Category Archives: देश की रक्षा कौन करेगा ?

नवरात्रों के शुभ अबसर पर सब हिन्दूओं को हार्दिक शुभकामनायें…

आओ हम सब हिन्दू पूजनीय  माता जी

Internet Explorer Wallpaperको साक्षी मानकर ये प्रण करें कि आज से हम हर हिन्दू के दुख-दर्द को अपना दुख-दर्द मानकर हमसे जो भी बन सकेगा अपने हिन्दू भाई की मदद के लिए संगठित होकर करेंगे।

हम आज से जात-पात,छुआछूत,ऊंच-नीच अधारित भेदभाव को त्यागाकर समरस हिन्दू समाज के निर्माण के लिए एकजुट होकर हिन्दू संगठनों के हाथ मजबूत करेंगे।

हमारा जो भी हिन्दू भाई-बहन हिंसक मुसलमानों व आक्रमणकारी ईसाईयों द्वारा फूट डालो और राज करो के मकसद को पूरा करने के लिए फैलाई गई शुद्धी-असुद्धी की अबधारणाओं से भर्मित होकर इन विभाजनकारी अबधारणाओं पर अमल करने की कोशिस करेगा हम उस भ्रमित हिन्दू भाई को समरस हिन्दू समाज की रचना में लगाने के लिए हर सम्भव प्रयास करेंगे।

हमारा जो भी हिन्दू भाई-बहन ,भ्रमित हिन्दू भाईयों-बहनों द्वारा की गई ज्यादतियों से खुद को प्रताड़ित महसूस करेगा हम उस हिन्दू भाई-बहन को इतना मान-सम्मान-प्यार देंगे कि वो भूतकाल में की गई ज्यादतियों के बजाए बर्तमान में निभाए जा रहे भाईचारे को याद रखे।

आओ हम प्रण करें कि आज से हमारे सामने या हमारे द्वारा किसी भी हिन्दू भाई-बहन के साथ ज्यादति न हो सके।

हम अपने हिन्दू भाई-बहन को अपमानित या जानमाल का नुसान पहुंचाने के लिए विधर्मियों द्वारा किए जा रहे हमले को खुद पर हमला समझें व उन विधर्मियों को ठिकाने लगाने के लिए जो भी जरूरी हो वो कर्म करें…

राजीब गांधी कत्ल वनाम संसद भवन हमला…

बैसे तो अबदुल्ला परिबार की गद्दारी से हर देशभक्त परिचित है। लेकिन आज आतंकवादियों की फांसी को सांप्रदायिक रंग देने की जो घिनौनी हरकत इस गद्दार ने की है उसका उसी की भाषा में उतर देना जरूरी है।
सबसे पहले तो तमिलनाडु की विधान सभा की तुलना जम्मू-कशमीर की विधानसभा से करना ही गलत है क्योंकि एक तो जम्मू-कशमीर विधानसभा भारतविरोधी आतंकवादियों से भरी पड़ी है जबकि तमिलनाडु की विधानसभा में ऐसी कोई स्थिति नहीं है।
दूसरा जम्मू-कशमीर की विधानसभा में आतंकवादियों का बर्चस्व वानए रखने के लिए अबदुल्ला खानदान ने नैहरू खानदान की सहायता से जम्मू संभाग के लोगों को उनके हक से वंचित रखने के लिए जानबूझ कर जम्मू-संभाग में विधानसभा सीटों को कम रखा है । जबकि तमिलनाडु विधान सभा में ऐसी कोई गड़बड़ नहीं है।
जम्मू-कशमीर विधानसभा में बैठे आतंकवादियों ने सरकारी तन्त्र का प्रयोग कर कशमीरघाटी में हिन्दू-मिटाओ हिन्दू भगाओ अभियान चलाकर न केवल 60000 हिन्दूओं का कत्ल किया वल्कि 500000 हिन्दूओं को वेघर भी किया। मां-बहन वेटियों की इज्जत आबरू से खिलबाढ़ किया से अलग। अब आप ही बताओ कि कातिल राक्षसों से भरी पड़ी जम्मू-कशमीर विधानसभा की तुलना तमिलनाडु की विधानसभा से कैसे की जा सकती है?
राजीब गांधी पर हमला करने वालों की तुलना लोकतन्त्र के मन्दिर पर हमला करने वाले भारतविरोधी आतंकवादी से करना किसी भी तरह से जायज नहीं ठहराया जा सकता।
राजीब गांधी का कत्ल किसने किया ये अभी पूरी तरह सपष्ट नहीं है क्योंकि  एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी ने पहले राजीब गांधी के कत्ल का आरोप DMK पर लगाकर सरकार केन्द्र सरकार गिरा दी बाद 2004 में इसी एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी ने इसी DMK के साथ मिलकर सरकार बना ली।
जिस क्वात्रोची पर चर्च के इसारे पर वालासिंघम के माध्यम से LTTE प्रमुख प्रभाकरण को राजीब गांधी के कत्ल की सुपारी देने के आरोप लगे वही क्वात्रोची आज भी एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी का परिबारिक मित्र है जिसके लिए एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो कुछ भी कर गुजरने के लिए तैयार है।
अब जिन लोगों को फांसी की सजा सुनबाई गई उनमें से एक की सजा खुद एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो माफ कर चुकी तो स्वभाविक रूप से वाकी मुरूगन,स्नाथन व पेरारीवालन भी माफी की उमीद तो कर ही सकते हैं।
दूसरी तरफ मोहम्द अफजल खुद चीख-चीख कर कह रहा है कि कशमीरघाटी को काफिरों वोले तो हिन्दूओं से मुक्त करवाने के लिए उसने लोकतन्त्र के मन्दिर पर हमला किया। इतना ही नहीं उसके समर्थक मुसलिम आतंकवादी लगातार भारत को लहूलुहान करने की धमकियां दे रहे हैं जिनमें उमर-अबदुल्ला व गुलामनबी आजाद भी सामिल हैं। अगर इस राक्षस को फांसी नहीं दी जाती है तो इन आतंकवादियों के हौसले और बुलंद होंगे परिमास्वारूप भारत पर इनके हमले बढ जायेंगे।
हां एक बात जरूर है कि ये हमला अकेले मोहम्द अफजल ने नहीं किया था इसके साथ कुछ और लोग भी थे जैसे कि आतंकवादी  प्रोफैसर जिलानी व उसके अन्य भारतविरोधी आतंकवादी साथी। आतंकवादी प्रोफैसर जिलानी जैसे गद्दारों को कुलदीप नैयर जैसे पत्रकारों ने क्यों बचाया(कहीं ISI ऐजेन्ट मुहम्द फाई के आदेश पर तो नहीं) इन प्रश्नों का उतर भी देश की जनता को जानने का पूरा हक है।
मोहम्द अफजल के हमले में सुरक्षावलों के जवान मारे गय जबकि दूसरे हमले में एक नेता व उसके कुछ प्रशंसक मारे गय। दोनों में बहुत फर्क है ये नेता भारत पर भारतविरोधी कांग्रेस वोले तो  नैहरू खानदान का शासन बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रहा था जबकि सुरक्षावलों के जवान देश की अस्मिता की रक्षा के लिए संघर्ष करते हुए मारे गय।
ऐसा नहीं कि उमर अबदुल्ला पहली बार गद्दारी कर रहा है इससे पहले भी ये आतंकवादी सैनिकों पर हमला करने वाले अपने साथी 1200 मुसलिम आतंकवादियों पर से केश वापिस लेकर उन्हें सैनिकों पर हमला करने खुली छूट दे चुका है। हमला करते वक्त सैनिकों के हाथों मारे जाने पर अपने इन आतंकवादी साथियों का हौसला बानाए रखने के लिए पांच-पांच लाख रूपए की आर्थिक सहायता भी दे चुका है।
इतना ही नहीं ये आतंकवादी केन्द्र सरकार में बैठे अपने आतंकवादी मददगारों की सहायता से सैनिकों पर तरह-तरह के प्रतिबन्ध लगवाने में भी समर्थ रहा है।
अब आप खुद फैसला करो कि जिस राज्य का मुख्यमन्त्री गद्दार उमर अबदुल्ला जैसा आतंकवादी हो क्या वहां कभी शांति हो सकती है ?

गद्दारों की जिस कांग्रेस ने नेताजी सुभाष चन्द्र बोस जी जैसे प्रखर देशभक्त क्रांतिकारी का सौदा अंग्रेजों से कर लिया उससे आप बाकी देशभक्तों के मान सम्मान की उम्मीद भला कैसे कर सकते हैं?

