कोशिश कर रही है वही कांग्रेश संसार के सबसे बढ़े राक्षश ओसामाविन लादेन Ladenको ओसामा जी कहकर व इस आतंकवादी को मारने पर सवाल खड़े कर अपनी असलियत सबके सामने रख रही है।

औरंगजेब व बाबर जैसे अत्याचारी राक्षसों को अपना आदर्श मानकर मर्यदापुर्षोत्तम भगवान श्रीराम जी का विरोध करने वाली कांग्रेस व धर्मांतरण के ठेकेदार इसाईयों के बताए मार्ग पर चलकर भारतीय संसकृति का विरोध करने वाली कांग्रेस से भारत का हित चाहने की उम्मीद करना सरासर वेवकूफी है।

हिन्दूविरोधी-देशविरोधी कांग्रेस का भारतीय संविधान पर हमला

भारतीय संविधान सांप्रदाय के नाम पर आरक्षण की इजाजत नहीं देता। लेकिन कांग्रेस लगातार सांप्रदायिक आधार पर आरक्षण की न केवल बात कर रही है पर कई राज्यों में तो कांग्रेस ने संविधान का खून करते हुए सांप्रदायिक आधार पर आरक्षण लागू कर अपने भारतविरोधी स्वारूप को और सपष्ट कर दिया है।

2014 के चुनाबों से पहले हिन्दूओं और मुसलमानों को लड़ाने के लिए सांप्रदाय के आधार पर आरक्षण को आगे बढ़ाने की वका3लत करने वाली रंगनाथ मिश्रा रिपोर्ट इन्तजार कर रही है साथ ही Prevention of Communal and Targeted Violence Bill- 2011

एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी की गुलाम कांग्रेस इस हिन्दूविरोधी अंग्रेज के इसारे पर Prevention of Communal and Targeted Violence Bill- 2011 के नाम से एक ऐसा कानून बनाने जा रही है जो न केवल मुसमानों और ईसायों को हिन्दूओं के कतलयाम की खुली छूट देता है पर साथ ही भारतीय संविधान की समानता की मूल भावना का भी खून करता है ।

ये भारतविरोधी इटालियन अंग्रेज का भारतीय संविधान पर ताजा हमला है।

भारतविरोधी कांग्रेस का माननीय सर्वोच्च न्यायालय पर हमला

जब माननीय सर्वोच्च न्यायालय supreme courtने कांग्रेस को गद्दारी व चोरबजारी से रोकने की कोशिश की तो कांग्रेस ने माननीय न्यायालय पर ही हमला वोलते हुए माननीय न्यायालय को ही अपनी सीमा मे रहने मतलब कांग्रेस को चोर-बजारी व देश से गद्दारी करने से रोकने की कोशिश न करने की धमकी दे डाली।

ऐसा पहली बार नहीं है इससे पहले भी जब-जब माननीय न्यायलय ने कांग्रेस को संविधान का खून कर देश से गद्दारी करने से रोकने की कोशिश की है तब-तब भारतविरोधी कांग्रेस ने माननीय न्यायालय पर हमला वोलकर मानानीय न्यायधीसों को धमकाने की कोशिस की है।

भारतविरोधी कांग्रेस का संवैधानिक संस्था CAG हमला

जब CAG CAG4ने कांग्रेस द्वारा इटालियन अंग्रेज एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी के नेतृत्व में देश को लूटने का कच्चा-चिट्ठा खोला तो कांग्रेस ने संबैधानिक संस्था CAG पर ही हमला वोल दिया।

एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी द्वारा विदेश यात्राओं पर देश का धन लुटाने पर आपति करने वाले अधिकारियों का कांग्रेस सरकार ने तबादला कर अपने भारत विरोधी चरित्र का एकवार फिर परिचय दे दिया।

भारतविरोधी कांग्रेस का Electronic Media पर हमला

जब अक्सर देशविरोधियों-हिन्दूविरोधियों की आबाज उठाने वाले Electronic Media ने चोरों और गद्दारों की कांग्रेस सरकार की चोरबजारी से तंग आकर चोरों और गद्दारों के विरूद्ध आबाज उठाकर जनता को जागरूक करना शुरू किया तो सरकार ने पहले तो हजारों करोड़ रूपए के विज्ञापन जारी कर खरीदने की कोशिश की जिसमें 100% सफलता न मिलने के बाद कांग्रेस ने मिडीया को भी धमकाना शुरू कर दिया।

अगर अब भी आप सोचते हैं कि चोरों और गद्दारों की कांग्रेस सरकार देशहित में आबाज उठाने वालों को न बदनाम करेगी , न उनपर हमला करेगी वल्कि देशभक्तों व क्रांतिकारियों  के साथ सम्मानपूर्वक पेश आएगी तब तो आप …

SADHNA NEWS CHANNEL कुछ अलग है वाकी चैनलों से…

हमारे देश में डंके की चोट पर सच्चाई वोलने का दाबा करने वाले हिन्दूविरोधी-देशविरोधी चैनलों की कतई कमी नहीं । लेकिन जैसे ही इन चैनलों को धर्मनिरपेक्ष गिरोह से जुड़े किसी गद्दार की चोरी और गद्दारी का पता चलता है बैसे ही इन चैनलों को लकवा मार जाता है।फिर ये चाहे AAJ TAK या फिर IBN7 या NDTV या STAR NEWS या इनके जैसा कोई और चैनल ।ये सब चैनल तब तक भौंकते हैं जब तक इनके निशाने पर कोई देशभक्त भारतीय या फिर देशभक्त संस्था हो लेकिन अपने गद्दार साथियों का नाम आते ही ये चुपी साध लेते हैं।
आपने देखा होगा कि स्वामी सुब्रामणियम स्वामी जी ने जो सच्चाई देश के सामंने रखी वो सच्चाई साधना समाचार चैनल को छोड़ कर किसी बौद्धिक गुलाम चैनल ने नहीं दिखाई। मामला सिर्फ इसी समाचार का नहीं और भी बहुत से समाचार हैं जहां साधना समाचार चैनल इन सब डरपोक चैनलों को धोता हुआ नजर आता है।
अब इस समाचार को आप खुद ही पढ़ लो हम क्या कहें?

