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नवरात्रों के शुभ अबसर पर सब हिन्दूओं को हार्दिक शुभकामनायें…

आओ हम सब हिन्दू पूजनीय  माता जी

Internet Explorer Wallpaperको साक्षी मानकर ये प्रण करें कि आज से हम हर हिन्दू के दुख-दर्द को अपना दुख-दर्द मानकर हमसे जो भी बन सकेगा अपने हिन्दू भाई की मदद के लिए संगठित होकर करेंगे।

हम आज से जात-पात,छुआछूत,ऊंच-नीच अधारित भेदभाव को त्यागाकर समरस हिन्दू समाज के निर्माण के लिए एकजुट होकर हिन्दू संगठनों के हाथ मजबूत करेंगे।

हमारा जो भी हिन्दू भाई-बहन हिंसक मुसलमानों व आक्रमणकारी ईसाईयों द्वारा फूट डालो और राज करो के मकसद को पूरा करने के लिए फैलाई गई शुद्धी-असुद्धी की अबधारणाओं से भर्मित होकर इन विभाजनकारी अबधारणाओं पर अमल करने की कोशिस करेगा हम उस भ्रमित हिन्दू भाई को समरस हिन्दू समाज की रचना में लगाने के लिए हर सम्भव प्रयास करेंगे।

हमारा जो भी हिन्दू भाई-बहन ,भ्रमित हिन्दू भाईयों-बहनों द्वारा की गई ज्यादतियों से खुद को प्रताड़ित महसूस करेगा हम उस हिन्दू भाई-बहन को इतना मान-सम्मान-प्यार देंगे कि वो भूतकाल में की गई ज्यादतियों के बजाए बर्तमान में निभाए जा रहे भाईचारे को याद रखे।

आओ हम प्रण करें कि आज से हमारे सामने या हमारे द्वारा किसी भी हिन्दू भाई-बहन के साथ ज्यादति न हो सके।

हम अपने हिन्दू भाई-बहन को अपमानित या जानमाल का नुसान पहुंचाने के लिए विधर्मियों द्वारा किए जा रहे हमले को खुद पर हमला समझें व उन विधर्मियों को ठिकाने लगाने के लिए जो भी जरूरी हो वो कर्म करें…

राजीब गांधी कत्ल वनाम संसद भवन हमला…

बैसे तो अबदुल्ला परिबार की गद्दारी से हर देशभक्त परिचित है। लेकिन आज आतंकवादियों की फांसी को सांप्रदायिक रंग देने की जो घिनौनी हरकत इस गद्दार ने की है उसका उसी की भाषा में उतर देना जरूरी है।
सबसे पहले तो तमिलनाडु की विधान सभा की तुलना जम्मू-कशमीर की विधानसभा से करना ही गलत है क्योंकि एक तो जम्मू-कशमीर विधानसभा भारतविरोधी आतंकवादियों से भरी पड़ी है जबकि तमिलनाडु की विधानसभा में ऐसी कोई स्थिति नहीं है।
दूसरा जम्मू-कशमीर की विधानसभा में आतंकवादियों का बर्चस्व वानए रखने के लिए अबदुल्ला खानदान ने नैहरू खानदान की सहायता से जम्मू संभाग के लोगों को उनके हक से वंचित रखने के लिए जानबूझ कर जम्मू-संभाग में विधानसभा सीटों को कम रखा है । जबकि तमिलनाडु विधान सभा में ऐसी कोई गड़बड़ नहीं है।
जम्मू-कशमीर विधानसभा में बैठे आतंकवादियों ने सरकारी तन्त्र का प्रयोग कर कशमीरघाटी में हिन्दू-मिटाओ हिन्दू भगाओ अभियान चलाकर न केवल 60000 हिन्दूओं का कत्ल किया वल्कि 500000 हिन्दूओं को वेघर भी किया। मां-बहन वेटियों की इज्जत आबरू से खिलबाढ़ किया से अलग। अब आप ही बताओ कि कातिल राक्षसों से भरी पड़ी जम्मू-कशमीर विधानसभा की तुलना तमिलनाडु की विधानसभा से कैसे की जा सकती है?
राजीब गांधी पर हमला करने वालों की तुलना लोकतन्त्र के मन्दिर पर हमला करने वाले भारतविरोधी आतंकवादी से करना किसी भी तरह से जायज नहीं ठहराया जा सकता।
राजीब गांधी का कत्ल किसने किया ये अभी पूरी तरह सपष्ट नहीं है क्योंकि  एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी ने पहले राजीब गांधी के कत्ल का आरोप DMK पर लगाकर सरकार केन्द्र सरकार गिरा दी बाद 2004 में इसी एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी ने इसी DMK के साथ मिलकर सरकार बना ली।
जिस क्वात्रोची पर चर्च के इसारे पर वालासिंघम के माध्यम से LTTE प्रमुख प्रभाकरण को राजीब गांधी के कत्ल की सुपारी देने के आरोप लगे वही क्वात्रोची आज भी एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी का परिबारिक मित्र है जिसके लिए एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो कुछ भी कर गुजरने के लिए तैयार है।
अब जिन लोगों को फांसी की सजा सुनबाई गई उनमें से एक की सजा खुद एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो माफ कर चुकी तो स्वभाविक रूप से वाकी मुरूगन,स्नाथन व पेरारीवालन भी माफी की उमीद तो कर ही सकते हैं।
दूसरी तरफ मोहम्द अफजल खुद चीख-चीख कर कह रहा है कि कशमीरघाटी को काफिरों वोले तो हिन्दूओं से मुक्त करवाने के लिए उसने लोकतन्त्र के मन्दिर पर हमला किया। इतना ही नहीं उसके समर्थक मुसलिम आतंकवादी लगातार भारत को लहूलुहान करने की धमकियां दे रहे हैं जिनमें उमर-अबदुल्ला व गुलामनबी आजाद भी सामिल हैं। अगर इस राक्षस को फांसी नहीं दी जाती है तो इन आतंकवादियों के हौसले और बुलंद होंगे परिमास्वारूप भारत पर इनके हमले बढ जायेंगे।
हां एक बात जरूर है कि ये हमला अकेले मोहम्द अफजल ने नहीं किया था इसके साथ कुछ और लोग भी थे जैसे कि आतंकवादी  प्रोफैसर जिलानी व उसके अन्य भारतविरोधी आतंकवादी साथी। आतंकवादी प्रोफैसर जिलानी जैसे गद्दारों को कुलदीप नैयर जैसे पत्रकारों ने क्यों बचाया(कहीं ISI ऐजेन्ट मुहम्द फाई के आदेश पर तो नहीं) इन प्रश्नों का उतर भी देश की जनता को जानने का पूरा हक है।
मोहम्द अफजल के हमले में सुरक्षावलों के जवान मारे गय जबकि दूसरे हमले में एक नेता व उसके कुछ प्रशंसक मारे गय। दोनों में बहुत फर्क है ये नेता भारत पर भारतविरोधी कांग्रेस वोले तो  नैहरू खानदान का शासन बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रहा था जबकि सुरक्षावलों के जवान देश की अस्मिता की रक्षा के लिए संघर्ष करते हुए मारे गय।
ऐसा नहीं कि उमर अबदुल्ला पहली बार गद्दारी कर रहा है इससे पहले भी ये आतंकवादी सैनिकों पर हमला करने वाले अपने साथी 1200 मुसलिम आतंकवादियों पर से केश वापिस लेकर उन्हें सैनिकों पर हमला करने खुली छूट दे चुका है। हमला करते वक्त सैनिकों के हाथों मारे जाने पर अपने इन आतंकवादी साथियों का हौसला बानाए रखने के लिए पांच-पांच लाख रूपए की आर्थिक सहायता भी दे चुका है।
इतना ही नहीं ये आतंकवादी केन्द्र सरकार में बैठे अपने आतंकवादी मददगारों की सहायता से सैनिकों पर तरह-तरह के प्रतिबन्ध लगवाने में भी समर्थ रहा है।
अब आप खुद फैसला करो कि जिस राज्य का मुख्यमन्त्री गद्दार उमर अबदुल्ला जैसा आतंकवादी हो क्या वहां कभी शांति हो सकती है ?

गद्दारों की जिस कांग्रेस ने नेताजी सुभाष चन्द्र बोस जी जैसे प्रखर देशभक्त क्रांतिकारी का सौदा अंग्रेजों से कर लिया उससे आप बाकी देशभक्तों के मान सम्मान की उम्मीद भला कैसे कर सकते हैं?

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हम सब जानते हैं कि कांग्रेस की स्थापना एक विदेशी अंग्रेज ने भारतविरोधियों वोले तो हिन्दूविरोधियों के हित साधने के लिए 1885 में की।

अंग्रेज द्वारा कांग्रेस की स्थापना का एकमात्र मकसद था एक ऐसा गिरोह तैयार करना जो भारतीयों को अपना सा लगे लेकिन जिसका मूल मकसद हो भारत को तबाह करना।

कांग्रेस की स्थापना से लेकर आज तक कांग्रेस पर उन्ही लोगों का कब्जा रहा जिनमें भारतविरोध वोले तो हिन्दूविरोध कूट-कूट कर भरा हो। वेशक इसमें कुछ अपबाद भी देखने को मिले ।

खिलाफत अन्दोलन के समर्थन के बहाने मुसलिम अलगावबाद का समर्थन

1923 में जब देश में स्वातन्त्रता संग्राम के दौरान सब हिन्दू-मुसलिम मिलकर अंग्रेजों की दमनकारी नीतियों से तंग आकर एकजुट होकर संघर्ष कर रहे थे तभी कांग्रेस ने अलगाववादी मुसलमानों के दबाब में आकर खिलाफत अन्दोलन का समर्थन कर एक ऐसा षडयन्त्र किया जिसाक परिणाम मुसलिम लीग की स्थापना के रूप में हुआ जो आगे चलकर सांप्रदाय के आधार पर भारत के विभाजन का एककारण वनी। यहां हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि डा वलिराम हेडगेवार जी सहित कांग्रेस के अनेक नेताओं ने गांधी-नैहरू के इस निर्णय का विरोध किया लेकिन गांधी-नैहरू ने किसी की एक न सुनी। बाद में डा हेडगेवार जी ने 1925 में RSS की स्थापना कर देशभक्त नागरिकों के निर्माण का कार्य शुरू किया जो आज तक जारी है। आज देशभक्त नागिरकों की बढ़ती फौज ही कांग्रेस की परेसानी का सबसे बढ़ा कारण बन रहा है।

प्रखर देशभक्त नेताजी सुभाष  चन्द्र बोस जी का विरोध

Netaji Subhash chander Bose ji1939 में प्रखर देशभक्त नेताजी सुभाष चन्द्र बोस जी का नेहरू-गांधी के विरोध के बाबजूद कांग्रेस अध्यक्ष चुना जाना। लेकिन ये ऐसी घटना थी जिसने हिन्दूविरोधी देशविरोधी कांग्रेसियों को झकझेर कर रख दिया । बस फिर क्या था ये सब भारतविरोधी-हिन्दूविरोधी नैहरू-गांधी के नेतृत्व ऐसे षडयन्त्र करने में जुट गए जिनके परिणाम प्रखर देशभक्त नेताजी सुभाष चन्द्र बोस जी को कांग्रेस का अध्यक्ष पद छोड़ना पड़ा।

भारत विभाजन के दौरान कांग्रेस के हिन्दूविरोधी-देशविरोधी षडयन्त्र

1947 में कांग्रेस ने अंग्रेजों के साथ मिलकर भारत का सांप्रदाय के आधार पर विभाजन सवीकार किया।ab1 इस विभाजन के अनुसार मुसलमानों के लिए पाकिस्तान (पूर्वी और पश्चिमी )का निर्माण किया गया जबकि हिन्दूओं के लिए भारत का वाकी वचा हिस्सा दिया गया। लेकिन यहां फिर कांग्रेस ने एक षडयन्त्र के तहत मुसलमानों को फिर से हिन्दूओं वाले हिस्से में रखने की जिद की।

RSS ने सांप्रदाय के आधार पर देश के विभाजन का डट कर विरोध किया । जब कांग्रेस ने विभाजन सवीकार कर पाकिस्तान में रहने वाले हिन्दूओं को मुसलिम आतंकवादियों के हाथों मरने के लिए अकेला छोड़ दिया तब RSS ने हिन्दूओं की रक्षा के लिए दिन-रात एक कर प्रयत्न किया।

कांग्रेस ने विभाजन के दौरान RSS द्वारा हिन्दूओं की रक्षा के लिए काम करने से चिढ़ कर RSS पर प्रतिबन्ध लगा दिया 1948 में कांग्रेस नें गांधी की हत्या का झूठा आरोप लगाकर देशभक्त संगठन RSS पर प्रतिबन्ध लगा दिया।

RSS ने संबैधानिक तरीके से इसका विरोध किया । बाद में मजबूर होकर कांग्रेस को मानना पड़ा कि RSS का गांधी की हत्या में कोई हाथ नहीं है। परिमामस्वारूप प्रतिबन्ध हटा लिया गया। बैसे भी कांग्रेस जानती थी कि गांधी की हत्या के लिए नैहरू ही जिम्मेदार है ।

वन्देमातरम् में कांटछांट कांग्रेस की गद्दारी का प्रमाण

15 अगस्त 1947 को सांप्रदाय के आधार पर भारत का विभाजन होने के बाद जब पाकिस्तान और बंगलादेश को हिन्दूविहीन कर दिया गया तो भारत में मुसलमानों को रखने का कोई औचित्या नहीं था ।

उसवक्त कांग्रेस के अनेक देशभक्त लोगों ने बार-बार मुसलमानों को देश में न रहने देने की बकालत की थी फिर भी गद्दार कांग्रेसियों ने मुसलमानों को भारत में रखने का फैसला क्यों किया?
आज देश पर बार-बार हो रहे मुसलिम आतंकवादी हमलों के बाद आप समझ सकते हैं कि कौन सही था कौन गलत ?