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हम सब जानते हैं कि कांग्रेस की स्थापना एक विदेशी अंग्रेज ने भारतविरोधियों वोले तो हिन्दूविरोधियों के हित साधने के लिए 1885 में की।

अंग्रेज द्वारा कांग्रेस की स्थापना का एकमात्र मकसद था एक ऐसा गिरोह तैयार करना जो भारतीयों को अपना सा लगे लेकिन जिसका मूल मकसद हो भारत को तबाह करना।

कांग्रेस की स्थापना से लेकर आज तक कांग्रेस पर उन्ही लोगों का कब्जा रहा जिनमें भारतविरोध वोले तो हिन्दूविरोध कूट-कूट कर भरा हो। वेशक इसमें कुछ अपबाद भी देखने को मिले ।

खिलाफत अन्दोलन के समर्थन के बहाने मुसलिम अलगावबाद का समर्थन

1923 में जब देश में स्वातन्त्रता संग्राम के दौरान सब हिन्दू-मुसलिम मिलकर अंग्रेजों की दमनकारी नीतियों से तंग आकर एकजुट होकर संघर्ष कर रहे थे तभी कांग्रेस ने अलगाववादी मुसलमानों के दबाब में आकर खिलाफत अन्दोलन का समर्थन कर एक ऐसा षडयन्त्र किया जिसाक परिणाम मुसलिम लीग की स्थापना के रूप में हुआ जो आगे चलकर सांप्रदाय के आधार पर भारत के विभाजन का एककारण वनी। यहां हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि डा वलिराम हेडगेवार जी सहित कांग्रेस के अनेक नेताओं ने गांधी-नैहरू के इस निर्णय का विरोध किया लेकिन गांधी-नैहरू ने किसी की एक न सुनी। बाद में डा हेडगेवार जी ने 1925 में RSS की स्थापना कर देशभक्त नागरिकों के निर्माण का कार्य शुरू किया जो आज तक जारी है। आज देशभक्त नागिरकों की बढ़ती फौज ही कांग्रेस की परेसानी का सबसे बढ़ा कारण बन रहा है।

प्रखर देशभक्त नेताजी सुभाष  चन्द्र बोस जी का विरोध

Netaji Subhash chander Bose ji1939 में प्रखर देशभक्त नेताजी सुभाष चन्द्र बोस जी का नेहरू-गांधी के विरोध के बाबजूद कांग्रेस अध्यक्ष चुना जाना। लेकिन ये ऐसी घटना थी जिसने हिन्दूविरोधी देशविरोधी कांग्रेसियों को झकझेर कर रख दिया । बस फिर क्या था ये सब भारतविरोधी-हिन्दूविरोधी नैहरू-गांधी के नेतृत्व ऐसे षडयन्त्र करने में जुट गए जिनके परिणाम प्रखर देशभक्त नेताजी सुभाष चन्द्र बोस जी को कांग्रेस का अध्यक्ष पद छोड़ना पड़ा।

भारत विभाजन के दौरान कांग्रेस के हिन्दूविरोधी-देशविरोधी षडयन्त्र

1947 में कांग्रेस ने अंग्रेजों के साथ मिलकर भारत का सांप्रदाय के आधार पर विभाजन सवीकार किया।ab1 इस विभाजन के अनुसार मुसलमानों के लिए पाकिस्तान (पूर्वी और पश्चिमी )का निर्माण किया गया जबकि हिन्दूओं के लिए भारत का वाकी वचा हिस्सा दिया गया। लेकिन यहां फिर कांग्रेस ने एक षडयन्त्र के तहत मुसलमानों को फिर से हिन्दूओं वाले हिस्से में रखने की जिद की।

RSS ने सांप्रदाय के आधार पर देश के विभाजन का डट कर विरोध किया । जब कांग्रेस ने विभाजन सवीकार कर पाकिस्तान में रहने वाले हिन्दूओं को मुसलिम आतंकवादियों के हाथों मरने के लिए अकेला छोड़ दिया तब RSS ने हिन्दूओं की रक्षा के लिए दिन-रात एक कर प्रयत्न किया।

कांग्रेस ने विभाजन के दौरान RSS द्वारा हिन्दूओं की रक्षा के लिए काम करने से चिढ़ कर RSS पर प्रतिबन्ध लगा दिया 1948 में कांग्रेस नें गांधी की हत्या का झूठा आरोप लगाकर देशभक्त संगठन RSS पर प्रतिबन्ध लगा दिया।

RSS ने संबैधानिक तरीके से इसका विरोध किया । बाद में मजबूर होकर कांग्रेस को मानना पड़ा कि RSS का गांधी की हत्या में कोई हाथ नहीं है। परिमामस्वारूप प्रतिबन्ध हटा लिया गया। बैसे भी कांग्रेस जानती थी कि गांधी की हत्या के लिए नैहरू ही जिम्मेदार है ।

वन्देमातरम् में कांटछांट कांग्रेस की गद्दारी का प्रमाण

15 अगस्त 1947 को सांप्रदाय के आधार पर भारत का विभाजन होने के बाद जब पाकिस्तान और बंगलादेश को हिन्दूविहीन कर दिया गया तो भारत में मुसलमानों को रखने का कोई औचित्या नहीं था ।

उसवक्त कांग्रेस के अनेक देशभक्त लोगों ने बार-बार मुसलमानों को देश में न रहने देने की बकालत की थी फिर भी गद्दार कांग्रेसियों ने मुसलमानों को भारत में रखने का फैसला क्यों किया?
आज देश पर बार-बार हो रहे मुसलिम आतंकवादी हमलों के बाद आप समझ सकते हैं कि कौन सही था कौन गलत ?

अगर मुसलमानों को भारत में इस आधार पर रखा गया कि मुसलमान देशभक्त हैं और सर्वधर्मसम्भाव में विस्वास रखते हैं तो फिर वन्देमातरम् की चार पंक्तियों को छोड़ कर वाकी पंक्तियों को क्यों काट दिया गया?

कांग्रेस द्वारा अलगावबाद को बढ़ाबा देने के लिए अल्पसंख्यकबाद व दंगो का सहारा

जब भारत को हिन्दू राष्ट्र नहीं घोषित किया गया तो फिर देश में अल्पसंख्यकबाद के नाम पर धर्म के आधार पर कानून क्यों बनाए गए?
जब सारा देश एक है तो फिर कश्मीरघाटी के मुसलिमबहुल होने की बजह से जम्मु-कश्मीर में अलग संविधान, अलग कानून, धारा 370 क्यों ?

अलगावबाद से ग्रसित कांग्रेस द्वारा समस्या की जड़ मुसलिम पर्सनललॉ का बचाब
1955 में जब हिन्दू पर्सनल ला समाप्त कर हिन्दूओं को देश के संविधान के अनुसार जीवन यापन करने के लिए कहा गया तो फिर मुसलिम पर्नसनल ला को समाप्त कर क्यों मुसलमानों को संविधान के दायरे में नहीं लाया गया?
समाजिक बुराईयों के नाम पर हिन्दूओं की अनेक मान्याताओं पर सरकार ने प्रतिबंध लगाया तो मुसलमानों में अलगाववाद को बढ़ावा देने वाली बुराईयों पर प्रतिबंध क्यों नहीं?

कांग्रेस द्वारा धर्मनिर्पेक्षता की आड़ में हिन्दूमिटाओ-हिन्दूभगाओ अभियान को बढ़ाबा

जब संविधान में धर्मनिर्पेक्ष शब्द नहीं था तो 1977 में इसे संविधान में क्यों जोड़ा गया?