विषकन्या के कांग्रेस पर कब्जे के बाद कांग्रेस का गद्दारी के मार्ग से पीछे हटना नामुकिन !

कांग्रेस का हाथ गद्दारों के साथ !
सच कहें तो गद्दारों की इस पार्टी में सुधार की अब कोई उम्मीद नजर नहीं आती। हमारा मानना था कि निचले सतर पर कॉंग्रेस में वेहद देशभक्त कार्यकरता हैं जिसका प्रभाब पहली पंक्ति के हिन्दूविरोधी-देशविरोधी नेताओं पर एक न एक दिन जरूर पढ़ेगा ।
लेकिन लगता है कि विदेशी इसाई मिसनरी विषकन्या के कांग्रेस पर कब्जे के बाद ऐसा होना लगभग नामुकिन सा हो गया है। जिस गद्दारी की शुरूआत इस भारत विरोधी की गुलाम सरकार ने 2004 में अर्धसैनिकबलों के जबानों को शहीद होने पर मिलने वाले पैसे में कटौती के साथ की वो अब गद्दारी का सतर इस हद तक पहुंच गया है कि भारतीय सैनिकों पर हमले करने बाले पत्तथरबाज आतंकवादियों को UPA सरकार ने पांच-पांच लाख देकर अपनी गद्दारी का प्रमाण देश के सामने रखा।
2004 में अर्धसैनिक बलों के शहीद जवानों के परिबार बालों को मिलने वाली राशि में कटौती करते वक्त कुतर्क दिया गया कि सरकार के पास पैसे नहीं हैं लेकिन आतंकवादियों को देने के लिए सरकार के पास पैसों की कोई कमी नहीं ये इस फैसले से सिद्ध होता है।
लोग कह रहे हैं कि इस विदेशी की कुलाद ने भारत समर्थक RSS की तुलना भारतविरोधी आतंकवादी गिरोह SIMI से कर दी हम पूछते हैं कि इस विदेशी की गुलाम जिस सरकार ने आतंकवादियों को मारने वाले सैनिकों पर केश दर्ज किए ,यहां तक कि पूरी की परी बटालियन को कटघरे में खड़ा कर दिया उस बिदेशी की कुलाद देशभक्त संगठन के वारे में और कह भी क्या सकती है?
सच्चाई यह है कि सेना किसी भी सरकार की ताकत होती है और सेना द्वारा देशहित में उठाए गए हर कदम की कोई भी देशभक्त सरकार समर्थन करती ही है लेकिन यहां मामला दूसरा है।
क्योंकि यह विदेशी इटालियन है इसे भारत की सेना परायी लगती है अपनी नहीं क्योंकि इसकी अपनी सेना तो इटालिन व युरोपियन सेना है । शायद इसीलिए ये विदेशी हर वक्त अपनी गुलाम सरकार पर भारतीय सेना को कमजोर करने वाले कदम उठाने का दबाब बनाती है। इसी दबाब की बजह से आज तक गुजरात से लेकर कशमीर घाटी तक सुरक्षाबलों के दर्जनों जवान जेलों में डाले जा चुके हैं व सैंकड़ों पर मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं।
अब जिसे, भारतीय सेना जो कि सरकार के इसारे पर ही हर काम करती है सिवाय देश की रक्षा के — से ही डर लगता हो —जिसे ये सेना अपनी दुशमन लगती हो —-भल उसे प्रधानमंत्री बनने से रोकने वाले देसभक्त संगठन क्या कभी अपने लगेंगे— नहीं न ।
ऐसे में सोचने वाला विषय यह है कि जिस विदेशी के निशाने पर भारतीय सेना है उसके निशाने पर भला देशभक्त संगठन क्यों नहीं होंगे ?
क्या आपको याद नहीं कि किस तरह पोटा हटवाकर इस भारत विरोधी इसाई ने भारत विरोधी आतंकवादियों की मदद की।मजेदारबात तो यह है कि इस विदेशी का तो भारतीय सर्वोच न्यायालय तक पर भरोसा नहीं बरना ऐसे कैसे हो सकता था कि देश पर हमला करने का जघन्य अपराध कतरने वाला आतंकवादी अफजल आज तक जिन्दा रहता ? वो भी तब जब माननीय न्यायालय ने इस भारतविरोधी आतंकवादी की फांसी की तारीख 19 नम्मवर 2006 तय की हो और आज 19 नम्मवर 2010 आने वाला हो।
अब आप सोचो कि भारतीय सेना व सर्वोच न्यायलय क्या सिर्फ RSS के हैं या फिर सारे देश के ? क्या ये दोनों संघ के इसारे पर काम करते हैं या फिर भारत सरकार के इसारे पर ?
जब इस विदेशी ने इन दोनों ही समानन्नीय संस्थाओं को बदनाम करने के लिए बार-बार सराकर पर दबाब बनाया हो व सरकार ने वार-बार इस दबाब के आगे झुककर इन दोनों ही संस्थाओं का अपमान किया हो तो फिर आप कैसे उम्मीद कर सकते हैं कि इस विदेशी के दबाब में ये सरकार किसी भी देशभक्त संगठन को बदनाम करने में कोई कसर वाकी छोड़ेगी ?
आज स्वामीराम देब जी हर भारतीय चाहे वो अमीर हो या गरीब को दिन-रात एक कर स्वस्थ जिन्दगी जीने का तरीका बताने के साथ-साथ भारतीयों को भारतीय संस्कृति का हर वो पहलू याद करवा रहे हैं जिसे वो विदेशी आक्रमणकारियों के गुलामीकाल के दौरान ही यातनाओं के परिणामस्वारूप भुला चुके थे।
आज स्वामीराम देब संसार की एक सबसे बड़े भारतीय संगठन के प्रमुख हैं लेकिन क्या इस विदेशी की गुलाम सरकार ने उन्हें Z+ सुरक्षा पलब्ध करवाई नहीं न क्यों ?
सिर्फ इसलिए क्योंकि जिस स्वामीरामदेब जी का नाम सुनने पर हर देसभक्त भारतीय का सिर गर्व से ऊंचा हो जाता है वही रामदेब इस विदेशी को कभी अपना नहीं लगता ?
आज भारत के इसके जैसे कितने ही शत्रु ऐसे हैं जिन्हें इस विदेशी की गुलाम सरकार देशभक्त भारतीयों की खून-पसीने की कमाई से सुरक्षा उपलब्ध करवाकर इनकी हिन्दू क्रांतिकारियों से रक्षा कर रही है ?
लेकिन गद्दारों की सरदार कब तक खैर मनाएगी एक न एक दिन ये सब गद्दार देशभक्त भारतीयों के हाथों अपने कुकर्मों का अन्जाम हर हाल में भुक्तेंगे ही…

