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नवरात्रों के शुभ अबसर पर सब हिन्दूओं को हार्दिक शुभकामनायें…

आओ हम सब हिन्दू पूजनीय  माता जी

Internet Explorer Wallpaperको साक्षी मानकर ये प्रण करें कि आज से हम हर हिन्दू के दुख-दर्द को अपना दुख-दर्द मानकर हमसे जो भी बन सकेगा अपने हिन्दू भाई की मदद के लिए संगठित होकर करेंगे।

हम आज से जात-पात,छुआछूत,ऊंच-नीच अधारित भेदभाव को त्यागाकर समरस हिन्दू समाज के निर्माण के लिए एकजुट होकर हिन्दू संगठनों के हाथ मजबूत करेंगे।

हमारा जो भी हिन्दू भाई-बहन हिंसक मुसलमानों व आक्रमणकारी ईसाईयों द्वारा फूट डालो और राज करो के मकसद को पूरा करने के लिए फैलाई गई शुद्धी-असुद्धी की अबधारणाओं से भर्मित होकर इन विभाजनकारी अबधारणाओं पर अमल करने की कोशिस करेगा हम उस भ्रमित हिन्दू भाई को समरस हिन्दू समाज की रचना में लगाने के लिए हर सम्भव प्रयास करेंगे।

हमारा जो भी हिन्दू भाई-बहन ,भ्रमित हिन्दू भाईयों-बहनों द्वारा की गई ज्यादतियों से खुद को प्रताड़ित महसूस करेगा हम उस हिन्दू भाई-बहन को इतना मान-सम्मान-प्यार देंगे कि वो भूतकाल में की गई ज्यादतियों के बजाए बर्तमान में निभाए जा रहे भाईचारे को याद रखे।

आओ हम प्रण करें कि आज से हमारे सामने या हमारे द्वारा किसी भी हिन्दू भाई-बहन के साथ ज्यादति न हो सके।

हम अपने हिन्दू भाई-बहन को अपमानित या जानमाल का नुसान पहुंचाने के लिए विधर्मियों द्वारा किए जा रहे हमले को खुद पर हमला समझें व उन विधर्मियों को ठिकाने लगाने के लिए जो भी जरूरी हो वो कर्म करें…

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हिन्दूक्रांति की शुरूआत या सरकारी षडयन्त्र

 

अगर इस हिन्दुविरोधी सरकार द्वारा लगाये गये आरोप सही हैं तो अपने इस आन्दोलन की शुरूआत लैफ्टीनैंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित जी के नेतृत्व में साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर जी के मार्गदर्शन में हो चुकी है।

बस जरूरत है तो इस आन्दोलन को 1857 के स्वतन्त्रता संग्रांम की तरह अधूरा न छोड़ कर आगे बढ़ाना और इन जिहादियों व धर्मांतरण के दलालों से मुक्त कराना । क्योंकि जिस तरह उस वक्त भारतीय अंग्रेजों के अत्याचारों से त्रस्त थे ठीक इसी तरह आज समस्त हिन्दूसमाज इन जिहादियों, धर्मांतरण के दलालों व उनके समर्थक इस सैकुलर गिरोह द्वारा किए जा रहे अत्याचारों व हिन्दू-विरोधी षड्यन्त्रों से त्रस्त है।

जरा सोचो जो गिरोह हिन्दुबहुल क्षेत्रों व मन्दिरों पर लगातार हो रहे बम्मविस्फोटों को गुमराह भाईयों का काम बता रहा था बार- बार इस्लामिक आतंकवाद को कभी अयोध्या तो कभी गुजरात का तर्क देकर जायज ठहरा रहा था कभी गरीबी तो कभी अनपढ़ता का बहाना बना रहा था ।

कुछ न दिखे तो पाक आई.एस.आई का काम बताकर बिना मुस्लिम जिहादियों के विरूद्ध कोई कार्यवाही किए पल्ला छुड़ा रहा था । हिन्दुओं के कातिलों को बचाने के लिए कठोर कानून न वनाने की बात कर रहा था । धमाका होते ही सबन्धित क्षेत्र के संभावित हमलावरों को बचाने के लिए कर्फयु लगा रहा था व साँप्रदायिक हिंसा रोकने के बहाने हमलावरों को बचाने के रास्ते तलाश रहा था ।

हमला मुसलमानों ने किया है ऐसा पता हिन्दुओं को न लग जाए इसके लिए जिहादियों द्वारा मारे जाने वालों की पहचान छुपा रहा था व पुलिस पर अपराधी मुसलमानों के नाम न बताने के लिए दबाव बना रहा था । आतंकवादी का कोई धर्म नहीं होता ऐसा जोर-जोर से चिलाकर इस्लाम की असलिएत छुपा रहा था। हिन्दुविरोधी मीडिया इस गिरोह के सारे दुष्प्रचार व षड्यन्त्रों को आगे बढ़ा रहा था ।

कुल मिलाकर जिहादियों को हिन्दुबहुल क्षेत्रों व मन्दिरों में बम्ब विस्फोट करने से रोकने या टोकने के बजाए उन्हें हर तरह की नैतिक व तकनीकी मदद देकर हमले तेज करने के लिए सैकुलर गिरोह व मीडिया द्वारा मिलकर भड़काया जा रहा था ।

वो ही गिरोह मालेगांव में हुए सिर्फ एक बम्ब विस्फोट व पांच मुसलमानों के कत्ल पर इतना बौखला जाता है कि हिन्दूआतंकवादी हैं हिन्दूआतंकवादी है चिल्लाना शुरू कर देता है(वो भी तब जब अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि ये काम जिहादियों का नहीं है) ये मुसलमानों पर हमला है ऐसा शोर मचा देता है।

एक हिन्दू साध्वी को अवैध हिरासत में रखकर अत्याचार कर झूठे आरोप स्वीकार करने का दबाव बनाता है। मीडिया उस साध्वी द्वारा शहीदों की आत्मा की शान्ति के लिए आयोजित पिण्ड दान को आतंकवादी गतिविधी बताता है( ये पिण्डदान श्री अमरनाथयात्रा संघर्ष समिति के नेतृत्व में देशविरोधियों के विरूद्ध चले संघर्ष में हिन्दुविरोधी सरकार द्वारा करवाई गई गोलीबारी में मारे गये हिन्दुओं की आत्मा की शान्ति के लिए करवाया गया था।) तरह- तरह की अफवाहें फैलाता है कहानियां बनाता है ये हिन्दुविरोधी गिरोह की सरकार लगभग सभी हिन्दू संगठनों को आतंकवादी कहकर बदनाम करना शुरू कर देती है ।

साध्वी जी के फोन रिकार्ड के आधार पर गिरफ्तारियाँ शुरू हो जाती है। गिरफ्तारियों का सिलसिला रूकता है सुधाकर जी की गिरफ्तारी के बाद डाक्टर अब्दुल कलाम जी का नाम आने पर । पकड़े गये सब व्यक्तियों का अपराध सिर्फ इतना था कि इनका उस साध्वी के साथ सबन्ध था। जो झूठे आरोप लगाकर सरकार ने गिरफ्तार की थी ।

आगर कहीं डा अब्दुलकलाम जी का नाम न आता तो आज इन्हीं सम्पर्कों के बहाने कई और हिन्दू कार्यकर्त्ता, हिन्दूसंगठनों के पदाधिकारी व साधु-सन्त जेलों में होते जिसका प्रयास आज भी जारी है और डा अब्दुल कलाम जी को भी लैफ्टीनैंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित जी की तरह जेल में डाल दिया जाता अगर वो मुसलमान न होते तो ।

सरकार द्वारा प्रचार शुरू कर दिया गया कि ये मुसलमानों को मारने का बहुत बढ़ा षड्यन्त्र है और सरकार के इस काल्पनिक षडयन्त्र के बहाने हिन्दू तो हिन्दू सेना तक को बदनाम किया गया। कुल मिलाकर जो हिन्दू पकड़े गए वो या तो हिन्दूकार्यकर्ता हैं जो मुस्लिम जिहादी हमलों के विरूद्ध आम जनता को जागरूक कर रहे थे या फिर वो सैनिक अधिकारी जो जिहादियों के विरूद्ध खुफिया जानकारी जुटा रहे थे ।

अब प्रश्न यह पैदा होता है कि आखिर सरकार इस हद तक इन हिन्दू संगठनों को बदनाम करने पर क्यों अमादा है ?

वास्तव में इसके कई कारण हैं पर इसका प्रमुख कारण इन संगठनों का सरकार द्वारा किए जा रहे देशविरोधी-हिन्दुविरोधी कामों का डटकर विरोध कर आम जनता को जागरूक करना है । सरकार को पता है कि जब तक देश की हिन्दू जनता का विश्वास इन हिन्दूवादी संगठनों में बना हुआ है तब तक इस देशद्रोह के रास्ते पर आगे बढ़ाना एक सीमा से आगे सम्भव नहीं ।अगर देश को तबाही और बर्बादी के उस रास्ते पर ले जाना है जो जिहादी और धर्मांतरण के ठेकेदार चाहते हैं तो हिन्दू संगठनों को कमजोर करना जरूरी है ।

वैसे भी जिस अंग्रेज एंटोनियो की ये सरकार गुलाम है उस अंग्रेज को हिन्दू संगठनों के डर ने प्रधानमन्त्री के पद से दूर रहने पर मजबूर किया तथा बाद में इन हिन्दूसंगठनों ने सरकार के बल पर चलाए जा रहे धर्मांतरण अभियान को जनसहयोग से रोकने में सफलता हासिल की ।

दूसरा इस हिन्दुविरोधी गुलाम सरकार द्वारा मर्यादापुर्षोत्तम भगवान श्री राम द्वारा निर्मित रामसेतु को तोड़ने की सब योजनाओं पर अगर किसी ने पानी फेरा तो इन हिन्दू-संगठनों द्वारा जनसहयोग से चलाए गये अन्दोलनों ने ।

तीसरा भूमि आबन्टन को रद करने पर जम्मू के वर्तमान इतिहास में पहली बार 70 दिन तक चला राष्ट्रवादी आन्दोलन।

जिस बात ने इस सरकार के होश उड़ा दिए वो था राष्ट्रवादी मुसलमानों का इस आन्दोलन में हिन्दू संगठनों का साथ देना । सरकार ने बार-बार आन्दोलनकारियों को कशमीरी जिहादियों के हमलों से डराने की कोशिश की लेकिन राष्ट्रवादी जब एक बार सर पर कफन बाँध लेते हैं तो रूकते तभी हैं जब मकसद पूरा हो जाता है यही इस मामले में भी हुआ।

अगर आप आज तक इस सेकुलर गिरोह के चुनावी मुद्दे देखें तो वो सिर्फ दो ही पहलु नजर आते हैं ।

एक आम आदमी का जिसकी हवा मंहगाई ने निकाल दी जो पिछली सरकार ने पूरी तरह से नियन्त्रण में रखी थी । अब तो लोग कहने लगे हैं कांग्रेस का हाथ आम आदमी के पेट पर लात।

दूसरा है जिहादियों को खुश करने के लिए हिन्दूविरोध व आम मुसलमान को साथ रखने के लिए हिन्दू संगठनों का डर दिखाना ।

लेकिन जब हिन्दू संगठन और राष्ट्रवादी मुसलमान एक साथ मिलकर आन्दोलन करें वो भी 70 दिन तक।

तो फूट डालो और राज करो की नीति पर चलने वाला ये गिरोह ऐसी एकता कैसे सहन कर सकता है। जब कुछ न दिखा तो मुसलमानों को डराने के लिए व हिन्दू संगठनों को बदनाम करने के लिए इस गिरोह ने काल्पनिक हिन्दूआतंकवाद का सहारा लिया ।

इस गठबंधन को उम्मीद थी कि बात-बात पर भड़कने वाले मुसलमानों में छिपे जिहादी आतंकवादी हिन्दुओं पर हमला करेंगे और दंगे भड़क उठेंगे और ये गिरोह फिर से अल्पसंख्यकों की रक्षा को मुद्दा बनाकर चुनाव जीत लेगा ।

जब ऐसा कुछ न हुआ तो सरकार ने हिन्दू संगठनों में फूट डालने के लिए नया षड्यन्त्र रचा और अफवाह फैला दी कि पकड़े गये हिन्दू क्योंकि घोर राष्ट्रवादी वीरसावरकर द्वारा बनाये गये अभिनव भारत नामक संगठन से हैं इसलिए ये हिन्दू राष्ट्रवादी संगठन के पदाधिकारियों को मारना चाहते हैं ।

जब सब हिन्दूसंगठनों ने सरकार के इस दुष्प्रचार को सरकार की फूट डालो और राज करो की नीति कहकर नकार दिया तो सरकार ने प्रखर हिन्दूराष्ट्रवादी प्रवीणभाई तोगड़िया जी पर अभिनव भारत को पैसे देने का आरोप लगाकर फिर हिन्दू संगठनों के बीच दूरी पैदा करने की कोशिश की ।

एक क्षण के लिए यह मान भी लें कि उन्होंने या किसी और ने अभिनव भारत जैसे प्रखर हिन्दूराष्ट्रवादी संगठन को पैसे दिए थे व उनके या किसी और के इस संगठन के साथ गूढ़ सबन्ध हैं तो भी किसी देशभक्त संगठन को पैसे देना या उसके साथ सबन्ध रखने में बुराई ही क्या है ?

जिस सरकार को मुस्लिम व ईसाई देशों से जिहादियों व धर्मांतरण के ठेकेदारों को मिलने वाले पैसे पर कोई आपति नहीं उसे अभिनव भारत को मिलने वाले पैसे पर आपति क्यों ?

रही बात आरोपों की तो ये तो देखो आरोप कौन लगा रहा है एक अंग्रेज की गुलाम हिन्दुविरोधी देशद्रोही सरकार ?

वैसे भी जब देश पर ऐसे गिरोह का राज हो जो अंग्रेजों का गुलाम हो, जो जिहादियों को अपना भाई बताता हो तथा जो देश के निर्दोष हिन्दुओं की रक्षा करने के बजाए उन्हें मरवाने के इन्तजाम में लगा हो तो भला देशभक्त हिन्दुओं के पास हथियार उठाने के सिवा और चारा भी क्या है ?

हम गद्दारों के इस गिरोह को बता देना चाहते हैं कि जब-जब भी हिन्दुओं पर अत्याचार किए गये हैं राम के अस्तित्व को नकारा गया है तब-तब भगवान ने खुद अवतार लेकर ऐसे पापियों का संहार किया है । पापियों के इस गिरोह का भी वही हश्र होने वाला है अभी तो सिर्फ साध्वी के रूप में गणों का आना शुरू हुआ अभी से घबरा गए! जो बोई है वो फसल तो काटनी ही पड़ेगी।

आपका विनाश आपको लैफ्टीनैंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित जी के रूप में अभी तो दर्शन ही दे रहा है पिछले कई वर्षों से हिन्दुओं पर ढाऐ गये हर जुल्म, निकाली गई हर गाली का हिसाब चुकाना पड़ेगा ।

अपने अन्त समय में अपने द्वारा किए गये दुराचारों ,रचे गये षड्यन्त्रों ,बहाए गये हजारों हिन्दुओं के लहु को अच्छी तरह याद कर लो, ये भी याद कर लो कि हलाल किए हिन्दुओं में अनेक दूध पीते बच्चे भी शामिल थे। जरा सोचो आपने हिन्दूविरोध और जिहाद समर्थन में अन्धे होकर ये क्या करवा दिया तुम्हें तो नरक में भी जगह नहीं मिलेगी अभी तो सिर्फ अपने किए पापों की सजा के बारे में सोचो आपके द्वारा किए गये पाप इतने भयानक हैं तो इनकी सजा कैसी होगी ?

जरा सोचो जो गिरोह जिहादियों को बचाने के लिए मुम्बई बम्ब धमाकों के आरोपियों पर से पोटा हटाता है। हैदराबाद बम्ब विस्फोटों के दोषियों को छोड़ कर उनका हौसला बढ़ाने के लिए एक-एक आटो भेंट करता है, इन जिहादियों व उनके समर्थकों को आक्रोशित हिन्दुओं के कहर से बचाने के लिए कभी बेचारा कभी अनपढ़ कभी गरीब तो कभी अपना भाई बताता है ।

मतलब हिन्दुओं के कातिल आतंकवादियों को अपना भाई बताकर उन्हें बचाने की हर कोशिश करता नजर आता है । वैसे भी ये गिरोह जिहादियों को बचाने के लिए जो तर्क देता है वो ही तर्क जिहादी हिन्दुओं को मारने के बाद देते हैं मतलब साफ है कि हिन्दुओं को कत्ल करने के लिए दोनों कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं !

वो ही गिरोह निर्दोष हिन्दुओं पर झूठे आरोप लगाकर हर हाल में उन्हें फंसाने के लिए हिन्दुओं पर अमानवीय अत्याचार करता है उनके विरूद्ध जांच पे जांच करवाता है । कभी मुम्बई पुलिस तो कभी हरियाणा पुलिस से ।

उनको कुछ न मिला तो सी बी आई से फिर भी कुछ न मिला तो इन निर्दोष हिन्दुओं को छोड़ने के बजाए इन्हें हिरासत में रखकर और यातनांयें देने के लिए इन पर मकोका लगा देता है।

वो ही मकोका सैंकड़ो बम्बविसफोट कर हजारों हिन्दुओं का कत्ल व मोहन चन्द जी को शहीद करने वाले बटाला हाऊस मुठभेड़ के बाद पकड़े गये जिहादियों पर क्यों नहीं लगाया जाता है ?

हम तो कहते हैं कि इस बात की जाँच होनी चाहिए कि ये गुलाम सरकार ये सब कहीं विदेशी ईसाई खुफिया तन्त्र के बल पर तो नहीं कर रही । अगर ऐसा है तो स्थिति और भी गम्भीर और खतरनाक है ।

शंका तब और भी बढ़ जाती है जब निर्दोष साध्वी जी का तीन-तीन बार नार्को टैस्ट करवाया जाता है सवाल खड़े होने पर तर्क दिया जाता है कि एक ही नार्को तीन बार करवाया । सैंकड़ों बम्बविस्फोट कर हजारों हिन्दुओं का कत्ल करने वाले सैंकड़ों जिहादियों में से कितनों का नार्को तीन-तीन बार करवाया गया ?

हिन्दू विरोधी षडन्यत्र तब और गहरा जाता है जब इतने बार विज्ञानिक टैस्ट करवाऐ जाने व इतनी बर्बर यातनांयें देने के बावजूद कोई प्रमाण न मिला और ये सिद्ध हो गया कि साध्वी निर्दोष है ।उसने जो भी जानकारी पुलिस को दी थी सही है

तो उसे छोड़ने के बजाए कुतर्क दिया गया कि साध्वी योग जानती है इसलिए उसने मशीन को अपने बस में कर लिया जिसको न केवल योग विशेषज्ञ स्वामी रामदेव जी बल्कि इन टैस्टों के विशेषज्ञों ने भी असम्भव करार दिया । इस तरह जो अपमान साध्वी जी का इस सैकुलर गिरोह द्वारा किया गया उसकी भरपायी तो पापी हिन्दुविरोधीयों के विनाश से ही सम्भव है।

जब हिन्दूवादी संगठन सरकार के इस षड्यन्त्र को पहचान कर उसका विरोध करते हैं तो इसे राजनीति का नाम देकर सरकार हिन्दुओं को बदानाम करने के षड्यन्त्र को आगे बढ़ाती है और साध्वी सहित सभी आरोपियों पर मकोका लगा दिया जाता है ।

यह उसी जिहाद व धर्मांतरण समर्थक गिरोह की सरकार है जो मुस्लिम आतंकवादियों को बचाने के लिए इन्हें गुमराह, अनपढ़, गरीब मुस्लिम नौजवान बताती है उन्हें कोई सजा न मिल पाए इसका हर प्रयास करती है क्योंकि वो जिहादी मुसलमान हैं इसलिए ये सरकार उनके प्रति बिल्कुल दयालु नजर आती है।

लेकिन यही हिन्दुविरोधी गिरोह की सरकार सिरफिरे युवक राहुल राज को किस तरह गोली से उड़ाती है । साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को गैर कानूनी ढंग से उठाकर अवैध कब्जे में रख कर यातनांये देती है हिन्दुविरोधी मीडिया के माध्यम से दुष्प्रचार करवाती है यही सब लैफ्टीनैंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित व अन्य आरोपियों के साथ भी दोहराया जाता है । इतना सब करने के बाद भी जब कुछ भी आपत्तिजनक नहीं मिलता है तो इन आरोपियों को जबर्दस्ती जेल में रखने के लिए इन पर छोटे-छोटे झूठे मामले दर्ज कर मकोका लगा दिया जाता है !

लैफ्टीनैंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित जी कोई पहले सैनिक नहीं हैं जिन्हें जिहादियों को बचाने की खातिर इस सरकार ने जेल मे डाला है। इससे पहले कश्मीर सहित देश के कई भागों में ये सब सुरक्षाबलों के उन जवानों के साथ किया जा चुका है जिन्होंने अपनी जान की परवाह न करते हुए जिहादियों को मार गिराया ।

हर जगह सुरक्षाबलों को दंडित करने के लिए हिन्दुविरोधी सरकार, तालिबानी मीडिया व बिके हुए मानवाधिकार संगठनों ने जिहादियों को आम मुसलमान बताकर पेश किया ।

कुछ आरोपियों की सामाजिक छवि को धूमिल करने के लिए उनकी जिन्दगी से सबन्धित काल्पनिक निजी मामलों को हिन्दुविरोधी मीडीया के सहयोग से उछाल कर जनता के मन में उनके द्वारा हिन्दू रक्षा के लिए किए जा रहे त्याग के प्रति शंका पैदा करने का प्रयत्न किया जा रहा है !

आज तक मुस्लिम जिहादियों द्वारा सैंकड़ों विस्फोट कर हजारों हिन्दुओं का कत्ल देश के विभिन्न हिस्सों में किया जा चुका है अगर पुणे पुलिस पर भरोसा किया जाए तो उसने 300 जिहादियों की सूची देश में हुए दर्जनों धमाकों से पहले इसी सरकार को दी है। आज तक क्या इस सरकार ने इन जिहादियों को पकड़ने के लिए इतनी तत्परता दिखाई है जितनी हिन्दुओं को झूठे मामलों में फंसाने के लिए दिखा रही है ?

एक बात और भी चौंका देले वाली है कि जब उत्तर प्रदेश में सी आर पी एफ कैंप पर हमला करने वाले जिहादियों ने मुम्बई पर हमले की जानकारी दी तो उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा ये सूचना महाराष्ट्र सरकार को दी गई तो महाराष्ट्र सरकार ने उन जिहादियों से पूछताछ करने या एटीएस द्वारा रिमांड पर लेने से क्यों इन्कार कर दिया गया ?

1993 में मुम्बई को बम्ब विस्फोटों से दहलाकर सैंकड़ों हिन्दुओं को कत्ल व हजारों को घायल करने वाले षड्यन्त्र के सूत्रधार जिहादी आतंकवादी को आज तक पकड़ना तो दूर उसे पकड़ने की कोई गम्भीर कोशिश तक नहीं की गई । और तो और उसकी अवैध सम्पति को आज तक बेचने का साहस तक न दिखा सकी ये सरकार । राम जी के भाई को तो झट से पकड़ कर जेल मे ड़ाल दिया । काश इतनी चुस्ती इस जिहादी दाऊद के परिवार को जेल में डालने के लिए दिखाई होती । तब तो दर्जनों शिकायतें मिलने के बाद भी कार्यवाही करने का साहस ये हिन्दुविरोधी सरकार नहीं जुटा पाती !

साहस जुटाय भी कैसे क्योंकि इस जिहाद समर्थक सरकार को पता है कि दाउद को पालने व बचाने वाले सब लोग इस सरकार के सहयोगी ही तो हैं । वरना क्या बात है कि जिस दाउद की महफिलों में हमारे फिल्मी कलाकार अपना शरीर बेचकर आते हैं , उस दाउद की महफिलों में हमारे खुफिया विभाग के लोग नहीं पहुंच पाते ?

हमें तो शक ही नहीं विसवाश होता जा रहा है कि हिन्दुओं को ऐसे जिहादी आतंकवादियों के कहने पर ही जेलों में डाल कर हिन्दू आतंकवादी हिन्दू-आतंकवादी का शोर मचाया जा रहा है जागो मेरे प्यारे बेसमझ आपस में लड़ने वाले हिन्दूओ बचा सकते हो तो बचा लो अपने देश को इन विके हुए गद्दारों के षड्यन्त्रों से वरना अनर्थ हो जाएगा हिन्दू कहीं के नहीं रहेंगे !

पिछले 20 वर्षों से भारत जिहादी हमलों को झेल रहा है क्या किसी जिहादी मौलवी या आतंकवादी के निजी मामलों को इस तरह उछाला गया है जिस तरह इन हिन्दुओं के निजी मामलों को उछाला जा रहा है या ऐसा वहशीयाना व्यावहार किसी जिहादी के साथ किया गया जैसा इन हिन्दुओं के साथ किया जा रहा है ?

ये सब करते हुए ये हिन्दुविरोधी गिरोह ये क्यों भूल जाता है ये जो हिन्दू जनता है वो सब जानती है कि देशभक्त योद्धा कैसे होते हैं वो देशद्रोहियों से बचने के लिए क्या-क्या करते हैं उन्हें बदनाम करने के लिए गद्दार कैसे-कैसे षड्यन्त्रों का सहारा लेते हैं !