मार्च 1998 वनधामा नरसंहार.5भारत में आज बहुत ही खतरनाक स्थिति बनती जा रही है अपने हिन्दूराष्ट्र भारत में विदेशी संस्कृति से प्रेरित मीडिया, खुद को सैकुलर कहलवाने वाले राजनीतिक दलों, बिके हुए देशद्रोही मानवाधिकार संगठनों, खुद को सामाजिक कार्यकर्त्ता कहलवाने वाले गद्दारों, भारत विरोधी आतंकवादियों व परजीवी हिन्दुविरोधी लेखकों का एक ऐसा सेकुलर गिरोह बन चुका है जो भारत को सांस्कृतिक व आर्थिक रूप से तबाह करने पर आमादा है। इस गिरोह को हर उस बात से नफरत है जिसमें भारतीय संस्कृति व राष्ट्रवाद का जरा सा भी अंश शेष है । यह गिरोह हर उस बात का समर्थन करता है जो देशद्रोही कहते या करते हैं । देशद्रोही मुसलिम आतंकवादियों व वामपंथी आतंकवादियों को बेचारा गरीब अनपढ़ व सत्ताया हुआ बताकर हीरो बनाता जा रहा है । सेवा के नाम पर छल कपट और अवैध धन का उपयोग कर भोले-भाले बनवासी हिन्दुओं को गुमराह कर उनमें असभ्य पशुतुल्य विदेशी सोच का संचार कर हिन्दुविरोधी-राष्ट्रविरोधी मानसिकता का निर्माण करने वाले धर्मान्तरण के ठेकेदारों को हर तरह का सहयोग देकर देश की आत्मा हिन्दू संस्कृति को तार-तार करने में जुटा है। यह गिरोह एक ऐसा तानाबाना बुन चुका है जिसे हर झूठ को सच व हर सच को झूठ प्रचारित करने में महारत हासिल है।

हम दाबे के साथ कह सकते हैं कि इस हिन्दुविरोधी देशद्रोहीगिरोह की क्रियाप्रणाली हमेशा मुसलिम आतंकवाद व धर्मांतरण समर्थक रही है इसमें भी खतरनाक कड़बी सच्चाई यह है कि इस हिन्दुविरोधी देशद्रोहीगिरोह ने कभी भारतीय संस्कृति के प्रतीकों का सम्मान करने वाले देशभक्त मुसलमानों व ईसाईयों जो खुद को हिन्दूसमाज का अभिन्न अंग व भारत को अपनी मां मानते हैं को न कभी प्रोत्साहन दिया न ही कभी उनका भला चाहा ।

इस हिन्दुविरोधी देशद्रोही गिरोह को अगर किसी की चिन्ता है तो उन मुसलिम आतंकवादियों व धर्मांतरण के ठेकेदारों की जो अपनी आवादी बढ़ाकर ,धर्मांतरण करवाकर , शान्तिप्रिय हिन्दुओं का खून बहाकर इस हिन्दूराष्ट्र भारत के फिर से टुकड़े कर इस्लामिक व ईसाई राज्य वनाने का षड़यन्त्र पूरा करने के लिए इस देशद्रोही सरकार का समर्थन पाकर अति उत्साहित होकर आगे बढ़ रहे हैं ।मार्च 1998 वनधामा नरसंहार.4

यह गिरोह देश की रक्षा के लिए जान खतरे में डालकर जिहादी आतंकवादियों का सामना करने वाले देशभक्त सैनिकों,साधु-सन्तो व संगठनों से अपराधियों जैसा व्यवहार कर रहा है और न जानें उनके लिए क्या-क्या अपशब्द प्रयोग रहा है।

RSS पर वार-वार हमला कांग्रेस सरकार की इसी देशविरोधी सोच का ही परिणाम है।

अलगाववादी मानसिकता से ग्रसित कांग्रेस ने सामाजिक एकता को तार-तार कर दियाreligions in india

अगर आप ध्यान दें तो आज तक कांग्रेस सरकारों ने जितने भी नियम बनाए हैं उनका आधार कहीं न कहीं जाति-क्षेत्र-सांप्रदाय-भाषा-प्रांत हैं।नियम अलगाववादी अधार पर होने के कारण ही आज लोग जाति-क्षेत्र-सांप्रदाय-भाषा,-प्रांत के आधार पर संगठित होने को मजबूर हैं इसी बजह से आज सब के सब राजनीतिक दलों का आधार भी कहीं न कहीं जाति-क्षेत्र-सांप्रदाय-भाषा-प्रांत ही है परिणामस्वारूप भारत लगातार अन्दर से कमजोर होता जा रहा है।

जरा सोचो जब संविधान में समानता का अधिकार है तो फिर नियम जाति, क्षेत्र, सांप्रदाय, भाषा के आधार पर क्यों?
अलगावावदी मुसलिम लीग व धर्मांतरण के ठेकेदार आज भी हिन्दूविरोधी-देशविरोधी कांग्रेस के सांझीदार

आज भी कांग्रेस केरल में अलगाववादी मुसलिम लीग व उतर-पूर्व में अलगाववादी इसाई गिरोहों के साथ मिलकर सरकार बनाकर अलगावबाद को बढ़ाबा देती है।

केरल सरकार की इसी अलगाववादी मानसिकता से तंग आकर लबजिहाद से जुड़े मामलों में सरकार द्वारा मुसलिम आतंकवादियों का पक्ष लिए जाने के कारण माननीय उच्च न्यायालय के न्यायधीशों को कहना पड़ा कि लगता है कि सरकार नहीं चाहती कि लबजिहाद जैसे षडयन्त्रों से पिड़ीत लड़कियों को कभी न्याय मिल सके।

कांग्रेस की अलगावबादी मानसिकता का सबसे बड़ा प्रमाण शाहवानो केश

1984 में जब साहवानो केश में माननीय सर्वोच न्यायलया ने मुसलिम महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए कानून पारित किया तो उसे ततकालीन कांग्रेस सरकार ने शरीयत का हबाला देकर रद्द कर दिया?

जिसके परिणामस्वारूप इसलाम के नाम पर प्रताड़ित की जा रही मां-बहनों को न्याय मिलने की उम्मीदों पर पानी फिर गया व मुसलिम अलगाववाद को नई ताकत मिली।

प्रखर देशभक्त सरदार बलभभाई पटेल जी का विरोध

sardar balabh Bhai patel ji1947 में भारत विभाजन के बाद भी जब कांग्रेस की सब इकाईयों ने प्रखर देशभक्त सरदार बलभभाई पटेल जी को प्रधानमन्त्री बनाने का एकजुट फैसला किया तब भी सब हिन्दूविरोधी-देशविरोधी कांग्रेसियों ने अंग्रेजों के इसारे पर एक कट्टर देशविरोधी-हिन्दूविरोधी नेहरू को विभाजित भारत का प्रधानमन्त्री बनाने में सफलता हासिल की जिसके परिणामस्वारूप देश के विभाजन की जड़ इसलाम को विभाजित भारत में न केवल रखा गया वल्कि विशेषाधिकार देकर भारत को फिर से लहुलुहान करने का वीज वो दिया गया ।

प्रखर देशभक्त क्रांतिकारियों का विरोध

आप सब जानते हैं कि जब-जब भी

शहीद भक्त सिंहshaeed ji,

राजगुरू जी,Rajguru jiसुखदेव जीRajguru ji 1,

चन्द्रशेखर आजाद जी Chander Shekhar Azad jiजैसे प्रखर देशभक्त क्रांतिकारियों का अत्याचारी आक्रमणकारी ईसायों(अंग्रेजों) से सामना हुआ तब-तब भारतविरोधी-हिन्दूविरोधी कांग्रेसियों ने देशभक्त क्रांतिकारियों का साथ देने के बजाय देश के दुशमन सम्राज्यावादी ईसाईयों का साथ दिया।

कितने ही ऐसे देशभक्त क्रांतिकारी हैं जो तन-मन-धन से देश की खातिर लड़ते हुए अपनी लड़ाई को अंजाम तक इसलिए नहीं पहुंचा सके क्योंकि लड़ाई के अंजाम तक पहुंचाने से पहले ही वो गद्दार कांग्रेसियों की मुखवरी के परिणामस्वारूप सम्राज्यावादी ईसाई आतंकवादियों के हमलों के सिकार हो गय।

कौन नहीं जानत कि इन भारतविरोधी-हिन्दूविरोधी कांग्रेसियों ने इन देशभक्त क्रांतिकारियों को देश के दुशमन ईसाईयों के इसारे पर आतंकवादी तक करार दे दिया।

अपनी हिन्दूविरोधी-देशविरोध की गद्दारी की परम्परा पर आगे बढ़ते हुए ही आज इटालियन अंग्रेज एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी की गुलाम कांग्रेस Petro dollar + Us Dollar मतलब कातिल मुसलिम आतंकवादियों के नेता साऊदी अरब व धर्मांतरण के ठेकेदार ईसाई आतंकवादियों के नेता अमेरिका के ईसारे पर ही आज कांग्रेस भारत के हित में उठनेवाली हर आबाज को कुचल देने पर आमादा है।

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ऐसा नहीं कि कांग्रेस ने 2004 से पहले कोई देशविरोधी-हिन्दूविरोधी कार्य नहीं किया लेकिन कांग्रसे पर इटालियन अंग्रेज एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी के कब्जे के बाद कांग्रेस लगातार हिन्दूविरोधी-देशविरोधी कार्यों को अन्जाम दे रही है।क्योंकि आज कांग्रेस सरकार पूरी तरह से एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी की गुलाम है इसलिए सरकार के हर देशविरोधी-हिन्दूविरोधी कार्य के लिए यही अंग्रेज जिम्मेदार है।

