Category Archives: समाचार और राजनीति

राजीब गांधी कत्ल वनाम संसद भवन हमला…

बैसे तो अबदुल्ला परिबार की गद्दारी से हर देशभक्त परिचित है। लेकिन आज आतंकवादियों की फांसी को सांप्रदायिक रंग देने की जो घिनौनी हरकत इस गद्दार ने की है उसका उसी की भाषा में उतर देना जरूरी है।
सबसे पहले तो तमिलनाडु की विधान सभा की तुलना जम्मू-कशमीर की विधानसभा से करना ही गलत है क्योंकि एक तो जम्मू-कशमीर विधानसभा भारतविरोधी आतंकवादियों से भरी पड़ी है जबकि तमिलनाडु की विधानसभा में ऐसी कोई स्थिति नहीं है।
दूसरा जम्मू-कशमीर की विधानसभा में आतंकवादियों का बर्चस्व वानए रखने के लिए अबदुल्ला खानदान ने नैहरू खानदान की सहायता से जम्मू संभाग के लोगों को उनके हक से वंचित रखने के लिए जानबूझ कर जम्मू-संभाग में विधानसभा सीटों को कम रखा है । जबकि तमिलनाडु विधान सभा में ऐसी कोई गड़बड़ नहीं है।
जम्मू-कशमीर विधानसभा में बैठे आतंकवादियों ने सरकारी तन्त्र का प्रयोग कर कशमीरघाटी में हिन्दू-मिटाओ हिन्दू भगाओ अभियान चलाकर न केवल 60000 हिन्दूओं का कत्ल किया वल्कि 500000 हिन्दूओं को वेघर भी किया। मां-बहन वेटियों की इज्जत आबरू से खिलबाढ़ किया से अलग। अब आप ही बताओ कि कातिल राक्षसों से भरी पड़ी जम्मू-कशमीर विधानसभा की तुलना तमिलनाडु की विधानसभा से कैसे की जा सकती है?
राजीब गांधी पर हमला करने वालों की तुलना लोकतन्त्र के मन्दिर पर हमला करने वाले भारतविरोधी आतंकवादी से करना किसी भी तरह से जायज नहीं ठहराया जा सकता।
राजीब गांधी का कत्ल किसने किया ये अभी पूरी तरह सपष्ट नहीं है क्योंकि  एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी ने पहले राजीब गांधी के कत्ल का आरोप DMK पर लगाकर सरकार केन्द्र सरकार गिरा दी बाद 2004 में इसी एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी ने इसी DMK के साथ मिलकर सरकार बना ली।
जिस क्वात्रोची पर चर्च के इसारे पर वालासिंघम के माध्यम से LTTE प्रमुख प्रभाकरण को राजीब गांधी के कत्ल की सुपारी देने के आरोप लगे वही क्वात्रोची आज भी एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी का परिबारिक मित्र है जिसके लिए एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो कुछ भी कर गुजरने के लिए तैयार है।
अब जिन लोगों को फांसी की सजा सुनबाई गई उनमें से एक की सजा खुद एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो माफ कर चुकी तो स्वभाविक रूप से वाकी मुरूगन,स्नाथन व पेरारीवालन भी माफी की उमीद तो कर ही सकते हैं।
दूसरी तरफ मोहम्द अफजल खुद चीख-चीख कर कह रहा है कि कशमीरघाटी को काफिरों वोले तो हिन्दूओं से मुक्त करवाने के लिए उसने लोकतन्त्र के मन्दिर पर हमला किया। इतना ही नहीं उसके समर्थक मुसलिम आतंकवादी लगातार भारत को लहूलुहान करने की धमकियां दे रहे हैं जिनमें उमर-अबदुल्ला व गुलामनबी आजाद भी सामिल हैं। अगर इस राक्षस को फांसी नहीं दी जाती है तो इन आतंकवादियों के हौसले और बुलंद होंगे परिमास्वारूप भारत पर इनके हमले बढ जायेंगे।
हां एक बात जरूर है कि ये हमला अकेले मोहम्द अफजल ने नहीं किया था इसके साथ कुछ और लोग भी थे जैसे कि आतंकवादी  प्रोफैसर जिलानी व उसके अन्य भारतविरोधी आतंकवादी साथी। आतंकवादी प्रोफैसर जिलानी जैसे गद्दारों को कुलदीप नैयर जैसे पत्रकारों ने क्यों बचाया(कहीं ISI ऐजेन्ट मुहम्द फाई के आदेश पर तो नहीं) इन प्रश्नों का उतर भी देश की जनता को जानने का पूरा हक है।
मोहम्द अफजल के हमले में सुरक्षावलों के जवान मारे गय जबकि दूसरे हमले में एक नेता व उसके कुछ प्रशंसक मारे गय। दोनों में बहुत फर्क है ये नेता भारत पर भारतविरोधी कांग्रेस वोले तो  नैहरू खानदान का शासन बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रहा था जबकि सुरक्षावलों के जवान देश की अस्मिता की रक्षा के लिए संघर्ष करते हुए मारे गय।
ऐसा नहीं कि उमर अबदुल्ला पहली बार गद्दारी कर रहा है इससे पहले भी ये आतंकवादी सैनिकों पर हमला करने वाले अपने साथी 1200 मुसलिम आतंकवादियों पर से केश वापिस लेकर उन्हें सैनिकों पर हमला करने खुली छूट दे चुका है। हमला करते वक्त सैनिकों के हाथों मारे जाने पर अपने इन आतंकवादी साथियों का हौसला बानाए रखने के लिए पांच-पांच लाख रूपए की आर्थिक सहायता भी दे चुका है।
इतना ही नहीं ये आतंकवादी केन्द्र सरकार में बैठे अपने आतंकवादी मददगारों की सहायता से सैनिकों पर तरह-तरह के प्रतिबन्ध लगवाने में भी समर्थ रहा है।
अब आप खुद फैसला करो कि जिस राज्य का मुख्यमन्त्री गद्दार उमर अबदुल्ला जैसा आतंकवादी हो क्या वहां कभी शांति हो सकती है ?

गद्दारों की जिस कांग्रेस ने नेताजी सुभाष चन्द्र बोस जी जैसे प्रखर देशभक्त क्रांतिकारी का सौदा अंग्रेजों से कर लिया उससे आप बाकी देशभक्तों के मान सम्मान की उम्मीद भला कैसे कर सकते हैं?

Angry smile

हम सब जानते हैं कि कांग्रेस की स्थापना एक विदेशी अंग्रेज ने भारतविरोधियों वोले तो हिन्दूविरोधियों के हित साधने के लिए 1885 में की।

अंग्रेज द्वारा कांग्रेस की स्थापना का एकमात्र मकसद था एक ऐसा गिरोह तैयार करना जो भारतीयों को अपना सा लगे लेकिन जिसका मूल मकसद हो भारत को तबाह करना।

कांग्रेस की स्थापना से लेकर आज तक कांग्रेस पर उन्ही लोगों का कब्जा रहा जिनमें भारतविरोध वोले तो हिन्दूविरोध कूट-कूट कर भरा हो। वेशक इसमें कुछ अपबाद भी देखने को मिले ।

खिलाफत अन्दोलन के समर्थन के बहाने मुसलिम अलगावबाद का समर्थन

1923 में जब देश में स्वातन्त्रता संग्राम के दौरान सब हिन्दू-मुसलिम मिलकर अंग्रेजों की दमनकारी नीतियों से तंग आकर एकजुट होकर संघर्ष कर रहे थे तभी कांग्रेस ने अलगाववादी मुसलमानों के दबाब में आकर खिलाफत अन्दोलन का समर्थन कर एक ऐसा षडयन्त्र किया जिसाक परिणाम मुसलिम लीग की स्थापना के रूप में हुआ जो आगे चलकर सांप्रदाय के आधार पर भारत के विभाजन का एककारण वनी। यहां हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि डा वलिराम हेडगेवार जी सहित कांग्रेस के अनेक नेताओं ने गांधी-नैहरू के इस निर्णय का विरोध किया लेकिन गांधी-नैहरू ने किसी की एक न सुनी। बाद में डा हेडगेवार जी ने 1925 में RSS की स्थापना कर देशभक्त नागरिकों के निर्माण का कार्य शुरू किया जो आज तक जारी है। आज देशभक्त नागिरकों की बढ़ती फौज ही कांग्रेस की परेसानी का सबसे बढ़ा कारण बन रहा है।

प्रखर देशभक्त नेताजी सुभाष  चन्द्र बोस जी का विरोध

Netaji Subhash chander Bose ji1939 में प्रखर देशभक्त नेताजी सुभाष चन्द्र बोस जी का नेहरू-गांधी के विरोध के बाबजूद कांग्रेस अध्यक्ष चुना जाना। लेकिन ये ऐसी घटना थी जिसने हिन्दूविरोधी देशविरोधी कांग्रेसियों को झकझेर कर रख दिया । बस फिर क्या था ये सब भारतविरोधी-हिन्दूविरोधी नैहरू-गांधी के नेतृत्व ऐसे षडयन्त्र करने में जुट गए जिनके परिणाम प्रखर देशभक्त नेताजी सुभाष चन्द्र बोस जी को कांग्रेस का अध्यक्ष पद छोड़ना पड़ा।

भारत विभाजन के दौरान कांग्रेस के हिन्दूविरोधी-देशविरोधी षडयन्त्र

1947 में कांग्रेस ने अंग्रेजों के साथ मिलकर भारत का सांप्रदाय के आधार पर विभाजन सवीकार किया।ab1 इस विभाजन के अनुसार मुसलमानों के लिए पाकिस्तान (पूर्वी और पश्चिमी )का निर्माण किया गया जबकि हिन्दूओं के लिए भारत का वाकी वचा हिस्सा दिया गया। लेकिन यहां फिर कांग्रेस ने एक षडयन्त्र के तहत मुसलमानों को फिर से हिन्दूओं वाले हिस्से में रखने की जिद की।

RSS ने सांप्रदाय के आधार पर देश के विभाजन का डट कर विरोध किया । जब कांग्रेस ने विभाजन सवीकार कर पाकिस्तान में रहने वाले हिन्दूओं को मुसलिम आतंकवादियों के हाथों मरने के लिए अकेला छोड़ दिया तब RSS ने हिन्दूओं की रक्षा के लिए दिन-रात एक कर प्रयत्न किया।

कांग्रेस ने विभाजन के दौरान RSS द्वारा हिन्दूओं की रक्षा के लिए काम करने से चिढ़ कर RSS पर प्रतिबन्ध लगा दिया 1948 में कांग्रेस नें गांधी की हत्या का झूठा आरोप लगाकर देशभक्त संगठन RSS पर प्रतिबन्ध लगा दिया।

RSS ने संबैधानिक तरीके से इसका विरोध किया । बाद में मजबूर होकर कांग्रेस को मानना पड़ा कि RSS का गांधी की हत्या में कोई हाथ नहीं है। परिमामस्वारूप प्रतिबन्ध हटा लिया गया। बैसे भी कांग्रेस जानती थी कि गांधी की हत्या के लिए नैहरू ही जिम्मेदार है ।

वन्देमातरम् में कांटछांट कांग्रेस की गद्दारी का प्रमाण

15 अगस्त 1947 को सांप्रदाय के आधार पर भारत का विभाजन होने के बाद जब पाकिस्तान और बंगलादेश को हिन्दूविहीन कर दिया गया तो भारत में मुसलमानों को रखने का कोई औचित्या नहीं था ।

उसवक्त कांग्रेस के अनेक देशभक्त लोगों ने बार-बार मुसलमानों को देश में न रहने देने की बकालत की थी फिर भी गद्दार कांग्रेसियों ने मुसलमानों को भारत में रखने का फैसला क्यों किया?
आज देश पर बार-बार हो रहे मुसलिम आतंकवादी हमलों के बाद आप समझ सकते हैं कि कौन सही था कौन गलत ?

अगर मुसलमानों को भारत में इस आधार पर रखा गया कि मुसलमान देशभक्त हैं और सर्वधर्मसम्भाव में विस्वास रखते हैं तो फिर वन्देमातरम् की चार पंक्तियों को छोड़ कर वाकी पंक्तियों को क्यों काट दिया गया?

कांग्रेस द्वारा अलगावबाद को बढ़ाबा देने के लिए अल्पसंख्यकबाद व दंगो का सहारा

जब भारत को हिन्दू राष्ट्र नहीं घोषित किया गया तो फिर देश में अल्पसंख्यकबाद के नाम पर धर्म के आधार पर कानून क्यों बनाए गए?
जब सारा देश एक है तो फिर कश्मीरघाटी के मुसलिमबहुल होने की बजह से जम्मु-कश्मीर में अलग संविधान, अलग कानून, धारा 370 क्यों ?

अलगावबाद से ग्रसित कांग्रेस द्वारा समस्या की जड़ मुसलिम पर्सनललॉ का बचाब
1955 में जब हिन्दू पर्सनल ला समाप्त कर हिन्दूओं को देश के संविधान के अनुसार जीवन यापन करने के लिए कहा गया तो फिर मुसलिम पर्नसनल ला को समाप्त कर क्यों मुसलमानों को संविधान के दायरे में नहीं लाया गया?
समाजिक बुराईयों के नाम पर हिन्दूओं की अनेक मान्याताओं पर सरकार ने प्रतिबंध लगाया तो मुसलमानों में अलगाववाद को बढ़ावा देने वाली बुराईयों पर प्रतिबंध क्यों नहीं?