अगर मुसलमानों को भारत में इस आधार पर रखा गया कि मुसलमान देशभक्त हैं और सर्वधर्मसम्भाव में विस्वास रखते हैं तो फिर वन्देमातरम् की चार पंक्तियों को छोड़ कर वाकी पंक्तियों को क्यों काट दिया गया?

कांग्रेस द्वारा अलगावबाद को बढ़ाबा देने के लिए अल्पसंख्यकबाद व दंगो का सहारा

जब भारत को हिन्दू राष्ट्र नहीं घोषित किया गया तो फिर देश में अल्पसंख्यकबाद के नाम पर धर्म के आधार पर कानून क्यों बनाए गए?
जब सारा देश एक है तो फिर कश्मीरघाटी के मुसलिमबहुल होने की बजह से जम्मु-कश्मीर में अलग संविधान, अलग कानून, धारा 370 क्यों ?

अलगावबाद से ग्रसित कांग्रेस द्वारा समस्या की जड़ मुसलिम पर्सनललॉ का बचाब
1955 में जब हिन्दू पर्सनल ला समाप्त कर हिन्दूओं को देश के संविधान के अनुसार जीवन यापन करने के लिए कहा गया तो फिर मुसलिम पर्नसनल ला को समाप्त कर क्यों मुसलमानों को संविधान के दायरे में नहीं लाया गया?
समाजिक बुराईयों के नाम पर हिन्दूओं की अनेक मान्याताओं पर सरकार ने प्रतिबंध लगाया तो मुसलमानों में अलगाववाद को बढ़ावा देने वाली बुराईयों पर प्रतिबंध क्यों नहीं?

कांग्रेस द्वारा धर्मनिर्पेक्षता की आड़ में हिन्दूमिटाओ-हिन्दूभगाओ अभियान को बढ़ाबा

जब संविधान में धर्मनिर्पेक्ष शब्द नहीं था तो 1977 में इसे संविधान में क्यों जोड़ा गया?

मार्च 1998 वनधामा नरसंहार.5भारत में आज बहुत ही खतरनाक स्थिति बनती जा रही है अपने हिन्दूराष्ट्र भारत में विदेशी संस्कृति से प्रेरित मीडिया, खुद को सैकुलर कहलवाने वाले राजनीतिक दलों, बिके हुए देशद्रोही मानवाधिकार संगठनों, खुद को सामाजिक कार्यकर्त्ता कहलवाने वाले गद्दारों, भारत विरोधी आतंकवादियों व परजीवी हिन्दुविरोधी लेखकों का एक ऐसा सेकुलर गिरोह बन चुका है जो भारत को सांस्कृतिक व आर्थिक रूप से तबाह करने पर आमादा है। इस गिरोह को हर उस बात से नफरत है जिसमें भारतीय संस्कृति व राष्ट्रवाद का जरा सा भी अंश शेष है । यह गिरोह हर उस बात का समर्थन करता है जो देशद्रोही कहते या करते हैं । देशद्रोही मुसलिम आतंकवादियों व वामपंथी आतंकवादियों को बेचारा गरीब अनपढ़ व सत्ताया हुआ बताकर हीरो बनाता जा रहा है । सेवा के नाम पर छल कपट और अवैध धन का उपयोग कर भोले-भाले बनवासी हिन्दुओं को गुमराह कर उनमें असभ्य पशुतुल्य विदेशी सोच का संचार कर हिन्दुविरोधी-राष्ट्रविरोधी मानसिकता का निर्माण करने वाले धर्मान्तरण के ठेकेदारों को हर तरह का सहयोग देकर देश की आत्मा हिन्दू संस्कृति को तार-तार करने में जुटा है। यह गिरोह एक ऐसा तानाबाना बुन चुका है जिसे हर झूठ को सच व हर सच को झूठ प्रचारित करने में महारत हासिल है।

हम दाबे के साथ कह सकते हैं कि इस हिन्दुविरोधी देशद्रोहीगिरोह की क्रियाप्रणाली हमेशा मुसलिम आतंकवाद व धर्मांतरण समर्थक रही है इसमें भी खतरनाक कड़बी सच्चाई यह है कि इस हिन्दुविरोधी देशद्रोहीगिरोह ने कभी भारतीय संस्कृति के प्रतीकों का सम्मान करने वाले देशभक्त मुसलमानों व ईसाईयों जो खुद को हिन्दूसमाज का अभिन्न अंग व भारत को अपनी मां मानते हैं को न कभी प्रोत्साहन दिया न ही कभी उनका भला चाहा ।

इस हिन्दुविरोधी देशद्रोही गिरोह को अगर किसी की चिन्ता है तो उन मुसलिम आतंकवादियों व धर्मांतरण के ठेकेदारों की जो अपनी आवादी बढ़ाकर ,धर्मांतरण करवाकर , शान्तिप्रिय हिन्दुओं का खून बहाकर इस हिन्दूराष्ट्र भारत के फिर से टुकड़े कर इस्लामिक व ईसाई राज्य वनाने का षड़यन्त्र पूरा करने के लिए इस देशद्रोही सरकार का समर्थन पाकर अति उत्साहित होकर आगे बढ़ रहे हैं ।मार्च 1998 वनधामा नरसंहार.4

यह गिरोह देश की रक्षा के लिए जान खतरे में डालकर जिहादी आतंकवादियों का सामना करने वाले देशभक्त सैनिकों,साधु-सन्तो व संगठनों से अपराधियों जैसा व्यवहार कर रहा है और न जानें उनके लिए क्या-क्या अपशब्द प्रयोग रहा है।

RSS पर वार-वार हमला कांग्रेस सरकार की इसी देशविरोधी सोच का ही परिणाम है।

अलगाववादी मानसिकता से ग्रसित कांग्रेस ने सामाजिक एकता को तार-तार कर दियाreligions in india

अगर आप ध्यान दें तो आज तक कांग्रेस सरकारों ने जितने भी नियम बनाए हैं उनका आधार कहीं न कहीं जाति-क्षेत्र-सांप्रदाय-भाषा-प्रांत हैं।नियम अलगाववादी अधार पर होने के कारण ही आज लोग जाति-क्षेत्र-सांप्रदाय-भाषा,-प्रांत के आधार पर संगठित होने को मजबूर हैं इसी बजह से आज सब के सब राजनीतिक दलों का आधार भी कहीं न कहीं जाति-क्षेत्र-सांप्रदाय-भाषा-प्रांत ही है परिणामस्वारूप भारत लगातार अन्दर से कमजोर होता जा रहा है।

जरा सोचो जब संविधान में समानता का अधिकार है तो फिर नियम जाति, क्षेत्र, सांप्रदाय, भाषा के आधार पर क्यों?
अलगावावदी मुसलिम लीग व धर्मांतरण के ठेकेदार आज भी हिन्दूविरोधी-देशविरोधी कांग्रेस के सांझीदार

आज भी कांग्रेस केरल में अलगाववादी मुसलिम लीग व उतर-पूर्व में अलगाववादी इसाई गिरोहों के साथ मिलकर सरकार बनाकर अलगावबाद को बढ़ाबा देती है।

केरल सरकार की इसी अलगाववादी मानसिकता से तंग आकर लबजिहाद से जुड़े मामलों में सरकार द्वारा मुसलिम आतंकवादियों का पक्ष लिए जाने के कारण माननीय उच्च न्यायालय के न्यायधीशों को कहना पड़ा कि लगता है कि सरकार नहीं चाहती कि लबजिहाद जैसे षडयन्त्रों से पिड़ीत लड़कियों को कभी न्याय मिल सके।

कांग्रेस की अलगावबादी मानसिकता का सबसे बड़ा प्रमाण शाहवानो केश

1984 में जब साहवानो केश में माननीय सर्वोच न्यायलया ने मुसलिम महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए कानून पारित किया तो उसे ततकालीन कांग्रेस सरकार ने शरीयत का हबाला देकर रद्द कर दिया?

जिसके परिणामस्वारूप इसलाम के नाम पर प्रताड़ित की जा रही मां-बहनों को न्याय मिलने की उम्मीदों पर पानी फिर गया व मुसलिम अलगाववाद को नई ताकत मिली।

प्रखर देशभक्त सरदार बलभभाई पटेल जी का विरोध

sardar balabh Bhai patel ji1947 में भारत विभाजन के बाद भी जब कांग्रेस की सब इकाईयों ने प्रखर देशभक्त सरदार बलभभाई पटेल जी को प्रधानमन्त्री बनाने का एकजुट फैसला किया तब भी सब हिन्दूविरोधी-देशविरोधी कांग्रेसियों ने अंग्रेजों के इसारे पर एक कट्टर देशविरोधी-हिन्दूविरोधी नेहरू को विभाजित भारत का प्रधानमन्त्री बनाने में सफलता हासिल की जिसके परिणामस्वारूप देश के विभाजन की जड़ इसलाम को विभाजित भारत में न केवल रखा गया वल्कि विशेषाधिकार देकर भारत को फिर से लहुलुहान करने का वीज वो दिया गया ।

प्रखर देशभक्त क्रांतिकारियों का विरोध

आप सब जानते हैं कि जब-जब भी

शहीद भक्त सिंहshaeed ji,

राजगुरू जी,Rajguru jiसुखदेव जीRajguru ji 1,

चन्द्रशेखर आजाद जी Chander Shekhar Azad jiजैसे प्रखर देशभक्त क्रांतिकारियों का अत्याचारी आक्रमणकारी ईसायों(अंग्रेजों) से सामना हुआ तब-तब भारतविरोधी-हिन्दूविरोधी कांग्रेसियों ने देशभक्त क्रांतिकारियों का साथ देने के बजाय देश के दुशमन सम्राज्यावादी ईसाईयों का साथ दिया।

कितने ही ऐसे देशभक्त क्रांतिकारी हैं जो तन-मन-धन से देश की खातिर लड़ते हुए अपनी लड़ाई को अंजाम तक इसलिए नहीं पहुंचा सके क्योंकि लड़ाई के अंजाम तक पहुंचाने से पहले ही वो गद्दार कांग्रेसियों की मुखवरी के परिणामस्वारूप सम्राज्यावादी ईसाई आतंकवादियों के हमलों के सिकार हो गय।

कौन नहीं जानत कि इन भारतविरोधी-हिन्दूविरोधी कांग्रेसियों ने इन देशभक्त क्रांतिकारियों को देश के दुशमन ईसाईयों के इसारे पर आतंकवादी तक करार दे दिया।

अपनी हिन्दूविरोधी-देशविरोध की गद्दारी की परम्परा पर आगे बढ़ते हुए ही आज इटालियन अंग्रेज एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी की गुलाम कांग्रेस Petro dollar + Us Dollar मतलब कातिल मुसलिम आतंकवादियों के नेता साऊदी अरब व धर्मांतरण के ठेकेदार ईसाई आतंकवादियों के नेता अमेरिका के ईसारे पर ही आज कांग्रेस भारत के हित में उठनेवाली हर आबाज को कुचल देने पर आमादा है।

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ऐसा नहीं कि कांग्रेस ने 2004 से पहले कोई देशविरोधी-हिन्दूविरोधी कार्य नहीं किया लेकिन कांग्रसे पर इटालियन अंग्रेज एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी के कब्जे के बाद कांग्रेस लगातार हिन्दूविरोधी-देशविरोधी कार्यों को अन्जाम दे रही है।क्योंकि आज कांग्रेस सरकार पूरी तरह से एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी की गुलाम है इसलिए सरकार के हर देशविरोधी-हिन्दूविरोधी कार्य के लिए यही अंग्रेज जिम्मेदार है।

