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नवरात्रों के शुभ अबसर पर सब हिन्दूओं को हार्दिक शुभकामनायें…

आओ हम सब हिन्दू पूजनीय  माता जी

Internet Explorer Wallpaperको साक्षी मानकर ये प्रण करें कि आज से हम हर हिन्दू के दुख-दर्द को अपना दुख-दर्द मानकर हमसे जो भी बन सकेगा अपने हिन्दू भाई की मदद के लिए संगठित होकर करेंगे।

हम आज से जात-पात,छुआछूत,ऊंच-नीच अधारित भेदभाव को त्यागाकर समरस हिन्दू समाज के निर्माण के लिए एकजुट होकर हिन्दू संगठनों के हाथ मजबूत करेंगे।

हमारा जो भी हिन्दू भाई-बहन हिंसक मुसलमानों व आक्रमणकारी ईसाईयों द्वारा फूट डालो और राज करो के मकसद को पूरा करने के लिए फैलाई गई शुद्धी-असुद्धी की अबधारणाओं से भर्मित होकर इन विभाजनकारी अबधारणाओं पर अमल करने की कोशिस करेगा हम उस भ्रमित हिन्दू भाई को समरस हिन्दू समाज की रचना में लगाने के लिए हर सम्भव प्रयास करेंगे।

हमारा जो भी हिन्दू भाई-बहन ,भ्रमित हिन्दू भाईयों-बहनों द्वारा की गई ज्यादतियों से खुद को प्रताड़ित महसूस करेगा हम उस हिन्दू भाई-बहन को इतना मान-सम्मान-प्यार देंगे कि वो भूतकाल में की गई ज्यादतियों के बजाए बर्तमान में निभाए जा रहे भाईचारे को याद रखे।

आओ हम प्रण करें कि आज से हमारे सामने या हमारे द्वारा किसी भी हिन्दू भाई-बहन के साथ ज्यादति न हो सके।

हम अपने हिन्दू भाई-बहन को अपमानित या जानमाल का नुसान पहुंचाने के लिए विधर्मियों द्वारा किए जा रहे हमले को खुद पर हमला समझें व उन विधर्मियों को ठिकाने लगाने के लिए जो भी जरूरी हो वो कर्म करें…

