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नवरात्रों के शुभ अबसर पर सब हिन्दूओं को हार्दिक शुभकामनायें…

आओ हम सब हिन्दू पूजनीय  माता जी

Internet Explorer Wallpaperको साक्षी मानकर ये प्रण करें कि आज से हम हर हिन्दू के दुख-दर्द को अपना दुख-दर्द मानकर हमसे जो भी बन सकेगा अपने हिन्दू भाई की मदद के लिए संगठित होकर करेंगे।

हम आज से जात-पात,छुआछूत,ऊंच-नीच अधारित भेदभाव को त्यागाकर समरस हिन्दू समाज के निर्माण के लिए एकजुट होकर हिन्दू संगठनों के हाथ मजबूत करेंगे।

हमारा जो भी हिन्दू भाई-बहन हिंसक मुसलमानों व आक्रमणकारी ईसाईयों द्वारा फूट डालो और राज करो के मकसद को पूरा करने के लिए फैलाई गई शुद्धी-असुद्धी की अबधारणाओं से भर्मित होकर इन विभाजनकारी अबधारणाओं पर अमल करने की कोशिस करेगा हम उस भ्रमित हिन्दू भाई को समरस हिन्दू समाज की रचना में लगाने के लिए हर सम्भव प्रयास करेंगे।

हमारा जो भी हिन्दू भाई-बहन ,भ्रमित हिन्दू भाईयों-बहनों द्वारा की गई ज्यादतियों से खुद को प्रताड़ित महसूस करेगा हम उस हिन्दू भाई-बहन को इतना मान-सम्मान-प्यार देंगे कि वो भूतकाल में की गई ज्यादतियों के बजाए बर्तमान में निभाए जा रहे भाईचारे को याद रखे।

आओ हम प्रण करें कि आज से हमारे सामने या हमारे द्वारा किसी भी हिन्दू भाई-बहन के साथ ज्यादति न हो सके।

हम अपने हिन्दू भाई-बहन को अपमानित या जानमाल का नुसान पहुंचाने के लिए विधर्मियों द्वारा किए जा रहे हमले को खुद पर हमला समझें व उन विधर्मियों को ठिकाने लगाने के लिए जो भी जरूरी हो वो कर्म करें…

जल ही जीबन है।

 
 
जल ही जीबन है।
 
पञ्च भौतिक तत्वों में जल एक महत्व पूर्ण तत्व है पृथ्वी पर व मानव शरीर में दो तिहाई जल तत्व ही है इस लिए जल का हमारे जीवन में अत्यधिक महत्व है इसी जल या पानीं को नमन करते हुए यह पंक्तियाँ प्रस्तुत हैं 
 
 
पानी पानी पानी पानी
 कितने रूप दिखता पानी 
किस का पानी सब का पानी 
ऐसा पानी वैसा पानी 

कभी तरलता कभी सघनता 
कभी बर्फ बन जाता पानी 
कभी उतर आता है नीचे 
कब सिर पर चढ़ जाये पानी 

बदल बन अमृत बरसाए 
नेह कि बूँद लुटाता  पानी 
यदि रहे मर्यादा इस कि 
जीवन दायक तब है पानी 

धरती तो अबला है कितनी 
पर अधिकार जमाता  पानी 
जितना करे कठोर हृदय को 
उतना तरल बनता पानी 

सागर कि सीमा लांघे तो 
हिम गिरी तक जा पहुंचे पानी 
मन का पानी उमड़ उठे तो 
सब कुछ खूब डूबता पानी 

कहते हैं चंदा पर पानी 
हो सकता उस पर हो पानी 
पर फिर भी वो खूब चुराता 
धरती के हृदय का पानी 

कभी बहुत आ जाता पानी 
बन कर नेह बरसता पानी 
सारी धरती किये एक रस 
सब कुछ खूब डूबता पानी 

कभी बहुत चिक्कन है पानी 
कभी स्निग्ध हो जाता पानी 
कभी तरलता लाता  पानी 
कभी सूख जाता है पानी 

गंगा का जल कब है पानी 
नमन करो तो अमृत बन कर 
पीढ़ी पार उतारे पानी
 जल गंगा जल बन कर पानी 

कभी आँख बहर आता पानी 
कभी नयन बहर आता पानी 
कभी उतर जाता है पानी 
कभी बहुत चढ़ जाता पानी 

धारदार हो जाता पानी 
धार कुंद कर जाता पानी 
एक नजर भारी पद जाती 
कितना स्वयम उतरता पानी 

मतलब निकले कौन पूछता 
चुप चाप उड़ जाता पानी 
सभी स्निगधता धरी रह गयी 
कैसा रुक्ष बनता पानी 

बहुत अधिक चुल्लू भर पानी 
उतरे यदि आँख का पानी 
एक बार यदि डूब गये तो 
हो जाती है खत्म कहानी 

आखिर पानी तो है पानी 
बिन पानी बेकार जवानी 
जीवन भर की यही कहानी 
बिन पानी सब सून कहानी 

सब को चाहिए अपना पानीं 
जीवन दूभर है बिन पानी 
बूँद बूँद भर सींचे पानी 
यह जीवन की सफल कहानी 

मेरा पानी तेरा पानी 
सभी एक रस हो ये पानी
जल में कुंभ कुंभ में जल है 
फूटे कुंभ सब पानी पानी 

डॉ. वेद व्यथित  
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