कांग्रेस द्वारा धर्मनिर्पेक्षता की आड़ में हिन्दूमिटाओ-हिन्दूभगाओ अभियान को बढ़ाबा

जब संविधान में धर्मनिर्पेक्ष शब्द नहीं था तो 1977 में इसे संविधान में क्यों जोड़ा गया?

मार्च 1998 वनधामा नरसंहार.5भारत में आज बहुत ही खतरनाक स्थिति बनती जा रही है अपने हिन्दूराष्ट्र भारत में विदेशी संस्कृति से प्रेरित मीडिया, खुद को सैकुलर कहलवाने वाले राजनीतिक दलों, बिके हुए देशद्रोही मानवाधिकार संगठनों, खुद को सामाजिक कार्यकर्त्ता कहलवाने वाले गद्दारों, भारत विरोधी आतंकवादियों व परजीवी हिन्दुविरोधी लेखकों का एक ऐसा सेकुलर गिरोह बन चुका है जो भारत को सांस्कृतिक व आर्थिक रूप से तबाह करने पर आमादा है। इस गिरोह को हर उस बात से नफरत है जिसमें भारतीय संस्कृति व राष्ट्रवाद का जरा सा भी अंश शेष है । यह गिरोह हर उस बात का समर्थन करता है जो देशद्रोही कहते या करते हैं । देशद्रोही मुसलिम आतंकवादियों व वामपंथी आतंकवादियों को बेचारा गरीब अनपढ़ व सत्ताया हुआ बताकर हीरो बनाता जा रहा है । सेवा के नाम पर छल कपट और अवैध धन का उपयोग कर भोले-भाले बनवासी हिन्दुओं को गुमराह कर उनमें असभ्य पशुतुल्य विदेशी सोच का संचार कर हिन्दुविरोधी-राष्ट्रविरोधी मानसिकता का निर्माण करने वाले धर्मान्तरण के ठेकेदारों को हर तरह का सहयोग देकर देश की आत्मा हिन्दू संस्कृति को तार-तार करने में जुटा है। यह गिरोह एक ऐसा तानाबाना बुन चुका है जिसे हर झूठ को सच व हर सच को झूठ प्रचारित करने में महारत हासिल है।

हम दाबे के साथ कह सकते हैं कि इस हिन्दुविरोधी देशद्रोहीगिरोह की क्रियाप्रणाली हमेशा मुसलिम आतंकवाद व धर्मांतरण समर्थक रही है इसमें भी खतरनाक कड़बी सच्चाई यह है कि इस हिन्दुविरोधी देशद्रोहीगिरोह ने कभी भारतीय संस्कृति के प्रतीकों का सम्मान करने वाले देशभक्त मुसलमानों व ईसाईयों जो खुद को हिन्दूसमाज का अभिन्न अंग व भारत को अपनी मां मानते हैं को न कभी प्रोत्साहन दिया न ही कभी उनका भला चाहा ।

इस हिन्दुविरोधी देशद्रोही गिरोह को अगर किसी की चिन्ता है तो उन मुसलिम आतंकवादियों व धर्मांतरण के ठेकेदारों की जो अपनी आवादी बढ़ाकर ,धर्मांतरण करवाकर , शान्तिप्रिय हिन्दुओं का खून बहाकर इस हिन्दूराष्ट्र भारत के फिर से टुकड़े कर इस्लामिक व ईसाई राज्य वनाने का षड़यन्त्र पूरा करने के लिए इस देशद्रोही सरकार का समर्थन पाकर अति उत्साहित होकर आगे बढ़ रहे हैं ।मार्च 1998 वनधामा नरसंहार.4

यह गिरोह देश की रक्षा के लिए जान खतरे में डालकर जिहादी आतंकवादियों का सामना करने वाले देशभक्त सैनिकों,साधु-सन्तो व संगठनों से अपराधियों जैसा व्यवहार कर रहा है और न जानें उनके लिए क्या-क्या अपशब्द प्रयोग रहा है।

RSS पर वार-वार हमला कांग्रेस सरकार की इसी देशविरोधी सोच का ही परिणाम है।

अलगाववादी मानसिकता से ग्रसित कांग्रेस ने सामाजिक एकता को तार-तार कर दियाreligions in india

अगर आप ध्यान दें तो आज तक कांग्रेस सरकारों ने जितने भी नियम बनाए हैं उनका आधार कहीं न कहीं जाति-क्षेत्र-सांप्रदाय-भाषा-प्रांत हैं।नियम अलगाववादी अधार पर होने के कारण ही आज लोग जाति-क्षेत्र-सांप्रदाय-भाषा,-प्रांत के आधार पर संगठित होने को मजबूर हैं इसी बजह से आज सब के सब राजनीतिक दलों का आधार भी कहीं न कहीं जाति-क्षेत्र-सांप्रदाय-भाषा-प्रांत ही है परिणामस्वारूप भारत लगातार अन्दर से कमजोर होता जा रहा है।

जरा सोचो जब संविधान में समानता का अधिकार है तो फिर नियम जाति, क्षेत्र, सांप्रदाय, भाषा के आधार पर क्यों?
अलगावावदी मुसलिम लीग व धर्मांतरण के ठेकेदार आज भी हिन्दूविरोधी-देशविरोधी कांग्रेस के सांझीदार

आज भी कांग्रेस केरल में अलगाववादी मुसलिम लीग व उतर-पूर्व में अलगाववादी इसाई गिरोहों के साथ मिलकर सरकार बनाकर अलगावबाद को बढ़ाबा देती है।

केरल सरकार की इसी अलगाववादी मानसिकता से तंग आकर लबजिहाद से जुड़े मामलों में सरकार द्वारा मुसलिम आतंकवादियों का पक्ष लिए जाने के कारण माननीय उच्च न्यायालय के न्यायधीशों को कहना पड़ा कि लगता है कि सरकार नहीं चाहती कि लबजिहाद जैसे षडयन्त्रों से पिड़ीत लड़कियों को कभी न्याय मिल सके।

कांग्रेस की अलगावबादी मानसिकता का सबसे बड़ा प्रमाण शाहवानो केश

1984 में जब साहवानो केश में माननीय सर्वोच न्यायलया ने मुसलिम महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए कानून पारित किया तो उसे ततकालीन कांग्रेस सरकार ने शरीयत का हबाला देकर रद्द कर दिया?

जिसके परिणामस्वारूप इसलाम के नाम पर प्रताड़ित की जा रही मां-बहनों को न्याय मिलने की उम्मीदों पर पानी फिर गया व मुसलिम अलगाववाद को नई ताकत मिली।

प्रखर देशभक्त सरदार बलभभाई पटेल जी का विरोध

sardar balabh Bhai patel ji1947 में भारत विभाजन के बाद भी जब कांग्रेस की सब इकाईयों ने प्रखर देशभक्त सरदार बलभभाई पटेल जी को प्रधानमन्त्री बनाने का एकजुट फैसला किया तब भी सब हिन्दूविरोधी-देशविरोधी कांग्रेसियों ने अंग्रेजों के इसारे पर एक कट्टर देशविरोधी-हिन्दूविरोधी नेहरू को विभाजित भारत का प्रधानमन्त्री बनाने में सफलता हासिल की जिसके परिणामस्वारूप देश के विभाजन की जड़ इसलाम को विभाजित भारत में न केवल रखा गया वल्कि विशेषाधिकार देकर भारत को फिर से लहुलुहान करने का वीज वो दिया गया ।

प्रखर देशभक्त क्रांतिकारियों का विरोध

आप सब जानते हैं कि जब-जब भी

शहीद भक्त सिंहshaeed ji,

राजगुरू जी,Rajguru jiसुखदेव जीRajguru ji 1,

चन्द्रशेखर आजाद जी Chander Shekhar Azad jiजैसे प्रखर देशभक्त क्रांतिकारियों का अत्याचारी आक्रमणकारी ईसायों(अंग्रेजों) से सामना हुआ तब-तब भारतविरोधी-हिन्दूविरोधी कांग्रेसियों ने देशभक्त क्रांतिकारियों का साथ देने के बजाय देश के दुशमन सम्राज्यावादी ईसाईयों का साथ दिया।

कितने ही ऐसे देशभक्त क्रांतिकारी हैं जो तन-मन-धन से देश की खातिर लड़ते हुए अपनी लड़ाई को अंजाम तक इसलिए नहीं पहुंचा सके क्योंकि लड़ाई के अंजाम तक पहुंचाने से पहले ही वो गद्दार कांग्रेसियों की मुखवरी के परिणामस्वारूप सम्राज्यावादी ईसाई आतंकवादियों के हमलों के सिकार हो गय।

कौन नहीं जानत कि इन भारतविरोधी-हिन्दूविरोधी कांग्रेसियों ने इन देशभक्त क्रांतिकारियों को देश के दुशमन ईसाईयों के इसारे पर आतंकवादी तक करार दे दिया।

अपनी हिन्दूविरोधी-देशविरोध की गद्दारी की परम्परा पर आगे बढ़ते हुए ही आज इटालियन अंग्रेज एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी की गुलाम कांग्रेस Petro dollar + Us Dollar मतलब कातिल मुसलिम आतंकवादियों के नेता साऊदी अरब व धर्मांतरण के ठेकेदार ईसाई आतंकवादियों के नेता अमेरिका के ईसारे पर ही आज कांग्रेस भारत के हित में उठनेवाली हर आबाज को कुचल देने पर आमादा है।

s1

ऐसा नहीं कि कांग्रेस ने 2004 से पहले कोई देशविरोधी-हिन्दूविरोधी कार्य नहीं किया लेकिन कांग्रसे पर इटालियन अंग्रेज एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी के कब्जे के बाद कांग्रेस लगातार हिन्दूविरोधी-देशविरोधी कार्यों को अन्जाम दे रही है।क्योंकि आज कांग्रेस सरकार पूरी तरह से एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी की गुलाम है इसलिए सरकार के हर देशविरोधी-हिन्दूविरोधी कार्य के लिए यही अंग्रेज जिम्मेदार है।

कांग्रेस का हाथ सुरक्षाबलों के बजाए गद्दारों के साथ

2004 में सता में आते ही कांग्रेस की  सरकार ने अर्धसैनिक वलों के जवानों के देश की रक्षा की खातिर शहीद हो जाने पर उनके परिवारों को मिलने वाली आर्थिक सहायता को यह कहकर कम कर दिया कि सरकार के पास पैसे की कमी है लेकिन इसी सरकार ने कशमीरघाटी में भारतीय सेना पर हमला कर सैनिकों को घायल करने व मारने stone pelters in kashmir beating armyवाले भारतविरोधी आतंकवादयों को 5-5 लाख रूपए दकेर सिद्ध कर दिया कि सरकार की नियत देशभक्त सैनिकों का हौसला तोड़कर गद्दारों का हौसला बढ़ाने की है।

कांग्रेस का हाथ बाबर व औरंगजेब जैसे राक्षसों के साथ

मर्यदापुर्षोत्तम भगवान श्रीराम जी द्वारा बनाय गए श्रीलंका और भारत को जोड़ने वाले रामसेतु को ram setuन तोड़ने से जुड़े एक मामले में कांग्रेस की हिन्दूविरोधी-देशविरोधी सरकार ने हल्फनामा देकर मर्यादा पुरषोत्तम भगवान श्री राम जी के अस्तित्व पर प्रश्न खड़े कर एकवार फिर सिद्ध कर दिया कि कांग्रेस के अन्दर हिन्दू-संस्कृति वोले तो भारतीय संस्कृति के प्रति जहर किस हद तक भर चुका है।

यह वही कांग्रेस है जिसके नेता स्वर्गीय राजीब गांधी जी ने 1986 में खुद राममन्दिर में पूजा अर्चना कर अयोध्या में भव्य मन्दिर बनाने के कार्य को आगे बढ़ाया था लेकि आज यही कांग्रेस औरगंजेब व बाबर जैसे राक्षसों को अपना आदर्श मानकर अयोध्या में मर्यादा पुरषोत्तम भगवान श्री राम जी के मन्दिर को मसजिद करार दे रही है।

इसरतजहां मुठभेड़ में कांग्रेस का हाथ एकवार फिर भारतविरोधी आतंकवादियों के साथ

गुजरात में सुरक्षावलों ने लसकरे तैयवा की आतंकवादी इसरत जहां ishrat jahanको मुठभेड़ में मार गिराया। जिसके जनाजे में महाराष्ट्र के हजारों कांग्रेसियों के साथ समाजवादी पार्टी के गद्दार भी सामिल हुए।महाराष्ट्र की कांग्रेस सरकार ने इसरत जहां के परिवार को लाखों रूपए देने के साथ-साथ उसको निर्दोस भी बताया। हद तो तब हो गई जब महारष्ट्र एटीएस की जांच में व केन्द्री खुफिया ऐजैसियों की जांच में ये तथ्य सिद्ध हो गया कि इसरतजहां एक खूंखार आतंकवादी थी फिर भी कांग्रेस ने सुरक्षावलों का साथ देने के बजाए इस आतंकवादी का ही साथ दिया । अंत में एफबीआई(FBI) ने भी बताया कि हैडली जानता है कि इसरतजहां लसकरे तैयवा की आतंकवादी थी।