आओ हम बताते हैं आपको कि बाबा अमरनाथ यात्रा शरू होने से ठीक पहले घाटी में आग किसने लगाई और किसने हबा दी।


हम अक्कसर बहुत सी बातों को जानते हुए भी उनके प्रति आँखें मूंदकर अपनी बरबादी को अपने पास आने देते हैं। होना तो ये चाहिए था कि जब मुसलमानों ने 1985 में अलकायदा की स्थापना के बाद

1986 में कशमीरघाटी में हिन्दूओं व सुरक्षाबलों पर हमले शुरू किए उसी बक्त या तो सेना को खुला हाथ देकर हमलाबरों की कबर घाटी में ही खोद दी जाती या फिर सरकार द्वारा सैनिकों को खुला हाथ न देने की स्थिति में हिन्दू खुद अपने हिन्दू भाईयों की रक्षा की खातिर देश के अन्य हिस्सों में मुसलिम आतंकवादियों व उनके समर्थकों पर हमले शुरू कर आतंवादियों पर दबाब बनाकर आतंकवादियो को हिन्दूओं पर हमले रोकने पर मजबूर करते।


इससे न केबल कशमीरघाटी में हिन्दूओं की रक्षा होती बल्कि साथ ही आसाम व उतर पूर्ब सहित अन्य राज्यों में भी आतंकवादियों व उनके समर्थकों को सबक मिलता हिन्दूओं पर हमला न करने का।


यहां तो उल्टा हुआ उधर मुसलमानों ने हिन्दूओं पर हमले शुरू किए इधर सेकुलर गद्दारों ने उनके समर्थन में समाचार चैनलों ,पत्र-पत्रिकाओं व अन्य साधनों का उपयोग कर महौल बनाना शुरू कर दिया।


देश में जिस भी संगठन या वयक्ति ने हिन्दूओं पर हो रहे अत्याचारों के विरोध में आबाज उठाई उसे बड़ी वेशर्मी से सांप्रदायिक करार देकर मुसलिम आतंकवादियों को अपने कुकर्मों को जारी रखने के लिए उकसाया गया।


परिणामस्वारूप कशमीर घाटी में 60000 हिन्दूओं का कत्ल कर 500000 हिन्दूओं को वेघर कर दिया गया।

ये काम अन्जाम दिया गया मस्जिदों व मदरसों से दुशप्रचार कर व लोगों को हिन्दूओं पर हमले करने के लिए उकसाकर।


अब जबकि घाटी से हिन्दूओं का लगभग सफाया हो चुका है मुसलिम आतंकवादियों ने पिछले कई बर्षों से सुरक्षाबलों पर हमले तेज किए हुए हैं।

आज शायद ही कोई दिन ऐसा गुजरता है जिस दिन देश की रक्षा की गारंटी हमारे बहादुर सैनिक शहीद नहीं होते।


अब जबकि कशमीरघाटी में सिर्फ मुसलिम आतंकवादी और उनके मददगार ही शेष बचे हैं तो फिर ऐसी कौन सी मजबूरी है जिसके कारण हमारे सैनिक अपनी रक्षा तक नहीं कर पा रहे हैं ।


सैनिकों के इस तरह कत्ल होने का एकमात्र कारण है केन्द्र

व राज्य सरकार का

आतंकवाद समर्थ रबैया। इन सराकारों ने आतंकवादियों के हमलों को सफल बनाने व सुरक्षावलों द्वारा निर्णायक जबाबी कार्यवाही न करने देने के लिए सेना के अधिकारों को इतना कम कर दिया है कि आतंकवादी वेखौफ होकर सैनिकों के बंकरों व टुकड़ियों पर हमला कर रहे हैं।


आज भी सरकार मुसलिम आतंकवादियों की विजय सुनिस्चित करने के लिए सेना पर और प्रतिबन्ध लगाने के चक्कर में है। जिसका सेना के तीनों अंगों के सेना प्रमुख विरोध कर रहे हैं। पर सरकार कहां मानने वाली है उसे तो हर हाल में मुसलिम आतंकवादियों की जीत सुनिस्चित करनी है मानबाधिकों को ढ़ाल बनाकर। पिछले दिनों में शायद ही ऐसी कोई घटना होगी जिसमें सैनिकों द्वारा आतंकवादियों को मुठभेड़ में मार गिराने पर सरकार ने सैनिकों के विरूद्ध मुकद्दमा दर्ज नहीं किया होगा।


मुसलिम आतंकवादियों के इरादों का पता आप इसी बात से लगा सकते हैं कि जैसे ही कसमीरघाटी में बाबा अमरनाथ यात्रा शुरू होती है बैसे ही ये आतंकवादी अपने हमले तेज कर सैनिकों को उलझाकर इस पबित्र यात्रा में बाधा पैदा कर तीर्थ यात्रियों पर हमले शुरू कर देते हैं।


ऐसा नहीं कि सरकार इस यात्रा में कोई ब्याबधान नहीं डालती। हर बर्ष की तरह इस बर्ष भी सराकर ने लंगर लगाने बालों से 25000 रूपए का भारी भरकम जजियाकर बसूल किया । जब इतने से जिहादी मुसलिम उमर अबदुल्ला का मन नहीं भरा तो तीर्थ यात्रियों को ले जाने वाली बसों का एक दिन का टैक्स 2500 रूपए कर दिया गया मतलब टैक्स के साथ जजिया कर भी लगा दिया गया। इसेके अतिरिक्त यात्रीयों से रजिस्ट्रेसन फीस के नाम पर जजिया बसूला गया सो अलग।


हमें तो यह सोचकर ही हैरानी होती है कि जो सरकार मक्का मदीना की यात्रा के लिए प्रति मुसलमान 60000 रूपए की खैरात बांटती है माननीय नयायालय द्वारा रोक लगा देने के बाबजूद वही सरकार किस मुंह से हिन्दूओं की धार्मिक यात्राओं पर जजिया कर लादकर रूकबटें पैदा करती है?