कांग्रेस का हाथ सुरक्षाबलों के बजाए गद्दारों के साथ

2004 में सता में आते ही कांग्रेस की  सरकार ने अर्धसैनिक वलों के जवानों के देश की रक्षा की खातिर शहीद हो जाने पर उनके परिवारों को मिलने वाली आर्थिक सहायता को यह कहकर कम कर दिया कि सरकार के पास पैसे की कमी है लेकिन इसी सरकार ने कशमीरघाटी में भारतीय सेना पर हमला कर सैनिकों को घायल करने व मारने stone pelters in kashmir beating armyवाले भारतविरोधी आतंकवादयों को 5-5 लाख रूपए दकेर सिद्ध कर दिया कि सरकार की नियत देशभक्त सैनिकों का हौसला तोड़कर गद्दारों का हौसला बढ़ाने की है।

कांग्रेस का हाथ बाबर व औरंगजेब जैसे राक्षसों के साथ

मर्यदापुर्षोत्तम भगवान श्रीराम जी द्वारा बनाय गए श्रीलंका और भारत को जोड़ने वाले रामसेतु को ram setuन तोड़ने से जुड़े एक मामले में कांग्रेस की हिन्दूविरोधी-देशविरोधी सरकार ने हल्फनामा देकर मर्यादा पुरषोत्तम भगवान श्री राम जी के अस्तित्व पर प्रश्न खड़े कर एकवार फिर सिद्ध कर दिया कि कांग्रेस के अन्दर हिन्दू-संस्कृति वोले तो भारतीय संस्कृति के प्रति जहर किस हद तक भर चुका है।

यह वही कांग्रेस है जिसके नेता स्वर्गीय राजीब गांधी जी ने 1986 में खुद राममन्दिर में पूजा अर्चना कर अयोध्या में भव्य मन्दिर बनाने के कार्य को आगे बढ़ाया था लेकि आज यही कांग्रेस औरगंजेब व बाबर जैसे राक्षसों को अपना आदर्श मानकर अयोध्या में मर्यादा पुरषोत्तम भगवान श्री राम जी के मन्दिर को मसजिद करार दे रही है।

इसरतजहां मुठभेड़ में कांग्रेस का हाथ एकवार फिर भारतविरोधी आतंकवादियों के साथ

गुजरात में सुरक्षावलों ने लसकरे तैयवा की आतंकवादी इसरत जहां ishrat jahanको मुठभेड़ में मार गिराया। जिसके जनाजे में महाराष्ट्र के हजारों कांग्रेसियों के साथ समाजवादी पार्टी के गद्दार भी सामिल हुए।महाराष्ट्र की कांग्रेस सरकार ने इसरत जहां के परिवार को लाखों रूपए देने के साथ-साथ उसको निर्दोस भी बताया। हद तो तब हो गई जब महारष्ट्र एटीएस की जांच में व केन्द्री खुफिया ऐजैसियों की जांच में ये तथ्य सिद्ध हो गया कि इसरतजहां एक खूंखार आतंकवादी थी फिर भी कांग्रेस ने सुरक्षावलों का साथ देने के बजाए इस आतंकवादी का ही साथ दिया । अंत में एफबीआई(FBI) ने भी बताया कि हैडली जानता है कि इसरतजहां लसकरे तैयवा की आतंकवादी थी।

मतलब यहां भी कांग्रेस का हाथ गद्दार भारतविरोधी आतंकवादियों के साथ।

सोरावुद्दीन मुठभेड़ में कांग्रेस का हाथ एकवार फिर भारतविरोधी  आतंकवादियों के साथ

गुजरात में भारतविरोधी आतंकवादी सोराबुद्दीन shorabudeenसुरक्षावलों के साथ मुठभेड़ में मारा गया।इस आतंकवादी के घर से एक दर्जन एक47 व दर्जनों हथगोले प्राप्त हुए। इस आतंकवादी को मारने के विरोध में कांग्रेस ने सीबीआई का दूरूपयोग करते हुए दर्जनों पुलिस अधिकारियों व जवानों को जेल में डाल दिया जो आज तक जेल में हैं। हद तो तब हो गई जब राज्य के गृहमन्त्री को भी जेल में डाल दिया गया।

मतलब यहां भी कांग्रेस का हाथ गद्दार भारतविरोधी आतंकवादियों के साथ।

कशमीरघाटी में कांग्रेस का हाथ एकवार फिर भारतविरोधी  आतंकवादियों के साथ

कुपवाड़ा में आतंकवादियों से मुठभेड़ के बाद सैनिकों ने भारतविरोधी आतंकवादियों को मार गिराया। कांग्रेस ने आतंकवादियों की मौत से बौखलाकर मेजर को बर्खसात कर पूरी की पूरी बटालियन पर ही केस दर्ज कर आतंकवादियों को कांग्रेस का हाथ गद्दारों के साथ होने का सपष्ट प्रमाण दिया। एसा एकवार नहीं की वार हुआ जब कांगेस  सरकार भारतीय सेना के बजाए आतंकवादियों के साथ कड़ी नजर आई।

मतलब यहां भी कांग्रेस का हाथ गद्दार भारतविरोधी आतंकवादियों के साथ।

कांग्रेस का हाथ भारतविरोधी  आतंकवादी अफजल के साथ

जब माननीय न्यायलय ने लोकतन्त्र के मन्दिर संसद भवन पर हमला करने वाले आतंकवादी मुहम्मद अफजल afzal guruको फांसी की सजा सुनाकर 19 नम्मवर 2006 फांसी की तारीख तय(वेशक हमले का mastermind प्रोफैसर गिलानी कुलदीप नैयर जैसे नकबापोसों की सहायता से बच निकला)  की तो लोकतन्त्र के इस इस मंदिर की रक्षा की खातिर शहीद हुए सैनिकों के परिवारजनों व आहत हुए देशभक्तों के मन में न्याय की उमीद पैदा कर दी तो फिर से भारतविरोधी आतंकवादियों की मददगार सरकार ने इस आतंकवादी की फांसी आज तक मतलब अगस्त 2011 तक रोककर कर एकवार फिर कांग्रेस के भारतविरोधी चरित्र का प्रमाण दे दिया ।

कांग्रेस का प्रखर देशभक्त RSS पर हमला

RSS पर वार-वार हमला कांग्रेस सरकार की इसी देशविरोधी सोच का ही परिणाम है। RSS ने कांग्रेस के हर उस कदम को विरोध किया है जो कांग्रेस ने देशहित के विरूद्ध उठाया। चाहे 1947 में सांप्रदाय के आधार पर भारत के विभाजन की षडयन्त्र हो या फिर 1977 में तानाशाही की बात हो या फिर 1992 में राम मन्दिर को मजजिद बताने की बात हो या पिर 2004 में विदेसी एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी के प्रधानमन्त्री बनने की बात हो या पिर आज कशमीरघाटी को पाकिसतान के हवाले करने का षडयन्त्र हो।

सबसे पहले RSS ने कांग्रेस की देश से गद्दारी के विरोध में आबाज उठाई तो बदले में कांग्रेस ने भारतविरोधी मुसलिम आतंकवादियों द्वारा किए गय हमलों का दोश RSS के सिर मढ़कर RSS को आतंकवादी-सांप्रदायिक करार दे दिया।

कांग्रेस का प्रखर देशभक्त स्वामी रामदेव जी पर हमला

Ram Dev jiजब स्वादेशी और देशभक्ति के प्रेरणास्त्रोत स्वामी रामदेब जी ने सारे संसार में भारतीय संसकृति और आयुर्वैदिक चिकित्सा प्रणाली का झंडा पहराते हुए कांग्रेस की आका एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी व अन्य भ्रष्ट लोगों द्वारा विदेशों में जमा करवाय गए कालेधन व नेताओं द्वारा फैलाए गए भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया तो चोरों और गद्दारों की हमसफर व मददगार कांग्रेस सरकार ने स्वामी रामदेव जी को ही भ्रष्टाचारी , आतंकवादी व RSS का मुखौटा करार देकर उन्हें व उनके बालकृष्ण जी जैसे सहयोगियों को बदनाम करने के लिए सब सरकारी ऐजेंसियों को देशभक्त स्वामी राम देव जी व उनके सहयोगियों के पीछे लगा दिया।

कांग्रेस का प्रखर भ्रष्टाचार विरोधी अन्ना हजारे जी पर हमला

anna hajare jiजब अन्ना हजारे जी ने हजारे जी के साथ चल रहे अग्निवेश जैसे कांग्रेस के पुराने मित्रों के ईसारे पर स्वामी राम देव जी से नाता तोड़कर भ्रष्टाचार के विरूद्ध आबाज उठानी शुरू की तो पहले तो कांग्रेस ने हजारे जी के साथ बातचीत करने की कोशिश की । लेकिन जब कांग्रेस को ऐहसास हो गया कि कांग्रेस का समर्पण कांग्रेस के प्रति न होकर देश के प्रति है तो फिर भारतविरोधी कांग्रेस सरकार ने अन्ना हजारे जी पर भी हमला वोल कर उन्हें भी बलैकमेलर,भर्ष्टाचारी व RSS का मुखौटा करार देकर उनके पीछे भी सब सराकरी ऐजेंसियों को लगा दिया।

कांग्रेस का हाथ मानवताविरोधी  आतंकवादी ओसामा-विन लादेन के साथ

कांग्रेस की असलियत को समझने के लिए इतना ही काफी है कि जो कांग्रेस स्वामी रामदेव जी व अन्ना हजारे जी जैसे प्रखर देशभक्त नागरिकों व RSS जैसे देशभक्त संगठनों को आतंकवादी,सांप्रदायिक,ठग,बलैकमेलर और न जाने क्या-क्या शब्द प्रयोग कर अपमानित करने व सरकारी ऐजेंसियों का प्रयोग कर समाप्त करने की कोशिश कर रही है वही कांग्रेश संसार के सबसे बढ़े राक्षश ओसामाविन लादेन Ladenको ओसामा जी कहकर व इस आतंकवादी को मारने पर सवाल खड़े कर अपनी असलियत सबके सामने रख रही है।

औरंगजेब व बाबर जैसे अत्याचारी राक्षसों को अपना आदर्श मानकर मर्यदापुर्षोत्तम भगवान श्रीराम जी का विरोध करने वाली कांग्रेस व धर्मांतरण के ठेकेदार इसाईयों के बताए मार्ग पर चलकर भारतीय संसकृति का विरोध करने वाली कांग्रेस से भारत का हित चाहने की उम्मीद करना सरासर वेवकूफी है।

हिन्दूविरोधी-देशविरोधी कांग्रेस का भारतीय संविधान पर हमला

भारतीय संविधान सांप्रदाय के नाम पर आरक्षण की इजाजत नहीं देता। लेकिन कांग्रेस लगातार सांप्रदायिक आधार पर आरक्षण की न केवल बात कर रही है पर कई राज्यों में तो कांग्रेस ने संविधान का खून करते हुए सांप्रदायिक आधार पर आरक्षण लागू कर अपने भारतविरोधी स्वारूप को और सपष्ट कर दिया है।

2014 के चुनाबों से पहले हिन्दूओं और मुसलमानों को लड़ाने के लिए सांप्रदाय के आधार पर आरक्षण को आगे बढ़ाने की वका3लत करने वाली रंगनाथ मिश्रा रिपोर्ट इन्तजार कर रही है साथ ही Prevention of Communal and Targeted Violence Bill- 2011

एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी की गुलाम कांग्रेस इस हिन्दूविरोधी अंग्रेज के इसारे पर Prevention of Communal and Targeted Violence Bill- 2011 के नाम से एक ऐसा कानून बनाने जा रही है जो न केवल मुसमानों और ईसायों को हिन्दूओं के कतलयाम की खुली छूट देता है पर साथ ही भारतीय संविधान की समानता की मूल भावना का भी खून करता है ।

ये भारतविरोधी इटालियन अंग्रेज का भारतीय संविधान पर ताजा हमला है।

भारतविरोधी कांग्रेस का माननीय सर्वोच्च न्यायालय पर हमला

जब माननीय सर्वोच्च न्यायालय supreme courtने कांग्रेस को गद्दारी व चोरबजारी से रोकने की कोशिश की तो कांग्रेस ने माननीय न्यायालय पर ही हमला वोलते हुए माननीय न्यायालय को ही अपनी सीमा मे रहने मतलब कांग्रेस को चोर-बजारी व देश से गद्दारी करने से रोकने की कोशिश न करने की धमकी दे डाली।

ऐसा पहली बार नहीं है इससे पहले भी जब-जब माननीय न्यायलय ने कांग्रेस को संविधान का खून कर देश से गद्दारी करने से रोकने की कोशिश की है तब-तब भारतविरोधी कांग्रेस ने माननीय न्यायालय पर हमला वोलकर मानानीय न्यायधीसों को धमकाने की कोशिस की है।