मतलब यहां भी कांग्रेस का हाथ गद्दार भारतविरोधी आतंकवादियों के साथ।

सोरावुद्दीन मुठभेड़ में कांग्रेस का हाथ एकवार फिर भारतविरोधी  आतंकवादियों के साथ

गुजरात में भारतविरोधी आतंकवादी सोराबुद्दीन shorabudeenसुरक्षावलों के साथ मुठभेड़ में मारा गया।इस आतंकवादी के घर से एक दर्जन एक47 व दर्जनों हथगोले प्राप्त हुए। इस आतंकवादी को मारने के विरोध में कांग्रेस ने सीबीआई का दूरूपयोग करते हुए दर्जनों पुलिस अधिकारियों व जवानों को जेल में डाल दिया जो आज तक जेल में हैं। हद तो तब हो गई जब राज्य के गृहमन्त्री को भी जेल में डाल दिया गया।

मतलब यहां भी कांग्रेस का हाथ गद्दार भारतविरोधी आतंकवादियों के साथ।

कशमीरघाटी में कांग्रेस का हाथ एकवार फिर भारतविरोधी  आतंकवादियों के साथ

कुपवाड़ा में आतंकवादियों से मुठभेड़ के बाद सैनिकों ने भारतविरोधी आतंकवादियों को मार गिराया। कांग्रेस ने आतंकवादियों की मौत से बौखलाकर मेजर को बर्खसात कर पूरी की पूरी बटालियन पर ही केस दर्ज कर आतंकवादियों को कांग्रेस का हाथ गद्दारों के साथ होने का सपष्ट प्रमाण दिया। एसा एकवार नहीं की वार हुआ जब कांगेस  सरकार भारतीय सेना के बजाए आतंकवादियों के साथ कड़ी नजर आई।

मतलब यहां भी कांग्रेस का हाथ गद्दार भारतविरोधी आतंकवादियों के साथ।

कांग्रेस का हाथ भारतविरोधी  आतंकवादी अफजल के साथ

जब माननीय न्यायलय ने लोकतन्त्र के मन्दिर संसद भवन पर हमला करने वाले आतंकवादी मुहम्मद अफजल afzal guruको फांसी की सजा सुनाकर 19 नम्मवर 2006 फांसी की तारीख तय(वेशक हमले का mastermind प्रोफैसर गिलानी कुलदीप नैयर जैसे नकबापोसों की सहायता से बच निकला)  की तो लोकतन्त्र के इस इस मंदिर की रक्षा की खातिर शहीद हुए सैनिकों के परिवारजनों व आहत हुए देशभक्तों के मन में न्याय की उमीद पैदा कर दी तो फिर से भारतविरोधी आतंकवादियों की मददगार सरकार ने इस आतंकवादी की फांसी आज तक मतलब अगस्त 2011 तक रोककर कर एकवार फिर कांग्रेस के भारतविरोधी चरित्र का प्रमाण दे दिया ।

कांग्रेस का प्रखर देशभक्त RSS पर हमला

RSS पर वार-वार हमला कांग्रेस सरकार की इसी देशविरोधी सोच का ही परिणाम है। RSS ने कांग्रेस के हर उस कदम को विरोध किया है जो कांग्रेस ने देशहित के विरूद्ध उठाया। चाहे 1947 में सांप्रदाय के आधार पर भारत के विभाजन की षडयन्त्र हो या फिर 1977 में तानाशाही की बात हो या फिर 1992 में राम मन्दिर को मजजिद बताने की बात हो या पिर 2004 में विदेसी एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी के प्रधानमन्त्री बनने की बात हो या पिर आज कशमीरघाटी को पाकिसतान के हवाले करने का षडयन्त्र हो।

सबसे पहले RSS ने कांग्रेस की देश से गद्दारी के विरोध में आबाज उठाई तो बदले में कांग्रेस ने भारतविरोधी मुसलिम आतंकवादियों द्वारा किए गय हमलों का दोश RSS के सिर मढ़कर RSS को आतंकवादी-सांप्रदायिक करार दे दिया।

कांग्रेस का प्रखर देशभक्त स्वामी रामदेव जी पर हमला

Ram Dev jiजब स्वादेशी और देशभक्ति के प्रेरणास्त्रोत स्वामी रामदेब जी ने सारे संसार में भारतीय संसकृति और आयुर्वैदिक चिकित्सा प्रणाली का झंडा पहराते हुए कांग्रेस की आका एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी व अन्य भ्रष्ट लोगों द्वारा विदेशों में जमा करवाय गए कालेधन व नेताओं द्वारा फैलाए गए भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया तो चोरों और गद्दारों की हमसफर व मददगार कांग्रेस सरकार ने स्वामी रामदेव जी को ही भ्रष्टाचारी , आतंकवादी व RSS का मुखौटा करार देकर उन्हें व उनके बालकृष्ण जी जैसे सहयोगियों को बदनाम करने के लिए सब सरकारी ऐजेंसियों को देशभक्त स्वामी राम देव जी व उनके सहयोगियों के पीछे लगा दिया।

कांग्रेस का प्रखर भ्रष्टाचार विरोधी अन्ना हजारे जी पर हमला

anna hajare jiजब अन्ना हजारे जी ने हजारे जी के साथ चल रहे अग्निवेश जैसे कांग्रेस के पुराने मित्रों के ईसारे पर स्वामी राम देव जी से नाता तोड़कर भ्रष्टाचार के विरूद्ध आबाज उठानी शुरू की तो पहले तो कांग्रेस ने हजारे जी के साथ बातचीत करने की कोशिश की । लेकिन जब कांग्रेस को ऐहसास हो गया कि कांग्रेस का समर्पण कांग्रेस के प्रति न होकर देश के प्रति है तो फिर भारतविरोधी कांग्रेस सरकार ने अन्ना हजारे जी पर भी हमला वोल कर उन्हें भी बलैकमेलर,भर्ष्टाचारी व RSS का मुखौटा करार देकर उनके पीछे भी सब सराकरी ऐजेंसियों को लगा दिया।

कांग्रेस का हाथ मानवताविरोधी  आतंकवादी ओसामा-विन लादेन के साथ

कांग्रेस की असलियत को समझने के लिए इतना ही काफी है कि जो कांग्रेस स्वामी रामदेव जी व अन्ना हजारे जी जैसे प्रखर देशभक्त नागरिकों व RSS जैसे देशभक्त संगठनों को आतंकवादी,सांप्रदायिक,ठग,बलैकमेलर और न जाने क्या-क्या शब्द प्रयोग कर अपमानित करने व सरकारी ऐजेंसियों का प्रयोग कर समाप्त करने की कोशिश कर रही है वही कांग्रेश संसार के सबसे बढ़े राक्षश ओसामाविन लादेन Ladenको ओसामा जी कहकर व इस आतंकवादी को मारने पर सवाल खड़े कर अपनी असलियत सबके सामने रख रही है।

औरंगजेब व बाबर जैसे अत्याचारी राक्षसों को अपना आदर्श मानकर मर्यदापुर्षोत्तम भगवान श्रीराम जी का विरोध करने वाली कांग्रेस व धर्मांतरण के ठेकेदार इसाईयों के बताए मार्ग पर चलकर भारतीय संसकृति का विरोध करने वाली कांग्रेस से भारत का हित चाहने की उम्मीद करना सरासर वेवकूफी है।

हिन्दूविरोधी-देशविरोधी कांग्रेस का भारतीय संविधान पर हमला

भारतीय संविधान सांप्रदाय के नाम पर आरक्षण की इजाजत नहीं देता। लेकिन कांग्रेस लगातार सांप्रदायिक आधार पर आरक्षण की न केवल बात कर रही है पर कई राज्यों में तो कांग्रेस ने संविधान का खून करते हुए सांप्रदायिक आधार पर आरक्षण लागू कर अपने भारतविरोधी स्वारूप को और सपष्ट कर दिया है।

2014 के चुनाबों से पहले हिन्दूओं और मुसलमानों को लड़ाने के लिए सांप्रदाय के आधार पर आरक्षण को आगे बढ़ाने की वका3लत करने वाली रंगनाथ मिश्रा रिपोर्ट इन्तजार कर रही है साथ ही Prevention of Communal and Targeted Violence Bill- 2011

एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी की गुलाम कांग्रेस इस हिन्दूविरोधी अंग्रेज के इसारे पर Prevention of Communal and Targeted Violence Bill- 2011 के नाम से एक ऐसा कानून बनाने जा रही है जो न केवल मुसमानों और ईसायों को हिन्दूओं के कतलयाम की खुली छूट देता है पर साथ ही भारतीय संविधान की समानता की मूल भावना का भी खून करता है ।

ये भारतविरोधी इटालियन अंग्रेज का भारतीय संविधान पर ताजा हमला है।

भारतविरोधी कांग्रेस का माननीय सर्वोच्च न्यायालय पर हमला

जब माननीय सर्वोच्च न्यायालय supreme courtने कांग्रेस को गद्दारी व चोरबजारी से रोकने की कोशिश की तो कांग्रेस ने माननीय न्यायालय पर ही हमला वोलते हुए माननीय न्यायालय को ही अपनी सीमा मे रहने मतलब कांग्रेस को चोर-बजारी व देश से गद्दारी करने से रोकने की कोशिश न करने की धमकी दे डाली।

ऐसा पहली बार नहीं है इससे पहले भी जब-जब माननीय न्यायलय ने कांग्रेस को संविधान का खून कर देश से गद्दारी करने से रोकने की कोशिश की है तब-तब भारतविरोधी कांग्रेस ने माननीय न्यायालय पर हमला वोलकर मानानीय न्यायधीसों को धमकाने की कोशिस की है।

भारतविरोधी कांग्रेस का संवैधानिक संस्था CAG हमला

जब CAG CAG4ने कांग्रेस द्वारा इटालियन अंग्रेज एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी के नेतृत्व में देश को लूटने का कच्चा-चिट्ठा खोला तो कांग्रेस ने संबैधानिक संस्था CAG पर ही हमला वोल दिया।

एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी द्वारा विदेश यात्राओं पर देश का धन लुटाने पर आपति करने वाले अधिकारियों का कांग्रेस सरकार ने तबादला कर अपने भारत विरोधी चरित्र का एकवार फिर परिचय दे दिया।

भारतविरोधी कांग्रेस का Electronic Media पर हमला

जब अक्सर देशविरोधियों-हिन्दूविरोधियों की आबाज उठाने वाले Electronic Media ने चोरों और गद्दारों की कांग्रेस सरकार की चोरबजारी से तंग आकर चोरों और गद्दारों के विरूद्ध आबाज उठाकर जनता को जागरूक करना शुरू किया तो सरकार ने पहले तो हजारों करोड़ रूपए के विज्ञापन जारी कर खरीदने की कोशिश की जिसमें 100% सफलता न मिलने के बाद कांग्रेस ने मिडीया को भी धमकाना शुरू कर दिया।

अगर अब भी आप सोचते हैं कि चोरों और गद्दारों की कांग्रेस सरकार देशहित में आबाज उठाने वालों को न बदनाम करेगी , न उनपर हमला करेगी वल्कि देशभक्तों व क्रांतिकारियों  के साथ सम्मानपूर्वक पेश आएगी तब तो आप …

क्या बुर्का आतंकवादियों द्वारा सुरक्षाबलों को धोखा देने के लिए सुरक्षाक्वच के रूप में उपयोग किया जा रहा है?