कांग्रेस का हाथ सुरक्षाबलों के बजाए गद्दारों के साथ

2004 में सता में आते ही कांग्रेस की  सरकार ने अर्धसैनिक वलों के जवानों के देश की रक्षा की खातिर शहीद हो जाने पर उनके परिवारों को मिलने वाली आर्थिक सहायता को यह कहकर कम कर दिया कि सरकार के पास पैसे की कमी है लेकिन इसी सरकार ने कशमीरघाटी में भारतीय सेना पर हमला कर सैनिकों को घायल करने व मारने stone pelters in kashmir beating armyवाले भारतविरोधी आतंकवादयों को 5-5 लाख रूपए दकेर सिद्ध कर दिया कि सरकार की नियत देशभक्त सैनिकों का हौसला तोड़कर गद्दारों का हौसला बढ़ाने की है।

कांग्रेस का हाथ बाबर व औरंगजेब जैसे राक्षसों के साथ

मर्यदापुर्षोत्तम भगवान श्रीराम जी द्वारा बनाय गए श्रीलंका और भारत को जोड़ने वाले रामसेतु को ram setuन तोड़ने से जुड़े एक मामले में कांग्रेस की हिन्दूविरोधी-देशविरोधी सरकार ने हल्फनामा देकर मर्यादा पुरषोत्तम भगवान श्री राम जी के अस्तित्व पर प्रश्न खड़े कर एकवार फिर सिद्ध कर दिया कि कांग्रेस के अन्दर हिन्दू-संस्कृति वोले तो भारतीय संस्कृति के प्रति जहर किस हद तक भर चुका है।

यह वही कांग्रेस है जिसके नेता स्वर्गीय राजीब गांधी जी ने 1986 में खुद राममन्दिर में पूजा अर्चना कर अयोध्या में भव्य मन्दिर बनाने के कार्य को आगे बढ़ाया था लेकि आज यही कांग्रेस औरगंजेब व बाबर जैसे राक्षसों को अपना आदर्श मानकर अयोध्या में मर्यादा पुरषोत्तम भगवान श्री राम जी के मन्दिर को मसजिद करार दे रही है।

इसरतजहां मुठभेड़ में कांग्रेस का हाथ एकवार फिर भारतविरोधी आतंकवादियों के साथ

गुजरात में सुरक्षावलों ने लसकरे तैयवा की आतंकवादी इसरत जहां ishrat jahanको मुठभेड़ में मार गिराया। जिसके जनाजे में महाराष्ट्र के हजारों कांग्रेसियों के साथ समाजवादी पार्टी के गद्दार भी सामिल हुए।महाराष्ट्र की कांग्रेस सरकार ने इसरत जहां के परिवार को लाखों रूपए देने के साथ-साथ उसको निर्दोस भी बताया। हद तो तब हो गई जब महारष्ट्र एटीएस की जांच में व केन्द्री खुफिया ऐजैसियों की जांच में ये तथ्य सिद्ध हो गया कि इसरतजहां एक खूंखार आतंकवादी थी फिर भी कांग्रेस ने सुरक्षावलों का साथ देने के बजाए इस आतंकवादी का ही साथ दिया । अंत में एफबीआई(FBI) ने भी बताया कि हैडली जानता है कि इसरतजहां लसकरे तैयवा की आतंकवादी थी।

मतलब यहां भी कांग्रेस का हाथ गद्दार भारतविरोधी आतंकवादियों के साथ।

सोरावुद्दीन मुठभेड़ में कांग्रेस का हाथ एकवार फिर भारतविरोधी  आतंकवादियों के साथ

गुजरात में भारतविरोधी आतंकवादी सोराबुद्दीन shorabudeenसुरक्षावलों के साथ मुठभेड़ में मारा गया।इस आतंकवादी के घर से एक दर्जन एक47 व दर्जनों हथगोले प्राप्त हुए। इस आतंकवादी को मारने के विरोध में कांग्रेस ने सीबीआई का दूरूपयोग करते हुए दर्जनों पुलिस अधिकारियों व जवानों को जेल में डाल दिया जो आज तक जेल में हैं। हद तो तब हो गई जब राज्य के गृहमन्त्री को भी जेल में डाल दिया गया।

मतलब यहां भी कांग्रेस का हाथ गद्दार भारतविरोधी आतंकवादियों के साथ।

कशमीरघाटी में कांग्रेस का हाथ एकवार फिर भारतविरोधी  आतंकवादियों के साथ

कुपवाड़ा में आतंकवादियों से मुठभेड़ के बाद सैनिकों ने भारतविरोधी आतंकवादियों को मार गिराया। कांग्रेस ने आतंकवादियों की मौत से बौखलाकर मेजर को बर्खसात कर पूरी की पूरी बटालियन पर ही केस दर्ज कर आतंकवादियों को कांग्रेस का हाथ गद्दारों के साथ होने का सपष्ट प्रमाण दिया। एसा एकवार नहीं की वार हुआ जब कांगेस  सरकार भारतीय सेना के बजाए आतंकवादियों के साथ कड़ी नजर आई।

मतलब यहां भी कांग्रेस का हाथ गद्दार भारतविरोधी आतंकवादियों के साथ।

कांग्रेस का हाथ भारतविरोधी  आतंकवादी अफजल के साथ

जब माननीय न्यायलय ने लोकतन्त्र के मन्दिर संसद भवन पर हमला करने वाले आतंकवादी मुहम्मद अफजल afzal guruको फांसी की सजा सुनाकर 19 नम्मवर 2006 फांसी की तारीख तय(वेशक हमले का mastermind प्रोफैसर गिलानी कुलदीप नैयर जैसे नकबापोसों की सहायता से बच निकला)  की तो लोकतन्त्र के इस इस मंदिर की रक्षा की खातिर शहीद हुए सैनिकों के परिवारजनों व आहत हुए देशभक्तों के मन में न्याय की उमीद पैदा कर दी तो फिर से भारतविरोधी आतंकवादियों की मददगार सरकार ने इस आतंकवादी की फांसी आज तक मतलब अगस्त 2011 तक रोककर कर एकवार फिर कांग्रेस के भारतविरोधी चरित्र का प्रमाण दे दिया ।

कांग्रेस का प्रखर देशभक्त RSS पर हमला

RSS पर वार-वार हमला कांग्रेस सरकार की इसी देशविरोधी सोच का ही परिणाम है। RSS ने कांग्रेस के हर उस कदम को विरोध किया है जो कांग्रेस ने देशहित के विरूद्ध उठाया। चाहे 1947 में सांप्रदाय के आधार पर भारत के विभाजन की षडयन्त्र हो या फिर 1977 में तानाशाही की बात हो या फिर 1992 में राम मन्दिर को मजजिद बताने की बात हो या पिर 2004 में विदेसी एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी के प्रधानमन्त्री बनने की बात हो या पिर आज कशमीरघाटी को पाकिसतान के हवाले करने का षडयन्त्र हो।

सबसे पहले RSS ने कांग्रेस की देश से गद्दारी के विरोध में आबाज उठाई तो बदले में कांग्रेस ने भारतविरोधी मुसलिम आतंकवादियों द्वारा किए गय हमलों का दोश RSS के सिर मढ़कर RSS को आतंकवादी-सांप्रदायिक करार दे दिया।

कांग्रेस का प्रखर देशभक्त स्वामी रामदेव जी पर हमला

Ram Dev jiजब स्वादेशी और देशभक्ति के प्रेरणास्त्रोत स्वामी रामदेब जी ने सारे संसार में भारतीय संसकृति और आयुर्वैदिक चिकित्सा प्रणाली का झंडा पहराते हुए कांग्रेस की आका एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी व अन्य भ्रष्ट लोगों द्वारा विदेशों में जमा करवाय गए कालेधन व नेताओं द्वारा फैलाए गए भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया तो चोरों और गद्दारों की हमसफर व मददगार कांग्रेस सरकार ने स्वामी रामदेव जी को ही भ्रष्टाचारी , आतंकवादी व RSS का मुखौटा करार देकर उन्हें व उनके बालकृष्ण जी जैसे सहयोगियों को बदनाम करने के लिए सब सरकारी ऐजेंसियों को देशभक्त स्वामी राम देव जी व उनके सहयोगियों के पीछे लगा दिया।

कांग्रेस का प्रखर भ्रष्टाचार विरोधी अन्ना हजारे जी पर हमला

anna hajare jiजब अन्ना हजारे जी ने हजारे जी के साथ चल रहे अग्निवेश जैसे कांग्रेस के पुराने मित्रों के ईसारे पर स्वामी राम देव जी से नाता तोड़कर भ्रष्टाचार के विरूद्ध आबाज उठानी शुरू की तो पहले तो कांग्रेस ने हजारे जी के साथ बातचीत करने की कोशिश की । लेकिन जब कांग्रेस को ऐहसास हो गया कि कांग्रेस का समर्पण कांग्रेस के प्रति न होकर देश के प्रति है तो फिर भारतविरोधी कांग्रेस सरकार ने अन्ना हजारे जी पर भी हमला वोल कर उन्हें भी बलैकमेलर,भर्ष्टाचारी व RSS का मुखौटा करार देकर उनके पीछे भी सब सराकरी ऐजेंसियों को लगा दिया।

कांग्रेस का हाथ मानवताविरोधी  आतंकवादी ओसामा-विन लादेन के साथ

कांग्रेस की असलियत को समझने के लिए इतना ही काफी है कि जो कांग्रेस स्वामी रामदेव जी व अन्ना हजारे जी जैसे प्रखर देशभक्त नागरिकों व RSS जैसे देशभक्त संगठनों को आतंकवादी,सांप्रदायिक,ठग,बलैकमेलर और न जाने क्या-क्या शब्द प्रयोग कर अपमानित करने व सरकारी ऐजेंसियों का प्रयोग कर समाप्त करने की कोशिश कर रही है वही कांग्रेश संसार के सबसे बढ़े राक्षश ओसामाविन लादेन Ladenको ओसामा जी कहकर व इस आतंकवादी को मारने पर सवाल खड़े कर अपनी असलियत सबके सामने रख रही है।

औरंगजेब व बाबर जैसे अत्याचारी राक्षसों को अपना आदर्श मानकर मर्यदापुर्षोत्तम भगवान श्रीराम जी का विरोध करने वाली कांग्रेस व धर्मांतरण के ठेकेदार इसाईयों के बताए मार्ग पर चलकर भारतीय संसकृति का विरोध करने वाली कांग्रेस से भारत का हित चाहने की उम्मीद करना सरासर वेवकूफी है।

हिन्दूविरोधी-देशविरोधी कांग्रेस का भारतीय संविधान पर हमला

भारतीय संविधान सांप्रदाय के नाम पर आरक्षण की इजाजत नहीं देता। लेकिन कांग्रेस लगातार सांप्रदायिक आधार पर आरक्षण की न केवल बात कर रही है पर कई राज्यों में तो कांग्रेस ने संविधान का खून करते हुए सांप्रदायिक आधार पर आरक्षण लागू कर अपने भारतविरोधी स्वारूप को और सपष्ट कर दिया है।

2014 के चुनाबों से पहले हिन्दूओं और मुसलमानों को लड़ाने के लिए सांप्रदाय के आधार पर आरक्षण को आगे बढ़ाने की वका3लत करने वाली रंगनाथ मिश्रा रिपोर्ट इन्तजार कर रही है साथ ही Prevention of Communal and Targeted Violence Bill- 2011

एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी की गुलाम कांग्रेस इस हिन्दूविरोधी अंग्रेज के इसारे पर Prevention of Communal and Targeted Violence Bill- 2011 के नाम से एक ऐसा कानून बनाने जा रही है जो न केवल मुसमानों और ईसायों को हिन्दूओं के कतलयाम की खुली छूट देता है पर साथ ही भारतीय संविधान की समानता की मूल भावना का भी खून करता है ।

ये भारतविरोधी इटालियन अंग्रेज का भारतीय संविधान पर ताजा हमला है।

भारतविरोधी कांग्रेस का माननीय सर्वोच्च न्यायालय पर हमला

जब माननीय सर्वोच्च न्यायालय supreme courtने कांग्रेस को गद्दारी व चोरबजारी से रोकने की कोशिश की तो कांग्रेस ने माननीय न्यायालय पर ही हमला वोलते हुए माननीय न्यायालय को ही अपनी सीमा मे रहने मतलब कांग्रेस को चोर-बजारी व देश से गद्दारी करने से रोकने की कोशिश न करने की धमकी दे डाली।

ऐसा पहली बार नहीं है इससे पहले भी जब-जब माननीय न्यायलय ने कांग्रेस को संविधान का खून कर देश से गद्दारी करने से रोकने की कोशिश की है तब-तब भारतविरोधी कांग्रेस ने माननीय न्यायालय पर हमला वोलकर मानानीय न्यायधीसों को धमकाने की कोशिस की है।

भारतविरोधी कांग्रेस का संवैधानिक संस्था CAG हमला

जब CAG CAG4ने कांग्रेस द्वारा इटालियन अंग्रेज एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी के नेतृत्व में देश को लूटने का कच्चा-चिट्ठा खोला तो कांग्रेस ने संबैधानिक संस्था CAG पर ही हमला वोल दिया।

एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी द्वारा विदेश यात्राओं पर देश का धन लुटाने पर आपति करने वाले अधिकारियों का कांग्रेस सरकार ने तबादला कर अपने भारत विरोधी चरित्र का एकवार फिर परिचय दे दिया।

भारतविरोधी कांग्रेस का Electronic Media पर हमला

जब अक्सर देशविरोधियों-हिन्दूविरोधियों की आबाज उठाने वाले Electronic Media ने चोरों और गद्दारों की कांग्रेस सरकार की चोरबजारी से तंग आकर चोरों और गद्दारों के विरूद्ध आबाज उठाकर जनता को जागरूक करना शुरू किया तो सरकार ने पहले तो हजारों करोड़ रूपए के विज्ञापन जारी कर खरीदने की कोशिश की जिसमें 100% सफलता न मिलने के बाद कांग्रेस ने मिडीया को भी धमकाना शुरू कर दिया।

अगर अब भी आप सोचते हैं कि चोरों और गद्दारों की कांग्रेस सरकार देशहित में आबाज उठाने वालों को न बदनाम करेगी , न उनपर हमला करेगी वल्कि देशभक्तों व क्रांतिकारियों  के साथ सम्मानपूर्वक पेश आएगी तब तो आप …

स्वामी राम देव जी के नेतृत्व में भारतस्वाभिमान ने UPA के भ्रम को तोड़ा ही नहीं वल्कि चकनाचूर भी कर दिया।

वोट पाने के लिए राजनीतिक दलों द्वारा एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाना कोई बुरी बात नहीं । लेकिन कांग्रेस द्वारा RSS के बहाने हिन्दूओं व भारत के विरूद्ध किया जा रहा दुशप्रचार देशद्रोह व गद्दारी की हर सीमा को पार कर चुका है।

जिस तरह देशभक्ति व स्वादेशी की भावना से संचालित RSS ने 0% INDIAN मतलब Italian एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी का भारत का प्रधानमन्त्री वनना लगभग नामुमकिन बना दिया उससे जले-भुने चर्च ने एडवीज व उसकी कुलाद Half Indian(Rahul Gandhi) के साथ मिलकर एक ऐसी योजना बनाई जिसमें मुसलमानों (आज वेशक मुसलमान खुश हो रहे हैं लेकिन आगे चलकर बहुत पछतायेंगे)को हथियार वनाकर RSS को आतंकवादी संगठन घोषित कर भारत में उठने वाली देशभक्ति की हर आबाज को हमेशा के लिए कुचल देना प्रमुख है।
चर्च का RSS पर इस तरह आगबबूला होना कोई आसामान्य घटना नहीं क्योंकि चर्च ने अपनी एजेन्ट एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी को भारत के सबसे बड़े राजनितिक दल का प्रमुख बनाने के लिए 6-6 लोगों का कत्ल करवाया था। ये वो लोग थे जिनके जिन्दा रहते चर्च की ऐजेंट का भारत का सताधारी पार्टी का सर्वेसर्वा बनना लगभग नामुमकिन था।
अब आप सोचो कि जिस चर्च ने इतने षडयन्त्र कर अपनी ऐजेंट को यहां तक पहुंचाया था उसी को RSS ने जिस तरह से रोक दिया क्या चर्च इसकी कीमत चुकाए विना RSS को यूं ही छोड़ देगा तो यह कभी सम्भव नहीं।
अमेरिका, जिसके राष्ट्रपति का पहला काम चर्च की रक्षा करना मतलब चर्च की योजनाओं को आगे बढ़ाना है, के इसारे पर चिदंवरम दिन-रात एक कर RSS को आतंकवादी सिद्ध करने के लिए एक के बाद एक निर्दोष हिन्दूओं को जेल में डालकर(वेशक अभी तक उनमें से एक पर भी आरोप सिद्द नहीं हुआ उल्टा अदालतों ने पाया कि ये लोग निर्दोष हैं) भगवा आतंकवाद-भगवा आतंकवाद चिलाकर भारत को आतंकवादी देश करार दे रहे हैं तो ये एक लम्बी योजना का हिस्सा है।
इस योजना पर UPA बढ़े आराम से आगे बढ़ रहा था उसे लगता था कि RSS को बदनाम कर देने के साथ ही देश में कोई भी अब देशभक्ति की दिशा में आगे बढ़ने का साहस नहीं करेगा लेकिन स्वामी राम देव जी के नेतृत्व में भारतस्वाभिमान ने UPA के इस भ्रम के तोड़ा ही नहीं वल्कि चकनाचूर भी कर दिया। स्वामी जी के इस काम में अन्ना जी ने भी हाथ बंटाया ।इसीलिए तो कांग्रेस इन्हें RSS के बता रहे हैं। बात फंसती देखकर चोरों और गद्दारों की सरदार इटालियन व उसकी Half Indian कुलाद ने अमेरिका से सीधे हस्तक्षेप की गुहार लगाई
इसी योजना को आगे बढ़ाने के लिए अमेरिका ने ये घोषणा की है

अगर आप जानना चाहते हैं कि इस घोषणा को करवाने के पीछे कौनहै तो यहां पढ़ें

अब तो जागो मेरे देसभक्त भाईयो वरना कहीं ऐसा न हो कि हालात वहां तक पहंच जांयें जहां आपके जागने पर भी बात न बन पाए…..

6-6 भारतयीयों की लाशें गिराकर चर्च ने एंटोनिया उर्फ सोनिया गांधी को अध्यक्ष बनाया है?

6-6 भारतयीयों की लाशे गिराकर चर्च ने

एंटोनिया उर्फ सोनिया गांधी को कांग्रेस अध्यक्ष बनाया है?


कुछ बातें ऐसी होती हैं जिन्हें लाख कोशिश पर भी दबाया नहीं जा सकता।इन्हीं बातों में से एक है चर्च द्वारा योजनाबद्ध तरीके से एक फासीवादी इटालियन स्टीफैनो व पाओला माईनों की औलाद एडवीज एंटोनिया अलवीना माईनो उर्फ सोनिया गांधी को कांग्रेस अध्यक्ष बनाकार गांधी परिवार की विरासत पर कब्जे के साथ ही शहीदों द्वारा 1857 से 1947 तक किए गए संघर्ष व बलिदानों के परिमामस्वारूप भारतीयों के हाथों आई सत्ता को भारतीयों वोले तो हिन्दूओं से छीन कर सीधे चर्च के हाथों तक पहुंचाना।


ये कहानी शुरू होती है राजीब गांधी जी के पढ़ाई के लिए विदेश जाने के साथ ही। जैसे ही राजीब गांधी जी पढ़ाई के लिए लन्दन पहुंचे चर्च ने उन्हें अपने जाल में फंसाने के लिए जाल बुनना शुरू कर दिया। अपने इस जाल को अंजाम तक पहुंचाने के लिए चर्च की निगाह पड़ी लुसियाना इटली में कैथोलिक परिवार में जन्मी व कैथोलिक स्कूल में पढ़ाई कर रही फासीवादी स्टीफैनो व पाओला माईनों की औलाद एडवीज एंटोनिया अलवीना माईनो पर । चर्च ने एंटोनिया को 1964 में Cambridge शहर के The bell education Trust में अंग्रेजी सीखने के नाम पर प्रवेश दिलवाया। राजीब गांधी जी को अपने षडयन्त्र में फांसने के उद्देश्य से चर्च नें 1965 में राजीब गांधी जी की मुलाकात एडवीज एंटोनिया अलवीना माईनो से ग्रीक रैस्तरां में करवाई।


1968 में इन्दिरा गांधी जी जो कि पूरी तरह इस विदेशी अंग्रेज से राजीब गांधी जी की शादी के विरूद्ध थीं पर ततकालीन सोवियतसंघ से दबाबा वनवाकर एडवीज एंटोनिया अलवीना माईनो की शादी भोले-भाले राजीब गांधी जी से करवा दी गई। इतिहास गवाह है कि चर्च ने कभी भी विदेशी भूमि पर कब्जा जमाने के लिए संयम का परिचय नहीं दिया ।यहां भी शादी तो हो गई लोकिन चर्च का भारत पर सीधे राज करने का जो षडयन्त्र था उसे अन्जाम तक पहुंचाने के लिए जरूरी था एडवीज एंटोनिया अलवीना माईनो को कांग्रेस अध्यक्ष की कुर्सी तक पहुंचाना।


1965 में एडवीज एंटोनिया अलवीना माईनो व राजीब गांधी को साथ लाने के एकदम बाद ही चर्च ने जनवरी 1966 में सोवियत संघ के तासकंद में एक मुसलिम के माध्यम से लाल बहादुर शास्त्री जी को जहर देकर मरवा दिया। मतलब चर्च ने भारत पर कब्जे की ओर पहला कदम आगे बढ़ाया।


चर्च के दबाब व प्रभाव के परिमामस्वारूप ही लाल बहादुर शास्त्री जी का पोस्टमार्टम तक नहीं कवाया गया जबकि उनकी विधवा पत्नी ललिता शास्त्री जी लगातार पोस्टमार्टम की मांग करती रहीं —- आप तो जानते ही हैं कि आज भी भारत में चर्च के आगे किसी की भी नहीं चलती —- जो भी ,र्चच के मार्ग में आया उसे चर्च ने विना कोई समय गंवाय ठिकाने लगा दिया।


शास्त्री जी के कत्ल के बाद चर्च ने एडवीज एंटोनिया अलवीना माईनो के भारत में 15 वर्ष पूरे होने का इन्तजार शुरू किया क्योंकि 15 वर्ष भारत में नागरिकता के लिए एक आवस्यक शर्त है। साथ ही इस समय में शास्त्री जी की मौत पर उठा बबाल भी ठंडा हो गया। इसके साथ ही चर्च ने अपने अगले सिकार की खोज जारी रखी।


भारत पर कब्जे की चर्च की राह में सबसे बड़ी रूकाबट बनकर उभरे प्रखर देशभक्त संजय गांधी जी।

23 जून 1980 को सफदरगंज हबाई अड्डे के पास संजय गांधी जी को चर्च ने एक विमान दुर्घटना में कत्ल करवा दिया। सारे देश में शोर मचा दिया कि इन्दिरा गांधी ने अपने बेटे को मरवा दिया । हर जगह गली मुहल्ले चौराहे पर एक ही चर्चा कि इन्दिरा गांधी जी ने कुर्सी के लिए अपने ही बेटे को मरवा दिया। इस देश में चर्च की अपवाह फैलाओ मशीनरी जो कि 1947 से पहले से ही काम कर रही है उसकी देश के हर कोने तक पकड़ है। इसी अपवाह फैलाओ मशीनरी के षडयन्त्र का सिकार होकर भारतीयों ने चर्च के इसारे पर किए जा रहे कत्लों को दुर्धटनायें मानने की बेबकूफी की ।


बैसे भी भारतीय विशेषकर हिन्दु राजनितीक रूप से बेबकूफ हैं ये किसी को भी बताने जताने की अबस्यकता नहीं। जो हिन्दू मुसलमानों व ईसाईयों द्वारा देश के कई हिस्सों से बेदखल कर दिए जाने के बाबजूद आज भी अपने ही हिन्दू भाईयों के हक छीन कर अल्पसंख्यबाद के नाम पर उन्हीं कातिल मुसलमानों व इसाई को देकर इन कातिलों को ताकतबर बनाने पर तुले हों वो मूर्ख नहीं तो और क्या हैं ?