भारतविरोधी कांग्रेस का संवैधानिक संस्था CAG हमला

जब CAG CAG4ने कांग्रेस द्वारा इटालियन अंग्रेज एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी के नेतृत्व में देश को लूटने का कच्चा-चिट्ठा खोला तो कांग्रेस ने संबैधानिक संस्था CAG पर ही हमला वोल दिया।

एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी द्वारा विदेश यात्राओं पर देश का धन लुटाने पर आपति करने वाले अधिकारियों का कांग्रेस सरकार ने तबादला कर अपने भारत विरोधी चरित्र का एकवार फिर परिचय दे दिया।

भारतविरोधी कांग्रेस का Electronic Media पर हमला

जब अक्सर देशविरोधियों-हिन्दूविरोधियों की आबाज उठाने वाले Electronic Media ने चोरों और गद्दारों की कांग्रेस सरकार की चोरबजारी से तंग आकर चोरों और गद्दारों के विरूद्ध आबाज उठाकर जनता को जागरूक करना शुरू किया तो सरकार ने पहले तो हजारों करोड़ रूपए के विज्ञापन जारी कर खरीदने की कोशिश की जिसमें 100% सफलता न मिलने के बाद कांग्रेस ने मिडीया को भी धमकाना शुरू कर दिया।

अगर अब भी आप सोचते हैं कि चोरों और गद्दारों की कांग्रेस सरकार देशहित में आबाज उठाने वालों को न बदनाम करेगी , न उनपर हमला करेगी वल्कि देशभक्तों व क्रांतिकारियों  के साथ सम्मानपूर्वक पेश आएगी तब तो आप …

देशभक्त और गद्दार का अन्तर आप खुद महसूस कर लो।

कौन कहता है कि भारत में देशभक्त सिर्फ संघ या हिन्दू संगठनों में ही मलते हैं। इसमें कोई शक नहीं कि आज अधिकतर देशभक्त हिन्दूसंगठनों के साथ संगठित होते जा रहे हैं इसी बजह से इन संगठनों में देशभक्तों की अधिकता देखी जा रही है।लेकिन ये भी उतना ही सही है कि हिन्दू संगठनों के अथक प्रयत्नों के बाबजूद देशभक्त पूरे देश में हर संगठन में अभी भी मौजूद हैं वेशक कीं इनकी शंख्या कहीं कम है तो कहीं ज्यादा है।
इन्ही विखरे पड़े देशभक्तों ने गद्दारों के नाक में संगठित देशभक्तों से ज्यादा दम किया हुआ है। आप कहेंगे कि कैसे पता लगायेंगो कौन देशभक्त है और कौन गद्दार । आप अखवार कि ये दो कटिंग पढ़ लो ।आप अपने आप कहने को मजबूर होंगे कि इस गद्दार ने तो हद ही कर दी।
ये रही पहली कटिंग इसमें एक देशभक्त अमेरिका के अधिकारी को भारत पर पाकिस्तानी हमले के वारे में बताकर आतंकवादी पाकिस्तान की पोल खोलने की कोशिश कर रहा है।

ये रही दूसरी कटिंग इसमें एक गद्दार अमेरिकी अधिकारी को समझा रहा है कि भारत को खतरा पाकिस्तानी जिहादी आतंकवादियों से नहीं वल्कि हिन्दूओं से है।मतलब विदेशी अंग्रेज एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी की कुलाद राहुल गंदगी जिस पत्र में खा रहा है उसी में छेद कर रहा है।

इसीलिए तो मोदी जी तो अब जाकर ये समझ में आया कि अमेरिका को भारत के खिलाफ व पाकिस्ताने के समर्थन भड़ाकने वाला जयचन्द कौन है।

हिन्दूविरोधी-देशविरोधी धर्मनिर्पेक्ष गिरोह की गद्दारी के कुछ और प्रमाण…

हिन्दूविरोधी-देशविरोधी धर्मनिर्पेक्ष गिरोह की गद्दारी के कुछ और प्रमाण…

 

UPA के नेतृत्व में हिन्दूविरोधी-देशविरोधी धर्मनिर्पेक्ष गिरोह लगातार भारतविरोधा आतंकवादियों का साथ दे रहा है । आप सब जानते हैं कि खुद सरकार कह चुकी है कि सैनिकों पर पत्थरों से हमाला करने वाले मुसलमान पाकिसतान समर्थक आतंकवादी हैं जो जिहादी आतंकवादी गिरोह लशकरे तैयवा के इसारे पर सैनिकों पर हमला वोल रहे हैं।

http://samrastamunch.blogspot.com/2010/07/blog-post_09.html


अब इस हिन्दूविरोधी-देशविरोधी धर्मनिर्पेक्ष गिरोह की UPA सरकार ने घोषणा की है कि मसजिदों व मदरसों में योजना बनाकर सैनिकों पर हमला करने वाले प्रत्येक पत्थरवाज के परिवार को 5 लाख रूपए दिए जायेंगे ताकि इन पत्थरबाजों के परिवारों का भारतीय सेना पर हमला करने का हौसला बना रहे ।साथ ही जिन मुसलमानों ने अभी तक भारतीय सैनिकों पर पत्थरवाजी नहीं की थी उन्हें भी प्रेरणा लेकर ये 5 पांच लाख प्राप्त करने के लिए अपने बच्चों को पाठशाला भेजने के बजाए सैनिकों पर हमले करने में लगा देना चाहिए।( ध्यान रहे कि ये वही सरकार है जिने 2004 में सता में आते ही अर्धसैनिक बलों के जवानों के देश की रक्षा की खातिर शहीद हो जाने पर मिलने वाली सहायता यह कहकर कम कर दी कि सरकार के पास पैसा नहीं मतलब देशभक्तों के लिए पैसा कम है पर गद्दारों के लिए कोई कमी नहीं)


इन पत्थरबाज गद्दार मुसलमानों पर मेहरवान होते हुए हिन्दूविरोधी-देशविरोधी धर्मनिर्पेक्ष गिरोह की UPA सरकार ने कहा कि जो पत्थरबाज देशभक्त सैनिकों का कत्ल करने की कोशिश में पकड़कर जेलों में डाले जा चुके हैं उन्हें भी रिहा कर दिया जाएगा ताकि पत्तवारबाजों की संख्या कम न हो सके।


हिन्दूविरोधी-देशविरोधी धर्मनिर्पेक्ष गिरोह की UPA सरकार ने इससे भी आगे जाते हुए मुसलमानों द्वारा सैनिकों पर किए गए हमलों व श्रीनगर में फहराए गए पाकिस्तानी झंडे जैसी हरकतों से खुश होकर इन गद्दारों को 10000000( 100 करोंड़) का इनाम देने की घोषणा की।


ये मुसलिम आतंकवादी कशमीर में अपनी स्थिति मजबूत कर सकें ताकि इन्हें भारत से अलग होकर पाकिस्तान के साथ मिलने में आसानी रहे इसके लिए हिन्दूविरोधी-देशविरोधी धर्मनिर्पेक्ष गिरोह की UPA सरकार ने भारतीय सैनिकों को आतंकवादियों द्वारा बताए गए स्थानों से हटाने की भी घोषणा की।


सरकार ने बायदा किया कि सैनिकों द्वारा आत्मरक्षा व देश की रक्षा के लिए प्रयोग किए ज रहे AFSPA को भी शीघ्र हटा दिया जाएगा।


ध्यान रहे कि 11 जून से शुरू हुए इन गद्दार मुसलमानों के हमलों में सैंकड़ों सैनिक घायल हो चुके हैं व दर्जनों सैनिक शहीद हो चुके हैं।


हमें यह भी ध्यान रकना चाहिए कि 11 जून को मुसलमानों के हमले शुरू होने का कारण यह था कि हिन्दूविरोधी-देशविरोधी धर्मनिर्पेक्ष गिरोह की UPA सरकार ने जिहादी आतंकवाद समर्थक उमर अबदुल्ला के कहने पर कशमीर से हजारों सैनिकों को उन स्थानों से हटा लिया था जहां पर आतंकवादियों को खदेड़कर भारत का नियन्त्रण स्थापित करने के लिए सैंकड़ों सैनिकों ने अपनी कुर्वानी दी थी। पर इस हिन्दूविरोधी-देशविरोधी धर्मनिर्पेक्ष गिरोह की UPA सरकार ने आतंकवादियों को फायदा पहंचाने के लिए शांति स्थापित करने के नाम पर वहां से हजारों सैनिकों को हटाकर उन क्षेत्रों को फिर से आतंकवादी मुसलमानों के हबाले कर दिया।


समझो मेरे प्यारे देशभक्त हिन्दूओं वरना वो दिन दूर नहीं जब इस हिन्दूविरोधी-देशविरोधी धर्मनिर्पेक्ष गिरोह की UPA सरकार की मदद से सारा भारत एकवार फिर इन मुसलिम आतंकवादीयों के कब्जे में चला जाएगा।


हमें आज यह प्रण करना चाहिए कि अगर कसमीर पर भारत का नियन्त्रण कंम करने की कोशिसें इसी तरह आगे बढ़ेंगी तो हर हाल में हम एक-एक मुसलिम आतंकवादी को चुन-चुन कर तब तक मारेंगे जब तक सारा भारत ,भारतविरोधी आतंकवादियों से मुक्त न हीं हो जाता।


http://samrastamunch.blogspot.com/2010/07/blog-post_12.html

आतंकवादी इसलाम से एक वार निपट लो ताकि दोबारा कोई गांधी मजबूर न हो—संदर्भ ईसाईयों द्वारा कुरान जलाने की घोषणा

आतंकवादी इसलाम से एक वार निपट लो ताकि दोबारा कोई गांधी मजबूर न हो—संदर्भ ईसाईयों द्वारा कुरान जलाने की घोषणा…

 

Islam is of the devil, by the devil for the devil  जी हां यही निश्कर्ष है निकाला मध्यपूर्व के विशेषज्ञ ने इसलाम के वारे में । ये विशेशज्ञ आजकल अमेरिका के खूफिया विभाग में अधिकारी हैं । इन्होंने 18 जुलाई को अमेरिका में Dearborn, Mich की एक मस्जिद में (जैसा कि हम पहले ही लिख चुके हैं कि मदरसे मुसलिम आतंकवादियों के training Centre और मस्जिदें मुसलिम आतंकवादियों के Operating Centre हैं) अलकायदा से जुड़े मुसलिम आतंकवादियों को पकड़ने के लिए रेड डालने के दौरान Islamic prayer calendar पर लिखा। जिसका इशाई सांप्रदाय के प्रमुख ने भी कुरान जलाने की घोषणा कर समरथन किया।


अगर हम से कोई पूछे कि हमारी राय क्या है तो हम कहेंगे कि विशेषज्ञ का निष्कर्ष और ईसाईयों के प्रमुख पादरी की घोषणा दोनों ही सही हैं।


अब आप कहेंगे कि हम किसी सांप्रदाय के वारे ऐसी राय कैसे रख सकते हैं?


तो हम कहेंगे कि 7-8वीं शताब्दी में इसलाम के भारत में प्रवेश के बाद मुसलिम आतंकवादियों ने लाखों हिन्दूओं को जिहाद के नाम पर मौत के घाट उतारा ।


अगर आपको विशवास नहीं तो अफगानीस्तान ,पाकिस्तान, वंगलादेश में मुसलिम आतंकवादियों द्वारा कत्ल किए गय हिन्दूओं की संख्या में कशमीर घाटी में कत्ल किए 60000 हिन्दूओं(http://jagohondujago.blogspot.com/2010/07/blog-post.html ) व देशभर के अधिकतर शहरों में बम्ब हमलों में कत्ल किए गय हिन्दूओं की संख्या भी जोड़ लो ।


फिर भगवान को साक्षी मानकर अमने मन से पूछो क्या कोई भी मुसलमना विना मुसलिम सांप्रदाय के समर्थन से व्यक्तिगत सतर पर लाखों लोगों का खून इस तरह वहा सकता है नहीं न । बचाब का एक ही तरीका है— SHOW ISLAM NO RESPECT: MUSLIMS ARE NOT HUMAN



आतंकवाद की जड़ है इसलाम वरना ऐसे कैसे हो सकता था कि कश्मीर घाटी में मुसलिम आतंकवादियों द्वरा कत्ल कि किए जा रहे हजारों हिन्दू-सिखों पर तो भारत के मुसलिम खामोश रहें या कत्ल को अंजाम देने में सहयोग करें और अफगानीस्तान में मारे जा रहे तालिवानों के विरोध के लिए भारत में वन्द आयोजिक कर हिन्दूओं की दुकानों-मकानों में आग लगा दें।(http://samrasta.blogspot.com/2010/07/blog-post.html )


अभी जरा आगे देखें ISLAM: EVIL IN THE NAME OF GOD ™ नामक पुस्तक (http://godofreason.com/ )के cover page पर लिखा है

WHERE IS THE OUTRAGE?


GOD IS NOT A CRIMINAL


GOD IS NOT A MALE CHAUVINIST PIG




ONLY A


GOD OF MORAL PERFECTION™


IS GOD


इन शब्दों का अर्थ जितना हमें समझ आया उसके अनुशार समस्या कहां है ? इस बात को उपर लिखित चन्द शब्दों में सपष्ट कर दिया गया है।


अब समस्या तो गम्भीर है समाधान क्या है ?


आप देख रहे हैं कि पीछे का इतिहास हम छोड़ भी दें तो महात्मा गांधी जी ने सांम्प्रदाय के आधार पर भारत विभाजन का विरोध किया था यहां तक कहा था —-भारत का विभाजन गांधी जी के जिन्दा रहते नहीं हो सकता —— लेकिन मजबूर होकर भारत का विभाजन स्वार किया क्यों ? —– कभी सोचा आपने नहीं न —– 1946 में जिन्ना द्वारा — Direct action मतलब हिन्दूओं-सिखों के विरूद्ध सीधे युद्ध की घोषणा करते ही ——मुसलिम हिन्दूओं-सिखों पर टूट पड़े—– एक ही दिन में कलकता के आसपास 10000 से अधिक हिन्दूओं का कत्ल कर डाला —–गांवो के गांव हिन्दू विहीन कर डाले — मजबूर होकर गांधी जी को कहना पड़ा—-हिन्दू कायर है(कायर किसने बनाया ? —धर्मननिर्पेक्षताबादियों ने )और मुसलिम राक्षस—-दोनों को इकट्ठा रखा तो ये राक्षस हिन्दूओं का नोनिशान मिटा देंगे—-परिमामस्वारूप गांधी जी को भारत का विभाजन स्वीकार करना पड़ा—डा. अम्वेडकर जी ने पाकिस्तना-पंगलादेश के सब हिन्दूओं को भारत बुलाकर सबके सब मुसलमानों को पाकिस्तान भेजने पर जोर दिया—-लेकिन धर्मनिर्पेक्षतावादियों की जिद व अंग्रेजों की कुटिल चालों ने देशभक्तों की जायज मांग को साकार नहीं होने दिया—परिणामस्वारूप कशमीर में 60000 हिन्दूओं-सिखों का कत्ल—असाम को हिन्दूविहीन करने पर जोर—देशभर में हिन्दूबहुल क्षेत्रों व मन्दिरों में बम्म विस्फोट —चारों तरफ हिंसा और कत्लोगारद—आए दिन सुरक्षाबलों पर हमले—प्रतिदिन एकदर्जन से अधिक सैनिकों का मुसलिम आतंकवादियों द्वारा कत्ल ।


ये सब तब हो रहा है जब मुसलमानों की आबादी 20 प्रतिशत से कम है—-सरकारें हिन्दूओं के अधिकार छीनकर मुसलमानों को दे रहीं हैं चाहे सरकार किसी की भी हो ।


जरा कल्पना करो जब कशमीरघाटी की तरह सारे भारत में मुसलमानों की जनसंख्या 35 प्रतिशत से अधिक हो जाएगी और कोई दूसरा जिन्ना Direct action मतलब हिन्दूओं-सिखों के विरूद्ध सीधे युद्ध की घोषणा करेगा—- जैसे कशमीर में कर रखी है—– तो फिर क्या होगा ? —-सारे भारत में हिन्दूओं-सिखों का नरसंहार —मां-बहन वेटियों की इज्जत से खिलवाड़—छोटे-छोटे बच्चों का जिहाद की खातिर कतलयाम—आज जो, मुसलिम आतंकवादियों के साथ खड़ें हैं, क्या वो बचा पायेंगे हिन्दूओं को—क्या 1946-47 में ये बचा पाए थे हिन्दूओं को मुसलिम राक्षसों से —बचाना तो दूर ये खुद मारे जा रहे थे मुसलमानों के हाथों— छुपते पिर रहे थे ये घर कुदाल इन मुसलिम आतंकवादियों से—भूल गए उस कत्लयाम को —आज फिर ये दुष्ट मुसलिम आतंकवादियों को आगे बढ़ाने के लिए देशभक्तों को गाली निकाल रहे हैं—जागो मेरे प्यारे हिन्दूओ—अपनी सुरक्षा का इन्तजाम करो —समाधान सपष्ट है—


DESTROY THE


ISLAM OR


GET DESTROYED


BY IT




पकड़े जाने के डर से अग्निवेश ने बन्धक पुलिस वालों को अपने साथी बामपंथी आतंकवादियों से छुड़वाया।

 पकड़े जाने के डर से अग्निवेश ने बन्धक पुलिस वालों को अपने साथी बामपंथी आतंकवादियों से छुड़वाया।

हमने 04-09-10 को लिखा था कि किस तरह अग्निवेश ने IBN7 के कार्यक्रम में सवीकार किया कि क्योंकि विहार के मुख्यमन्त्री नितीश कुमार ने माओवादी आतंकवादी आजाद के मारे जाने के विरोध में ब्यान देने व जांच की मांग करने से मना कर दिया इसलिए वामपंथी आतंकवादियों ने नितीश जी को सबक सिखाने व चुनाबों में नुकसान पहुंचाने के लिए पुलिस वालों का अपरहण किया। कार्यक्रम के दौरान अग्निवेश द्वारा इस तरह खुद ही सच्चाई जनता के सामने रखने के कारण एक बात सपष्ट हो गई कि वाकी बचे तीन पुलिस वालों को कोई नुकसान नहीं होने वाला।क्योंकि अब अगर बन्धक पुलिस वालों को छोड़ा न जाता या कोई नुकसान पहुंचाया जाता तो इसकी जांच के दायरे अग्निवेश जरूर फंस जाते। खुद को गिफ्तारी से बचाने के लिए अग्निवेश ने बन्धक पुलिस वालों को छोड़ के निर्देश जारी किए।

हमारा 04-09-2010 को लिखा गया लेख

 


हम अग्निवेश जी को एक लम्बे समय से समझने की कोशिश कर रहे हैं। जितना अभी तक हम समझ पाए हैं अग्निवेश की जिन्दगी का एक अटूट हिस्सा है भारत विरोध व आतंकवादी प्रेम। आतंकवादी चाहे पाक समर्थक हों या फिर चीन समर्थक या फिर रोम समर्थक अग्निवेश को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता उनके पास आतंकवादियों द्वारा किए हर नरसंहार का आसान सपष्टीकरण उपलब्ध रहता है ।


लेकिन इसवार मामला ज्यादा गम्भीर है क्योंकि जो कुछ अग्निवेश ने 03-09-2010 शाम को IBN7 पर आशुतोष के साथ कहा वो सपष्ट संकेत देता है कि इसवार पुलिसवालों का अपरहण सीधे तौर पर अग्निवेश के इसारे पर नितीश कुमार को सबक सिखाने के इरादे से हुआ है।


कार्यक्रम के दौरान जब आशुतोष ने नितीश जी के माओवादियों के प्रति सहानुभूति रखने की बात उठाकर यह कहने की कोशिश की कि क्योंकि नितीश जी के मन में बामपंथी आतंकवादियों के प्रति विशेष सहानुभूति है इसलिए नितीस जी के राज्य में इस तरह का अपहरण जो कि नितीश जी को राजनितीक हानि पहुंचाने के इरादे से किया गया प्रतीत होता है विलकुल गलत है तो अग्निवेश जी ने एकदम भाव में आकर कहा कि अपहरण से पहले उन्होंने (अग्निवेश) ने खुद नितीश जी से वामपंथी आतंकवादी आजाद के मारे जाने की जांच सबन्धी बयान देने की मांग की थी जिसे नितीश जी ने नहीं माना —परिणाम स्वारूप ये अपहरण हुआ।


इसके साथ ही अग्निवेश जी ने बामपंथी आतंकवादियों द्वारा पुलिसवाले के कतल को भी सही ठहराने की कोशिश की


साथ हगी ये भी कहा कि अगर नितीश जी दो लाइन की सटेटमैंट लिखकर मिडीया के सामने दे दें तो बन्धक पुलिस वाले छोड़े जा सकते हैं।


स्टेंटमैंट में नितीश जी को आतंकवादियों से उनकी बात नहीं माने जाने पर माफी मांगनी होगी व आतंकवादियों की बात मानने का बायदा करना होगा मतलब पूरी कानून बयवस्था का आतंकवादियों के सामने पूर्ण समर्पण। इतना ही नहीं अग्निवेश ने तो यहां तक कहा कि कानून ब्याबस्था संविधान की बात कर सरासर गलत है फैसला आतंकवादियों के जंगलराज के अनुशार होना चाहिए।आप ये कार्यक्रम IBN7 पर देख सकते हैं।


इस सारे कार्यक्रम का सार ये है कि क्योंकि नितीश जी ने अग्निवेश जी की बात(आतंकवादी आजाद की मौत की जांच करने की मांग) नहीं मानी इसलिए उनको सबक सिखाने के लिए पुलिस वालों का अपहरण कर इनमें से एक की हत्या कर दी गई वाकियों की हत्या करने की त्यारी है।


हमारे विचार में अग्निवेश को तुरन्त पुलिस के जवानों का अपहरण करवाने के बाद कतल करने के अपराध में गिरफ्तार कर जांच को आगे बढ़ाना चाहिए। हम दावे के साथ कह सकते हैं कि


1. एक तो इन तीन पुलिस वालों की जान बच जाएगी


2. दूसरा अपहरण का सच सबके सामने कुछ दिनों मे आ जायगा


3. तीसरा अग्निवेश ,गौतम नबलखा ,अरूंधती राय जैसे मानबाधिकारवाद के चोले में छुपे देश के गद्दारों की असलियत कानून से सबके सामने आ जाएगी।


 

4. कांग्रेस के नेतृत्व में देशविरोधी धर्मनिर्पेक्ष गिरोह द्वारा आतंकवाद(मुसलिम,वामपंथी 

वामपंथी आतंकवाद से साबधान

 इसाई) का उपयोग किस तरह राजनितीक हथियार के रूप में किया जा रहा है इसकी सच्चाई देश की भोली-भाली गरीब जनता के सामने उजागर हो जायगी।


5. अन्त में न जाने और कितने पुलिस व आम नागरिकों के जान-माल की रक्षा इन गद्दारों से हो सकेगी।


नितीश जी जल्दी से अग्निवेश को गिफ्तार कर सच्चाई को जनता के सामने लाकर देश को बचाने में अपनी भूमिका का निर्वाहन करें ।


अगर नितीश जी ये नहीं करते हैं तो छतीशगढ़ के मुख्यमन्त्री जी को अग्निवेश को उसके गिरोह सहित गिफ्तार कर ये सच्चाई सबके सामने लानी चाहिए।


अगर वो भी इन गद्दारों को हाथ नहीं डालते हैं तो फिर भगवा क्रांतिकारियों के साकार रूप के सामने आने का इन्तजार करना चाहिए ताकि वो हिन्दू क्रांतिकारी ऐसे गद्दारों व गद्दारों के मददगारों को चौराहे पर गोली से उड़ाकर देश की रक्षा कर सकें।


क्या आप डा. भीमराव अम्बेडकर जी को जानते हैं?

 

 

19वीं शताब्दी में अनेक अवतारी महापुरूषों ने भारत की धरती पर जन्म लिया। 14 अप्रैल 1881 का दिन ऐतिहासिक दिन

था। इस दिन डा. भीमराव अम्बेडकर जी का जन्म हुआ। वर्षप्रतिपदा 1889 को डा. हैडगेवार जी का जन्म हुआ । 1983 में

डा. हेडगेवार जी के जन्मदिन वर्षप्रतिपदा पर समरसता शब्द डा. अम्बेडकर जी की ही देन है। परमपूजनीय गुरूगोविन्द सिंह

ने क्रांति का सूत्रपात किया। सिंहशब्द नाम ने न्यूनता ग्रंथि से ग्रसित करोंड़ों के समाज को आन्दोलित , प्रेरित करने का

यशस्वी प्रयत्न किया।

अवतारीमहापुरूषों का जीवन वाल्यकाल से ही संकटों में गुजरता है जिस प्रकार भगवान राम ,भगवान कृष्ण , स्वामी

 

विवेकानन्द व गुरूगोविन्द सिंह जी का बाल्यकाल संकटों व संघर्षों में गुजरा—डा हेडगेवार जी का वाल्यकाल भी संकटों के

 

दौर से ही गुजरा—-डा. हेडगवार जी ने 13 वर्ष की आयु में ही अपने माता-पिता को एक ही चिता में मुखाग्नि देने के बाद

 

सारा जीवन कष्टों व संघर्षों में बिताया।घर में चाय तक पीने के लिए पैसे उपलब्ध नहीं रहते थे।

          उसी प्रकार डा. भीमराव अम्बेडकर जी का जीवन भी कष्टों व संघर्षों  के लिए ही जाना जाता है। डा भीमराव

 

अम्बेडकर जी ने भी न्यूनता ग्रंथि से ग्रसित करोंड़ों हिन्दूओं को एक नई राह दिखाई वो राह जो उनके अन्दर आत्मविश्वास

 

व आशा का संचार करती थी।

 

डा. भीम राव जी के एक प्रिय गुरू जी का अन्तिम नाम अम्बेडकर था उन्हीं के नाम पर डा. भीमराव जी का नाम भीम

 

राव अम्बेडकर हुआ। डा. भीमराव अम्बेडकर जी की माता जी का देहांत तो 5वर्ष की आयु में ही हो गया । फिर भी उन्हें

 

अपने पिता जी से घर में ही अच्छे संस्कार मिले। मुम्बई में एक ही कमरे में दोनों रहते थे ।एक सोता था तो एक पढ़ता

 

था इतना छोटा कमरा था वो। आगे चलकर इन्हें केअसकर नाम के व्यक्ति( सज्जन) मिले जिन्होंने इनका परिचय बड़ौदा के

 

महाराजा सहजराव गायकवाड़ जी से करवाया ।गायकवाड़ जी ने इन्हें छात्रवृति लगा दी । गायकवाड़ जी ने अम्बेडकर जी को

 

विदेश भेजा बाद में लन्दन गए। लन्दन में खरीदी पुस्तकें मालबाहक जहाज में भेजने के कारण डूब गईं जिनका मुआवजा

 

2000 रूपए मिला फिर बड़ौदा गए। Ph. D करने पर बड़ौदा आने के बाद अम्बेडकर जी को तरह तरह की समस्याओं का

 

सामना करना पड़ा। जिससे उनके मन में पीड़ा तो हुई पर कभी उनके मन में कटुता पैदा नहीं हुई।

 

 

फिर उनके मन में LAW की पढ़ाई करने का विचार आया। कोहलापुर के महाराजा ने उन्हें लंदन भेजा। डा. अम्बेडकर जी ने

 

संस्कृत सीखी ।स्पृश्य-अस्पृश्य क्या है जानने का प्रयत्न किया।वेद,  उपनिषद् , भगवद गीता सबका डटकर अध्ययन किया –

 

-साहित्य लिखा। डा.अम्बेडकर जी अन्त में इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि छुआ-छूत मुगलकाल की देन है । हिन्दू धर्म में इसका

 

कोई स्थान नहीं। आर्य-द्रविड़ भेद पैदा करना अंग्रेजों की हिन्दूओं को आपस में लड़वाने की चाल है ऐसा उन्होंने खुद महसूस

 

किया व ये सब उन्होंने लोगों को समझाने का भी प्रयत्न किया। आर्य बाहर से नहीं आए ये डा. अम्बेडकर जी ने कहा।

 

 

 WHO ARE SHUDRAS में अम्बेडकर जी ने कहा जिस हिन्दू धर्म का ज्ञान इतना श्रेष्ठ है कि उस ज्ञान के प्रभाव से चींटी,

 

सांप, तुलसी मतलब छोटे से चोटे जीव से लेकर पेड़-पौधों तक की पूजा करने वाला हिन्दू,  हिन्दू को न छुए ऐसा कैसे हो

 

सकता है ?

 

 

उन्होंने सपष्ट कहा कि समस्या धर्म की नहीं समस्या मानसिकता की है खासकर स्वर्ण मानसिकता जो गुलामी के प्रभाव के

 

कारण विकृत हो चुकी है जिसे बदलने की जरूरत है । यदि स्वर्ण मानसिकता बदलेगी तो हिन्दू समाज बदलेगा ।

 

 

उन्होंने सत्याग्रह का शस्त्र उठाया। भगवद गीता को हथियार बनाया।तालाब के पानी हेतु—महाड़ सत्यग्रह ।नासिक के

 

कालराम मन्दिर में प्रवेश हेतु सत्याग्रह किया लाठियां खाईं।

 

 

1935 में रूढ़ीबादिता व भ्रम के शिकार लोगों को Shock TREATMENT देते हुए कहा सुधरना है तो सुधर जाओ वरना मैं

 

धर्मांतरण कर लूंगा। जबकि वासत्विकता यह है कि उन्होंने कभी धर्मांतरण किया ही नहीं। उनके सारे सहित्य में हिन्दू राष्ट्र

 

शब्द का प्रयोग बार-बार हुआ है उन्होंने जातिविहीन समाज रचना, राष्ट्र संगठन सब पर लिखा है।

 

 

1947 में मुसलिम अलगावबाद के परिणास्वारूप देश का विभाजन हो गया । जिस पर अम्बेडकर जी ने सपष्ट कहा कि अब

 

जबकि मुसलमानों को अलग देश दे दिया गया है तो हमें पाकिस्तान से सब हिन्दूओं को भारत ले आना चाहिए व भारत से

 

सब मुसलमानों को पाकिस्तान भेज देना चाहिए ताकि मुसलमान अपने घर पाकिस्तान में सुख से रहें और हिन्दू अपने घर

 

भारत में सुख से रहें। आज चारों ओर फैले मुसलिम आतंकवाद को देखकर आप खुद समझ सकते हैं कि डा. अम्मवेडकर

 

जी कितने दूरदर्शी थे।

 

विभाजन के बाद Hindu Code Bill अम्बेडकर जी की हिन्दू समाज को सबसे बढ़ी देन है । इसी में अम्बेडकर जी ने हिन्दू

 

किसे कहते हैं, इसकी व्याख्या की जिसमें सपष्ट कहा गया कि विदेशी धारणाओं इस्लाम और इसाईयत को छोड़कर भारत में

 

रहने वाले (हिन्दू-सिख-बौद्ध-जैन—-इत्यादि)  सब लोग हिन्दू हैं।

 

 

ये उन्हीं की दूरदर्शिता थी कि उन्होंने  SC/St के नाम से वंचित हिन्दूओं के लिए अलग से आरक्षण की व्यवस्था बनाकर

 

अंग्रेजों के बड़े पैमाने पर धर्मांतरण करने के षडयन्त्र को असफल किया।

 

 

अम्बेडकर जी ने सबको राजकीय समानता दिलवाते हुए सबके लिए एक ही वोट का प्रावधान किया। डा. भीमराव अम्बेडकर

 

जी ने 1965 में कहा कि वेशक मेरा जन्म हिन्दू धर्म में हुआ है पर हिन्दू के रूप में मैं मरूंगा नहीं ।

 

 

अपनी जिन्दगी में जाति के कारण भी कई तरह के असहनीय कष्ट सहने के बाद भी उन्होंने हिन्दू हित के लिए काम करते

 

हुए अन्त में बौद्ध मत अपनाया जो कि हिन्दू समाज का अपना ही मत है इसलिए उसे धर्मांतरण नहीं कहा जा सकता।

 

उन्होंने किसी विदेशी अबधारणा को नहीं अपनाया। ये भी उनके मन में अपने देश-संस्कृति के प्रति अटूट प्रेम को दर्शाता है।

 

 

 

 

हैदराबाद के निजाम द्वारा 40 करोड़ ( आज आप अनुमान लगा सकते हैं कि कितना अधिक धन बनता है ये) व औरंगावाद

 

में बंगला,जमीन का प्रलोभन देने के बाबजूद डा. भीम राव अम्बेडकर जी ने अत्याचारी इस्लाम स्वीकार नहीं किया ।

 

 

इसी तरह उन्हें ईसाईयों द्वारा ईसाईयत अपनाने के लिए भी कई तरह के प्रलोभन दिए गए लेकिन उन्होंने ईसाई बनना भी

 

सवीकार नहीं किया।

 

 

 वो अच्छी तरह जानते थे कि ये दोनों विदेशी अवधारणायें देशहित-हिन्दू हित में नहीं हैं ।

 

 

उन्होंने अपने वंचित हिन्दू भाईयों  को सपष्ट आदेश दिया कि बेशक अपने हिन्दू भाईयों में कमियां हैं वो गुलामी के प्रभाव

 

के कारण स्वर्ण मानसिकता के शिकार हैं पर अत्याचारी मुसलमान व लुटेरे ईसाई किसी भी हालात में हमारे हित में नही हो

 

सकते ।

आज जिस तरह धरमांतरित हिन्दूओं को दलित व काले ईसाई कहकर पुकारा जा रहा है व धर्मांतरित हिन्दूओं को जिस

 

तरह पाकिस्तान व बंगलादेश में मस्जिदों में बमविस्फोट कर मारा जा रहा है ,मुहाजिर कहा जा रहा है भारत में भी

 

मुसलिम बहुल क्षेत्रों में निशाना बनाया जा रहा है उसे देख कर आप समझ सकते हैं कि डा. भीमराव अम्वेडकर जी कितने

 

दूरदर्शी व देशहित-हिन्दूहित में कितने विस्तार से सोचने व निर्णय लेने में समर्थ थे।

 

 

दुनिया को धर्म सिखाना ही भारत की विभूतियों का काम है Deep Cultural Unity in our Society(India) में लिखते हैं कि आपस

 

में झगड़ों के बाबजूद हिन्दू समाज एक है और एक रहेगा । मानसिकता में परिवर्तन के साथ ही ये झगड़े भी समाप्त हो

 

जायेंगे।

1916 में लखनऊ पैक्ट में 13% मुसलमानों को 30% सीटें देने का उन्होंने कांग्रेस के हिन्दूविरोधी रूख के बाबजूद डटकर विरोध

 

किया। उन्होंने कहा कि जो बात हिन्दू हित की नहीं वो देशहित की कैसे हो सकती है।आज हर देशभक्त को अपने घर में डा.

 

भीमराव अम्बेडकर जी का चित्र लगाना चाहिए व उनके बताए मार्ग पर चलने का प्रयत्न करना चाहिए।

जब लोग अपनों की लाशों के ढेर पर बैठकर खुशियां मनायें ,मुबारकवाद दें तो भला कोई क्या जबाब दे?

जब लोग अपनों की लाशों के ढेर पर बैठकर खुशियां मनायें ,मुबारकवाद दें तो भला कोई क्या जबाब दे?

 

 

इन्सान जिन्दगी में अक्सर ऐसे पलों से गुजरते हैं जिन्हें भूलकर भी भुलाया नहीं जा सकता।


भारत जिस पर पहला मुसलिम आतंकवादी हमला सातवीं सताब्दी में तब हुआ जब पहला मुसलिम आतंकवादी मुहमम्दविन कासिम भारत में अरब देशों से प्रवेश किया।


तब से लेकर आज तक मुसलिम आतंकवादियों ने पीढ़ी दर पीढ़ी पीछे मुढ़कर नहीं देखा । एक के वाद एक हिन्दूओं के नरसंहारों को अन्जाम दिया । हिन्दूओं की मां-बहन-बहु-बेटियों की इज्जत-आबरू से खिलवाड़ किया सो अलग।




मुसलमानों द्वारा किए गए हिन्दूओं के इतने कतलोगारद के बाबजूद भी कभी हिन्दूओं ने मुसलिम आतंकवादियों के विरूद्ध खुले युद्ध की घोषणा कर आक्रमणकारी इस्लाम को भारत से उखाड़ फैंकने की कसम नहीं उठाई ।


उल्टा आक्रमणकारी मुसलामन भारत के जिस हिस्से में भी 35 प्रतिशत से अधिक हो गए उस हिस्से से इन आतंकवादी मुसलमानों ने हिन्दूओं का नमोनिशान मिटा दिया।


हद तो तब हो गई जब 1946 में लगभग 15% मुसलामानों ने जिहादी आतंकवादी जिन्ना के नेतृत्व में हिन्दूओं के विरूद्ध खुले युद्ध की घोषणा कर डाली ।


जिसे नाम दिया गया DIRECT ACTION। जिसकी घोषणा होते ही कलकता में मुसलमानों ने 5000 हिन्दूओं का कत्ल कर एक बड़े क्षेत्र को हिन्दूविहीन किया उसके बाद बंगाल के ही नौखली नामक स्थन पर इससे बड़े पैमाने पर हिन्दूओं का कत्लयाम मुसलमानों द्वारा किया गया ।


जिसके बाद मुसलिम आतंकवादियों

 के सबसे बड़े हमदर्द मोहनदासकर्मचन्द गांधी को भी कहना पड़ा “ मुसलिम अत्याचारी राक्षस हैं व हिन्दू कायर” ।


ये आतंकवीदियों का हमदर्द भूल गया कि हिन्दूओं के इन नरसंहारों के लिए मुसलिम आतंकवादियों से ज्यादा जिम्मेदार नेहरू

व खुद गांधी जैसे मुसलिम आतंकवादियों के मददगार व हिन्दू एकता के विरोधी हैं जिन्होंने क्रांतिकारियों व हिन्दू संगठनों की हर उस कोशिश को अडंगा लगाया जिसमें देशभक्तों को गद्दारों के विरूद्ध संगठित करने की कोशिश की गई ।