आज संसार के अधिकतर देशों में मुसलिम आतंकवादियों के बढ़ते हमलों के परिणामस्वारूप आतंकवादियों द्वारा बुर्के को सुरक्षाक्वच के रूप में प्रयोग किए जाने के खतरे को ध्यान में रखते हुए एक के वाद एक देश बुर्का प्रथा पर प्रतिबन्ध लगा रहा है या फिर प्रतिबन्ध लगाने का मन बना रहा है।


भारत में भी मुसलिम व माओवादी आतंकवादियों के षडयन्त्र अपने चर्म पर हैं।


हाल ही में लालगढ़ में माओवादी आतंकवादियों की रैली में पहुंची ममता बैनर्जी की सभा से भी एक ऐसे ही अपराधी को कब्जे में लिया गया जो खुद को बुर्के में छुपाकर अपनी गतिविधी को सुरक्षाबलों की नजरों से बुर्के के सहारे छुपा रहा था।


आज ही एक समाचार सामने आया जिसमें सौतेले माता-पिता ने बच्चे पर अमानबीय अतयाचार करने के बाद जब बच्चा मरने वाला था तो उसके इलाज के लिए उसे बुर्के में छुपाकर डाकटर के पास ले गए। ये राक्षस नहीं चाहते थे कि इस बच्चे की मौत से वो एक बन्धुआ मजदूर खो दें। ये मामला तब उजागर हुआ जब बच्चे को किसी काम का न देखकर इन दुष्टों ने दादी के पास वापिस भेजा अन्यथा ये लोग अपने पाप को बुर्के के सहारे छुपाने में सफल रहे थे।


काबुल में भारतीयों पर हमला करने वाले मुस्लिम आतंकवादी भी अपने विस्फोटक बुर्के में छुरपाकर ही लाए थे। जिसमें भारतीयों को जानमाल का भारी नुकसान उठाना पड़ा।


अभी कुछ दिन पहले जब हम तनौजा जेल में थे तो हमने देखा कि एक महिला बाहर से तो बुर्का पहन कर आयी पर अन्दर आते ही उसने बुर्का हटा दिया विना किसी के आदेश के हमारे सामने। मतलब यह महिला किसी मकसद से बुर्के का उपयोग कर रही थी न कि किसी आस्था को पूरा करने के लिए।


बैसे भी किसी भी सभ्य समाज में जरूरत से जयादा नकाब घर में तो ठीक है वेशक वहां भी जायज नहीं ठहराया जा सकता लेकिन सार्वजनिक स्थानों पर यह नकाब वाकी लोगों के अन्दर दहसत व असुरक्षा का महौल पैदा करता है।


अब जबकि आतकंकवादी बुर्के को खुद को सुरक्षाबलों को धोखा देने के लिए उपयोग कर रहे हैं तो इन हालात में सभी सही दिशा में सोचने वाले लोगों को सरकार पर दबाब बनाकर भारत को इस कलंक से निजात दिलवाने की कोशिस कनी चाहिए ताकि आम जनता की रक्षा को सुनिश्चित किया जा सके।


बैसे भी आज जब हम आधुनिकता के युग में जी रहे हैं व खुलेपन की बात कर रहे हैं तो हमें हैरानी होती है ये देखकर कि खुलेपन के ठेकेदार धर्मनिर्पेक्षतावादियों को बुर्के के पीछे दफन कर रखी गई होनहार मुसलिम लड़कियों की घुटन कभी महसूस नहीं होती अगर होती भी है तो मुसलिम आतेंकवादियों के डर से डंके की चोट पर उनकी बोलती बन्द रहती है।






ये कैसी आधुनिकता ?

 ये कैसी आधुनिकता ?

आज हम भारत में अपने चारों ओर जब नजर दौड़ाते हैं, तो एक संघर्ष हर तरफ नजर आता है। यह संघर्ष है राष्ट्रवादी बनाम सेकुलरवादी सोच का । इस संघर्ष के बारे में अपना पक्ष स्पष्ट करने से पहले हमें मानव और पशु के बीच का अन्तर अच्छी तरह से समझना होगा

       हमारे विचार में मानव और पशु के बीच सबसे बड़ा अन्तर यह है कि मानव समाज में रहता है और सामाजिक नियमों का पालन करता है जबकि पशु के लिए सामाजिक नियम कोई माइने नहीं रखते ।

     क्योंकि मानव समाज में रहता है इसलिए सामाजिक नियमों का पालन करते हुए जीवन यापन करना मानव की सबसे बड़ी विशेषता है ।

     प्रश्न पैदा होता है कि सामाजिक नियम क्या हैं ? ये नियम कौन बनाता है ? क्यों बनाता है?

सामाजिक नियम वह कानून हैं जो समाज अपने नागरिकों के सफल जीवनयापन के लिए स्वयं तय करता है। ये कानून मानव के लिए वे मूल्य निर्धारित करते हैं जो मानव को व्यवस्थित व मर्यादित जीवन जीने का स्वाभाविक वातावरण उपलब्ध करवाते हैं । ये सामाजिक नियम मनुष्य को शोषण से बचाते हुए सभ्य जीवन जीने का अवसर प्रदान करते हैं। कोई भी समाज तब तक प्रगति नहीं कर सकता जब तक वह व्यवस्थित न हो । वेशक इन सामाजिक नियमों का पालन करने के लिए मनुष्य को व्यक्तिगत आज़ादी त्याग कर समाज द्वारा निर्धारित अचार संहिता का पालन करना पड़ता है । कई बार तो यह अचार संहिता मानव के जीवन को इस हद तक प्रभावित करती है कि मानव इससे पलायन करने की कुचेष्ठा कर बैठता है । अगर ये कुचेष्ठा बड़े स्तर पर हो तो यह एक नई सामाजिक व्यवस्था को जन्म दे सकती है लेकिन इस नई व्यवस्था में भी नये सामाजिक नियम मानव जीवन को नियन्त्रित करते हैं । यहां बेशक पहले की तुलना में कम बन्धन होते हैं लेकिन इन बन्धनों के विना समाज नहीं बन सकता। क्योंकि बिना सामाजिक नियमों के चलने वाला समूह भीड़ तो बना सकता है पर समाज नहीं। समाज ही तो मानव को पशुओं से अलग करता है। कुल मिलाकर हम कह सकते हैं कि सामाजिक नियम मानव जीवन का वो गहना है जिसका त्याग करने पर मानव जीवन के अस्तित्व की कल्पना भी नहीं की जा सकती ।

     अगर हम मानव इतिहास पर नजर दौड़ायें तो संसार में प्रमुख रूप से तीन समाजों का प्रभुत्व नजर आता है परन्तु ये तीनों समाज एक ही समाज से निकले हुए प्रतीत होते हैं। हिन्दु समाज संसार का प्राचीनतम व सभ्यतम् समाज है । इसाई समाज दूसरे व मुस्लिम समाज तीसरे नम्बर पर नजर आता है।

     आज से लगभग 2000 वर्ष पहले न ईसाईयत थी न इस्लाम था सिर्फ हिन्दुत्व था । साधारण हिन्दु राजा विक्रमादित्य व अशोक महान लगभग 2050 वर्ष पहले हुए जबकि ईसाईयों के धार्मिक गुरू ईशु भी उस वक्त पैदा नहीं हुए थे । उस वक्त ईस्लाम के होने का तो प्रश्न ही पैदा नहीं होता क्योंकि इस्लाम तो आज से लगभग 1500 वर्ष पहले अस्तित्व में आया । भगवान श्रीकृष्ण जी का अबतार आज से लगभग 5000 वर्ष पहले हुआ । भगवान श्री राम, ब्रहमा-विष्णु-महेश जी के अबतार के समय के बारे में पता लगाना वर्तमान मानव के बश की बात ही नहीं है।

     श्रृष्टि के निर्माण से लेकर आज तक एक विचार जो निरंतर चलता आ रहा है उसी का नाम सनातन है। यही सनातन मानव जीवन को सुखद व द्वेशमुक्त करता रहता है। यही वो सनातन है जिसके अपने आंचल से निकली ईसाईयत व इसलाम ने ही सनातन को समाप्त करने के लिए अनगिनत प्रयास किए लेकिन इनका कोई प्रयास सनातन की सात्विक व परोपकारी प्रवृत्ति के परिणामस्वरूप  सफल न हो पाया। हजारों बर्षों के बर्बर हमलों व षडयन्त्रों के बाबजूद आज भी ऐसा प्रतीत होता है कि सनातन से निकले ईसाईयत व ईसलाम वापस सनातन में समाने को आतुर हैं ।

     सनातन का ही सुसंगठित स्वरूप हिन्दुत्व है हिन्दुत्व ही आज भारत में सब लोगों को शांति और भाईचारे से जीने का रास्ता दिखा रहा है। ईसाईयत और ईसलाम की सम्राज्यबादी हमलाबर सोच के परिणामस्वरूप हिन्दुत्व का भी सैनिकीकरण करने की जरूरत महसूस की जाने लगी है और कुछ हद तक हिन्दुत्व का सैनिकीकरण हो भी चुका है। साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर व लेफ्टीनेंट कर्नल जैसे क्रांतिकारी इसी सैनिकीकरण की उपज हैं।

अगर ईसाईयत और ईस्लाम का भरतीय संस्कृति और सभ्यता पर हमला इसी तरह जारी रहा तो हो सकता है हिन्दुत्व को कुछ समय के लिए अपनी सर्वधर्मसम्भाव की प्रवृति से उस समय तक समझौता करना पड़े जब तक इन हमलाबारों का ऋषियों मुनियों की पुण्यभूमि भारत से समूल नाश न कर दिया जाए। बेशक उदारता व शांति ही हिन्दुत्व के आधारस्तम्भ हैं लेकिन जब हिन्दुत्व ही न बचेगा तो ये सब चीजें बेमानी हो जायेंगी। अतः सर्वधर्मसम्भाव, उदारता व शांति को बनाए रखने के लिए हिन्दुत्व का बचाब अत्यन्त आवश्यक है।

अपने इस उदेश्य की पूर्ति के लिए अगर कुछ समय तक हिन्दुत्व के इन आधार स्तम्भों से समझौता कर इन आक्रमणकारियों के हमलों का इन्हीं की भाषा में उतर देकर मानवता की रक्षा की खातिर हिन्दुत्व के सैनिकीकरण को बढ़ाबा देकर भारतीय सभ्यता और संस्कृति की रक्षा की जा सके तो इस में बुराई भी क्या है ?

जो हिन्दु हिन्दुत्व के सैनिकीकरण की अबधारणा से सहमत नहीं हैं उन्हें जरा भारत के मानचित्र को सामने रखकर यह विचार करना चाहिए कि जिन हिस्सों में हिन्दुओं की जनसंख्या कम होती जा रही है वो हिस्से आतंकवाद,हिंसा और दंगों के शिकार क्यों हैं ? जहां हिन्दुओं की जनसंख्या निर्णायक स्थिति में है वहां कयों दंगा नहीं होता ? कयों हिंसा नहीं होती ?  कयों सर्वधर्मसम्भाव वना रहता है ?क्यों मुसलमान परिवार नियोजन, वन्देमातरम् का विरोध करते हैं ? क्यों ईसाई हर तरह के विघटनकारी मार्ग अपनाकर धर्मांतरण पर जोर देते हैं ?

ये सब ऐसे प्रश्न हैं जिनका सरल और सपष्ट उतर यह है कि ईसायत और ईस्लाम राजनीतिक विचारधारायें हैं न कि धार्मिक । इन दोनों विचारधाराओं का एकमात्र मकसद अपनी राजनीतिक सोच का प्रचार-प्रसार है न कि मानवता की भलाई। अपनी विचारधारा के प्रचार प्रसार के लिए ये दोनों किसी भी हद तक गिर सकते है ।इस्लाम का प्रमुख हथियार है हिंसा और ईसाईयत का प्रमुख हथियार है छल कपट और हिंसा। दूसरी तरफ हिन्दुत्व एक जीबन पद्धति है जिसका प्रमुख हथियार है सरवधर्मसम्भाव। हिन्दुत्व का एकमात्र उदेश्य मानवजीबन को लोभ-लालच, राग-द्वेश, बाजारबाद से दूर रख कर आत्मबल के सहारे शुख-शांति, भाईचारे के मार्ग पर आगे बढ़ाना है।

इतिहास इस बात का साक्षी है कि हिन्दुत्व के प्रचार-प्रसार के लिए कभी किसी पर हमला नहीं किया गया पर ये भी उतना ही सत्य है कि जिसने भी मानव मूल्यों को खतरे मे डाला है उसको कभी बख्शा भी नहीं गया है चाहे बो किसी भी संप्रदाय से सबन्ध रखता हो।

आज भारत में ईसाई व मुसलिम आतंकवादियों की समर्थक सेकुलर सोच ने भारत के समक्ष एक नई चुनौती पैदा की है। ब्यापारबाद से प्रभावित इस सेकुलर सोच का एकमात्र उदेश्य मानव मुल्यों को नष्ट कर एक ऐसा समाज निर्मित करना है जो अचार व्यबहार में पशुतुल्य हो।

आओ जरा इस सेकुलर सोच के विचार का विशलेशण करें कि ये सेकुलरवादी जिस व्यवस्था की बकालत कर रहे हैं वो मानव जीवन को खतरे में डालती है या फिर मानव मुल्यों को बढ़ाबा देती है।

सेकुलर सोच को मानने बाले अपने आप को माडर्न कहते हैं।अपने माडर्न होने की सबसे बड़ी पहचान बताते हैं कम से कम कपड़े पहनना।इन्हें कपड़े न डालने में भी कोई बुराई नहीं दिखती। कुल मिलाकर ये कहते हैं कि जो जितने कम कपड़े पहनता है बो उतना अधिक माडर्न है। अब जरा बिचार करो कि क्या हमारे पशु कपड़े पहनते हैं ?  नहीं न । हम कह सकते हैं कि अगर कपड़े न पहनना आधुनिकता है फिर तो हमारे पशु सबसे अधिक माडर्न है ! कुल मिलाकर ये सेकुलरताबादी मानव को पशु बनाने पर उतारू हैं क्योंकि समाज में कपड़े पहन कर विचरण करना मानव की पहचान है और नंगे रहना पशु की। ये सेकुलरतावादी जिस तरह नंगेपन को बढ़ाबा दे रहे हैं उससे से तो यही प्रतीत होता है कि इन्हें पशुतुल्य जीबन जीने में ज्यादा रूची है बजाय मानव जीबन जीने के ।