1980 संजय गांधी जी के कत्ल के बाद चर्च ने रूख किया इन्दिरा गांधी जी की ओर

जिन्हें 1984 में कत्ल करवा दिया गया।

फिर 21 मई 1991 को राजीब गांधी जी का भी कत्ल करवाकर एडवीज एंटोनिया अलवीना माईनो को कांग्रेस के अध्यक्ष के पद पर पहूंचने का मार्ग साफ होग गया।


लोगों को असलियत पता न चल जाए इसके लिए कुछ दिन नौटंकी करने के बाद एडवीज एंटोनिया अलवीना माईनो उर्फ सोनिया गांधी को 1998 में कांग्रेस के पहले दलित कांग्रेस अध्यक्ष सीता राम केसरी जी को अनमानजनक रूप से हटाकर अध्यक्ष बना दिया गया।


1999 में कांग्रेस के तीन ताकतवर नेताओं सरद पवार, पूर्ण ए संगमा व तारिक अनवर ने कांग्रेस पर चर्च द्वारा विदेशी नेतृत्व थोपने के विरोध में एडवीज एंटोनिया अलवीना माईनो के विरूद्ध क्रांति का विगुल बजा दिया। लेकिन गुलाम मानसिकता से ग्रस्त कांग्रेसियों के सहयोग व भाजपा की मूर्खता के फलस्वारूप चर्च ने इन नेताओं को ठिकाने लगाकर इस क्रांति को दबाने में असफलता हासिल की । इसके वाद चर्च को डर सताने लगा । चर्च को लगा कि माधवराव सिंधिया

 व राजेश पायलट जैसे जनता से जुड़ें नेता कभी भी कांग्रेस के अध्यक्षपद के लिए दावेदारी पेसकर चर्च के सारे किए कराय पर पानी फेर सकते हैं। इसी समस्या का समाधान करने किए चर्च ने

11 जून 2000 को राजेश पायलट जी को कार दुर्घटना में मरवा दिया व बाद में एक जहाज दुर्घटना का सहारा लेकर माध्वराव सिंधिया जी को भी कत्ल करवा दिया गया।


इस तरह अब कांग्रेस में कोई भी ऐसा नेता न बचा जो चर्च की एजेंट एडवीज एंटोनिया अलवीना माईनो उर्फ सोनिया गांधी के लिए खतरा उत्पन्न कर सके। अब आप सोचो जरा कि क्या ये संयोग हो सकता है कि एक विदेशी एजेंट के रास्ते में रूकावट पैदा करने में सक्षम आधा दर्ज लोग अपने आप दुर्घटनाओं का सिकार हो जायें।


हमारे विचार में तो ये चर्च द्वारा किए गए कत्ल हैं, अपनी एंजेंट इटालियन ईसाई एडवीज एंटोनिया अलवीना माईनो को ,भारत में स्थापित करने के लिए…….अगर आप अलग राय रखते हैं तो हमें अपनी राय से अबगत जरूर करवाना।




BREAKING NEWS:-दिल्ली के पांच सितारा रैडिसन होटल से इटालियन आतंकवादी हथियारों सहित पकड़े गए!

BREAKING NEWS:-दिल्ली के पांच सितारा रैडिसन होटल से इटालियन आतंकवादी हथियारों सहित पकड़े गए!

 

मरे प्यारे हिन्दूओ ,समझदार हिन्दूओ,मानबता के नाम पर अनजाने में आतंकवादियों के ठेकेदार बन चुके सैकुलर हिन्दूओ हम आपतक लगातार जानकारी पहूंचानी की कोशिस कर रहे हैं ताकि आप सब अपने देश की रक्षा के प्रति जागरूक होकर देश के शत्रुओं से लड़ने के लिए एक जुट हो जायें।आज हम और आप जिस गलत जानकारी का सिकार होकर अपनी जड़ों को खोदने के षडयन्त्रों का जाने अनजाने साथ दे रहे हैं वो कही हमरे हालात उन यहूदियों की सरह न कर दे जो हमारी तरह देश के प्रति लापरवाह रहे लेकिन जब वो वेघर हो गए तब जाके उन्हें एहसास हुआ कि अपना देश होने का मतलब होता है सुरक्षा और समृद्धि। आज हर यहूदी एकजुद होकर अपने चारों तरफ फैले शत्रुओं से लड़ने में इसलिए कामयाब है कि उनमें मानबता के नाम पर आतंकवादियों की मदद करने वाला कोई सेकुलर बौद्धिक गुलाम नहीं जो आतंकवादियों का साथ देकर अपनों लहू बहाने में आन्नद का एहसास करे ।हम समझते हैं कि हमारे बहुत से हिन्दू सेकुलर गिरोह से अनजाने में जुड़े हैं इसीलिए वार-वार उनको इस गिरोह की असलियत बताने का प्रयत्न कर रहे हैं। खैर आज के विषय पर आते हैं

आज भारत देश के शत्रु मुसलिम,ईसाई व माओवादी आतंकवादियों का गढ़ बनता जा रहा है।

 

·       आज ही दिल्ली के पांचसितारा रेडिसन होटल से इटालियन आतंकवादियों को हथियारों सहित पकड़ा गया।

 

·       मुंबई हमले के दौरान हमारे कुछ इमानदार कसटम अधिकारियों ने FBI के एजंटो को जासूसी के उपकरणों सहित पकड़ा था।

 

·       अभी कुछ दिन पहले केन्द्र सरकार ने FBI के इसारे पर अंडेमान में तैनात सैनिक अधिकारी को गद्दार घोषित करने की हिमाकत की।

 

·       तहवुर राणा-हेडली प्रकरण ने सिद्ध कर दिया कि भारत में आतंकवादी घटनाओं को अंजाम देने में मुसलिम व ईसाई अमेरिकी एजेंट सक्रिए हैं।

 

·       मुंबई हमले के दौरान ही आतंकवादी हमलों को अनजाम देने के वाद जानकारी देने के Email करने के लिए एक अमेरिकी को गिरफतार किया गया था।मतलब वो इस बात का प्रमाण था कि ये अमेरिकी किसी और संगठन के नाम से बम्ब हमलों की जिम्मेवारी ले रहा था।

 

·       कुछ महीने पहले ही कुछ अंग्रेजों को इंदरा गांधी हबाई अड़े की रेकी करते हुए पकड़ा गया।   

 

·       इटालियन एजेंट हथियार तस्कर व राजीब गांधी जी की हत्या के संदिग्ध इटालियन क्वात्रोची के पहले तो कानून मन्त्री हंसराज भारद्वाज जी को लंदन भेज कर बोफोर्स दलालीकांड के पैसे छुड़वाए गए व वाद में उसके उपर से ,देश की इज्जत वोले तो इटालियन एंटोनियो माईनो मारियो की इज्जत का हबाला देकर, सारे आरोप हटा लिए गए।

 

·       अभी संसद के पिछले सत्र जहां एक तरफ अमेरिका के इसारे पर भारतीयों की जान-माल को खतरे में डालने वाले भारत विरोधी परमामु सुरक्षा विल को पास करवाने की कोशिस की गई तो दूसरी तरफ हिन्दूओं को आपस में लडवाकर गृहयुद्ध के हालात पैदा करने के लिए जाति अधारित विभाजनकारी जनगणना का जिन वोतल से बाहर निकाल दिया गया।

 

जितनी भी घटायें हमने लिखी हैं ये सब देशद्रोह या यूं कहें देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने की घटनायें हैं लेकिन इन सब पर गद्दारों की सेकुलर सरकार ने कोई न कोई बहाना बनाकर पर्दा डाल दिया।

 

जहां एक तरफ देशभर में  आतंकवाद फैलाकर मारकाट मचाने वाले मुसलिम व ईसाई आतंकवादियों को बचाने का हर प्रयत्न पूरी वेशर्मी से ये सरकार कर रही है वहीं दूसरी तरफ देश की रक्षा की खातिर अपनी जान जोखिम में डालकर

 

आतंकवादियों से लोहा लेने वाले सैनिकों , पुलिस अधिकारियों व अन्य देशभक्तों को झूठे आरोप लगाकर विना किसी प्रमाण के बर्षों तक जेल में रखकर आतंकवादी सिद्ध करने की कोशिश की जा रही है।

 

आप सब बुद्धि के सागर हैं इसलिए ज्यादा न लिखते हुए आपसे हम इतना ही कहेंगे कि उपरलिखित सब घटनाओं से मतलब साफ है कि जो देश की सुरक्षा के लिए अपनी जान तक न्यौछावर करने को त्यार हैं वो देश के सिफाही या यू कहें देश के क्रांतिकारी इस गद्दारों की सरकार के लिए आतंकवादी हैं व जिन्हें माननीय सर्वोच नयायलय भारतीयों के कत्ल के जुल्म में फांसी की सजा सुना चुका है वो गद्दारों की इस सेकुलर सरकार के लिए क्रांतिकारी हैं।

अन्त में इतना ही कहेंगे

 

एकजुट होकर देशहित में बढ़ा कदम उठाओ ऐ हिन्दूओं

वरना तुम्महारी दासतां तक न होगी दास्तानों में

आखिर कब तक मुसलमान इस तरह पुलिस की ज्यादतियों का सिकार होते रहेंगे?

आखिर कब तक मुसलमान इस तरह पुलिस की ज्यादतियों का सिकार होते रहेंगे?

आज शुबह शुबह हम वाराणशी पहुंच गए वो भी नइ सड़क रोड़ पर।हमें लगा कि जो हमने देखा उसे आप तक कोई और पहुंचाये तो क्यों न हम ही पहले वाजी मार लें क्या पता इसी चककर में पोस्ट हिट हो जाये।

हमने सुना था कि वाराणसी गंगा-जमुनी संसकृति का प्रतीक है जिसे मुसलिम भाईयों ने हर कुर्वानी लेकर जिन्दा रखा है अभी हाल ही में इन मुसलिम भाईयों ने हनुमान मन्दिर की कुर्वानी लेकर इसी गंगा-जमुनी तहजीब को आगे बढ़ाने का अपनी तरफ से एक बड़ा प्रयास किया।जो कसर रह गई थी उसे मुसलिम भाईयों ने बंगलादेशीयों के साथ मिलकर हर सड़क किनारे,चौराहे व भीड़भाड़ वाली जगह की कुर्वानी ली उस पर   अपने आसियाने व दुकानें खोलकर वो भी इसी तहजीब की खातिर।ये काम मुसलामन सिर्फ काशी में ही थोड़े कर रहे हैं सारे भारत में पूरी लगन से ये अपने इस काम को जाम दे रहे हैं। लोग इसे नजायज कब्जा बताते हैं,हम कहते हैं कि जब प्रधानमन्त्री मनमोहनखान कह चुके हैं कि देश के संसाधनों पर पहला अधिकार मुसलमानों का है तो फिर नजायज कब्जा कैसा।जो लोग इसे नजायज कब्जा बताते हैं उन्हे सरियत व संविधान की जानकारी नहीं।आखिर संविधानन ने ही तो मुसलमानों को शरीयत व कुरान शरीफ का पालन करते हुए चार-चार शादियां कर 30-40 बच्चे पैदा करने का अधिकार दिया है।अब जब ये संविधान के अनुसार जीबन जी कर देश से इतनी छोटी सी कुर्वानी ले रहे हैं तो फिर इनके बच्चों के पालन पोषण व रोजगार की जिम्मेदारी भी संविधान वोले तो देश वोले तो हिन्दूओं की ही हुई न ।अब जब उन्होंने देश की कुर्वानी की खातिर इन बच्चों को पालने के लिए सड़क पर कब्जा कर अपने आसियाने व दुकानें बना ली तो फिर प्रसासन को तो इन्हें विजली पानी उपलब्ध करवाने की ब्यबस्था करनी चाहिए थी सड़क तो है ही । बैसे भी आप बताओ कि सड़कों पर पूंजीवादियों के बाहन चलाने जरूरी हैं या फिर इन बेचारे गरीबों का भरण-पोषण व आसियाना बनाना। आज शुबह-शुबह जब हमने देखा कि ये वेचारे अपने आसियाने की रक्षा के लिए जब पुलिस पर सिर्फ पत्थर ही बरसा रहे थे तो पुलिस ने इन पर फूल वरसाने के बजाए लाठी चार्ज कर दिया। हमें एकदम एहसास हो गया कि पुलिस सांप्रदायिक ताकतों वोले तो वीएसपी वोले तो हिन्दूओं के इसारे पर काम कर रही हैं ।अगर पुलिस इसी तरह इन्हे सड़कों ,चौराहों व हिन्दूओं की जमीनों पर कब्जा करने से रोकेगी तो भला कौन मुसलमान या सेकुलर हिन्दू ये सब बरदाश कर पाएगा।जिस दिन मनमोहन खान को ये पता चला कि पुलिस ने इन वेचारे मुसलिम भाईयों के साथ ऐसा सलूक किया है उस दिन वो 36 हॉंडग्रनेड व 12 AK47 रखने वाले वेचारे मुसलिम भाई सोराबुद्दीन को मारने वाले गुजरात के पुलिस अधिकारियों की तरह इन्हें भी जेल में डाल देंगे CBI वोले तो कांग्रेस ब्यूरो आफ इनवेसटीगेशन का उपयोग कर।तब होश ठिकाने आयेंगे इस सांप्रदायिक मुख्यामन्त्री के।

अन्त में आखिर कब तक वेचारे मुसलमान इस तरह पुलिस की ज्यादतियों का सिकार होते रहेंगे?

बुझो तो जानो—–कशमीर घाटी व आसाम में भारी सफलता के बाद अब हैदराबाद में।—बताओ हम कौन हैं?

बुझो तो जानो—–कशमीर घाटी व आसाम में भारी सफलता के बाद अब हैदराबाद में।—बताओ हम कौन हैं?

हम बहुत महान हैं इतने महान कि हम हमारा समर्थन करने वालों का बहिस्कार कर उनका खातमा सुनिश्चित कर अपने सत्रुओं को हमारे पर विना किसी रोक-टोक के हमला कर तबाह करने का मौका दे देते हैं ताकि हमारे शत्रुओं को हम पर विजय पाने में किसी असुविधा का सामना न करना पड़े। क्या आपको जानकारी है कि ये हमारा ही सहयोग था जिसके परिमामसवारूप हम पहले अफगानीस्थान से ,फिर पाकिस्तान व बंगलादेश से खदेड़े गय। विभाजनजन के वाद भी हमने अपनी महानता नहीं छोड़ी ।हमने अपने खात्मे के लिए कसमीर घाटी में भी अपनी महानता का परिचय देते हुए मुसलिम आतंकवादियों को हर तरह का सहयोग देकर अपना समूलनाश सुनिश्चित किया।क्योंकि हमारी सेना अब तक बहुत ताकतबर हो चुकी थी इसी ताकत का फयदा उठाकर कहीं वो हमारा विनाश चाहने वाले मुसलिम आतंकवादियों का नाश न कर दे इसीलिए हमने अपनी सेना पर इस तरह के प्रतिबन्द लगाय कि सारी की सारी सेना देखती रह गई और हमने कशमीघाटी को खुद से मुक्त करवा दिया।इसी महानता के चलते हमने आसाम में ऐसे कानून बनाए कि वहां भी हमने मुसलिम आतंकवादियों की विजय सुनिश्चित कर दी है।गुजरात में हमारे कुछ मूर्खों की बजह से मुसलिम आतंकवादियों को विरोध का समाना करना पड़ा इसलिए हमने उन मुर्खों के कहने पर आतंकवादियों के खात्मे के लिए काम करने वाले पुलिस अधिकारियों व जवानों को जेल में डाल दिया ताकि कोई और पुलिस वाला हमारी रक्षा करने का साहस न कर सके।हमने मुंबई में अपने लोगों को मारने वाले अपने मुसलिम आतंकवादियों आतंकवादियों के लिए क्या नहीं किया ।अन्त में हमने हर तरह के प्रयास कर इन्हें बचा ही लिया। सारे देश में हमें जिस तरह की सफलता मिल रही है उसे देखते हुए अब हमने हैदरावाद में पुलिस चौकी पर हमला करने वाले हमारे मुसलिम भाईयों को बचाने की अपनी कोशिस सुरू कर दी है ।भगवान ने चाहा तो यहां भी हम किसी हिन्दू को उठाकर जेल में डालकर अपने इन मुसलिम भाईयों का जुल्म उनके सिर डालकर अपने मुसलिम भाईयों को बचा ही लेंगे।क्या आपको पता नहीं किस तरह हमने झूठे आरोप लगाकर हमारी रक्षा की बातें करने वाली प्रज्ञा सिंह ठाकुर,लैफ्टीनैंट कर्नल पुरोहित को जेल में डालकर मकोका लगाकर  ये सुनिश्चित किया कि वो जेल से न छूट पायें । वेशक मकोका कोर्ट के कुछ मूर्ख जजों ने उन पर से मकोका हटा दिया पर हमने उन्हें जेल से नहीं छोड़ा।देवेन्द सिंह व चन्द्रशेखर के साथ भी हम यही सलूक करने वाले हैं।

देखा न हम कितने महान हैं ।

बस अब जरा ये बता दो कि अपनों का विनाश सुनिश्चिक करने वाले हम कौन हैं?

 

 

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