राजीब गांधी कत्ल वनाम संसद भवन हमला…

बैसे तो अबदुल्ला परिबार की गद्दारी से हर देशभक्त परिचित है। लेकिन आज आतंकवादियों की फांसी को सांप्रदायिक रंग देने की जो घिनौनी हरकत इस गद्दार ने की है उसका उसी की भाषा में उतर देना जरूरी है।
सबसे पहले तो तमिलनाडु की विधान सभा की तुलना जम्मू-कशमीर की विधानसभा से करना ही गलत है क्योंकि एक तो जम्मू-कशमीर विधानसभा भारतविरोधी आतंकवादियों से भरी पड़ी है जबकि तमिलनाडु की विधानसभा में ऐसी कोई स्थिति नहीं है।
दूसरा जम्मू-कशमीर की विधानसभा में आतंकवादियों का बर्चस्व वानए रखने के लिए अबदुल्ला खानदान ने नैहरू खानदान की सहायता से जम्मू संभाग के लोगों को उनके हक से वंचित रखने के लिए जानबूझ कर जम्मू-संभाग में विधानसभा सीटों को कम रखा है । जबकि तमिलनाडु विधान सभा में ऐसी कोई गड़बड़ नहीं है।
जम्मू-कशमीर विधानसभा में बैठे आतंकवादियों ने सरकारी तन्त्र का प्रयोग कर कशमीरघाटी में हिन्दू-मिटाओ हिन्दू भगाओ अभियान चलाकर न केवल 60000 हिन्दूओं का कत्ल किया वल्कि 500000 हिन्दूओं को वेघर भी किया। मां-बहन वेटियों की इज्जत आबरू से खिलबाढ़ किया से अलग। अब आप ही बताओ कि कातिल राक्षसों से भरी पड़ी जम्मू-कशमीर विधानसभा की तुलना तमिलनाडु की विधानसभा से कैसे की जा सकती है?
राजीब गांधी पर हमला करने वालों की तुलना लोकतन्त्र के मन्दिर पर हमला करने वाले भारतविरोधी आतंकवादी से करना किसी भी तरह से जायज नहीं ठहराया जा सकता।
राजीब गांधी का कत्ल किसने किया ये अभी पूरी तरह सपष्ट नहीं है क्योंकि  एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी ने पहले राजीब गांधी के कत्ल का आरोप DMK पर लगाकर सरकार केन्द्र सरकार गिरा दी बाद 2004 में इसी एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी ने इसी DMK के साथ मिलकर सरकार बना ली।
जिस क्वात्रोची पर चर्च के इसारे पर वालासिंघम के माध्यम से LTTE प्रमुख प्रभाकरण को राजीब गांधी के कत्ल की सुपारी देने के आरोप लगे वही क्वात्रोची आज भी एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी का परिबारिक मित्र है जिसके लिए एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो कुछ भी कर गुजरने के लिए तैयार है।
अब जिन लोगों को फांसी की सजा सुनबाई गई उनमें से एक की सजा खुद एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो माफ कर चुकी तो स्वभाविक रूप से वाकी मुरूगन,स्नाथन व पेरारीवालन भी माफी की उमीद तो कर ही सकते हैं।
दूसरी तरफ मोहम्द अफजल खुद चीख-चीख कर कह रहा है कि कशमीरघाटी को काफिरों वोले तो हिन्दूओं से मुक्त करवाने के लिए उसने लोकतन्त्र के मन्दिर पर हमला किया। इतना ही नहीं उसके समर्थक मुसलिम आतंकवादी लगातार भारत को लहूलुहान करने की धमकियां दे रहे हैं जिनमें उमर-अबदुल्ला व गुलामनबी आजाद भी सामिल हैं। अगर इस राक्षस को फांसी नहीं दी जाती है तो इन आतंकवादियों के हौसले और बुलंद होंगे परिमास्वारूप भारत पर इनके हमले बढ जायेंगे।
हां एक बात जरूर है कि ये हमला अकेले मोहम्द अफजल ने नहीं किया था इसके साथ कुछ और लोग भी थे जैसे कि आतंकवादी  प्रोफैसर जिलानी व उसके अन्य भारतविरोधी आतंकवादी साथी। आतंकवादी प्रोफैसर जिलानी जैसे गद्दारों को कुलदीप नैयर जैसे पत्रकारों ने क्यों बचाया(कहीं ISI ऐजेन्ट मुहम्द फाई के आदेश पर तो नहीं) इन प्रश्नों का उतर भी देश की जनता को जानने का पूरा हक है।
मोहम्द अफजल के हमले में सुरक्षावलों के जवान मारे गय जबकि दूसरे हमले में एक नेता व उसके कुछ प्रशंसक मारे गय। दोनों में बहुत फर्क है ये नेता भारत पर भारतविरोधी कांग्रेस वोले तो  नैहरू खानदान का शासन बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रहा था जबकि सुरक्षावलों के जवान देश की अस्मिता की रक्षा के लिए संघर्ष करते हुए मारे गय।
ऐसा नहीं कि उमर अबदुल्ला पहली बार गद्दारी कर रहा है इससे पहले भी ये आतंकवादी सैनिकों पर हमला करने वाले अपने साथी 1200 मुसलिम आतंकवादियों पर से केश वापिस लेकर उन्हें सैनिकों पर हमला करने खुली छूट दे चुका है। हमला करते वक्त सैनिकों के हाथों मारे जाने पर अपने इन आतंकवादी साथियों का हौसला बानाए रखने के लिए पांच-पांच लाख रूपए की आर्थिक सहायता भी दे चुका है।
इतना ही नहीं ये आतंकवादी केन्द्र सरकार में बैठे अपने आतंकवादी मददगारों की सहायता से सैनिकों पर तरह-तरह के प्रतिबन्ध लगवाने में भी समर्थ रहा है।
अब आप खुद फैसला करो कि जिस राज्य का मुख्यमन्त्री गद्दार उमर अबदुल्ला जैसा आतंकवादी हो क्या वहां कभी शांति हो सकती है ?

वेनकाब होती धर्मनिरपेक्षता !

वेनकाब होती धर्मनिरपेक्षता !

हम गांव में रहने वाले आम जिन्दगी जीने वाले लोग है राजनिती हमारे लिए एक अनजान पहेली है राजनिती करना हमारे बजट में आने बाला विषय नहीं हैं । यहां तक मिडीया तक अपनी बात पहुंचाना भी हमारे बस में नहीं । अच्छा क्या है बुरा क्या है सायद इसकी भी समझ हमें नहीं लेकिन गणित का विद्यार्थी होने के नाते  एक बात जो हम समझ सकते हैं बो है लाभ-हानि।

आज 62 वर्ष के अनुभव के बाद हम कह सकते हैं कि 1947 में भारत के पहले प्रधानमंत्री नहरू ने जो दिशा विभाजित भारत के इस हिस्से यानि INDIA को दी वो भारत के लिए किसी भी तरह से लाभदायक नहीं है । नहरू जी ने नारा दिया न जात पर न पात पर मोहर लगेगी हाथ पर , परन्तु सारे भारत को एक एसा नासूर दे गए जिसने आज भारत को जाति ,साम्प्रदाय, भाषा ,क्षेत्र के आधार पर तार-तार कर बरबादी के मुहाने पर ला खड़ा किया है आज देश में कानून भारतीय के लिए न होकर जाति ,समप्रदाय,भाषा ,क्षेत्र के आधार पर हैं परिणामस्वरूप लोग इन्हीं अधारों पर संगठित होकर एक दूसरे का गला काटने पर उतारू हैं। नैहरू खानदान के लोग अपने स्वार्थों की पूरती के लिए अपने संरक्षण में कभी भिंडरावाला पैदा करते हैं तो कभी राज ठाकरे ।

जब से हमने जन्म लिया है तब से हम एक ही नारा सुन रहे हैं वो नारा है धर्मनिर्पेक्षता का ।लेकिन जब हम अपने आप को धर्मनिर्पेक्ष कहने बाले दलों की नितियों  पर ध्यान देते हैं तो पता चलता है कि इन सब की नितियों का एक ही आधार है वो है फूट डालो और राज करो । ये खुद को धर्मनिर्पेक्ष कहने वाले लोग एक वात जिस पर पूरी तरह से सहमत दिखते हैं वो है हिन्दुविरोध यानि भारतीय-सभयता और संस्कृति का समूल नाश।