रह-रहकर एक विषय जो इन सेकुलरतावादियों ने बार-बार उठाया है वो है एक ही गोत्र या एक ही गांव में शादी की नई परंम्परा स्थापित करना। जो भी भारत से परिचित है वो ये अच्छी तरह जानता है कि भारत गांव में बसता है। गांव में बसने बाले भारत के अपने रिति-रिबाज है अपनी परम्परांयें हैं अधिकतर परम्परांयें वैज्ञानिक व तर्कसंगत है । इन्ही परम्परांओं में से एक परंम्परा है एक ही गांव या गोत्र में शादी न करने की। आज विज्ञान भी इस निषकर्श पर पहुंचा है कि मानव अपनी नजदीकी रिस्तेदारी में शादी न करे तो बच्चे स्वस्थ और बुद्धिमान पैदा होंगे । हमारे ऋषियों-मुनियों या यूं कह लो पूर्बजों ने भी सात पीड़ियों तक एक गोत्र में शादी न करने का नियम बनाया जो कि मानव जीबन के हित में है व तर्कसंगत है।अगर गांव बाले इस नियम को मानने पर जोर देते हैं तो इन सेकुलरताबादियों के पेट में दर्द कयों पड़ता है ? वैसे भी ये होते कौन हैं समाज द्वारा अपने सदस्यों की भलाई के लिए बनाय गए नियमों का विरोध करने बाले। वैसे भी लोकतन्त्र का तकाजा यही है कि जिसके साथ बहुमत है वही सत्य है।

इन सेकुलरतावादियों की जानकारी के लिए हम बता दें कि अधिकतर गांव में, गांव का हर लड़का गांव की हर लड़की को बहन की तरह मानता है। मां-बहन, बाप-बेटी के रिस्तों की बजह से ही गांव की कोई भी लड़की या महिला अपने आप को असुरक्षित महसूस नहीं करती है।आजादी से जीबन जीने में समर्थ होती है कहीं भी आ-जा सकती है खेल सकती है। हो सकता है ये भाई बहन की बात सेकुलरता बादियों को समझ न आये। बैसे भी अगर आप पशुओं के किसी गांव में चले जांयें ओर उन्हें ये बात समझायें तो उनको भी ये बात समझ नहीं आयेगी। क्योंकि ये भाई-बहन का रिस्ता सिर्फ मानव जीबन का अमुल्य गहना है न कि पशुओं के जीबन का ।

अभी हाल ही में पब संस्कृति की बात चली तो भी इस सेकुलर गिरोह ने ब्यभिचार और नशेबाजी के अड्डे बन चुके पबों का विरोध करने बालों का असंसदीय भाषा में विरोध किया। हम ये जानना चाहते हैं कि पबों में ऐसा क्या है जो उनका समर्थन किया जाये। कौन माता-पिता चांहेंगे कि उनके बच्चे नशा करें व शादी से पहले गैरों के साथ एसी जगहों पर जांयें जो कि ब्याभिचार के लिए बदनाम हो चुकी हैं।बैसे भी यह बात किसी से छुपी हुई नहीं है कि भारत में इस पब संस्कृति के पांब पसार लेने के बाद भारत का हाल भी उस अमेरिका की तरह होगा जहां लगभग हर स्कूल के बाहर प्रसूती गृह की जरूरत पड़ती है। कौन नहीं जानता कि बच्चा गिराने की प्रक्रिया में सबसे ज्यादा नुकशान लड़की को ही उठाना पड़ता है। फिर पब संस्कृति के विरोधियों को महिलाविरोधी प्रचारित करना कहां तक ठीक है । लेकिन इन सेकुलरतावादियों की पशुतुल्य सोच इस बात को अच्छी तरह समझती है कि भारतीय संस्कृति को नष्ट किए बिना इनकी दुकान लम्बे समय तक नहीं चल सकती। आज ये तो एक प्रचलन सा बनता जा रहा है कि नबालिग व निर्धन लड़कीयों को बहला फुसलाकर प्यार का झांसा देकर अपनी बासना की पूर्ती करने के बाद सारी जिंदगी दर-दर की ठोकरें खाने के लिए अकेला छोड़ दिया जाता है। कुल मिलाकर इस पब संस्कृति में अगर किसी का सबसे अधिक नुकशान है तो लड़कियों का । अतः महिलाओं की भलाई के लिए  पब संस्कृति को जड़-मूल से समाप्त किया जाना अतयन्त आवश्यक है।इस संस्कृति का समर्थन सिर्फ वो लोग कर सकते हैं जो या तो ब्याभिचारी हैं या फिर नशेबाज। कौन नहीं जानता कि ये सेकुलरताबादी घर में अपनी पत्नी को प्रताड़ित करते हैं व पबों में जाकर गरीब लड़कीयों के शोषण की भूमिका त्यार करते हैं। कुल मिलाकर ये पब संस्कृति महिलाओं को कई तरह से नुकशान पहुंचाती है।

इसी सेकुलर सोच का गुलाम हर ब्यक्ति चाहता है कि उसकी महिला मित्र हो, जो हर जगह उसके साथ घूमे व विना शादी के उसकी बासना की पूर्ति करती रहे ।जरा इन सेकुलरताबादियों से पूछो कि क्या वो अपनी मां-बहन-बेटी-बहू या पत्नी को पुरूष मित्र के साथ वो सब करने की छूट देगें जो ये अपनी महिला मित्र के साथ करना चाहते हैं। सेकुलरता बादियों के बारे में तो बो ही बता सकते हैं पर अधिकतर भारतीय ऐसा करना तो दूर सोचना भी पाप मानते हैं। फिर महिला मित्र आयेगी कहां से क्योंकि कोई भी लड़की या महिला किसी न किसी की तो मां-बहन-बेटी-बहू या पत्नी होगी। कुल मिलाकर इस सोच का समर्थन सिर्फ पशुतुल्य जीबन के शौकीन ही कर सकते हैं मानवजीबन में विश्वास करने बाले भारतीय नहीं।

इन तथाकथकथित सेकुलरों को ये समझना चाहिए कि निजी जीबन में कौन क्या पहन रहा है इससे हमारा कोई बास्ता नहीं लेकिन जब समाज की बात आती है तो हर किसी को सामाजिक मर्यादायों का पालन करना चाहिए।जो सामाजिक मर्यादाओं का पालन नहीं कर सकते उन्हें उन देशों में चले जाना चाहिए जहां मानव मूल्यों की जगह पशु मूल्यों ने ले ली है।क्योंकि जिस तरह ये सेकुलर गिरोह लगातार मानव मूल्यों का विरोध कर पशु संस्कृति का निर्माण करने पर जोर दे रहा है वो आगे चल कर मानव जीवन को ही खतरे में डाल सकती है।

मानव जीवन की सबसे बड़ी खासियत है आने बाली पीड़ी को सभ्य संस्कार व अचार व्यवहार का पालन करने के लिए प्रेरित करना। बच्चों के लिए एक ऐसा बाताबरण देना जिसमें उनका चहुंमुखी विकास समभव हो सके। इस चहुंमुखी विकास का सबसे बड़ा अधार उपलब्ध करबाते हैं बच्चों के माता-पिता ।

 ये सेकुलरतावादी जिस तरह से माता-पिता के अधिकारों पर बार-बार सवाल उठाकर बच्चों को माता-पिता पर विश्वास न करने के लिए उकसा रहे हैं । माता-पिता को बच्चों के शत्रु के रूप में प्रस्तुत करने का षडयन्त्र रच रहें। माता-पिता की छवी को लगातार खराब करने का दुस्साहस कर रहे हैं। इनका ये षडयन्त्र पूरे मानव जीबन को खतरे में डाल देगा।क्योंकि अगर बच्चों का माता-पिता के उपर ही भरोसा न रहेगा तो फिर बो किसी पर भी भरोसा नहीं करेंगे। परिणामस्वरूप बच्चे किसी की बात नहीं मानेंगे और अपना बंटाधार कर लेंगे।

भारतीय समाज में जिस विषय पर इन सेकुलरताबादियों ने सबसे बड़ा बखेड़ा खड़ा किया है वो है वासनापूर्ति करने के तरीकों पर भारतीय समाज द्वारा बनाय गए मर्यादित नियम।इस विषय पर आगे बढ़ने से पहले प्रेम और ब्याभिचार में अन्तर करना परमावस्यक है।

प्यार मानव के लिए भगवान द्वारा दिया गया सबसे बड़ा बरदान है ।प्यार के विना किसी भी रिस्ते की कल्पना करना अस्मभव है। अगर हम ये कहें कि प्यार के विना मानव जीबन की कल्पना भी नहीं की जा सकती तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। प्यार ही वो सूत्र है जिसने सदियों से भारतीय समाज को मुस्लिमों और ईसाईयों के हिंसक हमलों के बाबजूद शांति के मार्ग से भटकने नहीं दिया है। ये प्यार और आस्था ही है जो आज भी हिन्दु समाज को भौतिकबाद व बजारू सोच से बचाकर सुखमय और प्रेममय जीबन जीने को प्रेरित कर रही है। भारतीय जीबन पद्धति में माता-पिता-पुत्र-पुत्री जैसे सब रिस्तों का अधार ही प्यार है।

सेकुलर सोच ने सैक्स को प्यार का नाम देकर प्यार के महत्व को जो ठेश पहुंचाई है उसे शब्दों में ब्यक्त करना अस्मभव नहीं तो कम से कम मुस्किल जरूर है।सैक्स विल्कुल ब्यक्तिगत विषय है लेकिन सेकुरतावादियों ने सैक्स का ही बजारीकरण कर दिया ।सैक्स को भारत में सैक्स के नाम से बेचना मुश्किल था इसलिए इन दुष्टों ने सैक्स को प्यार का नाम देकर बेचने का षडयन्त्र रचा ।परिणामस्वरूप ये सैक्स बेचने में तो कामयाब हो गए लेकिन इनके कुकर्मों ने अलौकिकता के प्रतीक प्रेम को बदनाम कर दिया।

अगर आप ध्यान से इन सेकुसरतावादियों के क्रियाकलाप को देखें तो ऐसा प्रतीत होता है कि ये दुष्ट मनुष्य को विलकुल बैसे ही खुलमखुला सैक्स करते देखना चाहते हैं जैसे पशुओं को करते देखा जा सकता है मतलब कुलमिलाकर ये मनब को पशु बनाकर ही दम लेंगे। लेकिन हम दाबे के साथ कह सकते हैं कि भारतीय समाज ऐसी पशुप्रवृति की पैरवी करने बाले दुष्टों को न कभी स्वीकार करेगा न इनके षडयन्त्रों को सफल होने देगा।

ये सेकुलतावादी कहते हैं कि सैक्स करेंगे, लेकिन जिसके साथ सैक्स करेंगे जरूरी नहीं उसी से सादी भी की जाए।बस यही है समस्या की जड़ ।ये अपनी बासना की पूर्ति को प्यार का नाम देते हैं और जिससे ये प्यार करते हैं उसके साथ जीवन जीने से मना कर देते हैं। कौन नहीं जानता कि मानव जिससे प्यार करता है उसके साथ वो हरपल रहना चाहता है और जिसके साथ वो हर पल रहना चाहता है उसके साथ जीवन भर रहने में आपति क्यों ? अब आप खुद सोचो कि जो लोग प्यार करने का दावा कर रहे हैं क्या वो वाक्य ही प्यार कर रहे हैं या अपनी बासना की पूर्ति करने के लिए प्यार के नाम का सहारा ले रहे हैं !

अब आप सोचेंगे कि वो प्यार कर रहे हैं या सैक्स, हमें क्या समस्या है, हमें कोई समस्या नहीं। लेकिन समस्या तब हो रही है जब समाचार चैनलों पर समाचारों की जगह ब्यभिचार परोसा जा रहा है।  कला और संस्कृति के प्रचार-प्रसार के नाम पर चल रही फिल्मी दुनिया में भी जमकर पशुप्रवृति को परोसा जा रहा है। सामाजिक नियमों का पालन करने बालों के लिए अभद्र भाषा का प्रयोग किया जा रहा है । पशु-तुल्य कर्म करने बालों और ऐसे कर्म का समर्थन करने बालों को आदर्श के रूप में पेश करने की कोशिश की जा रही है।

एक साधारण सी बात यह है कि बच्चे का जन्म होने के बाद के 25 वर्ष तक बच्चे का शारीरिक व बौद्धिक विकाश होता है ये भारतीय जीवन दर्शन का आधारभूत पहलू रहा है अब तो विज्ञान ने भी इस बात को स्वीकार कर लिया है कि मानव के शारीरिक विकाश को 22 वर्ष लगते हैं ।जिन अंगो का विकाश 22 वर्ष की आयु में पूरा होता है उन्हें ताकतबर होने के लिए अगर अगले तीन वर्ष का समय और दे दिया जाए तो इसमें कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। कुलमिलाकर भारतीय दर्शनशास्त्र व विज्ञान दोनों ही ये स्वीकार करते हैं कि 25 वर्ष की आयु तक मानव शरीर का विकाश पूरा होता है।मानव जीवन के पहले 25 वर्ष मानव को शारीरिक विकाश व ज्ञानार्जन के साथ-साथ अपनी सारी जिन्दगी सुखचैन से जीने के लिए दो वक्त की रोटी का प्रबन्ध करना होता है।