इसे भी जयादा हैरानी हमें उन बैद्धिक गुलाम हिन्दूओं पर होती है जो सरकार के इन भेदभावपूर्ण अमानबीय सरोकारों का विरोध करने की जगह विरोध कर रहे जागरूक हिन्दूओं पर धावा वोल देते हैं।


अपने इन बौद्धिक गुलाम हिन्दूओं के सहयोग की बजह से भारतविरोधी देशविरोधी ताकतें (चाहे वो पाक समर्थक मुसलिम आतंकवादी हों या फिर चीन समर्थक माओवादी आतंकवादी या फिर धर्मातरण समर्थक इसाई आतंकवादी ) आगे बढ़ती जा रही हैं जिसके परिमामस्वारू हर भारतीय के जानमाल पर खतरा बढ़ता जा रहा है।


आओ पूर्वाग्रहों व दुशप्रचार से आगे निकलकर भारतविरोधियों का विनाश सुनिश्चित करेन के लिए एकजुट होकर काम करें।




क्यों नहीं देते आप राय इस तरह के लेखों पर ?

क्यों नहीं देते आप राय इस तरह के लेखों पर ?

आप सब देख रहे हैं कि भारत में एक गिरोह ऐसा पैदा हो गया है जिसका एकमात्र उदेशय शांतिप्रिय-देशभक्त भारतीयों को लहूलुहान करने वाले आतंकवादियो को सही ठहराना है। ये आतंकवादी चाहे चीन समर्थक वामपंथी आतंकवादी हों या फिर पाक समर्थक मुसलिम आतंकवादी या फिर रोम समर्थक ईसाई आतंकवादी। इन आतंकवादियों द्वारा जब भी भारत की असमिता पर प्रहार किया जाता है तो ये गिरोह सक्रियता से ये सुनिश्चित करने में लग जाता है कि न तो भारतीयों को इन आतंकवादियों की गद्दारी का पता चले न सरकार इनके विरूद्ध कोई निर्णायक कार्यवादी कर पाये। परिणामस्वारूप भारत में देश के दुश्मन इन आतंकवादियों द्वरा की जा रही हिंसा लगातार बढ़ती जा रही है। इन आतंकवादियों के विरूद्ध कार्यावाही तो दूर की बात कोई देशभक्त संगठन इनकी गद्दारी को उजागर करने वाला ब्यान तक नहीं दे सकता क्योंकि जैसे ही कोई देशभक्त संगठन या सरकारी अधिकारी इन आतंकवादियों के विरूद्ध कोई जनता को जागरूक करने वाला ब्यान देता है तभी इन आतंकवादियों के समर्थकों का यह गिरोह सक्रिय होकर उस ब्यान देने वाले देशभक्त को घेरना शुरू कर देते हैं।

इस गिरोह के इसारे पर समाचार चैनल चर्चा-परिचर्चा आयोजित करते हैं ।जिसमें एक देशभक्त को घेरने के लिए तीन-चार लोग इस गिरोह से सबन्ध रखने वाले बुलाए जाते हैं। इस गिरोह के लोग वारी-वारी से भारतीय संस्कृति, देशभक्त संगठनों व सुरक्षावलों पर आरोप लगाते हैं फिर वारी आती है उस एक देशभक्त द्वरा आरोपों का जबाब देने की तो ये सब इस गिरोह से जुड़े लोग एंकर सहित उस पर टूट पड़ते हैं उस देशभक्त( वेचारे जी पार्थसार्थी जी) को अपना पक्ष तक ठीक से रखने का मौका नहीं दिया जाता ।अन्त में एंकर द्वरा निष्कर्ष निकाल दिया जाता है कि आतंकवादी जो भी कर रहे हैं ठीक कर रहे हैं सरकार को उनके विरूद्ध कार्यवाही करने के बजाए उनका विरोध करने वाल संगठनों पर कार्यावाही करनी चाहिए व ये सुनिश्चित करना चाहिए कि सुरक्षावलों पर इतने प्रतिबन्ध लगा दिए जायें कि चाहे जितने मर्जी जवान शहीद हो जायें पर आतंकवादियों पर आंच न आने पाये।

दुख के साथ कहना पड़ता है कि हर वार सरकार इनके दबाब में आकर कुछ न कुछ कदम ऐसे उठा देती है जो इन आतंकवादियों का हौसला बढ़ाने वाले सिद्ध होते हैं। सरकार ने आज की तारीक में सुरक्षवलों पर इतने प्रतिबन्ध लाद दिए हैं कि जब कभी भी जहां कहीं भी आतंकवादियों का सुरक्षाबलों से सामना होता है तो इसमें आतंकवादियों से कहीं अधिक सुरक्षबल मार दिए जाते हैं। अगर सुरक्षाबल आतंकवादियों को विना नुकसान उठाये मारने में सफल हो जाते हैं तो उस मुठभेड़ को फर्जी करार दे दिया जाता है अगर शहीद होने वाले  सैनिकों की संख्या मरने वाले आतंकवादियों से कम हो तो भी लड़ाई को फर्जी करार दे दिया जाता है। मतलब ये गिरोह तभी खुश होता है जब भारतीय सुरक्षावलों को ज्यादा से ज्यादा नुकशान हो। मतलब इस गिरोह की बफादरी भारत के प्रति न होकर भारत के शत्रुओं के प्रति ही रहती है फिर ये शत्रु चाहे चीन समर्थक वांमपंथी आतंकवादी हों या फिर पाक समर्थक मुंसलिम आतंकवादी या फिर रोम समर्थक ईसाई आतंकवादी ।

अब आप सोचेगें कि जब ये गिरोह इतना सबकुछ सरेआम कर रहा है तो फिर देशभक्त लोग इस गिरोह से जुड़े लोगों को खत्म क्यों नहीं कर देते। बस समस्या यहं पर है कि ये गिरोह कभी खुद को धर्मनिर्रपेक्षता के चोले में लपेट लेता है तो कभी मानवाधिकार के चोले में तो कभी पत्रकार के चोले में तो कभी एनजीओ के चोले में । ये गिरोह अपनी असली पहचान जनता के सामने उजागर ही नहीं होने देता ।क्योंकि इस गिरोह के मालिक सीमा पार हैं और वो सब भारत को नुकसान पहुंचाने के मुद्दे पर एकमत हैं इसलिए इस गिरोह की पहुंच संसार की बहुत सी ऐसी संस्थाओं तक है जो अपने आप को उसी तरह के चोलों में लपेट कर भारत को नुकशान पहूचाने के लिए भारत सरकार पर अपने-अपने देशों की सरकारों के माध्यम से दबाब बनाती हैं। ऐसा देखा गया है कि अक्सर भारत सरकार इन विदेशीयों के दबाब में आ जाती है फिर वो चाहे किसी भी दल की हो। परिणाम स्वारूप जिस गिरोह पर प्रतिबन्ध लगाकर सरकार को उससे जुढ़े लोगों को फांसी पर लटकाना चाहिए सरकार उसको बढ़ावा देने पर मजबूर होती है और कई वार तो उन्हीं संस्थाओं के साथ खड़ी नजर आती है।

अब प्रश्न यह पैदा होता है कि समाधान क्या है ।समाधान मुस्किल ही नहीं असम्भव भी दिखता है यदि हम जागरूक नहों तो । इस गिरोह से सक्रियता से जुड़े गद्दारों की संख्या बहुत कम है मतलब बड़ी मुस्किल से 1-3 हजार पर इस गिरोह की पकड़ क्योंकि सरकार व संचार साधनों पर अधिक है इस बजह से एक बड़ा बर्ग जो संचार साधनों का उपयोग करता है वो इस गिरोह के प्रति न केवल सहानुभूति रखता है पर उसे ऐसा भी लगता है कि ये गिरोह ठीक कर रहा है । क्योंकि अगर एक झूठ को सौ वार दोहराया जाए तो वो फिर झूठ  झूठ नहीं लगता । ये गिरोह तो एक झूठ को हजार वार दोहराता है कभी सराकर के माध्यम से कभी समाचार चैनलों के माध्यम से तो कभी समाचार पत्र पत्रिकाओं के माध्यम से । परिणामस्वारूप झूठ का एक ऐसा तानावाना वन जाता है जिसमें एक जागरूक बुद्धिजीवी भी उल्झ कर रह जाता है आम जनता द्वरा इस षडयन्त्र को विना किसी प्रयत्न से समझना लगभग नामुमकिन  है।

इस गिरोह को निपटाने के लिए तीन स्तर पर काम करना पढ़ेगा ।पहला ऐसा जनमत त्यार करना जो इस गिरोह के प्रभाव में रहने वाली सरकार न चुने । दूसरा अपने लेखों व भाषणों के माध्यम से जनता के सामने इसके एक-एक षडयन्त्र को उजागर करना। तीसरा जगह-जगह BTF के विचारों से सहमति ऱखने वाले लोगों से सम्पर्क कर इस गिरोह से सबन्धित गद्दारों को चुन-चुन कर निशाना वनाना। BTF से सबन्धित कार्यकर्ताओं को ऐसे गद्दारों की सूचना स्थनीय पुलिस को देने व उनके विरूद्ध कड़ी कार्यावाही सुनिश्चित करने के निर्देश जारी हो चुके हैं। हम सबको सिर्फ इतना करना है कि अपने जिले में इस दिशा में काम कर रहे देशभक्त संगठनों के कार्यकर्ताओं को संगठित कर इन गद्दारों को ठिकाने लगाने की योजना स्थानीय स्तर पर वनाकर अन्जाम देनी है संचार साधनों से दूर रहकर । संचार साधनों को उपयोग हम सिर्फ बैचारि विजय के लिए करेंगें । आप सब देशभक्तों से आशा है कि आप अपने –अपने स्तर पर अपनी-अपनी समर्थय के अनुशार इस गिरोह का पर्दाफास कर अपने देश को इस गिरोह के चुंगल से मुक्तकर आये दिन होने वाली हिंसा से मुक्त करेंगे।

अन्त में हम आपसे सिर्फ इतना कहेंगे कि हत्यारों का समर्थन करने वाल यह गिरोह विदेशीयों व देशद्रोहियों के टुकड़ों पर पलने वाला वो आसतीन का सांप है जिसका फन अगर आज न कुचला गया तो ये गिरोह हर देशभक्त शांतिप्रिय भारतीय का जीना हराम कर देगा। इस गिरोह का हर कदम देश में हिंसा-प्रतिहिंसा को बढ़ावा दे रहा है। आओ मिलकर इस गिरोह का पर्दाफास कर इसके खातमे का प्रण करें।

या फिर आप ही बताओ कि न आसतीन के सांपों का क्या करें ?        

भारत से गद्दारी कर पाकिस्तान का गुणगान करने बाले गद्दारों के नाम खुला संदेश

भारत से गद्दारी कर पाकिस्तान का गुणगान करने बाले गद्दारों के नाम खुला संदेश

13 फरबरी 2010 को महाराष्ट्र के पुणे शहर में मुसलिम आतंकवादियों द्वार किए गए जिहादी हमले में 9 लोग मारे गए व लगभग पचास लोग घायल हुए ।  पाकिस्तानियों के लिए लड़ने बाले व देशभक्तों को गाली गलौच करने बाले शाहरूख व उस जैसे सब लोगों से हम सिर्फ इतना ही कहेंगे कि समझदार लोग जिस पत्र में खाते हैं उस पत्र में छिद्र नहीं करते । हां अगर इन लोगों को पाकिस्तानियों से इतना ही लगाब है तो ये लोग पाकिस्तान क्यों नहीं चले जाते क्योंकि 1947 में पाकिस्तान का निर्माण ही इन जैसे गद्दारों के लिए किया गया था । पाकिस्तान उन लोगों के लिए बनाया गया था जो वन्देमातरम् का गान अमनी शान के खिलाफ समझते हैं गद्दारी और नमक हरामी जिनकी रग-रग में है । जो खाते–रहते भारत में हैं गुणगान पाकिस्तान और मुसलिम आतंकवादियों का करते हैं । कहां है इन गद्दारों की मां एंटोनियो माईनो मारियो ,उसका लाल और इन दोनों का गुलाम दिगविजय सिंह कोई जाकर बताए उसे कि पुलिस के लोग अपनी जान की बाजी लगाकर मुसलिम आतंकवादियों को पकड़ने बाले हैं । कहीं ये आतंकवादी इन पुलिसबालों के हाथ न आ जायें इसके लिए ये गद्दार जल्दी से इन आतंकवादियों के घर जाकर बैठ जाए और कह दे ये निर्देष हैं एंटोनियों के लाल हैं इन्हें कोई न पकड़े । पकड़ना है तो जाकर देशभक्त संगठनों के कारकर्ताओं को पकड़ें जो हर वक्त देशभक्ति का राग अलाप कर इन गद्दारों के बने बनाए खेल को विगाड़ रहे हैं । पर इस दिगविजयसिंह को यह भी बता देना कि इन आतंकवादियों का अगला निशाना इटली के निवासी हैं कहीं ये पहुंचते –पहुंचते इन सब गद्दारों की मां एंटोनियो तक न पहुंच जायें। फिर क्या करोगे।

जागो मेरे प्यारे सर्वधर्मसम्भाव में विस्वास रखने बाले हिन्दू भाईयो ,इस देश को अपनी मां मानकर वन्देमातरम् का गान करने बाले देशभक्त मुसलिम भाईयो बचा लो अपने तिल- तिल मिटते हिन्दू राष्ट्र भारत को क्योंकि जिस दिन ये पाकिस्तान हो जाएगा तो न हिन्दू बचेंगे न शांतिप्रिय देशभक्त मुसलिम भाई ही बचेंगे । अगर कोई बचेगा तो सिर्फ मुसलिम आतंकवादी व उनके गुलाम।

 हम देशभक्त हिन्दूमुसलिम भाईयों से यही कहेंगे कि पहचानो उन मुसलिम गद्दारों को जो ये आतंकबाद फैला रहे हैं व उन मुसलमानों को जो इन आतंकवादियों को सरण दे रहे हैं इन्हें निर्दोश बताकर इस मुसलिम आतंकवाद को आगे बढ़ा रहे हैं पहचानों उन हिन्दूओं को जो हिन्दू होकर हिन्दूओं से गद्दारी कर न  मुसलिम आतंकवादियों का साथ देकर आपके बच्चों को मौत की ओर धकेल रहे हैं ।

देशभक्तों के शव्र का इमत्हान न लो गद्दारो

अगर ये सवर टूट गया

 तो न कोई गद्दार बचेगा न कोई इन गद्दारों का मददगार

समझो हम समझा रहे हैं जो न समझे तो मिट जाओगे

खुद तो मिटोगे पर हिन्दूओं की बर्षों से कमाई सहनशीलता को भी मिटा डालोगे

कांग्रेस की फूट डालो और राज करो की निती न जाने क्या-क्या गुल खिलाएगी ?

कांग्रेस की फूट डालो और राज करो की निती न जाने क्या-क्या गुल खिलाएगी ?

15 अगस्त 1947 को आखंड भारत का विभाजन कांग्रेस के माध्यम से अंग्रेजों की फूट डालो और राज करो की निती का परिणाम था । सबको उमीद थी कि कांग्रेस इससे सबक लेकर वर्तमान भारत में एसा कोई काम नहीं करेगी जो भारतीयों को जाति, क्षेत्र, सांप्रदाय(धर्म) ,भाषा के आधार पर बांटे । आज 2010 में अगर हम पिछले 62 वर्ष में से 10 वर्ष निकाल दें तो वाकी सारा समय कांग्रेस का ही सासन रहा । इस समय में कांग्रेस ने जितने भी नियम बनाय उन सब अगर तार्किक आधार पर विसलेशण किया जाए तो हम पांयेगे कि लगभग हर कानून जाति, क्षेत्र, सांप्रदाय(धर्म) ,भाषा के आधार पर बनाया गया । ढूंढने पर हो सकता है कि ऐसे कुछ कानून मिलें जो जो गलती से भारतीयों के लिए बनाए गए हों पर मोटे जौर पर लगभग हर कानून का आधार जाति, क्षेत्र, सांप्रदाय(धर्म) और भाषा ही है। कानून तो कानून राज्यों तक का निर्माण प्रसासनिक आधार पर करने के बजाए ऐसे ही विभाजनकारी आधारों पर किया गया गया । यही बजह है कि देश में आज जितने भी राजनितीक दल हैं उनके निर्माण का आधार भी कहीं न कहीं जाति, क्षेत्र, सांप्रदाय(धर्म) ,भाषा ही है। कांग्रेस की इसी विभाजनकारी फूट डालो और राज करो की निती के परिणामस्वरूप ही भारत में मिडीया भी अपने प्रोग्राम जाति, क्षेत्र, सांप्रदाय(धर्म) ,भाषा के आधार पर ही बनाता है । कांग्रेस की इसी फूट डालो और राज करो की निती के परिणामस्वरूप ही भारत विरोधी विदेशी ताकतों ने देश में मानवाधिकार संगठनों व मिडीया के नाम पर दर्जनों भारत-विरोधी गिरोह त्यार कर डाले । इन्हीं गिरोहों में छुपे गद्दार समय-समय पर छोटी सी बात को इतनी तूल दे देते हैं कि लगता है जैसे गृहयुद्ध की स्थिति बन गई हो । ये गद्दार भारत विभाजन की बातें ऐसे करते हैं मानों शालाद में गाजर मूली खा रहे हों ।

महाराष्ट्र में मराठी गैर मराठी के नाम पर जो कुछ किया जा रहा है उसका आधार कहीं न कहीं इस राज्या का भाषा के आधार पर निर्माण है। राज ठाकरे ने उतर भारतीयों के विरूध जब जहर उगलना शुरू किया तो हमने अपने ब्लाग पर लिखा था कि जिस तरह कांग्रेस ने पंजाब में अकालियों को हटाकर अपनी सरकार बनबाने के लिए भिंडरावाले को पाल-पोस कर आगे बढांया था ठीक उसी तरह महाराष्ट्र में शिवसेना को कमजोर करने के लिए कांग्रेस राज ठाकरे को पाल-पोस कर आगे बढ़ा रही है । पंजाब में कांग्रेस द्वारा लगाइ गई आग की कीमत हजारों हिन्दू-सिखों को अपने प्राण देकर चुकानी पड़ी थी । जिसकी चिंगारीयां आज तक यहां वहां देखने को मिलती हैं ।जिन हिन्दू-सिखों का खून का रिस्ता है उनमें से एक को तोड़ कर इस कांग्रेस की इस विभाजनकारी निती ने अलपसंख्यक बना डाला । सायद भारतीयों को तोड़ने की हसरत इस कांग्रेस की अभी तक पूरी नहीं हुई थी इसीलिए महाराष्ट्र में ठण्डी पड़ चुकी इस चिंगारी को महाराष्ट्र के मुख्यमन्त्री ने ड्राईवर के लाइसैंस के साथ मराठी भाषा जोड़ कर शुलगाया । बस फिर क्या था कांग्रेस का दलाल राज ठाकरे तो पहले से त्यार बैठा था उसने मौका हाथों हाथ लिया । बस फिर क्या था बोट-बैंक के चक्कर में शिवसेना भी कूद पड़ी इस विभाजनकारी राजनिती में । हम तो कहते हैं कि उतर भारतीयों के विरूद्ध आग चाहे राजठाकरे उगले या शिवसेना। दोनों पर कार्यवाही करने की जिम्मेवारी सरकार की है लेकिन जब सरकार का मुखिया ही जहर उगलने लगे फिर कार्यावाही कौन करे ?

इन हालात में संघ ने उतर भारतीयों की रक्षा की जिमेवारी उठाकर अपनी विचारधारा के अनुरूप एक नेक कदम उठाया है। संघ को इस बात के प्रति सचेत रहने की जरूरत है कि कहीं कांग्रेस सरकार उसको उलझाने के लिए कोई और डरटी गेम न खेले । संघ को शिवसेना से भी बात कर उसे उसकी गलती का एहसास करवाना चाहिए।

हम तो शिवसेना से यही कहेंगे कि या तो शिवसेना भगवा चोला उतारकर खुद को देशभक्त कहना छोड़ दे या फिर अपने आप को फूट डालो और राज करो की कांग्रेस की निति से दूर कर ले । ये दोनों चीजें साथ-साथ नहीं चल सकतीं । जो देशभक्त भगवा का समर्थक वोटर है वो कभी भी क्षेत्रवाद या भाषावाद की बात करने बालों को वोट नहीं डाल सकता । शिव सेना को समझना चाहिए कि हमलोगों ने आज तक अगर शिव-सेना का समर्थन किया तो सिर्फ इसलिए कि जिहादी आतंकवाद के विरूद्ध महाराष्ट्र मे जो भी आबाजें उठीं उनमें से सबसे उंची आबाज शिवसेना की थी और आज भी है । लेकिन अगर शिवसेना देशभक्ति की जगह क्षेत्रवाद या भाषावाद को अपनी विचारधारा बनाती है तो फिर हम इसे गद्दारी ही कहेंगे और गद्दारों के साथ कोई देशभक्त खड़ा नहीं हो सकता। शिवसेना को समझना चाहिए कि देश पर जिहादी आदंकवाद का जो खतरा मंडरा रहा है उसे देखते हुए देश को शिवसेना की जरूरत है लेकिन राष्ट्रवादी विचारधार के साथ । शिवसेना को समझना चाहिए कि मराठी गैर मराठी की बात कर शिवसेना विल्कुल वैसी ही गद्दारी कर रही है जैसी कांग्रेस ने कश्मीर में धारा 370 लगाकर की थी और आज भी कर रही है।

ऱाहुल गांधी का सुरक्षाबलों को मराठी-गैरमराठी में बांटने बाला बयान न केवल राहुल की सोच का दिवालियापन उजारग करता है पर साथ ही कांग्रेस की फूट डालो और राज करो की निती को भी आगे बढ़ाता है । कांग्रेस के लिए यह कोई नई बात नहीं । इससे पहले कांग्रेस सेना को मुसलिम-गैर मुसलिम के आधार पर बांटने का षडयन्त्र कर चुकी है जिसे सेना प्रमुख जे जे सिंह जी ने अपनी समझदारी व दृड़ता से असफल कर दिया।

विहार में जब राहुल ने अपनी सोच का दिवालियापन प्रकट करते हुए वर्तमान भारत के सबसे अधिक प्रगतिशील व शांतिप्रय राज्य पर सिर्फ इसलिए हमला किया क्योंकि वहां पर हिन्दूत्वनिष्ठ व देशभक्त सरकार काम कर रही है तो विहार के कांग्रेसी हिन्दू कार्यकर्ताओं के सब्र का बांध टूट पड़ा और उन्होंने राहुल पर कुर्सियां जूते चप्पल फैंक कर उसकी सोच के दिवालिएपन का करारा जबाब दिया।हमें इन्तजार है उस वक्त का हर भारतीय इस राहुल की सोच के दिवालिएपन को समझकर एसा ही करारा जबाब दे।

शिव सेना को समझना चाहिए कि अगर वो मराठी-गैरमराठी के मुद्दे पर उतर भारतीयों को निशाना बनाती है तो फिर उसमें और राहुल में कोई फर्ख नहीं रह जाएगा। राहुल द्वारा विभाजन की बातें करना मिडीया और हमें इसलिए ज्यादा बुरा नहीं लगता क्यों वो एक विदेशी मां की औलाद है और उसी विदेशी की संगत में पल बढ़ रहा है वो भारतियों को बांटने के सिवा और कर भी क्या सकता है। पर शिव सेना द्वारा एसी बात करना किसी भी हालात में न ये मिडीया,न भारतीय जनता स्वीकार कर सकती है क्योंकि हमें शतप्रतिशत विस्वास है कि शिवसेना के लोग भारतीय हैं। हां अगर सिवसेना के लोग भी कांग्रेसियों की तरह विदेशीयों के हाथों विक कर उनकी कठपुतली बन चुके है तो उन्हें खुलकर कांग्रेस के साथ हाथ मिला लेना चाहिए।

राहुल गांधी ने खुद कहा है कि भारत का चपा-चपा सब भारतीयों का है यहां पर इटालियन माइनो मारियो व उसकी सन्तानों का कोई हक नहीं । राहुल गांधी की इस बात पर अमल करते हुए शिव सेना को मराठी-गैरमराठी का मुद्दा छोड़ कर भारत के प्रधानमंत्री को इस इटालियन एंटोनियो माइनो मारियो से आजाद करवाने के लिए संघर्ष छेड़ देना चाहिए या फिर अपनी पार्टी का नाम बदल कर उसका कांग्रेस में विलय कर देना चाहिए। क्योंकि ऐसी विभानकारी बातें कर शिव सेना छत्रपतिशिवाजी के नाम को बदनाम कर रही है ।शिवाजी भारत के वो महान योद्धा हैं जिन्होंने मरतेदम तक अपनी तलबार का रूख हिन्दूओं की ओर नहीं होने दिया चाहे वो गद्दार हिन्दू मुसलिम जिहादीयों के साथ क्यों न जा मिले हों । इतिहास गवाह है इस बात का कि छत्रपति शिवाजी की तलवार जब भी उठी हिन्दूओं की रक्षा के लिए उठी । शिव सेना को उस छत्रपति शिवाजी की सौगंध जो अपना हाथ या जुवान उतरव भारतीय हिन्दुओं के विरूद्ध उठाए। शिव सेना को तो चाहिए कि छत्रपति शिवा जी के मार्ग पर आगे बढ़ते हुए कांग्रेस के दलाल राज ठाकरे व कांग्रेस की विभाजनकारी नितीयों से उतर भारतीयों की रक्षा करे ।

हमें संका हो रही है कि कहीं ऐसा तो नहीं कि उतर भारतीयों में छुप कर आने वाले मुसलिम जिहादियों की बढ़ती शंख्या से घबराकर शिव सेना शिर्फ जिहादियों की बात न कर सब के सब उतर भारतीयों को निशाना बना रही हो । मतलब शिवसेना अब इतनी कमजोर हो गई है कि जिहादी आतंकवादियों के विरूद्ध बोलने की उसकी ताकत न रही हो ।तब तो ये और भी चिन्ता का विषय है। अगर ऐसा है तब तो शिवसेना को बैसे ही मुंह बन्द कर लेना चाहिए क्यों छत्रपति शिवाजी के नाम पर बना संगठन अगर इतना कायर और ढरपोक हो चुका है कि अपनों को अपना शत्रु मानने लग पड़ा है तो फिर उसे अस्तित्व में रहने का कोई हख नहीं। बैसे भी शिव सेना को समझना चाहिए कि भारत हमेशा हिन्दूओं की आपसी फूट के परिणाम स्वरूप ही पहले मुगलों का फिर अंग्रेजों का गुलाम हुआ और आजकल एक ईटालियन एंटोनियोमाइनोमारियो का । अब शिव सेना को खुद ये निर्णय करना है कि उसका मकसद छत्रपति शिवाजी के बताए मार्ग पर आगे बढ़ते हुए हिन्दूओं को संगठित कर एक समर्थ स्वतन्त्र स्वाभिमानी भारत का निर्माण करना है या फिर कांग्रेस की फूट डालो और राज करो की निती पर आगे बढ़ते हुए एक कमजोर,गुलाम भिखमंगे इंडिया का। अगर अब भी हमारी बात शिवसेना को समझ न आए तो हम उनसे यही कहेंगे कि शिवसेना के लोग हर-रोज स्वामिरामदेव जी को आस्था चैनल पर शुबह 5.30 से 7.30 व शाम को 8 से 9 तक सुनें, समझें और फैसला करें कि क्या देशभक्त लोगों द्वारा एसी विभाजनकारी हरकतों के लिए साधन ,समय व उर्जा बर्बाद करना उचित है वो भी उस समय जब भारत पर लगातार जिहादी हमले हो रहे हों।

 

 

 

एम एफ हुसैन की हिन्दूविरोधी-देशविरोधी चित्रकारी के समर्थक एस दीपंकर के नाम संदेश

एम एफ हुसैन की हिन्दूविरोधी-देशविरोधी चित्रकारी के समर्थक एस दीपंकर के नाम संदेश

आज दिनांक 21-01-2010 को हमने पंजाब केसरी में एक संपादकीय पढ़ा जिसका सीर्षक है मुसलिम जिहादी आतंकबादी हुसैन स्वदेश कब लौट पायेंगे।मन को बहुत पीड़ा हुई ये जानकर कि भारत में ऐसे भी लोग हैं जो अपनी मां बहन हेटी की नंगी तस्वीरें एम एफ हुसैन से बनबाकर देखना चाहते हैं।उन्हीं का प्रतिनिधित्व करते हैं एस दीपांकर । हम तो एस दीपांकर जैसी मानसिकता रखने बाले लोगों से यही कहेंगे कि अगर वो सच में एम एफ हुसैन को जिहादी आतंकवादी नहीं मानते हैं तो वो अपने इस मित्र से पूछें कि उसने अपनी मां व बहन के चित्र नग्नावस्था में क्यों नहीं बनाए । अगर वो एसा करते तो हम मान लेते कि हुसैन वाक्य ही एक राक्षस है इसलिए सभ्यता संस्कृति को समझना उसके बस से बाहर है। पर सच्चाई यह है कि उसने हिन्दुओं की आस्था के केन्द्र सभी देवी-देवताओं के साथ-साथ भारत माता(know at www.hindujagruti.org) के अपमानजनक  चित्र हिन्दूओं को अपमानित करने के लिए  बनाए व अपनी मां बहन,बहन व फातिमा के चित्र पूरण बस्त्र पहने हुए बनाए। हम निजी तौर से हिन्दू देवियों को अपनी मां की तरह मानते हैं और जिस अबस्था मॆं उसने ये चित्र बनाए उसे देखकर एसे दुष्ट का अगर हमें कत्ल भी करना पड़े तो भी हम पीछे हटने बाले नहीं । रही बात आपके जैसे समर्थकों की तो उनसे तो हम यही कहेंगे कि वो वाक्य ही इतने खुले विचार वाले हैं तो जरा अपनी मां वहन बेटी की नग्न तस्वीर बनबाकर देखो तब पता चले कि कैसा दर्द होता है ।अगर एसा नहीं कर सकते तो बेहतर यही है कि ऐसे राक्षसों की पशु प्रवृति को बढ़ावा देकर हिन्दूओं को उस हद तक न ले जाओ जहां उनके पास हथियार उठाने के सिवा और कोई चारा न बचे ।

 

 

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