परिणामस्वारूप गद्दार तो मस्जिदों व मदरसों के माध्यम से देशभक्तों के विरूद्ध युद्ध की तैयारी करते रहे लेकिन हिन्दू संगठनों द्वारा देशभक्तों को संगठित करने के लिए देशहित में उठाए गए किसी भी कदम को इन मुसलिम आतंकवादियों के समर्थकों ने देश के विरूद्ध बताकर मुसलिम आतंकवादियों को हिन्दूओं का एकतरफा नरसंहार अंजाम देने का खुला नयौता दे दिया।


क्योंकि हिन्दू किसी भी तरह से इन मुसलिम आतंकवादियों से लड़ने के लिए न तो तैयार थे न उन्हें ऐसी उम्मीद थी कि मुसलमान राक्षसों की तरह हिन्दूओं का कत्लयाम कर हिन्दूओं की मां-बहन-बहू-बेटियों को अपवित्र करने के लिए बैहसी जानवरों की तरह टूट पड़ेंगे।


ऐसा नहीं कि हिन्दूओं के साथ मुसलमानों ने ये राक्षसी व्यवहार पहलीबार किया हो लेकिन हिन्दूओं के अन्दर अपने जयचन्दों ने हमेशा मुलमानों से पड़ने वाले टुकड़ों के बदले अपने हिन्दू भाईओं को मुसलमानों के बारे में गलत जानकारी दी कि मुसलमान भी हिन्दूओं की तरह इन्सान हैं राक्षस नहीं।


लेकिन इतिहास इस बात का गवाह है कि जब भी मुसलमानों को मौका मिला मुसलमानों ने सिद्ध कर दिया कि इस्लाम शैतानों और राक्षसों के समूह का दूसरा नाम है।


इस तहर 1946 में जिन्ना द्वारा DIRECT ACTION की घोषणा के साथ कलकता में 5000 निर्दोश निरीह हिन्दूओं का कत्ल कर जो हिन्दूओं का कत्लयाम शरू हुआ उसमें लाखों हिन्दूओं का कत्ल कर लाखों मां-बहन-बहू-बेटियों को अपवित्र किया गया।


जिसका परिणाम हुआ 14-15 अगस्त 1947 को भारत का तीन हिस्सों में विभाजन । आज के हालात में इसका सीधा सा उधारण है कशमीरघाटी जहां 60000 हिन्दूओं को कत्ल कर 500000 हिन्दूओं को वेघर कर आए दिन सैनिकों पर हमले किए जा रहे हैं।


हमें तो हैरानी होती है उन बौद्धिक गुलाम हिन्दूओं पर जो मुसलिम हिंसा के शिकार हुए लगभग 10000000 अपनों की लाशों व यातनाओं पर बैठकर इस दिन को स्वतन्त्रता दिवस कहकर संबोधित करते हैं व एक दूसरे को कत्लोगारत के इस दिन पर बधाईयों देते हैं।


वैसे भी शहीद भगत सिंह जी ने 23 वर्ष की आयु में अपनी कुर्बानी इसलिए दी थी ताकि शासन विदेशी इसाईयों से लेकर अपनी भारत मां की सन्तानों के हाथों में दिया जा सके लेकिन क्या आज देश आजाद है?

 आज भी तो बौद्धिक गुलाम हिन्दूओं की मूर्खता व कायरता की बजह से देश का प्रधानमंत्री एक विदेशी इटालियन अंग्रेज एंटोनिया का गुलाम है व देश को जिस मुसलिम आतंकवाद से छुटकारा दिलवाने के लिए नेहरू-गांधी ने देश का विभाजन स्वीकार किया आज देश का हर कोना उसी मुसलिम आतंकवाद का शिकार है।


भारत की आजादी तब तक अधूरी है जब तक हर आक्रमणकारी को देश से बाहर खदेड़ कर देश के हर कोने से आक्रमणकारियों की हर निशानी को तहश नहस नहीं कर दिया जाता


आओ आज के दिन देश को आक्रमणकारियों व उनकी कलंकित निशानियों से मुक्त करवाने के लिए एकजुट होकर संघर्ष करने का बीड़ा उठायें …………..


याद रखो


उस कौम का इतिहास नहीं होता जिसे मिटने का एहसास नहीं होता


एक जुट होकर मिलजुलकर कदम उठाओ ऐ हिन्दूओं


वरना तुम्हारी दास्तां तक न होगी दास्तानों में…….








ये कौन हैं जो आतंकवादी मुसलमानों व मुसलिम संगठनों को निर्दोश और निर्दोश हिन्दूओं व हिन्दू संगठनों को आतंकवादी सिद्ध करने के लिए एक के बाद एक षडयन्त्र रचे जा रहे हैं?

 

ये कौन हैं जो आतंकवादी मुसलमानों व मुसलिम संगठनों को निर्दोश और निर्दोश हिन्दूओं व हिन्दू संगठनों को आतंकवादी सिद्ध करने के लिए एक के बाद एक षडयन्त्र रचे जा रहे हैं?

 

 

हम आपके सामने कुछ ऐसे तथ्य रखने जा रहे हैं जो आपको सायद उस हकीकत का सामना करवा सकें जिस हकीकत का सामना देशभक्त भारतीय सेना,हिन्दू व हिन्दू संगठन कर रहे हैं।


अगर हम भारत को आज वैचारिक व राजनीतिक आधार पर समझना चाहें तो कुल मिलाकर दो विचारधारायें उभर कर सामने आती हैं।


एक विचारधारा है सर्वधर्मसव्भाव व सांस्कृतिक राष्ट्रवाद में विश्वास रखने वाली भारतसमर्थक हिन्दूत्वनिष्ठ विचारधारा व दूसरी विचारधारा है भारतविरेधी-हिन्दूविरोधी धर्मनिर्पेक्षतावादी विचारधारा मतलब सैकुलर गिरोह की विचारधारा।


हिन्दूत्वनिष्ठ विचारधारा भारत को सांस्कृतिक समानता के आधार पर एकजुट कर अलगाववादियों को अलग-अलग कर भारत को आगे ले जाना चाहती है जबकि सेकुलर गिरोह की विचराधारा भारत को धर्मविहीन-हिन्दूविहीन कर धर्मनिर्पक्षता के नाम पर भारत को इसलामी व ईसाई टुकड़ों में विभाजित कर भारत की सांस्कृतिक धरोहर को नष्ट कर आगे और खण्ड-खण्ड करने में विश्वास रखती है।


हिन्दूत्वनिष्ठ विचारधारा को आगे बढ़ाने का माध्यम है भारत को जोड़ने वाली सांसकृतिक कड़ियों पर जोर देकर हिन्दूएकता को प्रवल कर भारतीयों को संगठित करना जबकि सेकुलर गिरोह का जोर है हिन्दुओं को जात-पात के आधार लड़वाकर हिन्दू समाज को और विभाजित कर मुसलिम व इसाई आतंकवाद को बढ़ावा देकर भारतीयों को आपस में लड़वाकर भारत के शत्रुओं को ताकतवर बनाना।


आज भारत के अधिकतर संचार साधनों पर सेकुलर गिरोह की पकड़ मजबूत होने के कारण देश में एक ऐसा महौल बना दिया गया है जिसमें हिन्दूत्वनिष्ठ संगठनों द्वारा देशहित में कही गई या की गई हर बात को इस तरह से पेश किया जाता है मानों हिन्दूत्वनिष्ठ संगठन व भारतीय सेना ही देश की सब समस्याओं की जड़ है जबकि सच्चाई यह है कि भारत विरोधी पाक समर्थक मुसलिम आतंकवादियों, चीन समर्थक माओवादी आतंकवादियों व रोम समर्थक ईसाई आतंकवादियों ने देश के विभिन्न हिस्सों में देसभक्तों का जीना दुशवार किया हुआ है।


मिडीया की सहायता से सेकुलर गिरोह भारतविरोधी आतंकवादियों द्वारा हिन्दूओं व देश पर किए गए हर हमले को या तो दबाने की कोशिश करता है या फिर आतंकवादियों द्वारा किए गए हमले का दोश एक योजना के तहत देशभक्त भारतीय सेना, हिन्दूओं व हिन्दू संगठनों पर मढ़ने की कोशिश की जाती है।


पिछले कुछ दिनों से ऐसे प्रमाण मिल रहे हैं कि सेकुलर गिरोह ने अपने देशविरोधी-हिन्दूविरोधी अभियानों की सफलता से उतसाहित होकर अब सीधे देश के सुरक्षाकव्च मतलब भारतीय सेना पर हमले तेज कर सैनिकों को बदनाम करना शुरू कर दिया है।


हमारा मानना है कि झूठ के पाँव नहीं होते झूठ चाहे कितने भी जोर से क्यों न कहा जाए अन्त में तो झूठ व पाप को तो हारना ही है क्योंकि प्रकृति का विधान ही ऐसा है जिसमें जीत तो सत्य और धर्म की ही होती है।


प्रकृति के इसी विधान के अनुरूप पापिओं व अधर्मियों के सेकुलर गिरोह द्वारा देसभक्त हिन्दूओं व हिन्दू संगठनों के वारे में फैलाए जा रहे झूठों का एक के एक पर्दाफास होता जा रहा है।

सेकलर गिरोह का झूठ-चर्चों पर हमले हिन्दूओं व हिन्दू संगठनों ने किए थे…


वर्ष 2000 में गुजरात व केन्द्र में BJP की सरकार थी । उन्हीं दिनों गुजरात, उड़ीसा, आन्ध्रप्रदेश व कर्नाटक के कई चर्चों में एक के वाद एक बमबलास्ट हुए। सेकुलर गिरोह ने न आब देखा न ताब बस सीधे शोर मचा दिया कि संघ परिवार मतलब हिन्दूत्वनिष्ठ संगठनों ने अल्पसंख्यकों मतलब ईसाईयों और मुसलमानों को मिटाने के अपने अभियान को अंजाम देना शुरू कर दिया है।


देश के हर समाचार चैनल व समाचार पत्र ने मनघड़ंत कहानियां बनाकर हिन्दूओं व हिन्दू संगठनों को बदनाम कर सारे संसार में भारत की छवि को धूमिल किया। हिन्दूओं को कातिल और अत्याचारी के रूप में पेश किया। संघपरिवार व हिन्दू संगठनों ने लाख कहा कि इन हमलों से उनका कोइ लेना–देना नहीं लेकिन सेकुलर गिरोह ने एक न सुनी बस शोर मचा दिया हिन्दू व हिन्दूओं के संगठन कातिल हैं अत्याचारी है ईसाईयों का नरसंहार कर रहे हैं। विदेशों से भी भारत सरकार को हिन्दूओं व हिन्दू संगठनों पर नकेल कश कर अलपसंख्यकों की रक्षा करने के आदेश मिलने लगे ।चारों तरफ हाहाकार मचा दी गई।


तभी एक ऐसी घटना घटी जिसने सबको चौंका दिया।

आन्ध्रप्रदेश में दीनदार अन्जुमन के कुछ लोग गिरफ्तार किए गए जिन्होंने ने ये कबूल किया कि चर्चों में विस्फोट मुसलिम आतंकवादियों ने किए हैं ।क्योंकि चन्द्बाबाबू नायडू खुद सेकुलर गिरोह का हिस्सा थे इसलिए पकड़ें गए लोगों के कबूलनामे पर प्रश्न उठाना मुस्किल था फिर भी सेकुलर गिरोह ने अपनी योजना अनुशार हिन्दूओं और हिन्दू संगठनों को टारगेट करना जारी रखा।


सेकुलर गिरोह के सारे दुशप्रचार के बाद माननीय न्यायालय का ये फैसला पढ़ो….

A special court, hearing cases related to serial bomb blasts in churches in Karnataka, Andhra Pradesh, Maharashtra and Goa in 2000, has convicted 23 people belonging to Deendar Channabasaveshwara Anjuman group. Of the 27 accused who were tried, four were acquitted. Special Court Judge SM Shivana Gowdar

who convicted the 23 in Bangalore on Friday, is yet to pronounce the quantum of punishment in the case which has been adjourned till December 3.

BANGALORE, India, December 3, 2008–A court in southern India has handed death sentences to 11 people convicted of bombing churches in three states in 2000

In addition to the death sentences, the court in Bangalore, capital of Karnataka state, 2,060 kilometers south of New Delhi, also sentenced 12 others involved in the blasts to life imprisonment on Nov. 29.

The explosions damaged the churches, but the only deaths were of two people suspected of involvement in the bombings. The convicted are members of a Muslim sect, Deendar Anjuman (organization for duty).

इस फैसले के अनुशार चर्चों में बम्मविस्फोट मुसलिम संगठन दीनदार अंजुमन ने करवाए थे। ये हमले करने के जुर्म में पकड़े गए 27 लोगों में से 4 को छोड़ दिया गया व 11 को फांसी की सजा सुनवाई गई तथा 12 को उम्रकैद की सजा सुनवाई गई।


अब सोचने वाला विषय ये है कि जिन लोगों ने हिन्दूओं व हिन्दू संगठनों के वारे में अफवाहें फैलाकर संसार में भारत व हिन्दूओं की छवि खराब करने की कोशिश की ये कौन लोग हैं?


बास्तब में ये वो लोग हैं जो मुसलिम देशों से पैसे लेकर हिन्दू मुसलिम एकता(The group, now banned, was founded in 1924 in Karnataka to unite Muslims and Hindus, but that aim later changed and members began to work for the Islamization of India through violent activities, the prosecution reportedly told the special court. Police intelligence reports say the sect has some 12,000 followers in villages of Karnataka and neighboring Andhra Pradesh.)

के नाम पर हिन्दूओं की बर्बादी सुनिस्चित करने के लिए मुलिम आतंकवादियों की ढाल के रूप में काम करते हैं।मुसलिम देशों से मिलने वाले टुकड़ों के बदले ये लोग मुसलमानों द्वारा किए गए हर नरसंहार का दोश हिन्दूओं व हिन्दू संगठनों पर डालने का हर सम्मभव प्रयास करते हैं।


सेकलर गिरोह का झूठ-इशरत जहां निर्दोष थी


वर्ष 2004 में गुजरात में पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में लश्करे तैयवा के चार खूंखार फिदाय़ीन मारे गए।

इन चार में से एक लड़की थी जिसका नाम था इसरत जहां।

 इस इनकांटर के कुछ ही घंटे बाद समाचार चैनलों व समाचार पत्रों ने समचार चलाने शुरू कर दिए कि ये मुठबेड़ फर्जी थी।

http://www.hindilok.com/ishrat-jahan-fake-encounter-creates-question-prasun.html


 बैसे भी सेकुलर गिरोह हर मुलिम आतंकवादी को निर्दोष ही मानता है क्योंकि दोनों का मकसद एक ही है वो है हिन्दूओं का नरसंहार । ये कुछ घंटे भी शायद इसलिए लग गए क्योंकि झूठा समाचार चलाने के लिए इन सेकुलर गद्दारों को कितने पैसे मिलेंगे ये तय होनें में कुछ वक्त लगा होगा।


सौदा तय होते ही समाचार चैनलों ने जंगली कुतों की तरह हिन्दूओं पर भौंकना शुरू कर दिया ।हिन्दूओं व पुलिस को वरबर अत्याचारी सिद्ध करने के लिए तरह तरह की कहानियां प्रसारित की गई।


ये बात अलग है कि मुठबभेड़ के कुछ ही दिनों के अन्दर लश्करे तैयवा ने खुद ये सवीकार कर लिया कि इसरत जहां लश्करे तैयवा की आत्मघाती आतंकवादी थी। Shortly after the 2004 encounter, LeT claimed that Ishrat was its fidayeen through its Lahore-based mouthpiece ‘Ghazwa Times’.

इसी वीच मुंबई ATS ने भी अपनी रिपोर्ट में ये खुलासा कर दिया कि इसरत जहां लश्करे तैयवा की आत्मघाती आतंकवादी थी ।


लेकिन सेकुलर गिरोह कहां मानने वाला था उसने तो मुसलिम देशों से मिले पैसे को हलाल करना था हिन्दूओं व हिन्दू संगठनों को बदनाम कर। इस वार सेकुलर गिरोह ने केन्द्र सरकार के साथ मिलकर नई रणनिती बनाई । इस रणनिती के अनुसार पहले इसरत जहां के परिवार वालों को समाने लाकर उनका रोना-धोना

दिखाया गया बाद में उनसे कोर्ट में केश करवा दिया गया ।

ठीक उसी समय जब कोर्ट में केश करवाया गया लश्करे तैयवा ने भी अपने पिछले बयान से पलटते हुए इसरतजहां का अपना सदस्य होने से इनकार कर दिया। However in 2007, LeT, which was then rechristened as Jamaat-ud-Dawa (JuD), disowned her and issued an apology to Ishrat’s family for describing her as a LeT cadre.

ये इस बात का प्रमाण था कि सेकुलर गिरोह व मुसलिम आतंकवादियों के वीच किस तरह के गहरे रिस्ते हें।


मान ,मर्यादा व विस्वास की सब हदें तब पार हो गयीं जब एक जज पी सी तमांग ने भी सेकुलर गिरोह के भारतविरोधी दुशप्रचार का सिकार होकर इसरत जहां को निर्दोश करार दे दिया।( तमांग की आख्या में कहा गया है कि इसरत जहां और उसके साथ मारे गये उसके तमाम साथी निर्दोष थे तथा गुजरात पुलिस ने कथित आतंकियों को मुम्बई से पकडकर लाई, दो दिनों तक अवैध पुलिस अभिरक्षण में रखी और फिर उसे मार कर मुठभेड दिखा दिया गया। न्यायमूर्ति तमांग की आख्या कहता है कि गुजरात पुलिस ने ऐसा इसलिए किया क्योंकि कुछ अधिकारियों को मुख्यमंत्री के सामने अपना कद उंचा करना था)

http://www.pravakta.com/?p=3663  ( पढ़ें)


बस फिर क्या था कांग्रेस ने खुलकर मोदी को मौत का सौदागर व आतंकवादी इसरत जहां को मासूम निर्दोष प्रचारित करना शुरू कर दिया। कांग्रेस की वेशर्मी व गद्दारी का सबसे बढ़ा प्रमाण उस वक्त सामने आया जब ये पता चला कि ततकालीन कांग्रेस सरकार नमे खुद माननीय न्यायलय में हलफनामा देकर ये सवीकार किया था कि इसरत जहां लश्करे तैयवा की आत्मघाती आतंकवादी थी।


लेकिन कांग्रेस जानती है कि हिन्दू वेवकूफ हैं वो कहां इतनी गहराई में जाकर कांग्रेस की गद्दारी का पर्दाफास करने की कोशिस करेंगे। इसलिए मुसलिम आतंकवादियों को खुश करने के लिए आतंकवादी का साथ देना शुरू कर दिया कांग्रेस के नेतृत्व में सारे सेकुलर गिरोह ने।


ऐसा नहीं कि इससे पहले कांग्रेस ने इस आतंकवादी का साथ नहीं दिया था। 2000 में इसरत जहां के जनाजे में कांग्रेस व समाजवादी पार्टी के हजारों कार्यकर्ता सामिल हुए ते।

ततकाली महाराष्ट्र सरकार ने इस आतंकवादी के परिवार को हरजाने के नाम पर आर्थिक मदद भी की थी।

यह वही कांग्रस है जिसने 2004 में सता में आते ही आतंकवादियों से लड़ाई के दौरान शहीद होने वाले अर्धसैनिक बसों को मिलने वाली आर्थिक सहायता ये कहकर कम कर दी थी कि सरकार के पास पैसे नहीं हैं।

http://samrastamunch.spaces.live.com/Blog/cns!1552E561935CF20F!532.entry    (पढ़े) 

आज जबकि NIA के सामने मुसलिम आतंकवादी डेविड कोलमैन हेडली ये सवीकार कर चुका है इसरत जहां लश्करे तैयवा की आत्मघाती आतंकवादी थी तब आप समझ सकते हैं कि कौन सही है और कौन गलत।


क्या ये सारी बातें इस बात का प्रमाण नहीं कि इसरत जहां द्वारा मोदी को मारने की योजना की जानकारी सेकुलर गिरोह व कांग्रेस को थी ।जानकारी ही नहीं वल्कि सेकुलर गिरोह का समर्थन भी इसरत जहां को प्राप्त था।


ऐसा नहीं कि ये सेकुलर गिरोह का एकमात्र झूठ है जिका पर्दाफास हुआ है। सैंकड़ों ऐसे झूठ हैं जो सेकुलर गिरोह ने हिन्दूओं व हिन्दू संगठनों को बदनाम करने के लिए फैलाए और बाद में उन झूठों का परदाफस हुआ।


ऐसा नहीं कि अब इस गिरोह ने झूठ फैलाने वन्द कर दिए हें।


आपको याद होगा कि जब 2001 में ततकालीन गृहमन्त्री लालकृष्ण अडवानी जी ने सिमी(SIMI) को आतंकवादी संगठन घोषित किया तो समाजवादी पार्टी के नेतृत्व में कांग्रेस सहित सभी सेकुलरगिरोह के सदस्यों ने अडवानी जी को मुसलिम विरोधी करार दिया। कौन सही था कौन गलत इसका प्रमाण आगे चलकर तब मिला जब SIMI ने दर्जनों बम्मविस्फोट कर हजारों वेगुनाह हिन्दूओं का कत्ल कर लाखों को नुकसान पहुंचाया।


आपको वो भी याद होगा कि जब गोधरा में 2000 मुसलमानों की भीड़ ने ट्रेन में आग लगाकर 58 हिन्दूओं को जिन्दा जला दिया । हिन्दूओं से सहानुभूति जताना तो दूर कांग्रेस सरकार ने बैनर्जी नामक भ्रष्ट जज से झूठी रिपोर्ट तैयार करवाकर ये कहलवा दिया कि आग हिन्दूओं ने खुद लगावाई थी।


ये सब सेकुलर गद्दारों ने तब किया जब माननीय नयायालय द्वारा नानवटी आयोग के माध्यम से जांच जारी थी।अब आप खुद सोचो कि सेकुलर गिरेह किस हद तक मुसलिम आतंकवादियों का साथ देकर हिन्दूओं का नरसंहार करवाने पर तुला है।


सेकलर गिरोह द्वारा आतंकवादियों को दिए जा रहे खुले समर्थन का ही परिणाम है कि कशमीर घाटी में 60000 हिन्दूओं का कत्ल कर 500000 हिन्दूओं को वेघर कर दर-दर की ठोकरें खाने पर मजबूर कर दिया गया।


सेकुलर गिरोह के आतंकवादियों को खुले समर्थन के परिणामसवारूप ही आसाम में बंगलादेशी मुसलिम आतंकवादियों ने जड़े जमाकर हिन्दूओं को उजाड़ना सुरू कर दिया।


सेकुलर गिरोह के आतंकवादियों को खुले समर्थन के परिणास्वारूप ही हिन्दूओं का कत्ल व जबरदस्ती धर्मांतरण कर उतर-पूर्व के कई राज्यों में इसाईयों की जनसंख्या 98% तक जा पहूंची।


आतंकवादियों को खुले समर्थन के परिणास्वारूप ही आज माओवादी आतंकवादी सारे देश में कोहराम मचा रहे हें। कुल मिलाकर भारत के अधिकतर राज्य आतंकवाद प्रभावित है।


सेकुलर गिरोह का हौसला अब इतना बढ़ गया है कि उसने सीधे सेना को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। जिसका विबरण हम अपने पिछले लेखों में दे चुके हैं।


आप सब जानते हैं कि किस तरह मुसलिम आतंकवादियों द्वारा किए गए हमलों का दोष हिन्दूओं के सिर डालने के लिए लैप्टीनैंट कर्नल पुरोहित ,साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर सहित कुल 27 हिन्दूओं को विभिन्न जेलों में डालकर यातनायें दी जा रही हैं व मुसलिम आतंकवादियें की मददगार केन्द्र सरकार द्वारा हिन्दू आतंकवाद-हिन्दू आतंकवाद चिला चिलाकर हिन्दूओं को झूठे मामलों में फंसाकर देशभक्त हिन्दूओं को आतंकवादी के रूप में बदनाम करने की कोशिस की जा रही है जिसका परदाफास उस वक्त हुआ जब माननीय न्यायालय ने हिन्दूओं पर झूठे केश दर्ज कर लगवाया गया मकोका यह कहकर हटा दिया कि लगाए गए आरोप अधारहीन हैं।


कांग्रेस की वेशर्मी का एक और प्रमाण आपके सामने है कि पुणे बम्मविस्फोट के आरोपी( जो पहले भी अबैध रूप से हथियार रखने का दोशी पाया जा चुका है) को एक पखवाड़ें के अन्दर छोड़ दिया गया जबकि दूसरी तरफ माननीय न्यायलय द्वारा आरोप अधारहीन बताने के बाबजूद पिछले 2 बर्ष से हिन्दूओं को जबरदस्ती जेल में रखा गया है।


हमें उम्मीद ही नहीं पूरा विस्वास है कि वो वक्त बहुत जल्दी आएग जब जागरूक हिन्दूओं की मेहनत से बौद्धिक गुलाम हिन्दू सेकुलर गिरोह की असलियत पहचानकर जागरूक होकर सेकुलर गिरोह के मकड़जदाल में फंसे हिन्दूओं को जागरूक कर देश से आतंकवादियों व आतंकवादियों के समर्थकों का नमोनिशान मिटा देंगे।






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