अब ये सेकुलर गिरोह क्या चाह रहा है कि बच्चा पढ़ाई-लिखाई शारीरिक विकाश व दो वक्त की रोटी का प्रबन्ध करने के प्रयत्न छोड़ कर इनके बताए रास्ते पर चलते हुए सिर्फ सैक्स पर अपना सारा ध्यान केन्द्रित करे। अब इस मूर्खों के सेकुलर गिरोह को कौन समझाए कि अगर बच्चा 25 वर्ष तक सैक्स न भी करे तो भी अगले 25 वर्ष सैक्स करने के लिए काफी हैं लेकिन अगर इन 25 वर्षो में यदि वो पढ़ाई-लिखाई,प्रशिक्षण न करे तो अगले 25 बर्षों में ये सब सम्भव नहीं। कुल मिलाकर हम कह सकते हैं कि बच्चे को चाहिए कि वो शुरू के 25 वर्षों में सैक्स वगैरह के सब टांटे छोड़कर सिर्फ अपने कैरियर पर ध्यान केन्द्रित करे ताकि आने वाली जिन्दगी के 25 वर्षों में वो आन्नद से जी सके।रही बात इन सेकुलरतावादियों की तो ये सेकुलरतावादी पिछले जमाने के राक्षसों का आधुनिक नाम है इनसे सचेत रहना अतिआवश्यक है क्योंकि मानव को सदमार्ग से भटकाना ही इन राक्षसों का मूल उद्देश्य था है और रहेगा।

एक तरफ ये सेकुलरतावादी मानव को खुले सैक्स के सिए उकसा रहे हैं दूसरी तरफ लोगों द्वारा अपनी बहुमूल्य कमाई से टैक्स में दिए गय धन में से ऐडस रोकने के नाम पर अरबों रूपय खर्च कर रहे हैं ।अब इनको कौन समझाये कि लोगों को भारतीय जीवन मूल्य अपनाने के लिए प्रेरित करने व भारतीय जीवन मूल्यों का प्रचार-प्रसार ही सैक्स सबन्धी संक्रामक रोगों का सुक्ष्म, सरल व विश्वसनीय उपाय है। वैसे भी ऐडस जैसी वीमारी का विकास ही इन सेकुलरतावादियों द्वारा जानवरों से सैक्स करने के परिणामस्वरूप हुआ है।अरे मूर्खो मानवता को इतना भयानक रोग देने के बाद भी तुम लोग पागलों की तरह खुले सैक्स की बात कर रहे हो।

अभी ऐडस का कोई विश्वसनीय उपाय मानव ढूंढ नहीं पाया है और इन सेकुलरतावादियों ने ऐडस के खुले प्रसार के लिए होमोसैक्स की बात करना शुरू कर दिया है। हम मानते हैं कि होमोसैक्स मानसिक रोग है और ऐसे रोगियों को दवाई व मनोविज्ञानिक उचार की अत्यन्त आवश्यकता है ये कहते हैं कि होमोसैक्स सेकुलरता वादियों की जरूरत है व मनोविज्ञानिक वीमारी नहीं है।इनका कहना है कि होमोसैकस भी सैक्स की तरह ही प्राकृतिक है।हम इनको बताना चाहते हैं कि सैक्स का मूल उद्देश्य प्रजनन है जिसका एकमात्र रास्ता है पति-पत्नी के बीच सैक्स सबन्ध । अगर होमोसैक्स प्राकृतिक है तो ये सेकुलरताबादी होमोसैक्स से बच्चा पैदा करके दिखा दें हम भी मान लेंगे कि जो ये मूर्ख कह रहे हैं वो सत्य है।परन्तु सच्चाई यही है कि होमोसैक्स मनोवैज्ञानिक विमारी है इसके रोगियों को उपचार उपलब्ध करवाकर प्राकृतिक जीवन जीने के लिए प्रेरित करना ही हमारा कर्तब्य है न कि होमोसैक्स का समर्थन कर उसे बढ़ाबा देना।

बास्तब में सेकुलरताबादी गिरोह हर वक्त अपना सारा ध्यान मानवमूल्यों को तोड़ने पर इसलिए भी केन्द्रित करते हैं क्योंकि ये मनोरोगों के शिकार हो चुके हैं ।जब इनका सामना आम सभ्य इनसान से होता है तो इनके अन्दर हीन भावना पैदा होती है। इस हीन भाबना से मुक्ति पाने के लिए ये सारे समाज को ही कटघरे में खड़ा करने का असम्भव प्रयास करते हैं। अपनी मनोवैज्ञानिक विमारियों का प्रचार-प्रसार कर अपने जैसे मानसिक रोगियों की संख्याबढ़ाकर अपने नये शिकार तयार करते हैं कुलमिलाकर हम कहसकते हैं कि सेकुलरताबादी वो दुष्ट हैं जिनका शरीर देखने में तो मानव जैसा दिखता है पर इनका दिमाग राक्षसों की तरह काम करता है ।क्योंकि वेसमझ से वेसमझ व्यक्ति भी इस बात को अच्छी तरह जानता है कि कहीं अज्ञानबश या धोखे से भी हम किसी बुरी आदत का शिकार हो जांयें तो हमें इस वुरी आदत को अपने आप समाप्त करने का प्रयत्न करना चाहिए ।अगर हम इस बुरी आदत को समाप्त न भी कर पांयें ते हमें कम से कम इसका प्रचार-प्रसार नहीं करना चाहिए।

भारत गांवों में बसता है यहां हर जगह पुलिस उपलब्ध करबाना किसी के बस की बात नहीं।अभी तो इन सेकुलरताबादियों का असर कुछ गिने-चुने सहरी क्षेत्रों में ही हुआ है जहां से हर रोज बालात्कार ,छेड़-छाड़,आत्महत्या व सैक्स के लिए घरबार,मां-बाप,पति-पत्नी सब छोड़कर भागने के समाचार आम बात हो गई है। ये सेकुलर सोच अभी कुछ क्षेत्रों तक सीमित होने के बाबजूद न जाने कितने घर उजाड़ चुकी है कितने कत्ल करवा चुकी है कितने ही बच्चों को तवाह और बर्वाद कर चुकी है लाखों बच्चे इस सेकुलर सोच का शिकार होकर नशे के आदी होकर अपने निजी जीवन व परिवार की खुशियों को आग लगा चुके हैं। कुछ पल के लिए कल्पना करो कि ये सेकुलर सोच अगर सारे भारत में फैल जाए तो हिंसा, नसा और ब्याभिचार किस हद तक बढ़ जायेगा। परिणामस्वरूप न मानव बचेगा न मानव जीवन, चारों तरफ सिर्फ राक्षस नजर आयेंगे। हर तरफ हिंसा का बोलबाला होगा ।मां-बहन-बेटी नाम का कोई रिस्ता न बचेगा।हर गली, हर मुहल्ला , हर घर वेश्यवृति का अड्डा नजर आयगा।जिस तरह हम आज गली, मुहले,चौराहे पर कुतों को सैक्स करते देखते हैं इसी तरह ये सेकुलरताबादी हर गली मुहले चौराहे पर खुलम-खुला सैक्स करते नजर आयेंगे। पाठशालाओं में मानव मूल्यों की जगह सैक्स के शूत्र पढ़ाये जायेंगे।अध्यापक इन शूत्रों के परैक्टीकल करबाते हुए ब्यस्त नजर आयेंगे। न कोई माता नकोई पिता नकोई बच्चा न कोई धर्म सब एक समान एक जैसे सब के सब धर्मनिर्पेक्ष बोले तो राक्षस। जब शरीर सैक्स करने में असमर्थ होगा तो ये नशा कर सैक्स करने की कोशिश करेंगे ।धीरे-धीरे ये नशे के आदी हो जायेंगे ।नशे के लिए पैसा जुटाने के लिए एक दूसरे का खून करेंगे।मां-बहन-बेटी को बेचेंगे।सब रिस्ते टूटेंगे। जब नशे के बाबजूद ये नपुंसक हो जायेंगे तो फिर ये अपने सहयोगी पर तेजाब डालकर उसे जलाते नजर आयेंगे।अंत में ये जिन्दगी से हताश होकर आत्महत्या का मार्ग अपनायेंगे।

हम तो बस इतना ही कहेंगे कि इन सैकुलतावादियों को रोकना अत्यन्त आवश्यक है।अगर इन्हें आज न रोका गया तो इतिहास हमें कभी माफ नहीं करेगा क्योंकि ये किसी भी रूप में तालिवानों से अधिक खतरनाक हैं और तालिबान का ही बदला हुआ स्वरूप हैं। अभी इनकी ताकत कम है इसलिए ये फिल्मों,धाराबाहिकों ,समाचारपत्रों व समाचार चैनलों के माध्यम से अपनी सोच का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं।कल यदि इनकी शंख्या बढ़ गयी तो यो लोग सभ्य समाज को तहस-नहस कर देंगे।

सेकुलरतावादियों की इस पाश्विक सोच का सबसे बुरा असर गरीबों व निम्न मध्य बर्ग के बच्चों पर पड़ रहा है।ये बच्चे ऐसे परिबारों से सबन्ध रखते हैं जो दो बक्त की रोटी के लिए मोहताज हैं। इन सेकुलरताबादियों के दुस्प्रचार का शिकार होकर ये बच्चे अपनी आजीविका का प्रबन्ध करने के प्रयत्न करने के बजाय सैक्स व नशा करने के लिए दर-दर की ठोकरें खाते नजर आते हैं।

 सेकुलरताबादियों की ये भ्रमित सोच न इन बच्चों का ध्यान पढ़ाई में लगने देती है न किसी काम धन्धे में।न इन बच्चों को अपने मां-बाप की समाजिक स्थिति की चिन्ता होती है न आर्थिक स्थिति की। क्योंकि माता-पिता अपने बच्चों को बुरी आदतों से दूर रखने के लिए डांट-फटकार से लेकर पिटाई तक हर तरह के प्रयत्न करते हैं इसलिए इन बच्चों को सेकुलरताबादियों के बताए अनुसार अपने शत्रु नजर आते हैं।

 ये बच्चे इस दुस्प्रचार का शिकार होकर अपने माता-पिता से दूर होते चले जाते हैं।ये बच्चे जाने-अनजाने नशा माफियों के चुंगल में फंस जाते हैं क्योंकि ये नशामाफिया इन बच्चों को न केबल नशा उपलब्ध करबाता है बल्कि सेकुलरताबादी विचारों का प्रयोग कर ये समझाने में भी कामयाब हो जाता है कि नशा और ब्यभिचार ही जिन्दगी के असली मायने हैं।

जब तक इन बच्चों को ये समझ आता है कि ये आधुनिकता के चक्कर में पढ़कर अपना जीबन तबाह कर रहे हैं तब तक इन बच्चों के पास बचाने के लिए बचा ही कुछ नहीं होता है।लड़कियां कोठे पर पहुंचाई जा चुकी होती हैं व लड़के नशेबाज बन चुके होते हैं कमोबेश मजबूरी में यही इनकी नियती बन जाती है।

फिर ये बच्चे कभी सरकार को कोशते नजर आते हैं तो कभी समाज तो कभी माता-पिता को। परन्तु बास्तब में अपनी बरबादी के लिए ये बच्चे खुद ही जिम्मेबार होते हैं क्योंकि सीधे या टैलीविजन व पत्रिकाओं के माध्यम से सेकुलरताबादियों की फूड़ सोच को अपनाकर अपनी जिन्दगी का बेड़ागर्क ये बच्चे अपने आप करते हैं।

आगे चलकर यही बच्चे सेकुलरताबादी,नक्सलबादी व माओबादी बनते हैं । यही बच्चे इन सेकुलरताबादियों का थिंकटैंक बनते हैं । यही बच्चे फिर समाचार चैनलों में बैठकर माता-पिता जैसे पबित्र रिस्तों को बदनाम करते नजर आते हैं।अब आप खुद समझ सकते हैं कि क्यों ये सेकुलरताबादी हर वक्त देश-समाज,मां-बाप व भारतीय संस्कृति को कोशते नजर आते हैं।

            

      

 

 

 

धर्म के आधार पर आरक्षण कांग्रेस की हिन्दुविरोधी-देशविरोधी मानसिकता का एक और प्रमाण

धर्म के आधार पर आरक्षण कांग्रेस की हिन्दुविरोधी-देशविरोधी मानसिकता का एक और प्रमाण

1857 का स्वतन्त्रता संग्राम एक एक ऐसी घटना थी जिसने अंग्रेजों को इतना डरा दिया कि उन्हें हर पल भारत में क्राँति की नइ सम्भावनायें दिखाइ देने लगी ।उन्हें लगा कि अब भारत को गुलाम बनाए रखना उनके बस की बात नहीं। क्योंकि यहां के लोग महरानी लक्ष्मीवाई,मंगलपांडे जैसे क्रांतिकारियों की आत्मा की आवाज को समझकर अपने आप को मातृभूमि को आजाद करवाने के लिए बलिदान करने की राह पर निकलने लगे हैं। बस इसी डर ने उन्हें भारत में एक एसा दल त्यार करने पर बाद्य किया जो देखने में हिन्दुस्थानियों का लगे लेकिन बफादार अंग्रेजों के प्रति रहे।