पहले तो हमें ये शक था कि ये धर्मनिर्पेक्षता के ठेकेदार सिर्फ भाजपा का विरोध करने के लिए या उसे सता से बाहर रखने के लिए मुसलिम आतंकवादियों को वेचारा गुमराह नौजवान कहकर व धर्मांतरण के दलालों को सेवा के मसीहे प्रचारित कर अपना उल्लू सीधा करते हैं । लेकिन मुंम्बइ पर हुए हमलों से पहले ये लगभग सपष्ट हो चुका था कि ये धर्मनिरपेक्षतावादी पूरी तरह से जिहादीयों व धर्मांतरण के दलालों के साथ हैं व इन जिहादियों का साथ देने के लिए ये किसी भी हद तक जा सकते हैं।क्योंकि इन धर्मनिरपेक्षतावादियों का एकमात्र सांझा एजंडा है हिन्दुत्व यानि भारतीय सभयता और संस्कृति का नाश ।

देश में जब कभी भी आतंकवादियों को कड़ी से कड़ी सजा देकर भारतीयों के जान माल की रक्षा करने की वात चली तो इन धर्मनिर्पेक्षताबादियों ने समाचार चैनलों पर चिल्ला-चिल्ला कर इन मुसलिम आतंकवादियों नक्सलियों माओवादियों का वचाव किया।

आज अगर हम गहराइ से विशलेषण करें तो पायेंगे कि आज तक देश में हुए हर आतंकवादी हमले के पीछे किसी न किसी धर्मनिर्पेक्षतावादी का हाथ जरूर है।

·        1947 के वाद के भारत में सबसे बड़ा हमला1993 में बाम्बे(मुम्बइ) स्टाक एकसचेंज पर हुआ। जिसमें तत्कालीन भारत के सबसे बड़े धर्मनिरपेक्षतावादी( इमानदार साफ-सुथरी छवी ) सुनील दत्त के परिबार का हाथ पाया गया। बाद में ये सिद्ध भी हो गया कि इस हमले में जो विस्फोटक प्रयोग किया गया वो सारे का सारा विस्फोटक इसी धर्मनिर्पेक्षतावादी सुनील दत्त के घर में रखा गया था । सिर्फ विस्फोटक ही नहीं रखा गया था बल्कि धर्मनिर्पेक्ष महौल में पला बढ़ा सुनील दत्त का वेटा संजय दत्त इस विस्फोटक के रख रखाव में तन-मन-धन से सहायता कर रहा था ताकि ज्यादा से ज्यादा भारतीयों बोले तो हिन्दुओं का खून बहाया जा सके । वात यहीं तक रहती तो गनीमत थी वाद में धर्मनिर्पेक्ष कांग्रेसियों ने इस जिहादी आतंकवादी संजय दत्त को बचाने के लिए जी भर कर धन-बल का प्रयोग किया आज परिणाम यह है कि ये धर्मनिर्पेक्ष आतंकवादी संजय दत्त राममन्दिर अंदोलन के दौरान हजारों हिन्दूओं का खून बहाने बाले मौलाना मुलायम सिंह यादब के आति धर्मनिर्पेक्ष दल समाजवादी पार्टी का अग्रणी नेता है। हो भी क्यों न दोनों हिन्दूओं के खून के प्यासे जो ठहरे।

·        1947 के वाद के भारत के इतिहास का दूसरा सबसे बड़ा हमला सांसद भवन पर हुआ जिसका नेतृत्व देश की सबसे बड़ी सेकुलर युनिवरसिटी ज्वाहर लाल नहरू युनीवरसीटी के धर्मनिर्पेक्ष प्रोफैसर ने किया । पुलिस द्वारा इस गद्दार को पकड़ लिए जाने के वाद इसके बचाब में आगे आया इससे भी बड़ा धर्मनिरपेक्षता वादी पत्रकार कुलदीप नैयर व अन्य धर्मनिरपेक्ष प्रोफैसर व पत्रकार ।इन सब ने अपने इस धर्मनिर्पेक्ष जिहादी आतंकवादी को बचाने के लिए हस्ताक्षर अभियान चलाया और कामयावी प्राप्त की। ये इन धर्मनिरपेक्षतावादियों की ही ताकत है जिसके सामने माननीय सर्वोच न्यायालय भी लाचार है ।

·        1947 के वाद के भारत के इतिहास का तीसरा सबसे बड़ा हमला हुआ मुम्बइ पर ।इस हमले में मुसलिम आतंकवादियों का वचाव करने के लिए सबसे पहले धर्मनिरपेक्षता की जन्मदाता कांग्रेस का अति धर्मनिर्पेक्ष ब्यक्ति अबदुल रहमान अन्तुले ये कहते हुए आगे आया कि ये हमला मुसलमानों ने नहीं बल्कि हिन्दुओं ने किया था। जो मांगे इन जिहादी आतंकवादियों ने इंडिया टीवी पर रखीं वो सब की सब वही थीं जो ये धर्मनिर्पेक्षतावादी अक्सर उठाते हैं। हमे तो उनकी बातों से ही समझ आ गया था कि ये धर्मनिर्पेक्ष आतंकवादी हैं।अब धीरे-धीरे पता चल रहा है कि फिल्म इंडस्ट्री के सबसे बड़े धर्मनिर्पेक्षतावादी महेश भट का परिवार इस हमले मे सामिल था। धर्मनिर्पेक्ष महौल मैं पला बड़ा महेशभट्ट का वेटा राहुल भट इन आतंकवादियों में से एक था।