ये हिन्दू अच्छी तरह जानता है कि ये वही मीडीया है जो अबु सलेम व दाउद इब्राहीम जैसे गद्दार जिहादियों को सम्मान सूचक भाषा से सम्बोधित करता है व ऐसे राक्षसों से हिन्दुओं की रक्षा में लगे हिन्दुओं और उनके संगठनों को असंसदीय भाषा से सम्बोधित करता है और करे भी क्यों न क्योंकि देश के गद्दारों व हिन्दूविरोधियों के पैसे और संरक्षण से ही तो ये देशद्रोही चैनल चलते हैं ! और उन्हीं के बारे में कुछ आपत्तिजनक बोलेगा तो मार पड़ेगी ।

आज तक जिहादी आतंकवादियों ने जितने भी हमले बोले उन सब में इस मीडिया ने वही बोला जो जिहादी बोलते हैं और जो जिहादियों को अच्छा लगता । एकमात्र जिहादी हमला जिस में मीडिया निष्पक्ष रहा वो था बटाला हाउस मुठभेड़ और परिणांम सबके सामने है जिहादियों के ठेकेदार अमरसिंह ने मीडिया की वो कुटाई करवाई कि आज तक इस मीडिया ने जिहादी आतंकवाद का परदाफाश करना तो दूर देश में छुपे जिहादियों की ओर उंगली तक उठाने का साहस न किया । करते भी कैसे जान बची और लाखों पाय ।

हिन्दूओ समझो कि अगर इस हिन्दुविरोधी देशद्रोही गिरोह के गाली-गलौच से बचना है तो इनकी जमकर कुटाई करना ही एकमात्र तरीका है ।

मुस्लिम जिहादियों द्वारा कुटाई के बाद इस मीडिया द्वारा फिर से शुरू हो गया हिन्दुओं को गाली-गलौच करने व आतंकवादी कहकर बदनाम करने का सिलसिला ।

मीडिया अच्छी तरह से जानता है कि निर्दोष हिन्दू को जितनी मर्जी गाली निकालो, उसको जितना मर्जी बदनाम करो, जो मन में आए कहते रहो बेचारा क्या करेगा ?

ठहरा जो सनातन में विश्वाश करने वाला हथियार तो उठा नहीं सकता, कत्ल तो दूर पिटाई तक तो कर नहीं सकता ।

परन्तु अगर कहीं कातिल जिहादियों को कातिल कह दिया तो फिर ये जिहादी और इन जिहादियों के सैकुलर दलाल इस मीडिया से जुड़े लोगों का जीना हराम कर देंगे वो भी अगर जिन्दगी बख्श दी जाएगी तो ।

यही वजह है आज तक इस देशद्रोही मीडिया ने जितने भी स्टिंग आपरेशन किए उनमें से अधिकतर (95%) हिन्दुत्व की बात या समर्थन करने वालों के विरूद्ध उनको बदनाम करने के लिए किए ।

एक स्टिंग आपरेशन जिसमें इस हिन्दुविरोधी सरकार को बचाने के लिए जिहादी दलालों द्वारा पैसे देकर सांसदों को खरीदते दिखाया गया उसे समय पर दिखाने के बजाए कई दिन बाद दिखाया गया वो भी पूरा नहीं ताकि इस देशद्रोही सरकार को बचाया जा सके ।

ये सब किया उस देशविरोधी चैनल ने जो चर्च के पैसे से चलता है व दिनरात हिन्दुओं, उनके संगठनों व साधु सन्तों को असंसदीय भाषा में डंके की चोट पर गाली गलौच करता है व अपने आकाओं को अपने हिन्दुविरोधी होने का प्रमाण देता है ।

खैर छोड़ो विदेशी सोच के गुलाम इस बिके हुए मीडिया से और उम्मीद भी क्या कर सकते हैं !

पर इस एटीएस को क्या कहें जो अपनी बात को अपने आप ही काट कर स्पष्ट संकेत दे रही है कि ये कोई जांच नहीं ये तो हिन्दुओं व उनके संगठनों को बदनाम करने का षड्यन्त्र है जो इस हिन्दुविरोधी-देशविरोधी जिहाद व धर्मांतरण समर्थक गठबंधन के भारी दबाव में एटीएस को मजबूरी में करना पड़ रहा है आप सोचेंगें हमें कैसे पता चला तो देखो जरा ।

सबसे पहले कहा गया हिन्दू आतंकवादी पकड़ा गया। नाम सामने लाया गया एक महिला का वो भी घरबार छोड़कर भगवान के काम में लगी एक साध्वी का ।

पकड़ने के बाद कहा गया ये साध्वी एबीवीपी से सबन्ध रखती है पता चला साधवी जी ने 1997 में ये संगठन छोड़ दिया । फिर कहा ये हिन्दू जागरण मंच से है पता चला इस संगठन में महिलाएं होती ही नहीं । फिर नाम आया राष्ट्रीय जागरण मंच का फिर बजरंग दल का फिर देश के सबसे शांतिप्रय देशभक्त संगठन आर एस एस का और अब अभिनव भारत जैसे घोर राष्ट्रवादी संगठन का… मतलब आरोपी एक— संगठन आधा दर्जन ।

इस देशद्रोही गिरोह व हिन्दुविरोधी मीडिया ने मिलकर शोर मचा दिया सारे हिन्दूसंगठनों व साधु-सन्तों में आतंकवादी हैं और जोर-शोर से ऐसा महौल बनाया मानो प्रतिबन्ध अब लगा कि अब लगा लेकिन जागरूक हिन्दुओं के हाव भाव को देखते हुए इस हिन्दुविरोधी सरकार का हौसला न पड़ा ।

बात यहीं रूक जाती तो शायद सरकार की पोल यूँ न खुलती । अब कहा गया सेना के बड़े-बड़े अधिकारी इस जिहादियों को मारने के बहुत बड़े षड्यन्त्र में शामिल हैं ।

बम्ब विस्फोट एक मारे गये जिहादी पांच हिन्दू आतंकवादियों का षड्यन्त्र बहुत बडा ?

बम्ब विस्फोट सैंकड़ों मारे गये हिन्दू हजारों गुमराह मुस्लिम भाईयों का काम कोई मुस्लिम आतंकवादी नहीं कोई षड्यन्त्र नहीं !

पता लगा ऐसी होती है सैकुलर सरकार अल्पसंख्यकों की सरकार विदेशियों की गुलाम- कातिलों की सरकार !

अब पकड़े गये लैफ्टीनैंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित जो जिहादियों व सेकुलरों के नैटवर्क का पर्दाफाश करने वाले थे । तर्क दिया गया कि ये साध्वी जी सहित कई उग्र हिन्दुओं के समपर्क में थे ।

अरे भई कुछ तो होश करो जो जिहादियों के विरूद्ध खुफिया जानकारी जुटा रहा हो उसको जिहादियों के विरूद्ध जनता को जागरूक कर रहे हिन्दूसंगठनों से उनके पास उपलब्ध जानकारी लेने के लिए देशहित में सम्पर्क करना ही पड़ेगा ऐसा तो नेहरू जी को भी चीन द्वारा किए गये आक्रमण के दौरान करना पड़ा था और इसी के परिणामस्वरूप संघ की एक बटालिएन को गणतन्त्र दिवस परेड में हिस्सा लेने के लिए बुलाया गया ।

कहा गया प्रसाद ही मास्टरमांइड है प्रसाद ने ही आर डी एक्स दिया । समझौता एक्सप्रैस में भी विस्फोट इसी आर डी एक्स से किया गया । पता चला समझौता एक्सप्रैस विस्फोट में आर डी एक्स का प्रयोग ही नहीं हुआ ! लैफ्टीनैंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित की पहुँच आर डी एक्स तक थी ही नहीं क्योंकि वो खुफिया विभाग में थे न कि एक्शन विभाग में ! फिर इस प्रखर राष्ट्रभक्त के ऊपर छोटे-छोटे काल्पनिक मामले दर्ज करने का सिलसिला शुरू हुआ ।

फिर नाम उछाला गया भाजपा का कहा गया एक विधायक की गिरफ्तारी होने वाली है । जब अदित्यनाथ जी योगी ने ललकारा हिन्दुओं के कातिल जिहादियों को अपना भाई बताने वाले गृहमन्त्री को – तो पकड़ा गया सुधाकर चतुर्वेदी जी को ।

कहा गया अब हिन्दू क्रांतिकारियों के सहयोगी बड़े –बड़े नामों का भांडाफोड़ होने वाला है नाम व फोटो सामने लाए गये डा. अब्दुल कलाम जी, डा. प्रवीण भाई तोगड़िया जी, श्री श्री रविशंकर जी, माननीय संघचालक सुदर्शन जी जैसे निष्ठावान देशभक्तों के ।

बढ़ते जनआक्रोश को देखकर इस हिन्दुविरोधी सरकार ने फूट डालो और राज करो के अपने एजंडे को आगेबढ़ाते हुए अफवाह फैला दी कि ये हिन्दूक्राँतिकारी संघ के अधिकारियों को मरवाना चाहते हैं ! वाह क्या बात है झूठ बोलो तो ऐसा कि सुनने वाले के होश उड़ जांए !

सच में थोड़ी देर तो हम भी सन रह गये फटाक से मन में सरकार के हिन्दुविरोधी रूख को देखते हुए विचार आया कि कहीं सरकार शहीद श्यामा प्रसाद मुखरजी जी की तरह कहीं जिहादियों के साथ मिलकर इन संघ के अधिकारियों को मरवाकर दोष हिन्दू क्राँतिकारियों पर डालने की योजना तो नहीं बना रही ?

काश इनको पता होता संघ की कार्य पद्धति का जहां राष्ट्र से ऊपर कोई नहीं बड़े से बढ़ा पदाधिकारी भी नहीं।

अब आप खुद ही फैसला कर लो कि क्या सच है क्या झूठ पहले कहा गया ये क्रांतिकारी संघ के हैं अब कह रहे हैं संघ इनके निशाने पर है!

अच्छा मान लेते हैं कि जो सरकार कह रही है वो सब सत्य है मतलब जिहादियों के हमलों से तंग आकर इन सब क्राँतिकारियों ने मिलकर सिमी के अड्डों को ध्वस्त करने की योजना बनाई । और उसे अंजाम तक पहुँचाने के लिए कुछ बम्ब विस्फोट भी किए । ये भी मान लेते हैं कि इन बम्ब विस्फोटों में जिहादियों के साथ-साथ कुछ आम मुसलमान भी मारे गये । तो भी इन क्राँतिकारियों ने क्या गलत किया जो हिन्दुओं को मार रहे थे उन्हें मारकर इन्होंने एक तरह से कानून की मदद ही तो की है रही बात निर्दोषों के मारे जाने की तो किसी भी युद्ध में थोड़े बहुत तो निर्दोष मारे ही जाते हैं।

अगर देश में कोई देशभक्त सरकार होती तो इन क्राँतिकारियों को हिन्दुओं की जान माल की रक्षा के लिए संघर्ष करने के लिए ईनाम देती । पर इसे देश का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि देश में एक ऐसी हिन्दुविरोधी जिहाद समर्थक सरकार है जो जिहादी आतंकवादियों को न खुद मारती है न किसी को मारने देती है उल्टा देशभक्त साधु सैनिकों हिन्दुओं को फाँसी पर चढ़ाने के लिए षड्यन्त्र रचती है ।

जागो ! हिन्दू जागो !

बैसी भी आज तक जो हजारों हिन्दू इन मुस्लिम जिहादियों द्वारा मारे गए वो सब भी तो निर्दोष ही थे । दोष था तो सिर्फ इतना कि वो देशविरोधी नहीं थे, मुस्लिम जिहादी नहीं थे, गद्दार नहीं थे !

जिस गिरोह ने इन हिन्दुओं के मारे जाने को सही ठहराने के लिए ये तर्क दिया कि मस्जिद(राम मन्दिर) को गिराया गया इसलिए जिहादियों ने ये सब किया और जिस मीडिया ने उनके इस तर्क का समर्थन और प्रचार प्रसार किया यहां तक कहा कि ये जिहादी सरकार के भाई हैं वो किस मुँह से इन हिन्दू क्राँतिकारियों को हिन्दू आतंकवादी कह रहे हैं ?

इस देशद्रोही जिहाद समर्थक गिरोह का इन हिन्दुओं को अपशब्द कहना बिल्कुल वैसा ही अपराध है जैसा अपराध इन गद्दारों ने शहीद मोहन चन्द शर्मा जी की शहीदी पर सवाल उठाकर किया था !

इसलिए इन गद्दारों से हम बात नहीं कर रहे। हम बात कर रहे हैं उन हिन्दुओं से जो धर्म-अधर्म की इस जंग में कोने पर खड़े होकर इतने जुल्म हो जाने के बाद भी अनिर्णय की स्थिति में हैं।

हम कह रहे थे कि युद्ध में कुछ निर्दोषों का मारा जाना स्वाभाविक ही है। अगर आपको लगता है कि ये युद्ध नहीं है तो जाओ उन हिन्दुओं के पास जो अपने ही देश में अपने ही घर से उजड़ गये ।

या फिर उन हिन्दुओं के पास जिनमें से किसी ने अपने माँ-बाप, किसी ने भाई-बहन,किसी ने अपने बच्चों को, तो किसी ने अपने सुहाग को इन जिहादियों के हाथों खोया है कईयों ने तो अपने सामने इन जिहादियों के हाथों अपने 0 से 18 साल के बच्चों को हलाल होते देखा है। कहीं-कहीं तो इन जिहादियों ने दूध पीते बच्चों को भी हलाल कर दिया। जो माँ ,बहन-बेटियों की आबरू से खिलवाड़ किया गया सो अलग और ऐसे प्रताड़ित हिन्दुओं की संख्या लाखों में है ।अब ये युद्ध नहीं तो और क्या है ?

ये युद्ध किसी दूसरे देश के साथ नहीं ये बाहरी सहायता से चल रहा आंतरिक युद्ध है। जिसे जिहादियों और धर्मान्तरण के ठेकेदारों ने हिन्दुओं के विरूद्ध छेड़ रखा है अब ये हिन्दुओं के ऊपर है कि इन आसुरों के हाथों कायरों की तरह मरना है या फिर जंगे मैदान में उतर कर जीत हासिल करनी है या वीरगति को प्राप्त होना है।

हमें तो कायरों की तरह मरना स्वीकार नहीं इसलिए हम जंगे मैदान में उतर रहे हैं। आपको किनारे खड़े होकर तमाशा देखना है या फिर भगवान के इस काम में आहुति देनी है ये खुद फैसला करो !

 

आतंकवाद भी बाहरी देशों के बजाए अपने नेताओं की आतंकवाद समर्थक नीतियों की बजह से कहीं ज्यादा फला फूला है ? क्यों ये सेकुलर गिरोह सख्त कानून का विरोध कर भारत को एक ऐसा देश बनाने पर तुला है कि दुनिया के सब अपराधी भारत को अपना गढ़ बनाकर भारतीयों पर हमला कर उनको मिटाने के बाद दुनियाभर में अपराध फैलाकर भारत को बदनाम करें ।

अगर इस सेकुलर गिरोह ने ये हिन्दुविरोधी आतंकवाद समर्थक नीतियां यथाशीघ्र नहीं छोड़ीं तो वो दिन दूर नहीं जब भारत को भी पाकिस्तान व अफगानीस्तान जैसे हालात का सामना करना पड़ेगा और इस सब के लिए जेहादियों को शरण देने वाले मुसलमानों से कहीं ज्यादा यह सेकुलर गिरोह जिम्मेवार होगा । आज जो हालात देश में बनते जा रहे हैं उस सब के लिए भी मुसलमानों से ज्यादा मुस्लिम जेहादियों को उकसाने वाले व उनके अनुकूल वातावरण बनाने वाले ये सेकुलर नेता ही जिम्मेवार हैं।

बेशक पाकिस्तान आतंकियों का कारखाना बन चुका है पर जिहादियों को स्थानीय सहायता तो पाकिस्तान नहीं दे रहा । आतंकवादियों को फाँसी देने से तो पाक नहीं रोक रहा पकिस्तान का नाम लेकर ये धोखेबाज नेता हमें इस युद्ध में उत्तरने से रोक रहे है।

जब ये सत्य है कि ये युद्ध पाक लड़ रहा है तो फिर वहां के लिए बसें और ट्रेनें क्यों चलाई जा रही हैं ? क्यों बंद नहीं कर दिया जाता इन सब को ? क्यों रद्द नहीं कर दिया जाता उन सब समझौतों को जो भारत के बजाय पाकिस्तान को लाभ पहुंचाते हैं ? क्या जिहादियों को बचाने के लिए पोटा पाकिस्तान ने हटाया ? वो तो अपने यहां आतंकवादियों को गोली मार रहा है और ये सैकुलर गिरोह माननीय सर्वोच्चन्यायालय के आदेश के बावजूद जिहादियों को पाल रहा है उनको बचाने के उपाय ढूंढ रहा है व उनके विरूद्ध लड़ रहे देशभक्तों को प्रताड़ित कर रहा है !

पाक तो बीजा छूटों, बसों व ट्रेनों का भी विरोध करता है फिर इन नेताओं को क्या खाज होती है ये सब करने की ?

क्योंकि या तो ये जानते हैं सब कतलो-गारद पाक की मदद से भारत के मुसलमानों में छिपे जिहादी ही कर रहे हैं या फिर मुस्लिम देश इन नेताओं को खरीद कर मुस्लिम जेहादियों के अनुकूल वातावरण बनाने के लिए देशविरोधी मानवाधिकार संगठनों,गद्दार लेखकों, देशविरोधी समाचार पत्रों व हिन्दुविरोधी मीडिया के माध्यम से दवाव वनाकर बाध्य कर देते हैं।

हम तो कहते हैं कि भारतीय सेना को सिमी जैसे मुस्लिम आतंकवादी संगठनों, मुसलिम घुसपैठियों का समर्थन करने बाले नेताओं का नार्को करवाकर पता लगाना चाहिए कि इस साजिस में कौन-कौन दल व नेता सामिल हैं व ऐसे गद्दारों को फांसी पर चढ़ाना चाहिए।

बेशक देश में बम्मविस्फोट करने वाले अधिकतर मुस्लिम जिहादी हैं पर उनकी पैरवी करने वाला, उनके अनुकूल वातावरण बनाने वाला उन्हें उकसाने वाला, तो यही सेकुलर गिरोह है ।

अगर आप सोच रहे हैं कि इन जिहादियों, नक्सलियों, माओवादियों, चर्च प्रेरित आतंकवादियों को बारूद कहाँ से मिलता है बेशक पाकिस्तान से भी मिलता है पर उसे रोकने की जिम्मेवारी भी तो सरकार की है। जरा जी न्यूज की इस रिपोर्ट को देखो ।

इस रिपोर्ट(23-11-08) के अनुसार पिछले कुछ समय में 20,000 किलो बारूद,1,00,000 डेटोनेटर,1500 जिलेटिन छड़ें, 5200 मी से अधिक डेटोनेटिंग फ्यूज, सेफ्टीफ्यूज इसके अतिरिक्त टनों के हिसाब से अन्य विस्फोटक देश की विभिन्न विस्फोटक बनाने वाली फैक्टरीयों से चोरी के बहाने गायब करवाया जा चुका है जब इस बारे में महाराष्ट्र के विस्फोटक नियंत्रक जोआब अली से बात की गई तो उसने इसे आम घटना बताया।

रही बात जिहादियों की ट्रेनिंग की तो कुछ दिन पहले ही राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने देश में चल रहे आतंकवादी ट्रेनिंग कैम्पों की संख्या 800 बताई थी। ये संख्या तो तब है जब मस्जिदों में चल रहे अधिकतर जिहादी ट्रेनिंग कैंम्पों तक न सरकार की पहुँच है न पहुँच बनाने की कोशिश है।

अब आप ही फैसला करो कि ये आन्तरिक युद्ध है कि नहीं । अब आप कहेंगे कि बेशक ये युद्ध है पर इसके लिए हमारे पास सुरक्षा बल हैं । आपको यह ध्यान रखना चाहिए कि पुलिस- बोले तो-एटीएस वो ही करती है जो सरकार चाहती है जो सरकार सत्ता में आते ही जिहादियों के लिए खौफ बन चुके पोटा को हटाती है क्या पुलिस और जिहादियों के लिए ये संकेत काफी नहीं ?

अब रही बात सेना की तो भारतीय सेना बिना सरकारी आदेश के कोई एक्शन नहीं करती । भारतीय सेना पर सरकार द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में एक्शन के दौरान क्या-क्या प्रतिबन्ध लगाये जाते हैं ये तो सेना ही जानती है। वैसे आपकी जानकारी के लिए बता दूँ कि भारत में प्रतिदिन औसत 11 जवान शहीद होते हैं । इस युद्ध को निर्णायक रूप से सेना तभी लड़ सकती है जब देश की बागडोर सेना खुद अपने हाथों मे ले ले ।

काश ! ऐसा हो पाता तो कम से कम पाँच साल देश इस विदेशी अंग्रेज का गुलाम तो न रहता । एक विदेशी अंग्रेज इतनी बड़ी भारतीय सेना के होते हुए देश को गुलाम बनाकर बैठ जाए और देश को बर्बाद करने का हर प्रयत्न करने में कामयाब रहे । जरा सोचो सैनिक भाईयो सोचो कि शहीद भक्त सिंह जी के अंग्रेजों को निकालने के लिए किए गये बलिदान का ये अपमान नहीं तो और क्या है ?

अब आप ही बताओ जब देश में एक विदेशी अंग्रेज की गुलाम जिहाद व धर्मांतरण समर्थक सरकार सत्ता में हो तो इस जिहादियों द्वारा थोपे गये युद्ध को कौन लड़े ? क्योंकि ऐसी हिन्दुविरोधी सरकार आतंकवादियों पर हमला बोलने की इजाजत तो सुरक्षाबलों को दे नहीं सकती । ऐसे हालात में अगर हिन्दू हथियार न उठाये तो क्या निहत्था मरे?

आशा है कि आप समझ गये होंगे कि ये बाहरी व आन्तरिक सहयोग से हिन्दुओं पर थोपा गया आन्तरिक युद्ध है जिसे हिन्दुओं को ही लड़ना पड़ेगा क्योंकि इसे न लड़ने या हारने की स्थिति में हिन्दुओं को ही मरना या बेघर होना पड़ेगा ।

अतः आशा है कि आप भगवान का नाम लेकर इस युद्ध में तन-मन-धन सहित कूद पड़ेंगे व इन असुरों से देश को आजाद करवाने के इस यज्ञ में भाग लेकर इस मानव सभ्यता को बचाने में सफल होंगे ।

अगर आपको ये लग रहा है कि हम हिन्दू क्राँतिकारियों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं तो आप गलत सोच रहे हैं आपको इस पुस्तक को फिर से पढ़ने की जरूरत है क्योंकि यह परम सत्य है कि एक क्राँतिकारी का बलिदान अनेकों क्राँतिकारियों को जन्म देता है इन क्राँतिकारीयों के जेल में जाने के साथ ही हिन्दुओं में हिन्दूक्राँति की ज्वाला तीव्र हो रही है…

अपना तो पहले से ही स्पष्ट मानना है कि लातों के भूत बातों से नहीं मानते मतलब साफ है अगर दुनियां में कहीं भी किसी भी हिन्दू को ईसाईयत( नक्सलवाद), इस्लाम, धर्मनिर्पेक्षता, वामपंथ(माओवाद) के नाम पर मारा जाता है तो उससे दोगुनी संख्या में कातिलों व उनके समर्थकों को मारकर ही समस्या का समाधान किया जा सकता है ।

अन्यथा मरते रहो ये राक्षस आपको तब तक मारते रहेंगे जब तक आप खत्म नहीं हो जाते और मानवता का शत्रु ये सैकुलर गिरोह आपके कत्ल को सही ठहराने के लिए इन कातिलों की अनपढ़ता ,गरीबी से लेकर राममन्दिर आन्दोलन तक की सहायता लेता रहेगा और अगर आप विरोध करेंगे तो आपको सांप्रदायिक कहकर गाली निकालेगा अगर इतने से काम चल गया तो ठीक नहीं तो आपको जिहादियों के इशारे पर हिन्दू आतंकवादी कहकर सारी दुनिया में बदनाम कर आपके साधुसन्तों-सैनिकों को अपमानित कर इन जिहादियों व धर्मांतरण के ठेकेदारों के हिन्दू-मिटाओ हिन्दू-भगाओ अभियान को सफल बनाने में हर संभव सहयोग देगा !

जागो ! हिन्दू जागो !

हम तो साधु-सन्तों व शान्ति की बात करने वाले देशभक्त हिन्दूसंगठनों से भी ये विनम्र प्रार्थना करेंगे कि देश के बिगड़ते हालात को देखते हुए अहिंसा के मार्ग पर बढ़ने के अपने संकल्प पर पुनर्विचार करें व परिवेश को ध्यान में रखते हुए अपनी योजनांयें बनायें कहीं ऐसा न हो आप अहिंसा का पालन करते रह जांयें और 1947 की तरह ये देशद्रोही सैकुलर गिरोह करोंड़ों हिन्दुओं का कत्ल करवाकर देश को जिहादियों के रहमोकरम पर छोड़ दे ।

कब तक आप ये सब देखते रहेंगे कबतक हमारे जैसे हिन्दू कार्यकर्ताओं को मर्यादा व अहिंसा का तरक देकर दरकिनार करते रहेंगे ।

जब मर्यादा पुर्षोतम भगवान राम के ही अस्तित्व को ही नकार दिया गया हो तो काहे की मर्यादा। वैसे भी गीता में कहा गया है

धर्मों रक्षति रक्षितः

अर्थात धर्म उसकी रक्षा के लिए है जो धर्म का पालन करता है। धर्म के अस्तित्व को ही नकारने वाले इन आतंकवादियों व सैकुलर असुरों के लिए काहे की अहिंसा।

अगर मानवता को बचाना है तो इन असुरों पर निर्णायक विजय जरूरी है और निर्णायक विजय के लिए इन असुरों का मुकाबला इन्हीं के तरीके से करना जरूरी है वरना कहीं ऐसा न हो इतिहास आपको भी भीष्म-पितामह की तरह कभी माफ न करे।

अहिंसा की बात करने वाले हिन्दू ही बताएं कि जब हर तरफ से हथियारबंद जिहादी ,धर्मांतरण के ठेकेदार ईसाई, नक्सलवादी, माओवादी (सीपीआई,सीपीएम) , चर्च प्रेरित आतंकवादी हिन्दुओं पर हमला कर रहें हैं और धर्मनिर्पेक्षता की आड़ में ये देशद्रोही गिरोह निर्दोष हिन्दुओं की रक्षा करने के बजाए इन कातिलों का हर तरह का सहयोग दे रहा हो तो फिर हिन्दू हथियार क्यों न उठायें ?

जब हिन्दू हथियार उठायें तो फिर सारा हिन्दूसमाज उनके साथ खड़ा क्यों न हो । और जब सारा हिन्दूसमाज उनके साथ खड़ा हो तो फिर दुशमन की क्या मजाल के बच के निकल जाए और दोबारा अपने हिन्दुओं की तरफ आँख उठाए।

हम इन हिन्दुओं को विनम्रतापूर्वक ये बताना चाहते हैं कि हिन्दुओं ने इस लड़ाई से बचने के लिए अफगानिस्तान से लेकर कश्मीर घाटी तक सबकुछ छोड़ दिया बदले में क्या मिला गाली, सांप्रदायिक आतंकवादी होने का लांछन, हमले पर हमला ?