1885 में ऐ ओ हयूम के नेतृत्व में अंग्रेजों के स्वपनों को भारत में साकार करने के लिए कांग्रेस की स्थापना की गई। 1885 से आज तक कुछ अपबादों को छोड़ दिया जाए तो कांग्रेस भारत में अंग्रेजियत के प्रचार-प्रसार व हिन्दूत्व के विरोध का सबसे बड़ा अधार सत्मभ है। यही वो दल है जिसने 1947 में गोरे अंग्रेजों के चले जाने के बाद भी आज तक कभी भारतीयों को आजादी का एहसास नहीं होने दिया। इसी दल की कढ़ी मेहनत और दृड़ निस्चय के परिणाम स्वरूप आज सब भारतीय जात-पात, सांप्रदाय, भाषा, क्षेत्र के नाम पर एक दूसरे का खून बहा रहे हैं। जब कभी भी इस दल को लगता है कि देश में शांति-एकता और भाई-चारे का दौर शूरू हो रहा है तो ये दल अपनी फूट डालो और राज करो की निति में से कोई न्या तीर चलाकर एसी आग लगाता है जिसकी तपस बर्षों तक हिन्दुस्थानियों को जलाती रहती है।

इसी फूट डालो और राज करो की निति के परिणामस्वरूप 1947 में भारत का विभाजन हो गया। दो हिस्से मुसलमानों के लिए एक हिस्सा हिन्दुओं के लिए। विभाजन की भूमिका त्यार की अंग्रेजों ने कांग्रेसियों के साथ मिलकर ।जिसे सिरे चढ़ाया पुराने कांग्रेसी मुहम्द अली जिन्ना ने 1946 में मुसलमानों को हिन्दूओं के विरूद्ध सीधी कार्यवाही का आदेश देकर। जिसके परिणाम स्वरूप मुसलमानों ने सारे देश में हिन्दूओं पर हमले शुरू कर दिए सारा देश हिन्दूओं की कब्रगाह बनने लगा धारे-धीरे हिन्दूओं को समझ आने तगा कि अगर बचना है तो मुकाबला करना पड़ेगा । धीरे-धारे हिन्दूओं ने अपने आप को संगठित कर मुसलिम जिहादियों का मुकाबला करना शुरू किया । जैसे ही हिन्दूओं ने मुसलिम जिहादियों को उन्हीं की भाषा में जबाब देना शुरू किया तो कांग्रेसियों से बर्दास नहीं हुआ और कांग्रेसियों के नेता ने मुसलिम जिहादियों को बचाने के लिए अनसन शुरू कर दिया। बेचारे बौद्धिक गुलाम हिन्दु कांग्रेसियों के बनाए मकड़जाल में ऐसो फंसे कि आज तक निकल न पाये।

मुसलमानों ने एकजुट होकर सारे पाकिस्तान से हिन्दू-सिखों का लगभग नमोनिसान मिटा दिया ।जो गिने-चुने रह गए उनका कत्लयाम आज तक जारी है।बर्तमान भारत से भी मुसलमान धीरे-धीरे पाकिसस्तान जा रहे थे तभी कांग्रेसियों ने हिन्दूओं को लहूलुहान करने के लिए एक और चाल चली और मुसलमानों को पाकिस्तान जाने से रोक दिया। जिहादियों के रणनितीकार तो पहले ही त्यार बैठे थे अपने जिहादी बीज का कुछ हिस्सा बर्तमान भारत में छोड़ देने के लिए ताकि बचे खुचे भारत को भी लगातार तहुलुहान करने के बाद हिन्दूविहीन कर दिया जाए।  

1947 में भारत विभाजन के बाद मुसलिम जिहादियों की एकमात्र नीति रही अधिक से अधिक बच्चे पैदा कर भारत में अपनी जनशंख्या बढ़ाना व अलगावबाद की भावना जागृत रखना । इन उदेश्यों की पूर्ति के लिए ही जिहादियों ने हमेशा परिबार नियोजन व बन्देमातरम् का बार-बार विरोध किया । उन की इस रणनिती को सफल बनाने के लिए कांग्रेसियों ने उन्हें न केबल लोजिसटिक सहायता उपलब्ध करबाइ बल्कि उनकी अलगावबादी नीतियों को सहारा देने के लिए हर तरह के कानून बनाए। मतलब अंग्रेजों द्वारा सौंपी गई भूमिका को कांग्रेस आज तक निभाती चली आ रही है।

अब आप समझ सकते हैं कि क्यों कांग्रेस मुसलमानों व इसाईयों को धर्म के आधार पर आरक्षण की बात कर रही है। कांग्रेस का 1885 से आज तक जो उदेश्य सपष्ट दिखता है वो है हिन्दुविरोध-देशविरोध वोले तो गद्दारी। बरना हर कोई जानता है कि अंग्रेजों और इसाईयों को आरक्षण देने की बात तो केबल गद्दार हिन्दुविरोधी ही कर सकते हैं की देशभक्त नहीं। आओ जरा विचार करें कि मुसलमानों और इसाइयों को आरक्षण क्यों नहीं मिलना चाहिए ।

               1)संविधान धर्म(सांप्रदाए) के आधार पर आरक्षण की इजाजत नहीं देता। क्योंकि धर्म के आधार पर फूट डालो और राज करो की नितीयों के परिणामस्वरूप ही भारत का एक से अधिक बार विभाजन(अफगानीस्तान,पाकिस्तान,बंगलादेश) हो चुका है। आज कोइ भी विवेकशील ब्यक्ति इस आग से खेलने का दुहसाहस नहीं कर सकता। एसा केबल गद्दार ही कर सकते हैं। जो लोग कह रहे हैं कि संविधान की इस पंक्ति को हटा देना चाहिए उन्हें समझना चाहिए कि अगर ये पंक्ति हटानी ही है तो देश की 100% नौकरियां हिन्दूओं के लिए आरक्षित कर देनी चाहिए।  

            2)मुसमानों और इसाईयों ने हिन्दुओं को लगभग 1000 वर्ष तक गुलाम बनाकर रखा। इस दौरान मुसलमानों व इसाइयों ने हिन्दूओं पर अनगिनत जुल्म ढाए। हिन्दुओं के आस्थास्थल मन्दिर  गिराए। मां-बहन-बेटियों की इज्जत से खिलबाड़ किया। नौकरियों पर हर तरह से पहला अधिकार मुसलमानों व इसाईयों को दिया गया ।हिन्दुओं के साथ जानबरों से भी बदतर बरताव किया गया।इन ईसाईयों और मुसलमानों को आरक्षण देना न हिन्दूओं की हैसियत है न इन्हें आरक्षण की जरूरत है। बैसे भी कोई गुलाम(हिन्दू) अपने सासक (मुसलमान और इसाइ ) को आरक्षण देने की हैसियत कहां रखता है।

           3)मुसलमानों ने तो न केबल हिन्दुओं को गुलाम बनाकर रखा बल्कि अखण्ड भारत के चार टुकड़े कर तीन पर अपना 100% कब्जा कर लिया। जब भारत के बाकी तीन हिस्सों अफगानिस्तान,पाकिस्तानव बंगलादेश में मुसलमानों को 100% आरक्षण प्राप्त है तो फिर भारत में 100% आरक्षण हिन्दूओं को क्यों नहीं।

जो इसाइ आज भी धन-बल के जोर पर हिन्दूओं को धर्मपरिबर्तन करने पर बाध्य कर रहे हैं उन इसाइयों को आरक्षण कैसा। आज भी देश के अधिकतर शिक्षण संस्थान जिनमें भारत के अधिकतर प्रभावशाली लोगों के बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं ईसाईयों के खब्जे में हैं। जो इसाइ आज भी देश के हर बड़े पद पर विराजमान हैं उन्हें आरक्षण की क्या जरूरत।

         4)आज जब भारत सरकार एक इसाई एंटोनिये माइनो मारियो की गुलाम है देश का रक्षामन्त्री एक इसाइ है। एंटोनियों के सब के सब सलाहकार या तो इसाइ हैं या फिर मुसलमान । ऐसे में मुसलमानों और इसाईयों को आरक्षण की बात करना हिन्दुविरोध- देशविरोध के सिवा और कुछ नहीं ।

कुछ लोग ये तर्क देते हैं कि ये इसाइ और मुसलमान वो नहीं जिन्होंने हिन्दुओं को गुलाम बनाया था ये तो हिन्दुओं से ही इसाइ व मुसलमान बने हैं । प्रशन पैदा होता है कि ये मुसलमान और ईसाई इसलिए बने ताकि इन्हें गरीवी व छुआछूत से छुटकारा मिल सके जो कि नहीं मिल सका फिर तो इन्हें बापस हिन्दु बन जाना चाहिए क्योंकि जिस उद्देशय को लेकर ये धर्मभ्रष्ट हुए बो उदेशय ही पूरा नहीं हुआ। कम से कम धर्म का पालन तो करें और आरक्षण का फायदा भी लें । बैसे भी संस्सार का एकमात्र मानब धर्म हिन्दुधर्म ही तो है बाकी सब तो राजनितीक विचारधारायें हैं आज नहीं तो कल विलुप्त हो जांयेंगी।

        5)जो मुसलमान बन्देमातरम् का विरोध कर रहे हैं वो राष्ट्रवाद के हर पैमाने से गद्दार हैं अत: गद्दारों को आरक्षण की बात गद्दार ही कर सकते हैं देशभक्त नहीं। इसे समय का न्याय ही कहेंगे कि जो लोग आईबीएन7 पर वन्देमातरम् का विरोध कर रहे थे वो ही आरक्षण की मांग भी उठा रहे थे। मतलब आप समझ सकते हैं।

रही बात गरीवी की तो इस संसार में हिन्दूओं से ज्यादा गरीब और बदनसीब कौन है जिनके देश पर मुसलमानों और इसाइयों ने कब्जा कर लिया और वो वेचारा कुछ न कर सका। हिन्दुओं के देश को मुसलमानों ने चार हिस्सों में बांट कर उनमें से तीन पर अपना कब्जा जमाकर हिन्दू को वहां से निकाल दिया। अब उसे चौथे हिस्से से निकालने की त्यारी चल रही है। पांच लाख से अधिक हिन्दू तो अकेले कशमीर घाटी से बेघर कर दिए गए बचारा हिन्दू कुछ न कर सका ।मां-बहन बेटियों की इज्जत तार-तार की की गई बेचारा हिन्दू कुछ न कर सका नबालिग बच्चों को हलाला कर दिया गया बेचारा हिन्दू कुछ सका। न्याय की बात तो दूर कोइ दुनिया में सन्तावना तक देने वाला कोई नहीं । अगर बास्तब में मुसलमान गरीब होते तो वो परिबार नियोजन का विरोध नहीं करते ।देशभर में बम्मविस्फोट कर हिन्दुओं का खून नहीं बहाते।  अगर इसाइ गरीब होते तो वो बड़ी शिक्षण संस्थाओं व सेवा के नाम पर प्रलोभन देकर हिन्दूओं को धर्मपरिबर्तन कर इसाई बनने पर बाध्या नहीं करते। बास्तब में अगर कोई गरीब है तो वह हिन्दु है । लेकिन हिन्दू की बदनशीवी यह है कि उसकी गरीवी पर कोइ ध्यान देने बाला नहीं उल्टा ये गद्दार उसे और गरीव दीन हीन बनाने पर तुले हैं।

          6)रही बात अल्पसंख्यक होने की तो दुनिया में अगर कोई अल्पसंख्यक है तो वो हिन्दू है । अगर अकेले देश की बात की जाए तो दुनिया के लगभग 200 देशों में हिन्दू अलपसंख्यक है बताओ जरा कितने देशों में हिन्दूओं को विसेषा अधिकार प्राप्त  हैं या आरक्षण प्राप्त है आरक्षण या विशेषा अधिकार तो दूर समान अधिकार तक प्राप्त नहीं हैं।

 

अन्त में हम तो यही कहेंगे कि जो भी भारत के नागरिक हैं और देश के प्रति बफादार हैं उन्हें वो सब अधिकार मिलने चाहिए जो भारतीय नागरिक को प्राप्त हैं लेकिन धर्म के आधार पर किसी  को भी कोई विशेषाधिकार नहीं देना चाहिए ।इसी में हम सब का भला है।

 

 

क्या आयोध्या में मर्यादापुर्षोत्तम भगवान श्री राम के मन्दिर का नवीनीकरण सम्पूर्ण क्रांति के वाद ही होगा….?

 

क्या आयोध्या में मर्यादापुर्षोत्तम भगवान श्री राम के मन्दिर का नवीनीकरण सम्पूर्ण क्रांति के वाद ही होगा….?