अब आप सोचो कि हम क्यों न कहें कि ये सबके सब धर्मनिर्पेक्षताबादी हिन्दुविरोधी हैं आतंकवादी हैं गद्दार हैं । कहो न ये धर्मनिरेपेक्षतावादी नहीं आतंकवादी हैं गद्दार है हिन्दुविरोधी हैं।

अरे हिन्दूओ अब तो जागो और जगाओ— बौद्धिक गुलाम हिन्दुओं को जगाओ मेरे बलाग पर आओ अपने विचार देकर इस गद्दार मिटाओ अभियान को आगे बढ़ाओ …..

 

वन्देमातरम् का विरोध देशद्रोह नहीं तो और क्या है ?

 

वन्देमातरम् का विरोध देशद्रोह नहीं तो और क्या है ?

 
जब हमने सुना कि स्वामीरामदेव जी देववन्द में जा रहे हैं तो लगा कि मुसलिम जिहादी आतंकवादियों की जन्मदाता जमात की सोच में बदलाब आ रहा है
लेकिन इस यात्रा के आस-पास जो कुछ घटा उस सबने हमारे जैसे अति आशाबादी करोड़ो लोगों को इस सच्चाई का सामना करबा दिया कि मुसलमानों का एक
बड़ा बर्ग 1947 में भी गद्दार था आज भी गद्दार है और तब तक गद्दार रहेगा जब तक इन गद्दारों का हिन्दूक्रांति के माध्यम से दिमाग ठीक नहीं कर दिया
जाता । आप सोच रहे होंगे कि क्या बजह है कि ये गिने-चुने गद्दार बार-बार भारत के मान-सम्मान को मलियामेट करते हैं बेगुनाह भारतीयों का खून बहाते हैं
देश का विभाजन करबाते हैं फिर भी जिन्दा बच जाते हैं । इसकी सबसे बड़ी बजह यह है कि इन मुसलिम जिहादी आतंकवादियों के समर्थक व पोषक बाद्धिक-
गुलाम हिन्दु 1947 में भी सता मे थे आज भी सता में हैं और तब तक सता में रहेंगे जब तक इन बोद्धिक गुलाम हिन्दुओं की बुद्धि को ठीक नहीं कर दिया
जाता ।अब प्रश्न यह उठता है कि इन गद्दारों की बुद्धि को ठीक कौन करेगा और कैसे करेगा । हमारे विचार में इन गद्दारो को ठीक करने के लिए हमें उन गिने
–चुने नेताओं,पत्रकारों व बुद्धिजीवियों को गोली से उड़ाना होगा जो हर वक्त देश की निर्दोश जनता का खून बहाने बाले मुसलिमजिहादी आतंकवादियों- बामपंथी
नकस्लियों माओवादियों के अनुकूल महौल वनाकर उनके द्वारा किए गए हर कत्लयाम को जायज ठहराकर मासूम मुस्लिम बच्चों व दलितों और आदिवसियों को
कत्लोगारद की अंधेरी दुनिया मे धकेल देते हैं । अब प्रश्न उठता है कि गोली मारेगा कौन । देखो ये गौर करने का सबसे महतवपूर्ण विन्दु है इसका सीधा सा
उतर है कि जितने भी लोग आज देशभक्त होने का दावा कर रहे हैं देश के लिए मरमिटने की कशमें उठा रहे हैं,लेख लिख रहे हैं, भाषण दे रहे हैं उन सबको
अपना मुंह बन्द कर एक दूसरे के साथ सम्पर्क कर संगठित होकर योजना बनाकर इस काम को अन्जाम देना चाहिए।अब आप सोचेंगे कि हथियार कहां से
आयेंगे । देश में जब इन गद्दार आतंकवादियों को भारत के शत्रु देशों व लोगों से हथियार मिल सकते हैं तो क्या ये मुमकिन है कि देशभक्तों को भारत के मित्र
लोगों व देशों से हथियार न मिलें ।बैसे भी इन गद्दारों को खत्म करना सुरक्षाबलों का काम है जब गद्दार नेता व बुद्धिजीवी सुरक्षबलों को इन गद्दारों का खात्मा
करने से रोक रहे है तो सुरक्षबलों को खुद देशभक्त लोगों व संगठनों से सम्पर्क कर उनकी इस पवित्र कार्य में सहायता करनी चाहिए।
कोइ भी विवेकशील ब्यक्ति हमें ये सुभाब देगा कि कानून को अपने हाथ में नहीं लेना चाहिए व कानून को अपना काम करने देना चाहिए । बस यहीं पर समस्या पैदा होती है ये गद्दार कानून को ही तो अपना काम नहीं करने दे रहे ।क्या अफजल को फांसी हमने सुनाई थी नहीं न माननीय सर्वोच न्यायालय ने आदेश दिया था कि अफजल को 19 नम्मवर 2006 को फांसी पर चढ़ा देना चाहिए ।आज 19 नम्मवर 2009 आने वाला है क्या कानून को अपना काम करने दिया गया । नहीं न
अब आप सोचो कि जिस स्थान पर वन्देमातरम् का विरोध कर देश की सम्प्रभुता को ललकारा जा रहा हो क्या उस स्थान पर देश के कानून के प्रतिनिधि को सुरक्षबल भेजकर गद्दारों को गोली से उड़ाकर या कानून के अनुसार जो भी सजा बनती हो वो सजा देनी चाहिए या नहीं सबका जबाब होगा हां कानून के अनुसार जो भी सजा बनती है वो देनी चाहिए  । लेकिन यहां तो देश का गृहमन्त्री अपने आप जाकर गद्दारों का हौसला बढ़ाता  बेचारा कानून क्या करेगा ।
अब वक्त आ गया है कि हम सच का सामना करें और देशभक्त और देशभक्तों के समर्थकों व गद्दारों और गद्दारों को समर्थकों को पहचान कर अपने आप को देशभक्तों को चुनकर उनके साथ आगे बढ़े और हिजड़े बनकर तमासा न देखें ,कानून,दया,मानबता  का बहाना बनाकर अपनी बुजदिली को तर्क देकर छुपाने की कोशिश न करें ।
सच मे हम स्वामी रामदेव जी के हैसले की दाद देते हैं कि उन्होंने गद्दारों के वीच जाकर भी देशभक्ति से ओतप्रोत भाषण दिया पर दुख होता है कि भारत मात की जय या वन्देमातरम् कहने का हौसला वो भी न जुटा सके वैसे भी जिन गद्दारों के साथ भारत विरोधी भारत सरकार खड़ी हो उन गद्दारों के सामने भारत माता की जय या वन्देमातरम वोलने का मतलव है गद्दारों की सरकार से पंगा लेना ।

गोआ में मडगांव के बहाने हिन्दुविरोधी-भारतविरोधी मिडीया ईसाई मिसनरी एंटोनियो की गुलाम सरकार का देशभक्त हिन्दूओं पर एक और हमला

मेरे प्यारे हिन्दूओ आपको जरूर याद होगा कि किस तरह ईसाई मिसनरी एंटोनियो माइनो मारियो के इसारे पर लैफ्टीनैंट कर्नल पुरोहित जैसे देशभक्त सैनिक व साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर जैसे क्रंतिकारियों को झूठे मामलों में फंसाकर उन पर मकोका लगा दिया गया जिसे माननीय मकोका न्यायलय ने वाद में मनघड़ंत(झूठा) पाकर खारिज कर दिया गया ।

आपको यह भी याद होगा कि किस तरह एंटोनियो माइनो मारियो के इसारे पर तत्कालीन कानून मंत्री हंसराजभारद्वाज को एंटोनियो माइनो मारियो के हमबतन-हमराज व पार्टनर क्वात्रोची के लंदन बैंक में जब्त बोफोर्स-दलालीकांड की रकम को छुड़बाने के लिए लंदन भेजा गया और रातों-रात सारी रकम निकलवा ली गई। जब मानीय नयायलय ने उस रकम को जब्त रखने के आदेश दिए तब तक सारा काम निपट चुका था।

आपको यह भी जरूर ध्यान में होगा कि अभी हाल ही में एंटोनियो की गुलाम मनमोहन सरकार ने किस तरह बोफोर्स दलाली कांड में एंटोनियो माइनो मारियो के सह अभियुक्त क्वात्रोची को सब मुकदमों से मुक्त करने की अंतिम सफल कोशिश की । माननीय न्यायलया में कोइ अड़चन न आये इसके लिए एक अभियुक्त के सहयोगी को सरकारी बकील नियुक्त करबा दिया । क्या इससे बढ़ी बेशर्म और गद्दार सरकार आपने कभी देखी है । 

आपको जरूर यह भी याद होगा कि माननीय सर्वोच न्यायालय ने जिहादी आतंकवादी मुहम्मद अफजल को 19 नमम्वर 2006 को फांसी तय की थी जिसे गद्दारों की समर्थक ये हिन्दुविरोधी सरकार आज तक लटकाय हुए है। यह वही सरकार है जिसने हैदराबाद बम्मविस्फोटों के दोसियों को जेल से रिहा कर एक-एक आटोरिक्सा दिया ।

·        आज यही हिन्दुविरोधी-भारतविरोधी मुसलिम आतंकवादियों व ईसाई दलालों की समर्थक सरकार सरारती तत्वों द्वारा किए गए बम्मविस्फोटों मे मारे गए निर्दोष शांतिप्रिय देशभक्त धार्मिक संस्था के सदस्यों के परिबारजनों  को संतावना देने के बजाए उन मारे गए देशभक्तों के विरद्ध ही आरोप पर आरोप लगाय जा रही है।(for more information visit Hindu Jaguriti Samiti) आपको याद होगा कि यह वही गद्दारों की सरकार है जिसने मुसलिमजिहादी आतंकवादी इसरत जहां के मरने पर मुआबजा दिया था और देशभक्तों के मरने पर देशद्रोह का केश दर्ज कर दिया उस मुसलिम जिहादी आतंकवादी को निर्दोस सिद्ध करने के लिए ये गद्दार आज भी प्रयत्न कर रहे हैं ।

·        मुम्बइ में इस गद्दारों की सरकार ने जिन मुसलिम जिहादीयों को बचाने के लिए हिन्दूक्रंतिकारियों पर झूठे आरेप लगाये और इन आरोपों को आगे बढ़ाने के लिए जिस अधिकारी का उपयोग किया कुदरत का न्याय देखो वो अधिकारी उन्हीं मुसलिम जिहादी आतंकवादियों के हाथों मारा गया ।तब भी इस गद्दार मिडीया व राजनितिक दलों के घर-कुदालों ने उस हमले में हिन्दुओं को फंसाने का भरपूर प्रयास किया।

·        कहते हैं जिसका कोई नहीं उसका भगवान होता है आज देशभक्त हिन्दु लगभग लावारिस व अनाथ सा जीबन जीने को मजबूर हैं । इन हालात में हम भगबान से यही प्रर्थना कर सकते हैं कि जिस तरह उसने आज तक धर्म-रक्षकों का साथ दिया है आगे भी अपना आशीर्बाद धर्मरक्षक देशभक्तों पर बनाए रखे ताकि हम इन गद्दारों के षडयन्त्रों को असफल कर अपनी प्यारी भारतमाता को इन गद्दारों से मुक्त करवा सकें। पर गीता में कहा गया है कर्म प्रधान है आओ मेरे प्यारे जागरूक हिन्दुओ खुद सक्रिए हो जाओ व बौद्धिक गुलाम हिन्दुओं को जगाकर इस हिन्दूक्रति का निर्णायक शूत्रपात करो ….. जागो हिन्दू जागो .

भारत पर मंडराते खतरे और जनता को बांटती भारत विरोधी भारत सरकार

आज एक बात जो सपष्ट दिख रही है बो है भारत पर मंडराता चीनी खतरा । मजे की बात यह है कि जब चीन लगातार भारत के अन्दरूनी मामलों में हस्तक्षेप कर भारत पर हमला करने के सपष्ट संकेत दे रहा है उस बक्त भी भारत की भारत-विरोधी हिन्दु-विरोधी सरकार सुकक्षाबलों में सिर्फ मुसलमानों की भरती करने की घोषणा कर देश की जनता को हिन्दू-मुसलिम के नाम पर बांटने की कोशिश कर रही है।

सोचने बाला विषय यह है कि जो चीन एक बक्त भारत के लगभग बराबर की ही ताकत रखता था बो आज भारत से इतन ज्यादा शक्तिशाली कैसे दिखता है कमोवेश हालात इतने खतरनाक हो गए हैं कि अमेरिका भी चीन के डर से दलाइलामा से बात करने से मना कर देता है।

हमारे विचार में चीन के आगे बढ़ने का सबसे बढ़ा कारण है वहां का स्वाभिमानी देशभक्त नेतृत्व और भारत के पिछड़ने का सबसे बढ़ा कारण है भारत का बौद्धिक गुलाम हिन्दुविरोधी देशविरोधी नेतृत्व।

चीन के आगे बढ़ने का दूसरा सबसे बढ़ा कारण है वहां पर लोकतन्त्र का न होना क्योंकि यही लोकतन्त्र है जिसकी बजह से आज भारत की सारी जनता को सांप्रदाय,क्षेत्र,भाषा,जाति के आधार पर बांटकर इन गद्दार नेताओं ने एसे हालात पैदा कर दिए कि आज देश के प्रधानमन्त्री और राष्ट्रपति तक एक विदेशी औरत एंटोनियो माइनो मारियो के गुलाम हैं । जिसका सारा ध्यान इसबक्त अपने हमबतन हमराज बोफोर्षदलाली कांड के शूत्रधार क्वात्रोची को मुक्तकरवाकर अपना हिस्सा प्राप्त करना है।

कोइ भी देश सिर्फ अर्थ और सेना के बल पर ताकतबर नहीं बनता ।देश की सबसे बढ़ी ताकत होती है उसकी सांस्कृतिक एकता । भारत के इन मंदबुद्धि नेताओं ने भारत के लोगों को धर्मनिरपेक्षता के बहाने इस सांस्कृतिक  धरोहर से अलग-थलग करने का सबसे बढ़ा हिन्दुविरोधी –देशविरोधी षडयनत्र किया जिसके परिणाम स्वरूप देश में एक एसा बुद्धिजीवी(परजिवी) बर्ग त्यार हुआ जिसने इसाइ दलालों व मुसलिम जिहादी आतंकवादियों के पैसे के बल पर देश में एक एसा मिडीया नैटबर्क त्यार किया जिसका एकमात्र लक्ष्य सांस्कृतिक राष्ट्रबाद के ध्वजबाहक देशभक्त हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों को बदनाम कर राष्ट्रबाद की ज्वाला को निरूत्साहित व समाप्त करना है।

इस देशविरोधी मिडीया की बजह से ही आज देशभक्ति की ज्वाला की जगह नशैड़ीप्रवृति, बैस्यवृति और ब्याभिचार की लत देश की युबा पीढ़ी को जकड़ती जा रही है ।

 ये तो भला हो देश के सैंकड़ों छोटे-बड़े हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों का जिन्होंने आर एस एस के नेतृत्व में विपरीत परिस्थितियों में भी सांस्कृतिक राष्ट्रबाद की ज्वाला को जगाय रखा । जिसके परिणामस्वारूप स्वामी रामदेब जी के नेतृत्व में एक एसी क्रांति का शूत्रपात जो चुका है जो देश के अन्दर और बाहर के शत्रुओं का समूलनाश करने पर ही शांत होगी।

जागो हिन्दू जागो

 

वाइ एस राज सेखर रेडी की मौत पर कांग्रेसियों व इसाई मिसनरीयों की संयुक्त नौटंकी ।

·        मेरे प्यारे हिन्दू भाइयो हमने अपनी पुस्तक नकली धर्मनिरपेक्षता में आपको मुसलिम आतंकवादियों,इसाईत के दलालों व गद्दार मिडीया के हिन्दूविरोधी-

देसविरोधी खतरों के बारे में जागरूक करने का निष्पक्ष प्रयास किया । उसी कड़ी में एक और प्रमाण हमारे हाथ लगा है।

·         हमने आपको बताया था कि किस तरह से एंटोनियो माइनो मारियो उर्फ सोनिया गांधी ने नाम बदल कर भेष बदल कर देश की हिन्दू जनता को

मूर्ख बनाया। इस विदेशी ने कांग्रेस पर अपनी पकड़ मजबूत बनाने के लिए चुन-चुन कर जनाधार बाले हिन्दू नेताओं को ठिकाने लगाकर इसाइयों को आगे

बढ़ाया । इसी के परिणामस्वरूप 90 प्रतिसत हिन्दू जनसंख्या बाले राज्य आंध्रप्रदेश में एक इसाइ वाइ एस रेडी को मुख्यामंत्री बनाया गया। जब ये बात

मैंने अपनी पुस्तक में लिखी तो 90 प्रतिसत हिन्दूओं ने हमें ये समझाने का प्रयास किया कि रेडी ईसाई नहीं है । हिन्दु के अज्ञान को देखकर आपको

समझ आ जाना चाहिए कि भारत बार-बार गुलाम क्यों होता है। जिस दिन रेडी के गुम होने का समाचार आया हमने बड़ी राहत की सांस ली कि एक

राज्य इसाइयों से आजाद हो गया ।  लेकिन मौत का समाचार आने के बाद ये देख कर बहुत दुख हुआ कि इसाई दलालों के हाथों बिके हुए हिन्दू नेता भी

एक इसाई को फिर मुख्यामंत्री बनाने के लिए इसाइ मिसनरियों का साथ दे रहे थे व रेडी की मौत के सदमें में लोगो के मरने का भूठा समाचार फैला रहे

थे व रेडी का बेटा इन झूठे समाचारों को सच साबित करने के लिए लोगों से न मरने की अपील करने की नौटंकी कर रहा था।  

·        इसाइयों का जाल कितना फैल चुका है यह इसी बात से साबित हो जाता है कि देश में रेडी की मौत पर लगभग हर अखबार से लेकर समाचार चैनल

तक इसाइ दलालों से पैसे खाकर इस नौटंकी का प्रचार-प्रसार करने में एड़ी-चोटी का जोर तगाए हुए थे। ये तो भला हो लाला जी द्वारा अपने देसभक्तलहू से

स्थापित पंजाबकेसरी का जिसने दलाली व चापलूसी के इस दौर मैं भी 17-09-09 के अंक मे इस सच्चाई को उजागर करने का साहस दिखाया ।  हमें तो

इस बात की पहले से ही जानकारी थी पर हमारी सच्ची-पक्की बात पर भरोसा करता कौन है ।

·        सायद आप सोच रहे होंगे कि क्योंकि रेडी ईसाई था इसलिए हम उसका विरोध कर रहे हैं हमारा विरोध रेडी की पूजा पद्दती से न होकर उसके फूट

 

डालो राज करो की नितियों से था ,है और रहेगा। ये वही ब्यक्ति था जिसने संविधान और माननीय सर्बोच न्यायालय के विरूद्ध जाकर धर्म के आधार पर

आरक्षण की 1947 से पहले की निति का भारत विभाजन के बाद पहली बार अंगीकार कर मुसलमानो को आरक्षण दिया। मुसलिम आतंकवादियों को

छोड़कर उनका हौसला बछडाने के लिए एक-एक आटो रिक्सा दिया ताकि नये-नये मुसलिम जिहादी इन आतंकवादियों से प्रेरणा पाकर हिन्दूओं का लहू

बहाते रहें…

·        जागो हिन्दू जागो   घर में आग लगने पर कुआं खोदने पर क्या फायदा !

 

 

 

इसरतजहां के मामले ने एंटोनियो माइनो मारियो की गुलाम कांग्रेस की गद्दारी को एकबार फिर उजागर कर दिया

पिछले कुछ दिनों से कांग्रेस जिस तरह मैजिसट्रेट की मनघड़ंत रिपोर्ट के सहारे मुसलिम जिहादी आतंकवादियों के बचाब के लिए संघर्षरत है इससे एकबार फिर कांग्रेस का हिन्दूविरोधी-देशविरोधी चरित्र जगजाहिर हो गया है। कौन नहीं जानता कि मुसलिम जिहादी आतंकवादी इसरतजहां के मरने पर महांराष्ट्र की कांग्रेस सरकार ने लाखों रुपये का पैकेज इसरतजहां के परिबार को दिया था व लाखों कांग्रेसियों व समाजवादियों ने इस मुसलिम जिहादी आतंकवादी के जनाजे में हिस्सा लिया था । जो गद्दार कांग्रेसी इसरतजहां को निर्दोष बता रहे हैं व गुजरात सरकार को आदमखोर उन सैतान की औलादों को यह जानकारी होनी चाहिए कि खुद केन्द्र सरकार व महांराष्ट्र ए टी एस ये सवीकार कर चुकी है कि इसरतजहां व उसके साथी आतंकवादी थे। जिस तरह से सचाइ सामने लाने बाले कानून विभाग के अधिकारी को हटाया गया है उससे तो यही सिद्ध होता है कि बरतमान सरकार गद्दारों की सरकार है व गद्दारों को बचाने के लिए किसी भी हद तक गिर सकती है।यही अपनी पुसतक नकली धर्मनिरपेक्षता का भी सार है। जागो मेरे प्यारे हिन्दूओ जागो और महाराष्ट्र से गद्दारों की हिन्दुविरोधी-देशविरोधी सरकार को उखाड़ फैंको।

देशविरोधी-हिन्दूविरोधी सरकार के हिन्दूविरोधी षडयन्त्र का माननीय न्यायलय ने पर्दाफास कर दिया

आज माननीय मकोका कोर्ट द्वारा हिन्दुक्रांतिकारियों पर से मकोका हटा दिया गया।हमने अपनी पुस्तक नकली धर्मनिर्पेक्षता में पहले ही सपष्ट कर दिया था कि लैफ्टीनैंट कर्नल पुरोहित जैसे देशभक्तों पर आरोप देशविरोधी-हिन्दूविरोधी सरकार ने जेहादी आतंकवादियों के इसारे पर हिन्दूओं को बदनाम करने व मुसलिम आतंकवादियों से देशभक्त जनता का ध्यान हटाने के लिए लगाए(जिसके परिणाम स्वरूप जिहदियों ने मुम्बई पर हमला किया ) थे। जब सरकार के पास इन आरोपों को सिद्ध करने के कोई प्रमाण नहीं थे तो इन हिन्दूओं पर मनघड़ंत केस दर्ज किए गए।इन मनघड़ंत आरोपों को आधार बनाकर इन निर्दोष हिन्दुओं को अपराधी सिद्ध करने के लिए व लम्बे समय तक इनकी जमानत न होने देने के लिए इन पर मकोका लगा दिया गया।आज माननीय न्यायालय के फैसले ने सरकार की गद्दारी का पर्दाफाश कर दिया।आपको ध्यान रखना चाहिए कि वलूचिस्तान पर सरकार का ब्यान इस हिन्दूविरोधी-देशविरोधी सरकार की गद्दारी का ताजा उदाहरण है।यह वही सरकार है जो मर्यादा पुर्षोत्तम भगवान श्रीराम को मानने से इनकार करती है ,साधुसन्तों को जेल में डालती है और पोप के मरने पर तीन दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा करती है।ऐसा नहीं है कि इस देशविरोधी-हिन्दूविरोधी सरकार के हिन्दूविरोधी कदम यहीं पर समाप्त हो जाते हैं ।न ही ऐसा है कि ये सरकार माननीय न्यायलय के इस फैसले के बाद इन हिन्दूओं को फंसाने के लिए कोई और षड़यन्त्र नहीं करेगी पर इतना जरूर है कि इस फैसले से सरकार की हिन्दूविरोधी मानसिकता का स्पष्ट प्रमाण मिल गया।
जागो मेरे प्यारे बोद्धिक गुलाम घर-कुदाल हिन्दुओ जोगो बरना सब नष्ट हो जायगा……….
 
 

भारत विरोधी सरकार के भारत विरोधी कदम

एंटोनियो माइनो मारियो के गुलाम प्रधानमंत्री द्वारा पाकिस्तान व अमेरिका के सामने भारत के हितों का समर्पण भारतविरोधी-हिन्दुविरोधी सरकार की गद्दारी का ताजा उधाहरण है। कौन देशभक्त इस निराधार आरोप को स्वीकार कर सकता है कि पाकिस्तान के बलूचीस्तान के तालिबानों की सहायता भारत कर रहा है ? कौन देशभक्त पाक परियोजित आतंकवादी हमलों के बाबजूद पाकिस्तान के साथ बार्ता करना चाहेगा ? कौन देशभक्त देश की रक्षा के लिए एसे हथियार खरीदेगा जिनपर नियंत्रण किसी विदेशी का हो। ये सब बो ही कर सकता है जो खुद किसी विदेशी का गुलाम हो व जिसके आका की बफादारी भारत के प्रति न होकर विदेशों के प्रति हो । सोचो बौद्धिक गुलाम हिन्दुओ कि इस भारतविरोधी-हिन्दुविरोधी सरकार को दोबारा चुनकर आपने देश का कितना बड़ा अहित कर दिया?
जागो हिन्दू जागो
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