हिन्दुओं ने सबके अस्तित्व को स्वीकार किया बदले मे क्या मिला हमारे आस्था के आधार स्तम्भ भगवान राम के अस्तित्व पर प्रश्न चिन्ह ?

हिन्दुओं ने बेघरों से लेकर आक्राँताओं तक को अपनी मातृभूमि भारतवर्ष में बसने दिया बदले में क्या मिला देश का विभाजन बचे हुए अखण्ड भारत के छोटे से टुकड़े से हिन्दुओं को ही उजाड़ने का षड्यन्त्र ।

नहीं चाहिए हमें ये शमशानघाट वाली शांति गोली मार दो ऐसी शांति की बात करनें वालों को जो हिन्दुओं के कत्ल व बेघर होने की वजह बने । स्पष्ट कर दो इन विधर्मियों को कातिल धर्मनिर्पोक्षतावादियों को–ये राष्ट्र हिन्दूराष्ट्र है सिर्फ हिन्दुओं का है- जिनको इसके हिन्दूराष्ट्र होने पर आपत्ति है छोड़ कर चले जांयें अपने-अपने देशों को वापिस जहां से आए थे वरना मिटा दिए जाओगे !

यहां औरंगजेब, बाबर ,गजनबी , डायर की जिहादी व धर्मांतरण की दलाल सन्तानों के लिए कोई जगह नहीं ये ऋषियों-मुनियों योगियों की भूमि है हिन्दुओं की भूमि है यहां अहिन्दुओं का क्या काम ?

भारत के इतिहास की ये निर्णायक लड़ाई हमारी मजबूरी है शौक नहीं ।

मुम्बई हमला खतरे की घंटी

मुम्बई हमला खतरे की घंटी

हम अपने प्यारे हिन्दूराष्ट्र भारत को अल्पसंख्यकवाद व धर्मनिर्पेक्षता की आड़ में चल रहे देशद्रोह हिन्दूविरोध को उन्हीं का मार्ग अपनाकर गद्दारों का इस पुण्य भूमि भारत से सफाया कर देने का प्रण लेकर इस अभिव्यक्ति के क्रम को विराम दे चुके थे कि 26/11/2008 को मुम्बई में जो हुआ उसने इस पुस्तक में अभिव्यक्त की गई युद्ध की शंका के साक्षात दर्शन करवा दिए ।

अब इस बर्बर इस्लामिक हमले के बारे में न लिखा जाए ऐसा कैसे हो सकता है ।

26 नवम्बर शाम को हमने बी. बी. सी. पर एक चर्चा सुनी जिसका शीर्षक था साँप्रदायिक आतंकवाद परन्तु इस सारी चर्चा का मकसद था हिन्दुओं को बदनाम करना व भारत में जिहादी आतंकवाद को विभिन्न कारण देकर न्यायोचित ठहराना । पहले तो हमने इस चर्चा के बारे में न लिखने का निर्णय लिया था लेकिन मुम्बई में हुए हमले ने हमें इन कातिलों के ठेकेदारों से बात करने पर मजबूर कर दिया ।इस कार्यक्रम में के एस ढिल्लों सेवानिवृत भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी जो पुलिस सुधारों पर काम कर रहे हैं ऐसा बताया गया । ये ढिल्लों कहते हैं कि भारत में कोई मुस्लिम आतंकवाद नहीं है सिर्फ कानून व्यवस्था की समस्या है और ये समस्या इसलिए पैदा हो रही है क्योंकि भारत में मुसलमानों को दबाने की कोशिश हो रही है।

ढिल्लों जी आप पुलिस सुधारों पर काम कर रहें हैं या जिहादी आतंकवादियो को बचाने के सूत्रों पर । इस सब के लिए पैसे सीधे साउदी अरब से मिलते हैं या बाया पाकिस्तान होकर । याद रखो आज यदि ये समाज पुलिस पर संदेह करता है तो आप जैसे आतंकवादियों के चाकर उँचे पदों पर बैठे या रहे पुलिस अधिकारियों की वजह से । आप जैसे गद्दारों की वजह से ही स्वर्गीय मोहन चन्द शर्मा जैसे देशभक्त जवानों का बलिदान देने के बावजूद ये जिहादी दानव आपे से बाहर होता जा रहा है ।

इस कार्यक्रम में भारतीय मानवाधिकार आयोग के पूर्व अध्यक्ष जगदीश वर्मा कहते हैं कि इन जिहादी आतंकवादियों को रोकने के लिए न तो सख्त कानून बनाने चाहिए न ही इनको गोली मारी जानी चाहिए जिहादी जो कहते हैं उस पर सरकार को अमल कर इनकी समस्या का समाधान करना चाहिए ।

जगदीश जी इनकी समस्या का समाधान है भारत के सब हिन्दुओं का कत्ल कर यहां दारूल इस्लाम बनाना सिर्फ भारत ही नहीं सारी दुनिया को इस्लामी राज्य बनाना । जगदीश जी आपकी इसी सोच की वजह से आप दानवाधिकार आयोग बोले तो आतंकवादी अधिकार आयोग के संस्थापक सदस्य कहलाने के पात्र हैं आपका ही वो कार्यकाल था जिसने भारतीय मानवाधिकार आयोग को हिन्दुविरोधी आतंकवादी आयोग बना डाला और हिन्दुओं को अपने ही देश में मूलाधिकारों से वंचित होने का एहसास करवाया ।

हमें अफसोस होता है आपको ये बताते हुए कि मानवाधिकार कानून का पालन करने वाले शान्तिप्रिय नागरिकों के लिए होते हैं न कि हर तरह के कानून और मानबता के बन्धन तोड़ कर निर्दोश नागरिकों का खून बहाने के लिए प्रतिबद्ध आतंकवादियों के लिए ।

जिस भारत के इतने बड़े पद पर आप जैसे अमन चैन के शत्रु व आतंकवादियों के मित्र पहुँच जाँयें उस भारत को इन जिहादी राक्षसों के हमलों से कौन बचा सकता है। आपको ये समझना चाहिए कि हर रोज हो रहे आतंकवादी हमलों में मारे जाने वाले निर्दोष नागरिकों के कत्ल के लिए इन आतंकवादियों से ज्यादा आप जैसे इन आतंकवादियों के समर्थक जिम्मेदार हैं ।

हम तो कहते हैं कि अफजल जैसे जिहादियों को फाँसी पर चढ़ाने से पहले आप जैसे उचें पदों पर बैठे या रहे आतंकवादियों के पैराकारों को पहले फाँसी पर चढ़ाना चाहिए ताकि आम भारतीय अमन चैन से जिन्दगी जी सकें ।

कुलदीप नैयर जी कहते हैं भारत की सारी पुलिस खराब है और हिन्दुओं में तालिबान हैं।

ये कुलदीप नैयर जी वही हैं जो आज तक गोधरा में मुस्लिम भीड़ द्वारा ट्रेन में आग लगाकर जिन्दा जलाए गये हिन्दुओं की प्रतिक्रियास्वरूप मारे गये लगभग 700 मुसलमानों का विरोध करने के लिए दर्जनों लेख लिख चुके हैं लेकिन मुस्लिम जिहादी आतंकवादियों द्वारा मारे गये 60000 से अधिक हिन्दुओं व विस्थापित हुए लाखों हिन्दुओं के बारे में लिखते वक्त इनकी स्याही सूख जाती है ।

यह वही लेखक है जो बिल्कुल ऐसा ही हमला संसद भवन पर करवाने वाले जिहादी प्रोफैसर को छुड़ाने के लिए मोमबती जलाओ अभियान चलाता है व सरकार पर दबाव बनाकर उस जिहादी को छुड़ाने में सफल होता है और अपने तालिबानी साथियों को खुश करता है।

हम इस हिन्दुविरोधी देशविरोधी परजीवी को ये बताना चाहते हैं कि तालिबान हिन्दुओं में नहीं उन बिके हुए लेखकों में हैं जो संसद भवन पर हुए जिहादी हमले को झूठा बताकर जिहादियों का समर्थन कर लोकतन्त्र व देश की रक्षा के लिए शहीद होने वाले जवानों के बलिदान का अपमान कर अपने देशद्रोही होने का प्रमाण देते हैं।

ये तो इन देशविरोधियों की किस्मत अच्छी है कि आज देश में एक विदेशी की गुलाम सरकार है और देशभक्तों ने अभी शस्त्र नहीं उठाये हैं वरना आज तक ऐसे गद्दार लेखकों को या तो सरकार फांसी चढ़ा देती या कोई स्वाभिमानी हिन्दू गोली मार देता।

हम इन हिन्दुविरोधी लेखकों को बताना चाहते हैं कि समझदार लोग जिस पतल में खाते हैं उसी पतल में छेद नहीं करते चाहे शत्रु कितना भी पैसा क्यों न दे दे । याद करो उन लेखकों को जिन्होंने इन राक्षसों से देश धर्म को बचाने के लिए हर तरह के जुल्म सहने के बावजूद देशभक्ति से ओतप्रोत लेख लिखे ओर फिर देखो उन गद्दारों को जो चन्द टुकड़ों की खातिर तालिबानों को बचाने के लिए सड़कों पर उतर आते हैं !

मुम्बई में हुए इस हमले में अपने 20 जवान शहीद हुए जिनमें दो अजय कमांडो भी शामिल थे व कुछ बहादुर जवान घायल भी हुए । आओ मिलकर इन सब शहीदों को प्रणाम करते हुए प्रण लें व घायलों के शीघ्र स्वीस्थय लाभ के लिए पूजा करें।

“तेरा वैभव अमर रहे मां हम दिन चार रहें न रहें ’

इसके अतिरिक्त 160 भारतीय व 25 विदेशी मारे गये व 300 से अधिक घायल हुए । यह हमला ऐसे समय में किया गया जब भारत की हिन्दुविरोधी सरकार ने पुलिस को जिहादी आतंकवादियों से देश का ध्यान हटाने की खातिर निर्दोष शान्तिप्रिय हिन्दुओं को आतंकवादी सिद्ध करने में लगाया हुआ था । सरकार की इस देशविरोधी नीति की कीमत देश के बहादुर जवानों को शहीद होकर चुकानी पड़ी व शांतिप्रिय लोगों को अपनी जान गंवाकर और भारत को अपनी प्रतिष्ठा दांव पर लगाकर ।

पुलिस को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करवाना कितना जरूरी है इस बात का भी एहसास इस वक्त करना अत्यन्त आवश्यक है। पर एहसास वो कर सकते हैं जिनको देश की चिन्ता हो,देश से प्यार हो !

अब आप ही फैसला करो कि इन हमलों में हुए जान-माल के नुकसान के लिए पाँच वर्षों से जिहादियों के अनुकूल वातावरण बना रही इस देशद्रोही सरकार, गद्दार सेकुलर गिरोह व जिहाद समर्थक मीडिया को जिम्मेवार क्यों न माना जाए ?

इस हमले का सीधा प्रसारण अधिकतर समाचार चैनलों ने दिखाया जिसने हमारे जवानों के काम को मुशकिल बनाया व आतंकवादियों की सहायता की । क्योंकि ऐसा सम्भव है कि देश-विदेश में बैठे जिहादियों के आका इन चैनलों को देखकर जिहादियों की सहायता कर रहें हों ।

हालांकि कुछ चैनलों ने बाद में अपनी गलती का एहसास होने पर इस प्रसारण को सीधा दिखाने के बजाए कुछ देर बाद दिखाना शुरू किया । आपने देखा होगा कि कुछ देशद्रोही चैनलों ने किस तरह आतंकवादियों का गुणगान किया व उन्हें हीरो बनाकर प्रचारित करने का दुस्साहस किया ।

एक चैनल जो अलकायदा के सहयोगी चैनल अलजजीरा का सहयोगी है जो लगातार हिन्दूविरोध के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है। ये हिन्दूविरोध की ये प्रक्रिया इस चैनल के अलजजीरा के साथ समझौता करने के बाद से ही दिख रही है पहले ये चैनल बाकी सब चैनलों से अच्छा होता था ।

इस चैनल ने तो खुद को मुस्लिम जिहादियों का चैनल होने का दावा ही कर डाला जो यह सिद्ध करता है कि अधिकतर चैनलों में अपने आप को ज्यादा से ज्यादा मुस्लिम जिहाद समर्थक सिद्ध करने की प्रतिस्पर्धा हो रही है ।

इस चैनल ने तो तब हद ही कर दी जब इसने अपने सूत्रों का प्रयोग करते हुए एक मुस्लिम जिहादी आतंकवादी का इंटरव्यु ही ले डाला । हालांकि ये इन्टरव्यु करना सही नहीं था पर जब कर ही दिया तो ये इन्टरव्यु सब देशभक्त हिन्दुओं की आँखे खोलने वाला निकला ।

आतंकवादी ने स्पष्ट कहा कि भारत में भगवा सरकार है हिन्दुओं की सरकार है यह वही आरोप है जो ये सेकुसर गिरोह व हिन्दुविरोधी मीडिया हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों,शिवसेना व भाजपा पर लगाते हैं ।

हमें अचम्भा हुआ कि जो सरकार पूरी तरह से देशद्रोह व हिन्दूविरोध के मार्ग पर चलते हुए मुस्लिम जिहादियों को खुश करने के लिए मुस्लिम जिहादी आतंकवादी को फाँसी नहीं देती है, देश के लिए शहीद हुए जवानों का अपमान करती है, आतंकवादियों को खुश करने के लिए पोटा को हटाकर कोई नया जिहाद विरोधी सख्त कानून नहीं बनाती है, हिन्दुओं के बच्चों को उनके मूल अधिकारों से वंचित करती है , साधु-सन्तों को अपमानित करती है, हिन्दूविरोध में मर्यादा और बेशर्मी की हर हद पार करते हुए मर्यादापुर्षोत्तम भगवान श्री राम के अस्तित्व को नकारती है। उस सरकार को भी मुस्लिम जिहादी ने मुसलमान विरोधी, हिन्दुओं की सरकार बताया ।

उस जिहादी ने इस सरकार से मुस्लिमबहुल क्षेत्रों को आजाद करने के लिए कहा क्योंकि ये मुसलमान किसी हिन्दू की गुलामी सहन नहीं कर सकते । हिन्दुस्थान के मुसलमानों को हिन्दुओं की गुलामी से आजाद न करने पर हिन्दुओं पर जिहादी हमले और तेज करने की चेतावनी दी । इस मुस्लिम जिहादी ने इस जिहाद समर्थक सैकुलर गिरोह के स्वर में स्वर मिलाते हुए कहा कि अयोध्या में राममन्दिर नहीं बनना चाहिए ।

साथ ही ये भी कह दिया कि जब भी मुसलमान हिन्दुओं को गोधरा की तरह जिन्दा जलां दें या बम्ब हमलों में मार दें तो हिन्दुओं को निहत्था बिना लड़े मरना चाहिए गुजरात की तरह इस हमले का जबाब देकर जिहादियों के समर्थकों को नहीं मारना चाहिए । यही मांग ये जिहाद समर्थक सैकुलर गिरोह करता रहता है ।

अन्त में इस जिहादी की सारी बातों का सार यही था कि ये मुस्लिम जिहाद तब तक जारी रहेगा जब तक भारत के सब मुस्लिमबहुल क्षेत्रों को मुस्लिम देश नहीं बना दिया जाता(वन्देमातरम् का विरोध इसी कड़ी का एक हिस्सा है) मतलब साफ है कि जब तक कश्मीर घाटी की तरह सब हिन्दुओं को हलाल नहीं कर दिया जाता या फिर वो भाग नहीं जाते !

कुल मिलाकार इस मुस्लिम जिहादी आतंकवादी ने वो ही बातें कहीं जो भारत के मुस्लिम जिहादी और उनका समर्थक ये सैकुलर गिरोह कहता है अब आप ही फैसला करो कि ये गिरोह किसका है देशविरोधी आतंकवादियों का या देशभक्त भारतीयों का ?

अगर आप सोच रहे हैं कि ये आवाज भारतीय मुसलमानों की नहीं तो जरा ये पढ़ो ।

मुहम्मद अजहरूद्दीन मुसलमान होने के बावजूद देश की क्रिकेट टीम में चुना जाता है देश की टीम का कप्तान बनाया जाता है क्या कोई हिन्दू उसके मुस्लिम होने के कारण उसके चुने जाने या कप्तान बनने का विरोध करता है नहीं न ।

पर जब यही अजहरूद्दीन टीम के हित बेचता हुआ पकड़ा जाता है तो ये क्या कहता है क्योंकि मैं मुसलमान हूँ इसलिए मुझे फंसाया जा रहा है ।

जावेद अखतर और उसकी घर वाली गाने/फिल्में बनाकर देश के हिन्दुओं से करोड़ों रूपये कमाते हैं कोई हिन्दू उनके गानों/फिल्मों का उनके मुसलमान होने की वजह से विरोध नहीं करता लेकिन शबाना आजमी कहती है कि भारत में मुसलमानों के साथ भेदभाव होता है क्योंकि किसी सोसाइटी में विशेषाधिकार देकर उसे मकान नहीं दिया गया । जाबेद अखतर तो अक्सर उन देशभक्त हिन्दू संगठनों के बिरूध जहर उगलता रहता हैं जो मुस्लिम जिहादियों द्वारा हिन्दुओं पर किए जा रहे हमलों का विरोध करते हैं ।

देश के विभाजन के वक्त मुसलमानों द्वारा देश के साथ की गई गद्दारी से शर्मसार होकर अपना नाम बदलने वाले दिलीप कुमार उर्फ युसुफ खाँ की असलिएत तब सामने आती है जब वो सेकुलर गिरोह को फायदा पहुंचाने के लिए हिन्दुओं पर मुस्लिम जिहादियों द्वारा ढाये जा रहे जुल्मों का विरोध करने वाले हिन्दुओं व उनके संगठनों को अपशब्द कहता है ।

नदीम – श्रबण हिन्दू मुस्लिम एकता की मिसाल जोड़ी परिणाम गुलशन कुमार का कत्ल नदीम द्वारा । पकड़े जाने के डर से नदीम इंगलैंड भाग जाता है । वहां कोर्ट में कहता है कि भारत हिन्दू देश है अतः उसे मुस्लिम होने के कारण भारत में न्याय नहीं मिल सकता ।

भारत में रेलवे स्टेशन पर दो ट्रेनें आमने सामने टकराती हैं बहुत से लोग मारे जाते हैं शुरू में सब सोचते हैं कि ये ट्रेनें दुर्घटनावश टकरा गईं । बाद में पता चलता है कि ये ट्रेनें एक मुसलमान द्वारा जानबूझ कर हिन्दुओं को मारने के लिए टकराइ गई हैं जो वहां नौकरी करता था जब पुलिस उसे पकड़ने की कोशिश करती है तो जानकारी मिलती है कि उसने पहले से भागने की तैयारी कर रखी थी और वो परिवार सहित पाकिस्तान पहुँच गया है ।

उमर अबदुला जिसे मुसलमानों की नई पीड़ी का प्रतिनिधि माना जा सकता है संसद में कहता है बाबा अमरनाथ यात्रा के लिए एक इंच भूमि भी नहीं दी जायगी।

पिछले 3-4 बर्षों में सिर्फ मुसलमानों से जुड़े मसलों पर करबाई गई चर्चा-परिचर्चा में भाग लेने वाले मुसलमानों ने हर स्तर पर हिन्दू जनता व देश को धमकाने की कोशिश की । यहां तक कहा गया कि अगर मुसलमानों की हर बात नहीं मान ली जाती तो देश में मुस्लिम जिहादी हमले होते रहेंगे ।इन चर्चाओं में मुस्लिम कलाकारों से लेकर सांसदों तक का अलगावबादी रूख सबके सामने आ गया व ये भी सपष्ट हो गया कि पाकिस्तान की तरह ये मुसलिम प्रतिनिधि भी आतंकवाद को हथियार के रूप में प्रयोग कर रहे हैं । हैरानी तो तब हुई जब चर्चा करवाने वाले चैनलों के पत्रकारों ने इनके अलगाववादी व धमकी भरे देशविरोधी रुख को निरूत्साहित करने या टोकने के बजाय इनके अलगाववादी रूख का समर्थन किया।

अब आप ही बताओ ये गद्दारी नहीं तो और क्या है इनमें से किसी को भी हम कभी मुस्लिम जिहादी आतमकवादी नहीं मानते थे पर काम तो इन सब ने अलगाववाद का ही किया ।

इन सब मुसलमानों ने वो ही तर्क दिया जो मुस्लिम जिहादी आतंकवादी और उनके समर्थक अक्सर हिन्दुओं को मारने वाले मुस्लिम जिहादियों को बचाने के लिए देते हैं ऐसे तर्क देने में फारूकी और जावेद अख्तर जैसे लोग सबसे आगे रहते हैं ! फारूकी जैसे मुसलमानों की असलिएत उस वक्त भी सामने आ गई थी जब इन लोगों ने वन्देमातरम् का विरोध किया था ।

भारत का इतिहास ऐसी धोखेबाजी से भरा पड़ा है । क्रिकेट मैच में भारत की जीत पर मातम और पाकिस्तान की जीत पर जशन मनाते हुए इन मुसलमानों में छिपे जिहादियों को लाखों भारतीयों ने अपनी आँखों से देखा है ।

अब आप ही बताओ इनमें से भरोसा किया जाए तो किस पर और क्यों ?

क्या गारंटी है कि कश्मीर की तरह हिन्दुओं को खत्म करने की स्थिति में आ जाने के बाद ये मुस्लिम जिहादी एक भी हिन्दू को जिन्दा छोड़ देंगे ?

हम तो आतंकवाद समर्थक इस सेकुलर गिरोह से यही कहेंगे कि मुस्लिम जिहाद की फितरत को समझो इसके इतिहास को पढ़ो और देशद्रोह के इस आत्मघाती मार्ग को छोड़कर अपनी व अपने देशवासियों की जान बचाने के रास्ते तलाशो वर्ना कश्मीर घाटी की तरह इन मुस्लिम जिहादियों द्वारा मिटा दिये जाओगे । ये वक्त युद्ध का वक्त है आपस में लड़ने के बजाए एकजुट होकर इस मुस्लिम जिहाद को बेनकाब कर इस की जड़ को भारत से हमेशा के लिए खत्म कर दो ।

मुम्बई हमले के दौरान इस जिहादी ने जो कुछ भी कहा वो मुस्लिम जिहादियों की हर योजना को बेनकाब करता है जिसके अनुसार इस जिहाद का एकमात्र मकसद हिन्दुओं को तबाह और बर्बाद कर भारत में इस्लामी राज्य स्थापित करना है । इस जिहादी ने जो कुछ कहा वो नया नहीं है यही बात दबी जवान में हमारे अपने देश में मुसलमानों में छिपे जिहादी और उनके समर्थक कई वर्षों से कह रहे हैं सिर्फ कह ही नहीं रहे हैं कश्मीर में अपनी योजनानुसार हिन्दुओं का नामोनिशान मिटा चुके हैं व भारत के बाकी हिस्सों से मिटाने से लिए लगातार बम्ब विस्फोट कर रहे हैं।

हम तो भारतीय सेना से ये विनती करेंगे कि जिस तरह देश के गृहमन्त्री ने कमाँडो के आने की जानकारी इन चैनलों को दी व जिन चैनलों ने संदिग्ध भूमिका निभाई उसकी गहन जाँच होनी चाहिए साथ ही सेना को इन चैनलों द्वारा देशविरोधी तत्वों को फायदा पहुँचाने की खातिर हिन्दुओं, सुरक्षाबलों व सैनिकों की छवि को पिछले कुछ वर्षों से समय-समय पर किए जा रहे दुष्प्रचार की यथाशीघ्र जाँच करवाकर इन्हें उचित दण्ड दिया जाना चाहिए । ये दुष्प्रचार कई देशविरोधी हिन्दुविरोधी चैनलों पर इतने बड़े हमलों के बाद भी जारी है ।

हम तो उस वक्त दंग रह गए जब एक हिन्दुविरोधी चैनल(एन डी टी वी) के कार्यालय में बैठे विनोद दुआ को अपने रिपोर्टर द्वारा यह बताये जाने पर कि सैनिकों की जीत की खुशी में लोगों ने भारत माता की जय के नारे लगाय तो ये विनोद दुआ भड़क उठे और इस दुष्ट ने भारत माता की जय का विरोध किया।

यह वही चैनल है जो ईरान की इस्लामिक क्राँति का तो समर्थन करता है पर भारत में हिन्दूक्रांती का डटकर विरोध करता है ।

भारत में न्यायालय द्वारा 1993 के मुम्वई बम हमलों के दोशियों को सजा सुनाय जाने के बाद मुसलमानों को देश के विरुद्ध भड़काने की कोशिश करता है ।

कुल मिलाकर ये चैनल हर वक्त भारतीयों को सांप्रदाय और जाति के आधार पर लड़ाने का प्रयत्न करता हुआ नजर आता है। सुरक्षावलों व हिन्दुओं से जुड़े संवेदनशील मामलों को उछालकर उनकी छवी खराव करना इस चैनल की आदत वन गई है इस चैनल के कार्यक्रमों को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि इस चैनल को कोई हिन्दुविरोधी-देशविरोधी विदेशी ताकत चला रही है या फिर ये देशविरोधियों के पैसे से चलता है।

वैसे भी ये चैनल देश में देशद्रोही चैनल के रूप मे मशहूर हो चुका है देखो इसका आगे चलकर क्या हश्र होता है इसे देशभक्त हिन्दू जनता ठीक करती है या आने वाली देशभक्त सरकार या फिर भारतीय सेना ?

हम तो आने वाली किसी भी देशभक्त सरकार से इस दुआ जैसे पत्रकारों सहित माजिद मैनन,महेश भट व नबलखा जैसे जिहादियों के समर्थकों का नार्को टैस्ट करवाकर ये किसके बल पर देशविरोधी काम करते हैं, पता लगाया जाए व ऐसे सभी देशविरोधियों को सबक सिखाया जाए ।

हमें तो हैरानी होती है ये देखकर कि भारत के अधिकतर समाचार चैनल व अन्य संचार के साधन देशद्रोह व गद्दारी के रास्ते पर इस हद तक क्यों बढ़ गए कि उनकी गद्दारी हमारे जैसे मीडिया के कट्टर समर्थकों को भी खटकने लगी है । हम देश के जितने भी लोगों से मिले उन में अधिकतर का यही कहना था कि इस मीडिया पर अगर यथाशीघ्र प्रतिबंध न लगाया गया तो ये गली-गली में देशद्रोही और गद्दार पैदा कर देगा ।

हमें यहां यह स्वीकार करने में कोई संकोच नहीं कि देशभक्त मीडिया किसी भी देश व समाज के लिय प्रेरणा स्रोत होता है पर विका हुआ गद्दार देशविरोधी मीडिया तवाही और बरबादी का कारण बनता है।

हमें ईर्ष्या होती है ये देखकर कि दूसरे देशों के चैनल इतने देशभक्त और हमारे यहां गद्दारों का इतना बड़ा टोला जो हर बक्त भारतीय सभ्यता और संस्कृति पर हमला बोले रहता है । हमने 15 वर्ष की आयु में बी.बी.सी सुनना शुरू किया था । हमने लगातार उनके कार्यक्रमों में ईसाईयत व देशभक्ति के प्रति विशेष लगाव पाया । हिन्दू संगठनों के बारे में हर तरह का झूठा प्रचार करना बी.बी.सी कार्यक्रमों की एक विशेष पहचान थी । हमें बुरा नहीं लगता था क्योंकि वो विदेशी थे उनका काम है हम पर हमला करना व अपना गुणगान करना ।

तब हम सोचते थे कि जब हमारा अपना स्वतन्त्र मीडिया होगा तो वो इस हिन्दुविरोधी-भारतविरोधी दुष्प्रचार का जबाब देगा । लेकिन हमारे होश तब उड़ गये जब भारत में स्वतन्त्र मीडिया की जगह विदेशियों का गुलाम विश्वासघाती मीडिया सामने आया जो उस बी.बी.सी से कहीं अधिक हिन्दुविरोधी-देशविरोधी रास्ते पर आगे बढ़ता हुआ सपष्ट दिखाई दे रहा है ।

राजस्थान में एक अनपढ़ हिन्दू महिला के मन्त्री बनने पर ये हिन्दुविरोधी मीडिया हाय तौबा मचाता है पर एक अनपढ़ विदेशी एंटोनिया माइनो मारियो द्वारा सारी सरकार को गुलाम बना लिये जाने पर इस मीडिया को कोई आपति नहीं होती । माना के राजस्थान की महिला अनपढ़ है पर भारतीय तो है देशभक्त तो है अपनी सभ्यता संस्कृति को तो समझती है सलाह भी लेगी तो किसी भारतीय से इस अंग्रेज की तरह तो नहीं है जिसने चुन-चुन कर हिन्दुओं को कांग्रेस के कोर ग्रुप से दूर कर दिया, जो खुद न भारतीय है न भारतीय संस्कृति और सभ्यता को समझती है सलाह भी लेती है तो अपनी विदेशी अंग्रेज मां से या फिर किसी ईसाई से ।

हमें ईर्ष्या होती है ये देखकर कि ईराक का एक देशभक्त मुस्लिम पत्रकार अपने देश को गुलामी की ओर धकेलने वाले ईसाई जार्ज बुश पर अपना विरोध दर्ज करवाने के लिए जूता फैंक देता है और हमारे पत्रकार हमारे देश को गुलाम बनाकर बैठी विदेशी इटालियन ईसाई एंटोनिया माइनो मारियो की हर बक्त चापलूसी करने की होड़ में ज्यादा से ज्यादा हिन्दुविरोधी-देशविरोधी दिखने का प्रयास करते हैं ।

हमें ये देखकर और भी आशचर्य होता है कि भारत के देशभक्त हिन्दूसंगठनों द्वारा इस विदेशी ईसाई एंटोनिया माइनो मारियो का विरोध करने पर देशभक्त हिन्दू संगठनों पर हमला करने वाला ये हिन्दूबिरोधी-देशविरोधी मीडिया इस देशभक्त मुस्लिम पत्रकार का समर्थन करता है ।

यह धन का भूखा मीडिया भरतीय क्रिकेट खिलाड़ियों के साथ अंग्रेज प्रभुत्व वाली आई.सी.सी द्वारा किए जा रहे भेदभाव पर तो आवाज उठाता है पर देश-विदेश में मुसलमानों और ईसाईयों द्वारा हिन्दुओं पर किए जा रहे हमलों का समर्थन करता नजर आता है वजह साफ है बी.सी.सी.आई मालदार है क्रिकेट के मामले में बी.सी.सी.आई से इस मीडिया को बड़ी रकम प्राप्त होती है इसलिय मीडिया इन खिलाड़ियों का पक्ष लेता है।

परन्तु दुनिया में और कोई हिन्दु देश न होने व भारत में हिन्दुओं के आर्थिक साधनों पर हिन्दुओं का अपना कब्जा न होने के कारण हिन्दुओं के अधिकारों या हिन्दुओं पर हो रही ज्यादतियों की बात करने पर हिन्दुओं से कोई पैसा प्राप्त होने की उम्मीद नहीं होती ।जबकि मुस्लिम और ईसाई देश इस्लाम और ईसाईयत के प्रचार प्रसार पर बड़ी रकम इन हिन्दुविरोधी-देशविरोधी चैनलों को देते हैं इसलिए ये देशविरोधी चैनल हर वक्त हिन्दु-धर्म पर हमला बोले रहते हैं, साधु-सन्तों को बदनाम करते हैं,राष्ट्रवाद की जगह अलगाववाद का पक्ष लेते हैं।

मुम्बई पर हमले का एक सबसे भयानक पहलु यह रहा कि हथियारों का इतना बढ़ा भण्डार इतने संवेदनशील भवनों में व इतने सुरक्षित क्षेत्र में इतने दिनों से इक्ट्ठा किया जाता रहा और इसकी उस सरकार को भनक तक न लगी जो निर्दोष सैनिकों साधु-सन्तों हिन्दुओं को जेल में डालकर सन 2025 में होने वाले तख्तापल्ट का पर्दाफाश 17 वर्ष पहले करने का दावा कर रही थी व उन चैनलों के होते हुए जो इस सरकार के हिन्दुओं को बदनाम करने के षड्यन्त्र में कंधे से कंधा मिलाकर इस सम्भावित तख्तापल्ट के प्रमाण जुटाने के दावे कर रोज नई-नई कहानी चला रहे थे ।

स्थिति इसलिए और भी गंभीर हो जाती है कि अगर मीडिया द्वारा चलाये जा रहे समाचार पर भरोसा करें तो शहीद हेमंत करकरे सहित ए टी एस के तीनों अधिकरी एक ही गाड़ी में सवार थे और तीनों गाड़ी के अन्दर बिना लड़े हुए मारे गये क्योंकि मुस्लिम जिहादियों ने गाड़ी पर इतना ताबड़तोड़ हमला किया कि इन्हें जवाबी कार्यवाही का मौका ही नहीं मिला और फिर उसी गाड़ी में सवार होकर मुस्लिम आतंकवादियों ने दौड़ा-दौड़ा कर लोगों को मारा ।

हम मीडिया द्वारा चलाए जा रहे इस समाचार को हरगिज न लिखते यदि इनके साथ घायल जवान को इस समाचार की पुष्टी करते हुए न दिखाया जाता । अगर ये समाचार गलत है तो दोषी चैनल को सजा दी जाए पर अगर सही है तो ये सरकार की जिहादी आतंकवादियों के प्रति लापरवाह सोच को दिखाता है।

मानो सरकार निहत्थे हिन्दुओं को आतंकवादी कहकर प्रचारित करने के बाद ये मानने लग पड़ी हो कि आतंकवादी निहत्थे होते हैं और इन हिन्दुओं की तरह बिना किसी प्रतिरोध के पकड़ में आ जाते हैं या फिर सरकार ये मानने लग पड़ी थी कि ए टी एस के कुछ अधिकारीयों ने उन हिन्दुओं पर बर्बर जुल्म ढाये हैं जो जिहादियों को मारने की कोशिश कर रहे थे इसलिए जिहादी ए टी एस पर हमला नहीं करेंगे और ऐसे भ्रम का शिकार होकर सरकार ने बिना पुख्ता सुरक्षा बन्दोबस्त व योजना के अधिकारीयों को युद्ध स्थल की ओर दौड़ा दिया । जिसके परिणामस्वरूप एक साथ 14 पुलिस जवान मारे गये जबकि सिर्फ एक आतंकवादी को मारा व एक को पकड़ा जा सका ।

अगर ये नुकसान सरकार द्वारा अल्पसंख्यक आतंकवादियों पर बोले तो जिहादियों पर गोली न चलाने के मौखिक आदेश या आधुनिक हथियार व जैकेट न होने की वजह से हुआ तो फिर इसके लिए जिम्मेवार नेताओं को चौराहे पर खड़ा कर गोली मार देनी चाहिए ।

अपना तो स्पष्ट मानना है कि सरकार के मुस्लिम जिहाद समर्थक रूख के कारण ही पुलिस के इतने जवानों को अपनी जान गवानी पड़ी है। जिस तरह शहीद मोहन चन्द शर्मा जी के मुठभेड़ में मारे जाने के बावजूद मुठभेड़ पर देशद्रोही सैकुलर नेताओं द्वारा प्रश्न उठाये गए ऐसे में कोई जवान मुस्लिम आतंकवादियों पर गोली चलाने से पहले सौ बार सोचता । हमारे विचार में पुलिस जवानों के मन में गोली चलाने और न चलाने का ये उधेड़बुन व अत्याधुनिक हथियारों का अभाव भी उनके कत्ल होने का कारण बना ।

आपने देखा है कि जब-जब भी पुलिस के जवानों ने जान-माल की हानि होने से पहले ही जिहादी आतंकवादीयों को मुठभेड़ में मार गिराने में सफलता हासिल की है तब-तब इन गद्दारों के सैकुलर गिरोह ने पुलिस द्वारा की गई कार्यवाही पर शंका प्रकट कर पुलिस के हौसले को तोड़ा है । ये मुठभेड़ चाहे कहीं भी हुई हो ।आपराध समर्थक मीडिया ने मारे जाने वाले अपराधियों के पक्ष में महौल बनाकर पुलिसबलों पर आरोप लगाकर उनका हौसला तोड़ने का अभियान चलाया ।

आपको याद होगा कि किस तरह सोराबुद्दीन मामले में दो प्रखर राष्ट्रभक्त अधिकारियों को इस दुर्दांत आतंकवादी को मार गिराने के बाद प्रताड़ित किया गया । इस जिहादी को आम निर्दोष मुसलमान बताकर पुलिस अधिकारीयों को अपराधी प्रचारित किया गया । आप जरा सोचो कि जिस व्यक्ति के पास दर्जनों हैंडगरनेड व ए के-47 हों उसे अगर निर्दोष कहा जाए तो फिर अपराधी कौन ?

ऐसे महौल में कौन पुलिस वाला जिहादियों को मार कर अपना मान-सम्मान, नौकरी ,परिवार सब दाव पर लगायेगा । हमारे विचार में सरकार का यही दबाव इतने अधिक पुलिस जवानों की मौत का कारण बना !

इस देशविरोधी जिहाद समर्थक महौल को बदलना पड़ेगा । बदलना होगा-बदलना होगा यही नारे बुला रहे थे इन जिहादी आतंकवादियों से दुखी लोग । इसे बदलने का काम सिर्फ देशभक्त जनता ही कर सकती है देशभक्त जनता को चाहिए कि जिहादियों के पक्ष में बोलने वाले नेत्ताओं ,पत्रकारों ,अधिकारियों, लेखकों, समाजिक कार्यकर्ताओं और मीडिया कर्मियों को देखते ही उन पर टूट पड़े मौके पर डांग,पत्थर या बंदूक जो भी हाथ लगे उसी से इनके नाक मुंह तोड़ दे । अगर कुछ भी न मिले तो कम से कम ऐसे गद्दारों के प्रति मुँह कर थूक दे या उन पर अपना जूता ही फैंक दें ताकि इनको अपने किए का एहसास हो सके और ये दोबारा इन कातिल जिहादियों का समर्थन या बचाव करने का दुससाहस न कर सकें !

यहाँ पर एक बात जो चौंका देने वाली है वो ये है कि जब जवान जिहादियों से लोहा ले रहे थे, शहीद हो रहे थे, इस सारी प्रक्रिया में पुलिस प्रमुख हसन गफूर व ए.एन राय कहां थे ?

इनकी भूमिका इसलिए और भी गम्भीर हो जाती है कि इस हमले में शुरू में कम से कम 50 जिहादियों ने हिस्सा लिया जो सेना के आने से पहले कहाँ गायब हो गए ऊपर से ये बचकाना ब्यान कि ये सब बिना स्थानीय सहायता से हुआ । इस तरह के हमलों के किसी भी जानकार से आप पता कर सकते हैं कि इतने बड़े पैमाने पर इतना व्यवस्थित हमला स्थानीय गद्दारों की सहायता के बिना हो ही नहीं सकता ।

हाँ यहां हम इस महाराष्ट्र पुलिस को ये बता देना चाहते हैं कि कुछ चैनलों व समाचारपत्रों द्वारा ये बताया गया था कि ये काम हिन्दू आतंकवादियों का हो सकता है क्योंकि आतंकवादियों ने हाथों में कंगन पहने हुए थे व उनके पास हिन्दू नामों से पहचान पत्र मिले थे ।

उर्दू प्रैस द्वारा लगातार मुस्लिम आतंकवादियों व पाकिस्तान को फायदा पहुंचाने के लिए बार-बार यह झूठ दोहराया जा रहा है कि ये हमला सरकार के सहयोग से हिन्दुओं व उनके संगठनों ने किया है।

हमारे विचार में ये आतंकवादी हमले की जाँच का रूख हिन्दुओं की ओर मोड़ने का बिल्कुल वैसा ही षड्यन्त्र है जैसा इन मुस्लिम जिहादियों ने सिमी के कार्यालय के बाहर बम्ब विस्फोट वाली जगह पर साध्वी जी की बेची हुई बाइक छोड़ कर ( ये बाइक सुनील जोशी जी को बेची गई थी जिनको सिमी के जिहादियों ने शहीद कर दिया था तब जिहादी ये बाइक अपने साथ ले गये होंगे) किया था।

रही बात गुलाम प्रधानमन्त्री के इस दबाब की कि सुरक्षाबलों को अल्पसंख्यकों का विस्वास जीतना जरूरी है तो हम आपको बता दें कि इन अल्पसंख्यकों का विस्वास आप तभी जीत सकते है जब देश में मुस्लिम जिहादियों द्वारा किये गये हर हमले के बाद आप 10-20 हिन्दुओं को जेल में डाल दें या फिर हिन्दुओं को मुस्लिम जिहादियों की जगह आप ही हलाल कर दें ।

आपको लगता है कि हम गलत कह रहे हैं तो आप अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री अब्दुल रहमान अंतुले द्वारा दिया गया वो ब्यान देख लें जिसके अनुसार पुलिस अधिकारियों का कत्ल मुस्लिम जिहादियों ने नहीं हिन्दुओं ने किया है ।(सोचो जरा अगर ये हमला इस तरह खुलम-खुल्ला न होकर चुपके से किया गया होता और करने वाले भागने में सफल हो जोते जैसे अक्सर होता है तो आप हिन्दू संगठनों के पीछे लग जाते कि नहीं क्योंकि सरकारी दबाब भी इसी दिशा में होता)

अन्तुले ने जो कुछ कहा उससे तो लगता है कि मुस्लिम जिहादियों द्वारा किए जाने वाले हमलों व इन हमलों में मारे जाने वाले लोगों की जानकारी अन्तुले व अन्तुले जैसे मुस्लिम आतंकबाद समर्थक इन हिन्दूबिरोधी सैकुलर नेताओं के पास पहले से आ जाती है । हमारे विचार में पुलिस अंतुले को हिरासत में लेकर उसका नार्को टैस्ट करवाकर असानी से ये पता लगा सकती है कि अंतुले का इस मुस्लिम आतंकवादी हमले से क्या सबन्ध था और इन आतंकवादियों के स्थानीय सहयोगी गद्दार कौन-कौन थे । जिस तरह से सरकार ने अंतुले का बचाब किया है उससे एक बात तो सपष्ट हो जाती है कि ईतना बढ़ा आतंकवादी हमला हो जाने के बाबजूद सरकार के मुस्लिम आतंकबाद समर्थक रूख में कोई बदलाब नहीं आया है ।

मेरे प्यारे जवानों हम समझ सकते हैं कि आतंकवाद समर्थक सरकार के होते हुए मुस्लिम आतंकबादियों के विरूद्ध कार्यवाही करना असान नहीं पर कम से कम निर्दोष हिन्दुओं को तो बदनाम न करो । क्यों ऐसा करके आप अपनी व हिन्दुओं की जान को खतरे में डाल रहे हैं ?

इतना सबकुछ होने के बाद भी अगर आपको लगता है कि पकड़े गये हिन्दू निर्दोष क्राँतिकारी देशभक्त नहीं आतंकवादी है तो बिना कोई वक्त गवाये उनको गोली मार दो फाँसी दे दो। परन्तु इस देशद्रोही हिन्दुविरोधी सरकार की कठपुतली बनकर अपनी रक्षक भारतीय सेना व अपनी रीड़ की हड्डी हिन्दू संगठनों को बदनाम कर संसार में मानवता की आधार सनातन भारतीय संस्कृति को नीचा न दिखाओ ।

इतिहास इस बात का साक्षी है कि जब-जब भी हिन्दू आपस में लड़े हैं तब-तब उन पर जिहादियों ने और जोर से हमला बोला है। ये हमला उसी का तत्कालिक उदाहरण है न सरकार निर्दोष हिन्दुओं को बदनाम करने के लिए ओछे हथकण्डे अपनाती, न सुरक्षाबलों का ध्यान असली आतंकवादियों से हटता, न जवानों की जान जाती, न सरकार इस बहाने ईसाई विदेशी खुफिया एजेंसी को जाँच के बहाने हिन्दूराष्ट्र भारत में बुला पाती ।

हालांकी हम अमेरिका द्वारा बाकी जगह जिहादियों के विरूद्ध लड़ी जा रही लड़ाई का समर्थन करते हैं पर ये बात भी उतनी ही सत्य है कि तालिबान इसी अमेरिका के सहयोग से आगे बढ़ा है । अमेरिका का एकमात्र उद्देशय अमेरिकी हितों को आगे बढ़ाना है। ईसाईयत का प्रचार-प्रसार इन अमेरिकी हितों का प्रमुख हिस्सा है। सरकार द्वारा एफ वी आई को भारत में काम करने देना देश की सुरक्षा और सम्प्रभुता के लिए गंभीर खतरा है ।

अगर सरकार ये संदेश देने की कोशिश कर रही है कि भारतीय सुरक्षा एजेंसियां मुस्लिम जिहादी आतंकवाद का मुकाबला करने में आसमर्थ हैं तो हम सरकार को बता देना चाहते हैं कि भारत में बढ़ता जिहादी आंतक इस देशद्रोही जिहाद व धर्मांतरण समर्थक गिरोह की हिन्दुविरोधी नीतियों का दुष्परिणाम है न कि सुरक्षा एजेंसियों की असफलता का ।

क्योंकि इस गिरोह की सरकार ने सत्ता में आने के बाद अल्पसंख्यकों की रक्षा के बहाने न केवल भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को मुस्लिम जिहादियों के विरूद्ध कार्यवाही करने से रोका है बल्कि पोटा जैसे आतंकवाद विरोधी कानून हटाकर व सच्चर कमेटी से मुसलमानों से होने वाले काल्पनिक भेदभाव की रिपोर्ट दिलवाकर जिहादियों के षड्यन्त्रों को आगे बढ़ाने में तकनीकी मदद भी की है ।

रही बात गरीबी की तो कौन नहीं जानता कि आज भी भारत में 40 करोड़ हिन्दू गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहे हैं। इनमें से 20 करोड़ को तो दो वक्त की रोटी मिलना भी तय नहीं होता । इस सब में ये भ्रम फैलाना कि सिर्फ मुसलमान ही गरीब हैं ।इस सरकार की साँप्रदायिक सोच व नीचता का परिचायक है। ये सरकार की विभाजनकारी हिन्दुविरोधी सोच का स्पष्ट उदाहरण है। क्योंकि देश में जितने हिन्दू पिछड़े हुए हैं, गरीब हैं, आत्महत्या करने को मजबूर हैं उतनी तो मुसलमानों की कुल संख्या नहीं है !

हम सरकार से यही कहेंगे कि विदेशी ईसाई एजैंसियो को भारत में काम करने की छूट देकर सरकार ने न केवल देश को खतरे मे डाला है बल्कि अपने देशविरोधी-हिन्दुविरोधी होने का एक और प्रमाण भारतीय जनता को दे दिया है।

इन ईसाई एजेंसियों को यदि यथाशीघ्र देश के बाहर न किया गया तो जिहादी हमलों के साथ-साथ चर्च प्रेरित हमले व धर्मांतरण भी तेज हो सकता है क्योंकि ये किसी से छुपा हुआ नहीं है कि भारत में ईसाईयों की हिन्दुविरोधी सारी गतिविधियां इन्हीं ईसाई देशों के सहयोग से चल रही हैं और इन ईसाई देशों का मानवाधिकार के बहाने भारत के जिहादी व देशविरोधी गुटों को कहीं न कहीं समर्थन रहा है।

इन ईसाई देशों के सहयोग से व जिहादसमर्थक मुस्लिम देशों की आर्थिक मदद से आज भारत में दर्जनों जाली मानवधिकार संगठन बोले तो जिहादी आतंकवादी दानवाधिकार संगठन , सैंकड़ों देशविरोधी एन जी ओ और हजारों गद्दार समाजिक कार्यकर्त्ता व मीडिया कर्मी और दर्जनों हिन्दू विरोधी चैनल जगह-जगह हिन्दुविरोधी देशतोड़क कामों में लगे हुए हैं ।

सरकार को अगर कुछ सीखना है तो अमेरिकीयों से अपनी सभ्यता और संस्कृति के प्रति प्यार और समर्पण सीखे । अपनों की जान जाने पर किस तरह प्रतिक्रिया करते हैं वो सीखे । उनसे देशभक्ति सीखे । देश की रक्षा कैसे करते हैं वो सीखे । अगर सीखना ही है तो आतंकवादी विरोधी कानून बनाना सीखे ।

पर ये सरकार ये सब खाक सीखेगी ये गद्दारों की वो सरकार है जो देशभक्तों के मरने पर खुशियां मनाती है भारतीयों को मारने वाले आतंकवादियों के विरूद्ध काम करने वाले हिन्दुओं को जेल में डालती है ।उनके कपड़े उतरवाने की धमकी देती है, उनकी जूतों से पिटाई करवाती है और देशभक्तों का कत्ल करने वालों को अपना भाई बताती है।

आज अमेरिका दुनिया को जितना मर्जी धर्मनिर्पेक्षता का पाठ पढ़ाये पर खुद अमेरिका आज भी एक ईसाई देश है वहां भी अन्य संप्रदायों के लोग रहते हैं। पर क्या कभी अमेरिका ने ईसाईयों को अपने मूल अधिकारों से वंचित कर अन्य संप्रदायों को विशेषाधिकार दिए हैं ? जैसे भारत में हिन्दुओं को मूल अधिकारों से वंचित कर मुसलमानों और ईसाईयों को विशेषाधिकार दिए जा रहे हैं ।

भारत का सारा मीडिया अमेरिका में ओबामा की जीत पर जश्न मना रहा था पर जिस बात को सीखने की जरूरत है वो ये है कि ओबामा ने जीतने के एकदम बाद सबसे पहले चर्च का धन्यावाद किया । अमेरिकी राष्ट्रपति बाईबल पर हाथ रखकर शपथ ग्रहण करता है।

आज भी अमेरिकी राष्ट्रपति का पहला कर्तव्य चर्च की रक्षा करना है । परन्तु भारत में अगर कोई प्रधानमन्त्री या व्यक्ति मन्दिर की बात करता है तो भारत के जिहादी आतंकवाद समर्थक धर्मनिर्पेक्षतावादियों के पेट में दर्द पड़ जाता है उसमें सांप्रदायिकता नजर आती है ।

पिछले दिनों अमेरिका में चर्चों में बच्चों के यौन शोषण(ऐसा करने वालों को इन्सान कहना भी पाप है) की बात आई। क्या वहाँ के मीडिया ने ईसाई धर्म-गुरूओं के बारे में उस तरह का गाली-गलौच किया जितना भारत का मीडिया उन हिन्दूधर्म गुरूओं के बारे में करता रहता है जो हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचारों को उजागर करते हैं व भारतीय सभ्यता संस्कृति का प्रचार प्रसार करने में लगे हैं ।

कोई भी देश तब तक महान नहीं बन सकता जब तक वो अपनी सभ्यता संस्कृति का सम्मान नहीं करता। अगर आज अमेरिका दुनिया का सबसे ताकतवर देश है तो इसी वजह से कि उसने अपनी सभ्यता और संस्कृति पर आक्रमण करने वाले को मौत के घाट उतार कर ही दम लिया है ।

आज वक्त आ गया है कि हम भारतीय आत्मघाती शाँति की बात करना छोड़ कर भारतीय सभ्यता और संस्कृति के विरोधियों पर सीधा हमला बोलने की आदत डालें और उसे मौत के घाट उतार कर दम लें ।

आतंकवाद पर सेकुलर गिरोह की भ्रमित सोच

 

मुम्बई पर हमले ने हमें कश्मीर में मिले सबक को फिर से याद करवा दिया कि किस तरह इस सेकुलर गिरोह ने मुस्लिम जिहदियों के साथ मिलकर पहले हिन्दुत्वनिष्ठ हिन्दुओं को मरवाया जब हिन्दुत्वनिष्ठ हिन्दू खत्म हो गये तो फिर इस सेकुलर गिरोह से सबन्धित हिन्दुओं को भी जिहादियों द्वारा हलाल कर दिया गया । अब इस सेकुसर गिरोह के मुफ्ती मुहम्द सइद जैसे मुस्लिम अब वहां पर आतंकवादियों के चुने हुए प्रतिनिधि वन गय हैं।

मुस्लिम जिहाद का इतना सपष्ट खूनी चेहरा देख लेने के बाद भी इस सेकुलर गिरोह ने मुस्लिम आतंकवादियों का साथ देना नहीं छोड़ा व ये जिहाद सारे भारत में यथावत जारी है। जम्मू के मुस्लिम बहुल क्षेत्रों व आसाम में अभी दूसरा दौर चल रहा है तीसरे दौर की शुरूआत होने वाली है जबकि मुम्बई सहित बाकी सारा भारत पिछले काफी वर्षों से दूसरे दौर में है ।

वैसे तो सारे संसार में मुस्लिम और गैरमुस्लिम की इस लड़ाई में दो चरण होते हैं एक दारूल हरब और दूसरा दारूल इस्लाम । दारूल हरब में गैरमुस्लिमों की सरकार होती है जिसे मुसलमान अपनी सरकार नहीं मानते व देशभक्ति से जुड़े हर कदम-हर कानून का विरोध करते हैं। सब मुसलमानों को जिहाद के लिए उकसाते हैं। ज्यादा बच्चे पैदा करने का वचन लेते हैं । गैरमुस्लिमों की बेटियों को भगाते हैं । इस जिहाद के आगे बढ़ाने के लिए गैरमुस्लिमों पर हमला बोल देते हैं । साथ ही इनका जो मुस्लिम नेतृत्व होता है वो बहुसंख्यकों की प्रतिक्रिया से बचने के लिए व मुस्लिम देशों का सहयोग लेने के लिए मुस्लिमों पर हो रहे काल्पनिक अत्याचार, मुस्लिमों के पिछड़ेपन का दुष्प्रचार करता है। कुरान और शरियत का बहाना लेकर मुसलमानों को उस देश की मुख्यधारा में शामिल होने से रोकता हैं। ये तब तक चलता है जब तक मुस्लिमों की आबादी बहुसंख्यकों को धूल चटाने के काबिल नहीं हो जाती है जैसे ही ये स्थिति आती है अन्तिम हमला शुरू हो जाता है। इस दारूल हरब को दारूल इस्लाम बनाकर गैर मुस्लिमों का सफाया कर दिया जाता है । एक मुस्लिम राष्ट्र अस्तित्व में आ जाता है धीरे-धीरे गैर मुस्लिमों की हर निशानी को मिटा दिया जाता है । जैसे अफगानीस्तान में हिन्दुओं की लगभग हर निशानी मिटा दी गई।वेमियान में बौध मूर्तियों को तोड़ा जाना इसकी अंतिम कड़ी थी । पाकिस्तान,बांगलादेश में भी हिन्दुओं और हिन्दुओं से जुड़ी हर निशानी को मिटाने का काम अपने अंतिम दौर में है।

परन्तु भारत में जिहाद की प्रक्रिया तीन चरणों में थोड़े से अलग तरीके से पूरी होती है पहले चरण में मुसलमान हिन्दुओं की पूजा पद्धति पर सवाल उठाते हैं ।कभी-कभी धार्मिक आयोजनों पर हमला बोलते हैं ।अल्पसंख्यक होने की दुहाई देकर अपनी इस्लामिक पहचान बनाये रखने पर जोर देते हैं । अपने आप को राष्ट्र की मुख्यधारा से दूर रखते हैं धीरे-धीरे हिन्दुओं के त्योहारों पर व अन्य मौकों पर तरह-तरह के बहाने लेकर हमला करते हैं। हमला करते वक्त इनको पता होता है कि मार पड़ेगी पर फिर भी जिहाद की योजना के अनुसार ये हमला करते हैं। परिणामस्वरूप मार पड़ने पर मुसलमानों पर हो रही ज्यादतियों व अपने द्वारा किए गये हमले को हिन्दुओं द्वारा किया गया हमला बताकर मुस्लिम देशों में प्रचार करते हैं । अधिक से अधिक बच्चे पैदा करते हैं। बच्चों को स्कूल के बजाए मस्जिदों व मदरसों में शिक्षा की जगह जिहाद पढ़ाते हैं। फिर अपनी गरीबी का रोना रोते हैं । सरकार व विदेशों से आर्थिक सहायता पाना शुरू करते हैं फिर जैसे-जैसे आबादी बढ़ती जाती है, इनकी आवाज अलगावादी होती जाती है ।अपने द्वारा किए गये हमलों के परिणामस्वरूप मारे गये जिहादियों को आम मुसलमान बताकर जिहाद को तीखा करते हैं। इस बीच मदरसों-मस्जिदों व घरों में अवैध हथियार गोला बारूद इकट्ठा करते रहते हैं कुछ क्षेत्रों में बम्ब विस्फोट करते हैं प्रतिक्रिया होती है फिर अल्पसंख्कों पर अत्याचार का रोना रोया जाता है ।

दूसरे चरण में इस्लाम की रक्षा व प्रचार प्रसार के नाम पर सैंकड़ों मुस्लिम संगठन सामने आ जाते हैं। हिन्दुविरोधी नेताओं, लेखकों व प्रचार-प्रसार के साधनों को खरीदा जाता है। उन्हें उन हिन्दुओं के साथ एकजुट किया जाता है, जो हिन्दुत्व को अपने स्वार्थ के रास्ते में रूकावट के रूप में देखते हैं। इस सब को नाम दिया जाता है, धर्मनिर्पेक्षता का मकसद बताया जाता है अल्पसंख्यकों की रक्षा का। इस बीच हिन्दुओं पर हमले तेज हो जाते हैं जगह- जगह हिन्दुबहुल क्षेत्रों व मन्दिरों में बम्ब विस्फोट हिन्दुओं के त्योहारों के आस पास या त्योहारों पर कर दहशत फैलाई जाती है ।

जब हिन्दूसमाज में क्रोध पैदा होने लगता है तो फिर धर्मनिर्पेक्षतावादियों व जिहादियों के गिरोह द्वारा मुसलमानों को अनपढ़ ,गरीब व हिन्दुओं द्वारा किए गये अत्याचारों का सताया हुआ बताकर धमाकों में मारे गये हिन्दुओं के कत्ल को सही ठहराया जाता है । हिन्दुओं के कत्ल का दोष हिन्दुओं पर ही डालने का षडयन्त्र रचा जाता है।

मुस्लिम जिहादी आतंकवादियों व उनके समर्थकों द्वारा रचे गये इस षड्यन्त्र के विरूद्ध हिन्दुओं को सचेत करने वालों व इन जिहादी हमलों के विरूद्ध खड़े होने वालों पर सांप्रदायिक कहकर हमला बोला जाता है । जिहादियों द्वारा फिर हिन्दुबहुल क्षेत्रों व मन्दिरों में हमले किए जाते हैं हिन्दू कहीं एकजुट होकर जिहादियों व इन के समर्थकों का सफाया न कर दें इसलिए बीच-बीच में हिन्दुओं को जाति,भाषा,क्षेत्र के आधार पर लड़ाए जाने का षड्यन्त्र रचा जाता है।

साथ में जिहादियों के तर्कों को अल्पसंख्यकवाद के नाम पर हिन्दुओं के मूल अधिकारों पर कैंची चलाकर मुसलमानों को विशेषाधिकार दिए जाते हैं। फिर जिहादियों द्वारा जगह- जगह हिन्दुबहुल क्षेत्रों व मन्दिरों में बम्बविस्फोट किये जाते हैं। फिर हिन्दुओं द्वारा इन हमलों के विरूद्ध आवाज उठाई जाती है। फिर आवाज उठाने वालों को सांप्रदायिक बताकर जागरूक हिन्दुओं को चिढ़ाया जाता है व बेसमझ हिन्दुओं को मूर्ख बनाने के लिए एक आधा मस्जिद के आस पास इस तरह बम्ब विस्फोट करवाकर हिन्दुओं में दो तरह का भ्रम पैदा किया जाता है। कि हमले सिर्फ मन्दिरों पर नहीं हो रहें हैं मस्जिदों पर भी हो रहे हैं दूसरा ये हमला हिन्दुओं ने किया है हिन्दू फिर छलावे में आ जाते हैं अपने-अपने काम में लग पड़ते हैं। ये धरमनिर्पेक्षों व जिहादियों का गिरोह साँप्रदायिक दंगों को रोकने के बहाने जिहादियों की रक्षा करने के नये-नये उपाय ढूँढता हैं। प्रायोजित कार्यक्रम कर हिन्दुओं की रक्षा में लगे संगठनों को बदनाम करने की कोशिश की जाती है। फिर जिहादियों द्वारा हिन्दुबहुल क्षेत्रों में हमले किए जाते हैं फिर इन हमलों को न्यायोचित ठहराने के लिए ये गिरोह जी जान लगा देता है फिर नये-नये बिके हुए गद्दार समाजिक कार्यकर्ता हिन्दुओं पर हमला बोलते हैं ये कार्यक्रम चलता रहता है जिहाद आगे बढ़ता रहता है ……….

फिर आता है तृतीय चरण जिसमें जिहादी और आम मुसलमान में फर्क खत्म हो जाता है । हिन्दुओं को हलाल कर, हिन्दुओं की मां बहन बेटी की आबरू लूटकर , हिन्दुओं को डराकर भगाकर जिहादियों द्वारा चिन्हित क्षेत्र को हिन्दुविहीन कर उसे बाकी देश से अलग होने का मात्र ऐलान बाकी रह जाता है। ध्यान रहे इस अन्तिम दौर में हलाल होने वाले वो हिन्दू होते हैं जो हिन्दुत्वनिष्ठ हिन्दुओं के कत्ल के वक्त जिहादियों का हर वक्त साथ देते हैं या ऐसे काम करते हैं जो जिहाद को आगे बढ़ाने मे सहायक होते हैं ।

इस हमले के बाद इस हिन्दू विरोधी गिरोह ने अपने पाँच वर्ष के जिहाद समर्थक व देशविरोधी कामों पर परदा डालने के लिए कुछ लोगों के त्यागपत्र लिए । हमारे विचार में ये हमला इस सारे गठबन्ध के सामूहिक जिहाद समर्थक प्रयासों का परिणाम है । हम सिर्फ सरकार की बात नहीं कर रहे सरकार के साथ-साथ सब देशविरोधी-हिन्दुविरोधी जिहादी आतंकवाद समर्थक लेखकों, पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, समाचार पत्रों व चैनलों की बात कर रहे हैं । ये वो गिरोह है जिसने पिछली सरकार द्वारा मुस्लिम आतंकवादियों के विरूद्ध की गई हर कार्यवाही को मुस्लिम विरोधी करार दिया और उसमें बाधा डाली ।

मुम्बई हमले के बाद जिहादियों के विरूद्ध सख्त दिखना सरकार की मजबूरी इसलिए भी है क्योंकि यह हमला आम गरीब लोगों के साथ-साथ मालदार लोगों पर भी हुआ है। जिसने मालदार लोगों में दहशत पैदा कर दी है। सरकार इसलिए भी गम्भीर दिख रही है क्योंकि इस हमले में विदेशी भी मारे गए हैं पहले के हमलों में मारे जाने वाले अधिकतर गरीब या मध्यम वर्ग के हिन्दू ही होते थे। इसलिए इन जिहादियों को सरकार अपना भाई बताकर मरने वालों के परिवार वालों के जले पर नमक छिड़कने का काम करती थी ।

किसी ईसाई को जिहादी कत्ल कर दें और अंग्रेज एंटोनियो की ये गुलाम सरकार चुप बैठी रहे ,ऐसा कैसे हो सकता है। क्या आपको याद है कि कुछ महीने पहले इसी मुम्बई में ट्रेनों में हुए बम्ब विस्फोटों में इतने ज्यादा हिन्दू मारे गए थे और सरकार के कानों पर जूँ तक न रेंगी थी।

मुम्बई पर हमला सरकार की भ्रमित व हिन्दुविरोधी सोच का भी दुष्परिणाम है क्योंकि जिस तरह पिछले कुछ समय में मुस्लिम जिहादियों द्वारा हिन्दुबहुल क्षेत्रों में सैंकड़ों बम्ब विस्फोट कर देने के बावजूद सरकार आज भी सांप्रदाचिक हिंसा की बात कर जिहादियों द्वारा किए जाने वाले हमलों की प्रतिक्रिया स्वरूप देशभक्तों द्वारा आत्मरक्षा में जिहादियों के विरूद्ध की जाने वाली कार्यवाही को रोकने के षड्यन्त्र रच रही है । उससे से तो यही सिद्ध होता है कि सरकार जिहादी आतंकवादियों की रक्षा करने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है।

अगर आप सोचते हैं कि इस हमले के बाद सरकार की सोच बदल गई है तो अपकी सोच भ्रमित है सरकार ने 23 दिस्मबर 2008 को जो कानून व कानूनों में संसोधन पास करवाए उन सबका सार ये है कि अब पुलिस सात साल से कम सजा वाले अपराध करने वाले अपराधियों को सीधे गिरफ्तार नहीं कर सकती है इनमें प्रमुख अपराध हैं हत्या , लूटपाट, धोखाधड़ी, बलात्कार व छेड़छाड़ आदि। अब आप सोचो सरकार को किसकी चिंता है, अपराधियों की या कानून का पालन करने वाली आम जनता की ।

हम दाबे के साथ कह सकते हैं कि अगर पुलिस के उपर राजनीतिक दबाव न हो तो ज्यादतियां होने का प्रश्न ही पैदा नहीं होता। फिर भी अगर 2-4% लोग ऐसी ज्यादतियों का शिकार हो भी जाते हैं तो भी सरकार इन 2-4% लोगों को बचाने के लिए 80% से अधिक लोगों के जान-माल को कानून कमजोर कर खतरे में कैसे डाल सकती है ?

वैसे भी लोगों को ऐसी ज्यादतियों से बचाने के लिए देश में न्यायालय मौजूद हैं सारा मामला बिगड़ता है राजनीतिक हस्तक्षेप से । जरूरत है सुरक्षाबलों को राजनीतिक हस्तक्षेप से आजाद करवाने की व लोगों को अपराधियों के भय से मुक्त करवाने की लेकिन ये जनताविरोधी-देशविरोधी सरकार अपराधियों को कानून के भय से मुक्त करवा रही है।

कमोवेश यही स्थिति सरकार की आतंकवाद से जुड़े मामलों पर है । पहले तो सरकार ने पोटा हटाकर पांच वर्ष तक आतंकवादियों को लोगों को मौत के घाट उतारने की खुली छूट दे रखी। फांसी की सजा पाए आतंकवादी की फांसी रोककर सुरक्षाबलों को सपष्ट संदेश दे दिया कि सरकार हर हाल में आतंकवादियों के साथ है । इसलिए सुरक्षाबल मुस्लिम आतंकवादियों से दूर रहें।

चुनाव नजदीक आते देखकर व जनता के आतंकविरोधी रूख से मजबूर होकर जब सरकार ने आतंकवादविरोधी कानून बनाया भी तो उसके दांत तोड़ दिए । कुलमिलाकर सरकार की मनसा आतंकवाद के विरूद्ध कठोर कार्यवाही करने के बजाए जनता को चुनावों तक भ्रमित रखकर चुनाव जीतने की है इसीलिए सरकार का एक मंत्री भारत की भाषा बोलता है तो दूसरा पाकिस्तान की । मतलव सरकार राष्ट्रवादियों व अलगाववादियों दोनों को खुश करने का प्रयत्न कर रही है।

आज सरकार पाकिस्तान का नाम लेकर पिछले पांच वर्षों में किए गए देशविरोधी कामों पर परदा डालने की कोशिश कर रही है पाकिस्तान भारत का शत्रु है। पाकिस्तान ने आतंकवादी भेजे, मुस्लिम आतंकवादियों को पाकिस्तान ने ट्रेनिंग दी, वहां आतंकवादी ट्रेनिंग कैंप हैं ।अमेरिका पाकिस्तान पर कोई कार्यवाही नहीं कर रहा है।(जिसकी सहायता से ये कैंप बनें हैं वो हमारी सहायता क्यों करेगा ? ) पाकिस्तान ने हम पर युद्ध थोपा है। इसमें नया क्या है ? ये काम तो पाकिस्तान 1947 से ही कर रहा है।

अगर आप सोचते हैं कि ये युद्ध सिर्फ पाकिस्तान लड़ रहा है तो आप गलत है बेशक वहां से प्रशिक्षण व हथियार इन जिहादी आतंकवादियों को मिलते है । पाकिस्तान के निर्माण का आधार ही सर्वधर्मसम्भाव के ध्वजवाहक हिन्दुओं से शत्रुता है। आतंकवाद पाकिस्तान के निर्माण, अस्तिव व विदेश नीति का आधार है। पाकिस्तान बनाया ही उन जिहादी आतंकवादियों के लिए गया है जो सर्वधर्मसम्वाभ के बजाए हिंसा को हथियार बनाकर इस्लाम का विस्तार व गैर मुस्लिमों को हलाल करने में विश्वाश रखते हैं । दूसरे देशों के टुकड़ों पर पलने वाले पाकिस्तान की इतनी औकात नहीं कि वो अपने बल पर हिन्दुस्थान से पंगा लेने का दुस्साहस कर सके ।

पाकिस्तान ये सब साऊदी अरब व अमेरिका जैसे मुस्लिम व ईसाई देशों की सहायता व इशारे पर कर रहा है। ये देश भारत के नेताओं के देशविरोधी विकाऊ स्वभाव को पहचान कर इन नेताओं को खरीद कर इन नेताओं से देशविरोधी-हिन्दुविरोधी काम करवा रहे हैं और आतंकवाद के माध्यम से अपने-अपने मुस्लिम व ईसाई हितों को आगे बढ़ा रहे हैं ।

भारत का हर राष्ट्रवादी नागरिक व संगठन इस बात को जानता है, समझता है। उसके विरूद्ध कार्यवाही की मांग उठाता है। देश में ऐसे कठोर कानून की मांग करता है जिससे भारत में लेखकों, मानवाधिकार संगठनों, मीडिया चैनलों, पत्रकारों व सेकुलर नेताओं के वेश में छुपे आतंकवादियों व धर्मांतरण के मददगारों को समाप्त किया जा सके । देश में पाकिस्तानी षड़यन्त्र कामयाव न हो पायें इसके लिए भारत में सब के लिए एक जैसे कानून की मांग करते हैं । एसी मांग करने वालों को सांप्रदायिक कौन कहता है ? कठोर कानून का विरोध कौन करता है? सांप्रदाय के आधार पर कानून कौन बनाता है ? आतंकवादीयों के विरूद्ध काम करने वाले सुरक्षाकर्मियों को कौन जेलों में डालता है ? जनता को जागरूक करने वालों का कौन विरोध करता है ? सुरक्षा कर्मियों द्वारा मारे गए मुस्लिम आतंकवादियों के परिवारों की जिम्मेवारी उठाकर वाकी मुसलमानों को आतंकवादी बनने के लिए हौसला कौन बढ़ाता है ? आतंकवादियों को अपना भाई कौन बताता है ? सुरक्षाकर्मियों द्वारा अपनी जान जोखिम में डालकर पकड़े गए मुस्लिम आतंकवादियों को सबूत पेश न कर या कानून बनाकर या दबाव वनाकर छुड़वाता कौन है ? पाकिस्तान के इशारे पर काम करने वाले सिमी जैसे मुसलिम आतंकवादी संगठनों की पैरवी कौन करता है ? पाकिस्तानी मुस्लिम आतंकवादियों को स्थानीय सहायता कौन देता है ? शहीदों का अपमान कौन करता है ?

ये सब करने वाला है ये सेकुलर गिरोह। पाकिस्तान हमारा शत्रु है उसका काम है हम पर हमला करना पर ये सेकुलर गिरोह कौन है ? ये भारत के ही लोग हैं ये क्यों भारत को अफगानीस्तान बनाने पर तुले हैं ? ये क्यों पाकिस्तान की तरह सवधर्मसम्भाव के ध्वजवाहक हिन्दुओं व उनके संगठनों के शत्रु बन बैठे हैं ?

जिस तरह आज पाकिस्तान भारत द्वारा दिए गए हर सबूत को नकार रहा है ठीक इसी तरह ये सेकुलर गिरोह भी सुरक्षाबलों या एन.डी.ए सरकार द्वारा मुस्लिम आतंकवादियों के विरूद्ध जुटाए गय हर प्रमाण को नकारता रहा व उस सरकार द्वारा आतंकवादियों के विरूद्ध की गई हर कार्यवाही का विरोध करता रहा व सता में आने पर मुस्लिम आतंकवादियों के विरूद्ध पाकिस्तान की तरह कार्यवाही करने के बजाए उसे बढ़ावा देता रहा ।

आज आतंकवाद भारत में अगर इस भयानक स्तर तक पहुंचा है तो इसके लिए पाकिस्तान से कहीं अधिक ये सेकुलर गिरोह जिम्मेदार है। हमारे विचार में यही बजह है कि ये बिका हुआ नेतृत्व अपने बल पर इन मुस्लिम आतंकवादियों से निपटने के बजाय इन देशों के आगे गिड़गड़ा रहा है । वरना भारत की सेना पाकिस्तान नामक इस राक्षस का नमोनिशान कुछ घंटों में मिटाकर समस्या की जड़ को हमेशा के लिए खत्म कर सकती है।

अगर आप पिछले इतिहास को उठाकर देखें तो आपको पता चलेगा कि किस तरह भारतीय सेना द्वारा प्राप्त विजय को नेताओं ने वार्ता की मेज पर हार में बदल दिया ।

आज ये सेकुलर गिरोह बार-बार आतंकवादियों के सरदारों की मांग कर रहा है जो कि जरूरी है। परन्तु हमें तो हैरानी होती है ये सोचकर कि कहीं पाकिस्तान सच में भारत की बात मानकर सब वांछित आतंकवादियों को भारत के हवाले कर दे तो माननीय सर्वोच्चन्यायालय से फांसी की सजा प्राप्त आतंकवादी को फांसी देने में असमर्थ नेता उन आतंकवादियों का करेंगे क्या ?

हो सकता है इस सेकुलर गिरोह की ये सरकार चुनाव जीतने व विदेशी अंग्रेज एंटोनियों माइनो मारियो के विदेशीमूल के मामले को हमेशा के लिए खत्म करने के लिए पाकिस्तान पर हमला कर दे या फिर ऐसा भी हो सकता है ये सिर्फ बयानबाजी करते रह जायें और पाकिस्तान ही तालिवान को साथ लेकर दुनिया का ध्यान आतंकवादी कैंपों से हटाने के लिए भारत पर हमला कर दे।

कुल मिलाकर इस जंग में मारे जाने वाले निर्दोष हिन्दुओं व मुसलमानों की मौत के लिए पाकिस्तान के साथ-साथ ये सेकुलर गिरोह भी जिम्मेवार होगा जिसने भारत में हालात को इस हद तक बिगाड़ने में हर तरह से सहयोग दिया व राष्ट्रवादियों को सांप्रदायिक कहकर उनका हर तरह से रास्ता रोककर इस आतंकवाद रूपी राक्षस को आगे बढ़ने का मौका दिया।

हम इस सरकार को यह सपष्ट कर देना चाहते हैं कि पाकिस्तान से युद्ध करने से पहले देश के भीतर बने मुस्लिम आतंकवादी नेटवर्क को ध्वस्त कर, आतंकवादियों को उनके आकाओं सहित नेस्तनानबूद करना वक्त की पुकार है इन आकाओं में अबदुल रहमान अन्तुले जैसे सरकार के अपने लोग भी सामिल हैं।

अतः पाकिस्तान के साथ किसी भी युद्ध से पहले देश में एक ऐसे देशभक्त सासन की जरूरत है जो इन आतंकवादियों के ठेकेदारों से मुक्त हो । इसलिए भारतीय सेना को यह सुनिष्चित करना चाहिए कि जब तक विदेशी की गुलाम व मुस्लिम आतंकवादियों के आकाओं से भरी पड़ी ये सेकुलर गिरोह की सरकार सता में है तब तक युद्ध न हो पाए । फिर भी अगर ये सरकार देश को युद्ध में धकेलती है तो सेना सासन अपने हाथ में लेकर अपने हिसाव से से ये निर्णायक युद्ध लड़े । जरूरत पड़ने पर देश के भीतर के गद्दार नेताओं, पत्रकारों, लेखकों, मीडिया कर्मियों, मानवाधिकारवादियों को भी मौत के घाट उतार दे । देश का हर राष्ट्रभक्त नागरिक सेना के देशहित में किए गए हर काम का समर्थन करेगा।

ये सरकार न केवल खुद हिन्दुओं को मरवाने की साजिश रच रही है पर साथ ही सुरक्षाबलों को भी हिन्दुओं के विरूद्ध भड़का रही है क्योंकि गुलाम प्रधानमंत्री ने 26 नवम्बर 2008 से कुछ दिन पहले सुरक्षाबलों से बहुसंख्यकों बोले तो हिन्दुओं द्वारा विरोध किए जाने के बावजूद अल्पसंख्यकों बोले तो मुस्लिम जिहादियों का विश्वास जीतना जरूरी बताया । साथ ही सुरक्षाबलों को ये कहा कि सफल होने का यही एकमात्र रास्ता है अब इस गुलाम प्रधानमंत्री से कोई पूछे कि क्या इसी विश्वास को जीतने के लिए सरकार हिन्दुओं को आतंकवादी कह रही है, भगवान राम के अस्तित्व को नकार रही है, जिहादियों को अपना भाई बता रही है ? जिसके परिणाम स्वरूप मुस्लिम आतंकवादी लगातार बम्ब विस्फोट कर रहे हैं ।

हम सुरक्षाबलों से एक ही विनती करेंगे कि वो आतंकवादियों को ,देशद्रोहियो को, गद्दारों को, आल्पसंख्यक या बहुसंख्यक की निगाह से न देखें बल्कि इससे पहले कि जिहादियों से दुखी लोग कानून खुद अपने हाथ में लेकर जिहादियों के विरूद्ध कार्यावाही करें, सुरक्षाबल खुद देश में छुपे जिहादियों को गोली मारें व जिहादियों का समर्थन करने वालों को भी न बख्शें । क्योंकि सारी समस्या की जड़ यही समर्थक हैं ।

सांप्रदायिक दंगे जिम्मेबार कौन

सांप्रदायिक दंगे जिम्मेबार कौन

ये सरकार जिस तरह साँप्रदायिक दंगों को हिन्दुओं के विरूद्ध हथियार के रूप में प्रयोग कर रही है। उसे देखकर तो लगता है कि जिहादी हमलों में इतने हिन्दुओं की जान जाने के बावजूद सरकार को मुस्लिम जिहादी मानसिकता का एहसास ही नहीं है ।

इस सरकार की जानकारी के लिए हम बता दें कि आज तक देश में हुए दंगों में से 95% दंगों की शुरूआत अल्पसंख्यकों ने की है। इन में से भी अगर 2-4% दंगों को छोड़ दें तो बाकी सब की शुरूआत मुसलमानों में छुपे जिहादियों ने की है ।

आम-मुसलमान खुद को उतना ही भारतीय मानता है जितना बाकी भारतीय मानते हैं इसलिए उसे हिन्दू पूजा पद्धति बोले तो भारतीय पूजा पद्धति पर कोई तकलीफ नहीं होती ।

तकलीफ होती है तो उन मुस्लिम जिहादियों को जो खुद को औरंगजेब और बाबर के उतराधिकारी मानकर इस भारत को इस्लामी राज्य बनाने के षड़यन्त्र को इस सैकुलर गिरोह के सहयोग से व अल्पसंख्यकों की रक्षा के लिए बने विशेष कानूनों के दुरूपयोग से हिन्दुबहुल क्षेत्रों पर लगातार हमला कर आगे बढ़ा रहे हैं ।

अगर आपको नहीं पता तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इतिहास इन तथ्यों का साक्षी है कि कितने ही बार इन जिहादियों ने अल्लाह हो अकबर के नारे लगाते हुए मन्दिरों शिवाल्यों व अन्य पूजा स्थलों पर हमला कर तबाही मचाई व अनगिनत हिन्दुओं को इस्लाम के नाम पर हलाल किया ।

इस हिन्दुविरोधी देशद्रोही सैकुलर जिहाद व धर्मांतरण समर्थक सरकार व इसके सहयोगी गद्दार मीडिया ने बार-बार साँप्रदायिक दंगों का जिकर कुछ इस अन्दाज में किया कि मानो इन दंगों के लिए हिन्दू जिम्मेवार हों।

हम इतने बड़े पैमाने पर हिन्दुओं के विरूद्ध हुई हिंसा के बारे में लिखना नहीं चाहते थे। परन्तु इस सेकुलर गिरोह द्वारा सामप्रदायिक दंगों के बहाने जिहादियों द्वारा किए जा रहे हिन्दुओं के कत्लों को जायज ठहराने की दुष्टता ने हमें ये सब लिखने पर मजबूर कर दिया। हमें परेशानी मे डाल दिया कि कहाँ से शुरू करें इन मुस्लिम जिहादियों द्वारा शुरू किए गए दंगों का लेखा-जोखा। अधिकतर देशद्रोही चैनल तो जिहादियों का समर्थन करने व हिन्दुओं को अपमानित करने में मुस्लिम जिहादियों को भी पीछे छोड़ देते हैं । अगर हम 1945 तक हुए हिन्दुओं के नरसहारों को न भी लिखें तो भी इन मुस्लिम जिहादियों ने 1946 के बाद ही हिन्दुओं पर इतने जुल्म ढाये हैं कि इनके बारे में सोचते ही रौंगटे खड़े हो जाते हैं ।

मन ये सोचने पर मजबूर हो जाता है कि हिन्दू ये सब कैसे और क्यों सहन कर गए ?

इतना कुछ हो जाने पर भी ये गिरोह जो खुद को सैकुलर कहता है इन जिहादियों का साथ क्यों दे रहा है ?

क्यों इस गिरोह को हिन्दुओं के कत्ल करवाने में फखर महसूस होता है विजय का एहसास होता है ?

क्यों और कैसे ये गिरोह हिन्दुओं के हुए हर नरसंहार के बाद जिहादियों के पक्ष में महौल बनाने पर उतारू हो जाता है ?

क्यों ये गिरोह हिन्दुओं को धोखा देकर उन्हें ही कत्ल करवाने में कामयाब जो जाता है ?

क्यों ये गिरोह हिन्दुओं के आक्रोश से बच जाता है ?

क्यों हिन्दू एकजुट होकर हिन्दुओं के कातिलों व उनके समर्थकों पर एक साथ हमला नहीं बोलते ?

हम शुरू करते हैं 1946 से जब कलकता में मुसलमानों द्वारा किए गए हमलों में 5000 हिन्दुओं का कत्ल किया गया ।

फिर नवम्बर में पूर्वी बंगाल के नौखली जिला में हिन्दुओं का नरसंहार किया गया सब के सब हिन्दुओं को वहां से भगा दिया गया उनकी सम्पति तबाह कर दी गई ।

विभाजन के दौरान कम से कम 20 लाख हिन्दू-सिखों का कत्ल सिर्फ वर्तमान पाकिस्तान में किया गया ।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार 1947-1951 तक जिहादी मुसलमानों द्वारा किए गये अत्याचारों के परिणामस्वरूप एक करोड़ हिन्दू-सिख भारत भागने पर मजबूर किए गए ।

इसमें चौंकाने वाला तथ्य ये है कि वर्तमान भारत में भी इस दौरान हिन्दुओं पर हमले किए गए और तब की सैकुलर सरकार तमाशा देखती रही जिहादियों की रक्षा में लगी रही हिन्दुओं को मरवाती रही ।

फरवरी 1950 में 10,000 हिन्दुओं का ढाका और बंगला देश(तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान) के अन्य भागों में नरसंहार किया गया । उसके बाद के कुछ महीनों में लाखों हिन्दुओं को वहां से भगाया गया ।

1950-60 के बीच में 50 लाख हिन्दुओं को मुस्लिम जिहादियों द्वारा पूर्वी पाकिस्तान से भारत भगाया गया ।

1971 में पाकिस्तानी सेना ने बांगलादेश मुक्ति अंदोलन के दौरान 25 लाख हिन्दुओं का कत्ल किया । जिसके परिणामस्वरूप अधिकतर हिन्दू सुरक्षा की खोज में भारत भाग आये ।

उस वक्त की सरकार ने इन हिन्दुओं की रक्षा के लिए क्या कदम उठाए ? कोई नहीं । आखिरकार बांगलादेश बनवाने का दावा करने वाले इन लोगों ने क्यों हिन्दुओं को लावारिस छोड़कर मरने पर मजबूर किया ?

सिर्फ इसलिए कि हिन्दू कभी संगठित होकर गैर हिन्दुओं पर हमला नहीं करता या फिर इसलिए कि कभी एकजुट होकर संगठित वोट बैंक नहीं बनाता ?

1989 में बांगलादेश में सैंकड़ों मन्दिर गिराए गए ।

1947 से 2000 के बीच जिहादी हमलों में 6 लाख चकमा बनवासियों का नामोनिशान मिटा कर मुसलमानों ने उनकी जमीन पर कब्जा कर उनकी औरतों को जबरन मुसलमानों के साथ विवाह करने को बाध्य किया ।

जागो ! हिन्दू जागो !

लड़ाई से भागो मत एकजुट होकर लड़ों वरना मिटा दिए जाओगे इन मुस्लिम जिहादियों व इनके आका धर्मनिर्पेक्षतावादियों द्वारा ।

1947-48 में मुसलमानों ने कश्मीर के जिस हिस्से पर कब्जा किया(पी ओ के) वहां से सब हिन्दुओं का नामोनिशान मिटा दिया गया ।

1985 में अलकायदा की स्थापना के बाद भारत समेत सारे भारत में मुस्लिम जिहाद के एक नये दौर की शुरूआत हुई ।

1986 में कश्मीर में जिहादियों द्वारा हिन्दुओं पर एक तरफा हमले शुरू किए गए । जिहादियों ने एक को मारो एक का बलात्कार करो सैंकड़ों को भगाओ की नीति अपनाई । मुसलमानों ने मस्जिदों से लाउडस्पीकरों द्वारा जिहाद का प्रचार प्रसार किया । उर्दू प्रैस के द्वारा भी जिहाद का प्रचार प्रसार किया गया । जिहाद शुरू होते ही हिन्दुओं के पड़ोसी मुसलमान ही उनके शत्रु बन गए । मुसलमानों ने संगठित होकर हिन्दुओं को निशाना बनाना शुरू किया ।

जिहादियों की भीड़ इक्ट्ठी होकर हिन्दुओं के घर में जाती उन पर हर तरह के जुल्म करने के बाद उनको दूध पीते बच्चों सहित हलाल कर देती । यहाँ समाचार दिया जाता पाकिस्तानी आतंकवादियों ने ये सब कर दिया । लेकिन सच्चाई यही थी कि हिन्दुओं को हलाल करने वाले उनके पड़ोसी मुसलमान ही होते थे। जो हिन्दुओं को कत्ल करने के बाद अपने-अपने घरों में रहते थे ।

कश्मीर के अधिकतर पुलिसकर्मी व महबूबामुक्ती जैसे नेता इस्लाम के नाम पर इन जिहादियों का हर तरह से सहयोग करते थे अभी भी कर रहे हैं । कई बार तो बाप व भाईयों के हाथ पैर बांध कर उनके परिवार की औरतों की इज्जत लूटकर उसके फोटो खींच कर बाप और भाईयों को ये सब देखते हुए दिखाया जाता था । बाद में ये तसवीरें हिन्दुओं के घरों के सामने चिपका दी जाती थी । परिणाम जो भी हिन्दू इन तसवीरों को देखता वही अपने परिवार की औरतों की इज्जत की रक्षा की खातिर भाग खड़ा होता । और उसके पास रास्ता भी क्या था सिवाय हथियार उठाने या भागने के । हिन्दुओं ने हथियार उठाने के बजाए भागना बेहतर समझा । क्योंकि अगर वो हथियार उठाते तो ये सैकुलर नेता उन्हें अल्पसंख्यकों बोले तो मुसलमानों का शत्रु बताकर जेल में डाल देते फांसी पर लटका देते ।

हमें हैरानी होती है इन धर्मनिर्पेक्षता की बात करने वालों पर जो हिन्दुओं पर हुए अत्याचारों के बारे में देश-दुनिया को जागरूक करने वालों को आतंकवादी कहते हैं, साम्प्रदायिक कहते हैं और इन सब जुल्मों-सितम को राजनीति बताते है हिन्दुओं को गुमराह करते है । ये सब दुष्प्रचार सिर्फ जिहादी ही नहीं बल्कि जिहादियों के साथ-साथ इनके ठेकेदार धर्मनिर्पेक्षता के पर्दे में छुपे ये राक्षस भी करते हैं जो अपनों का खून बहता देखकर भी अपनी आत्मा की आवाज नहीं सुनते । न केवल इन जिहादी आतंकवादियों के साथ मिलकर चुनाव लड़ते हैं पर सरकार भी बनाते हैं और सत्ता में आने के बाद जिहादियों के परिवारों का जिम्मा उठाते हैं । उनको हर तरह की मदद की जिम्मेवारी लेते हैं जिहादी आतंकवादियों के परिवारों को आर्थिक सहायता देते हैं । हिन्दुओं को अपने घरों से भागने पर मजबूर करते हैं । जिहादियों के विरूद्ध सेना द्वारा कार्यवाही शुरू होने पर जिहादियों के मानवाधिकारों का रोना रोते हैं मतलब हर हाल में जिहादियों का साथ देते हैं ।

अगर आप सोचते हैं कि हम कोई पुरानी बात कर रहे हैं तो आप गलत हैं। जो कुछ कश्मीर में हिन्दुओं के साथ किया गया वो ही सबकुछ अब जम्मू के मुस्लिमबहुल क्षेत्रों में दोहराय जाने की तैयारी हो चुकी है तैयारी ही क्यों उसकी तो शुरूआत भी हो चुकी है पिछले दिनों जब डोडा उधमपुर में मई 2006 में 36 हिन्दुओं का कत्ल किया गया तो इस नरसंहार में बच निकलने में सफल हुए हिन्दुओं ने बताया कि उन्हें ये देख कर हैरानी हुई कि जो मुस्लिम जिहादी हिन्दुओं को इस तरह कत्ल कर रहे थे वो इन हिन्दुओं के पड़ोसी मुसलमान ही थे । जम्मू के मुस्लिमबहुल क्षेत्रों में इसके अतिरिक्त भी कई नरसंहार हो चुके हैं ।

पिछले दिनों हिमाचल के साथ लगते जम्मू के एक गाँव में गांव वालों ने जब एक मुस्लिम जिहादी को मार गिराया तो वहां के मुस्लिम जिहादी मुख्यमन्त्री के इशारे पर पुलिस इन गांव वालों की जान के पीछे पड़ गई । बेचारे गाँव वालों ने हिमाचल के चम्बा में छुप कर जान बचाई ।

जरा आप सोचो जो गुलामनबी आजाद माननीय न्यायालय से फांसी की सजा प्राप्त अफजल को निर्दोष कहता है क्या वो हिन्दुओं द्वारा मार गिराय गए जिहादी को आतंकवादी मान सकता है ?

क्या आपको याद है कि 20-20 बिश्व कप में भारत द्वारा पाकिस्तान को हरा देने के बाद जम्मू विश्वविद्यालय में देशभक्त हिन्दुओं द्वारा इस जीत की खुशी में भारत माता की जय बुलाय जाने के बाद किस तरह इन हिन्दुओं की पिटाई विशवविद्यालय के जिहादी मुसलमानों ने की और किस तरह सरकार के इशारे पर बाद में पुलिस ने उन दुष्टों के विरूद्ध कार्यवाही करने के बजाए इन देशभक्तों को ही निशाना बनाया ?

1993 तक कश्मीर में अधिकतर मन्दिर तोड़ दिय गए । आज सारे का सारा कश्मीर हिन्दुविहीन कर दिया गया है और ये गिरोह बात करता है हिन्दू आतंकवाद की साँप्रदायिकता की । कोई शर्म इमान नाम की चीज है कि नहीं । तब कहां चला जाता है ये सैकुलर गिरोह जब हिन्दुओं के नरसंहार होते हैं । तब तो ये सारा गिरोह जिहादियों का साथ देता है हिन्दुओं के नरसंहार करने वालों को गुमराह मुसलमान बताकर उनको सजा से बचाने के नय-नय बहाने बनाता है जिहादियों के समर्थन में सड़कों पर उत्तरता है ।

आप जितने मर्जी कानून बना लो अब जिहादियों द्वारा हिन्दुओं को निहत्था मरने पर कोई बाध्य नहीं कर सकता । जो हमला करेगा वो मरेगा । यह हमारी नहीं सब हिन्दुओं के उस मन की आवाज है जो लाखों हलाल हो रहे हिन्दुओं की चीखें सुन कर अब और हिन्दुओं को इस तरह न मरने देने की कसम उठा चुके हैं । जिहादियों को उनके किए की सजा जरूर मिलेगी और ऐसी सजा मिलेगी कि उनका हर हिन्दू के कत्ल में साथ देने वाले धर्मनिर्पेक्षता के चोले में छुपे ये राक्षस भी नहीं बचेंगे ।

1969 में गुजरात,1978 में अलीगढ़ ,1979 में जमशेदपुर, 1980 में मुरादाबाद,1982 और 88 में मेरठ,1989 में भागलपुर । कौन नहीं जानता कि ये सब के सब सांप्रदायिक दंगे मुसलमानों ने शुरू किए थे । बेशक बाद में इन में से कुछ दंगों में मुसलमानों को इसकी कीमत भी चुकानी पड़ी थी ।

जनवरी 1993 में भी मुम्बई में दंगे इन मुस्लिम जिहादियों ने ही शुरू किए थे और उसके बाद 12 मार्च 1993 को मुम्बई में ही बम्ब विस्फोट कर 600 हिन्दुओं का कत्ल किया व हजारों को घायल किया करोड़ों की सम्पति तबाह की सो अलग ।

15 मार्च 1993 में सी पी आई एम के सदस्य रासिद खान ने कलकता में बम्ब विस्फोट कर 100 लोगों का कत्ल किया ।

फरवरी 1998 में कोयम्बटूर में इन जिहादियों ने बम्ब विस्फोट कर अडवाणी जी को कत्ल करने की कोशिश की । इन बम्ब विस्फोटों में सैंकड़ो हिन्दुओं का कत्ल किया गया । इन हमलों के दोषी मदनी को इस सैकुलर सरकार ने न केवल सजा से बचाया बल्कि और हिन्दुओं का खून बहाने के लिए जेल से निकाल कर खुला छोड़ दिया ।

क्या आप भूल गए किस तरह गोधरा में 27 फरवरी 2002 को 2000 मुस्लिम जिहादियों की भीड़ जिसका नेतृत्व कांग्रेसी पार्षद कर रहा था, ने 58 हिन्दुओं को रेल के डिब्बे में जिन्दा जला दिया व इतने ही हिन्दुओं को घायल कर दिया, जो इन जिहादियों के बढ़ते हुए दुस्साहस को दिखाता है । बाद में किस तरह इस सैकुलर बोले तो देशद्रोही सरकार ने इन हिन्दुओं को जलाने वालों को बचाने के लिए माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त जज द्वारा की जा रही जांच को बाधित करने का षड़यन्त्र किया !

अभी 2008 में किस तरह इन जिहादियों ने आतंकवाद के विरोध में रैली करने जा रहे सांसद योगी अदित्यनाथ पर आजमगढ़ में हमला बोल दिया । यह कैसी धर्मनिर्पेक्षता है जिसके राज में एक सांसद तक मुस्लिम जिहादी आतंकवाद के विरूद्ध बोलने की कोशिश करने पर मुसलमानों के हमले का शिकार हो जाता है ? जिस देश में जिहादी आतंकवाद के विरूद्ध बोलने पर एक सांसद तक सुरक्षित नहीं उस देश में आम हिन्दू बिना हथियार उठाये कैसे सुरक्षित रह सकता है ?

ठीक इसी तरह महाराष्ट्र धुले में इन जिहादियों ने आतंकवाद के विरोध में होने वाली रैली को दंगा फैला कर वहां की सरकार के सहयोग से रूकवाने में सफलता हासिल की । किस तरह उत्तर प्रदेश में इन जिहादियों ने बी एस पी नेता की हत्या की और किस तरह वहां की तत्कालीन सैकुलर जिहाद समर्थक सरकार ने उन जिहादियों की सहायता की ।

उत्तर प्रदेश में मऊ मे हुए दंगों को कौन भुला सकता है जब एक मुस्लिम जिहादी विधायक अंसारी ने गाड़ी में घूम-घूम कर मुसलमानों को उकसा कर हिन्दुओं के कत्ल करवाये । हिन्दूसंगठनों के कितने ही कार्यकर्ता इन जिहादियों के हमलों में आज तक मारे जा चुके हैं । आये दिन हिन्दुओं पर हमला करना इन मुस्लिम जिहादियों की आदत सी बनती जा रही है ।

हिन्दू तो आत्मरक्षा में मजबूरी में जवाबी कार्यवाही करता है वो भी कभी-कभी पानी सिर के ऊपर से निकल जाने के बाद । हिमाचल के चम्बा में 1998 में इन मुस्लिम जिहादियों ने दर्जनों हिन्दुओं का कत्ल कर दिया । कत्ल होने वाले सभी मजदूर थे । कत्ल करने वाले चम्बा के ही मुस्लिम जिहादी हैं जो आज तक बिना किसी सजा के खुले घूम रहे हैं क्योंकि पुलिस के पास ऐसे जिहादियों से निपटने के लिए कोई कड़ा कानून नहीं है।

सुन्दरनगर मण्डी में मुस्लिम प्रधान चुने जाने के बाद मुसलमानों में छुपे जिहादियों ने पाकिस्तान जिन्दाबाद के नारे लगाये । मण्डी में ही उत्तर प्रदेश के एक मुस्लिम जिहादी जो दर्जी का काम करता था, ने हिन्दू लड़की पर तेजाब फैंक दिया । आपको हैरानी होगी कि उस वक्त मंडी में पुलिस अधीक्षक भी मुस्लिम ही था । बाद में ये जिहादी पुलिस को चकमा देकर भागने में सफल रहा ।

हिमाचल में ही आए दिन जगह-जगह सरकारी जमीन पर कब्र बनाकर कब्जा करने के प्रयत्न किये जा रहे हैं । हिन्दुओं द्वारा विरोध किए जाने पर अल्पसंख्यवाद का सहारा लिया जा रहा है ।

कश्मीर के जिन मुस्लिम जिहादियों ने हिन्दुओं का नामोनिशान मिटा दिया वो भी अपने आप को आम मुसलमान बताकर हिमाचल व देश के अन्य हिन्दुबहुल हिस्सों में खुले घूम रहे हैं कभी मजदूरों के वेश, में तो कभी कपड़ा बेचने वालों के वेश में, तो कभी पल्लेदारों के वेश में प्रशासन उनका सहयोग कर रहा है । आम लोग इनकी बढ़ती संख्या को देखकर कोई अनहोनी न हो जाए ये सोच कर डर रहे हैं। हिन्दू संगठनों से इनके विरूद्ध कार्यवाही करने की गुहार लगा रहे हैं । हिमाचल का आम हिन्दू ये सोचने पर मजबूर हो गया है कि कहीं ये लोग कश्मीर में सेना की कार्यवाही से बचने के लिए तो हिमाचल नहीं आते । क्योंकि ये अक्सर सर्दियों में तब आते हैं जब पहाड़ों पर बर्फ पड़ जाती है जहां ये गर्मियां शुरू होते ही छुप जाते हैं व मौका पाते ही हिन्दुओं पर हमला बोल देते हैं । हिमाचल का चम्बा का डोडा के साथ लगता क्षेत्र तो इन जिहादियों की पक्की शरणगाह बनचुका है । सरकारी जमीन पर लगातार कब्जा किया जा रहा है हिन्दुओं की जमीन खरीद कर क्षेत्र को मुस्लिमबहुल बनाया जा रहा है और प्रशासन सो रहा है ।

कुछ वर्ष पहले बिलासपुर में एक मुस्लिम बस चालक/परिचालक ने हिन्दू लड़की को अगवा करने की कोशिश की । बाहर के अधिकतर जिहादी आम मुसलमानों के यहां शरण ले रहे हैं इन्हें जिहाद की शिक्षा दे रहे हैं हिन्दुओं के विरूद्ध भड़का रहे हैं । ये सब तब हो रहा है जब हिमाचल में हिन्दू 95% से अधिक हैं ।

अगर हिन्दू साम्प्रदायिक होते जैसे सैकुलर गिरोह प्रचारित करता है तो आज तक यहां एक भी मुसलमान जिन्दा न बचता ।पर सच्चाई यह है कि आज तक एक भी मुसलमान को हिन्दुओं ने हाथ नहीं लगाया है फिर भी हिन्दू साम्रदायिक और जिस गिरोह के सहयोग से मुसलमानों ने कश्मीर से हिन्दुओं का सफाया कर दिया वो गिरोह और मुसलमान –शान्तिप्रय सैकुलर ।

हिमाचल के हिन्दुबहुल होने के बावजूद मुस्लिम जिहादियों द्वारा बार-बार किए जा रहे हमलों व मुसलमानों द्वारा किये जा रहे अतिक्रमण को हिन्दू कब तक सहन करेगा । एक वक्त तो ऐसा आयगा जब ये सब्र का बांध टूटेगा फिर क्या होगा…सब ठीक हो जाएगा !

अब ये सैकुलर जिहाद समर्थक सरकार इन जिहादियों को दंगों में मारे जाने पर लाखों रूपये की सहायता की घोषणा कर इनका हौसला बढ़ा रही है व हिन्दुओं के जान-माल को खतरे में डाल रही है ।

खैर हम भी कैसी बात कर रहे हैं जो सरकार खुद किसी अंग्रेज की गुलाम हो वो हिन्दुओं को तबाह करने के सिवा कर भी क्या सकती है ? क्योंकि जब हिन्दू तबाह और बरबाद हो जांयेंगे तभी तो ये देशद्रोही इस भारत को तबाह करने में कामयाब हो पांयेगे !

अन्त में सिर्फ इतना कहेंगे कि जिहादियों ने मुम्बई की सड़कों पर जिस तरह सरेआम गोलियां बरसाईं व निहत्थे बेकसूर लोगों का कत्लेआम किया वो भी पुलिस की गाड़ी में बैठकर । जिसके परिणाम सवरूप अभिताभ बच्चन जैसे लोगों को अपना हथियार बगल में रखकर सोना पड़ा ।

इस सब से यही सिद्ध होता है कि अगर साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर हिन्दुओं में इन जिहादियों के विरूद्ध जागरूकता अभियान चला रही थी और लैफ्टीनैंट कर्नल श्रीकांत प्रोहित हिन्दुओं को आत्म रक्षा की ट्रेनिंग दे रहे थे तो अच्छा ही कर रहे थे क्योंकि जो सरकार इस समाज के खास लोगों की रक्षा नहीं कर सकती अपने अधिकरियों तक को नहीं बचा सकती वो भला आम लोगों की क्या रक्षा करेगी कैसे करेगी और क्यों करेगी वो तो चन्दा भी नहीं दे सकते !

ऐसे में जब सरकार आम हिन्दुओं को जागरूक करने वालों व आत्मरक्षा का प्रशिक्षण देने वालों को जेल में बन्द करती है तो वो कुल मिलाकर आतंकवादियों के काम को आसान बनाती है क्योंकि आत्मरक्षा की ट्रेनिंग लिए हुए लोगों को आतंकवादी इतनी आसानी से नहीं मार सकते जैसे मुम्बई की सड़कों पर मारा गया ।

जिस वक्त मुम्बई में कमांडो कार्यवाही चल रही थी ठीक उस वक्त मुस्लिम जिहादी इन्टरनैट पर दुआ कर रहे थे हे अल्लाह हिन्दुओं को तबाह और बरबाद कर दे। उन्हें ऐसी भयानक मौत दो ताकि उनकी रूह कांप जाए और हम हिन्दुस्थान को दारूल इस्लाम बनाने में कामयाब हो जांयें ।

अब ऐसे महौल में भारत के मुस्लिम जिहादी इस जिहाद में सहयोग नहीं करेंगे मात्र कल्पना तो हो सकती है यथार्थ नहीं । मामला सिर्फ आम मुसलमान को इस जिहाद में शामिल होने से बचाना है पर इन्हें तभी बचाया जा सकता है जब सरकार कड़े से कड़े कानून बनाकर जिहादियों के साथ-साथ उनके समर्थकों को भी मौत के घाट उतार दे ।

अगर सरकार जिहादियों के विरूद्ध कार्यवाही करने के बजाए उनको बचाने की कोशिश करती है जिहादियों के विरूद्ध कार्यवाही करने वालों को जेल में डालती है तो फिर ये काम तो प्रखर देशभक्त लोगों को ही करना पड़ेगा । क्योंकि अगर इस जिहाद को यथाशीघ्र जड़मूल से समाप्त न किया गया तो ये हर भारतीय का सुख चैन छीन लेगा ।

कुछ लोग अज्ञानवश जिहादी आतंकवाद की तुलना सिखों के आतंकवाद से करने की गलती करते हैं वो ये भूल जाते हैं कि सिखों का इतिहास धर्म की रक्षा की खातिर की गई बेहिसाब कुरबानियों का इतिहास है। सिखों का हिन्दुओं के साथ खून का वो गूढ़ रिश्ता है जिसने मुशकिल की उस घड़ी में भी हिन्दू-सिखों की आत्मा को मरने नहीं दिया । सिखों की धर्मिक पुस्तकें गैर सिखों के कत्लोगारद का समर्थन नहीं करतीं ।

अगर हम मुसलमानों के इतिहास को देखें तो ये हिन्दुओं के कत्लोगारद का इतिहास है इस इतिहास का हर पन्ना हिन्दुओं के ऊपर जिहादियों द्वारा किये हमलों से भरा पड़ा है । ये इतिहास धोखे, गद्दारी, व नमकहरामी का इतिहास है ।

अगर इतने हमलों और बर्बरता के बाद भी ईरान, मिश्र, मैसोपोटामिया, तुर्की, उत्तर अफ्रीका की तरह भारत का इस्लामीकरण न हो पाया तो ये कोई मुस्लिम जिहादियों की उदारता या दया की वजह से नहीं जैसा कि ये गद्दार गिरोह दुष्प्रचार करता है क्योंकि ये गुण तो इन जिहादी राक्षसों में थे ही नहीं, न आज हैं। ये तो हिन्दू क्राँतिकारियों व हिन्दुओं द्वारा लगातार किया गया कड़ा संघर्ष था जिसने भारतीय सभ्यता संस्कृति को बचाय रखा ।

शुरू में जब मुस्लिम जिहादियों ने हिन्दुओं पर हमला किया तो हिन्दू उनको अपने जैसा इन्सान समझने की गलती कर बैठे । जैसे जैसे हिन्दुओं को मुस्लिम जिहादियों के अत्याचारी और बर्बर प्रवृति का पता चलता गया वैसे- वैसे हिन्दू जागरूक और संगठित होता गया ।

वर्तमान में मुस्लिम जिहादियों ने बम्ब विस्फोट कर हिन्दुओं पर हमला करने का अधुनिक मार्ग अपनाया है बम्ब विस्फोट उन क्षेत्रों में किए जाते हैं जहां मुसलमान बहुत कम संख्या में हैं जहां मुसलमानों की बड़ी संख्या है वहां आज भी हिन्दुओं को गला काट कर हलाल करने का मार्ग अपनाया जाता है जैसे कश्मीर में कई बार देखने को मिला ।

हिन्दुबहुल क्षेत्रों में जहां कहीं भी मुसलमानों की संख्या बढ़ जाती है वहां पर पहले हिन्दुओं/मन्दिरों/त्योहारों पर हमला कर दंगा फैलाया जाता है इन दंगों में पहले हिन्दुओं को छुरा घोंप कर मारा जाता था अब इन हमलों में भी छोटे-छोटे देशी कट्टों व बमों का इस्तेमाल होने लगा है। हमलों के दौरान दंगा रोकने में लगे पुलिस कर्मियों पर भी अक्सर हमला बोला जाता है । ये हमले अक्सर योजना बनाकर किये जाते हैं जिससे कि हिन्दुओं के जान-माल को अधिक से अधिक नुकसान पहुँचाया जा सके ।

अगर कहीं हिन्दू आत्म रक्षा में तैयार बैठे हों और मुसलमानों को प्रतिक्रिया में नुकसान उठाना पड़ जाए तो फिर ये मुस्लिम जिहादी इसे अल्पसंख्यकों पर हमला बताकर जगह-जगह हिन्दुओं को सांप्रदायिक कहकर दुष्प्रचार शुरू कर देते हैं और ये जिहादसमर्थक गिरोह इनके इस दुष्प्रचार को आगे बढ़ाता है ।

आपको यहां पर इस बात को ध्यान में रखना चाहिये कि दुनिया का हर कानून इन्सान को आत्मरक्षा का अधिकार देता है फिर हिन्दुओं द्वारा इस अधिकार का उपयोग न करने के लिए दबाव बनाना व हिन्दुओं को इस अधिकार का उपयोग करने पर उन्हें बदनाम करना, उनको इन मुस्लिम जिहादियों के हाथों निहत्था मरने पर मजबूर करने के समान है जिससे हर किसी को बचने का प्रयत्न करना चाहिए ।

हिन्दूमिटाओ-हिन्दुभगाओ अभियान

1985 में अलकायदा की स्थापना ने बाद बाकी सारी दुनिया की तरह भारत में भी मुस्लिम जिहादियों को नये सिरे से संगठित होने का मौका मिला । जिसका परिणाम कश्मीर घाटी में 1989-90 में मुस्लिम जिहादियों द्वारा हिन्दू मिटाओ- हिन्दू भगाओ अभियान के रूप में देखने को मिला । जिसके परिणामस्वरूप आज सारी कश्मीर घाटी को हिन्दुविहीन कर दिया गया । जिस तरह ये सैकुलर गिरोह हिन्दुओं पर किय गए हर हमले के बाद राम मन्दिर का तर्क देकर इसे बदले में की गई कार्यवाही बताकर सही ठहराने का दुससाहस करता है। अगर इनके इस तर्क को माना जाए तब तो जिस तरह मुस्लिम जिहादियों ने मुस्लिमबहुल कश्मीर घाटी से सब हिन्दुओं का सफाया कर दिया उसी तरह बदले में हिन्दुओं को सारे हिन्दुबहुल भारत से मुसलमानों का सफाया कर देना चाहिये । जिस तरह कश्मीर में वहां की मुस्लिम पुलिस ,प्रैस, नेताओं ने मुसलमानों के हिन्दुमिटाओ-हिन्दुभगाओ अभियान को सफल बनाने में हर तरह का सहयोग दिया तो इनके इस तर्क के अनुसार सब हिन्दू पुलिस, प्रैस व मीडिया व नेताओं को हिन्दुओं के इस मुस्लिम मिटाओ मुस्लिम भगाओ अभियान में सहयोग करना चाहिए । जिस तरह हुरियत कान्फ्रैंस ने सारे देश व संसार के मुसलमानों का समर्थन आर्थिक सहयोग इन मुसलमानों के हिन्दू मिटाओ हिन्दू-भगाओ अभियान के लिए जुटाया वैसा ही समर्थन व आर्थिक सहयोग सब हिन्दू संगठनों को मिलकर हिन्दुओं के इस अभियान को सफल बनाने के लिए जुटाना चाहिए ।

अतः हम तो यही कहेंगे कि अगर हिन्दू इस तरह की कोई प्रतिक्रिया नहीं कर रहे हैं तो उसे उनकी कमजोरी मानकर उन्हें साम्प्रदादिक व आतंकवादी कहकर दुनिया में फजूल में बदनाम न किया जाए क्योंकि जिस दिन हिन्दुओं ने इस बदनामी से तंग आकर इसे यथार्थ में बदलने का मन बना लिया उस दिन न हिन्दुओं पर हमला करने वाले बचेंगे न हमलों का समर्थन करने वाले बचेंगे । हिन्दू मुस्लिम जिहादियों के हर हमले को सहन कर रहे हैं अपने हिन्दू भाईयों को अपने सामने कत्ल होता देख रहे हैं। फिर भी इन्सानित व मानवता की रक्षा की खातिर खामोश हैं पुलिस प्रशासन सरकार से न्याय की उम्मीद लगाये बैठे हैं । दूध पीते बच्चों तक को इन जिहादियों ने मार्च 1998 में मुस्लिम जिहादियों द्वारा कत्ल किया गया दूध पीता बच्चा आज 21बीं शताब्दी में हिन्दुबहुल भारत में हलाल कर दिया। सब तमाशा देखते रहे हिन्दू को ही बदनाम करते रहे और हिन्दू फिर भी खामोश रहा । अल्पसंख्यकवाद के नाम पर ईसाईयों व मुसलमानों के बच्चों को विशेषाधिकार देकर हिन्दुओं को दोयम दर्जे का नागरिक बनाकर रख दिया फिर हिन्दू खामोश रहा । सेना में हिन्दुओं की अधिक संख्या पर सवाल उठा दिया गया फिर भी हिन्दू खामोश रहा । हिन्दुओं के लगभग हर सन्त को बदनाम करने का दुस्साहस किया फिर भी हिन्दू खामोश रहा । अन्त में हिन्दू धर्म के आधार स्तम्भ भगवान राम के अस्तित्व को नकार दिया फिर भी हिन्दू खामोश रहा । ये सब कुछ सहने के बाद हिन्दू को दुनिया भर में आतंकवादी कहकर बदनाम कर दिया हिन्दू फिर भी खामोश रहा । लेकिन अब हिन्दू खामोश नहीं बैठने वाला । अब उसने इन हमलों से खुद निपटने का मन बना लिया है अब वो समझ गया है कि ये वो ही मुस्लिम जिहादी हमला है जिसका सामना हिन्दुओं ने सैंकड़ों वर्षों तक किया है। इस आतंकवादी हमले का सामना हमें कृष्ण देवराय, रानी दुर्गावती, बन्दा सिंह बहादुर जैसे महान योद्धाओं की तरह ही करना पड़ेगा । इसके लिए हमें वो सब मार्ग अपनाने होंगे जो मुस्लिम आतंकवादी हिन्दुओं को मारने के लिए अपना रहे हैं । हमें महाराणा प्रताप व छत्रपति शिवाजी जैसे वीर योद्धाओं के उस सबक को फिर से याद करना होगा जिसके अनुसार मुस्लिम आतंकवाद को खत्म करने के लिए मुस्लिम जिहादियों को ढूंढ-ढूंढ कर उनके घर में घुस कर मारना होगा । हमें वीर योद्धा पृथ्वीराज राज द्वारा की गई गलती से मिले सबक को याद रखकर उस पर अमल करना होगा । अगर वीर योद्धा पृथ्वी राज कब्जे में आये उस मुस्लिम जिहादी राक्षस मुहमद गौरी को न छोड़ता तो हिन्दुओं को इतना नुकसान न उठाना पड़ता। हिन्दुओं को गीता के इस उपदेश पर हर वक्त अमल करने की जरूरत है । धर्मों रक्षति रक्षितः

हम हर बार इन मुस्लिम जिहादी राक्षसों के प्रति दया दिखाने की बेवकूफी करते हैं और नुकसान उठाते हैं। क्या आपको याद है कि जिस मुस्लिम जिहादी ने धन तेरस के दिन दिल्ली में बम्ब विस्फोट कर सैंकड़ों हिन्दुओं की जान ली । विस्फोट वाले स्थान पर बच्चों की सैंडलों के ढेर लग गए। उस स्थान पर चारों तरफ मानव के मांस के जलने की दुर्गंध फैल गई । वो मुस्लिम जिहादी एक बार पुलिस ने पकड़ कर सरकार के हवाले कर दिया था । उसे सैकुलर जिहाद समर्थक सरकार ने पढ़ालिखा निर्दोष बताकर छोड़ दिया था ।

एक बात तो साफ और स्पष्ट है कि सारा जिहाद समर्थक सेकुलर गिरोह अपनी इतनी बेवकुफीयों की वजह से इतने हिन्दुओं का कत्ल करवाने के बावजूद कुछ सीखने को तैयार नहीं है। न मुस्लिम आतंकवादियों की हर हरकत को जायज ठहराने वाले जावेद अखत्र, फारूकी, अब्दुल रहमान अंतुले जैसे आतंकवादियों को अलग थलग करने की किसी भी कोशिश का साथ देने को तैयार हैं । तो फिर कानून से इस समस्या का समाधान कैसे निकल सकता है क्यों कि अगर ये गिरोह सरकार में है तो खुद मुस्लिम जिहादियों के विरूद्ध कार्यवाही करेगा नहीं और अगर करना भी चाहेगा तो इसके मुस्लिम जिहादियों के समर्थक सहयोगी करने नहीं देंगे । अगर ये जिहाद व धर्मांतरण समर्थक गठवन्धन विपक्ष में है तो सरकार को आतंकवादियों के विरूद्ध कठोर व निर्णायक कार्यवाही करने नहीं देगा । आतंकवादियों के विरूद्ध कार्यवाही को मुसलमानों के विरूद्ध कार्यवाही करार देकर अपल्पसंख्यकों पर हमला बताकर मुसलमानों को भड़कायेगा । सारी दुनिया में हिन्दुओं व भारत को मुस्लिम विरोधी बताकर बदनाम करेगा ।

अब इन सब हालात में सिर्फ तीन समाधान के रास्ते बचते हैं।

पहला सब शान्तिप्रिय देशभक्त लोग अपने छोटे-छोटे निजी स्वार्थ भुलाकर मिलकर सिर्फ एक बार इस तरह वोट करें कि आने वाले चुनावों में भाजपा को दो तिहाई बहुमत देकर इस आतंकवाद समर्थक गिरोह के सब सहयोगियों के उम्मीदवारों की जमानत तक जब्त करवायें ताकि ये देशद्रोही सेकुलर गिरोह विपक्ष में बैठने के भी काबिल न रहे और अगर रहे तो इतनी कम संख्या में कि ये सरकार द्वारा किये जा रहे किसी भी आतंकवाद विरोधी काम में टांग न अड़ा सकें । अगर इसके बाद भी भाजपा इस समस्या का हल न कर पाये तो भाजपा अपने आप सेना को बुलाकर अपने राष्ट्रवादी होने का प्रमाण देकर देश की बागडोर सेना के हाथ में सौंप दे ।

अगर भाजपा न खुद आतंकवादियों के विरूध निर्णायक कार्यवाही करे न सता सेना को सौंपे तो जनता उसका भी आने वाले चुनाव में सेकुलर गिरोह की तरह सफाया कर किसी ज्यादा देशभक्त विकल्प को सता में लाए।

दूसरा सेना शासन अपने आप अपने हाथ में लेकर सब जिहादियों व उनके समर्थकों का सफाया अपने तरीके से करे । सब देशभक्त संगठन खुले दिल से सेना की इस कार्यवाही का सहयोग करें ।

तीसरा अगर इन में से कुछ भी न हो पाय तो फिर हर देशभक्त हिन्दू -परिवार गुरू तेगबहादुर जी के परिवार के मार्ग पर चलकर उन की शिक्षाओं को अमल में लाते हुए धर्म की रक्षा की खातिर लामबंद हो जाए और कसम उठाये कि जब तक इन मुस्लिम जिहादी राक्षसों,वांमपंथी आतंकवादियों व धर्मांतरण के ठेकेदारों का इस अखण्ड भारत से नामोनिशान न मिट जाए तब तक हम चैन से नहीं बैठेंगे चाहे इसके लिए कितने भी बलिदान क्यों न देने पड़ें ।

हम ये दावे के साथ कह सकते हैं कि पहला और दूसरा समाधान सब हिन्दुओं बोले तो हिन्दू सिख ईसाई बौध जैन मुसलमान सब शान्तिप्रय देशभक्त देशवासियों के हित में है । इसलिए सब देशभक्त लोगों को मिलकर इस हल को कामयाब बनाने का अडिग निर्णय कर समस्या का समाधान निकाल लेना चाहिये ।

पर देश की परस्थितियों व इस देशद्रोही सेकुलर गिरोह की फूट डालो और राज करो के षड्यन्त्रों को देखते हुए इस समस्या का लोकतान्त्रिक हल असम्भव ही दिखता है क्योंकि आज मुसलमान इस सेकुलर गिरोह के दुशप्रचार से प्रभावित होकर हर हाल में उस दल को एक साथ वोट डालता है जो उसे सबसे ज्यादा हिन्दुविरोधी-देशविरोधी दिखता है । ईसाई ईसाईयत को आगे बढ़ाने वालों व धर्मांतरण की पैरवी करने वालों को वोट डालता है ।

बस एक हिन्दू है जिसका एक बढ़ा हिस्सा आज भी मुसलमानों व ईसाईयों द्वारा अपनाइ जा रही हिन्दुविरोधी वोट डालो नीति को नहीं समझ पा रहा है और अपने खून के प्यासे इस सेकुलर गिरोह को वोट डालकर अपने बच्चों का भविष्य खुद तवाह कर रहा है। हिन्दू इस देशविरोधी-हिन्दुविरोधी नीति को धर्मनिर्पेक्षता मानकर हिन्दूविरोधियों को वोट डालकर अपनी बरबादी को खुद अपने नजदीक बुला रहा है । हिन्दू की स्थिति विलकुल उस कबूतर की तरह है जो बिल्ली को अपनी तरफ आता देखकर आंखे बंद कर यह मानने लग पड़ता है कि खतरा टल गया और बिल्ली बड़े आराम से उसका सिकार करने में सफल हो जाती है ।

सारे आखण्ड भारत में चुन-चुन कर बहाया गया व बहाया जा रहा हिन्दुओं का खून चीख-चीख कर कह रहा है कि इन मुस्लिम जिहादियों व उनके सहयोगी इस देशबिरोधी सैकुलर गिरोह का हर हमला सुनियोजित ढंग से हिन्दुओं को मार-काट कर, उनकी सभ्यता संस्कृति को तबाह कर अपने देश भारत से हिन्दुओं का नमो-निसान मिटाकर सारे देश को मुस्लिम जिहादी राक्षसों व धर्मांतरण के ठेकेदारों के हवाले करने के लिए किया जा रहा है । परन्तु हिन्दू की बन्द आंख है कि खुलती ही नहीं ।

अगर सिर्फ एक बार हिन्दू इन धर्मनिर्पेक्षता के चोले में छुपे हिन्दूविरोधियों की असलियत को समझ जाए तो अपने आप इन सब गद्दारों का नामोनिशान मिट जाएगा पर दिल्ली के चुनाव परिणाम ने दिखा दिया कि हिन्दुओं का बढ़ा वर्ग अभी भी इन देशद्रोहियों की असलियत को नहीं पहचान पाया है ।उसने फिर उस दल को वोट कर दिया जिसने पोटा हटाकर व अफजल को फांसी न देकर मुस्लिम जिहादियों का हौसला बढ़ाकर शहीदों के बलिदान का अपमान कर हजारों हिन्दुओं को कत्ल करवा दिया जबकि सब मुसलमानों ने मिलकर मुस्लिम आतंकवादियों का समर्थन करने वाले सेकुलर गिरोह को बोट डाला ।

अतः सैनिक शासन ही इन दो में से ज्यादा सम्भव दिखता है वो भी कम से कम 20-25 वर्ष तक । अगर सेना अपने आप को देश की सीमांओं की रक्षा तक सीमित रखती है तो हिन्दूक्राँति ही सारी समस्या का एकमात्र सरल हल है जिसकी देश को नितांत आवश्यकता है। हिन्दूक्राँति तभी सम्भव है जब सब देशभक्त हिन्दू संगठन एक साथ आकर, आतंकवादियों को समाप्त करने की प्रक्रिया से सबन्धित छोटे-मोटे मतभेद भुलाकर, अपने-अपने अहम भुलाकर गद्दार मिटाओ अभियान चलाकर इन देशद्रोहियों को मिटाकर भारत को इस कोढ़ से मुक्त करवायें। इस अभियान में जो भी साथ आता है उसे साथ लेकर, जो बिरोध या हमला करता है उसे मिटाकर आगे बढ़ने की जरूरत है ।

क्योंकि समाधान तो तभी सम्भव है जब हिन्दुओं का खून बहाने वालों को उनके सही मुकाम पर पहुँचाया जाए व सदियों से इतने जुल्म सहने वाले हजारों वर्षों तक अपने हिन्दू राष्ट्र की रक्षा के लिए खून बहाने वाले हिन्दुओं के जख्मों पर मरहम लगाने के लिए उन्हें उनके सपनों का राम राज्य बोले तो हिन्दूराष्ट्र भारत सदियों से काबिज होकर बैठे आक्राँताओं से मुक्त मिले । हिन्दुओं को क्यों अपने शत्रु और मित्र की समझ नहीं हो पा रही ? क्यों हिन्दू आतमघाती रास्ते पर आगे बढ़ रहा है ? क्यों उसको समझ नहीं आता कि जयचन्द की इस हिन्दुविरोधी मुस्लिमपरस्त सोच ने हिन्दुओं को अपूर्णीय क्षति पहुँचाई है ? जिहादी आतंकवाद व धर्मांतरण समर्थक ये सैकुलर सोच हिन्दुओं की कातिल है । मुस्लिम जिहादियों द्वारा 24 मार्च 2003 को हिन्दुओं का नरसंहार वैसे भी ये आत्मघाती सोच सैंकड़ों वर्षों की गुलामी का परिणाम है अब हमें अपने स्वाभिमान की रक्षा के लिए इस आत्मघाती गुलामी की सोच से बाहर निकलना है। न केवल खुद को बचाना है बल्कि इस देशविरोधी सैकुलर गिरोह के सहयोग से मुस्लिम जिहादियों के हाथों कत्ल हो रहे अपने हिन्दू भाईयों भी को बचाना है। इनकी रक्षा में ही हमारी रक्षा है क्योंकि जिस तरह आज बो मारे जा रहे हैं अगर आज हम संगठित होकर एक साथ मिलकर इन मुस्लिम जिहादियों से न टकराये तो बो दिन दूर नहीं जब उसी तरह हम भी इन राक्षसों द्वारा इन धर्मनिर्पेक्षताबादी जयचन्दों के सहयोग से मारे जायेंगे । अगर अब भी आपको लगता है कि हिन्दुओं का कत्ल नहीं हो रहा है, ये हमले मुस्लिम जिहादियों द्वारा हिन्दुओं पर नहीं किये जा रहे, हिन्दुओं का नमो-निसान मिटाने के लिए मुसलमानों द्वारा हिन्दू-मिटाओ हिन्दू भगाओ अभियान नहीं चलाया जा रहा । क्योंकि ये देशद्रोही जिहाद समर्थक सैकुलर गिरोह आपको इस सच्चाई से दूर रखने के लिए हिन्दुविरोधी मीडिया का सहारा लेकर यही तो प्रचारित करवाता है ।

 तो जरा ये कश्मीर घाटी से हिन्दुओं को मार काट कर भगाने के लिए चलाए गय सफल अभियान के बाद मुसलमानों द्वारा जम्मू के मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में चलाए जा रहे हिन्दू मिटाओ-हिन्दू भगाओ अभियान के दौरान हलाल किये जा रहे हिन्दुओं का विबरण देखो और खुद सोचो कि किस तरह मुस्लिम जिहादियों ने हिन्दुओं का कत्लेआम इन धर्मनिर्पेक्षतावादियों का सरंक्षण पाकर बेरोक टोक किया जो आज भी जारी है !

 अलकायदा की स्थापना 1985 में होने के बाद कश्मीर में अल्लाह टायगरस नामक जिहादी संगठन ने 1986 आते-आते वहां की मुस्लिमपरस्त जिहादी आतंकवाद समर्थक सैकुलर सरकार के रहमोकर्म व सहयोग से अपने आपको इतना ताकतवर बना लिया कि ये हिन्दुओं के विरूद्ध खुलेआम जहर उगलने लगा । जिसके परिणांस्वरूप हिन्दुओं पर पहला हमला 1986 मे अन्नतनाग में हुआ । दिसम्बर 1989 में जोगिन्दर नाथ जी का नाम अन्य तीन अध्यापकों के साथ नोटिस बोर्ड पर चिपकाकर उसे घाटी छोड़ने की धमकी दी गई । ये तीनों राधाकृष्ण स्कूल मे पढ़ाते थे । धमकाने का सिलसिला तब तक जारी रहा जब तक जून 1989 में जोगिन्दर जी वहां से भाग नहीं गए । हमें यहां पर यह ध्यान में रखना होगा कि हिन्दु मिटाओ हिन्दु भगाओ अभियान चलाने से पहले 1984-86 के वीच में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के मुस्लिम जिहादीयों को भारतीय कश्मीर में वसाया गया और घाटी में जनसंख्या संतुलन मुस्लिम जिहादियों के पक्ष में वनाकर हिन्दुओं पर हमले शुरू करवाय गए। ये सब पाकिस्तान के इसारे पर इस सेकुलर गिरोह की सरकारों ने किया। 2 फरवरी 1990 को सतीश टिक्कु जी जोकि एक समाजिक कार्यकर्ता व आम लोगों का नेता था, को जिहादियों ने शहीद कर दिया । 23 फरवरी को अशोक जी, जो कृषि विभाग में कर्मचारी थे, की टाँगो में गोली मारकर उन्हें घंटों तड़पाकर बाद में सिर में गोली मारकर उनका कत्ल कर दिया गया । एक सपताह बाद इन मुस्लिम जिहादियों द्वारा नवीन सपरु का कत्ल कर दिया गया । 27 फरवरी को तेज किशन को इन जिहादियों ने घर से उठा लिया और तरह-तरह की यातनांयें देने के बाद उसका कत्ल कर उसे बड़गाम में पेड़ पर लटका दिया । 19 मार्च को इखवान-अल-मुसलमीन नामक संगठन के जिहादियों ने बी के गंजु जी जो टैलीकाम इंजनियर का काम करते थे, को घर में घुस कर पड़ोसी मुसलमानों की सहायता से मारा । उसके बाद राज्य सूचना विभाग में सहायक उपदेशक पी एन हांडा का कत्ल किया गया । 70 वर्षीय स्वरानन्द और उनके 27 वर्षीय बेटे बीरेन्दर को मुस्लिम जिहादी घर से उठाकर अपने कैंप में ले गए । वहां उनकी पहले आंखे निकाली गईं ,अंगुलियां काटी गईं फिर उनकी हत्या कर दी गई । मई में बारामुला में सतीन्दर कुमार और स्वरूपनाथ को यातनांयें देने के बाद कत्ल कर दिया गया । भुसन लाल कौल का आंखे निकालने के बाद जिहादियों द्वारा कत्ल कर दिया गया । के एल गंजु जो सोपोर कृषि विश्वविद्याल्य में प्रध्यापक का काम करते थे ,को उनके घर से पत्नी व भतीजे सहित उठाकर झेलम नदी के किनारे एक मस्जिद में ले जाया गया । वहां पर गंजु जी का यातनांयें देने के बाद कत्ल कर दिया गया । भतीजे को नितम्बों में गोली मारकर झेलम में फैंक दिया गया । पत्नी का बलात्कार करने के बाद कत्ल कर दिया गया । सरलाभट्ट जी जो श्रीनगर में सेर ए कश्मीर चिकित्सा कालेज में नर्स थी जेकेएलएफ के जिहादियों ने हासटल से उठाकर कई बार बलात्कार करने बाद कत्ल कर दिया । क्योंकि उसे मुस्लिम जिहादियों और वहां काम करने वाले डाक्टरों के बीच के सम्बन्धों का पता चल चुका था । मई में सोपियां श्रीनगर में बृजलाल उनकी पत्नी रत्ना व बहन सुनीता को मुस्लिम जिहादियों ने अगवा कर लिया । बृज लाल जी को कत्ल कर दिया गया । महिलाओं का बलात्कार करने के बाद उन्हें जीप के पीछे बाँध कर प्रताड़ित करने के बाद उनका कत्ल कर दिया गया । मुस्लिम जिहादियों द्वारा प्रशासन में बैठे अपने आतंकवादी साथीयों के सहयोग से हिन्दुओं पर अत्याचारें का सिलसिला बेरोकटोक जारी था जिसमें जान-माल के साथ-साथ हिन्दुओं की मां-बहन–बेटी भी सुरक्षित नहीं थी । जून आते-आते सैंकड़ों हिन्दुओं का कत्ल किया जा चुका था ।

अल्लाह टायगर्स व जेकेएलएफ के मुस्लिम जिहादियों द्वारा 1990 में हलाल किय गए हिन्दू

दर्जनों महिलाओं की इजत को तार-तार किया जा चुका था । मस्जिदों व उर्दु प्रैस के माध्यम से मुस्लिम जिहाद का प्रचार-प्रसार जोरों पर था । ये जिहाद कश्मीर के साथ-साथ डोडा में भी पांव पसार चुका था। हिन्दुओं में प्रशासन व जिहादी आतंकवादियों के बीच गठजोड़ से दहशत फैल चुकी थी । प्रशासन का ध्यान हिन्दुओं की रक्षा के बजाए मुस्लिम जिहादियों द्वारा हिन्दुओं पर किये जा रहे अत्याचारों व हिन्दुओं के नरसंहारों को छुपाने पर ज्यादा था । परिणामस्वरूप कश्मीर घाटी से हिन्दुओं का पलायन शुरू हो चुका था । जून तक 50,000 से अधिक हिन्दू परिवार घाटी छोड़ कर जम्मू व देश के अन्य हिस्सों में शरण लेने को मजबूर हो चुके थे । 1990 में मुस्लिम जिहादियों द्वारा उजाड़े गए हिन्दुओं का शर्णार्थी शिविर पहली अगस्त 1993 को जम्मू में डोडा के भदरबाह क्षेत्र के सारथल में बस रोकर उसमें से हिन्दुओं को छांट कर 17 हिन्दुओं का मुस्लिम जिहादियों द्वारा नरसंहार किया गया । 14 अगस्त 1993 को किस्तबाड़ डोडा जिले में मुस्लिम जिहादियों ने बस रोककर उसमें से हिन्दुओं को अलग कर 15 हिन्दुओं का कत्ल कर दिया व हिन्दुओं के साथ सफर कर रहे मुसलमानों को जाने दिया। 5 जनवरी 1996 में डोडा के बारसला गांव में पड़ोसी मुस्लिम जिहादियों द्वारा 16 हिन्दुओं का कत्ल कर दिया गया 12 जनवरी 1996 डोडा के भदरबाह में मुसलमानों द्वारा 12 हिन्दुओं का कत्ल 6 मई 1996 डोडा के सुम्बर रामबन तहसील में 17 हिन्दुओं का मुस्लिम जिहादियों द्वारा कत्ल 7-8 जून को डोडा के कलमाड़ी गांव में मुसलमानों द्वारा 9 हिन्दुओं का कत्ल 1997 25 जनवरी को डोडा जिला के सम्बर क्षेत्र में मुसलमानों द्वारा 17 हिन्दुओं का कत्ल 26 जनवरी को बनधामा श्रीनगर में 25 हिन्दुओं का कत्ल मुस्लिम जिहादियों द्वारा किया गया । 21 मार्च 1997 को श्रीनगर के दक्षिण में 20 किलोमीटर दूर संग्रामपुर में मुस्लिम जिहादियों द्वारा 7 हिन्दुओं को घर से निकाल कर कत्ल कर दिया गया 7 अप्रैल को संग्रामपुर में 7 हिन्दुओं का कत्ल 15 जून को गूल से रामबन जा रही बस से मुस्लिम जिहादियों द्वारा 3 हिन्दू यात्रियों को उतार कर गोली मार दी गई । 24 जून को जम्मू के रजौरी के स्वारी में 8 हिन्दुओं का कत्ल मुसलमानों द्वारा 24 सितम्बर को स्वारी में ही 7 हिन्दुओं का कत्ल पड़ोसी मुस्लिम भाईयों द्वारा आगे बढ़ने से पहले हम आपको ये बताना जरूरी समझते हैं कि जो भी हिन्दू मारे गए या मारे जा रहे हैं उन्हें मारने वाले सबके सब विदेशी नहीं हैं। इन्हें मारने वाले स्थानीय मुसलमान ही हैं क्योंकि पाकिस्तान से आये मुसलमान 1-2-3 तीन की संख्या में छुपते-छुपाते स्वचालित हथियारों से हिन्दुओं का कत्ल तो कर सकते हैं परन्तु 15-20-40-50 की संख्या में मिलकर हिन्दुओं को हलाल करना,कत्ल से पहले अंगुलियां काटना, उनकी मां-बहन बेटी की इज्जत से खिलवाड़ करना उनके गुप्तांगो पर प्रहार करना,कत्ल से पहले हिन्दुओं के अंग-भंग करना ,आंख निकालना,नाखुन खींचना, बाल नोचना,जिन्दा जलाना,चमड़ी खींचना खासकर महिलाओं के दूध पिलाने वाले अंगो से,गाड़ी के पीछे बांधकर घसीटते हुए तड़पा-तड़पा कर मारना । ये सब ऐसे कार्य हैं जो स्थानीय मुसलमानों व सरकार के सहयोग व भागीदारी के बिना सम्भव ही नहीं हो सकते हैं । क्योंकि अगर स्थानीय मुसलमान व सरकार इस सब में शामिल न होते तो किसी विदेशी मुस्लिम जिहादी को रहने व छुपने का ठिकाना न मिलता। ये बात बिल्कुल सपष्ट है कि हिन्दुओं को कत्ल करने में न केवल जम्मू-कश्मीर के मुसलमानों का सहयोग व भागीदारी रही है बल्कि देश के केरल जैसे अन्य राज्यों के मुसलमानों ने भी इस हिन्दू मिटाओ-हिन्दू भगाओ अभियान में बढ़चढ़कर हिस्सा लिया है स्थानीय सहयोग की पुष्टि इन जिहादी हमलों में जिन्दा बचे हिन्दुओं व बाकी देश के मुसलमानों के सहयोग की पुष्टि सुरक्षा बलों द्वारा की गई है । सरकारी सहयोग की पुष्टि करने के हजारों प्रमाण मौजूद हैं । अगर जम्मू-कश्मीर की कोई लड़की किसी पाकिस्तानी मुस्लिम जिहादी से शादी कर लेती है तो उस पाकिस्तानी को जम्मू कश्मीर की नागरिकता मिल जाती है परन्तु अगर जम्मू-कश्मीर की वही लड़की भारत के किसी नागरिक से शादी करती है तो उसकी जम्मू-कश्मीर की नागरिकता समाप्त हो जाती है । हिन्दुओं के कत्ल के आरोपियों को दोषी सिद्ध करने के लिए सरकार अदालत में जरूरी साक्ष्य पेश नहीं करती है। निचली अदालतों द्वारा छोड़े गए दोषियों के विरूद्ध उच्च न्यायालय में अपील तक नहीं की जाती है। ये सब उसी सैकुलर गिरोह व सेकुलर गिरोह की सरकारों द्वारा किया जाता है जो गुजरात के उच्च न्यायालय द्वारा दिय गये हर फैसले को माननीय सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देकर महाराष्ट्र स्थानान्त्रित करवाता है। कहीं जम्मू-कश्मीर में देशभक्त लोगों की सरकार न बन जाये इसके लिये गद्दारों से भरी पड़ी कश्मीर घाटी में विधानसभा सीटों की संख्या देशभक्तों से भरे पड़े जम्मू से अधिक है जबकि कश्मीर घाटी में आबादी और क्षेत्रफल जम्मू से कम है । सरकार सुरक्षा बलों द्वारा मारे गये मुस्लिम जिहादियों के परिवारों को आर्थिक सहायता देकर उन्हें हिन्दू मिटाओ हिन्दू भगाओ अभियान को चलाये रखने के लिए प्रेरित करती है ।……… कुल मिलाकर मुस्लिम जिहादियों द्वारा चलाए जा रहे हिन्दू मिटाओ हिन्दू भगाओ अभियान की सफलता के पीछे जम्मू-कश्मीर की देशविरोधी सैकुलर सरकारों का योगदान पाकिस्तान से कहीं ज्यादा है क्योंकि पाकिस्तान की स्थापना का आधार ही मुस्लिम जिहाद है अतः मुस्लिम जिहादी आतंकवाद को आगे बढ़ाना उसकी विदेश नीति का प्रमुख हिस्सा होना उस इस्लाम की विस्तारवादी नीति का ही अंग है जिसका हमला भारत 638 ई. से झेलता आ रहा है । भारत के नागरिकों के जान-माल की रक्षा करना भारत सरकार का दायित्व है न कि पाकिस्तान का । वैसे भी पाकिस्तान बनवाने वाला यही देशद्रोही सैकुलर गिरोह है जिसने सैंकड़ों वर्षों तक मुस्लिम जिहादियों द्वारा हिन्दुओं पर ढाये गये असंख्य जुल्मों से कोई सबक न लेते हुए 1947 में मुसलमानों के लिये अलग देश बनवा देने के बावजूद मुसलमानों को पाकिस्तान भेजने के बजाए भारत में रख लिया। वो ही मुसलमान आज मुस्लिम जिहादियों को हर तरह का समर्थन व सहयोग देकर आज हिन्दुओं का नामोनिशान मिटाने पर तुले हुए हैं। 1998 25 जनवरी शाम को दो दर्जन मुसलमान श्रीनगर से 30 कि मी दूर गांव वनधामा में आय चाय पी और आधी रात के बाद गांव में 23 हिन्दुओं का कत्ल कर चले गए । सिर्फ विनोद कुमार बच पाया । जिसने अपने मां बहनों रिश्तेदारों को आंसुओं से भरी आंखों से देखा । वहां चारों तरफ खून ही खून बिखरा पड़ा था । 17 अप्रैल को उधमपुर के प्रानकोट व धाकीकोट मे मुस्लिम जिहादियों द्वारा 29 हिन्दुओं का कत्ल किया गया । जिसके बाद इन गांव के लगभग 1000 लोग घर से भाग कर अस्थाई शिवरों में रहने लगे । 18 अप्रैल को सुरनकोट पुँछ में मुसलमानों द्वारा 5 हिन्दुओं का कत्ल 6 मई को ग्राम रक्षा स्मिति के 11 सदस्यों का कत्ल 19 जून को डोडा के छपनारी में 25 हिन्दुओं का कत्ल मुस्लिम जिहादियों द्वारा शादी समारोह पर हमला कर किया गया । 27 जून को डोडा के किस्तबाड़ में 20 हिन्दुओं का कत्ल 27 जुलाई को सवाचलित हथियारों से लैस मुस्लिम जिहादियों ने थकारी व सरवान गांव में 16 हिन्दुओं का कत्ल किया । 8 अगस्त को हिमाचल प्रदेश में चम्बा और डोडा की सीमा पर कालाबन में मुसलमानों द्वारा 35 हिन्दुओं का कत्ल 1999 13 फरवरी को उधमपुर में मुसलमानों द्वारा 5 हिन्दुओं का कत्ल 19 फरवरी को मुसलमानों की इसी गैंग ने रजौरी में 19 व उधमपुर में 4 हिन्दुओं का कत्ल 24 जून को मुस्लिम जिहादियों द्वारा अन्नतनाग के सान्थु गांव में 12 बिहारी हिन्दू मजदूरों का कत्ल 1 जुलाई को मेन्धार पुँछ में 9 हिन्दुओं का मुसलमानों द्वारा कत्ल 15 जुलाई को डोडा के थाथरी गांव में मुसलमानों द्वारा 15 हिन्दुओं का कत्ल 19 जुलाई को डोडा के लायता में 15 हिन्दुओं का मुसलमानों द्वारा कत्ल 2000 28 फरवरी को अन्नतनाग में काजीकुणड के पास 5 हिन्दू चालकों का मुसलमानों द्वारा कत्ल 28 फरवरी को इसी जगह पर 5 सिख चालकों का इन्हीं मुसलमानो द्वारा कत्ल 20 मार्च को जम्मू के छटीसिंहपुरा गाँव में मुसलमानों द्वारा 35 सिखों का कत्ल किया गया । यहां 40-50 जिहादियों ने एक साथ मिलकर सिखों पर हमला कर पुरूषों को अलग कर गोली मार दी । 1अगस्त को पहलगांव में अमरनाथयात्रियों सहित सहित 31 हिन्दुओं का मुसल्मि आतंकवादियों द्वारा कत्ल कर दिया गया । 1अगस्त को ही अन्नतनाग के ही काजीकुण्ड और अछाबल में 27 हिन्दू मजदूरों का कत्ल । 2 अगस्त को कुपबाड़ा में मुसलमानों द्वारा 7 हिन्दुओं का कत्ल इसी दिन डोडा में 12 हिन्दुओं का कत्ल इसी दिन डोडा के मरबाह में 8 हिन्दुओं का कत्ल 24 नवम्बर को किस्तबाड़ में 5 हिन्दुओं का कत्ल 2001 3 फरवरी को 8 सिखों का कत्ल माहजूरनगर श्रीनगर में मुसलमानों द्वारा किया गया । 11 फरवरी को रजौरी के कोट चरबाल में 15 गुजरों का कत्ल किया गया जिसमें छोटे-छोटे बच्चों का भी कत्ल कर दिया गया ।इनका अपराध यह था कि ये जिहादियों के कहे अनुसार हिन्दुओं के शत्रु नहीं बने । मार्च 17 को अथोली डोडा में 8 हिन्दुओं का कत्ल मुसलमानों द्वारा किया गया । मई 9-10 को डोडा के पदर किस्तबाड़ में 8 हिन्दुओं को गला काट कर मुसलमानों द्वारा हलाल कर दिया गया । सब के सब शव क्षत विक्षत थे । 21 जुलाई को बाबा अमरनाथ की पवित्र गुफा पर हमले में मुस्लिम जिहादियों द्वारा 13 हिन्दुओं का कत्ल किया गया । इस हमले मे 15 हिन्दू घायल हुए । जिहादियों ने शेषनाग में बारूदी शुंरगों से विस्फोट कर सैनिकों को गोलीबारी में उलझाकर पवित्र गुफा पर हमला कर भोले नाथ के भक्तों का कत्ल किया । 21 जुलाई को किस्तबड़ डोडा में 20 हिन्दुओं को मुसलमानों द्वारा मारा गया 22 जुलाई को डोडा के चिरगी व तागूड में 15 हिन्दुओं को उनके घरों से निकाल कर मुसलमानों ने कत्ल किया 4 अगस्त को डोडा के सरोतीदार में मुसलमानों द्वारा 15 हिन्दुओं का कत्ल किया गया । 6 अगस्त को स्वचालित हथियारों से लैस तीन मुस्लिम जिहादियों ने जम्मू रेलवेस्टेशन पर हमलाकर 11 लोगों का कत्ल कर दिया व 20 इस हमले में घायल हुए । 2002 1 जनवरी को पूँछ के मगनार गाँव में 6 हिन्दुओं का कत्ल किया गया 7 जनवरी को जम्मू के रामसूर क्षेत्र में 17 व बनिहाल के सोनवे-पोगल क्षेत्र में 6 हिन्दुओं का कत्ल किया गया 17 फरवरी को रजौरी के भामवल-नेरल गाँव में मुसलमानों द्वारा 8 हिन्दुओं का कत्ल किया गया । 14 मई को जम्मू-पठानकोट राजमार्ग पर कालुचक में मुस्लिम जिहादियों द्वारा 33 सैनिकों व सैनिकों को परिवारों के लोगों का कत्ल किया गया जिसमे 6 बस यात्री भी शामिल थे । 13 जुलाई को राजीव नगर(क्वासीम नगर) जम्मू में 28 हिन्दुओं का कत्ल किया गया । मरने वालों में 3 साल का बच्चा भी था । 30 जुलाई को जिहादियों ने अमरनाथ यात्रियों को वापिस ला रही कैब को अन्नतनाग में ग्रेनेड हमले से उड़ा दिया । 6 अगस्त को पहलगांव के पास ननवाव में जिहादियों द्वारा भारी सुरक्षा व्यवस्था में चल रहे आधार शिविर मे अमरनाथ यात्रियों पर हमला कर 9 हिन्दुओं को कत्ल किया गया व 33 को घायल कर दिया । 29 अगस्त को डोडा और रजौरी में 10 हिन्दुओं का कत्ल किया गया। 24 नवम्बर को जम्मू में ऐतिहासिक रघुनाथ मन्दिर पर हमला कर 14 हिन्दुओं का कत्ल किया गया व 53 हिन्दू इस हमले मे घायल हुए 19 दिसम्बर को जिहादियों ने रजौरी के थानामण्डी क्षेत्र मे तीन लड़कियों को बुरका नहीं पहनने की वजह से गोली मार दी ।बुरका पहनाने पर ये मुस्लिम जेहादी इसलिए भी ज्यादा जोर देते हैं क्योंकि बुरके को ये आतंकवादी सुरक्षावलों को चकमा देकर एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने के लिए उपयोग करते हैं। 2003 24 मार्च को सोपियां के पास नदीमार्ग गांव में मुस्लिम जिहादियों द्वार 24 हिन्दुओं का कत्ल कर दिया गया । 7 जुलाई को नौसेरा में 5 हिन्दुओं का कत्ल किया गया । 2004 5 अप्रैल को अन्नतनाग जिले के पहलाम में 7 हिन्दुओं का कत्ल कर दिया गया । 12 जून को पहलगाम में ही 5 हिन्दूयात्रियों का कत्ल इन मुस्लिम जिहादियों द्वारा किया गया । 2006 30 अप्रैल को डोडा के पंजदोबी गाँव में मुस्लिम जिहादियों द्वारा 19 हिन्दुओं का कत्ल 1मई को उधमपुर के बसन्तपुर क्षेत्र में मुस्लिम जिहादियों द्वारा 13 हिन्दुओं का कत्ल । 23 मई को श्रीनगर में ग्रेनेड हमले में 7 हिन्दू यात्रियों का कत्ल 25 मई को श्रीनगर में ही 3 हिन्दू यात्रियों का ग्रेनेड हमला कर कत्ल किया गया फिर 31 मई को ही ग्रेनेड हमला कर 21 हिन्दू घायल किय गए 12 जून को फिर ग्रेनेड फैंक कर 1 यात्री का कत्ल किया गया व 31 घायल किये गए । 12 जून को ही मुस्लिम जिहादियों द्वारा अन्नतनाग में 8 हिन्दू मजदूरों का कत्ल किया गया व 5 घायल किये गए । 21 जून को गंदरबल श्रीनगर में मुस्लिम जिहादियों ने ग्रेनेड हमला कर 5 अमरनाथ यात्रियों को घायल किया । 11 जुलाई को श्रीनगर में ही अमरनाथ तीर्थ यात्रियों को निशाना बनाकर किये गए श्रृंखलाबद्ध ग्रेनेड हमलें में 8 लोग मारे गए व 41 घायल हुए । 12 जुलाई को 7 हिन्दू तीर्थ यात्री श्रीनहर ग्रेनेड हमलों में घायल किये गए । हिन्दुओं पर किस हद तक अपने भारत में ज्यादतियां हुई हैं उन्हें भावुक ढंग से लिख पाना हमारे जैसे गणित के विद्यार्थी के लिए सम्भव नहीं । हमारे लिये यह भी सम्भव नहीं कि हम हिन्दुओं पर हुए हर अत्याचार का पूरा ब्यौरा जुटा सकें लेकिन फिर भी जो थोड़े से आंकड़ें हम प्राप्त कर सके वो आपके सामने रखकर हमने आपको सिर्फ यह समझाने का प्रयत्न किया है कि ये जो मुस्लिम जिहादियों और धर्मनिर्पेक्षतावादियों का गिरोह है वो धरमनिर्पेक्षता के बहाने हिन्दुओं को तबाह और बरबाद करने में जुटा है। इस गिरोह से जुड़े एक-एक व्यक्ति के हाथ देशभक्त हिन्दुओं के खून से रंगे हुए हैं ये गिरोह हर उस व्यक्ति का शत्रु है जो भारतीय संस्कृति को अपनी संस्कृति समझता है जो देश को अपनी मां समझता है जो देश में जाति क्षेत्र संप्रदाय विहीन कानून व्यवस्था का समर्थन करता है जो देश में मानव मुल्यों का समर्थन करता है कुल मिलाकर ये राक्षसी गिरोह हर उस भारतीय का शत्रु है जो देशभक्त है । इस गिरोह को न सच्चे हिन्दू की चिन्ता है ,न सच्चे मुसलमान की, न सच्चे सिख ईसाई बौध या जैन की इसे चिन्ता है ,तो सिर्फ जयचन्दों, जिहादियों व धर्मांतरण के ठेकेदारों की जिनके टुकड़ों व वोटों के आधार पर इस देशद्रोही गिरोह की राजनीति आगे बढ़ती है इस गिरोह का एक ही उदेशय है जो ये पंक्तियां स्पष्ट करती हैं न हिन्दू बनेगा न मुसलमान बनेगा तु इन्सान की औलाद है सैकुलर शैतान बनेगा इन धर्मनिर्पेक्षतावादियों का बढ़पन देखो कितने प्यार से अपने पाले हुए मुस्लिम जिहादियों के हाथों मारे गए हिन्दुओं का दाहसंस्कार करने की इजाजत हिन्दुओं को दे रहे हैं वो भी तब अगर गलती से उस क्षेत्र में जिहादियों से कोई हिन्दू बच जाए तो । कौन कहता है इनमें और राक्षस औरंगजेब में कोई फर्क नहीं फर्क है ये धर्मनिर्पेक्षता के ठेकेदार हिन्दुओं को खुद नहीं मारते सिर्फ मारने वाले मुस्लिम जिहादियों के अनुकूल बाताबरण बनाते हैं, उनको अपना भाई कहर उनका हौसला बढ़ाते हैं, उनको कहीं सजा न हो जाए इसलिए पोटा जैसे सख्त कानून हटाते हैं, सजा हो भी जाए तो सिर्फ फाईल ही तो दबाते हैं सारे देश के हिन्दुओं से इन मुस्लिम जिहादियों की करतूतों को छुपाने के लिए जिहादियों का कोई धर्म नहीं होता ऐसा फरमाते हैं कोई न माने तो अपनी बात पर यकीन दिलवाने के लिए 10-11 हिन्दुओं को जबरदस्ती जेल में डाल कर हिन्दू-आतंकवादी हिन्दू-आतंकवादी चिल्लाते हैं कहीं हिन्दू छूट न जाँयें इसलिए जबरदस्ती मकोका भी लगाते हैं । धर्मनिर्पेक्षता की आड़ में हिन्दुओं के खून से लत-पथ अपने जिहाद व धर्मांतरण समर्थक चेहरे को छुपाते हैं। मुस्लिम व ईसाई देशों से पैसा और समर्थन हासिल करने के लिए राष्ट्रबाद-सर्बधर्म सम्भाव से प्रेरित हिन्दुओं व उनके संगठनों को अक्सर सांप्रदायिक व आंतकबादी कहकर उनपर हमला बोलते हैं। हिन्दू संगठनों द्वारा हिन्दुओं पर हो रहे हमलों का बिरोध करने पर ये देशद्रोही गिरोह प्रतिबंध की मांग उठाकर, दबाब बनाकर अपने हिन्दू मिटाओ हिन्दू भगाओ अभियान को आगे बढ़ाता है । जागो हिन्दू पहचानों इन देश के गद्दारों को, हिन्दुओं के कातिलों को मुस्लिम जिहादियों और धर्मांतरण के ठेकेदारों को । देखो भाई जो कुछ आपने ऊपर के पन्नों में पढ़ा और देखा वो सब आपके साथ न हो इसका अभी से प्रबन्ध कर लो संगठित हो जाओ किसी भी देशभक्त संगठन से जुड़ जाओ कोई अच्छा नहीं लगता है तो नया संगठन बनाओ वरना बहुत देर हो जाएगी । कहा भी गया है घर में आग लगने पर कुआं खोदने का क्या काम काम मुशकिल है असम्भव नहीं। सिर्फ जरूरत है तो जिहादियों और उनके ठेकेदारों को पहचाने की । वो किस संप्रदाय, दल या क्षेत्र से है ये सब भूल जाओ सिर्फ इतना ख्याल रखो कि जो भी इन मुस्लिम जिहादियों-आंतकवादियों-कातिलों को बचाता है, बचाने की कोशिश करता है, बचाने के बहाने बनाता है ,हिन्दुओं के कत्ल को जायज ठहराता है वो ही सब हिन्दुओं का कातिल है और कातिल को जिन्दा छोड़ना मानवता का अपमान है । उठो हमारे प्यारे लाचार हिन्दूओ छोड़ो ये सब झूठी शांति के दिलासे और संगठित होकर टूट पड़ों इस जिहादी राक्षस पर वरना ये जिहादी राक्षस हर हिन्दूघर को तबाह और बर्बाद कर देगा । तड़प-तड़प कर अपमानित होकर निहत्था होकर मरने से बेहतर है एक बार सिर उठाकर संगठित होकर शत्रु से दो-दो हाथ कर लेना वरना जरा सोचो उन बच्चों के बारे में जिन बच्चों ने अपने मां-बाप को अपने सामने कत्ल होते देखा उन भाईयों के बारे में जिन्होंने इन जिहादियों के हाथों अपनी बहन को अपमानित होते देखा सोचो उस पति के बारे मे जिसने अपनी पत्नी का इन जिहादियों के हाथों बलात्कार के बाद कत्ल होते देखा सोचो उन माता-पिता के बारे में जिनके सामने उनके दूध पीते बच्चे इन जिहादियों ने हलाल कर डाले और सोचो मुस्लिम जिहादियों के भाईयों इन धर्मनिर्पेक्षतावादियों के इस सेकुलर गिरोह के बारे में जिसने इन कातिल जिहादियों को बचाने के लिए सब नियम कमजोर कर डाले ।

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