 

अयोध्या मर्यादापुर्षोत्तम भगवान श्रीराम की जन्मभूमि है यह एक शाशवत सत्य है इस सत्य को कोइ भी नकार नहीं सकता न ही कोइ इस सत्य को बदल सकता है फिर भी भारत में कांग्रेस के नेतृत्व में एक हिन्दूविरोधी-देशविरोधी सेकुलर गिरोह लगातार इस सत्य को असत्य में वदलने का अथाह प्रयत्न कर रहा है। शायद ये सेकुलर गिरोह इस तथ्य से अपरिचित है कि सत्यमेव जायते अर्थात विजय हमेशा सत्य की ही होती है।

ये सेकुलर गिरोह कहता है कि अयोध्या में जिस स्थान पर भगमान राम का जन्म हुआ उस स्थान पर बाबरी मस्जिद थी अर्थात बाबर द्वारा बनाइ गई मस्जिद। अब इन हिन्दुविरोधियों से भला कोई पूछे कि ये बाबर कौन था क्या ये बाबर इन हिन्दूविरोधियों का कोई प्रिय नेता-सासक-दारसनिक था या फिर एक विदेशी अक्रांता। इन हिन्दूविरोधियों को भी ये वात अच्छी तरह मालूम है कि बाबर एक विदेशी अक्रांता था जिसने न केबल असंख्या  मन्दिर गिराए बल्कि असंख्या हिन्दूओं को भी इस विदेशी अक्रांता ने मौत के घाट उतारा ।

इसी विदेशी अक्रांता ने 1528 में अपने सेनापति को अयोध्या में मर्यादा पुर्षोत्तम भगवान श्रीराम जी के मन्दिर को गिरवाकर उसकी जगह मस्जिद वनवाने का आदेश दिया जिसके मरिणामस्वारूप मन्दिर को बदलकर मस्जिद जैसा बना दिया गया जिसे बाबरी मस्जिद कहा गया इस तथ्य के समर्थन में न केवल मुस्लिमों ने लिखा है वल्कि एक अंग्रेज बकील ने भी 1885 में इस बात पर आस्चर्य बयक्त किया था कि हिन्दूओं की भूमि पर एक मन्दिर की जगह मस्जिद कैसे बनाइ जा सकती है । वर्ष 2003 में भारतीय पुरातत्व विभाग द्वारा की गइ खुदाइ में भी इस स्थान पर मन्दिर होने के प्रमाण मिले हैं। 1934 से आज तक इस स्थान पर कभी नमाज नहीं पढ़ी गई ।

अब प्रश्न पैदा होता है ये सैकुलर गिरोह इस स्थान पर मन्दिर बनाने का विरोध क्यों करता है ।कारण सपष्ट है ये वो सैकुलर गिरोह है जिसने 1947 में भारत का धर्म के आधार पर विभाजन करवाकर विभाजन की मांग करने वाले गद्दारों के वंसजों को भारत में रखकर हिन्दूओं को लहूलुहान करते रहने का षडयन्त्र रचा। इस सेकुलर गिरोह ने इन जिहादी गद्दारों के दबाब में देश की एकता के प्राण वन्देमातरम् का भी विभजन कर दिया ।इस सेकुलर गिरोह ने 1955 में हिन्दु-धर्म के विभिन्न प्रावधानों को बदलना शुरू किया लेकिन देश से गद्दारी करवाने वाले आतंकवादियों के जन्मदाता इस्लाम को छुआ तक नहीं । आतंकवाद की जड़ व हिन्दुओं को लहुलुहान करने की प्रेरणा देने वाली कुरान और हदीश को आज तक हाथ नहीं लगाया। जबकि शांति और भाइचारे की प्रेरणा देने वाली रामायाण और मर्यादापुर्षोत्तम भगवान श्रीराम को इस सेकुलर गिरोह ने काल्पनिक घोषित करने का दुस्साहस किया। यह वही सेकुलर गिरोह है जो हिन्दुओं का खून बहाने बालों का प्रेऱणास्त्रोत बन चुके मुहमम्द अफजल को माननीय सर्वोचन्यायालय द्वारा 19-09-2006 को फांसी की सजा तय करने के बाद भी आज तक इस गद्दार का बचाब कर रहा है जबकि हिन्दुओं पर अत्याचार के विरूद्ध अबाज उठाने वाली साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर व आतंकवादियों के विरूद्ध लड़ने वाले लैफ्टानैंट कर्नल पुरोहित के उपर झूठे आरोप लगाकर उन पर मकोका लगाकर उन्हें गैरकानूनी रूप से फांसी चड़ाने के षडयन्त्र रच रहा है। इस सैकुलर गिरोह के हिन्दुविरोधी-देशविरोधी षडयन्त्रों का परदाफास उस वक्त होता है जब माननीय न्यायालय ने इन क्रांतिकारियों पर से मकोका ये कहते हुए हटा दिया कि इन क्रांतिकारियों ने एसा कोइ अपराध नहीं किया है कि इनपर मकोका लगाया जाए। आपको हैरानी होगी कि इस सेकुलर गिरोह ने साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर पर यह आरोप सगाया है कि इस साध्वी ने सिमी के आतंकवादियों को मौत के घाट उतारा अब आप ही सोचो कि साध्वी को इनाम मिलना चाहिए या उसे जेल मे डालना चाहिए। इनाम तो तब मिलता जब देश में कोइ देशभक्त सरकार होती ।

जब देश में एक विदेसी इसाइ मिसनरी एंटोनियो माइनो मारियो उर्फ सोनिया गांधी की हिन्दुविरोधी-देशविरोधी सरकार है तो देशभक्तों पर अत्याचारों के सिवा हो भी क्या सकता है। आज गुलाम कांग्रेसी इस इसाइ मिसनरी का जन्मदिन मना रहे हैं हो सकता है ये बैद्धिक गुलाम कांग्रेसी कल को एंटोनियो माइनो मारियो के परिबारिक मित्र क्वात्रोची का भी जन्म दिन मनायें। हम उसी क्वात्रोची की बात कर रहे हैं जिस क्वात्रोची को वोफोर्स दलालीकांड से बचाने के लिए इस एंटोनियों की गुलाम सरकार ने इस एंटोनियो के कहने पर पूरी वेशर्मी से हर तरह का सफल प्रयत्न किया। यह वही एंटोनियो-क्वात्रोची की सफल जोड़ी है जिसने राजीव जी जैसे भोले-भाले इनसान को ब्यर्थ में बदनाम किया। अब आप समझ सकते हैं कि भारत आज किस दौर से गुजर रहा है और क्यों स्वामी रामदेव जी कह रहे हैं कि आज भारत को एक और स्वतन्त्रता संग्राम की जरूरत है।

जागो मेरे प्यारे बैद्धिक-गुलाम हिन्दुओ और जुड़ जाओ राष्ट्रीय स्वंय सेबक संघ/भारत स्वाभिमान मंच/हिन्दु जागृति समिति/सनातन संस्था/बजरंग दल/सेवा भारती/ के साथ और उतार दो हर वो कर्ज जो हर क्रांतिकारी का हर उस हिन्दूस्तानी पर शेष है जिसकी रगों मैं ऋषियों-मुनियों का पवित्र खून दौड़ रहा है वहा दो हर उस गद्दार का खून जो औरंगजेब-बाबर जैसे जिहादियों के प्रति बफादार है। बर्ना वो वक्त दूर नहीं जब अफगानीस्तान-पाकिस्तान-बंगलादेश-कशमीर की तरह भारत के इस हिस्से को भी हिन्दुविहीन कर दिया जाए !

जागो भाइ जागो और जगाओ बौद्धिक-गुलाम व सुप्त हिन्दुओं को

 जागो ! हिन्दू जागो !

  अफगानिस्तान पाकिस्तान बांगलादेश सब हिन्दुविहीन हो गए।

          अब कश्मीर आसाम को हिन्दुविहीन घोषित करने की तैयारी है।।

आज जिहादी हमलों में वो घरबार परिवार सहित मारे गए।।।

          कल हमारी फिर हमारे बच्चों को मारने की तैयारी है।।।।

 

 

वाह आशुतोश जी मिडीया की चित भी मेरी पट भी मेरी वाली नीति नहीं चलेगी

वाह आशुतोश जी मिडीया की चित भी मेरी पट भी मेरी वाली नीति नहीं चलेगी

आज मुम्बई में आईवीएन-लोकमत के कार्यालया पर हमला होने का समाचार लगभग सभी चैनलों पर दिखाया गया । राज्या व केन्द्र सरकार के उपर यह दवाव बनाने की कोशिस की गई कि मिडीया द्वारा घोषित अपराधियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए। साथ ही इस हमले का आरोप शिवसेना के उपर लगाया गया।थोड़ी देर के लिए मेरे मन में एसा विचार आया कि इस हमले की निन्दा की जाए ।

लेकिन तभी मेरे दिमाग में मिडीया द्वारा दिखाय गए वो सब कार्यक्रम छा गए जिनमें मिडीया ने आम लोगों का खून वहाने वाले मुसलिम जिहादी आतंकवादियों को वेचारा,गरीव अनपड़ व गुमराह नौजवान प्रचारित कर इन आतंकवादियों के विरूद्ध कठोर कार्यवाही न करने का महौल वनाया। यह वही मिडीया है जिसने कशमीर को भारत से अलग करने की बकालत की। यह वही मिडीया है जिसने फांसी की सजा समाप्त करने के लिए महौल बनाने की कोशिश की। इसी मिडीया ने मां-वाप द्वारा अथक प्रयत्न कर पाले गए बच्चों को प्यार के नाम पर घर से भागने के लिए उकसाने वाला महौल वनाने का दुस्साहस किया।यह वही मिडीया है जिसने अपना अधिकतर समय सुरक्षा बलों को बदनाम करने उनका मनोवल तोड़ने का प्रयत्न करने में लगाया। यह वही मिडीया है जो आतंकवाद का प्रायवाची बन चुके इस्लाम को तो शांतिप्रिय प्रचारित करता है लेकिन मानब-धर्म का प्रायवाची वन चुके हिन्दुत्व को अक्सर हिंसक प्रचारित करने का असफल प्रयत्न किया।

अभी पिछले कुछ दिनों में मुसलिम आतंकवाद की एक महत्वपूर्ण कड़ी हेडली उर्फ दाऊद गिलानी व तहव्वुर राणा को अमेरिका की खुफिया एजेंसी एफवीआई ने पकड़ लिया जिसके परिणाम स्वरूप इस मिडीया के चहेते महेसभट की असलियत जगजाहिर हुई। इस महेशभट्ट का बेटा राहुल भट भारत में हेडली के सबसे बड़े सहयोगी के रूप में सामने आया जिसे सुरक्षा एजेसियों ने हिरासत में लेकर पूछताच कर छोड़ दिया। इस महश भट की असलियत हमें पहले से ही पता थी हमने जब अपनी पुस्तक नकली धर्मनिर्पेक्षता लिखी(जनवरी 2008 में अपने ब्लाग पर प्रकासित की) तो उसमें इन गद्दारों के हिन्दुविरोधी-देशविरोधी कुकृत्यों के वारे में सपष्ट करने की कोशिश की। इस पुस्तक के वाहरवें अध्याय  मुम्बई हमला खतरे की घंटी

 में हमने लिखा

  हम तो आने वाली किसी भी देशभक्त सरकार से इस दुआ जैसे  पत्रकारों सहित माजिद मैनन,महेश भट व नबलखा जैसे जिहादियों के समर्थकों का नार्को टैस्ट करवाकर ये किसके बल पर देशविरोधी काम करते हैं, पता लगाया जाए व ऐसे सभी देशविरोधियों को सबक सिखाया जाए

 शिवसेना के मुखपत्र में आतंकवादियों के मददगार महेशभट के विरूद्ध कड़ी कार्यवाही की मांग की गइ। जो कि आइवीएन-7 के प्रवन्धकों को अच्छा नहीं लगा। इस आतंकवादियों के शरणदाता भट परिवार का वचाव करने के लिए आइवीएन-7 के आशुतोश राणा ने एक दम से एक कार्यक्रम पेश किया जिसका शीर्षक था कि अदालत में दोष सिद्ध होने से पहले किसी अपराधी घोषित नहीं करना चाहिए। मतलव भट परिवार को तब तक आतंकवादी नहीं कहना चाहिए जब तक अदालत उसको दोषी सिद्ध न कर दे। आइवीएन-7 को यह ध्यान रखना चाहिए कि 26-11-08 के हमले में सैंकड़ों लोगों की जान गइ थी हजारों लोग इससे प्रभावित हुए थे कुछ तो आज तक डरे हुए हैं सहमे हए हैं।अगर एसे जघन्या अपराध के दोषियों को अपराधी कहना गलत है तो फिर आवीएन –लोकमत के कार्यालय पर हुए हमले में तो सिर्फ कुछ मारामारी ही हुई है किसी का कत्ल तो हुआ नहीं है जिसमें जितनी मार लोकमत के पत्रकारों को पड़ी है उससे ज्यादा हमला करने वालों को पड़ी है तो फिर कानूनी कार्यवाही से पहले उनको अपराधी घोसित करने की जलदवाजी क्यों ?

जिस निखिल वागले को निशाना वनाकर ये हमला किया बताया जाता है ये वो ब्यक्ति है जो हर वक्त राष्ट्रवादियों के लिए अपमानजनक भाषा का प्रयोग करता है अगर ये व्याक्ति खुद को पत्रकार कहता है तो ये पत्रकारिता का अपमान है क्योंकि पत्रकारिता का अधार ही निष्पक्षता है। निखिल वागले, अलोक महता जैसे विके हिए लोगों नें पत्रकारिता को कलंकित किया है। हम तो इन जैसे लोगों को ये सुझाव देंगे कि एसे लोग अब उन गद्दारों के साथ ये सीधे जुड़ जांयें जिनकी पैरवी ये लोग हरवक्त मिडीया को हथियार वनाकर करते हैं।

 

 

%d bloggers like this: